• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer

HamariVasna

Hindi Sex Story Antarvasna

  • Antarvasna
  • Girlfriend Boyfriend Sex Story
  • Bhai Bahan Sex Stoy
  • Hindi Sex Story
  • माँ बेटे का सेक्स
  • अपनी कहानी भेजिए
  • ThePornDude
You are here: Home / Meri Chut Chudai Story / बेस्ट टीचर से रंडी टीचर बन गई मैं

बेस्ट टीचर से रंडी टीचर बन गई मैं

जून 23, 2026 by hamari Leave a Comment

Student Gang Fuck Madam

हर कहानी का कोई न कोई नायक और कोई न कोई नायिका जरूर होती है, पर शायद मेरी कहानी वो पहली कहानी होगी जिसमें सिर्फ खलनायक ही खलनायक भरे हुए हैं। मैं खुद नहीं समझ पा रही कि मेरा इस कहानी में रोल क्या है — नायिका या खलनायिका? शायद आप ही मुझे कुछ बता पाएं। Student Gang Fuck Madam

ये कहानी कुछ महीने पहले की है। मैं ताज़ा-ताज़ा बी.एड का कोर्स ख़त्म करके कॉलेज से निकली ही थी और मैंने कॉरेस्पॉन्डेंस से एम.ए. शुरू किया था। मैं अच्छे घर की लड़की हूँ। घर में पैसे की कोई कमी नहीं है। लेकिन फिर भी शुरू से ही इंडिपेंडेंट खयालात की होने की वजह से मैं अपना पैसा खुद कमाना चाहती थी।

बी.एड का रिजल्ट आने से पहले ही मेरे पिताजी के एक दोस्त के स्कूल में मैं पढ़ाने लग गई। ये स्कूल 12 कक्षा तक था और मैं कम क्वालिफाइड होने पर भी 12 कक्षा तक इंग्लिश पढ़ाती थी। इसकी वजह दो थी। एक तो मैं शुरू से ही इंग्लिश मीडियम में पढ़ी थी और दूसरा, जैसे कि मैंने आपको बताया कि मेरे स्कूल का प्रॉपर्टियर मेरे पिताजी का अच्छा दोस्त था।

और इसी वजह से स्कूल में सब मुझे अच्छे से जानते थे और मैं स्टूडेंट्स की जमकर पिटाई कर सकती थी। मैं बहुत ही स्ट्रिक्ट टीचर थी और स्कूल के सबसे ज्यादा बिगड़े हुए लड़कों को भी जमकर थप्पड़ लगाती थी। सब स्टूडेंट्स मुझसे डरते थे। हम सब टीचर्स और स्टूडेंट्स स्कूल बसों में ही अपने-अपने घर जाते थे।

हमारी स्कूल की बसें हमेशा खचाखच भरी होती थीं लेकिन हमें टीचर्स को हमेशा बैठने की जगह मिल जाती थी और हमारे स्टूडेंट्स खड़े होकर जाते थे। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। पर एक दिन छुट्टी के बाद घर जाते वक्त मैंने देखा कि ११ क्लास की एक लड़की अपने आँसू छुपाते हुए बस से उतरी और उसकी सहेली ने उसके कान में कहा, “तू घबरा मत, कल हम इंग्लिश वाले मैम से बात करेंगे, वो उन्हें अच्छा सबक सिखाएंगी।”

मुझे बात कुछ समझ में नहीं आई लेकिन मैंने सोचा कि कल जब ये मुझसे बात करेंगी तब खुद-ब-खुद पता चल जाएगा। अब मेरे स्कूल की सब बड़ी लड़कियाँ मुझे कभी-कभी अकेले में दीदी-दीदी बुलाती थीं और मेरे काफी क्लोज थीं और अपनी कई समस्याएँ अक्सर मेरे साथ ही डिस्कस करती थीं।

इसे भी पढ़े – घर लुटने आये चोर मेरी इज्जत लुटने लगे

इसकी वजह ये थी कि मैं उनसे उम्र में ज्यादा बड़ी नहीं थी। मैं १२वीं क्लास की लड़कियों से केवल ४ साल ही बड़ी थी। बल्कि स्कूल के १२वीं क्लास के ४-५ बदमाश लड़कों से तो मैं सिर्फ २ साल ही बड़ी थी क्योंकि वो सब कम से कम २-२ कक्षा में फेल हो चुके थे।

तो अगले दिन जब मैं स्कूल पहुँची तो मैं वेट कर रही थी कि कब वो लड़कियाँ आकर मुझे अपनी समस्या बताएँ और मैं उसे सॉल्व कर सकूँ। लेकिन एक दिन बीता, दो दिन बीते, फिर पूरा हफ्ता बीत गया पर उन्होंने मेरे से कोई बात नहीं की और मैं भी उसे भूल गई।

फिर एक दिन अचानक उसी दिन की तरह वो लड़की फिर रोते हुए बस से उतरी और इस बार वो ज्यादा ही रो रही थी। बल्कि बाकी टीचर्स भी उसकी सहेलियों से पूछने लगे कि इससे क्या हुआ। इस पर उसकी सहेलियों ने कहा, “मैम इसका सर बहुत जोर से दर्द कर रहा है।” उन टीचर्स के लिए बात वहीं दब गई। लेकिन मुझे इस सब पर विश्वास नहीं हुआ।

तो मैं अगले दिन खुद उस लड़की और उसकी सहेली को फ्री पीरियड में अपने कमरे में बुलाया और उससे पूछा कि प्रॉब्लम क्या है। वो बोली, “कुछ नहीं मैम, सब ठीक है।” “मुझसे झूठ मत बोलो,” मैंने कहा, “उस दिन भी मैंने तुम्हें इसी तरह बस से रोते हुए उतरते देखा था और तुम्हारी सहेली तुम्हें कह रही थी कि हम कल इंग्लिश वाले मैम को ये बात बताएंगे और वो उनकी खबर लेंगी। मुझसे छुपाओ मत और खुलकर बताओ कि प्रॉब्लम क्या है?”

इस पर वो लड़की फूट-फूटकर रोने लगी। तो उसकी सहेली बोली, “मैम मैं आपको बताती हूँ कि प्रॉब्लम क्या है। आप तो जानती हैं कि हमारी बस में कितनी भीड़ होती है और हमें खड़े-खड़े बस में जाना पड़ता है।” “हाँ! हाँ!” मैंने कहा। “तो मैम प्रॉब्लम ये है कि पिछले एक महीने से वो १२वीं क्लास के मुस्टंडे, वो बास्केटबॉल प्लेयर्स!

वो फेलियर! हमें बस में रोज तंग करते हैं। हम लड़कियों का उन्होंने बस पर सफर करना मुश्किल कर दिया है। कभी तो वो हमारे लोअर बैक में उंगली डालते हैं तो कभी हमारी ब्रेस्ट पर चुटकी काटते हैं। कल तो उन्होंने हद ही कर दी। कल उन चारों ने हमें कसकर पीछे से पकड़ लिया और जोर से हमारी ब्रेस्ट मसल दी,” वो बोली।

“क्या? उनकी ये हिम्मत! मैं आज ही उनकी शिकायत प्रिंसिपल से करती हूँ, और उनकी खुद खूब पिटाई करूँगी। और ये सब तुमने पहले क्यों नहीं बताया? और बाकी लड़कियों ने इसकी शिकायत क्यों नहीं की?” मैं बोली।

“नहीं-नहीं मैम, आप प्लीज ये बात किसी से न कहिएगा वरना सब हम पर हँसेंगे और हमारी स्कूल में बदनामी होगी और मजाक बनेगा। आप चाहें तो उनकी पिटाई कर दीजिए पर ये बात आप उनसे भी न कहिएगा कि हमने बताई है वरना वो हमें और तंग करेंगे या फिर बदनाम करेंगे। अभी तो ये बात सिर्फ हमें, आपको या फिर उन लड़कों को पता है जो हमारे आस-पास बस में खड़े होते हैं,” वो बोली।

“ठीक है, मैं देख लूँगी,” मैंने कहा।

उस दिन क्लास में जाते ही मैंने उन चारों को खड़ा कर लिया और बिना कुछ बताए उनकी जमकर थप्पड़ परेड की। इतना मारा कि मेरे हाथ दुखने लगे और उनके गालों पर मेरे थप्पड़ों की वजह से नील पड़ गए। जब क्लास ने पूछा कि मैम आप इन्हें क्यों मार रही हैं तो मैंने कहा, “इन्हें बस में सफर करना सिखा रही हूँ।” और वो चारों सर झुकाकर खड़े हो गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

कुछ दिन तक सब ठीक रहा, लेकिन एक दिन फिर वो लड़कियाँ मेरे पास आईं और रोने लगीं। मैंने उनसे पूछा, “अब क्या हुआ? अब तुम किस बात पर रो रही हो? क्या वो तुम्हें अभी भी तंग करते हैं?”

इस पर वो मुझे बोलीं, “मैम आपने जब उनकी पिटाई की थी तो कुछ दिन तक सब ठीक रहा लेकिन पिछले दो दिन से वो फिर से हमें तंग कर रहे हैं।”

“लगता है अब प्रिंसिपल से बात करनी ही पड़ेगी,” मैं बोली।

“प्लीज मैम आप प्रिंसिपल से कुछ मत कहिएगा। ये बात अगर फैल गई तो हमारा मजाक उड़ेगा। हमारा स्कूल आना मुश्किल हो जाएगा,” वो गिड़गिड़ाईं।

“तो ठीक है, आज मैं तुम लोगों के साथ बस में खड़ी रहूँगी। अगर उन्होंने कुछ किया तो मैं उनकी वहीं पिटाई करूँगी और उन्हें स्कूल से निकलवा दूँगी,” मैं गुस्से से भरकर बोली।

इसे भी पढ़े – बाप को अपनी कड़क चूत दिखा कर फसाया 1

उस दिन मैंने फिर उन चारों की खूब पिटाई की और छुट्टी के बाद बस में लड़कियों के साथ पीछे खड़ी हो गई। जब मेरे साथी टीचर्स ने पूछा तो मैंने कहा कि मैं स्टूडेंट्स के साथ मिक्सअप होने की कोशिश कर रही हूँ ताकि ये मुझसे इतना ज़्यादा न डरें। उस दिन सब ठीक रहा। मैं उनके साथ ३-४ दिन बस में खड़े होकर सफर करती रही।

वो ४ बदमाश हमारे पीछे ही खड़े रहते थे लेकिन उनमें से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि कुछ कर सके। तो कुछ दिन बाद मैं फिर आगे बैठने लगी। अगले ही दिन वो लड़कियाँ फिर मेरे पास वही शिकायत लेकर आ गईं। तो मैं फिर उस दिन पीछे खड़ी होकर सफर करने लगी।

दो-एक दिन तक सब ठीक था फिर एक दिन अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने कोई चीज मेरे पीछे मेरे बटक्स (यानी चूतड़ों) के बीच घुसा दी हो। मैं एकदम काँप गई। मेरी सारी बॉडी ठंडी पड़ गई और मेरे शरीर के रोयें खड़े हो गए। मैं सारी उम्र गर्ल्स स्कूल और गर्ल्स कॉलेज में ही पढ़ी हूँ।

मेरे पिताजी मुझे खुद स्कूल/कॉलेज ड्रॉप करके जाते थे और खुद पिकअप करते थे। किसी लड़के को मैंने कभी आँख भर नहीं देखा था। किसी लड़के का मुझे स्पर्श करना तो दूर की बात थी। हालाँकि मैं गोरी-चिट्टी, तीखे नैनों वाली एक सुंदर, पतली लड़की थी। मेरी सहेलियाँ अक्सर मुझे कहती थीं कि मैं किसी किस्मत वाले को ही मिलूँगी और जिससे मिलूँगी वो १ साल तो पहले बेडरूम से ही नहीं निकलेगा, काम करना तो दूर की बात है।

पर उस पल मुझे बिजली का झटका लगा। पहली बार मैंने किसी चीज को अपने शरीर के एक नाजुक भाग के अंदर सरकते महसूस किया था। मेरे पाँव हल्के हो गए और एक पल के लिए मेरे होश उड़ गए, चेहरे का रंग एकदम फीका पड़ गया, गला सूख गया। मैं लड़खड़ाकर गिरने लगी, पर फिर बस की सीट पर लगी सपोर्ट को पकड़कर अपने आप को संभाला। मेरे हाथ काँप रहे थे।

लड़कियों ने पूछा, “मैम आप ठीक तो हैं?” “हाँ मैं ठीक हूँ,” मैंने कहा।

लेकिन मेरे चेहरे के उतरे रंग को देखकर मेरे साथी टीचर्स ने जब यही सवाल मुझसे पूछा तो मैंने कहा कि शायद मुझे बुखार हो रहा है। उस दिन रात को देर तक मुझे नींद नहीं आई। सारी रात मुझे मेरे चूतड़ों के बीच वो चीज सरकती महसूस होती रही। मैं अगले २ दिन स्कूल नहीं गई। बीमार होने का बहाना कर दिया।

जिस दिन मैं स्कूल गई भी, उस दिन मैं आगे अपनी सीट पर जाकर चुपचाप बैठ गई। तो वो लड़कियाँ उदास चेहरे के साथ मेरी तरफ देखती रहीं। और जब वो दोनों बस से उतरीं तो दोनों की आँखें भरी हुई थीं। मुझे टीचर्स ने भी पूछा, “आज आपने स्टूडेंट्स के साथ खड़े नहीं होना क्या? क्या बात है? सब ठीक है?” “सब ठीक है, बस थोड़ी वीकनेस लग रही है,” मैंने बहाना किया।

अगले दिन वो लड़कियाँ फिर मेरे पास आईं और मुझसे बोलीं, “मैम आपको क्या हुआ? मैम जब से आपने हमारे साथ खड़े होना बंद किया है उन लोगों ने हमें फिर तंग करना शुरू कर दिया। जब आप हमारे साथ खड़ी होती थीं तब सब ठीक था। मैम आप प्लीज हमारे साथ पीछे खड़ी हो जाया कीजिए! प्लीज!”

मैंने कहा, “अच्छा ठीक है!” और वो चली गईं। लेकिन मैं सारा दिन टेंशन में रही और उस दिन का वाकया याद करती रही। शाम को किसी तरह हिम्मत जुटाकर मैं पीछे जाकर खड़ी हो गई। लगभग सारा सफर आराम से कट गया और मैं इत्मीनान से हो गई लेकिन मेरा स्टॉप आने से २ मिनट पहले ही किसी ने फिर पीछे से मेरे चूतड़ों में हाथ दे दिया और इस दफा अच्छी तरह एक झटके में मेरे चूतड़ों के बीचों-बीच नीचे से सरकाते हुए ऊपर तक ले गया।

इसे भी पढ़े – माँ बेटे वासना की आगोश में समां गए

मैं एकदम से पीछे पलटी तो सब लड़के इधर-उधर देख रहे थे और मुझे पता भी नहीं चला कि ये किसने किया है। मेरे साथ खड़ी लड़कियों ने पूछा, “मैम सब ठीक है?” “हाँ!” मैंने जवाब दिया। उस रात मैं गुस्से से भरी सो भी न पाई। अगले दिन क्लास में जाते ही मैंने उन चारों की खूब पिटाई की और इस दफा मैंने क्लास के पूछने पर कहा कि इन लोगों ने कितने दिनों से मुझे काम नहीं दिखाया।

उस शाम बस में चढ़ते ही जब लड़कियों ने मुझे पीछे बुलाया तो मैं कॉन्फिडेंस के साथ उन लड़कों को घूरती हुई पीछे जाकर खड़ी हो गई। अब इतनी बुरी तरह पिटाई होने के बाद भला वो क्यों नहीं सुधरेंगे। पर बस चलने के थोड़ी देर बाद ही किसी ने मेरे चूतड़ों में फिर हाथ दिया। जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो इस बार चारों ने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुरा पड़े।

मैं आगे देखने लगी। कुछ पल बाद उन्होंने फिर मेरे चूतड़ों में हाथ दिया तो इस दफा मैं थोड़ा सरककर आगे हो गई। उन्होंने फिर हाथ दिया तो मैं थोड़ा और आगे सरक गई। ऐसा ४-५ बार हुआ। सारी रात मुझे मेरे चूतड़ों में उनके हाथ ही महसूस होते रहे। अगले दिन मैंने फिर उनकी पिटाई कर दी और बहाना बनाया कि इन्होंने अभी भी मुझे काम नहीं दिखाया।

शाम को बस में इस बार उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं। मैं बहुत खुश थी। सब ठीक चलने लगा। लेकिन कुछ दिन बाद फिर एक दिन बस में उन्होंने मेरी गांड़ में हाथ डाला तो मैं थोड़ा आगे सरकी। लड़कियों के पूछने पर कि क्या हुआ मैंने कहा कि कुछ नहीं। लेकिन अब मुझे गुस्सा आ गया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने ठान ली कि अब की बार मैं आगे नहीं सरकूँगी और देखती हूँ इनमें कितनी हिम्मत है। आखिर कब तक ये ऐसे ही उंगली देते रहेंगे। इस बार जब मेरे चूतड़ में किसी ने हाथ दिया तो मैंने वहाँ से नहीं हिली। उसने २-३ बार फिर हाथ दिया तो भी मैं नहीं हिली। तो इस पर उसने हाथ मेरे चूतड़ों पर टिका कर ही रख लिया और मैंने भी अपने चूतड़ों के बीच उसे दबा लिया।

२ मिनट तक न वो हिला न मैं। जब मैंने पीछे देखा तो उनमें से सबसे ज्यादा बिगड़ा लड़का मेरे पीछे खड़ा था। मेरे पीछे मुरने पर भी उसने हाथ नहीं हटाया बल्कि उसे सरकाता हुआ मेरी टांगों के बीच नीचे मेरी योनी तक ले गया और उसे स्पर्श किया। मेरे एक बार फिर रोंगटे खड़े हो गए और मेरा रंग उड़ गया।

मेरे पेट में बल सा पड़ा और ऐसा लगा जैसे मेरे पेट के अंदर कोई नल खुल गया हो। अब मैं जान चुकी हूँ कि उस पल मैं पहली बार झड़ी थी। और झड़ने के बाद मुझे अचानक ही बहुत अच्छा सा लगा और मेरा रंग फिर ठीक हो गया। उस रात मैं बार-बार बस का सीन याद कर सोचती रही।

मैंने पहली बार अपने सारे कपड़े उतारकर अपनी योनी को स्पर्श किया। जब मैं सोई तो सपने में मुझे वही बस में उस लड़के बार-बार मेरी योनी को छूता ही दिखाई दिया और मैं सोते हुए भी दो बार झड़ गई। पर टीचर हूँ इसलिए रूआब रखना भी जरूरी है। इसलिए पहली बार न चाहते हुए मैंने उनकी पिटाई की और मुझे मन में बहुत अफसोस हुआ।

उस दिन जब बस में गए तो उन्होंने मुझे नहीं छुआ। ३-४ दिन तक उन्होंने मुझे नहीं छुआ। पर पता नहीं क्यों अब पहली बार मैं चाहती थी कि वो मुझे छुएँ। एक दिन बहुत बारिश पड़ रही थी तो स्कूल में बच्चे कम आए थे तो स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई। उस दिन बस में भीड़ नहीं थी।

इसे भी पढ़े – नई दुल्हन की चूत की प्यास

मैं और लड़कियाँ आसानी से कहीं भी खड़े हो सकती थीं लेकिन पता नहीं क्यों हम तीनों पीछे उनही लड़कों के पास जाकर खड़ी हो गईं। शायद मैं चाहती थी कि वो मुझे छुएँ। पहली बार मुझे महसूस हुआ था कि एक लड़के के स्पर्श में क्या जादू होता है। पर भीड़ न होने की वजह से वो हमसे थोड़ा पीछे खड़े थे।

पर बस चलने के थोड़ी देर बाद ही वो हमारे नज़दीक आ गए। मैं लड़कियों से बातें करने में बिजी थी इसलिए हमें पता नहीं चला। अचानक मुझे महसूस हुआ कि कोई लड़का एकदम मेरे साथ चिपककर खड़ा हो गया हो। मैंने पीछे देखा तो वो बोला, “मैम आप ज्यादा पीछे आ गई हैं, थोड़ा आगे सरक सकती हैं।”

उस पल मेरा ध्यान गया कि दरअसल मैं और लड़कियाँ ही आपस में बातें करते हुए पीछे उन लड़कों तक सरक गई थीं। मैं और लड़कियाँ एक-दूसरे की तरफ देखकर शर्म से पानी-पानी हो गईं। तब मुझे एहसास हुआ कि मुझे और इन लड़कियों को इन लड़कों से उंगली करवाना अच्छा लगता है।

हम थोड़ा सा आगे सरकीं तो इस बार वो लड़के भी आगे सरके और एक लड़के ने हल्के से मेरी गांड़ में हाथ दे दिया। मैं भी इस बार थोड़ा पीछे सरक गई ताकि उसका हाथ अच्छी तरह मेरी गांड़ में घुस जाए। मैंने अपने चूतड़ों को थोड़ा खोला फिर बंद किया।

तो इस बार वो लड़का मेरे चूतड़ों में हाथ फेरने लगा। फिर उसने कान में कहा, “मैम अगले स्टॉप पर पीछे की सीट खाली हो रही है, आप मेरे और मेरे दोस्त के बीच में बैठ जाएँ। बाकी दोनों लड़के और लड़कियाँ आगे खड़ी हो जाएंगी ताकि किसी टीचर को आगे से पता न चले।”

मैं कुछ नहीं बोली। मैंने देखा कि बाकी दोनों लड़कियाँ असल में मजे से दूसरे दो लड़कों का हाथ अपनी गांड़ में ले रही थीं। वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगीं। तब मेरे पीछे वाले लड़के ने मेरे कान में कहा, “ये दोनों तो पिछले दो साल से हमसे चुद रही हैं मैम, आप इनकी परवाह न कीजिए। इनका काम अब पूरा हो गया, अब इन्हें अगले संडे मजे से चोदेंगे। आज आपका नंबर है।”

मैं कुछ न बोली और चुप रही। अगले स्टॉप पर पीछे वाली सीट खाली हुई तो मेरे पीछे वाला लड़का दाहिनी तरफ बैठ गया, मैं चुपचाप बीच में बैठ गई, दूसरा लड़का मेरी बाईं तरफ बैठ गया। बाकी दोनों लड़के और लड़कियाँ हमारे आगे खड़ी हो गईं। बस चलने लगी तो मानो मेरे बगल वाले लड़कों को जैसे खुली चूत मिल गई हो मेरे साथ खेलने की, मेरे खजाने लूटने की।

दाहिनी तरफ वाले लड़के ने एक बाजू मेरे सर के पीछे सीट पर पसार दी और दूसरे हाथ को मेरी नरम और बारिश की ठंड में मेरे जिस्म की गर्मी की वजह से गर्म दाहिनी जाँघ पर रख दिया और उसे सहलाने लगा। बाईं ओर वाला लड़का अपने मेरी तरफ वाले हाथ से मेरी बाईं जाँघ को सहलाने लगा।

मेरी साँसें एकदम से तेज और गर्म हो गईं और मेरा सर हल्का-हल्का महसूस होने लगा। पहली बार किसी लड़के का स्पर्श मेरी जाँघों पर हुआ था। मैंने आँखें बंद कर लीं। दोनों लड़कों ने अपने हाथ मेरी जाँघों पर ऊपर की तरफ सरकाए और मेरी कमीज के पल्ले के नीचे से सरकाते हुए मेरे पेट की तरफ बढ़ा दिए।

इसे भी पढ़े – बहन की सुसु वाली जगह में तेल लगाया

मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। तभी एक लड़के ने अपने हाथ को मेरी जाँघों के बीच मेरी योनी की तरफ सरकाने की कोशिश की तो मेरे मुँह से हल्की सी सिसकी छूट गई और मैंने अपनी दोनों टांगों को जोर से इकट्ठा कर लिया और अपने हाथों से दोनों लड़कों के हाथों को पकड़ लिया और मेरे मुँह से जोर से एक साँस निकली।

इस पर मेरे दाहिनी तरफ वाले लड़के ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रखकर जोर से सी लिया और मेरे होंठ चूसने लगा। मेरी तो मानो जान ही निकल गई हो। मेरे होश उड़ गए। मेरा सर बिल्कुल हल्का हो गया, मेरे शरीर के रोयें खड़े हो गए और वो मेरे होंठ चूसता रहा। ये मेरी ज़िंदगी का पहला चुम्बन था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसने मेरे सर के पीछे वाले अपने हाथ से मेरे सर को पकड़कर हमारे होंठों को कसकर सी लिया। और उसी पल मेरी बाईं तरफ वाले लड़के ने अपने दूसरे हाथ से मेरी छाती पकड़ ली और उसे मसलने लगा। मेरी साँस फूलने लगी और मैंने अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को पकड़कर रोकने लगी.

तो दोनों लड़कों ने मेरी जाँघों वाले हाथों से हल्का सा जोर लगाकर मेरी टांगों को खोल दिया और दाहिनी तरफ वाले लड़के ने टपाक से अपना हाथ मेरी पजामी के ऊपर से मेरी योनी पे रख दिया और उसे ऊपर से ही सहलाने लगा। मेरे पेट में अकड़न पैदा हुई और फिर एक जोर का झटका लगा और मेरे पेट में फुवारें फूटने लगे। मैं झड़ चुकी थी। इस पर उस लड़के ने मेरे होंठ चूसना बंद कर दिए और मेरी साँस भी ठीक हो गई।

फिर दूसरा लड़का मुझे किस करने लगा, तो पहले वाला बोला, “वाह भाई मजा आ गया, आज तो अंग्रेजी वाली को अच्छे से चूसा है और अब अच्छे से चोदेंगे भी। साली मारती बहुत जोर से है। आज उतने ही जोर से हम इसकी मारेंगे।” और फिर वो बारी-बारी मुझे चूमने लगे।

थोड़ी देर बाद जो लड़के हमारे सामने खड़े दूसरी लड़कियों की गांड़ में उंगली कर रहे थे उन्होंने कहा, “चलो बहुत हुआ, अब हमें भी तो थोड़ा मैडम का मजा लेने दो। चलो तुम इधर आकर इन लड़कियों के मम्मों को थोड़ा मसल दो। ये भी बहुत गरम हैं आज ठंड में।”

फिर उन चारों ने जगह बदल ली। अब दूसरे दोनों लड़के मुझे किस करने और मेरी छाती और योनी को सहलाने लगे। फिर उनमें से एक ने मेरी पजामी का नाला खोलना शुरू किया तो मैंने अपने दोनों हाथों से नाला पकड़ लिया तो दोनों लड़कों ने मेरी चुनरी के नीचे से मेरी कमीज के गले में से हाथ डालकर मेरी एक-एक ब्रेस्ट पकड़ ली और उन्हें मसलने लगे।

मैं पूरी मदहोश हो चुकी थी और मैंने अपने हाथ दोनों के एक-एक जाँघ पर रख दिए और उनके किस के बदले में उन्हें किस करने लगी। बड़े अजीब पर मजेदार चुम्बन थे। हर बार जब वो मुझे चूमते तो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल देते। चारों लड़कों ने शायद पोलो मिंट बहुत खा रखी थी इसलिए उन्हें किस करते हुए मुझे मीठा-मीठा लग रहा था।

तभी मौका पाकर उनमें से एक ने मेरी पजामी का नाला खोल दिया और मेरी पजामी और पैंटी को एक साथ नीचे खींचने लगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने भी अपनी गांड़ सीट से ऊपर उठा दी और उनसे मेरी पजामी और पैंटी मेरे घुटनों तक खींच दी। फिर उसने अपनी उंगली को अपने मुँह में डालकर गीला किया और मेरी चूत के हल्का सा अंदर ऊपर-ऊपर घुमाने लगा।

हाय माँ! मैं तो पागल सी हो गई। मेरे मुँह से तेज-तेज साँसें निकलने लगी। और मैं उसी पल फिर झड़ गई। मेरे झड़ते ही उसने मेरी पैंटी और पजामी को ऊपर कर दिया और मेरा नाला दोबारा बाँध दिया। फिर वो बोला, “मैम आप घर फोन कर दीजिए कि आप अपनी सहेली के घर जा रही हो और हमारे स्टॉप पर ही उतर जाना। वहाँ पर हमारी काली शीशों वाली वैन खड़ी है पार्किंग में। हम हमारे खेत चलते हैं। फिर शाम को हल्का सा अंधेरा होते ही आपके मोहल्ले के पास छोड़ देंगे।”

इसे भी पढ़े – 4 दिन तक जेलर ने मुझे जेल में चोदा

मैंने कुछ नहीं कहा और चुपचाप अपने पर्स से मोबाइल निकालकर मेरे घरवालों को sms कर दिया।

जब उनका स्टॉप आया तो मैं वहीं उतर गई। मेरी साथी टीचर ने पूछा, “अरे तुम कहाँ छुपी बैठी थीं और तुम यहाँ क्यों उतर रही हो?”

मैंने कहा, “जी मैं यहाँ अपनी एक सहेली के घर जा रही हूँ, वो कुछ दिन पहले ही हॉस्टल से वापस आई है। आज किस्मत से छुट्टी हो गई तो मैंने सोचा उसे मिल लूँ। और मेरा थोड़ा सर दर्द कर रहा है, इसलिए पीछे की सीट पर लेटकर थोड़ा सो गई थी।”

“अरे आजकल की लड़कियाँ कुछ खाती-पीती तो हैं नहीं, फिर थोड़ा मौसम बिगड़ते ही बीमार हो जाती हैं। अभी कुछ दिन पहले भी ये बीमार हो गई थी। तेरी माँ से बोलूंगी कि तेरी लड़की को कुछ अच्छा खिलाया कर, कैसे सूख के मरी जा रही है!” उनमें से सबसे बड़ी टीचर जो मेरे दादाजी को जानती थी वो बोली।

“जी आंटी जरूर बता देना। पर मैं इतनी भी कमजोर नहीं हूँ। आप मुझे कभी अपनी क्लास के मुस्टंडों की पिटाई करते देखना, फिर पता चलेगा आपको,” मैं हँसते हुए बोली और बस से उतर गई।

उतरकर मैं पीछे की तरफ चल पड़ी और एक साइड वाली गली में मुड़ गई और एक तन्हा स्पॉट पर जाकर खड़ी हो गई। कुछ ही पल में एक काली शीशों वाली वैन आकर मेरे सामने रुकी और उसका सेकंड सीट वाला दरवाजा पीछे सरका। उसमें से मेरा स्टूडेंट बोला, “अंदर आ जाओ मैडम।”

अंदर दो लड़कों के बीच में एक जगह खाली थी और दो लड़के गाड़ी में आगे बैठे थे। जैसे ही मैं गाड़ी के अंदर घुसकर बैठने लगी, दरवाजे वाले लड़के ने मुझे कमर से पकड़कर जोर से अपनी गोद में खींच लिया। दूसरे ने वैन का दरवाजा बंद किया और वैन चल पड़ी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं जिस लड़के की गोद में बैठी थी उसने अपना एक हाथ मेरी बाजू में से निकालकर मेरी छाती पर रख दिया और उसे जोर से रगड़ने लगा और दूसरा हाथ उसने मेरी जाँघों के बीच मेरी चूत पर रख दिया और उसे प्यार से मसलने लगा। दूसरे लड़के ने मेरे पेंसिल हील वाली जूती वाले पैरों को पकड़ा और मेरी टांगों को अपनी तरफ खींच लिया। अब मेरी टांगें उसके अगल-बगल थीं और वो मेरी टांगों के बीच।

“साली रंडी! कुतिया! क्लास में बहुत मारती है ना, आज तेरी गांड़ न फाड़ दी तो हम एक बाप का न कहना।” ये कहते ही उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से सी लिया और मेरे निचले होंठ को काटने लगा। दूसरा वाला मेरे स्तनों को और मेरी चूत को जोर से मसलने लगा और उसने जोर से अपने दाँत मेरे सूट में बाहर निकल रहे थोड़े से कंधे वाले भाग पर गाड़ दिए।

मेरे मुँह से चीख और सिसकी एक साथ निकली। उस एक पल में मुझे दर्द और मजे का एक साथ ऐसा एहसास हुआ कि मेरे पेट में बल सा पड़ा और मैं उसी छण झड़ गई। इतने में उस लड़के का खेत जो ज्यादा दूर नहीं था वो आ गया। उनके खेत में पानी की मोटर के साथ एक ही कमरा था। उसके बाहर ३-४ मजदूर बैठे थे। आगे वाले लड़के ने गाड़ी से उतरते ही कहा, “ओए! आज तुम सब की छुट्टी है, तुम सब घर जाओ अभी।”

इसे भी पढ़े – बीवी की चूत छोटी थी तो सास को चोदा

“जी बाबूजी!” ऐसा बोलकर वो सब जाने के लिए उठे।

इतने में गाड़ी के पीछे वाली सीट का दरवाजा खोलकर एक लड़का मुझे गोद में उठाए बाहर निकला।

“अरे ये तो वो आपके स्कूल वाली मैडम है ना! वो बड़ी कोठी वाले सेठ जी की लौंडी? इसको चोदने लगे हो बाबा। भाई आपने तो हमारा दिल खुश कर दिया! ऐसी मक्खन जैसी चिकनी गोरी कहाँ मिलेगी और वो भी अपनी ही मास्टरनी! जियो बाबू जियो! और खूब जमकर चोदना! रंडी बना देना आज साली को! और तू घबरा मत मास्टरनी, हम किसी से नहीं कहेंगे कि तू इस मोटर पर किनसे चुदाई है!” एक मजदूर बोला।

“अच्छा-अच्छा अब तुम जल्दी जाओ यहाँ से,” एक लड़का बोला।

“जाते हैं बाबूजी पर एक तकलीफ हो गई आपको। मोटर पर जो चारपाई है ना वो टूट गई थी इसलिए बनने के लिए गई हुई है। आपको इससे अंदर कमरे में जो सूखे चारे का ढेर पड़ा है उसी पर चोदना पड़ेगा।” वो मजदूर जाता-जाता बोला।

उस एक पल में मुझे एहसास हुआ कि आज मैं कितनी बिगड़ गई हूँ और मुझे अपने पर शर्म आने लगी, लेकिन ४-४ लड़कों से एक ही साथ, खेत में सूखे चारे पर चुदने के बारे में सोचकर मेरी कामुकता बढ़ गई। तब तक वो लड़का मुझे गोद से नीचे उतार चुका था। मैं खुद ही अपने आप उस मोटर के साथ बने कमरे के दरवाजे में घुस गई और पीछे मुड़कर देखा तो चारों लड़के मेरी तरफ देखकर हँस पड़े।

“बड़ी जल्दी है भाई मैडम को चुदने की आज, तो फिर शुरू हो जाए,” एक ने कहा और सब हँस पड़े। “हाँ-हाँ जल्दी चलो,” दूसरा बोला। “अरे पहले मैडम से तो पूछ लो कि हमसे चुदना है कि नहीं,” तीसरा बोला। “क्यों मैडम चुदोगी हमसे,” एक ने सवाल किया।

मैंने शर्मा कर सर नीचे कर दिया और दरवाजे की साइड पर खड़ी हो गई, जैसे उनका कमरे में स्वागत कर रही हूँ।

“चलो भाई हरी झंडी मिल गई,” एक बोला।

कमरे में घुस गए और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और एक मद्धम सी लाइट वाला बल्ब ऑन कर दिया। एक ने आकर मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरे गाल और गर्दन को पीछे से चूमने लगा। तो दूसरा आगे से मेरे बिल्कुल साथ सटकर खड़ा हो गया। मुझे उसकी पैंट में से कुछ मोटा-मोटा सा अपने पेट पर चुभता महसूस हुआ।

वैसा ही कुछ मोटा-मोटा मुझे अपनी पीठ पर पीछे वाले से महसूस हो रहा था। दूसरे दो लड़के मेरे अगल-बगल खड़े-बैठकर मेरे पेंसिल हील वाले सैंडल खोल रहे थे। सैंडल खुलते ही पहले एक ने मेरा पैर उठाकर एक सैंडल निकाला फिर दूसरे ने दूसरा पैर उठाकर दूसरा सैंडल उतारा।

पीछे वाले ने मुझे कंधे से पकड़कर और आगे वाले ने टांगों से पकड़कर उठा लिया और सूखी घास पर लिटा दिया। अब आगे वाला मेरे ऊपर लेट गया और मुझे गालों पर, होंठों पर, गर्दन पर सब जगह किस करने लगा। फिर वो अपनी नाक रगड़ता हुआ मेरी गर्दन से मेरी छाती के बीच में से और पेट पर से होता हुआ मेरी चूत पर नाक रगड़कर मेरे ऊपर से नीचे उतरा तो दूसरा मेरे ऊपर चढ़ गया और वैसा ही करने लगा।

पहले वाला अपने कपड़े उतारने लगा। ऐसा चारों ने बार-बार किया और अब चारों मेरे सामने नंगे खड़े थे। मैंने देखा कि उन सब की पेशाब वाली पाइप जिसे हम बहू बुलाते हैं वो फुल कर बड़ी हो गई थी और काफी अकड़ी-अकड़ी लग रही थी। मैंने छोटे बच्चों को नंगा देखा है और उनकी बहू तो बहुत ही छोटी और ढीली-ढीली होती है। पर इनकी कुछ अलग थी।

“देख क्या रही है मैडम, ये हैं तेरे स्टूडेंट्स के लौड़े जो अब हमारी सेक्सी सुंदर और हद से ज्यादा स्ट्रिक्ट टीचर जिसने मार-मारकर हमारे गाल सूजा दिए उसकी चूत को फाड़ेंगे,” उनमें से एक बोला और ऐसा कहकर मेरे ऊपर लेट गया और मुझे चाटने, चूसने और चूमने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसकी बहू (जिसे वो लौड़ा कहता था) मेरी चूत को कभी-कभी छू रहा था तो मुझे एक बिजली का एहसास होता था। फिर उसने मेरे सूट का पल्ला ऊपर उठाकर मेरी पजामी का नाला खोला और मेरी पजामी को खींचकर उतार दिया और पीछे फेंक दिया।

फिर दूसरे ने मुझे कंधे से पकड़कर बिठा दिया और मेरी दोनों तरफ टांगें खोलकर मेरे पीछे बैठ गया। उसका लौड़ा मेरी पीठ टच कर रहा था। उसने मेरी कमीज के पीछे से जिप मेरी कमर तक सारी की सारी खोल दी और मेरा कमीज उतारकर फेंक दिया।

अब दो लड़के मेरे पैरों को चाटने और चूमने लगे और धीरे-धीरे मेरी टांगों को चूमते, चाटते और काटते हुए मेरी चूत की तरफ बढ़ने लगे। एक मेरी साइड पर बैठा मेरी बाजू को चूम, चाट और कर रहा था। मेरे पीछे वाला मेरी पीठ को चूम और चाट रहा था।

इसे भी पढ़े – दोस्त की बहन को ट्यूशन पढ़ा कर पेला

तभी मेरी टांगों वाले लड़कों ने मेरी पैंटी और मेरी पीठ वाले ने ब्रा खोलकर एक साथ उतार दी। अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी। मुझे बदन पर बाल अच्छे नहीं लगते इसलिए मैं वैक्सिंग करके शरीर के हर हिस्से से बाल उतार देती हूँ।

“अरे मैडम साली तू तो मक्खन से भी ज्यादा चिकनी और गोरी है और तेरे गोल-गोल बूब्स कितने प्यारे हैं,” एक बोला। “आज साली रंडी का सारा दूध पी जाएंगे और चूत फाड़ देंगे। साली क्लास में बहुत मारती और जलील करती है। आज इसकी चूत मारेंगे,” दूसरा बोला।

“ओए! गाड़ी मेरी, इसको लड़कियों की हेल्प से फंसाने का प्लान मेरा, ये खेत मेरे बाप का, तो इसकी सील भी पहले मैं ही तोड़ूँगा!” उनमें से सबसे बदमाश और सबसे मोटी बहू/लौड़े वाला बोला।

दूसरे पीछे हट गए तो वो मेरे ऊपर लेट गया। मेरी पीठ पर सूखा चारा रगड़ खा रहा था पर मेरे अंदर की हवस मुझे इसका एहसास भी होने नहीं दे रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे। मैं उससे लिपट गई और वो मुझे चूसने लगा।

उसने मेरे बूब्स चूसे, मेरे पेट और नाभि को चाटा, फिर दोनों हाथों से मेरे घुटने पकड़कर मेरी टांगें खोल दी और मेरी चूत चाटने लगा। मैं मजे में पागल हो गई और मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। मेरा पेट अकड़ने लगा और मेरे अंदर एक बार फिर फुवारें फूट पड़े। अब उसने मेरी टांगों को नीचे रखा और मेरी टांगों के बीच आकर अपने लौड़े को मेरी चूत पे रख दिया।

“ओए कंडोम नहीं डालेगा क्या!” एक बोला। “साला कंडोम लाया ही कौन है!” वो बोला।

“देख अब तेरे को थोड़ा दर्द होगा। सिर्फ कुछ देर के लिए होगा फिर वो ठीक हो जाएगा और तुझे बहुत मजा आएगा। मैं देख रहा हूँ तेरी सील नहीं टूटी है। चल तेरे को स्वर्ग की सैर कराता हूँ। चल रंडी साली कुतिया मैडम!” वो मुझे बोला और उसने अपना लौड़ा मेरी चूत में डालना शुरू किया।

पर कुंवारी चूत में लौड़ा इतनी आसानी से नहीं जाता। उसने जोर लगाया तो मेरी सील टूटने लगी। मेरे दर्द के मारे चीख निकल गई तो उसने झट से अपने होंठों से मेरे होंठों को सी दिया और फिर और जोर से अपना लौड़ा मेरी चूत में धकेलने लगा।

ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गरम-गरम लोहे की सलाख मेरी चूत में घुसेद दी हो। मैं सर भी हिला नहीं पा रही थी। मैं उसके बदन के नीचे कुचली पड़ी झटपटा रही थी और वो था कि मेरी चूत फाड़ने पे आमादा था और मेरा चीखने का हक भी छीन रहा था।

लेकिन उसका मोटा लौड़ा मेरी एकदम टाइट कुंवारी चूत में घुस ही नहीं पा रहा था। तो उसने मेरे होंठों से होंठ हटा दिए, मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मुझे जोर से अपनी तरफ खींचने लगा। मेरी टांगें झटपटा रही थीं और मैं बेतहाशा चीखने लगी।

“और चीला साली रंडी और चीला। तुझे कहा था ना कि आज अगर तेरी चूत न फाड़ी तो एक बाप न कहना। साली क्लास में बहुत मारती है ना!” वो बोला।

“प्लीज मुझे छोड़ दो। आआआह! प्लीज इसे बाहर निकालो!” मैं गिड़गिड़ाई।

चारों हँसने लगे। “अभी बोल रही है छोड़ दो। पर जब दर्द चला गया और मजा आने लगा तो डियर मैम आप ही कहोगी, ‘मुझे छोड़ दो!’” एक बोला।

उसने थोड़ा और जोर लगाया तो उसका सारा का सारा सरिया मेरी कुंवारी चूत की सब दीवारें तोड़ता हुआ मेरी चूत की गहराइयों तक चला गया। अब थोड़ा दर्द थमा। वो थोड़ा रुका। फिर उसने जब लौड़ा बाहर निकालना शुरू किया तो दर्द फिर शुरू हो गया। फिर वो अपने लौड़े को अंदर-बाहर करने लगा।

कब मेरा दर्द ख़त्म हुआ, कब मेरी चीखें गरम आहों में बदल गईं और कब मेरी छटपटाती रही टांगें खुद-ब-खुद उसकी कमर पर लिपट गईं, मुझे इसका पता भी नहीं चला। वो सच कह रहे थे — थोड़े दर्द के बाद मुझे ऐसा मजा आने लगा कि दिल करता था कि ये ख़त्म ही न हो। और कंबख्त ये ख़त्म भी कहाँ हो रहा था। वो मेरे स्कूल का सबसे तगड़ा बास्केटबॉल प्लेयर कहाँ थकने वाला था।

पता नहीं कितनी दफा मेरा पेट अकड़ा, पर जब भी अकड़ा मेरी टांगें उसकी कमर पर कस गईं और फिर जब मैं झड़ जाती तो मेरी टांगें भी उसकी कमर पे ढीली हो जातीं। पर वो कंबख्त बड़ी देर बाद झड़ा। और मेरे अंदर कहीं दूर तक झड़ा। मुझे मेरे अंदर कहीं गरम फुवारा छूटता ही महसूस हुआ।

वो मेरे ऊपर गिरा, फिर संभला, मुझे थोड़ा किस किया फिर मेरे ऊपर से हटा। मैंने देखा कि मेरी गांड़ के नीचे और आस-पास की सूखी सोने रंग की घास अब मेरी चूत के खून से लाल-लाल हो चुकी थी। मैं थक चुकी थी। पर अभी तो शुरुआत ही थी। वो उतरा तो दूसरा हट्टा-कट्टा मेरा स्टूडेंट जिसे मैं सबसे ज्यादा नफरत करती थी.

और जिसकी सबसे ज्यादा और खतरनाक पिटाई करती थी वो मेरे ऊपर आकर लेट गया और मेरे गालों को चूमते हुए बोला, “मेरी प्यारी मैडम अब मेरी बारी है। आज मुझे कुछ पढ़ाएंगी नहीं। ओह सॉरी मैं तो भूल ही गया था। आज तो मैंने आपको सिखाना है कि अपने प्रिय स्टूडेंट की रंडी कैसे बनते हैं।” और उसने मेरे होंठों को गहरा चूमा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

इस भी पढ़े – ट्यूबवेल पर पेला दोस्त की गर्लफ्रेंड को

वो मुझे चूम भी रहा था और एक हाथ से मेरी छाती मसल रहा था और एक हाथ से मेरी कमर से साइड को सहलाते हुए मेरी बाजू सहला रहा था।

मुझसे रहा न गया और मैं उससे लिपट गई और उसे किस करने लगी, “आह तुम मेरे सबसे प्यारे स्टूडेंट हो गए हो आज,” पता नहीं कहाँ से मेरे मुँह से निकला।

मैंने उसकी छाती को किस किया तो उसने मुझे मेरे सर के बालों से पकड़कर पीछे खींचा और मेरी गर्दन पर किस किया। मुझे उल्टा करके मेरी पीठ, छाती, मेरी गर्दन को पीछे से किस किया। मेरे कान में बोला, “उसने तुम्हारी कुंवारी चूत फाड़ी, तो अब मैं तुम्हारी कुंवारी गांड़ मारूँगा।”

ऐसा कहकर उसने मुझे मेरी कमर से पकड़कर मेरे चूतड़ ऊपर उठा लिए। अब मैं अपने कोहनियों और सरके बल आगे से और घुटनों के बल पीछे से थी और मेरी गांड़ हवा में झूल रही थी। उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ पकड़कर उन्हें खोला, एक उंगली को थूक लगाकर मेरी गांड़ पे रगड़ा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। क्या वो वोही करने जा रहा है जो मैं सोच रही हूँ। मैं डर गई।

मैंने अपनी टांगों के बीच से मेरी गांड़ के पीछे लटक रही उसके दो गेंदों को देखा और उसके लौड़े को देखा जो पहले वाले के लगभग बराबर ही था। उसने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा, अपना लौड़ा मेरी गांड़ के मुँह पर रखा और मुझे अपनी तरफ खींचा और लौड़ा मेरी तरफ धकेला।

मेरी चीखें निकल गईं। उसका लौड़ा अभी आधा इंच भी अंदर नहीं गया था कि मेरी गांड़ फटके हाथ में आ रही थी। मैं फूट-फूटकर रो रही थी और चिल्ला रही थी। मैं घुटनों और कोहनियों के बल आगे भागने की कोशिश कर रही थी पर उसकी मजबूत भुजाएँ मुझे अपने लौड़े की तरफ खींच रही थीं।

“कहाँ जा रही है मैडम मेरी जान। बड़ा दुख दिया है तुमने क्लास में, आज मेरी बारी है। चल इधर आ जा मेरी जान,” वो बोला।

जैसे कई साल लग गए हों उसके लौड़े को मेरी गांड़ में घुसने में। दर्द के मारे मैं लगभग बेहोश ही हो गई थी। फिर उसने भी अपना लौड़ा अंदर-बाहर करना शुरू किया। कुछ देर बाद दर्द घटा और मुझे फिर मजा आने लगा। उसके एक बार झड़ने में ही मैं जाने कितनी बार झड़ गई।

वो उतरा तो दूसरे दो लड़कों ने भी मुझे बारी-बारी चोदा। पर शुक्र है उन्होंने मेरी गांड़ नहीं मारी। फिर चारों ने मुझ पर एक-एक ट्रिप और लगाया। तब तक शाम हो चुकी थी और मैं उनके लौड़ों के रस से भर चुकी थी। अब मुझमें से सुबह वाली परफ्यूम की खुशबू नहीं बल्कि उनके लौड़ों के रस की भेनी-भेनी सी गंध आ रही थी।

“चल अब तुझे तेरे घर के पास छोड़ दे,” मेरा एक स्टूडेंट मुझे चूमते हुए बोला।

मैं उठकर अपनी कमीज और पजामी की तरफ बढ़ने लगी तो मुझसे तो सीधा चल भी नहीं पा रहा था।

“अरे मैडम मेरी जान अभी इतना जोर मत दे, कमर लचक जाएगी। एक आध घंटे में सब ठीक हो जाएगा, तू चलने लायक हो जाएगी। तुझे तेरे कपड़े हम पहना देंगे।” ऐसा कहके मुझे नंगी को ही गोद में उठाकर एक वैन में ले गया।

सब वैन में बैठ गए और मेरे घर की तरफ चल पड़े। रास्ते में मुझे बारी-बारी अपनी सीट और ड्राइवर बदल-बदलकर सब ने मेरे को खूब चूसा। फिर मेरे को मेरी पजामी और कमीज पहनाई, मेरी ऊँची एड़ी की सैंडल पहनाई, दुपट्टा पहनाया, मेरा पर्स दिया और मुझे मेरे मोहल्ले के पास छोड़ दिया।

पर कंबख्तों ने मेरी ब्रा और पैंटी नहीं लौटाई।

“अरे जान ये तो हमारे पास निशानी रहेगी कि हमने हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत, गोरी-चिट्टी, और हमारे स्कूल की सबसे स्ट्रिक्ट मैडम को जमकर चोदा था,” एक ने जाते-जाते मुझसे कहा था।

इसे भी पढ़े – भाई बहन का ओरल सेक्स

वो ब्रा और पैंटी वो जब तक स्कूल से पास आउट नहीं हो गए तब तक हर रोज स्कूल में लाते थे और मुझे दिखाकर चिढ़ाते थे। स्कूल से पास आउट होने के बाद भी मैं कई बार उनसे चुद चुकी हूँ। कई बार उन्होंने मुझे स्कूल में भी मेरे रूम में मेरे टेबल पर चोदा है। और उन्होंने ये किस्सा कई जूनियर स्टूडेंट्स को भी सुनाया और मुझे उनसे इंट्रोड्यूस करवाया। अब भी मैं अक्सर अपने किसी न किसी स्टूडेंट से चुदती रहती हूँ। मैं एक रंडी टीचर बनके रह गई हूँ। और ये सब शुरू हुआ उस दिन जिस दिन शाम को मैं अपने घर बड़ी मुश्किल से आधी तिरछी चलके पहुँची।

अगर अंधेरा न हुआ होता और कोई मुझे चलती को देख लेता तो झट सारा मामला समझ जाता। पर इस सब का कसूरवार कौन है? मेरे वो लुच्चे स्टूडेंट्स जिन्होंने अपनी पिटाई का बदला लेने के लिए अपनी टीचर ही चोद डाली, या मैं जो अपनी जवानी और खूबसूरती की वजह से उन चारों की हवस का अनजाने में पर अपनी मर्ज़ी से शिकार बनी। अब आप बताएं इस अजीब कहानी का कौन है नायक या खलनायक और मैं क्या हुई — नायिका या रंडी खलनायिका?

ये Student Gang Fuck Madam की कहानी आपको पसंद आई तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और Whatsapp पर शेयर करे………..

अपने दोस्तों के साथ शेयर करे-

Related posts:

  1. संभोग क्रिया का ज्ञान मिला 1
  2. सामने वाले लड़के को फंसाया पेलवाने के लिए
  3. प्यासी कुंवारी कजिन के साथ सेक्स
  4. खून के रिश्तों में संभोग का सुख
  5. मेरी सुहागरात की कामुक दास्तान
  6. बाजी को गांड मरवाते देखा

Filed Under: Meri Chut Chudai Story Tagged With: Anal Fuck Story, Blowjob, Boobs Suck, Hardcore Sex, Hindi Porn Story, Kamukata, Kunwari Chut Chudai, Mastaram Ki Kahani, Non Veg Story, Pahli Chudai, Sexy Figure

Reader Interactions

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Primary Sidebar

हिंदी सेक्स स्टोरी

कहानियाँ सर्च करे……

नवीनतम प्रकाशित सेक्सी कहानियाँ

  • तगड़े लंड से चुदवाने को उतावली हुई बीवी
  • Kamwali Ne Meri Life Rangeen Bana Di
  • बेस्ट टीचर से रंडी टीचर बन गई मैं
  • Flat Owner Dalal Aur Bhai Teeno Ne Choda Mujhe
  • भाई बहन से हुई जवानी में गलती

Desi Chudai Kahani

कथा संग्रह

  • Antarvasna
  • Baap Beti Ki Chudai
  • Bhai Bahan Sex Stoy
  • Desi Adult Sex Story
  • Desi Maid Servant Sex
  • Devar Bhabhi Sex Story
  • First Time Sex Story
  • Girlfriend Boyfriend Sex Story
  • Group Mein Chudai Kahani
  • Hindi Sex Story
  • Jija Sali Sex Story
  • Kunwari Ladki Ki Chudai
  • Lesbian Girl Sex Kahani
  • Meri Chut Chudai Story
  • Padosan Ki Chudai
  • Rishto Mein Chudai
  • Teacher Student Sex
  • माँ बेटे का सेक्स

टैग्स

Anal Fuck Story Bathroom Sex Kahani Blowjob Boobs Suck College Girl Chudai Desi Kahani Family Sex Hardcore Sex Hindi Porn Story Horny Girl Kamukata Kunwari Chut Chudai Mastaram Ki Kahani Neighbor Sex Non Veg Story Pahli Chudai Phone Sex Chat Romantic Love Story Sexy Figure Train Mein Chudai

हमारे सहयोगी

क्रेजी सेक्स स्टोरी

Footer

Disclaimer and Terms of Use

Privacy Policy

HamariVasna - Free Hindi Sex Story Daily Updated