Slut Wife Chudai
मेरा नाम शिल्पा है। मेरी ये कहानी सुनकर आपको शायद सरप्राइज होगा और आपको मुझ पर विश्वास भी नहीं होगा कि किसी के साथ ऐसा भी हो सकता है। मेरी शादी राहुल के साथ 1 साल पहले हुई थी। मैं तब 21 साल की थी। मैं 12वीं पास थी और राहुल ग्रेजुएट था और एक बैंक में ब्रांच मैनेजर था। Slut Wife Chudai
मैं राहुल को एक अच्छा पति समझ रही थी। उसने मुझे सुहागरात के दिन कुछ नहीं किया और आराम से सोने दिया। पर दूसरे दिन सुबह जब मैं आराम से सो रही थी तभी जोर से कोई मुझे उठाने लगा। मैं जागी तो देखा वो राहुल था। वो जोर से कहता था,
“साली अभी तक सो रही है? चल उठ! मुझे अभी ऑफिस जाना है। ब्रेकफास्ट कौन तेरा बाप बनाएगा? चल। साली नौकर है, उसका मतलब ये नहीं कि सभी काम वो करेगी। चल जल्दी उठ और मेरे लिए नाश्ता बना।”
मैं तो राहुल का ये मिजाज देखकर दंग ही रह गई। मैं जल्दी से उठकर कपड़े ठीक करके किचन में जाती हूं और जल्दी से फ्रेश होकर उनके लिए नाश्ता बनाती हूं। हमारा नौकर जो 18 साल का लड़का था, जिसका नाम था रामू, वो अभी आराम से सो रहा था। मुझे ये देखकर थोड़ा सरप्राइज हुआ।
ये क्या, नौकर सो रहा है और मेरा पति मुझे जल्दी उठाकर सब काम करवा रहा है। वो डाइनिंग टेबल पर बैठकर वेट कर रहे थे और मैं चाय और नाश्ता लेकर आती हूं और उसे टेबल पर रखती हूं। मैंने उस वक्त हाफ स्लीव्ड ब्लाउज, साड़ी, पेटीकोट, ब्रा और पैंटी पहनी थी।
“जी लीजिए ये नाश्ता। आपका ऑफिस का टाइम क्या है?” मैं थोड़ा घबराकर पूछती हूं।
“तुझे क्या काम है? तू अपने काम से काम रख। समझी? और सुन। रामू को तू जाकर जगा देना और घर के काम करवा देना, समझी?”
“जी, आप ऑफिस से कब आएंगे?”
“शाम को 8 बजे आ जाऊंगा। और सुन, ये जो कपड़े तू लाई है वो सब तिजोरी में लॉक कर देना। मैं शाम को तुम्हारे लिए नई ब्लाउज, साड़ी, पेटीकोट, ब्रा और पैंटी लाऊंगा। समझी? ये पुराने जमाने के कपड़े यहां शहर में नहीं चलते, समझी?”
और नाश्ता करने के बाद वो ऑफिस जाते हैं और मैं हमारे नौकर रामू के कमरे में जाती हूं। वो सो रहा था। मैंने देखा वो छोटी चड्डी पहनकर सो रहा था। ऊपर उसने कुछ नहीं पहना था। और मैं क्या देखती हूं, उसका हाथ उसकी चड्डी में था और वो अपने कॉक को माल रहा था। वो नींद में मास्टरबेट कर रहा था। गॉड! ऐसा मैंने पहली बार देखा था। मैं सोच रही थी अब उसे कैसे उठाऊं। अभी 9 बजे थे और घर का सारा काम बाकी था। मैं राहुल को फोन करती हूं।
“Hello”
“हां, क्या बात है?”
“अरे देखो ना, रामू अभी तक सो रहा है और घर का सारा काम बाकी है।”
“तो जगाओ ना उसे।”
“अरे मुझे शर्म आती है। अब मैं क्या बोलूं?”
“अरे शर्म कैसी जा? उसे उठा और सब काम पूरा करवा। अगर शाम तक कोई काम बाकी रहा तो तेरी खैर नहीं, समझी साली? नौकर से कैसे काम करवाना वो भी नहीं जानती, साली गंवार।”
“पर वो अभी नींद में अपनी चड्डी में हाथ डालकर अपना वो मसल रहा है।”
“अरे वो तो उसकी आदत है, कोई बात नहीं। तू मत शर्मा। वो नींद में ही ऐसा करता है। चल उसे जल्दी उठा, समझी? और मुझे अब फोन मत करना, मेरे पास बहुत काम है।”
और ऐसा कहकर वो फोन रख देते हैं जोर से।
मैं फिर से रामू के कमरे में जाती हूं। मैं देखती हूं अभी भी वो अपना लंड हिला रहा था और कुछ बोल रहा था। अब मैं हिम्मत करके उसके पास जाती हूं और कहती हूं, “अरे रामू उठ! सुबह के 10 बज गए, जल्दी कर।”
और वो अचानक उठ जाता है। वो शर्म से अपना हाथ चड्डी में से बाहर निकालता है।
“ओ मालकिन, अरे कल बहुत काम किया था तो मैं उठ नहीं सका।”
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ये कहकर वो उठ जाता है और उठकर उसकी स्लीवलेस बटनलेस बनियान पहनता है जिसमें उसकी हेयरलेस छाती नंगी दिखती थी। उसकी आधी से ज्यादा जांघें भी नंगी दिखती थीं। और उसने शायद चड्डी के अंदर कुछ नहीं पहना था। जब मैं मेन रूम में बैठकर न्यूजपेपर पढ़ रही थी तभी रामू घर में झाड़ू लगा रहा था।
मैंने देखा वो तिरछी नजर से मुझे देख रहा था और मैंने नोटिस किया कि उसका लंड तना हुआ था और मुश्किल से चौड़ी चड्डी में समा रहा था। झाड़ू के बाद वो नीचे बैठकर पोछा लगाने लगा और उस वक्त मैंने एक-दो बार उसके हेयरलेस बॉल्स देखे जो उसकी चड्डी में से बाहर दिख रहे थे।
वो घुटने मोड़कर बैठकर पोछा लगाता था जिससे उसकी चड्डी और नीचे चली गई थी। मुझे पता नहीं चलता था कि क्यों मैं उसके उभार को घूर रही थी। गॉड! मुझे उसके उभार को देखने में अच्छा लगता था। मैं अपने आप को रोककर अपनी नजर को मैंने फेर दिया और न्यूज पढ़ने लगी।
रामू ने फटाफट सब काम खत्म कर दिया और मैंने राहुल के लिए टिफिन बनाकर उसे रामू को दिया ऑफिस देने के लिए और वो राहुल के पास टिफिन लेकर गया। और मैं घर में अकेली थी तो आराम करने के लिए मेरे बेडरूम में सो गई। तभी अचानक फोन की रिंग बजने लगी और मैं फटाफट फोन के पास गई और उसे उठाया।
“Hello”
“साली क्या कर रही थी? फोन उठाने में इतनी देर क्यों कर दी?”
“अरे गुस्सा क्यों हो रहे हो? कोई काम नहीं था इसलिए मैं सो रही थी।”
“साली रामू से सब काम करवाकर बेचारे छोटे बच्चे को थका दिया और खुद घोड़े बेचकर सो रही है।”
“अरे तुम्हीं ने तो बोला था।”
“सुन मुझे, अब कल से रामू सिर्फ मुझे टिफिन देने का काम ही करेगा, समझी? घर के बाकी सभी काम तुझे करने होंगे। रामू सिर्फ मेरा नौकर है, तुम्हारा नहीं। और ये भी सुन, अगर रामू तुमसे कुछ काम कराने को कहे तो तुझे उसका काम भी करना होगा, समझी? मैंने इसी लिए तो तुझसे शादी की है वरना ऐसी गंवार 12वीं पास लड़की से कौन शादी करता?”
“अरे पर मैं नौकर होकर घर का काम क्यों करूं?”
“चुप साली, मुझसे जबान लड़ाती है? वो तुम्हारा नौकर नहीं है। अब आगे उसे तुम साहब कहोगी, समझी? रामू कहके मत बुलाना। उसने मेरी बहुत सेवा की है बचपन से तो उसे कुछ तो इनाम मिलना चाहिए ना।”
फोन रखने के बाद मैं ऑलमोस्ट शॉक्ड हो गई कि मैंने कैसे आदमी से शादी की है। असल में ये शादी मेरी मर्जी के खिलाफ हुई थी। मैं मेरे गांव के एक लड़के के साथ शादी करना चाहती थी। पर वो पैसेवाला नहीं था इसलिए मेरे बाप ने मेरी शादी यहां शहर में एक अच्छी-खासी कमाई करने वाले लड़के से करवा दी।
और मेरे बाप ने मुझे चेतावनी भी दी थी कि जो तेरा पति कहे वो कहना। अगर तू ससुराल से वापस आई तो तुम्हारे लिए मेरे घर में कोई जगह नहीं होगी। अब मेरे पास जिंदगी भर इस आदमी से जिंदगी गुजारने के सिवा कोई और रास्ता था ही नहीं। जो आदमी अपनी ही बीवी को अपने नौकर के लिए डांटता हो।
शाम को लगभग 8 बजे मेरे पति की कार की आवाज आई। मैंने देखा राहुल और रामू दोनों साथ में थे। रामू के हाथ में राहुल की बैग और दूसरे हाथ में एक पैकेट था। राहुल फ्रेश होने के बाद मुझे अपने बेडरूम में बुलाया और कहा,
“मैं तुम्हारे लिए नए कपड़े लाया हूं। अब से तुम्हें वही पहनना है इस गर्मी में। ये सिर्फ एक ही जोड़ है। क्योंकि मैं तुम्हारे ऊपर और कोई खर्च नहीं करना चाहता। और जो तेरे बाप से घर से कपड़े लाई थी वो सब वापस भेज देना, समझी? यहां जो मैं तुम्हारे लिए लाऊं वही पहनना पड़ेगा।”
और ये कहकर राहुल ने रामू को रूम में बुलाया और उसके हाथ से वो पैकेट लेकर मुझे देखकर कहा, “ले, इसमें एक साड़ी, एक ब्लाउज, एक पेटीकोट और एक जोड़ पैंटी है। जा जल्दी से इसे पहनकर आ। और सुन, एक साल के लिए तुम्हें यही कपड़े से चलाना पड़ेगा तो उसका संभालकर इस्तेमाल करना, समझी?”
मैं चुपचाप वो पैकेट लेकर दूसरे रूम में चली गई और वो पैकेट खोला। उसके अंदर एक ब्लैक कलर की साड़ी थी जो एकदम ट्रांसपेरेंट थी। और ब्राइट रेड कलर का ब्लाउज। व्हाइट ट्रांसपेरेंट पेटीकोट। और बहुत छोटी पैंटी थी। मैंने बहुत खोजा पर उसमें ब्रा नहीं थी। उसका मतलब मुझे बिना ब्रा के ही घर में रहना होगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
ब्लाउज स्लीवलेस, लो कट बैक, फ्रंट में तीन बटन थे और नेक राउंड कट थी। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी स्लीवलेस कपड़े नहीं पहने थे पर आज मुझे ये स्लीवलेस ब्लाउज पहनना पड़ेगा। मुझे बहुत संकोच हो रहा था ये करने में पर क्या करूं? मेरा पति ही यही चाहता था और शायद इसी वजह से मैं गांव की लड़की की बजाय शहर की मॉडर्न लड़की दिखूं।
मैंने वो कपड़े पहन लिए और फिर मैं मेन रूम में गई जहां रामू और राहुल दोनों बैठकर टीवी देख रहे थे। दोनों ने जब मुझे देखा तो ऑलमोस्ट वो दोनों शॉक्ड हो गए। मैं बहुत ही सेक्सी दिख रही थी। दोनों बाजू नंगी, पीछे आधी पीठ नंगी, और आगे आधे बूब्स ब्लाउज से बाहर झांक रहे थे जिसके ऊपर मैंने अच्छी तरह से साड़ी कवर करके रखी थी।
पर साड़ी बहुत पतली होने की वजह से ऊपर के बूब्स का उभार आसानी से दिख रहा था। और मैंने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी तो जब भी मैं चलती तो दोनों बूब्स ऊपर-नीचे उछल-कूद करते थे। मैं तो शर्म से पानी-पानी हो रही थी। छोटी स्लीवलेस चोली और वो भी बिना ब्रा के।
राहुल ने रामू से पूछा, “रामू देख, कैसी दिख रही है तेरी मालकिन? दिख रही है ना एकदम सेक्सी हाउसवाइफ। अब से तुझे ऐसे ही कपड़े पहनाने हैं जब तू घर में हो तब, समझी? चल अब जल्दी से खाना बना और रामू तू भी जा, मालकिन को हेल्प कर किचन में।”
मैंने देखा कि रामू मेरी नंगी नाभि देख रहा था। वो उसकी गहराई को अपनी आंखों से नाप रहा था। मैंने साड़ी लो वेस्ट पहनी थी जिससे मेरी पूरी टमी नंगी थी। मैंने हाई हील्स भी पहनी थीं जिससे मेरी गांड और प्लंप और उठी हुई दिखती थी। और जब मैं चलती थी तो हाई हील्स की वजह से मेरी गांड जो कि बहुत छोटी पैंटी की वजह से ऑलमोस्ट नंगी थी.
पेटीकोट के नीचे वो चलने की वजह से हिलती थी और ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं बहुत ज्यादा हिलती थी। और मुझे पता था राहुल और रामू दोनों उसका मजा लेते थे। किचन में जब मैं खाना बनाने गई तो रामू भी मेरे पीछे-पीछे वहां आया। वो मेरी आधी नंगी पीठ घूर रहा था। जब मैंने उसकी तरफ देखा। राहुल ने उसे मुझे नाम से बुलाने का हक दिया था। वो मेरे पीछे आया और जब मैं खाना बना रही थी तब मेरी कमर पकड़कर मेरी गांड पर उसका तना हुआ लंड रगड़ने लगा।
“क्या बदन है तेरा म्म्म… तुझे पता है मालिक ने अब मुझे तुम्हारा भी मालिक बना दिया है। अब से तू मेरी नौकरानी है, समझी?”
और ये कहके वो मेरी पीठ को चाटने लगा। मेरी पूरी बॉडी कांपने लगी। गॉड! पहली बार कोई मर्द ऐसे मेरे बदन को चाट रहा था। मेरी नंगी मुलायम पीठ पर उसकी लंबी जीभ गोल-गोल घूम रही थी और वो मेरी कमर पर अपनी उंगलियां घुमा रहा था और बीच-बीच में मेरी गहरी नाभि में उंगली को गोल-गोल घुमा रहा था।
ओ गॉड! मैं धीरे-धीरे मोन करने लगी। अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में घुस गया था। पूरा तना हुआ लंड मेरी गांड की दरार में ऊपर से नीचे तक सटा हुआ था। और मेरी गांड के दोनों कुल्हे उसकी जांघों से सटे हुए थे और वो उसे और जोर से अपनी कमर घुमा-घुमाकर रगड़ रहा था।
“साली क्या गांड है तेरी! दिल करता है पूरा दिन अपना लंड तेरी गांड पर रगड़ता रहूं… ओ आआ…”
वो जोर-जोर से अब गंदी-गंदी बातें करने लगा। गॉड! अब वो धीरे-धीरे अपना हाथ मेरे पेटीकोट के अंदर डालने लगा और पैंटी के अंदर हाथ डालके वो मेरी चूत को मसलने लगा।
“ओ अरे मेहरबानी करके ऐसा मत करो… ओ ओ आआ… ओ गॉड…”
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मैं ऊपर-नीचे होकर उसे रोकने की कोशिश करने लगी पर वो बिना रुके मेरी चूत को मसलने लगा और अपने लंड को मेरी गांड पर और जोर से रगड़ने लगा। उसने अचानक अपना हाथ मेरी चूत से हटा दिया और अब वो धीरे-धीरे मेरा पेटीकोट साड़ी के साथ ऊपर उठाने लगा और मैं कुछ करूं उससे पहले उसने दोनों को मेरी गांड के ऊपर उठा दिया और उसी वक्त मुझे उसका नंगा लंड मेरी गांड पर महसूस हुआ। गॉड! वो भी अब नंगा हो गया था।
“ओ रंडी तेरी गांड की चमड़ी तो बहुत ही मुलायम है… ओ गॉड…”
और ये कहके वो अपने लंड को मेरी नंगी गांड पर मारने लगा जोर-जोर से, जिसकी आवाज शायद डाइनिंग रूम तक भी गई होगी।
“छट्… छट्… छट्… छट्…”
मेरी गांड के दोनों कुल्हों पर अपने लंड को काफी बार टकराने के बाद उसने अचानक मेरी चूत से मेरी पतली थॉन्ग हटाकर उसका पूरा लंड एक ही धक्के में अंदर घुसेड़ दिया।
“ओ मर गई रे…”
उसका लंड बहुत ही बड़ा था इसलिए मैं उसके अचानक धक्के से जोर से चीख उठी। मेरी टाइट चूत उसके लंड को सह नहीं सकी जिससे मुझे बहुत दर्द होने लगा। पर वो बिना परवाह किए उसका लंड तेजी से अंदर-बाहर करने लगा और जोर-जोर से मेरी गांड पर अपनी जांघें टकराने लगा। और तभी राहुल भी किचन में आया पर बिना रुके हुए रामू पीछे से मेरी चूत को अपने लंड से पेल रहा था।
राहुल भी उत्तेजित हो गया, “ओ रामू अपनी नौकरानी की चूत का मजा ले रहे हो। लगता है तेरी नौकरानी को भी तेरा लंड अपनी चूत में लेने में बहुत मजा आ रहा है है ना?”
ऐसा कहके राहुल मेरे और पास आया और मेरे सामने देखकर हंसने लगा। मैं उससे आंखें नहीं मिला पा रही थी। सोच रही थी कैसा पति है, अपनी ही बीवी को अपने नौकर से चुदवा रहा है और उसके मजे भी ले रहा है। छीं! क्या शहर में सभी लोग ऐसे ही होते होंगे। मैं मन ही मन अपने आप को कोस रही थी कि कहां शहर में मैंने शादी की। इससे अच्छा तो गांव में शादी की होती तो ऐसा किसी नौकर की नौकरानी तो नहीं बनना पड़ता।
तभी राहुल ने अपना पैंट खोला और अपना लंड बाहर निकाला। गॉड! वो भी बड़ा था पर रामू से थोड़ा छोटा था। उसने मुझे कहा, “चल अब 90 डिग्री झुकके मेरे लंड को चूस, जब तक रामू तेरी चुदाई खत्म न करे तब तक चूसती रह।”
और मैं राहुल की तरफ घूम गई। रामू ने मेरी कमर पकड़ी हुई थी, उसका पूरा लंड मेरी चूत में था। मैं अपने दोनों पैर सीधे रखके नीचे झुकी और अपना मुंह खोला और राहुल ने अपने ही हाथों से अपना लंड को मेरे मुंह में घुसेड़ दिया पूरा का पूरा। और वो दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़कर उसे आगे-पीछे करके मेरे मुंह में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा।
रामू ने मुझे और हेल्पलेस करने के लिए मेरे दोनों हाथों को पीछे करके उन्हें अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से पीछे खींचा जिससे मेरा मुंह थोड़ा ऊपर हुआ। अब मेरा पति और रामू दोनों बारी-बारी अपना लंड मेरी चूत और मुंह में अंदर-बाहर करने लगे। रामू की जांघें जोर-जोर से मेरी गांड पर टकरा रही थीं जिससे ऊंची-ऊंची आवाजें चारों तरफ गूंज रही थीं।
और रामू के ये सुनके और नशा आता था जिससे वो जानबूझकर और जोर से अपना लंड मेरी चूत में डालता और पूरा दम लगाकर अपनी जांघें मेरी गांड पर टकराता था। दूसरी तरफ मेरा पति राहुल अब और तेजी से अपना लंड मेरे मुंह में अंदर-बाहर करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बीच-बीच में वो अपना पूरा लंड मेरे मुंह में डालके उसे वैसे ही अंदर रहने देता और मेरे सिर को बहुत जोर से अपनी ओर दबाता। उस वक्त मैं मुश्किल से सांस ले सकती थी। और जब सांस लेती तो उसकी लंबी-लंबी झांटें मेरी नाक में घुस जातीं। अचानक उसने अपना लंड मेरे मुंह में से निकाल दिया। फिर उसने अपनी एक टांग उठाके उसे मेरी नंगी पीठ पर रख दिया और मुझे कहा,
“चल साली रंडी अब मेरे ये दोनों बॉल्स भी चूस अच्छी तरह और अच्छी तरह से उन्हें अपने मुंह के रस से भिगो दे मेरी रंडी बीवी।”
और मैंने उसके दोनों बॉल्स को पहले अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। उसके दोनों बॉल्स पर बहुत सारे बाल थे। फिर भी मुझे वो चाटने पड़े। मुझे बहुत गंदा लग रहा था पर मेरे पास और कोई चारा नहीं था। सच कहूं तो मुझे उनका लंड चूसने में तो बहुत मजा आया था। मुझे ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ था।
उसने मुझे अपना मुंह खोलने को कहा। जैसे मैंने अपना मुंह खोला तो उसने दोनों बॉल्स मेरे मुंह में पेल दिए और फिर वो बोला, “चल अब चूस इसे भी।” पीछे रामू बिना रुके अपने लंड से मेरी चूत पेल रहा था। और साथ-साथ मेरी गांड को अपनी जांघों से पीट भी रहा था।
तभी अचानक मुझे महसूस हुआ कि रामू का बदन कड़क हो रहा है। वो अब अपना रस छोड़ने की तैयारी कर रहा था। उसने अपना लंड मेरी चूत में से बाहर निकाला और उसका रस मेरी गांड के दाहिने कुल्हे पर छोड़ा और राहुल भी मेरे पीछे आया और उसने भी उसका रस मेरी बाईं गांड के कुल्हे पर छोड़ा। गॉड! दोनों ने मेरी गांड को अपने रस से भिगो दिया।
राहुल मेरी वीर्य रस से भिगी हुई गांड को देखकर हंसते हुए बोला, “ओ साली रंडी क्या गांड दिख रही है तेरी! हमारे रस में भिग के तो और रसीली हो गई है। चल अब नीचे कुतिया बन जा अपने घुटनों पर और अपने दोनों हाथों से हमारा रस अपनी गांड पर रगड़। अच्छी तरह से अपनी गांड पर ये रस रगड़ना वरना तुझे वो सजा दूंगा कि तू जिंदगी भर नहीं भूलेगी।”
और मैं दोनों के सामने कुतिया बनकर नीचे झुक गई और अपने दोनों हाथों को अपनी गांड पर रखा और उसे गोल-गोल घुमाने लगी। गॉड! मैं खुद ही अपनी गांड पर उनका रस रगड़ रही थी और उसे उनके रस से चारों तरफ भिगो रही थी। उनका चिकना-चिकना वीर्य रस मेरी गांड पर रगड़-रगड़कर मेरी गांड को भी और चिकनी कर रहा था।
राहुल: “म्म्म… देख रामू देख हमारी रंडी की गांड अब कैसी चमक रही है हमारे वीर्य रस की वजह से। सुन अब तू रंडी, तुझे हमारा ये रस कभी भी साफ नहीं करना है। उसे ऐसे ही रखना है। अगर तू चाहे तो पेटीकोट और साड़ी से गांड ढक सकती है पर इस वजह से तेरा पेटीकोट गंदा हो जाएगा और मैं तुझे दूसरा पेटीकोट नहीं देने वाला पहनने के लिए, समझी?
और अगर तू चाहे तो बिना पेटीकोट के भी घूम सकती है अपनी गांड को नंगी रखके जिससे तेरा पेटीकोट गंदा न हो जाए और अगर कोई गेस्ट आ जाए तो तू क्लीन पेटीकोट पहन सके। और ये भी सुन, तू सिर्फ संडे के दिन ही नहाएगी, बाकी के दिन बिना नहाए रहेगी। मैं नहीं चाहता तू हमारा वीर्य रस अपने बदन पर से साफ करे।”
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राहुल की ये सब बातें सुनकर तो मैं शर्म से पानी-पानी हो गई। और अब तो मेरे पास मेरी गांड नंगी रखके घूमने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। क्योंकि ऐसी वीर्य रस में भिगी हुई गांड पर पेटीकोट पहनूंगी तो वो गंदा हो जाएगा। और मुझे ऐसी एक पेटीकोट से काम चलाना था और मुझे मेरे कपड़ों को हफ्ते में सिर्फ एक बार धोने की इजाजत थी।
इस वजह से मेरे कपड़ों को गंदा रखने से बचाने के लिए मुझे घर में अब सिर्फ स्लीवलेस ब्लाउज और थॉन्ग पहनकर घूमना होगा। वो भी हमारे नौकर रामू के सामने। और मेरी गांड के दोनों कुल्हे उनके रस की वजह से चमक रहे थे जिससे मुझे और शर्म महसूस हो रही थी। और मैंने हाई हील्स पहने हुए थे जिससे जब भी मैं चलूंगी तो मेरी गांड और ज्यादा हिलेगी और थरथराएगी क्योंकि वो ज्यादा फैली हुई थी।
उस दिन मैं अपने आप को पूरा शर्मसार महसूस कर रही थी क्योंकि इस तरह मुझे किसी ने बेइज्जती नहीं की थी। मेरे पति ने मुझे उसके ही नौकर से रंडी की तरह चुदवाया ये तो कुछ नहीं था पर दोनों ने साथ में मुझे चोदा। शाम को जब मेरी गांड पर उन दोनों का रस सूख गया तो मैंने पेटीकोट पहन लिया।
घर में सब्जी खाली हो गई थी तो मैं राहुल के पास गई पैसे मांगने के लिए क्योंकि मैं 1 हफ्ते की सब्जी एक ही साथ खरीद लेती हूं और जिसके 200 रुपये होते हैं। पर राहुल ने मुझे सिर्फ 100 रुपये दिए और कहा, “जा तू और रामू दोनों सब्जी लेने मार्केट में जाओ और यही 100 रुपये में सब्जी लेकर आओ। रामू को पता है कैसे वो सब्जी वाला कम दामों में तुझे सब्जी देगा। और रामू को यहां बुला, मुझे उससे भी कुछ कहना है।”
जब रामू अंदर आया तो राहुल ने उसे कहा, “सुन अपनी ये रंडी के साथ तू सब्जी लेने जाएगा और ध्यान रखेगा कि सब्जी के मार्केट में ये अपनी गांड को अच्छी तरह से हिला-हिलाकर चले, और अपनी साड़ी के पल्लू से सिर्फ एक ही बूब्स ढके और ध्यान रखना कि उसकी ब्लाउज की डीप नेक हमेशा नंगी रहनी चाहिए।
तू भी सुन रही है ना रंडी? सब्जी मार्केट में तू 6 इंच की हाई हील्स पहनकर जाएगी जिस वजह से जब तू चले तो तेरी मटकती गांड को देखकर सब्जी वाले तुझे सामने से बुलाएं सब्जी खरीदने के लिए। और सब्जी को देखते वक्त तू बिना टांगें मोड़े नीचे झुकके सब्जी वाले को अपने हुस्न का नजारा कराएगी जिससे वो तुझे आधे दाम में सब्जी दे देगा। अगले हफ्ते मैं तुझे सिर्फ 50 रुपये दूंगा और उसके बाद सिर्फ 25, समझी?
और उसके अगले हफ्ते में तुझे बिना कुछ खर्च किए 1 हफ्ते की सब्जी खरीदनी होगी वो कैसे तू करेगी वो मैं तुझे बाद में बताऊंगा। चल अब तुम दोनों जाओ। और हां रामू, सब्जी मार्केट में तू हमेशा इस रंडी के एक पीछे-पीछे ही चलाना समझे और आके मुझे बताना लोग कैसे उसकी उछल-कूद करती हुई गांड को देखते थे। और तुम दोनों प्राइवेट रिक्शा करके मत जाना समझे, मेरे पास बेकार के पैसे नहीं हैं, दोनों बस में जाना।”
मैंने कहा, “पर बस में तो बहुत भीड़ होती है, खड़े रहने की भी जगह नहीं होती।”
राहुल गुस्से से बोला, “तो क्या हुआ रंडी? तू महारानी है जो खड़े-खड़े नहीं जा सकती?”
हम दोनों बस स्टेशन पर आए। रामू मेरे पीछे-पीछे ही चलता था और मेरी लटक-मटक होती हुई गांड का मजा लेता था। मैंने 6 इंच ऊंची हाई हील्स पहनी थीं जिसकी वजह से मेरी गांड जरूरत से ज्यादा हिलती थी जब मैं चलती थी। उसी वक्त एक बस आई और उसमें बहुत भीड़ थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं उसमें चढ़ना नहीं चाहती थी पर रामू ने मुझे धक्का दिया और जो लोग बस में चढ़ रहे थे उसके बीच में आ गई और चार-पांच मर्दों ने मुझे धक्का-धक्की देकर बस में चढ़ा दिया। मैंने पीछे देखा तो रामू काफी पीछे रह गया था और वो ऑलमोस्ट लास्ट में बस में चढ़ा। मेरे एक हाथ में एक झोला था जिसमें मैंने पर्स रखा था।
जैसे ही मैं बस में चढ़ी तो मैंने देखा वहां कहीं भी जगह नहीं थी बैठने के लिए तो मैं एक हाथ से ऊपर का रॉड पकड़कर खड़ी हो गई जिससे मेरी आर्मपिट जो स्लीवलेस ब्लाउज पहनने की वजह से नंगी थी वो सबको दिखने लगी। हमारे घर से सब्जी मार्केट लगभग आधा घंटा दूर है पर आज बहुत ट्रैफिक होने से बस बहुत धीमे चल रही थी.
और जैसे ही वो अगले स्टैंड पर रुकी तो और पैसेंजर अंदर चढ़े और उसी का फायदा उठाकर मेरे पीछे जो पैसेंजर था उसने मुझे आगे जाने को कहा, पर मेरे आगे जगह नहीं थी फिर भी मैं थोड़ी खिसकी। पीछे वाले पैसेंजर अब मेरी बिल्कुल पास आ गया और उसी वक्त मुझे अपनी गांड पर उसका तना हुआ लंड महसूस हुआ।
ओ गॉड! वो बस में भीड़ का फायदा उठा रहा था। और उसमें भीड़ थी तो मैं उसे ये भी नहीं बोल सकती कि दूर खड़े रहो। और मेरे आगे जो पैसेंजर था वो पता नहीं अचानक मेरी तरफ घूम गया। वो बोना था, उसका मुंह मेरी आर्मपिट पर आता था। गॉड! जब वो घूमा तो उसकी नाक सीधा मेरी आर्मपिट पर आता था।
वो मेरी आर्मपिट को सूंघने लगा और मेरे सामने देखकर हंसने लगा। उसी वक्त मेरे पीछे वाले आदमी ने अपना लंड अब धीरे-धीरे मेरी गांड की दरार में डालके अपनी स्ट्रॉन्ग उभार वाले एरिया से मेरी पूरी गांड को वो जोर-जोर से रगड़ने लगा। गॉड! मुझे वो जब मेरी गांड अपनी जांघों से मसल रहा था तो मजा आ रहा था और शर्म भी आ रही थी। उसका लंड मेरी गांड की दरार में पूरी तरह घुस गया था।
वो मेरे कान के पास अपना मुंह लाकर बोला, “साली क्या गांड है तेरी! पूरी मक्खन जैसी। म्म्म… साली तेरी गांड की दरार तो मेरे लंड को खा ही गई। म्म्म… साला तेरा पति कितना लकी है। चल अब थोड़ा झुकके मेरी जांघों के बीच अपनी गांड को गोल-गोल घुमाके मेरे लंड को रगड़ अपनी मक्खन जैसी चिकनी गांड से वरना मैं तुझे यहीं चोद दूंगा।”
गॉड! मैं उसकी धमकी से डर गई और झुकके अपनी गांड पीछे करके उसके लंड को अपनी गांड गोल-गोल घुमाके रगड़ने लगी एक रंडी की तरह। रामू पीछे से ये सब देख रहा था। मेरे पीछे खड़े आदमी का लंड और तन गया और उसने अपने एक हाथ को मेरी नंगी पेट पर रख दिया और मेरी नाभि के अंदर वो उंगली घुमाने लगा मेरी गहरी नाभि में।
ओ गॉड! मेरी चूत धीरे-धीरे वेट होने लगी। सांस तेज होने लगी। मेरे आगे जो खड़ा था वो बोना आदमी मेरे दोनों बूब्स की दरार को घूर रहा था। उसने एक हाथ मेरी ब्लाउज की नेक में डाला और मेरे एक बूब्स को हाथ में लेकर वो मसलने लगा। ओ नो गॉड! मैं देखने लगी आस-पास कोई मुझे बचाने वाला है कि नहीं.
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पर उस दोनों ने मुझे इस तरह से कवर किया था कि किसी और को जल्दी पता नहीं चल सकता था कि मेरे साथ क्या हो रहा है। और तभी हमारा स्टैंड आ गया और मैंने राहत की सांस ली पर जब मैं उतरने जा रही थी तो दोनों आदमियों ने मेरी गांड पर धीरे से चपत मारी और मैं बिना पीछे देखे नीचे उतर गई।
हम दोनों सब्जी मार्केट में गए। रामू मेरे पास आया और बोला, “सुनो साहब ने बोला है तू जो सब्जी वाला बूढ़ा है उसी से सब्जी लेगी समझी? वो देख कौने में वो 65 साल का बूढ़ा यूपी का भैया है। वो साला हमेशा तेरे जैसे सेक्सी बदन वाली हाउसवाइफ को घूरता है। जा उसके पास जाके सब्जी खरीद। अच्छी तरह भाव ताल कराना। तेरे पास सिर्फ 100 रुपये हैं और उसमें तुझे पूरे हफ्ते की सब्जी खरीदनी है समझी?”
मैंने दूर से उसे देखा। वो नीचे बैठा हुआ था, धोती और बनियान पहनकर। मैं उसके पास गई। मैंने देखा कि सभी सब्जी वाले मेरे उछलते बूब्स को और मेरी मटकती गांड के कुल्हों को देख रहे थे। मैं पास जाकर सब्जी वाले को खड़े-खड़े ही पूछा, “भैयाजी ये बैंगन के क्या भाव हैं?”
“40 रुपये किलो।”
“अरे इतना महंगा?”
“अरे मैडमजी आप देख तो कि बिल्कुल बड़े-बड़े और एकदम ताजा हैं।”
मैं नीचे झुकी और मेरा साड़ी का पल्लू आलरेडी एक बूब्स से हटा हुआ था जिससे जब मैं नीचे झुकी तो मेरी ब्लाउज की दरार में से मेरे दोनों बूब्स आधे नंगे बाहर दिखने लगे और वो बूढ़ा भैया दोनों आंखें फाड़-फाड़कर उसे घूरने लगा। मैं शर्म के मारे पानी-पानी हो गई पर मैं क्या करूं? मुझे सभी सब्जियां आधे दाम में खरीदनी थीं।
मैंने देखा कि उसने धोती पहनी थी और अंदर कुछ नहीं पहना था और उसकी धोती आधी ऊपर चढ़ी हुई थी और वो दोनों पैर मोड़के बैठा था। मुझे उसका तना हुआ लंड उसकी धोती के आर-पार साफ-साफ दिख रहा था। हे भगवान! न चाहते हुए भी मेरी नजर क्यों बार-बार वहां जाती थी। उसका लंड बहुत बड़ा था। इतना बड़ा लंड मैंने कभी नहीं देखा था। उसने धोती के अंदर कच्छा नहीं पहना था।
मैंने नीचे और झुकके कहा, “भैयाजी 15 रुपये किलो दे दो, मुझे 5 किलो लेने हैं।” ये कहके मैंने साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया जिससे वो मेरे आधे से ज्यादा नंगे बूब्स अपनी आंखों के सामने नंगे होते देखने लगा। और मैंने उसके लंड को और बड़ा होते हुए देखा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो मेरे दोनों नंगे बूब्स को देखके बोला, “अरे मेमसाहब आप भी क्या याद करेंगी? ले जाओ 10 रुपये किलो में। आपके लिए स्पेशल भाव ठीक है।”
इस तरह मैंने चार-पांच सब्जियां आधे से भी कम दाम में बूढ़े सब्जी वाले को मेरे दोनों बूब्स दिखाकर लीं। मुझे ऐसा करते वक्त बहुत लज्जा आई थी, क्योंकि रामू उस वक्त मेरे पास ही खड़ा होकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था। सब्जी खरीदकर हम दोनों बस स्टैंड पर आए। मैंने रामू को रिक्शा में जाने के लिए बोला तो रामू बोला,
“क्या तुम्हारे पास पैसे हैं रिक्शा में जाने के लिए?”
“मैं बोली हां, 100 रुपये में से 10 रुपये बचे हैं, बाकी तुम दे देना।”
रामू बोला, “10 रुपये में हम नहीं जा सकते। वहां तक का भाड़ा तो 50 रुपये होता है और मैं कहां से लाऊं 40 रुपये। ठीक है हम पैसेंजर रिक्शा में जाते हैं।”
मैंने बोला, “पर उसमें तो ठीक से बैठने के लिए भी जगह नहीं होती।”
“तो बस में जाते हैं।”
“अरे नहीं नहीं, पैसेंजर रिक्शा ही ठीक है। चलो वो खड़ी पैसेंजर रिक्शा।”
हम वहां गए तो वो रिक्शा ऑलमोस्ट भर गई थी और सिर्फ एक आदमी के लिए आगे ड्राइवर के पास बैठने के लिए जगह थी। ड्राइवर ने हमें कहा, “अगर आपको आना है तो दोनों आगे बैठ जाओ।”
रामू बोला, “मेमसाहब ये आखिरी सवारी है तो चलो आप मेरी गोद में बैठ जाना।”
मेरे पास कोई और चारा नहीं था और रामू के बैठने के बाद मैं रामू की गोद में बैठ गई और तभी मेरी दाहिनी गांड पर उसका तना हुआ लंड महसूस हुआ। पूरे रास्ते पर रामू जानबूझकर उसका लंड मेरी गांड पर घिसता रहा और बीच-बीच में वो मेरे बूब्स के साथ खेलता भी रहा। मेरे एक हाथ में सब्जी का थैला था और दूसरे हाथ से मैंने बैलेंस के लिए रिक्शा के रॉड को पकड़ा था। उस वजह से मैं पूरी तरह हेल्पलेस थी।
हम दोनों घर पहुंचे। घर पर राहुल हमारा इंतजार करते हुए टीवी देख रहा था। आते ही उसने गुस्से से मुझे पूछा, “अरे कहां रह गई थी इतनी देर? सब्जी खरीदने में तीन घंटे लगा दिए। खाना कौन तुम्हारा बाप बनाएगा? देख शाम के 8 बज गए हैं साली रंडी के औलाद। चल अब फटाफट खाना बना हमारे लिए।”
मैंने किचन में जाकर फटाफट उनके लिए खाना बनाया। वो दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठकर मेरा इंतजार कर रहे थे। मैंने अभी भी वही कपड़े पहनकर रखे थे। जब मैं खाना और दोनों के लिए थाली लेकर सब टेबल पर रखा तो राहुल ने मुझे कहा,
“सुन अब तू हमें साड़ी निकालकर ब्लाउज के बटन खोलकर खाना सर्व करेगी। और जब हम दोनों खाना खाएंगे उस वक्त तू डाइनिंग टेबल के नीचे कुतिया की तरह होके बारी-बारी हम दोनों का लंड अच्छी तरह से चूसती रहेगी जब तक हम दोनों खाना खत्म न कर लें, समझी? तो चल शुरू हो जा मेरी रंडी बीवी। हम दोनों को खाना तब तक हजम नहीं होता जब तक कोई हमारा लंड मुंह में न ले, समझी?”
मैंने खाना सर्व करने से पहले मेरी साड़ी निकाल दी और ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए जिससे मेरे दोनों बूब्स नंगे हो गए। और इसी तरह दोनों बूब्स को नंगे रखकर मैंने दोनों को खाना थाली में दिया। जब मैं खाना थाली में डाल रही थी तो मेरे बूब्स हिल रहे थे और दोनों मर्द, मेरा पति राहुल और उसका नौकर रामू बड़े मजे से उसका मजा ले रहे थे।
खाना देने के बाद मैं नीचे बैठ गई और कुतिया बनकर टेबल के नीचे घुस गई और पहले मैंने राहुल के लंड को उसके पैंट में से निकाला और उसे मुंह में लेकर चूसने लगी। पूरा लंड को मुंह में लेती और फिर उसे बाहर निकालती। उस वक्त मेरी गांड रामू की तरफ थी।
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रामू ने उसका फायदा उठाते हुए अपने एक पैर से मेरा पेटीकोट पहले मेरी गांड के ऊपर उठाके फिर दोनों पैरों को मेरी नंगी गांड पर रखके आराम से खाना खाने लगा। वो मेरी गांड को पैर रखने की जगह की तरह इस्तेमाल कर रहा था। साला हरामी की औलाद।
थोड़ी ही देर में राहुल ने उसका रस मेरे मुंह में निकाल दिया। मैं सब रस पी गई। और फिर मुड़के मैंने रामू के लंड को बाहर निकाला और थोड़ी शर्म महसूस करते हुए धीरे से मैंने अपना मुंह खोलके उसे अंदर लिया। मेरी गांड उस वक्त राहुल की तरफ थी। राहुल ने भी मेरा पेटीकोट गांड के ऊपर किया, पर उससे गांड पर पैर रखने की बजाय अपने पैर के अंगूठे से वो मेरी गांड के छेद को रगड़ रहा था।
मेरा मुंह धीरे-धीरे रामू के लंड पर ऊपर-नीचे हो रहा था और उसके लंड को मेरी स्लाइवा से मैं भिगो रही थी। रामू खाते-खाते बीच-बीच में मोनिंग कर रहा था। राहुल ने मेरी गांड के छेद को धीरे-धीरे अपने पैर के अंगूठे से रगड़ने के बाद अचानक उसे मेरी गांड में डाल दिया। “ओ मर गई रे…”
मैं रामू के लंड को मुंह में रखके ही चिल्लाई। और मेरी चिल्लाने से राहुल हंसते हुए बोला, “क्या हुआ रंडी साली? गांड में बड़े-बड़े लंड लेती है और मेरे पैर के अंगूठे से चिल्ला रही है।” और ऐसा कहके वो उसके अंगूठे को मेरी गांड में अंदर-बाहर करने लगा। मैं रामू के लंड को बहुत तेजी से चूस रही थी फिर भी वो झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
राहुल अब तेजी से उसके पैर का अंगूठा मेरी गांड में अंदर-बाहर करने लगा था। मेरी चूत धीरे-धीरे अब वेट हो रही थी। पता नहीं मुझे रामू का लंड चूसने में बहुत मजा आता था, क्योंकि वो राहुल से बड़ा था और मोटा भी था। पता नहीं मुझे लंड चूसने में इतना मजा क्यों आता था जिसे मैं पहले बहुत गंदा काम समझती थी पर अब मैं अपने ही पति के लंड को चूसते वक्त मजे ले रही थी।
राहुल को तो अभी भी ऐसा ही था कि मुझे लंड चूसना गंदा लग रहा था, पर रामू को पता चल गया था कि मुझे बड़े और मोटे लंड चूसने में बहुत मजा आता है, क्योंकि मैं उसका बड़ा लंड बहुत ही जोर से और पूरा अंदर लेकर उसे अपने मुंह से अच्छी तरह से चारों तरफ से चूसती हूं। मुंह में अपनी जीभ उसके आस-पास एक सांप की तरह घुमाती हूं।
जिसकी वजह से उसे पता चल गया था कि उसकी साहब की बीवी अब लंड को चूसने के लिए हमेशा प्यासी रहती है। मैंने रामू के लंड को बिना रुके 20 मिनट तक चूसा फिर भी वो झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। मैंने अब उसके लंड पर अपने होठों को और जोर से कसा और फिर जोर-जोर से मेरे मुंह को ऊपर-नीचे करने लगी और उसके लंड को पूरा अंदर ले लिया।
वो मेरे गले के अंदर घुस गया। अब मैंने उसके लंड को मुंह में रखकर अपनी जीभ को बाहर निकाला और उसे उसके काले-काले हेयरी बॉल्स पर मैं रगड़ने लगी। मेरी नाक उसकी उभार पर टच हो रही थी और उसके प्यूबिक हेयर मेरी नाक के अंदर भी घुस गए थे।
उसका पूरा लंड मुंह में रखकर मैं उसके बॉल्स को चाटने लगी और जोर-जोर से पूरे लंड को चूसने लगी जिसकी वजह से अचानक उसका बदन कम्पन करने लगा और तब मुझे पता चल गया कि अब थोड़ी ही देर में वो झड़ जाएगा। और एक ही मिनट में रामू का रस भी सीधे मेरे गले के अंदर निकाल गया। जो सीधा मेरे गले से पेट में उतर गया।
हे भगवान! मैं अपने आप पर शर्म महसूस करने लगी, क्योंकि मुझे अब अपने ही पति के नौकर का लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था और मुझे बार-बार उसे अपने मुंह में और चूत में भी लेने की ख्वाहिश जग रही थी। मुझे पता नहीं चल रहा था मेरे मन में अचानक ऐसी गंदी इच्छाएं कैसे आने लगी थीं।
मैं अपने आप को ऐसे गंदे विचारों से अलग करने की कोशिश करने लगी पर मेरे मन में बार-बार रामू का लंड ही आने लगा। काला, बड़ा, लंबा लंड पूरा 10 इंच लंबा जिसके चारों तरफ घने-घने लंबे-लंबे बाल हैं फिर भी मुझे वो चूसने में अच्छा लगता था। मुझे ऐसा लगने लगा कि मैं रामू के लंड की दीवानी हो गई हूं अब और उसे चूसने के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाऊंगी।
उस रात राहुल और रामू दोनों थक गए थे इस वजह से दोनों जल्दी सो गए, और मैं भी जल्दी सो गई। दूसरे दिन राहुल के ऑफिस जाने के बाद मैं इंतजार कर रही थी कब रामू आए और मुझे उसका लंड दिखाए। मैं उसके लंड को देखने के लिए बेकरार हो गई थी। पर मैं उसे सामने से ये कह भी नहीं सकती थी क्योंकि मैं अभी भी रामू और राहुल के सामने शर्मीली होने का नाटक कर रही थी।
मैं रामू के कमरे में चाय लेकर गई। वो अभी भी सो रहा था। उसने अब नी लेंथ की बॉक्सर पहनी थी और मैंने ध्यान से देखा तो अंदर शायद उसने कुछ नहीं पहना था। मैं उसके पास गई और उसे उठाया, “रामू उठो देखो सुबह के 11 बज गए।”
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उसने आंखें खोलीं। मैं झुकी हुई थी और मैंने अभी भी वही ब्लाउज पहना था और सारे बटन खुले थे और बिना साड़ी की थी। मेरे दोनों बूब्स नीचे उसके मुंह के सामने झूल रहे थे। वो अंगड़ाई लेते हुए उठा और चाय पीके वहां से चला गया और मुझे कहा, “जल्दी से साहब के लिए खाना तैयार कर दो, मुझे देने जाना है 12 बजे। अगर देर हो गई तो फिर मुझे मत कहना।”
मैं फटाफट खाना बनाने लगी और खाना तैयार करके उसे डिब्बे में भरके रामू को दिया और वो बिना कुछ कहे वो लेकर राहुल की ऑफिस चला गया। दोपहर को मैं सब काम खत्म करके सो गई। तभी 3 घंटे बाद दरवाजे की घंटी बजी। मैं साड़ी पहनकर दरवाजा खोलने गई।
दरवाजा खोला तो रामू था और उसके साथ और चार मर्द थे। मैं पहले तो घबरा गई। रामू सबको अंदर आने के लिए बोला और वो सब मेरे घर में घुसके सब लोग सोफे पर बैठ गए। रामू भी सोफे पर बैठा। मैंने रामू से पूछा ये सब कौन हैं?
रामू बोला, “सुन ये सब मेरे दोस्त हैं, और मेरी तरह ये लोग भी अलग-अलग जगह नौकर का काम करते हैं। पर ये लोग मेरी तरह नसीबवाले नहीं हैं। उनके साहब और मेमसाहब उनसे बहुत काम करवाते हैं। आज सबने छुट्टी ली है तो मैंने सबको यहां इनवाइट किया है दिखाने के लिए साहब कैसे मुझे रखते हैं, नौकर की बजाय अपनी ही बीवी का मालिक कैसे बनाया है। ये मुझे दिखाना है और ये दिखाने मैं सबको यहां लाया हूं समझी?”
“चल जल्दी से हम सबके लिए खाना लगा टेबल पर और पहले ये साड़ी निकाल दे बदन से। मैं तुझे सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में ही देखना चाहता हूं।”
मेरे सामने रामू के साथ पांच नौकर बैठे थे और वो साला कमीना मुझे साड़ी निकालने को बोल रहा था।
मैंने कहा, “मैं नहीं निकालूंगी साड़ी। मैं ब्लाउज और पेटीकोट में कैसे घूमूं इन नौकरों के सामने?”
“साली नाटक करती है मेरे सामने। लगता है साहब को सब बताना पड़ेगा कि तुझे मेरा लंड चूसने में कैसे मजा आया है, कैसे तू मजे ले-लेकर मेरा लंड चूसती है। मुझे सब पता है तू बड़े-बड़े लंड को चूसने के लिए हमेशा बेकरार रहती है। सुन अगर मेरी बात नहीं मानी तो मैं साहब को सब बता दूंगा समझी?”
मैं शर्म से पानी-पानी हो गई रामू की ये सब बातें सुनकर। उसने इतनी गंदी बातें उसके नौकर दोस्तों के सामने इस तरह कही कि मैं शर्म से अगर धरती फट जाए तो मरने के लिए तैयार हो गई। अब मेरे पास साड़ी निकालने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उनके सामने मेरी साड़ी निकाल दी। मेरा ब्लाउज स्लीवलेस और फ्रंट और बैक दोनों जगह से डीप कट था। मेरे आधे बूब्स और मेरी आधी से भी ज्यादा पीठ, मेरी दोनों मुलायम बाजू और दोनों कंधे अब बिल्कुल नंगे हो गए, और मेरी नाभि भी। मैं ऐसे ही पेटीकोट और ब्लाउज में किचन की तरफ गई।
मुझे पता था वो पांचों मेरी गांड को ही घूर रहे होंगे। मैं वापस खाने की प्लेट्स और थाली लेकर आई और उसे सबके सामने रखा। मैंने खड़े-खड़े उन सबको ब्लाउज और पेटीकोट पहनकर खाना सर्व किया। मुझे खाना देते वक्त झुकना पड़ता था इसलिए मेरे सामने वाले नौकर को मेरे बूब्स का बहुत नजदीक से नजारा मिलता था।
रामू ने मुझे सबका परिचय दिया एक के बाद एक, “ये शंकर है, ये वीरू है, ये सुंदर है और ये जीवन है।”
मैंने सबको देखा। वो सब रामू से बड़े थे लगभग 25 से 30 साल के बीच।
रामू खाना खाने के बाद बोला, “अच्छा सुनो साहब तीन दिन के लिए नहीं आने वाले हैं इसलिए तीन दिन के लिए ये सभी लोग यहीं रहेंगे और तुझे हम सबका काम भी करना होगा हमारी नौकरानी बनके समझी? और एक बात तो हमेशा इस तरह ब्लाउज और पेटीकोट में ही रहेगी और तू मेरी ही नहीं, तीन दिन के लिए हम पांचों की नौकरानी है समझी? और तू आज से मुझे मालिक कहेगी, रामू नहीं। और मेरे दोस्तों को भी मालिक कहेगी।”
“जी मालिक।”
तभी शंकर बोला, “अरे रामू हमारे यहां तो नौकरानी के कपड़े अलग होते हैं।”
“कैसे होते हैं उनके कपड़े?”
“अरे हमारे यहां तो नौकरानी वो पीछे डोर वाली चोली और घुटनों तक पहुंचे ऐसा घाघरा पहनती है। अगर आप कहो तो मैं अभी मेरे घर से लेकर आऊं क्योंकि मेरी बीवी भी ऐसे ही कपड़े पहनती है जब हम यूपी जाते हैं।”
“अरे हां ले आओ जल्दी से, बहुत अच्छे। हम इसे भी वही कपड़े पहनाने देंगे।”
“और हां एक और बात, हमारे यहां नौकरानी अंदर कुछ नहीं पहनती। रामू तो इसे भी अंदर कुछ मत देना पहनाने के लिए।”
ओओ मैं ये सुनकर सिहर सी रह गई। ये लोग मेरे बारे में कैसी बात करते थे, और मुझे ये सब सुनना पड़ता था।
शंकर सिर्फ 15 मिनट में मेरे लिए कपड़े लेकर आ गया। उसने मुझे वो चोली और घाघरा दिया और कहा, “सुन अंदर जो भी कुछ पहना है उसे निकाल देना समझी?”
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मैं वो लेकर अंदर गई। मैंने साड़ी कपड़े निकाल दिए। वो थॉन्ग भी। अब मैं मिरर के सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। मैंने पहले चोली हाथ में ली। मैंने चोली को देखा। चोली बिना स्लीव की थी और बहुत ही छोटी थी। मैंने देखा तो वो बिना बटन की थी। मैंने उसे मोड़ा तो देखा कि उसके पीछे दो डोर थीं और कुछ नहीं था। ओओ ये तो बैकलेस थी।
एक डोर गर्दन के पीछे और दूसरी पतली डोर पीठ के बीचोबीच, और कुछ नहीं था चोली को बांधने के लिए। सिर्फ दो पतली डोर। मैंने चोली को पहना और मैंने गर्दन के पीछे वाली डोर तो बांध ली पर पीठ पर जो डोर थी वो मुझसे नहीं बंध पा रही थी। मुझे लगा कि रामू को बुलाकर मुझे वो बंधवानी पड़ेगी। आगे से चोली इतनी छोटी थी कि मेरे बूब्स की सिर्फ दो निप्पल्स ही वो ढकती थी, बाकी के दोनों बूब्स बिल्कुल नंगे बाहर झांक रहे थे।
मैंने रामू को बुलाने से पहले घाघरा पहन लेना उचित समझा इसलिए मैंने घाघरा उठाया और उसे पहना। वो भी बहुत छोटा था। वो मेरे घुटनों से भी ऊपर तक का था और पीछे से बहुत ही टाइट था, जिसकी वजह से मैं मुश्किल से उसका नाड़ा बांध पाई। और टाइट होने की वजह से मुझे कमर के बहुत नीचे उसे पहनना पड़ा।
मैंने घूमके देखा तो पीछे से मेरी पूरी पीठ और कमर नंगी थी, और आगे से मेरी ऊपर के बदन पर सिर्फ मेरी निप्पल्स ही ढकी हुई थीं उस छोटी सी चोली में। साले उस बदमाश शंकर ने बहुत ही छोटी चोली और घाघरा चुना था मेरे लिए। मैं सोचने लगी मैं कैसे उन सबके सामने ऐसी चोली और घाघरे में काम करूंगी और खाना दूंगी सबको। और मैंने ब्रा या पैंटी भी नहीं पहनी थी कि जिससे मैं अपने प्राइवेट पार्ट्स ढक सकूं। मैंने घाघरा पहनने के बाद रामू को आवाज दी,
“अरे रामू मालिक जरा अंदर तो आना।”
रामू अंदर आया। मैं घूमके खड़ी थी। वो मेरी नंगी पीठ और टाइट घाघरे में मेरी गांड को देखकर हंसने लगा और आके ही मेरी गांड पर अपना हाथ घुमाने लगा और उसने कहा, “ओओ शिल्पा रंडी तो तू सच में एकदम खिल उठी है इन कपड़ों में। बिल्कुल रंडी लग रही है। म्म्म… साला शंकर भी पूरा छुपा रुस्तम निकला। तेरी गांड तो इस घाघरे में और बड़ी दिख रही है। बोल क्या काम था रंडी?”
“मालिक जरा मेरी चोली की डोर बांध दो ना, मुझसे नहीं बंध रही।”
“अरे क्यों नहीं?”
और वो मेरे पीछे आया। उसने पहले तो उसका लंड मेरी गांड पर सटा दिया और फिर कसके मेरी चोली की डोर को बांध दिया। बहुत ही कसके। ओओ मैं चिल्ला उठी, “अरे जरा धीरे से।”
“साली क्यों? बहुत लग रहा है क्या? सुन तुझे ये डोर कसके ही बंधवानी होगी जिससे जब तू चोली निकाले तो तेरी गोरी-गोरी पीठ पर डोर के निशान पड़ जाएं समझी? क्या मुलायम पीठ है तेरी।”
और वो मेरी नंगी पीठ पर अपना हाथ घुमाने लगा और मेरी गांड पर अपना लंड गोल-गोल रगड़ने लगा। उसके बाद उसने मेरा घाघरा ऊपर उठाया और मेरी नंगी गांड पर उसका लंड जो आलरेडी नंगा था घुमाने लगा और मेरी पीठ को चाटने लगा अपनी लंबी जीभ से। गॉड! मैं मोनिंग करने लगी। मैंने दोनों हाथ मेरे सामने जो मिरर था उस पर रख दिए और थोड़ा बेंड होके मेरी गांड पीछे पुश की।
“साली रंडी मुझे पता है तुझे मेरा लंड बहुत पसंद है। तू मेरे लंड को चाटने के लिए कुछ भी कर सकती है, सच है ना ये?”
“हां।”
“तो सुन अब से तू सिर्फ मेरा ही लंड मुंह में लेगी, किसी और का नहीं। तेरे पति का भी नहीं। उसे तो मैं संभाल लूंगा समझी? और मेरे जो सब दोस्त हैं वो तो तेरी चूत और गांड के दीवाने हैं। जब वो लोग तेरी चूत और गांड में लंड डालें तो तू मेरे लंड और बॉल्स को चाटेगी और चूसेगी समझी?”
“जी मालिक।”
“और सुन मेरे लंड में से जो भी रस निकले वो पूरा का पूरा रस तुझे पीना पड़ेगा। अगर एक भी बूंद नीचे गिरी तो तुझे वो नीचे गिरी बूंद को अपनी जीभ से साफ करना पड़ेगा समझी? छिनाल कुतिया बनके नीचे गिरी मेरी रस की बूंद को चाटना पड़ेगा।”
“मालिक मैं सब रस पी जाऊंगी, नीचे कुछ नहीं गिराने दूंगी।”
“शाबाश मेरी कुतिया, शाबाश।”
और वहीं उसने खड़े-खड़े मेरी चूत की प्यास बुझा दी और उसका रस मेरी चूत में डाल दिया। मुझे चोदने के बाद वो बोला, “चल अब जल्दी से घर का सब काम खत्म कर। आज रात हमने शराब की महफिल रखी है और तू हम सबको शराब सर्व करेगी तो जल्दी काम खत्म कर जिससे जल्दी से हम महफिल शुरू कर सकें समझी?”
मैंने खाना फटाफट बना दिया। उसके बाद सबको खाना खिलाने के बाद सब काम खत्म करके मैं जब मेन रूम में आई तो देखा वो पांचों नीचे बैठे हुए थे सर्कल में और जुआ खेल रहे थे। उनके पास में शराब की बोतल भी थी। रामू ने मुझे पूछा, “क्या बर्तन हो गए? चल अब तू भी यहां आ मेरे पास बैठ। हम सबको तू आज शराब पिलाएगी आ जा। चल ये सब ग्लास में शराब डाल।”
मैं रामू के पास बैठी, और मैंने पांचों ग्लास में शराब डाल दी और उसे एक-एक करके सबको दिया। मैं जब ग्लास दे रही थी तो मैं अपने घुटनों के बल खड़ी थी और पूरा 90 डिग्री झुकके ग्लास दे रही थी। रामू मेरे पास में ही था। उसने उसी वक्त मेरी नंगी पीठ पर अपनी ग्लास की पूरी शराब डाल दी,
और मेरी पीठ को शराब से भिगो दिया और हंसते-हंसते बोला, “आज तो मेरी शराब के साथ तेरी ये मक्खन जैसी पीठ को भी खुश मन भर के चाटूंगा। जब तक मैं ये शराब को तेरी नंगी पीठ पर से चाट न लूं तब तक ऐसे ही झुकी हुई रहेगी समझी रांड?”
और मैं झुकी हुई थी इस वजह से मेरे बिना ब्रा के दोनों बूब्स ऑलमोस्ट जो मेरे सामने बैठे थे उन सबको नंगे दिख रहे थे। रामू मेरी नंगी पीठ पर से शराब को अपनी लंबी जीभ से चाटने लगा। और मेरा पूरा बदन कांपने लगा। मुझे गुदगुदी होने लगी। वो जोर-जोर से कुत्ते की तरह मेरी शराब से भिगी पीठ को चाटता था। गॉड! मुझे भी बहुत मजा आता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरी पीठ को पहली बार कोई ऐसे चाट रहा था। मैं धीरे-धीरे मोनिंग कर रही थी। मैंने देखा मेरे सामने बैठा शंकर अपने होठों को चाटके मेरे बूब्स को घूर रहा था। रामू मेरी पीठ को चाटते-चाटते मेरे घाघरे को मेरी गांड के ऊपर अचानक उठा दिया और मेरी गांड को नंगा कर दिया। गॉड! मैं अब शॉक्ड हो गई। उसने अपनी एक हाथ को शराब से भिगो दिया और फिर शराब से भिगी हुई दो उंगलियां को मेरी चूत में डाल दी पूरी की पूरी। उस वक्त मेरे मुंह से चीख निकल गई। “आआ…”
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“साली को मजा आ रहा है देखा?”
और मैं कुछ और रिएक्शन दूं उसके पहले ही उसने शराब से भिगा हुआ अपना अंगूठा मेरी गांड में घुसेड़ दिया। “आआओ… वहां नहीं…”
“साली क्यों? ओ तेरी गांड तो बहुत टाइट है।”
और वो जोर-जोर से हंसके मेरी गांड और चूत दोनों को अपनी उंगली और अंगूठे से चोदने लगा। मैं कुतिया की तरह झुकी हुई थी। मैंने दोनों हाथों को नीचे फ्लोर पर रख दिया सपोर्ट के लिए और मैं मोनिंग करने लगी। गॉड! मैं अपने आप को पूरी बेशर्म महसूस कर रही थी।
“तू अब जब तक हम जुआ खत्म न करें तब तक ऐसे ही कुतिया बनके मेरे पास ही बैठेगी समझी?”
रामू मुझे फिन्गरिंग करते-करते जुआ खेलने लगा। उसके साथ चारों नौकर भी उसकी इस हरकत का मजा लेने लगे। मैंने देखा सबके लंड पूरी तरह से तने हुए थे। सब लोग सिर्फ निक्कर पहनकर बैठे थे। रामू एक हाथ से मेरी गांड और चूत में उंगली अंदर-बाहर कर रहा था और दूसरे हाथ में उसने तीन कार्ड लिए थे और उसे देख रहा था। उसने बाजी लगाई और वो हार गया। वो लगातार मुझे फिन्गरिंग कर रहा था बिना रुके। और तभी वो बाजी हार गया। शंकर जीत गया।
शंकर: “रामू अब तो क्या लगाएगा? तेरे सब पैसे तो तूने हार दिए।”
रामू: “अच्छा मुझे मेरे हारे हुए पैसे किसी भी कीमत पर वापस जीतने हैं। तो सुनो मैं मेरी तरफ से इस गेम में मैं हमारी नौकरानी शिल्पा का मुंह लगाता हूं। यानी अगर मैं जीत गया तो सारे पैसे मेरे और अगर कोई और जीतता है तो ये शिल्पा उसका लंड चूसेगी। वो तब तक चूसती रहेगी जब तक उसके बाद वाली गेम खत्म न हो जाए। ठीक है?”
मैं ऑलमोस्ट शॉक्ड हो गई रामू की बात सुनके। गॉड! ये कुत्ता क्या कह रहा है? मुझे सबके सामने उसका लंड चूसना पड़ेगा जो इस गेम को जीतेगा।
और शंकर ने कार्ड दिए सबको और गेम शुरू हुआ। रामू ने कहा, “इस रंडी का मुंह मैंने खेला।” शंकर 10 हजार और बाकी सबने कार्ड रख दिए। अब सिर्फ शंकर और रामू ही थे गेम में।
और जब बाजी को खोला तो देखा कि शंकर जीत गया है। इसका मतलब अब मुझे उसका लंड चूसना पड़ेगा जब तक दूसरी गेम खत्म न हो। ओ भगवान।
शंकर ने उसका लंड निक्कर में से बाहर निकाल दिया। वो रामू से भी बड़ा था और पूरा तना हुआ था। और काला-काला मोटा लंड। मैं शर्म से पानी-पानी होने लगी। रामू ने मेरे सिर पर हाथ रखा और मेरे सिर को नीचे की तरफ दबाया तो मेरा मुंह अब शंकर के लंड पर आ गया। मेरी गांड हवा में ऊपर उठी हुई थी।
मैंने अपना मुंह खोला और शंकर के लंड को धीरे-धीरे मुंह में लेने लगी। उसी वक्त शंकर ने जोर से मोनिंग किया। पीछे इस बार रामू ने पत्ते दिए। तीन-तीन। पर सबका ध्यान मेरी तरफ था। सब मेरे मुंह को श्याम के लंबे लंड पर ऊपर-नीचे होते हुए देख रहे थे। किसी ने भी कभी ऐसा नजारा नहीं देखा था। गॉड! मुझे शंकर के लंड को चूसने में और मजा आ रहा था। उसका लंड रामू से भी बड़ा था।
मैं मजे से अपने मुंह को ऊपर-नीचे कर रही थी। मेरे मुंह में से सलाइवा निकलकर उसके लंड और हेयरी बॉल्स पर उतर रही थी। वो जुआ खेलते-खेलते बीच-बीच में मोन करता रहता था। इस बार की बाजी में रामू ने मेरी चूत को लगाया और कहा, “जो भी जीतेगा वो इसे चोद सकेगा। शिल्पा तूने उसकी गोद में बैठकर उसका लंड अपनी चूत में लेकर उसके लंड से अपने आप को चुदवाना पड़ेगा समझी?”
मैं शंकर का लंड चूसते-चूसते और शर्मसार महसूस करने लगी।
“और सुन तू ये सोचती होगी कि तुझे इस गेम के बाद शंकर का लंड चूसना नहीं पड़ेगा तो गलत सोचती है। तुझे उसका लंड तब तक चूसते रहना है जब तक वो सारे पैसे हार न जाए समझी? अगर अगली गेम में शंकर के अलावा और कोई जीतता है तो तू चुदवाएगी भी और शंकर का लौड़ा भी चूसेगी समझी?”
और मेरी कमनसीब से इस बार भी वो साला रामू नहीं जीता और उसके बदले जीवन जीत गया। और मुझे क्या करना था वो मुझे पता था। मैंने शंकर का लंड चूसते-चूसते मेरी गांड को जीवन की जांघ पर रखी। उसने बिना रुके अपना लंड बाहर निकाला। मैंने अपने हाथ से उसका लंड पकड़ा और उसे अपनी चूत में डाल दिया।
ओओ वो वाकई सबसे बड़ा लंड था। जीवन के मुंह से आवाज निकल गई। अभी तक मैं दो बार शंकर का रस पी चुकी थी पर फिर भी मुझे उसका लंड चूसते रहना था। मैं अब अपनी गांड को ऊपर-नीचे करके जीवन के लंड को अपनी चूत में अंदर-बाहर करने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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और उसी वक्त मैं शंकर के लंड को भी मेरा मुंह ऊपर-नीचे करके उसे अपने मुंह में अंदर-बाहर करने के साथ चूसने भी लगी। मैं बिल्कुल रंडी लग रही थी। एक लंड मेरे मुंह में था और दूसरा मेरी चूत में पूरा, और मैं खुद अपने मुंह को और चूत को चुदवा रही थी, एक रंडी की तरह।
अब और बाजी शुरू हुई। पर इस बार रामू जीत गया। उसने एक साथ सबके 5 हजार रुपये जीते यानी उसके पास एक ही बाजी में 20 हजार आ गए। और इसकी वजह से मेरी गांड बच गई जो उसने बाजी में लगाई थी। और उसकी अगली बाजी में भी वो जीत गया।
अब उसके पास 40 हजार थे और बाकी सब के पास सिर्फ 5 हजार बचे थे। इन दो बाजी पूरी हुई तब तक दोनों शंकर और जीवन थक गए थे तो मैं अब रामू के पास बैठी थी। मैंने शंकर के रस को चार बार पिया और जीवन ने मेरी चूत में तीन बार रस डाला। रामू ने कहा अब मुझे नहीं खेलना। पर बाकी के चारों ने कहा नहीं ऐसा नहीं चल सकता अब तुम्हें आखिरी बाजी तो खेलनी पड़ेगी।
और ओवर कॉन्फिडेंस में रामू ने 40 हजार लगा दिए और सब हार गए वीरू से। एक ही बाजी में। रामू ने कहा अब मैं आखिरी बाजी खेलना चाहता हूं। और इस बार मैं फिरसे इस रंडी की गांड को दांव पर लगाता हूं। पर मेरी शर्त ये है कि तुम सबको अपने सारे पैसे दांव पर लगाने पड़ेंगे। अगर तुममें से एक भी जीत गया तो इस रंडी की गांड पूरे एक हफ्ते के लिए तुम सबकी और अगर मैं जीत गया तो तुम सबके सारे पैसे मेरे समझे।
और चारों हंसके बोले ठीक है हमें मंजूर है पर हमें उसकी गांड, मुंह, चूत और बॉल्स भी चाहिए सिर्फ गांड से नहीं चलेगा।
“ठीक है मुझे मंजूर है। पर बाजी सिर्फ दो लोगों के बीच होगी ठीक है? जिसके पत्ते भारी हों वो जीत गया। ये बाजी मेरे और तुम चारों के बीच। यानी मेरे तीन पत्ते और तुम चारों के तीन मंजूर है।”
तुम वीरू के 40 हजार और तुम सबके 10-10 यानी टोटल 70 हजार ठीक है? और मेरी तरफ से ये रंडी का पूरा नंगा बदन एक हफ्ते के लिए तुम्हारा अगर मैं हारा तो।
रामू ने अपनी आखिरी बाजी लगाते हुए कहा, “ठीक है, बाजी मेरे और तुम चारों के बीच होगी। मेरे तीन पत्ते, तुम चारों के तीन-तीन। अगर मैं जीत गया तो तुम सबके सारे पैसे मेरे। और अगर तुममें से कोई एक भी जीत गया तो ये रंडी शिल्पा पूरे एक हफ्ते के लिए तुम सबकी। उसकी गांड, चूत, मुंह, बूब्स, सब कुछ। उसके बॉल्स चूसने से लेकर पूरी रात चोदने तक, जो मन करे वो कर सकते हो।”
चारों नौकर — शंकर, वीरू, सुंदर और जीवन — जोर-जोर से हंस पड़े। उनकी आंखों में भूख और उत्तेजना साफ दिख रही थी। वीरू ने कहा, “ठीक है मालिक, मंजूर है। लेकिन हम शर्त बढ़ाते हैं — अगर हम जीते तो पूरे हफ्ते ये रंडी नंगी ही रहेगी। सिर्फ चोली और घाघरा कभी-कभी, वो भी जब हम कहें। और हर रोज कम से कम तीन बार हम सबकी चुदाई झेलेगी।”
रामू ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “मंजूर है। चलो शुरू करते हैं।”
मैं कुतिया की मुद्रा में रामू के पास बैठी हुई थी। मेरी चोली की दोनों डोरें कसकर बंधी हुई थीं, जिससे मेरी निप्पल्स बेयरली ढकी हुई थीं और बाकी बूब्स पूरी तरह नंगे थे। घाघरा मेरी कमर से काफी नीचे था, मेरी गांड और चूत आसानी से एक्सपोज हो रही थी। मेरे शरीर पर पहले से ही शराब की महक और उन सबके रस के निशान लगे हुए थे। मैं शर्म से कांप रही थी, लेकिन अंदर ही अंदर एक अजीब सी गर्मी भी महसूस हो रही थी।
गेम शुरू हुई। रामू ने पहले तीन पत्ते बांटे। कमरे में सन्नाटा छा गया था, सिर्फ ताश के फड़फड़ाने की आवाज और मेरी तेज सांसें सुनाई दे रही थीं। रामू के पत्ते अच्छे आए — एक किंग, एक क्वीन और एक ऐस। उसने आत्मविश्वास से मुस्कुराकर उन्हें रख दिया। अब चारों की बारी। वीरू ने पहले पत्ते खोले — तीन नंबर के पत्ते।
वो हार गया। सुंदर के भी औसत पत्ते आए। जीवन के पत्ते ठीक-ठाक थे। लेकिन आखिर में शंकर ने अपना तीसरा पत्ता खोला — वो एक जोकर था, लेकिन गेम के नियमों के हिसाब से वो सबसे ऊंचा माना गया। रामू का चेहरा उतर गया। उसने 40 हजार रुपये एक झटके में गंवा दिए। चारों नौकर जोर-जोर से चिल्लाकर जश्न मनाने लगे। शंकर उठा, मेरे पास आया और मेरे बालों को पकड़कर मेरे चेहरे को ऊपर किया।
“अब तू हमारी है रंडी। पूरे एक हफ्ते के लिए।”
उसने मुझे खींचकर खड़ा किया और मेरी चोली की डोरें खोल दीं। चोली मेरे पैरों में गिर गई। अब मैं सिर्फ घाघरे के साथ आधी नंगी खड़ी थी। शंकर ने घाघरे का नाड़ा खींचा और उसे भी नीचे कर दिया। मैं पूरी तरह नंगी हो गई। चारों ने मुझे घेर लिया। रामू थोड़ा दूर बैठ गया, लेकिन उसकी आंखों में भी वही भूख थी। शंकर ने मुझे सोफे पर झुकाया, मेरी गांड ऊपर की तरफ। उसने अपना मोटा, काला लंड मेरी चूत पर रगड़ते हुए कहा, “पहले तो हम सब मिलकर तेरी चूत को फाड़ते हैं।”
वीरू ने मेरे मुंह में अपना लंड ठूंस दिया। सुंदर और जीवन ने मेरे बूब्स मसलने शुरू कर दिए। शंकर ने पीछे से एक जोरदार धक्का दिया। उसका लंड मेरी चूत में आधा घुस गया। मैं चीख उठी, “आआआह… धीरे… बहुत बड़ा है…”
लेकिन कोई नहीं रुका। शंकर ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ मेरी गांड लहरा रही थी। वीरू मेरे मुंह को फाड़ता हुआ चूसवा रहा था। सुंदर मेरी निप्पल्स को चूस रहा था और जीवन मेरी कमर पकड़कर मुझे और पीछे खींच रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लगभग 15 मिनट तक वे सब बारी-बारी मेरी चूत और मुंह में लंड डालते रहे। फिर शंकर ने कहा, “अब गांड की बारी।” उसने मेरी गांड पर थूक लगाया और अपना मोटा लंड मेरी गांड के छेद पर रख दिया। मैं डर से कांपने लगी। “नहीं… वहां नहीं… पहली बार है… दर्द होगा…”
शंकर हंसा, “रंडी, आज से तेरा सब कुछ हमारा है।” और एक जोरदार धक्के से उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। “मर गई रे… आआआह…!” मेरी चीख पूरे घर में गूंज गई। आंसू मेरी आंखों से बहने लगे। लेकिन शंकर ने रुकने की बजाय और तेजी से चोदना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा मजा भी आने लगा। मेरी चूत से रस टपकने लगा।
एक-एक करके सभी ने मेरी गांड मारी। रामू भी शामिल हो गया। वे मुझे हर तरीके से चोद रहे थे — कभी दो-दो लंड एक साथ (एक चूत में, एक गांड में), कभी मैं ऊपर बैठकर खुद चुद रही थी, कभी वे मुझे उठाकर खड़े-खड़े चोद रहे थे। रात के 2 बजे तक लगातार चुदाई चलती रही। अंत में चारों ने अपनी-अपनी झड़ाई मेरे मुंह, चूत, गांड और बूब्स पर की। मैं पूरी तरह उनके वीर्य से लथपथ हो गई थी।
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अगले तीन दिन मेरे लिए नर्क और स्वर्ग दोनों थे। सुबह से रात तक मैं उनकी नौकरानी और रंडी दोनों थी। सुबह उठते ही मुझे उनके लंड चूसने पड़ते। ब्रेकफास्ट बनाते वक्त वे पीछे से चोदते। दिन में घर के सारे काम नंगी अवस्था में या सिर्फ चोली-घाघरे में। कोई भी काम करते वक्त वे मुझे रोककर चोद देते। शाम को शराब की महफिल। वे मुझे शराब पिलाते, फिर मेरी नंगी देह पर शराब डालकर चाटते। रात को सामूहिक चुदाई। कभी वे मुझे बेड पर बांधकर घंटों चोदते, कभी बाथरूम में, कभी किचन में।
तीन दिन बाद राहुल वापस आया। रामू ने उसे सब कुछ बता दिया था। राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा है। अब से हर हफ्ते कम से कम दो दिन ये लोग आएंगे। और तू उनकी पूरी सेवा करेगी।” मैं अब पूरी तरह बदल चुकी थी। गांव की शर्मीली शिल्पा अब शहर की एक आज्ञाकारी, लंड की भूखी रंडी बन गई थी। रामू का लंड अब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया था।
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