Hardcore Sex Lover Aurat Chudai
एक बहुत ही प्रचलित कहावत हैः मनुष्य कभी अपने पास वाले सामान से संतुष्ट नहीं हो पाता। उसके पास भले ही दुनिया की हरेक चीज मौजूद हो, फिर भी वो कुछ और पाने या दूसरे के किसी चीज को हथियाने में लगा ही रहता है। वो अपनी चीजों से तंग आ जाता है और सोचता है—काश वो भी हमारा होता तो कितना अच्छा होता। बस यही असंतुष्टि और लालच की कहानी है अमृता और नेहा की। Hardcore Sex Lover Aurat Chudai
जहाँ एक ओर नेहा का मनीष के 50 सेमी डायमीटर वाले हथौड़े जैसे लंड से मार खा-खा के रात-रात भर आह-आह की कराह लगा-लगा कर 1 मिनट में ही बुरा हाल हो जाता था, वहीं नितेश के मिर्ची जैसे लंड से अमृता को 12-12 घंटे धक्का खाने के बावजूद एक चून भी नहीं निकलती थी (वो तकरीबन सो ही जाती थी। पता ही नहीं चलता था नितेश ने कुछ घुसेड़ा है)।
अमृता न नेहा को अपने वैवाहिक जीवन में इस कारण असंतुष्टि थी। अमृता को किसी हथौड़े लंड वाले से बूर की शांति पाने की असंतुष्टि थी न नेहा को किसी मिर्ची जैसे वाले से। वो रोज अपने बूर पर 12-12 घंटे डंडे खा कर थक चुकी थी। दोनों की परेशानी बढ़ती जा रही थी।
लेकिन भगवान दयावान सबकी कष्ट दूर करता है। इनकी भी। अमृता पिछले कुछ दिनों से मनीष पर नजर दौड़ा रही थी। वो उनके हट्टे-कट्टे शरीर से मोहित हुए जा रही थी। न जाने उन्हें लग गया कि उनका लंड उनकी बूर की शांति पूरी कर सकता है। वो उनसे किसी तरह चुदवा कर दम लेने की सोच ली। आइडिया भी आ गया।
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अगले दिन उन्होंने नेहा को फोन लगाया, “अरे बहन, कैसी हो?”
“बस ठीक हूँ” डिप्रेस्ड टोन में नेहा ने कहा।
“ठीक हैं तो आवाज इतनी गहरी?”
“अब क्या बताऊँ, इस रोजमर्रा की ज़िंदगी से मैं तंग आ गई हूँ।”
“क्यों भाई जी से कोई झगड़ा?”
“नहीं, नहीं लेकिन उनही से तंग हूँ।”
“क्यों बहन झूठ क्यों बोलती हो। उनसे ज़िंदगी के मजे लूटा कर उन पर लांछन लगाती हो।”
इसी तरह चुपड़ी बातें करके अमृता ने नेहा से न चाहते हुए भी उगलवा दिया “अरे मैं रात-रात भर उनके उससे पेला कर थक चुकी हूँ। अब सहा नहीं जाता।”
“क्या सच? तब बात बन गई। अब क्या कहूँ, मेरे उनका मिर्ची जैसा है, कुछ मजा ही नहीं दिला पाते। मैं भी इस कारण थोड़ा तंग हूँ। क्यों न हम अपने पतियों को एक्सचेंज कर लें?”
“पागल हो गई हो क्या?”
“सोच लो ज़्यादा परेशानी तुम्हें है। मंजूर हो तो एक घंटे के अंदर फोन करो। मैं बताऊँगी आगे क्या करना है।”
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बहुत सोचने के बाद नेहा ने अमृता को फोन किया “मैं तैयार हूँ।” “ठीक है। तो सुनो, कल 11 बजे तुम मेरे पति के ऑफिस में फोन करके उनसे कहो ‘मैं आपकी पड़ोसन बोल रही हूँ। असल में, आज मेरे पति रात भर किसी काम से बाहर जा रहे हैं। इसलिए सुरक्षा के वास्ते आप ऑफिस से डायरेक्ट मेरे यहाँ चले आइए ना प्लीज। आपके घर में तो वैसे भी जवान बेटा है।’ किसी तरह उन्हें मनाने की कोशिश करना। मैं अपना काम कर लूँगी।”
इस प्रकार दोनों की समस्या सुलझाने जा रही थी। अगले दिन 1 बजे के करीब अमृता ने मनीष को ऑफिस में फोन किया “मैं आपकी पड़ोसन बोल रही हूँ। मेरे पति आज रात भर किसी काम से बाहर जा रहे हैं। इसलिए आज आप ऑफिस से मेरे यहाँ सुरक्षा के लिए चले आइए ना प्लीज। आपकी बीवी तो वैसे भी हिम्मतवान है। खाने की चिंता न करें।”
“लेकिन?”
“लेकिन कुछ नहीं जी आपको आना पड़ेगा।” अमृता ने मस्तानी आवाज में कहकर फोन रख दिया।
बहुत सोचने के बाद मनीष रात 10 बजे अमृता के यहाँ पहुँचे। अमृता ने दरवाजा खोला और कहा “आइए आपका स्वागत है।” इसके पहले ही अमृता ने अपने सभी बच्चों को सुरक्षित नींद की गोली देकर सुला दिया था। मनीष ने पूछा “हाँ बताइए मैं कहाँ सोऊँ?”
अमृता ने तब तक दरवाजा बंद कर दिया। फिर मस्तानी अदा लगाकर बोली “आप समझ नहीं पाए मैंने आपको क्यों बुलाया है?” कहकर पलटी ही थी कि मनीष ने उनकी साड़ी की एक एज को पकड़कर ज़ोर से खींचते हुए बोला “मुझे सब समझ है कि आपने मुझे क्यों बुलाया है।”
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एज अ रिजल्ट अमृता घूमती-घूमती कुछ दूर जा कर रुकी जब उनकी साड़ी की नॉट बंधी हुई मिल गई। अमृता का ब्लाउज में खड़ा रहना मुझे भी मचला दिया। बोली “आप तो बड़े नटखट हैं जी। आते ही तेवर दिखाना शुरू कर दिया।” “क्या करें आपने बात ही ऐसी छेड़ दी और वैसे भी आपका तन मुझे लुभा गया।”
मनीष ने और एक धक्का देकर उन्हें केवल साये और ब्लाउज में खड़ा कर दिया। वाह क्या लग रही थी वो। अमृता का शर्म के मारे सिर झुक गया। मनीष उनके पीछे जाकर ब्लाउज के बटनों को खोलते हुए बोले “अब शर्माना कैसा। न्योता तो आपका ही था।”
जब उन्होंने पूरा ब्लाउज खोलकर उन्हें केवल ब्रा न साये में कर दिया तब अमृता से न रहा गया। पीछे पलटकर उनके शर्ट के बटनों को खोलते हुए और उनके छाती को इधर से उधर चूमते हुए बोला “काश आप मुझे पहले मिले होते। आपके बिन मेरी ज़िंदगी अधूरी थी। आज जितना मन हो उतना मजा लूटिए। आज से मैं आपकी दासी हुई।”
मनीष ने उन्हें पलटाकर गर्दन और बालों को चूमते हुए ब्रा के ऊपर से ही उनके चुचियों को जो मसलना शुरू किया तो अमृता के मुँह से मस्तानी आआआह-आआआह की कराह निकालना शुरू कर दिया जो मनीष को और भी मस्त करता चला गया। कुछ देर बाद अमृता ने उनका पैंट भी खोल दिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और जब मनीष के लंड को जांघिया फाड़कर बाहर निकलने की चेष्टा करते हुए देखा तो उनसे न रहा गया और उसे भी खोलते हुए तन-तनाता हुआ बहुत से मोटे से लंड को देखकर चकित होती जाते हुए थोड़ी पीछे हटकर दंग रूप से उसे देखकर सोची “आज तो सचमुच मजा आ जाएगा। ये मेरी बूर को फाड़े बगैर न रहेगा। हाय मैं तो मस्त होकर मर गई रे।”
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अमृता के इस रवैये को देखकर मनीष ने बोला “क्यों आज तक ऐसा लंड नहीं देखा?” सचमुच उन्होंने आज तक ऐसा लंड नहीं देखा था। वो बोली “नहीं” और फिर वहाँ से जा के दिया सेट लाई और उनकी लंड की आरती उतारने लगी।
“ये क्या कर रही हो?” “ये ही तो मेरे भगवान हैं। इनकी तो पूजा करनी ही होगी।”
फिर दिया सेट को रखते हुए उस लंड को मुँह में ले ली। बड़ी मुश्किल से लंड उनके मुँह में समाया। उसे चूसकर वो खुद को और मनीष को भी मस्त करने लगी। थोड़ी देर में ही मस्त होकर मनीष ने उन्हें उठाकर साये और ब्रा को खोलते हुए बोले “चल नंगा नाच कर मेरी रंडी।”
इतने प्रकार से नितेश ने अमृता को कभी नहीं चोदा था। इसलिए अमृता को हरेक नई चीज चकित करने के बाद मजा भी दे रहा था। वैसे भी अचानक अमृता को नंगी देखकर मनीष मचल गया। दो बेल जैसे चुची न बूर का सुंदर-सडौल रूप किसी को भी मचलाने के लिए काफी था।
आदेशानुसार उन्होंने नाचना शुरू कर दिया। थोड़ी देर उनकी नाच को बारीकी से देखकर मनीष ने उन्हें अपने पास बुलाया। गांरों को मचका कर मनीष को मस्त कर चलकर जब वो उनके पास पहुँची तो मनीष ने उन्हें झटका देकर अपने लंड पर बिठा लिया न लंड को ऊपर-नीचे करने लगे।
ये देखकर अमृता को मजा आया और उन्होंने बोला “आपका लंड तो मुझे झुलवा झुला रहा है। वाह बहुत मजा आ रहा है।” ये सुन और मदहोश होकर वो अपना लंड स्पीड से झुलाने लगे। थोड़ी देर बाद मनीष ने खाने के बारे में पूछा तो अमृता ने उनके पैरों पर खड़ी होकर उनको अपना बूर चटवाने लगी जो कि कभी नितेश को नहीं चटवाया था और बोली “आपके लिए मुझे इससे ज्यादा कोई स्पेशल खाना नहीं लगा।”
“है भी बहुत स्पेशल। खाने में मजा आ रहा है। पेट न मन दोनों भरा जा रहा है।”
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थोड़ी देर में अमृता को बेहोशी टाइप होने लगी तो मनीष ने चाटना छोड़ दिया क्योंकि ये अमृता का बूर चटाने का पहला एक्सपीरियंस था। फिर होश में आते ही अमृता ने उन्हें लिटाया और ऊपर से अपना बूर धीरे-धीरे उनके लंड में धँसाना शुरू कर दिया। ये करने में उन्हें बहुत कष्ट हुआ।
बावजूद इसके उन्होंने मस्तानी आआआआह-आआआह की कराह जानबूझकर निकालते हुए उनके लंड में घुसा दिया। जैसे ही वो पूरा लंड घुसा ली, ज़ोर से चिल्ला पड़ी। उन्हें लगा उनका बचदानी पर चोट हुआ है। फिर भी वो पहले धीरे और बाद में स्पीड से उनके लंड पर उछल-उछलकर जानबूझकर मस्तानी आह-आह निकालकर खुद और मनीष को भी मस्त करने लगी।
थोड़ी देर में ही मनीष पर ऐसी मस्ती छाई कि वो उनको उसी तरह लेकर उनके बगल में पटक दिया। फिर पूरे स्पीड से उनकी बूर पर वार कर उन्हें चोदने लगे। अमृता का उनके लंड से मार खा के बुरा हाल हुए जा रहा था। पसीना निकलने लगा था। कष्ट महसूस करने के बावजूद वो मस्तानी अह-आह की कराह निकालकर मनीष को मस्त कर रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बहुत देर बाद मनीष के लंड से वीर्य का फव्वारा छूटकर अमृता के बूर में बहने लगा। अमृता ने इसकी गर्मी को महसूस करते हुए अपना भी पानी छोड़ दिया। फिर दोनों एक दूसरे से बहुत देर तक लिपटे रहे। जब दोनों की सिहरन कम हुई तो दोनों बहुत देर तक एक दूसरे को देखते रहे जैसे प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे को देखते हैं।
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अंत में शर्मा के अमृता को अपनी नजर हटानी पड़ी न वो उनसे हटकर जाना ही चाहती थी कि मनीष ने उन्हें फिर से दबोच लिया “अभी कहाँ जा रही हो जान-ए-मन? अभी तो तुम्हें असली मजा देना बाकी है। तुम बस मेरा साथ निभाओ।” फिर उन्होंने उनकी बूर पर अपने लंड से वार करना शुरू कर दिया। ये देख अमृता को हैरानी हुई लेकिन उन्होंने तो ज़िंदगी भर उनका साथ देने का वादा कर लिया था। थोड़ी देर बाद मनीष फिर से पूरे फॉर्म में आकर अमृता के मुँह से आआआह-आआआह निकलवाने लगे थे।
फिर जैसे ही वो वीर्य छोड़ने वाले थे तभी लंड को निकालकर अमृता के मुँह पर डाल दिया। अमृता वूँ-वूँ करके लंड निकालना चाहती थी पर मनीष ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। अमृता को थोड़ा गुस्सा आया लेकिन जब उन्होंने वीर्य का पहली बार स्वाद चखा तो अच्छा लगने पर खुश हो गई न उनका साथ देने लगी। पूरा वीर्य निगलने के बाद उन्होंने मुँह से लंड निकाल दिया। फिर दोनों एक दूसरे को बहुत देर तक चूमने चाटने के बाद एक दूसरे से विदाई ली। लेकिन अब ये हर दिन का सीक्वेंस चल पड़ा।
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