Garam Maa Ki Chudai XXX
हाय दोस्तों, मेरी जिंदगी की एक और दास्तां आप को लिख रहा हूँ। मॉम के साथ सेक्स होने के बाद हम खुल चुके थे। जब भी डैड बाहर जाते तो हम सेक्स का मजा ले लेते थे। इस बार डैड का टूर लंबा था, उन्हें १० दिनों के लिए बाहर जाना पड़ा। तो मैंने सोचा इस बार तो बहुत मजा आएगा। मैं बहुत खुश हो रहा था। Garam Maa Ki Chudai XXX
फिर मैंने सोचा देखें मॉम की क्या इच्छा रहती है। और मैंने कभी भी पहल नहीं की। मॉम भी इस इंतजार में थी कि मैं पहल करूँ। इस तरह ५-६ दिन निकल गए। अब तो मॉम भी सेक्स के लिए बेचैन थी। मैं उन्हें उतावला नहीं दिखा रहा था। उस दिन जब मैं शाम को घर लौटा तो मॉम के चल-ढाल से लगा कि वो आज सेक्स के लिए उतावली हो रखी है।
गुलाबी साड़ी और हल्के ब्लाउज में उसका बदन और ज्यादा खिल रहा था। ब्लाउज के गले में से उसकी चुचियों का काफी भाग झाँकता हुआ मुझे साफ दिख रहा था। चुचियाँ भींचने को मेरा भी दिल मचलता जा रहा था। खाना परोसने के समय उसका साड़ी वाला पल्लू गिर रहा था और बूब्स के दर्शन हो रहे थे।
खाना खाने के बाद वो बाथरूम में फ्रेश होकर आई और बोली, “मैं सोने जा रही हूँ, मुझे आज नींद आ रही है। तुम भी सो जाना।” मैं भी अपने रूम में जाकर लेट गया, लेकिन आज मेरी भी चुदाई की इच्छा प्रबल हो रही थी। मैं आमतौर पर लुंगी पहन लेता था। मैं अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था और सोच रहा था कि कैसे मॉम के साथ आज मस्ती ली जाए।
अचानक मॉम मेरे कमरे में आई और मुझे सोता देखकर बोली, “क्या हुआ, सो गया क्या?” मैं कुछ नहीं बोला और लेटा रहा। फिर मॉम सीधी मेरे बगल में आकर लेट गई। एक-दो बार आँखें मूँदे पड़े नाटक करते हुए मुझे देखा। फिर उसने मेरे सिर पर हाथ फेरा और मुझे देखती रही।
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मेरा लंड भी लुंगी में तन गया था, जिसका उभार साफ दिख रहा था। फिर उसने कनखियों से मेरे लंड की ओर देखा। फिर उसने अचानक ही एक झटके में अपनी साड़ी उतारकर एक तरफ रख दी। लगा कि वो चुदने को मचल उठी है। इतने दिनों की सेक्स की भड़ास वो रात भर में निकालने को उतावली हुई जा रही थी।
कमरे में हल्की रोशनी वाला नाइट लैंप जल रहा था। फिर उसने मेरी लुंगी की तरफ आहिस्ता से हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को हाथ में पकड़कर सहलाने लगी। मैंने अचानक चौंकने का नाटक किया और उठ बैठा। और बोला, “मॉम क्या हुआ, नींद नहीं आई क्या?” वो बोली, “आज थोड़ा मूड में हूँ। तेरा अभी मूड नहीं है क्या? आज तेरा मूड बना दूँगी मैं। इस बार तेरे को जरा भी खयाल नहीं आया, लापरवाह कहीं का।”
वो मुझे जोर से दबाकर अपने बदन को और भी आगे कर बोली थी। उसको यूँ सेक्स के लिए मचलते देखकर मेरा लंड भी सनसना उठा था। टाइट ब्लाउज में से झाँकती हुई आधी चुची देखकर मेरा लंड ऊपर-नीचे उछलने लगा था। भावावेश में मैं भी तुरंत ही उससे लिपट गया और दोनों चुचियों को अपने सीने पर दबाकर मैं मॉम से बोला, “लगता है आज कुछ ज्यादा ही मूड में हो।”
“पाँच दिन से तुमने कौन से तीर मारे हैं? मैं अगर आज भी चुपचाप पड़ जाती तो तुम अपनी मर्जी से तो कुछ करने वाले थे नहीं। आज तो मजबूरन मुझे ही बेशर्म बनना पड़ रहा है।” अपनी दोनों चुचियों को मेरे सीने से और भी ज्यादा दबाते हुए वो बोली, “तुम तो बेकार में नाराज हो जाते हो। मैं तो तुम्हें रोजाना ही चोदना चाहता हूँ, मगर तुम्हारा कोई सिग्नल ही नहीं मिला।”
मैंने सोचा कहीं तुम बुरा न मानो, और मैंने उसके पेटीकोट के अंदर हाथ डालते हुए कहा। पेटीकोट का थोड़ा सा ऊपर उठना था कि उसकी गदराई हुई गोरी-गोरी जाँघ नाइट लैंप की लाल रोशनी में चमक उठी। चिकनी जाँघ पर मजे ले-लेकर हाथ फेरते हुए मैं बोला, “हाय! सच मॉम मेरी डार्लिंग! तुम्हें देखते ही मेरा खड़ा हो जाता है। आह्ह! क्या गजब की जाँघें हैं तुम्हारी पुछ्छ!”
इस बार मैंने जाँघ पर चुंबन काटी थी। मेरे होंठ की अपनी चिकनी जाँघ पर यूँ चुंबन पड़ती महसूस कर मॉम की चूत में सनसनी और ज्यादा बुलंदी पर पहुँच उठी। और एकाएक मैंने अपना हाथ खिसकाता हुआ चूत पर फिराने लगा। चूत पर यूँ हाथ के पड़ते ही मॉम के मुँह से तेज सिसकारी निकल पड़ी थी।
“हाय… मेरे… सनम… ओह्ह… उह्ह…” मचलती हुई बोली, “आज की रात मस्त बना दो ना, मगर मेरी इच्छाओं का तो खयाल रखा करो।” “हाँन… मेरी… माँ…! मैं ऐसा ही करूँगा पर मेरी भी प्यास जी भरकर बुझाते रहना आप भी।” मॉम अब तो मुझसे बड़े जोर की लिपटकर जोरदार चुंबन लिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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और मैं उसे जोर से पकड़ अपना लंड उसकी गांड से दबाकर बोला, “प्यास तो तुम्हारी मैं आज भी जी भरकर बुझाऊँगा मेरी जान… पुछ्छ… पुछ्छ… पुछ्छ…” और लगातार उसके गाल पर कई चुंबन ले लिए। और जीभ फिराने लगा। मॉम इतनी गरम हो उठी कि गांड पर टकराते लंड को उसने हाथ में पकड़कर कहा, “इसे जल्दी से अंदर डाल दो ना प्लीज।”
“हाँ… हाँ… डालता… हूँ… जब बोलो जैसे बोलो वैसे करने को तैयार हूँ मैं तो तुम्हारी सेवा में। पहले तुम पूरी तैयार तो हो जाओ मेरी जान, मेरी प्यारी प्यारी…” और कहते-कहते मैंने एक चुची जोर से मसल डाली। सिसकार उठी थी बेचारी मॉम। फिर मैंने मॉम की कमर कसकर पकड़ी और आहिस्ता से उँगलियाँ पेटीकोट के नाड़े पर लाकर जो एक झटके से उसे खींचा तो उसका पेटीकोट नीचे को फिसलता चला गया। और वो आधी नंगी हो गई।
“वाह… भाई… वाह… आज तो बड़ी ही लपलपा रही है तुम्हारी! पुछ्छ!” मुँह नीचे करके चूत पर हौले से दाँत गड़ाते हुए चुंबन ले लिया। फिर वो बोली- “आये… नहीं… उफ्फ… ये… क्या… कर दिया… आ… एक… बार… और… चूमो… ना… आह म्म स्स” ये उनको इतना मजेदार लगा कि दोबारा चूत पर चुंबन और दाँत से कटवाने के लिए वो मचल उठी थी।
“जल्दी नहीं रानी! खूब चूमूँगा आज मैं तुम्हारी चूत को और, खूब चाट-चाटकर पीयूँगा तेरे दोनों बूब्स को लेकिन इसे ठीक से मेरे सामने परोस तो सही और जल्दी से अपना ब्लाउज और पेटीकोट एकदम अपने बदन से अलग कर दो।” “आये रे… मैं तो आधी से ज्यादा नंगी हो गई रे और… तुम इस लुंगी को क्यों लपेटे पड़े हुए हो?” एक जोरदार झटके से मॉम ने मेरी लुंगी उतारते हुए बोली।
लुंगी के उतरते ही मेरा दंडे जैसा लंबा और मोटा लंड फनफना उठा था। उसके यूँ तैयार देखकर उसके तन-बदन में चुदाई करानी की आग उसकी चूत में और जोर से भड़क उठी। वो सीधी बैठ गई और सिसक-सिसककर पहले उसने अपना ब्लाउज उतारा और फिर पेटीकोट को उतारते हुए वो लंड की तरफ देखते हुए मचलकर बोली,
“हाय… अगर… मुझे… पता… होता… तो मैं… पहले से ही… नंगी… होकर तेरे पास लेट जाती। आह… लो… आ… जाओ… अब… देर किस बात की है… मेरी… हर… चीज… तेरे सामने रख दी है।” और वो अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी… पेटीकोट पलंग से नीचे फेंककर दोनों बाहें मेरी तरफ बढ़ाते हुए वो बोली, “जल्दी करो ना, मुझसे इंतजार नहीं होता।” और मेरी बनियान भी उतार दी।
“मेरा खयाल है पहले तुम्हारे बूब्स को मुँह में लेकर खूब चूसूँ।” और मैंने जोर-जोर से उसके बूब्स दबाकर चूसना शुरू कर दिया। वो मस्त होकर सिसकारी भरने लगी, “उईई… आह्ह्ह…” और फिर मैंने जीभ को उसके बदन पर फेरते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगा और उसकी चूत पर जीभ फिराने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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वो बोली, “बहुत मजा आ रहा है।” “हाँ… हाँ… मैं भी यही चाहती हूँ, एक बार चूसो ना इसे जोर से… जल्दी से… लगा लो इस पर अपना मुँह।” दोनों हाथों से चूत की फाँक को चौड़ा कर वो सिसकते हुए बोली। मैंने भी कह दिया, “तुम्हें उतने जोर से मेरा लंड भी तुम्हें चूसना पड़ेगा मॉम डार्लिंग।”
अपनी आँखों की भवें ऊपर चढ़ाते हुए और… अपने होंठों की उँगलियों को अपने आप ही चूसते हुए मॉम मेरे फनफनाते हुए लंड को देखकर बोली, “चूसूँगी… मैं… चूसूँगी… ये तो मेरी ही चीज है… आहा… इसे मैं नहीं चूसूँगी तो कौन चूसेगा, मगर पहले… आह्ह… आऊू… ना…”
उसका जी कर रहा था कि अभी मेरा खड़ा लंड वो मुँह में भर ले मगर पहले वो अपनी चूत चुसवा-चुसवा कर मजे लेने के चक्कर में थी। लंड चुसवाने का वादा लेकर मैंने अपने घुटने पलंग पर टेक दोनों हाथों से मॉम की जाँघें कसकर पकड़ झुकता चला गया। और अगले पल मेरी जीभ और होंठ मॉम की चूत पर जा टिके थे।
लेटी हुई मॉम ने अपने दोनों हाथ अपनी दोनों चुचियों पर जमा कर सिग्नल देते हुए कहा, “अब जोर से… चूसो… ना ऐसे क्या करता है… यूँ… कब… तक… होंठ रगड़ते रहेगा… आह… पी… जाओ… इसे।” मॉम की इस मस्ती को देखकर मैं भी जोश में आ गया और चूत की फाँकों पर काट-काटकर उन्हें चूसना शुरू किया तो वो पागल हो उठी।
चूत की दरार में बीच-बीच में कभी जीभ चलाता तो कभी रोककर साथ-साथ मैं उँगली भी फँसा देता तो मस्ती में बुरी तरह बेचैन सी हो उठती थी। वो अपनी चूत को उछाल-उछालकर मेरे मुँह पर दबाते हुए चूत चुसवाने पर उतर आई थी। “उए… आई… नहीं… ई… मैं… नहीं… आए… ये… क्या… आईई… मर… जाऊँगी राजा… आह्ह… दाना मत चूसो जी… उफ्फ… आह्ह नहीं… आज छोड़ मत और जोर से चूसो ना प्लीज…”
मैंने सोचा कि अगर थोड़ी ही देर और चूत चूसते रहे तो कहीं चूत पानी ही न छोड़ दे। जैसे ही चूत से मुँह हटाकर उठा और बूब्स को मुँह में लिया तो मॉम गीली चूत पर हाथ मलते हुए बोली, “ओह… इसको और चूसो ना क्यों बंद कर दिया।”
फिर मैंने कहा, “बड़ी तेज बनती हो।” मैंने रात भर तेरी चूत को चूसने का ठेका नहीं लिया, अब तेरी बारी है, तुम्हें मेरा लंड भी चूसना है, और बहुत से काम करने हैं। अब तुम अपनी न सोच और मेरी सोचो यानी मेरा लंड चूसो और पूरी मस्ती दे दो, आई बात समझ में। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैं अपना लंड पकड़कर उसे हिलाते हुए उसकी मुँह की तरफ बढ़ा दिया। “मॉम भी जोश में आ गई और बोली, मैं… पीछे हटने वाली नहीं हूँ… लाओ दो इसे मेरे मुँह में।” तुरंत अपना मुँह बढ़ाते हुए उसने कहा। उसकी बात सुनकर मैं पलंग पर बैठ गया और मॉम नीचे बैठकर लंड के पास मुँह लाई तो मैंने भी एक हाथ से अपना लंड पकड़कर उसके खुले मुँह में डालकर बोला, “ले… चूस… ना चूस इसे जोर-जोर से मेरी जान।”
“उई… उईई… आह्ह… ऊम्म…” आधा लंड मुँह में भरकर ऊम्म… ऊह्हम करती हुई वो उसे चूसने लगी थी। लंड के चारों तरफ वो अपनी जीभ घुमा रही थी। क्या मस्ती आ रही थी। एक मजेदार गुदगुदी से उठती हुई थी वो भी अपने मुँह में बड़ी ही सनसनीदार गुदगुदी महसूस कर रही थी। चिकना और मोटा लंड चूसने में उसे बड़ा ही मजा आ रहा था।
जैसे-जैसे वो लंड चूसती जा रही थी, मेरी मस्ती बढ़ती जा रही थी। मैं भी बोल रहा था, “आ ओ मेरी रानी चूसो ना और जोर से।” झटके देकर और वो भी जोर-जोर से चूसने लगी। मेरा लंड मुँह के अंदर और ज्यादा उछल-उछलकर टकरा रहा था।
और मैं बोला, “आज तो तूने मेरी जान बड़ी ही मस्त चुसाई की है।” और मुझे पूरा उफान आ गया और मेरे लंड की फुंकारें ज्यादा ही बुलंद हो उठीं तो मैंने ही अपना लंड उसके मुँह से निकालकर कहा, “मैं अब एक पल भी अपने लंड को काबू में नहीं रख सकता… जल्दी से इसे अपनी चूत में घुस जाने दो।”
“वाह… मेरे… राजा… मेरे दिल की बात छीन ली। मैं भी तो यही चाह रही हूँ। आओ…” और वो पलंग पर लेटकर बोली, “मेरी जाँघों के पास आओ ना…” इस बार अपनी दोनों टाँगें मॉम ने ऊपर उठाकर चुदने को तैयार हो गई। मैं दोनों जाँघों के बीच में बैठा और उन्होंने लपलपाती गीली चूत के फड़फड़ाते छेद पर सुपाड़ा रखकर दबाना शुरू किया।
और अपने फनफनाते लंड को मॉम की चूत में डाल दिया और अंदर चला गया। अब मैंने मॉम से टाँगों को अपने कंधे पर रखने को कहा। वो तो थी ही तैयार, फौरन उसने अपनी टाँग फुर्ती से मेरे कंधे पर रख ली। चूत पर लगा लंड उसे मस्त किए जा रहा था।
मैं थोड़ा सा झुककर अपने हाथ दोनों चुचियों पर रखकर दबाते हुए जोर लगाकर लंड जो अंदर पेलना शुरू किया कि ‘फच’ की आवाज के साथ ही पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और अंदर की दीवारों से टकराया तो वो जोर से चिल्लाई… “राजा… ज्ज… उई… आआ… उह्ह्ह… मारा रे… मस्ती आ गई… और जोर से… मार……”
मैंने भी पूरी मस्ती में उसकी चुचियाँ छोड़ जोर से उसकी कोख भरकर धचा-धच लंड चूत में पेलने लगा। मॉम भी मेरे लंड से चुदते हुए मस्त हुई जा रही थी। मोटा लंड चूत में घुसा बड़ा ही आराम दे रहा था।
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वो भी अब मेरे दोनों कंधे पकड़ उछाल-उछालकर चुद रही थी और मजे में आकर सिसकती हुई बक-बक कर रही थी, “आह्ह… ओह्ह… शाब्बाश… सनम… रोज… चोदा करो… वाह्ह… तुम… वाकई… सच्चे… रे चोदो ना… हो… चोदो और चोदो… जोर… से चोदो… उम्म्म… आ… मजा… आ… रहा… है… और तेज… और जोर से… आह्ह… पूरी मस्ती दो आज ऐसे ही करते रह प्लीज…”
मैं भी मस्तानी चूत को घोटने के लिए जी-जान एक किए जा रहा था। वैसे तो मेरा लंड मॉम की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था मगर चूत सचमुच मस्त थी। अब मैं भी झड़ने लगा था तो मेरी स्पीड और चोदने के ढंग में फर्क महसूस करती हुई मॉम चुदते-चुदते ही बोली, “ओह… मैं भी झरने वाली हूँ… जोर… से… करो… जल्दी-जल्दी।”
और मैंने स्पीड बढ़ा दी। आह्ह… आआह्ह………. मार डाला……. ओओह… आआह…… अघ… उई… सी… आह्ह… आआह…… ओउईई…… माँ… क्यों… मजा… आ रहा ना जाने मन… आह्ह… ले… आज तो तुझे खुश… करके ही हटूँगा… मेरी… अच्छी… रानी… ले… और ले… तेरी… चूत का… मैं अपने… लंड… से… पूरी मस्ती दे रहा हूँ… और ले… बड़ी अच्छी चूत है… आह… ले… फाड़… कर रख दूँगा आज… तुझे…
मैं भी बड़े ही करारे धक्के मार-मारकर मुँह से आवाजें निकाले जा रहे थे। अचानक मॉम बहुत जोर से मुझसे लिपट-लिपटकर गांड को उछालते हुए चुदने लगी। मैं भी उसका मुँह में चूमते हुए बूब्स को दबाने लगा और फिर बीच में बूब्स के निप्पल को पीते-पीते तेज रफ्तार से उसे चोदने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी मॉम की चूत ने रसी धारा छोड़नी शुरू कर दी। “ओह… मेरा सयाना बेटा… मेरे… सैयाँ… ओह… देखो… देखो… हो… गया… ए… मैं… गई…” और झड़ती हुई चूत पर मुश्किल से ८-१० धक्के और पड़े होंगे कि मेरा लंड भी जोरदार धार फेंक उठा। मेरे लंड का रस निकलकर उसकी चूत में गिर रहा था।
मजे में आकर दोनों ने एक-दूसरे को जकड़ डाला था। जब दोनों झड़ गए तो उनकी जकड़न खुद ढीली पड़ती चली गई। कुछ देर आराम में लिपटे हुए दोनों पड़े रहे और जोर-जोर से हाँफते रहे। करीब ५ मिनट बाद हम दोनों अलग हुए। और बाथरूम में जाकर आए और बिस्तर पर लेट गए।
मैं बोला, “आज तूने मस्त कर दिया और तुझे फिर से मेरा लंड का और चुदाई का मजा लेना है तो इसे तैयार कर दे, देखता हूँ क्या ताकत है तेरे में।” और उसने मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया। १५-२० मिनट तक वो मेरा लंड लॉलीपॉप की तरह चूसती रही और मैं उसके बूब्स को अपने दोनों हाथों से जोर-जोर से प्रेस कर रहा था।
उसने मेरे लंड को अपने दाँतों से हल्का-हल्का काटना भी शुरू कर दिया जिससे मेरे बदन में अजीब सी हरकत होने लगी और मैंने उसके निप्पल को जोर से दबा दिया जिससे उनकी चीख निकल गई और वो एक्साइटेड होकर मेरे लंड को छोड़कर मेरे होंठों को किस करना और काटना शुरू कर दी।
थोड़ी देर बाद फिर से मेरा लंड मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी और वो तो पूरा तैयार हो गया और बोली, “ले मैंने तो तैयार कर दिया, अब तेरी बारी है।” और मैंने उनकी चूत को बड़े ही मजे से चाट रहा था… और मॉम जोर-जोर से सिसकारी भर रही थी। बोली… “आह्ह्ह उईई… खा जाओ इस चूत को, अपनी रानी की चूत को पूरा की पूरा खा जाओ।”
और मैंने जोर-जोर से चाटना शुरू कर दिया। उसकी चूत को अपने दाँतों से काटने लगा और मॉम की आवाज भी तेज हो रही थी। दूसरी तरफ मेरे दोनों हाथ उनके बड़े-बड़े बूब्स को जोर-जोर से दबा रहे थे और बूब्स पूरी तरह से रेड हो गए थे। उनकी चूत को चाटने के बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर लिटाया और कहा कि
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“आजा आ तू बूब्स को भी चूस ना, दबा-दबा के जोर-जोर से मेरा दूध भी पी ले।” और जोर-जोर से उनके बूब्स को चूसने लगा। उनके निप्पल को भी दाँत से दबाता तो जोर की चीख निकल जाती। करीब १५ मिनट तक उनके बूब्स चूसने और दूध पीने के बाद मैंने उनको डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया और जोर-जोर से झटके देने लगा। थोड़ी देर बाद मॉम को भी मजा आने लगा और वो भी मस्ती से अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगी। मेरे दोनों हाथ उसकी गांड पर और लंड उनकी चूत में था।
करीब १० मिनट बाद मैंने अपना पानी उनकी चूत में छोड़ दिया। फिर लंड बाहर निकाला तो मॉम मुझसे जोर की लिपट गई और किस करने लगी। और मैं भी मॉम के ऊपर ही लेट गया और उनके होंठों को चूसता रहा और चूत में फिंगर करता लेटा रहा। और बोला, “मॉम आज तो बड़ी मस्ती आ गई है।” वो बोली, “ऐसे ही मस्ती करेंगे।” मैं बोला, “हाँ।” और हम एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। सुबह मॉम ने उठाया और मुझे किस किया और उन्होंने कपड़े पहने और रूम के बाहर चली गई।
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