Ayyashi Ki Hindi Sexy Kahani
मेरा एक दोस्त है अरुण, वो बहुत ही बिंदास बंदा है और बहुत डेयरिंग बाज़ भी है और छोटी-मोटी नेतागिरी भी करता है। हम दोनों एक-दूसरे को करीब 15 सालों से जानते हैं। एक दिन वो मेरे पास आया, तो हम रोज़ ही मिलते हैं पर उस दिन वो बोला कि 24 दिसंबर को मुंबई चलना है। पहले मैंने मना कर दिया, फिर उसने बहुत जिद्द की, मैं मान गया। Ayyashi Ki Hindi Sexy Kahani
घर से झूठ बोलकर हम 24 दिसंबर को ट्रेन से मुंबई के लिए निकले। मैं पहली बार मुंबई जा रहा था। मेरे मन में बहुत सारे सवाल थे। अरुण पहले भी कई बार जा चुका था। मैंने पूछा, “कहाँ-कहाँ घूमेंगे और कितने दिन रहेंगे?” वो बोला, “चलो फिर देखते हैं।”
अरुण की एक आदत बहुत बुरी थी, वो दारू पीने की। वो ट्रेन में ही पूरी बोतल लेकर आया था। एक बड़ी पेप्सी की बोतल लेकर मिक्स करके रास्ते भर पीता रहा। हमारी सामने वाली बर्थ पर एक खूबसूरत सी लेडी बैठी थी। अरुण उस पर ही डोरे डालने लगा। उसने बहुत कोशिश की पर उसकी डाल नहीं गली।
वो उसे बार-बार किसी तरह छूने की कोशिश कर रहा था पर मेरी गांड़ फट रही थी कहीं ये मार खिला देने का इंतजाम कर रहा है। मैं उसे मना करता रहा पर वो बोला कि “मैं अभी इसे पटाता हूँ।” पर कुछ स्टेशन बाद वो लेडी उतर गई। मैंने उसे समझाया, “तू इस तरह काम करेगा तो हम मुंबई तो क्या, उसके आस-पास भी नहीं पहुँच सकते।”
वो बोला, “तू चिंता बिल्कुल मत कर।” नागपुर पहुँचते उसकी पूरी दारू खत्म हो गई। वो फिर बाहर जाकर दारू लेकर आया। किसी तरह अब हम सुबह 2 बजे वीटी स्टेशन पहुँचे। टैक्सी लेकर कोलाबा पहुँचे। अरुण ने बताया वो पहले इसी होटल में रुका था। अरुण ने वहाँ रूम बुक करवाया।
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मैं वहाँ का नज़ारा देखकर हैरान रह गया था। वहाँ बहुत सी लड़कियाँ थीं जो कुछ लड़कों के साथ रूम में जा रही थीं। यानी वहाँ बाहर से लड़की लेकर आओ और अपना काम करो। एक बहुत ही खूबसूरत लड़की एक रूम से निकली। मैंने उसे देखा, वो भी देखती रही पर मैंने कुछ समझ पाया। वो चली गई।
मैंने अरुण से कहा, “क्या माल था यार!” वो बोला, “अगर तू उसे चोदना चाहता है तो ऐसा कर सकता है।” मैंने कहा, “अबे वो क्या रांड है?” वो बोला, “हाँ बिल्कुल।” मैंने समझ गया अरुण मुझे इस होटल में क्या लाया है। वहाँ कुछ विदेशी भी थे। हम लोग तैयार होकर वहाँ से निकले। अभी वहाँ कुछ लड़कियाँ थीं।
सबसे पहले हम इंडिया गेट पहुँचे। वहाँ ताज होटल के पीछे होते हुए हम एक जगह रुके। वो कुछ याद करने लगा। फिर एक सीढ़ियों पर चढ़े हुए उसने एक डोर बेल बजाई। वो बहुत ही कॉन्फिडेंट था। दरवाज़ा खुला, सामने एक लड़की थी। वो बहुत खूबसूरत तो नहीं थी पर बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
उसने स्लीवलेस टॉप और स्कर्ट पहना था। उसे शोल्डर से व्हाइट ब्रा की स्ट्रिप दिखाई दे रही थी। वो बोली, “अंदर आ जाइए।” मैंने पूछा, “अबे कहाँ लेकर आया है?” हम लोग लड़की के पीछे-पीछे एक रूम में आ गए। वहाँ बहुत सी लड़कियाँ थीं और सामने एक फारसी बूढ़ा बैठा था।
अरुण ने कहा, “हमें डांस सीखना है।” वो बोला, “1 घंटे के 100 रुपये लगेंगे।” अरुण ने 200 रुपये दे दिए। और बूढ़ा बोला, “जिसके साथ जाना चाहते हो।” हम दोनों एक-एक लड़की को लेकर एक हॉल में आ गए। वहाँ खाली हॉल था और एक टेप बज रहा था। वहाँ और कोई नहीं था।
मैं उस लड़की के साथ जिसने दरवाज़ा खोला था और अरुण एक दूसरी लड़की के साथ उसी पंजाबी गाने पर उसी तरह हिलते रहे। अरुण उस लड़की को बाहों में लपेट लिया और उसके बूब्स दबाने लगा और मुझे भी वैसा ही करने को बोला। पर वो लड़की बोली, “कुछ मत करना, कुछ करना है तो एक्स्ट्रा पैसे लगेंगे।”
उसके बूब्स छोटे-छोटे थे। फिर अरुण और वो लड़की एक चेयर पर बैठकर बातें करने लगे। मुझे भी बुला लिया। वो बोला, “ये 1000/- बोल रही है।” मैंने कहा, “किस बात का?” वो बोला, “चोदने का। अगर यहीं चोदना है तो 600/-, यहाँ जल्दी निपटाना होगा। और अगर अपने होटल में ले जाना है क्या?”
मैंने कहा, “तू जान।” वो वहाँ से बहाना बनाया कि हम शाम को आएंगे। फोन नंबर लेकर वहाँ से निकले। मैंने पूछा, “अबे किया क्यों नहीं?” वो बोला, “अबे अभी तो सिर्फ शुरुआत है, आगे-आगे देखता जा, ये मुंबई है मेरे यार।” वहाँ से हम लोग वहीं कोलाबा के मेन रोड पर कैनन बार में गए।
वहाँ सब लोग लड़कियों के साथ बैठकर दारू पी रहे थे। हम भी अलग-अलग टेबल पर बैठ गए। अरुण एक लड़की को लेकर बैठा था। वो उसको किस कर रहा था और बूब्स भी दबा रहा था। वहाँ वेटर्स भी लड़कियाँ थीं। एक को मैंने बाजू में बिठाया। उसके बूब्स काफी बड़े-बड़े थे।
मैंने उसकी गर्दन में हाथ डाला तो वो बोली, “कहीं चलना है?” मैंने कहा, “पहले कुछ इंट्रोडक्शन हो जाए।” वो बोली, “वहाँ सब कुछ हो जाएगा।” अरुण बोला, “चलो चलते हैं।” मैंने कहा, “ये मैडम चलने को तैयार है।” वो बोला, “शाम को आते हैं।” वहाँ से निकल गए।
अब हम लोग मेन रोड पर बेस्ट बस डिपो के बाजू में एक गली में गए। वहाँ से एक बिल्डिंग में घुसे जो एक शॉप थी, लकी कलेक्शन के ऊपर कल्पना बिल्डिंग थी। वहाँ ग्राउंड फ्लोर पर ही राइट साइड पर एक दरवाज़े पर कुछ फूल रखे और कुछ माला भी लटक रही थी। अरुण सीधे वहाँ गया, मैं भी पीछे वहाँ गया।
वहाँ एक मोटी सी बदसूरत औरत बैठी थी। अरुण ने उससे कहा, “कुछ दिखाओ।” उसे आवाज़ दी। तीन लड़कियाँ निकलीं। एक छोटी, बाकी दोनों कुछ बड़ी थीं। छोटी के बूब्स काफी बड़े थे। अरुण ने कुछ बात की और मुझसे कहा, “किसके साथ जाओगे?” मैंने कहा, “इस छोटी वाली के साथ।” एक छोटे से कमरे में हम घुस गए।
वहाँ एक पलंग था और बहुत कम रोशनी थी। उस लड़की का नाम गीता था। उसने जींस और टी-शर्ट पहनी थी। उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मुझे बोली, “तुम भी निकालो।” मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और गीता के बूब्स दबाने लगा और चूसने लगा। और उसे पलंग पर लिटाकर उसके पूरे बदन को सहलाने लगा।
गीता की उम्र ज्यादा नहीं थी, वो करीब 20 साल की रही होगी पर उसके बूब्स बहुत बड़े और टाइट थे। मैं पागलों की तरह उन्हें चूसता जा रहा था। वो भी सिसकियाँ ले रही थी। अब मैंने उसके टांगों के बीच में हाथ लगाया। उसे चूत पर छोटे-छोटे बाल थे और गीली हो गई थी। अब गीता टांगें फैलाकर मुझे बोली, “अब करो।” मैंने कहा, “कंडोम कहाँ है?” उसने अपनी पर्स से कंडोम निकाला।
मैंने कहा, “कुछ तुम भी तो करो।” मैं पलंग पर लेट गया। अब वो मेरे ऊपर आ गई और मेरे निप्पल्स चूसने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगा। अब वो मुझे चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ रही थी। अब मेरा लंड जो पहले ही खड़ा हो चुका था, हाथ में लेकर सहलाने लगी। मैंने उसे चूसने को कहा।
वो मुँह में लेकर अपना सिर ऊपर-नीचे करने लगी। मुझे कोई खास मज़ा नहीं आ रहा था क्योंकि उस लंड चूसने का अंदाज़ इतना अच्छा नहीं था जो कि प्रोफेशनल प्रॉस्टिट्यूट का होता है। मैंने कहा, “ठीक से चूसो।” वो बोली, “ठीक से तो कर रही हूँ।” अब जैसे-तैसे मैंने अपना मूड बनाया।
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अब मैंने उसको लिटा दिया और सिंपल इंडियन स्टाइल में कंडोम लगाकर चोदने लगा। उसकी चूत गीली थी इसलिए मुझे अपना तगड़ा खड़ा हुआ लंड उसकी चूत में डालने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। पहले धीरे-धीरे स्ट्रोक लगाने के बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई। फिर मुझे लगा मैं झड़ जाऊँगा।
अब मैंने उसे ऊपर बुलाया। वो ऊपर आ गई और उछलने लगी। मैंने उसके बूब्स पकड़कर दबा रहा था, मसल रहा था। वो मेरे हाथों को पकड़कर और ज़ोर लगा रही थी। कुछ देर वो झड़ गई। अब मैंने उसे झट से नीचे ले लिया और अब मैंने पूरा ज़ोर लगाकर उसे चोदने लगा। आखिर में मुझे लगा अब मैं झड़ने वाला हूँ पर मुझे ये भी लगा कि कंडोम फट गया है।
जब तक मैं लंड निकाल पाता मैं झड़ गया। मैंने सारा कम उसकी चूत में झाड़ दिया और लंड बाहर निकाला तो देखा सचमुच कंडोम फट गया था। अब मैं भी डर गया था, साला कोई बीमारी होगी तो। पर वो अपना रोना रो रही थी कि जब कंडोम फट गया तो बाहर क्यों नहीं निकाला। मैंने कहा, “मौका ही नहीं मिला।”
वो बोली, “मैं प्रेग्नेंट हो गई तो?” ये सब अनसुना कर मैं कपड़े पहनकर बाहर आ गया। अरुण बाहर ही बैठा था। मैंने कहा, “चलो तुम्हें कुछ करना है?” वो बोला, “नहीं।” वो बोला, “क्या हुआ?” मैंने कहा, “कुछ नहीं।” मेरा मूड खराब देखकर वो बोला। मैंने उसे कंडोम फटने की बात बताई। वो बोला, “टेंशन मत ले, कुछ नहीं होगा।”
अब हम वहाँ से निकलकर उसी बिल्डिंग में ऊपर चढ़ गए। लिफ्ट से निकलकर राइट साइड में एक फ्लैट की डोर बेल बजाई। दरवाज़ा एक लड़के ने खोला। अरुण ने पूछा, “संजय भाई है?” वो बोला, “हाँ अंदर आ जाइए।” हम अंदर पहुँचकर एक हॉल में बैठ गए जहाँ शानदार सोफा लगा था और बहुत ही खूबसूरत हॉल था, वेल डेकोरेटेड, वेल लाइटिंग।
एक दूसरा लड़का पानी लेकर आया। फिर एक दूसरा आदमी आया। अरुण ने पूछा, “संजय भाई कहाँ है?” वो बोला, “क्या काम है?” वो बोला, “उन्हें बुलाओ।” वो हाँ कहकर चला गया। कुछ देर में एक दुबला-पतला सफारी पहने आदमी हॉल में आया। अरुण ने उससे हाथ मिलाया। फिर अरुण ने कहा, “कुछ दिखाओ।”
संजय भाई ने कहा, “सब को बुलाओ।” दूसरे कमरे से 8-10 लड़कियाँ अंदर आकर लाइन से खड़ी हो गईं। सब की उम्र करीब 23-25 साल थी। कुछ बहुत सुंदर थीं, कुछ के बूब्स बड़े-बड़े थे। कुल मिलाकर सब बढ़िया थीं। मेरे लिए ये बिल्कुल नया चैप्टर था। सब से मैं हर पल मुंबई के अलग-अलग नए-नए रूप सामने आ रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अरुण ने बात की, “रेट क्या?” वो बोला, “2000/- शॉर्ट टाइम और नाइट 5000/-।” मुझसे अरुण ने पूछा, “बोलो।” मैंने मना कर दिया। मैंने कहा, “अबे-अबे 1/2 घंटा भी नहीं हुआ है, मैं कोई ही-मैन हूँ क्या?” वो बोला, “बाद में आते हैं।” बोलकर वहाँ से हम निकल गए। मैंने पूछा, “तूने क्यों नहीं किया?” बोला, “पूरा दिन अभी बाकी है, मैं तुझे अभी पूरी मुंबई दिखाता हूँ।” मैं अरुण के पीछे-पीछे निकला।
वहाँ से निकलकर हम मेन रोड पर सेशन हाउस के सामने मौसम हाउस में पहुँचे। वहाँ पर भी बहुत लड़कियाँ थीं। वैसे ही 8-12 लड़कियाँ लाइन से खड़ी हो गईं। पर संजय भाई के लड़कियों की क्वालिटी यहाँ से अच्छी थी पर वहाँ का बुगत भी ज्यादा था। अरुण ने वहाँ से एक लड़की पसंद की।
वो लंबी और खूबसूरत साँवली सी थी। बूब्स की साइज़ भी अच्छी थी। वो दोनों मुझे छेड़ते हुए रूम में घुस गए। वहाँ बैठा आदमी ने मुझसे पूछा, “आपकी पसंद क्या है?” मैंने कहा, “मेरा मूड नहीं है।” वो बोला, “वो बनाना हमारा काम है।” मैंने कहा, “मैं समझा नहीं।” फिर उसने एक लड़की को बुलाया। उसका नाम प्रीति था।
वो करीब 20-21 साल की होगी। जबरदस्त सेक्सी, जबरदस्त फिगर 34-25-32 की साइज़ रही होगी। सबसे अलग उसकी अदाएँ। वो दीवार से टिककर खड़ी हो गई। वो आदमी बोला, “क्या ख़याल है?” मैंने कहा, “मूड नहीं है।” वो बोला, “चले जाओ, बहुत को-ऑपरेटिव है और खुश कर देगी।” मैंने नहीं कहा पर उसने शॉर्ट टाइम के लिए ले जाओ।
मैंने मना कर दिया। वो चली गई। क्या गांड़ थी उसकी। उसने टाइट जींस और टी-शर्ट पहनी थी। उसकी गांड़ जबरदस्त थी। एक बार तो मेरा मन हुआ कि चोद दूँ, ये मौका फिर मिले या न मिले। फिर मैंने सोचा अरुण ने कहा था कोई कुछ कहे पर मेरे से बिगड़ पूछे कहीं मत। करीब 1/2 घंटे में अरुण रूम से बाहर आया।
उसके चेहरे पर संतुष्टि थी। हम वहाँ से निकल गए। रास्ते में मैंने अरुण से पूछा, “कैसा था?” वो बोला, “क्या जबरदस्त सर्विस थी यार। पहले 15 मिनट तो मेरा लंड ही चूसती रही। फिर मैंने उसे अलग-अलग पोजीशन में चोदा। वो बहुत को-ऑपरेटिव थी। मैंने जैसा बोला वैसा किया।” मैंने कहा, “क्या गांड़ भी मारी क्या?” वो बोला, “नहीं, बस गांड़ मारने नहीं देती है।”
हम लोग मौसम से निकले थे। मैंने अरुण से पूछा, “अब क्या बचा है?” वो बोला, “अभी पूरी मुंबई बाकी है।” कुछ ही दूरी पर मौसम से आगे जाते हुए हम लोग एवरेस्ट होटल में गए। वहाँ हमारी मुलाकात आशु नाम के लड़के से हुई। वो मोटा और नाटा था। उस समय करीब 11:30 बज रहे थे। हमने उससे कहा, “कुछ है क्या?”
वो बोला, “आप शाम को आइए।” हमने कहा, “हमें अभी वापस जाना है।” वो बोला, “अभी सब लड़कियाँ सोई हैं।” मैं सोच रहा था ये मदरचोद रात भर चुदवा के आई होगी, अभी सो रही है। हम वापस निकल रहे थे तभी आशु ने कहा, “रुको देखता हूँ।” वो एक लड़की को बुला लाया। वो उस समय नाइटी में थी।
उसका नाम संध्या था। गजब की हाइट, कमाल का फिगर और बड़े-बड़े बूब्स। सचमुच वो आधी नींद में थी। फिर एक और लड़की आई। वो भी बहुत अच्छी थी पर हमने कहा, “ठीक है बाद में देखते हैं।” नीचे आकर हमने टैक्सी ली और अरुण ने उसे काफे पारेड चलने को कहा। वहाँ बहुत बड़ी-बड़ी बिल्डिंग थीं।
एक बिल्डिंग के सामने टैक्सी रुकवाई और अंदर चले। वहाँ भी 10-12 लड़कियाँ थीं। एक से बढ़कर एक, सब जबरदस्त सेक्सी थीं। एक बंगाली लड़की मुझे बहुत पसंद आई। कमाल का फिगर, लंबे बाल। पर यह भी मेरा मूड नहीं बना और कुछ पाकेट को भी देखना था।
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वहाँ से निकलकर हम सीधे टॉपाज़ डांस बार पहुँचे। मैं पहली बार किसी डांस बार में गया। मेरे लिए बिल्कुल नई चीज़ थी। मैं अरुण से पूछा, “अबे यहाँ तो सबसे बढ़िया माल है, ये क्या चलती है?” वो बोला, “यहाँ कुछ नहीं होगा, यहाँ पूरी पाकेट खाली हो जाएगी पर कोई हाथ नहीं आएगा।” कुछ देर वहाँ ड्रिंक कर डांस का मज़ा लेकर वहाँ से निकले।
अब मैंने अरुण से पूछा कि “भाई मैंने सुना है मुंबई में ब्यूटी पार्लर में मसाज होती है जो लड़कियाँ आधी नंगी होकर मसाज करती हैं।” वो बोला, “ठीक है ढूँढते हैं।” अब हम वो पार्लर ढूँढने में लग गए। पार्लर तो नहीं मिला बल्कि एक दलाल मिल गया। तो बोला, “मैं बहुत अच्छी जगह ले जाता हूँ।”
वो एक-दो जगह ले गया पर जो क्वालिटी संजय भाई थी या फिर काफे पारेड में देखी थी। अब वो हमें कांग्रेस हाउस ले गया। वहाँ पूरी बिल्डिंग में यही काम चलता है। ये मरीन ड्राइव के पास है। वहाँ एक लड़की अरुण ने पसंद की। रात भर के लिए। मुझे कुछ पसंद नहीं आया। हम उसे एडवांस देकर आए कि कुछ देर बाद हम इसे होटल ले जाएंगे।
वहाँ से वो दलाल हमें एक और जगह ले गया। वो एरिया तो मुझे याद नहीं। उसने जो कार्ड दिया था उसमें ड्रीम टेलर लिखा था। वहाँ से एक लड़की पसंद की। उससे बात की। हम उस लड़की के साथ हम दोनों रात को अदला-बदली करेंगे। उसने मान लिया। वो बोला कि दोनों लड़कियाँ यहीं से ले जाओ तब ऐसा होगा।
हमने ऐसा ही किया। दो लड़कियाँ पिंकी और पायल। और कांग्रेस हाउस वाली को फोन किया हम कल आएंगे। उसने कहा, “ठीक है।” वहाँ से हम दोनों लड़कियों को टैक्सी में बैठाकर सीधे होटल गए। होटल पहुँचकर अरुण बोला, “मेरे को इन दोनों लड़कियों ने गर्म कर दिया है, मेरा लंड बिल्कुल खड़ा है। मैं एक को लेकर जा रहा हूँ।”
वो पिंकी को लेकर कमरे में घुस गया। मैं और पायल बाहर ही थे। मैंने कहा, “चलो हम घूम आएँ।” हम दोनों इंडिया गेट की तरफ घूमने चले गए। करीब 1/2 घंटे बाद जब होटल आए तो अरुण अभी भी कमरे में था। थोड़ी देर रुकने के बाद वो कमरे से निकला। वो बोला, “बहुत बढ़िया लड़की है यार। अब तू इस पायल को ले जा।”
मैंने कहा, “अभी नहीं।” अब करीब रात के 9 बज चुके थे। मैंने अरुण को कहा, “कुछ खाने का इंतजाम करो।” वो बोला, “नीचे होटल में चलते हैं।” मैंने कहा, “तू अकेले जा।” थोड़ी देर बाद वो खाना लाने चला गया। अब मैं दोनों लड़कियों के साथ अकेला था। पिंकी ने कहा, “मेरा तो काम हो गया, अब तुम पायल को करो।”
मैंने कहा, “तुम्हारे सामने?” वो बोली, “क्या होता है?” मैं बोला, “ठीक है।” अब मैंने पायल को अपनी ओर खींचा और अपनी कमर में उसके पैर फंसा दिए और फिर उसके लिप्स को चूसने लगा। वो भी पूरा साथ दे रही थी। बहुत देर ऐसा करते रहे। पिंकी भी साइड में बैठी थी। बीच-बीच में मैंने उसके बूब्स दबा दिए। वो बोलती, “पहले उसको कर लो, फिर मैं कहा जा रही हूँ।”
पायल के बूब्स पिंकी से बड़े थे। मैंने उन्हें भी कपड़ों के ऊपर से मसल रहा था। पायल ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए। मैंने भी शर्ट उतार दी। अब मैंने पायल का कुरता उतार दिया। वो अब ब्रा में थी। उसके गोरे और चिकने बदन पर ब्लैक टाइट ब्रा बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैं अब भी उसके बूब्स मसल रहा था। वो सिसकारियाँ भर रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसकी ब्रा खोल दी। मेरे सामने बड़े-बड़े गोल-गोल टाइट बूब्स थे। मैं उसके बूब्स चूसने लगा, ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। अब मैंने उसे पीठ के बल सुला दिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा। इधर पिंकी भी अपने बदन में कुछ गर्माहट महसूस कर रही थी। उसने मेरी बनियान उतारकर मेरी पीठ और छाती पर हाथ फेरने लगी। मैंने सोचा आज सैंडविच का मज़ा लिया जाए। ये अपना पहला और अनोखा अनुभव था।
पहले मैंने पायल को पूरा नंगा किया। फिर मैं लेट गया तो पायल ने मेरी पैंट उतार दी। अब मैं और पायल बिल्कुल नंगे थे पर पिंकी ने पूरे कपड़े पहने थे। अब मैंने पायल को मेरा बिल्कुल अटेने के तरह खड़ा लंड को चूसने को कहा। वो ऐसा ही करने लगी। पहले धीरे-धीरे अपनी लार से मेरे लंड को पूरा गीला किया। फिर मेरे छाती को चूमते हुए नीचे आने लगी।
अब मैंने पिंकी के कुर्ते के अंदर हाथ डालकर उसके बूब्स दबाने लगा। वो भी सिसकारियाँ लेने लगी। उसने अपनी कुर्ती उतार दी। उसने भी ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी। मैंने ब्रा को ऊपर कर उसके बूब्स चूसना चाहा तो उसने ब्रा भी उतार दी और मेरे और करीब आ गई। पायल अब मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थी और मैं पिंकी के बूब्स चूस रहा था।
पिंकी ने मुझे अपनी बाहों में लेकर पागलों के तरह चूमने लगी और मेरे बालों में उँगलियाँ फेरने लगी। इस बीच मैंने पिंकी की सलवार को ढीला किया और उसे पैंटी सहित घुटनों तक नीचे कर दिया। कभी मैं पिंकी के लिप्स चूसता तो कभी बूब्स। पायल अपने काम में लगी हुई थी। पिंकी ने अपनी सलवार भी उतार दी। अब पहली बार दोनों मेरे सामने बिल्कुल नंगी थीं।
अब मैंने पिंकी को कहा कि वो लंड चूसे। पायल हट गई और पिंकी मेरा लंड चूसने लगी। चूसने में पिंकी पायल से बेहतर थी। उसका अंदाज़ कुछ अलग ही था। उसने मुझे पागल कर दिया। और पिंकी की जगह अब पायल ने ले ली थी। अब मैं उसके बूब्स चूसने और दबने लगा। अब मैं किसी एक को चोदना चाहता था।
मैंने पायल को बाजू में लिटा दिया और पिंकी को कहा कि कंडोम लगाए। उसने कंडोम लगाया। अब की बार मैंने डबल कंडोम लगाया। पायल की चूत पर हाथ फेरा। उसकी चिकनी गुलाबी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी एक उँगली चूत में डालकर हिलाने लगा। वो आँखें बंद कर सिसकियाँ लेने लगी। वो चुदने के लिए बिल्कुल तैयार थी।
पर अब मैंने और मज़ा लेने के लिए पिंकी को पायल की चूत चाटने के लिए कहा। वो अब पायल के दोनों पैर फैलाकर चूत में अपनी जीभ डालकर सहलाने लगी। पायल की बेचैनी और बढ़ने लगी थी। और मैं पिंकी की गांड़ में अपना लंड रगड़कर उसे और गर्म कर रहा था और पीछे से उसके बूब्स भी दबा रहा था।
अब पिंकी हट गई और मैंने अब अपना लंड पहले पायल के मुँह में दिया। उसने कंडोम चढ़ा लंड गीला कर दिया। फिर पिंकी के मुँह में दिया। अब मैंने पायल की चूत में लंड डालने लगा। पहले धीरे-धीरे डालने लगा। पायल को शायद लंड डलवाने की बहुत जल्दी थी। वो अपनी गांड़ उठाकर मेरा लंबा और मोटा लंड अपने चूत में डालने की कोशिश करने लगी।
मैंने उसकी कमर को हाथ से पकड़ा और ऊपर उठाकर थोड़ी स्पीड से स्ट्रोक लगाने लगा। मैंने पिंकी को पायल की गांड़ के नीचे तकिया लगाने को कहा। अब उसकी चूत मेरे लंड के और करीब आ गई थी। अब मैंने एक ही ज़ोरदार झटके में पूरा का पूरा लंड पायल की चूत के अंदर डाल दिया। वो चिल्लाने लगी, “धीरे करो-2।” पिंकी ने पायल के होंठों पर अपने होंठ रख दिए ताकि आवाज़ न बाहर न जाए। हालाँकि कोई फर्क पड़ने वाला था।
मैंने पिंकी की गांड़ सहला रहा था और अपनी पूरी स्पीड से पायल को चोद रहा था। अब मैंने पायल के ऊपर छा गया और उसकी पीठ में हाथ डालकर उसे अपने ऊपर ले लिया। अब पायल मेरे ऊपर बैठ गई और उछलने लगी। मेरे हाथ उसके बूब्स पर थे और पिंकी उसे पीछे से सहला रही थी। तब दरवाज़ा खटका।
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मैंने पूछा, “कौन?”
तब अरुण ने कहा, “अबे दरवाज़ा खोल।”
मैंने पिंकी से कहा, “दरवाज़ा खोलो।”
अरुण अंदर आकर नज़र देखकर बोला, “अबे ये क्या है? तूने दोनों को नंगा कर दिया। दोनों का मज़ा एक साथ।”
मैंने कहा, “तू भी ले ले ना।”
अब तक पायल झड़ चुकी थी। वो मेरे ऊपर ढल गई। मैंने उसे नीचे किया और फिर से उसे इंडियन स्टाइल में चोदने लगा। और अरुण और पिंकी आपस में प्यार करने लगे। अरुण पिंकी के होंठ और बूब्स चूसने लगा। अब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। पायल की आँखें अब भी बंद थीं। शायद वो दर्द सह नहीं पा रही थी।
उसने मेरी कमर पर दोनों हाथ रख सहलाने लगी। अब मैं झड़ गया और पायल के ऊपर गिर गया। कुछ देर उसके लिप्स चूसता रहा। इधर अरुण और पिंकी अपने काम में लगे हुए थे। मैं बाथरूम जाने के लिए उठा। देख अरुण खाने का बहुत सामान लेकर आया है और व्हिस्की की बोतल भी थी।
मैंने पूछा, “बियर कहाँ है?”
वो बोला, “तूने कहा था।”
मैंने कहा, “अबे ये लड़कियाँ क्या पिएँगी?”
वो बोला, “ठीक है मैं ले आता हूँ।”
वो चला गया। मैं दोनों लड़कियों को लेकर बाथरूम में चल गया और हम तीनों शावर के नीचे नहाने लगे। पहले मैंने दोनों को साबुन लगाया। फिर दोनों ने मुझे।
मैंने पिंकी की कमर में हाथ डालकर उसके होंठ चूस रहा था और पायल अपनी बड़े-बड़े बूब्स मेरी पीठ पर रगड़ रही थी और पीछे से मेरा लंड पकड़कर पिंकी की चूत पर फेर रही थी। पिंकी की चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। वो मुझे और मज़ा दे रहे थे। हम लोगों ने जमकर नहाने का मज़ा लिया।
दोनों लड़कियों को भी बहुत मज़ा आया। बाहर आकर दोनों ने नाइटी पहन ली। मैंने भी नाइट सूट पहन लिया। तब तक अरुण भी आ गया था। अरुण ने चार बोतल बियर लाई। दिसंबर का महीना था इसलिए हम लोगों को बियर पीना नहीं था। पहले हमने शराब पी। लड़कियों को मैंने चारों बोतल बियर पिला दी। वो टुन हो गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर हमने खाना खाया। अब रात करीब 11:30 हो गए थे। कुछ देर टीवी देखने के बाद हम बातचीत करते रहे। मैंने दोनों लड़कियों के बीच में बैठा था। कभी उसका बूब्स दबाता, कभी उसका। यूँ ही मज़ाक चलता रहा। मेरा मूड अभी किसी को चोदने का नहीं था पर अरुण अब पायल को चोदना चाहता था। उसने कहा, “एक और रूम ले ले क्या?”
मैंने कहा, “अबे मैं जब तेरे सामने चोद सकता हूँ तो तू क्यों नहीं।” उसे पायल को अपने पास बुलाया और उसकी नाइटी उतार दी और उसके बूब्स चूसने लगा। फिर अरुण ने अपने कपड़े भी उतार दिए। मुझे भी लगा कि कुछ किया जाए। मैंने भी पिंकी को नंगा किया और अपने कपड़े उतार दिए। अब हम चारों नंगे थे।
पहले मैंने पिंकी से लंड चुसवाया। मेरा लंड फिर से तन गया। अरुण भी पायल से लंड चुसवा रहा था। मैंने पिंकी को लिटा दिया और अपना लंड उसके मुँह के पास ले जाकर उसके मुँह के अंदर-बाहर करने यानी उसके मुँह में चोदने लगा। मैंने पायल से कहा कि अब तुम पिंकी की चूत चूसो। वो पिंकी की टांगें फैलाकर चूत में अपनी जीभ डालने लगी।
अरुण ने पायल के पीछे से उसकी चूत में अपना कंडोम चढ़ा लंड डालने लगा। इस तरह चारों बिज़ी थे। फिर अरुण ने पिंकी से पायल की चूत चटवाई। तब मैंने पिंकी की गांड़ में लंड डालने लगा पर वैसा नहीं हुआ। वो पहले ही नीचे आ गई। अब मैंने फिर कंडोम चढ़ाकर पिंकी की गांड़ में तकिया लगाकर पायल की तरह चोदने लगा। अरुण भी पायल को इसी तरह चोद रहा था।
फिर मैंने पिंकी को डॉगी स्टाइल में चोदा। वो बुरी तरह चिल्लाने लगी। अरुण ने कहा, “अबे धीरे करो ना।” अब मैंने तुरंत झड़ गया। अरुण अभी भी लगाया हुआ था। वो भी पायल को रौंद रहा था। कुछ देर बाद वो भी झड़ गए। इस तरह एक राउंड कंप्लीट हुआ था। चारों अब थक गए थे।
उसके बाद अरुण और मैंने फिर से शराब पी और करीब 1 घंटे बाद हमने फिर से लड़कियाँ बदलकर मैंने पायल को और अरुण ने पिंकी को जमकर पोजीशन बदल-बदलकर चोदा। अब करीब सुबह के 4 बज चुके थे। मैंने दोनों लड़कियों को कहा कि अब कपड़े पहनो और फिर मैंने दोनों को भगा दिया।
मैंने अरुण से कहा, “ये जब तक यहाँ रहेंगी हम सो नहीं पाएंगे।” पर अरुण का मूड और चोदने का था पर मैंने कहा, “कल दिन भर चलना है, अभी सोएगा तब कल एंजॉय कर सकेगा।” वो दोनों चली गईं। हम सो गए। दूसरे दिन सुबह जब हम उठे तो 10 बज चुके थे। जल्दी से तैयार होकर हम वापसी का रिज़र्वेशन करवाने वीटी स्टेशन गए।
वहाँ पर मैंने एक बहुत ही सेक्सी विदेशी लेडी को देखा। तो वहाँ या पूरे मुंबई में लड़कियों या विदेशी लेडी की कमी नहीं थी पर उसको देखते ही मेरा लंड तन गया था। क्या बॉडी थी उसकी, क्या उसके बूब्स थे। उसे दिन भर चोदते रहो तब भी बोर न हो। मैंने अपने मन की बात अरुण से कही।
वो बोला, “क्या अबे मार खिलाएगा क्या? किसी को कुछ मत बोलना वरना बहुत मार खाएगा।”
वहाँ से निकलकर हम होटल आ गए। वो विदेशी अब भी मेरे दिमाग में घूम रही थी। वहीं होटल के बाहर एक दलाल मिल गया।
वो बोला, “साहब कुछ चाहिए क्या?”
मैंने कहा, “कोई विदेशी है क्या?”
वो बोला, “अपुन के पास सब है, सिर्फ अब बोलो।”
उसके साथ हम टैक्सी में निकले। वहीं कोलाबा में वो ग्रीन होटल में ले गया। वहाँ भी और जगहों की तरह एक से एक मॉडल थे पर रेट बहुत ज्यादा थे। विदेशी का 10000/- शॉर्ट टाइम, एक इंडियन मॉडल का 7000/- शॉर्ट टाइम। हम रेट सुनकर वहाँ से निकले।
दलाल को कहा, “कोई सस्ता और अच्छा माल लाओ यार।”
उसने कहा, “आप होटल में रहो, मैं वहीं लाता हूँ।”
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हम खाना लेकर और कुछ बियर लेकर होटल चले गए। हम लोग बियर पी और खाना खा रहे थे तभी वो दलाल रूम में आया। उसके साथ दो लड़कियाँ थीं। एक करीब 28-30 साल की थी और दूसरी की 18-20 साल। मैंने उस छोटी लड़की को पसंद किया जिसका नाम नेहा था।
नेहा बहुत खूबसूरत थी। वो दलाल उस दूसरी लड़की को रखने को बोला पर हमने मना कर दिया। वो नेहा को छोड़कर चला गया। नेहा ने ब्लू जींस और ब्लैक हाई नेक की टी-शर्ट पहनी थी। क्योंकि हम लोग उस समय खाना खा रहे थे, नेहा को भी खाना खाने को कहा पर उसने कहा, “मैंने खाकर आई हूँ।” मैंने उसे अपनी बगल में बिठाया।
जल्द ही मैंने कमरा साफ करवाकर अरुण को बाहर जाने के लिए कहा। वो मुझे घूरता और मुस्कुराता हुआ चला गया। पहले मैंने नेहा से कुछ बातें की। वो मेरे बगल में बैठी थी। मैंने उसकी टी-शर्ट नाक से कंधे तक सरकाकर देखी तो उसने ब्लैक ब्रा पहनी थी। मैंने उसकी ब्रा की स्ट्रिप पर किस किया। उसने भी मुझे गाल पर किस किया।
नेहा ने मुझे हग किया। वो एक अच्छे दोस्त की तरह बिहेव कर रही थी। मेरा भी बिहेव उसे बहुत पसंद आया। उसने बताया कि वो हैदराबाद की है। वो यहाँ घर से भागकर आई है प्यार के चक्कर में पर उस लड़के ने उसे धोखा दे दिया। वो घर वापस नहीं जाना चाहती। उसे यहाँ 6 महीने हो गए हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब मैंने और टाइम वेस्ट करना नहीं चाहता था। नेहा उठी और अपने कपड़े उतारने लगी। उसने टी-शर्ट उतारी फिर जींस। अब वो ब्लैक ब्रा और ब्लैक लेस वाली पैंटी में थी। वो इतनी गोरी थी कहीं भी कोई दाग उसके बदन पर नहीं था। ब्रा और पैंटी में वो और मासूम लग रही थी। कुछ शर्माते हुए अपनी झुकी निगाहों से वो मुझे देख रही थी।
और मैंने उसके गोरे कमसिन बदन को सच कहूँ दोस्तों, अभी तक इस सैर में मैंने जितनी लड़कियाँ चोदी थीं, नेहा उन सब में सबसे सुंदर थी। उसमें गजब की सेक्स अपील थी और उसके बॉडी की बनावट ही कुछ ऐसी थी। काली ब्रा में उसके गोरे-गोरे और बड़े-बड़े बूब्स बाहर आने को बेचैन थे। उसकी बॉडी एकदम फिट थी। उसके लंबे-लंबे बाल जो कमर तक आ रहे थे।
अब मैंने उसे दीवार की तरफ मुँह करके खड़ा किया और उसके बाल पीठ से हटाकर पहले उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। उसने आँखें बंद कर लीं। मैंने उसकी पीठ को चूमता हुआ नीचे आने लगा। उसके कमर से होता हुआ उसकी जाँघ पर पहुँच गया। फिर ऊपर आकर मैंने उसकी ब्रा खोल दी। उसके हाथ पीछे आकर मेरा बदन टटोल रहे थे।
अब मैंने उसका चेहरा अपनी ओर किया और उसके रबर बैंड में बंधे बाल खोल दिए जिससे वो उसके चेहरे पर आ गए। अब मैंने उसके होंठ चूसने लगा। वो भी मेरे होंठ चूस रही थी। मैंने ब्रा को उसके बदन से अलग किया। उसके जबरदस्त बूब्स मेरे सामने थे। उन्हें देखकर मैं पागल हो गया। उसके बूब्स बड़े ज़रूर थे पर एकदम टाइट और गोल-गोल।
मैंने उसके गर्दन को चूमता हुआ उसकी निप्पल्स को चूसने लगा। मेरा हाथ उसकी पैंटी में चला गया। धीरे से मैंने उसकी पैंटी को नीचे कर दिया। वो मेरा सिर पकड़कर अपने बूब्स चुसवा रही थी। उसमें उसको बहुत मज़ा आ रहा था। उसने कहा, “ऐसे ही चूसते रहो, बहुत अच्छा लग रहा है। आप सक बहुत ही अच्छा करते हैं।”
अब मैंने दुगनी स्पीड से उसके बूब्स चूसने और दबाने लगा। अब मैंने अपने कपड़े उतारकर नंगा हो गया। उसने भी अपनी पैंटी उतार दी। अब मैंने उसे लिटा दिया और उसकी टांगें फैला दी। उसकी चूत देखकर लगता था उसे ज्यादा लोगों ने चोदा नहीं है। उसकी शेव्ड गुलाबी चूत बहुत ही प्यारी थी।
मैंने भी बगल में लेट गया। उससे कहा, “प्यार करो।” वो मेरे टांगों के बीच में आ गई और अपने बूब्स मेरी छाती पर रगड़ने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने अपने हाथ उसकी गांड़ पर फेर रहा था। उसकी चिकनी गांड़ मक्खन के जैसी मुलायम थी। मैंने ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। वो बोली, “धीरे करो, दर्द होता है।” उसकी आवाज़ में भी इतनी मासूमियत थी कि पूछो मत।
धीरे-धीरे वो नीचे आने लगी और मेरे लंड को सहलाने लगी। उसके कोमल हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लंड बिल्कुल तान गया। अब मैंने उससे कहा कि इसे चूसो। वो मुँह बनाने लगी फिर मजबूरी में लंड को मुँह में ले लिया और अपने मुँह को आगे-पीछे करने लगी। पर कल रात जिस अंदाज़ से वो लड़कियाँ चूस रही थीं वो मज़ा नहीं था। कुछ देर चूसने के बाद वो बोली, “मैं थक गई।” वो बगल में लेट गई।
अब मैंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और नेहा की टांगों के बीच में आ गया और उसकी चूत को सहलाने लगा। उसकी चूत भी मुलायम ही, बिल्कुल शेव्ड और चिकनी। मैंने अपनी एक उँगली से उसकी चूत को चेदा। वो गीली हो चुकी थी और थोड़ा-थोड़ा पानी बाहर निकल रहा था। मैंने देर करना उचित नहीं समझा।
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अब उसकी चूत पर अपना लंड टिका दिया और अंदर डालने लगा। वो भी लंड पकड़कर अपनी चूत में डालने लगी। मैंने उसकी टांगों को और वाइड किया और लंड के लिए जगह बनाई। मेरे दोनों हाथ पलंग पर थे और मैंने धीरे-धीरे लंड डालने लगा पर बहुत मुश्किल हो रही थी। वो भी अंदर डालने के लिए पूरा साथ दे रही थी। अपनी गांड़ उठाकर डालने की कोशिश कर रही थी पर अब तक 25% ही अंदर जा पाया था।
अब मैंने थोड़ा ज़ोर लगाकर अंदर डालने लगा। उसकी गांड़ पलंग से टिक गई। अब आधा लंड चला गया था। अब मैंने एक ज़ोरदार झटका दिया और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी पर मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए और ज़ोर-ज़ोर से स्ट्रोक लगाने लगा।
कुछ ही पलों में वो शांत हो गई और मुझे भी लगा कि अब लंड उसकी चूत में आसानी से आ जा रहा है। मुझे भी मज़ा आने लगा और मैंने उसके होंठ चूसता जा रहा था। कुछ ही मिनटों में नेहा झड़ गई। अब मुझे भी उसकी चूत में गीला पन ज्यादा लगने लगा। अब मैंने अपनी पूरी स्पीड से उसे चोद रहा था।
कुछ पल रुकने के बाद मैंने फिर से अपनी स्पीड बढ़ाई। अब मैं भी जल्द ही झड़ गया। करीब 5 मिनट यूँ ही पड़ा रहने के बाद मैं उठा, कपड़े पहने। वो भी अपने आप को साफ करके आई। तब तक अरुण भी पहुँच गया। बोला, “क्या कर रहा है? 1 घंटा हो गया।” मैंने कहा, “ये मज़ा लेकर खाने वाली मिठाई है।” मैंने रूम से बाहर चला गया। मैंने अरुण से कहा, “आराम से चोदना।”
मैं जब घूमकर वापस आया तो अरुण रूम के बाहर ही खड़ा था। वो बोला, “मज़ा नहीं आया।” मैंने समझ गए ये दूसरी लड़कियों की तरह ट्रीट कर रहा होगा। अब मैंने रूम में गया तो नेहा अपने कपड़े पहन चुकी थी। मैंने उसे रवाना किया और हम दोनों दोपहर में ही सो गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जब मैं उठा तो 5 बज चुके थे। अरुण को उठाया। फिर तैयार होकर हम घूमने निकल गए। करीब 8 बजे हम वीटी स्टेशन के पास दिलखुश बार में पहुँचे जो अब बंद हो चुका है। वहाँ एंट्री फीस थी। अंदर घुसते ही बहुत रोशनी नहीं थी। वहाँ पर करीब 100 लड़कियाँ थीं। हम एक टेबल पर बैठे और अरुण ने कहा, “जिसको बोलेगा वो तेरे साथ चलेगी।” मैंने कहा, “ठीक है।”
एक लंबी सी लड़की जो कि बहुत सेक्सी थी पास ही खड़ी थी। मैंने उसे बुलाया। वो आकर चेयर पर बैठ गई। मैंने नाम पूछा। उसने बताया शैली। पर अरुण को लड़की पसंद नहीं आई। कुछ देर बैठ रहने के बाद मैंने उसे रेस्पॉन्स नहीं दिया तो चली गई। अब अरुण एक लड़की को पकड़ लाया जिसका नाम कंचन था।
वो बहुत ही खूबसूरत थी। मैंने उसे बात कर ही रहा था कि वो बोली, “आती हूँ।” और कहीं चली गई। भीड़ इतनी थी कि कोई पहचान नहीं आता था। अरुण फिर एक दूसरी लड़की को ले आया। उसका नाम डॉली था। वो भी बहुत खूबसूरत थी। अरुण ने बात की। वो बोली, “2000/- लगेगी शॉर्ट टाइम का और फ्रेंच नहीं करूँगी।”
उसने 1500/- में तय किया। मैंने भी एक लड़की पसंद की। हम लोग बाहर निकले तो टैक्सी वाले को अपनी होटल चलने को कहा। वो बोला, “साहब यहाँ की लड़कियाँ सिर्फ प्रीमियर होटल में जाती हैं और कहीं नहीं।” वो हमें प्रीमियर होटल ले गया जहाँ 1600/- पर रूम का दिया पर उस लड़की के साथ मुझे ज्यादा मज़ा नहीं आया।
एक तो वो बुनलगन बहुत जल्दी-जल्दी कर रही थी और कोई को-ऑपरेशन नहीं था। इसलिए उसकी चुदाई की कहानी में कोई मज़ा भी नहीं है। पर अरुण की लड़की बहुत को-ऑपरेटिव थी। उसे वहाँ मज़ा आया पर मेरा पूरा पैसा वेस्ट गया। वहाँ से हम लोग कोलाबा में ब्लू नाइल डांस शो में गए जो कि अब बंद हो चुका है।
वहाँ लड़कियाँ हर उम्र की नंगी, पूरी न्यूड होकर डांस करती थीं। पहले स्टेज पर केवल टू पीस यानी ब्रा और पैंटी में आती थीं और लाइव म्यूजिक पर डांस करते पूरी न्यूड हो जाती थीं। ये मैंने सिर्फ मुंबई में ही देखा था। वो एकदम नया और पहला अनुभव था। पर जब मैंने दूसरी बार मुंबई गया था तब वो बंद हो चुका था और ऐसा डांस मुंबई में कहीं नहीं होता था।
ब्लू नाइल से हम कोलाबा के वुडू पब में गए जो कि हमारे होटल की बिल्कुल पास था। करीब 12 बजे से ज्यादा ही टाइम हो गया था। हम अंदर गए। वहाँ रोशनी बहुत कम थी। एक डांस फ्लोर था जहाँ कुछ लड़कियाँ और लड़के डांस कर रहे थे। कुछ लड़कियाँ टेबल पर बैठी थीं। कुछ अकेली थीं, कुछ लड़कों के साथ थीं।
कुछ अंधेरे में नीचे बाथरूम की ओर किस कर रहे थे। कुछ आपस में चिपके खड़े थे। कुल मिलाकर वहाँ का एटमॉस्फियर बहुत ही हॉट था। अरुण और मैं अलग-अलग खड़े थे। मैंने ऊपर चला गया। वहाँ एक लड़की टेबल पर अकेली बैठी थी। वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी लग रही थी।
मैंने उससे पूछा, “मे आई सिट हियर?” उसने कोई जवाब नहीं दिया और मैं भी बेशर्म की तरह वहाँ बैठ गया और उसे ड्रिंक ऑफर की। इतने में अरुण आ गया और मुझे नीचे ले गया और दूसरी लड़कियों से बात करने लगा और मैं डांस फ्लोर पर डांस करने लगा। इस तरह पब बंद होने का टाइम आ गया। 1 बज चुके थे। सब आप बाहर निकल रहे थे। तभी एक लड़का आया।
उसने कहा, “क्यों सब माल चाहिए क्या?”
मैं उसे अरुण के पास ले गया।
मैंने कहा, “ये भाई साहब क्या बोल रहे हैं?”
मैंने उसे लड़के से पूछा। वो जो ऊपर अकेली बैठी है वो।
वो बोला, “भी मिल जाएगी।”
मैंने पूछा, “कैसे?”
वो बोला, “सब यहाँ की कोई लड़की चाहिए वो मिल जाएगी।”
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उसने उस लड़की को आवाज़ दी, बोला, “सीमा इधर आओ।” वो झट से पास गई। वो लड़का उसे बोला, “ये सब तुम्हारे साथ जाना चाहते हैं।” मैंने बताया पास ही हमारा होटल है। हमने बताया हम दो लोग हैं पर अरुण ने एक दूसरी लड़की पसंद की जिसका नाम किरण था। वो भी बहुत सुंदर थी। रेट तय करके हम लोग होटल के नीचे आ गए।
सीमा बोली, “तुम मेरे साथ मेरे फ्लैट पर चलो, यहीं पास है।”
मैंने अरुण से पूछा।
वो बोला, “तू देख।”
वो बोली, “मैं अकेली ही हूँ, कोई डर नहीं है।”
मेरी गांड़ फट रही थी फिर मैं हिम्मत करके उसके साथ चला। वहीं कुछ दूर उसका फ्लैट था। सीमा के साथ मैं उसके फ्लैट पर पहुँचा।
मैंने पूछा, “कौन-कौन रहता है यहाँ?”
वो बोली, “मैं और मदर पर, वो अभी नहीं है, गाँव गई है इसलिए आपको यहाँ ले आई।”
सीमा ने उस समय स्लीवलेस वेलवेट टाइप की मैक्सी जैसी पहनी थी जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। फ्लैट बहुत ही खूबसूरत डेकोरेटेड था। लगता नहीं था कि ये किसी कॉल गर्ल का फ्लैट है। मैं सोफे पर बैठ गया। सीमा बाथरूम में चली गई और नाइटी पहनकर बाहर आई जो कि बहुत ही ट्रांसपेरेंट थी। उसके अंदर गारमेंट्स दिख रहे थे। वो नशीले आँखों से देख रही थी और मैं उसे। वो साथ में बैठ गई। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। फिर मुझे ध्यान आया कि मैंने व्हिस्की की बोतल रखी थी।
मैंने सीमा से कहा, “गिलास और पानी ले आओ।” वो फ्रिज से सोडा, आइस ले आई। मैंने अपना पेग बनाया और सीमा से पूछा। उसने कहा, “एक छोटा सा तुम्हारा साथ देने के लिए।” हम दोनों पीने लगे। और मैंने सीमा से उसके बारे में पूछ रहा था पर वो बराबर जवाब नहीं दे रही थी। अब मैंने उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए।
वो भी साथ देने लगी और एक हाथ से उसका बूब्स दबाने लगा। उसके बूब्स बहुत ही टाइट थे। अब मैंने उसके गर्दन पर होंठ लगाकर चूसने लगा। आचानक मैंने कहा, “बाथरूम किधर है?” मैंने बाथरूम देखा। बहुत ही नीट एंड क्लीन था और बढ़िया भी। शावर भी था। मैंने सीमा से कहा, “चलो नहाते हैं।”
वो मान गई। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और सीमा भी अपनी नाइटी उतारकर ब्रा और पैंटी में थी। उसने व्हाइट ब्रा और पैंटी पहनी थी जो कि बहुत ही हाई रेंज की लग रही थी जैसा कि एफ टीवी में मॉडल पहनकर आती है. बाथरूम में आते ही मैंने उसके ब्रा खोल दी। अब उसके बड़े-बड़े और गोल-गोल बूब्स मेरे सामने थे।
मैंने पहले उन्हें दबाने लगा और फिर चूसने लगा। वो पागल हुए जा रही थी। अब मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। सीमा की चूत एकदम चिकनी थी, बिल्कुल बाल नहीं थे। अब हम दोनों लिपटकर शावर के नीचे नहाने लगे और एक-दूसरे को चूम रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बहुत देर नहाने के बाद हम दोनों बाहर आए। सीमा ने फिर से नाइटी पहन ली और मैंने तौलिया लपेट लिया और एक-एक पेग और पीकर उसके बेडरूम में चल गए। बेडरूम में आते ही मैं पलंग पर लेट गया। मैं अभी भी तौलिए में ही था। सीमा ने अपनी नाइटी उतार दी और पलंग पर चढ़कर मेरी टांगों के बीच में आ गई।
अब उसने मेरा तौलिया खोल दिया। पहले उसने मेरे कानों में जीभ डालकर लिक करने लगी। फिर वो मेरे पूरे बदन पर चूमने लगी। उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरे पूरे बदन से टकरा रहे थे जो कि मुझे और भी उत्तेजित कर रहे थे। अब मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया था। अब वो लंड को हाथ से सहलाने लगी।
अब उसने मेरी टांगें पलंग से नीचे लटका दी और खुद भी पागल से नीचे उतर गई और घुटनों के बल बैठकर लंड को मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और बीच-बीच में अंडों (टेस्टिस) को भी मुँह में ले लेती थी। इस तरह वो पागल हो गई थी।
अब मैंने उसे पलंग पर आधा लिटाया और उसके पैर नीचे कर दिए और खड़े होकर उस पर छा गया और उसके दोनों बूब्स बारी-बारी से चूने लगा। वो एकदम पागल हो गई। वो बोली, “फक मी डार्लिंग।” उसके आवाज़ में कंपन था। मैंने उसकी चूत में उँगली डाली तो वो बिल्कुल गीली थी।
अब मैंने खड़े-खड़े ही उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा और कंडोम चढ़ाया और अपना एक पैर पलंग के किनारे पर रखा और उसकी चूत में लंड डालने लगा। उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और अपनी चूत में डालने लगी। उसकी चूत बिल्कुल गीली थी इसलिए लंड को अंदर जाने में टाइम नहीं लगा।
अब मैंने उसकी कमर पकड़कर स्ट्रोक लगाने लगा। पहले धीरे-धीरे फिर तेज कर दी अपनी स्पीड। वो और मैं बिल्कुल पसीना-पसीना हो गए। अब मैंने पलंग पर आकर उसे ऊपर ले लिया। अब वो ज़ोर-ज़ोर से स्ट्रोक लगने लगी। मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स दबा रहे थे और उसके निप्पल्स मसल रहे थे।
उसके हाथ मेरे हाथों के ऊपर थे। अब मैं भी उठकर बैठ गया और उसकी टांगों को अपनी कमर में फंसा दिया और दोनों एक-दूसरे को चोदने लगे। कुछ ही पलों में सीमा झड़ गई और अपने आप को ढीला छोड़ दिया। अब मैंने उसको लिटा दिया और इंडियन स्टाइल में चोदने लगा। मेरे दोनों हाथ पलंग पर थे।
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मैं जैसे दंड मारते वैसे ही सीमा को चोद रहा था। अपनी पूरी स्पीड से मैं दंड पेल रहा था और सीमा भी मुझे उत्साहित कर रही थी। साथ वो ओह आह ओह आह भी चिल्ला रही थी। उसने अपनी पैर मोड़ लिए थे जिससे पूरा का पूरा लंड उसके अंदर तक जा रहा था और मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था।
उसके दोनों हाथ मेरी कमर को पकड़े थे। और कुछ देर बाद मैं झड़ गया और अपना पूरा भार सीमा पर डाल दिया और अपने आप को ढीला छोड़ दिया। सीमा मेरे बालों में उँगलियाँ डालकर सहलाने लगी और कुछ देर हम यूँ ही पड़े रहे। अब मैंने धीरे से लंड उसकी चूत से निकाला और बाजू में लेट गया।
वो उठी और नैपकिन से कंडोम उतारा और लंड साफ किया और बाथरूम में चली गई। वो जब लौटी तब मैं भी बाथरूम में घुसकर अपने आप को साफ किया और वापस आकर सोफे पर बैठ गया। अब 3 बज चुके थे। सीमा भी नाइटी पहनकर मेरे बाजू में बैठ गई। वो बोली, “सोना नहीं है क्या?” मैंने कहा, “अभी नहीं।” वो मुस्कुराने लगी।
अब दूसरा राउंड बाकी था। पूरा नशा उतर चुका था। मैं और शराब पीने लगा। सीमा ने मना कर दिया। सीमा किचन से कुछ नमकीन ले आई। मुझे अब भूख भी लग रही थी। करीब 1/2 घंटे बाद मैं अब सीमा को पास खींचा और उसकी कमर में हाथ डालकर उसके होंठ पर फ्रेंच किस करने लगा। वो भी अपनी जीभ मेरे मुँह के अंदर डालकर फेर रही थी।
अब मैंने उसकी नाइटी उतार दी और उसके बूब्स पर हाथ फेरने लगा। उसके बूब्स की साइज़ करीब 36 और गोल-गोल शेप में थे और उस पर पिंक निप्पल मुझे चूसने के लिए इनवाइट कर रहे थे। और मैंने उनके निप्पल चूसने लगा और दूसरा बूब्स धीरे-धीरे दबाने लगा और फिर उसे लिटाकर उसके पूरे बदन को चाटने।
उसने मुझे धक्का दिया और मैं सोफे पर ही लेट गया और वो मुझ पर आ गई। अब वो मुझे चाटने लगी। अब मैंने उसे लंड पर व्हिस्की लगाकर चाटने को कहा। वो नहीं मानी फिर तैयार हो गई। अब वो बार-बार व्हिस्की लंड पर लगाती और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
अब मैंने कंडोम चढ़कर उसे लिटा दिया और उसकी एक टांग को सोफे की बैक रेस्ट पर रख दिया जिससे उसकी चूत और फैल गई। अब मैंने पहले उसकी चूत को सहलाया और उँगली डालकर ज़ोर से हिलाने लगा। उसने आँखें बंद कर लीं। उसे बहुत मज़ा आ रहा था। वो सी सी सी कर रही थी।
उसके बाद मैं अपना बिल्कुल तना हुआ लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाकर हिलाने लगा। उसकी चूत गीली हो गई। अब मैंने एक ही झटके में पूरा का लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो चिल्ला उठी, “ये क्या कर रहे हो?” उसकी आवाज़ में दर्द था पर मैंने उसकी एक जाँघ पर हाथ रख और दूसरे हाथ से उसके बूब्स को मसलता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था।
फिर मैंने वहीं पर डॉगी स्टाइल में चोदा और जम-जम के स्ट्रोक लगा रहा था। इस बीच सीमा एक बार और झड़ गई थी जिससे मैं उसकी लुब्रिकेटेड चूत में अपना लंड का आना-जाना जारी रखा। अब मैंने उसे दूसरे सिंगल सीट सोफे पर बिठाया और दोनों टांगों को आर्म रेस्ट पर रखकर चूत को फैला दिया और खुद ज़मीन पर खड़ा होकर सीमा को बुरी तरह चोदने लगा।
अपनी पूरी स्पीड से चोदते हम दोनों अब ज़मीन पर आ गए थे और फिर वहीं पर एक साथ झड़ गए। मैं पूरा पसीना-पसीना हो गया था जबकि दिसंबर का महीना था पर मुंबई में ठंड नहीं होती है। मैं वहीं ज़मीन पर ही पड़ा रहा। सीमा उठकर चली गई। वापस आकर मुझे उठाकर बेडरूम में ले गई। वहाँ हम दोनों ऐसे ही नंगे सो गए। पता नहीं कब नींद आ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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सुबह जब उठा तो 8 बज चुके थे। सीमा पहले ही उठ चुकी थी। वो चाय बनाकर लाई। मेरे सर दर्द के मारे फट जा रहा था। रात में कुछ ज्यादा ही व्हिस्की हो गई थी। चाय पीकर मैंने सीमा को एक बार फिर इंडियन स्टाइल में चोदा पर इस बार उसका को-ऑपरेशन नहीं था। करीब 9 बजे मैं वहाँ से निकला और होटल पहुँचा। अरुण अब भी सोया हुआ था और किरण जा चुकी थी। वो उठा और बताया उसने कैसे रात भर किरण को चोदा। और मैंने भी बताया कि मैंने सीमा को कैसे चोदा।
अब हम तैयार होकर करीब 11 बजे होटल छोड़ा। 3 बजे दादर से हमारी ट्रेन थी। अरुण ने याद किया कि कांग्रेस हाउस में हमारा एडवांस पड़ा है। हम टैक्सी में वहीं गए। पहले ब्रेकफास्ट किया और कांग्रेस हाउस गए। मैंने अरुण से कहा, “यार मेरा मूड बिल्कुल नहीं है, तू ही होकर आ।” अरुण एक लड़की जिसका नाम सोनम था, वो गोवा की थी, उसे लेकर गया। मैं बाहर ही बैठा रहा। करीब 1/2 घंटे में वो बाहर आया। अब 2 बज चुके थे। सीधे दादर स्टेशन पहुँचे। ट्रेन लगभग छूटने को थी। चलती ट्रेन में चढ़े। तो दोस्तों ये थी कहानी हमारी मुंबई सैर की।
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