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बहन के हस्बैंड की रखैल बनी मैं

जून 21, 2026 by hamari Leave a Comment

Jija Sali Ki Chut Chudai

यह कहानी शुरू हुई थी उस रात जब शादी के एक महीने के बाद अमजद नसरीन के साथ जोया के घर आया था, और रात को डिनर के बाद जोया ने दोनों से उस रात वहीं रुक जाने के लिए कहा था। जोया ने उन्हें अपना बेडरूम दे दिया था। वो खुद दोनों बच्चों के कमरे में सो गई थी। खाना खाने के बाद वो लोग टीवी देखते रहे फिर सब अपने कमरे में सोने के लिए चले गए। Jija Sali Ki Chut Chudai

रात के करीब 1.30 बजे जोया बाथरूम जाने के लिए बाहर आई तो उसे बेडरूम से कुछ आवाजें सुनाई दीं। वैसे वो समझ गई कि अमजद और नसरीन की चुदाई का खेल शुरू हो गया है। लेकिन बाथरूम से लौटते हुए उसे नसरीन की चीख सुनाई दी — “ओह… तुमसे कितनी बार कहा है कि पूरा मत डाला करो… मैं नहीं ले पाऊंगी… इतना लंबा और मोटा…”

“मेरी जान शादी को 2 महीने हो गए हैं… और तुमने एक बार भी मुझे पूरा अंदर नहीं डालने दिया… मैं क्या करूं…”

“तुम किसी मजबूत औरत के साथ करो, मैं नहीं ले पाऊंगी।”

“मजबूत? ये मजबूत औरत कैसी होती है?”

“मेरी बाजी जैसी।”

ये सुनते ही जोया के पूरे बदन में झुरझुरी आ गई। तो क्या सच में ऐसे मोटे लंड से उसको गोरी गुलाबी गदराई चूत चुदेगी? उसने साड़ी के ऊपर से अपनी चूत को सहलाया। वो तो गीली हो रही थी। फिर भी जोया ने उसे दबाया और मन ही मन कहा क्यों रोती है… मैं कोशिश करूंगी तेरे अंदर ये लंड डलवाने का।

ये सब सुनकर जोया के मन में उत्सुकता हुई कि ऐसा कैसा लंड है जो एक औरत अपनी चूत में नहीं ले सकती। वो हल्के से खिड़की के पास गई, किस्मत से खिड़की का पर्दा हिल गया था और कमरे के अंदर का सारा नजारा हल्की नीली रोशनी में दिख रहा था। नसरीन और अमजद दोनों नंगे थे।

अमजद नसरीन के जाँघों के बीच बैठा था और बहुत आहिस्ता-आहिस्ता कमर हिला रहा था। कभी-कभी नसरीन उछल पड़ती थी और अमजद को धकेलने लगती थी। थोड़ी देर में अमजद नसरीन के साइड में सो गया। और तब जोया ने जो देखा उसे देखकर उसकी चूत में चींटियाँ रेंगने लगीं।

उसने देखा करीब 10 इंच का मोटा लंड जो उसकी हाथ की कलाई की तरह मोटा था, झटके मार रहा था और अमजद खुद अपने हाथ से उसके आगे-पीछे कर रहा था। फिर उसने नसरीन से कुछ कहा। पहले तो नसरीन नहीं मानी फिर वो उठी और अमजद की कमर के दोनों तरफ पैर डालकर लंड को अपनी चूत पर लगाया। और फिर ऊपर नीचे होने लगी।

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जोया ने देखा नसरीन चूत में आधा लंड भी नहीं ले पा रही थी। इतना मोटा लंड… जोया ने सोचा भी नहीं था। उसकी चूत से पानी निकलने लगा। और उसने साड़ी के ऊपर से चूत में हाथ लगाया। नसरीन करीब 10 मिनट ऐसा करती रही और फिर नीचे उतर गई। तब अमजद ने उसके हाथ में लंड थमा दिया।

नसरीन शायद झड़ गई थी। करीब 15 मिनट अमजद के लंड को हिलाने के बाद अमजद ने उसे जोर से खींचा और जोया ने देखा अमजद के लंड से मोटी धार की पिचकारी निकलने लगी। करीब 20 सेकंड तक वो झड़ता रहा। अगर किसी चूत में इतना माल गिरता तो शायद चूत ओवरफ्लो हो जाती। इधर जोया खुद भी झड़ चुकी थी।

वो दोनों लिपटकर नंगे ही सो गए। जोया भी अपने कमरे में चली गई लेकिन रात बहुत देर तक उसे नींद नहीं आई। उसकी आँखों के सामने अमजद का मोटा और लंबा लंड दिखता रहा। उसके मियाँ महीने में एक या दो बार चुदाई करते थे लेकिन वो भी सिर्फ 5 मिनट का खेल।

जोया इस लंड से चुदवाने के लिए बेकरार हो गई। वो ऐसे मजबूत लंड से चुदवाना चाहती थी। लेकिन अमजद उसकी ननद का हस्बैंड था और उसे बाजी कहकर इज्जत से बुलाता था। उसे चोदने के लिए कैसे तैयार करे इसी के बारे में वो सोचने लगी। उसने अमजद के मोटे और लंबे लंड को पूरा अंदर लेने का मन बना लिया।

दूसरे दिन सुबह उठते ही उसने अमजद से पूछा, “रात को मेरे बेडरूम में नींद आई या… सारी रात नसरीन को सताया?”

“नहीं बाजी बहुत अच्छी नींद आई।”

“मेरे बिस्तर पर ऐसे ही नींद तो आ नहीं सकती… कुछ तो किया होगा?”

और अमजद थोड़ा झेंप गया। वो लोग सुबह चले गए लेकिन जोया बेचैन हो गई। करीब एक हफ्ते बाद उसने नसरीन को फोन लगाया तो फोन पर अमजद मिल गया। उसने कहा नसरीन आज दूसरे शहर गई है किसी सहेली की शादी में, शायद 2-3 दिन बाद आएगी।

“ओह्ह… तो अमजद तुम्हारा खाना कौन बनाएगा?”

“बाजी मैं होटल में खा लूँगा।”

“होटल में क्यों? ये क्या घर नहीं है तुम्हारा?”

“नसरीन जो खिलाती है वो सब मैं खिलाऊंगी… और हो सका तो उससे ज्यादा ही खिला दूंगी…”

“ठीक है बाजी… अब मैं ऑफिस जा रहा हूँ… रात में डिनर के लिए आ जाऊँगा।” कहकर उसने फोन रख दिया।

तभी फिर फोन की घंटी बजी। उस तरफ जोया के हस्बैंड थे। उन्होंने कहा कि मेरा बैग तैयार करो, शाम की फ्लाइट से मुझे दिल्ली जाना है। जोया को तो जैसे मुँह माँगी मुराद मिल गई। किसी तरह उसने अपने मियाँ का बैग तैयार किया। ठीक 4 बजे वो आए और अपना बैग लेकर निकल पड़े। जाते-जाते उन्होंने कहा मैं 3-4 दिन के लिए जा रहा हूँ।

उसने अपने मियाँ को दरवाजे पर छोड़ा। तभी उसके दोनों बेटे स्कूल से आ गए। उन्हें जल्दी से नाश्ता करवाया। फिर उसने दोनों को साथ लिया और कहा बेटा चलो मौसी के घर चलते हैं। अपनी एक सहेली के घर वो जान-बूझकर गई थी। पिछली बार उसके बच्चे उस सहेली के बच्चों के साथ रुकने की बात कर रहे थे।

इस बार भी वही हुआ। दोनों ने जिद की तो उसने कहा ठीक है कल स्कूल मत जाना मैं तुम्हें लेने आऊंगी। और दोनों को अपनी सहेली के घर छोड़ दिया। अब वो इंतजार कर रही थी अमजद का। उसकी चूत पानी से गीली हो रही थी। घर आकर उसने अपनी एक टाइट सलवार कमीज पहनी जिसमें उसकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ एकदम उभर आईं और उसकी मोरी गांड भी अच्छे से नजर आ रही थी।

थोड़ा मेकअप किया और सोचने लगी कैसे अमजद को गरम किया जाए। जोया अमजद को अपने नखरे दिखाकर चुदवाना चाहती थी ताकि अमजद पूरी तरह से जोश में आ जाए और उसे राउंड-राउंड कर चोदे उसकी चूत की हज्जी उड़ा दे अपने मोटे और कड़क लंड से। करीब 8 बजे अमजद आया।

उसकी बाइक की आवाज सुनकर जोया ने दरवाजा खोला। अमजद के सामने आज जोया एक अलग अंदाज में दिख रही थी। फिर भी उसने कहा “सलाम वालेकुम बाजी” “वालेकुम सलाम… इतनी देर कर दी…” अमजद ने सलवार और कमीज पहनी हुई थी। बड़ा ही हैंडसम लग रहा था।

“क्या करूँ बाजी रास्ते में ट्रैफिक बहुत था।”

उसने अमजद को सोफे पर बैठाने को कहा। और खुद उसके सामने इस तरह बैठी कि उसके चुचियों को वो आसानी से देख सके और अपनी कमीज को थोड़ा ऊपर उठाकर सलवार से अपनी भरी हुई जाँघें और गहराई दिखा रही थी। अमजद की नजर उसके चुचियों पर पड़ी उसने अपनी आँखें नीचे कर लीं।

जोया उठकर किचन में चली गई और वहीं से कहा “अमजद बोरे हो रहे हो तो मूवी लगा लो मैं खाना बनाकर आती हूँ।”

जोया को मालूम था कि कल रात उसके शौहर एक ब्लू फिल्म की मूवी लाए थे और देख भी रहे थे। फिर जोया को 5 मिनट चोदकर सो गए थे। वही मूवी अभी भी लगी हुई थी। अमजद ने प्लेयर ऑन किया थोड़ी देर बाद पिक्चर शुरू हो गई। अमजद तो चौंक गया लेकिन बाजी किचन में है ये सोचकर वो देखने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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तभी अचानक जोया हॉल में आ गई। “हाई अमजद ये क्या देख रहे हो?”

“बाजी ये तो पहले से ही लगी हुई थी” और उसने बंद कर दिया।

“अरे देखो देखो… तुम अकेले हो तुम्हें ये देखकर ही दिन निकालना पड़ेगा” कहती हुई हँसकर वो वापस किचन में चली गई।

अमजद उसके पीछे-पीछे किचन में गया।

“क्या हुआ अमजद… नसरीन की याद आ गई क्या?”

अमजद कुछ नहीं बोला। उसे याद आई नसरीन की बात — मजबूत औरत बाजी। अमजद जोया के चूतड़ देखने लगा और सलवार में उसका लंड हरकत करने लगा। जोया सब समझ रही थी।

“अमजद तुम नसरीन को छोड़ के नहीं रह सकते तो क्यों उसे जाने देते हो?”

“ऐसी बात नहीं बाजी” “क्या बात है क्या तुम नसरीन से खुश नहीं हो?”

“हूँ…” “लगता है कुछ गड़बड़ है… क्या वो तुम्हें प्यार नहीं करती?”

“करती है” “फिर?”

“लेकिन…”

“लेकिन क्या?” जोया.

“अब कैसे बताऊँ…? बाजी वो मुझे बिस्तर पर पूरा साथ नहीं देती.”

“पूरा साथ… मतलब?”

“ओह समझी… वो जल्दी सो जाती है? या तुम उसे ज्यादा तंग करते हो?”

“ऐसा कुछ नहीं है बाजी… दरअसल…”

अमजद बोल नहीं पा रहा था और जोया उसे छेड़ रही थी।

“फिर क्या बात है”?

“बाजी मुझे तुम्हारी जैसी औरत बिस्तर पर अच्छी लगती है” अमजद ने जल्दी से कह डाला.

“क्या??? मेरी जैसी मतलब…”

“तुम्हारी जैसी मतलब…” कहते हुए अमजद ने जोया को पीछे से पकड़ लिया और उसका लंड सलवार के अंदर से ही जोया की गांड पर टिका दिया।

“ये क्या करते हो अमजद… मुझे बाजी कहते हो और मेरे लिए इतना गंदा सोचते हो”?

“मुझे कुछ नहीं मालूम…” कहते हुए अमजद के हाथ जोया की बड़ी-बड़ी गोलाई पर पहुँच गए। जोया की चूत ने पानी छोड़ दिया। उसकी पैंटी गीली होने लगी। लेकिन वो अमजद को अभी और गरम करना चाहती थी। इसलिए अपने को छुड़ाने का नकली नाटक करते हुए कहा, “मुझे छोड़ दो अमजद… ये गलत है… किसी को पता चल गया तो मैं कहीं मुँह दिखाने के लायक नहीं रहूंगी.”

वो अपनी गांड को अमजद के कड़क लंड पर इस तरह रगड़ रही थी कि वो और फनफना रहा था… किसी लोहे के रॉड जैसा। अमजद ने पीछे से उसके दोनों चुचियों को जोर से मसल दिया और उसकी गर्दन पर चूम लिया। “आह्ह… अमजद… क्या कर रहे हो… मैं बाजी हूँ तुम्हारी… दो बच्चों की माँ।”

“बाजी… तुम बहुत गरम हो… मैंने कभी तुम्हारे लिए सोचा ही नहीं… लेकिन जो काम नसरीन ने नहीं किया वो सिर्फ तुम कर सकती हो…” “क्या काम नहीं किया उसने”? “उसने आज तक मेरा पूरा लंड अपनी चूत में नहीं लिया… वो मैं तुम्हारी चूत में डालूँगा…” “अच्छा… क्यों नहीं लिया उसने”? “मेरा बहुत मोटा और लंबा है… और उसे दर्द होता है… आधा भी नहीं ले पाती” “ओह्ह ऐसा कैसा है तुम्हारा…”?

अमजद ने उसे छोड़ा और अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर अंडरवीयर नीचे किया और कहा देखो… उसका 8 इंच का लंबा और 3 इंच मोटा लंड फड़फड़ा कर बाहर निकल आया। वो उछल रहा था और उसके सुपाड़े पर प्रीकम चाशनी की तरह बहने लगा था। जोया का दिल हुआ उसे पकड़ के प्यार करे और मुँह में ले लेकिन वो इतना मोटा था कि शायद उसके मुँह में भी नहीं जाएगा।

अमजद उसके करीब आया। बाजी देखो इसे…

बाप रे… ये क्या है… इतना लंबा और मोटा… ये तो घोड़े का लगता है…

अमजद उसके और करीब आने लगा तो जोया ने थोड़ा साइड लिया और गैस बंद करके बाहर निकल आई। और हॉल से अमजद को चिढ़ाने लगी जीभ दिखाकर। अमजद की सलवार उसके घुटनों पर थी। उसे पकड़े हुए वो तेज चल नहीं पा रहा था।

उसने अपनी सलवार और अंडरवीयर निकाल दी और नंगा ही जोया के पीछे दौड़ गया। जोया हँसने लगी। अमजद ने उसे फिर से पकड़ लिया, इस बार सामने से, और सीधे उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। जोया अपने को छुड़ाने की कोशिश करती रही। “बाजी तुम्हारा तो पूरा बदन ही मक्खन है…”

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“अच्छा… तो क्या खाओगे मुझे?” “हाँ…” कहते हुए अमजद ने उसके चुचियों को जोर से मसल दिया।

“आह्ह अमजद ये क्या कर रहे हो… दर्द होता है…”

“बाजी दर्द के बाद ही तो मजा आता है…”

“बड़े बेरहम हो… इसलिए नसरीन दूर भागती है…”

“नसरीन दूर भागती है मेरे इस हथियार को देखकर… बाकी तो सब कुछ मैं जोर से मसलता हूँ…”

“अच्छा अब मुझे छोड़ो… बच्चे आ जाएंगे…”

ये बात जोया ने जान-बूझकर अमजद को सताने के लिए कही थी और अमजद ने अपनी पकड़ ढीली कर दी। बस जोया उसके हाथ से निकलकर बेडरूम में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।

“बाजी तुमने खाना खाने के लिए बुलाया और खुद कमरे में बंद हो गई हो…”

“तुम पहले अपने कपड़े पहन लो फिर मैं बाहर आऊंगी…”

अमजद ने अपनी सलवार और अंडरवीयर पहन ली और कहा, “मैंने कपड़े पहन लिए हैं।”

जोया दरवाजा खोलकर हँसते हुए बाहर निकल आई। “कहो अमजद कैसा लगा? बाजी को परेशान कर रहे थे ना?”

अमजद फिर सोफे पर बैठ गया और जोया ने खाना बनाया। खाना खाने के बाद अमजद चुपचाप खड़ा हो गया। इस वक्त रात के 10 बज चुके थे।

उसने कहा, “बाजी मैं चलता हूँ…”

“क्यों बाजी को नहीं खाओगे?”

अमजद समझ गया कि आग उस तरफ भी है। अब उसने सीधा जोया को दबोच लिया और फिर वैसे ही उसे चूमने लगा। इस बार जोया ने ज्यादा इंकार नहीं किया। सिर्फ कहा, “अमजद ये गलत है… तुम मुझे नापाक कर रहे हो…”

“बाजी लेकिन तुम मुझे पाक कर दो…”

और उसने जोया की गदराई चूतड़ पर हाथ रखकर जोर से दबाया और उसे अपने पास खींचा। उसका लंड जोया की फूली हुई चूत से टकराया… और जोया को जैसे एक सुकून मिला। वो अमजद से लिपट गई।

तब अमजद ने पूछा, “भाईजान और बच्चे कहाँ हैं?”

“तुम्हारे भाईजान तो टूर पर हैं और बच्चे मेरी सहेली के घर पर हैं… रात को वहीं रुकेंगे…”

अमजद ने एक हाथ से उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को कमीज के ऊपर से टटोला तो जोया के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी… “इसस्स्स्स… अमजद… मत करो प्लीज… मैं बहक जाऊंगी… और ये ठीक नहीं होगा…” जोया के नखरे शुरू थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अमजद ने उसे छोड़ दिया और पूछा, “फिर मैं जाऊँ…?”

जोया अमजद को देखती रही, फिर बोली, “तुम जाओ ना, अमजद?”

अमजद फिर से आगे बढ़ा और उसने अपना हाथ जोया के कंधे पर रख दिया। जोया ने मुड़कर देखा, और बोली, “अमजद मुझे डर लग रहा है… किसी को पता चल गया तो क्या होगा!”

अमजद ने अपना गाल उसके गाल से लगाकर जोया के कान में कहा, “उसकी फिक्र मत कीजिए… ये बात सिर्फ हम दोनों के बीच ही रहेगी…”

जोया पीछे जाने लगी तो अमजद ने उसकी कमर में दोनों हाथ डालकर उसे पकड़ लिया। फिर उसकी पीठ पर हाथ रखकर उसे अपने से चिपका लिया। जोया की चुचियाँ, जो उसके कुर्ते के नीचे नंगी थीं, अमजद के सीने से लगकर दब गई थीं।

जब अमजद एक हाथ जोया के कोहनों पर फेरने लगा तो वो हल्के-हल्के अपने को छुड़ाने लगी। आहिस्ता-आहिस्ता जोया ने अपने को अमजद की पकड़ से छुड़ा ही लिया। जब वो मुड़ी, मलमल के पतले कुर्ते के अंदर जोया की भारी चुचियाँ इधर-उधर झूल रही थीं, और उसके दोनों निप्पल वैसे ही खड़े थे। फिर जोया जल्दी से अपने बिस्तर पर लेट गई, और सिर से पैर तक अपने को चादर से ढाँप लिया।

अमजद बच्चों की तरह हाथ-पैर पर रेंगते हुए पलंग पर आया और जोया के ऊपर आकर रुक गया, इस इंतजार में कि वो अपने मुँह से चादर हटाए। जोया ने चादर के अंदर से कहा, “तौबा है! उठो ना मेरे ऊपर से? दम घुटता जाता है!”

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अमजद: “मैं आपको छू तो नहीं रहा!”

जोया: “हटो ना, अमजद, क्यों परेशान कर रहे हो?”

अमजद: “ठीक है मैं हट जाऊँगा लेकिन… पहले तुम अपना सुंदर चेहरा दिखाओ?”

जोया ने अपने खूबसूरत चेहरे से चादर हटा दी, और गुस्से के अंदाज में बोली, “क्या मुसीबत है?”

अमजद ने इस मौके का फायदा उठाया और उसने जोया को ऊपर से दबोच लिया। जोया कसमसा उठी।

फिर अमजद जोया की पेशानी, आँखें, गाल, कानों और गर्दन को किस करते हुए बोला, “मेरी गरमागरम बाजी… पहली नजर में मुझे यकीन हो गया था कि जल्द तुम मेरे नीचे आओगी…”

जोया ने अमजद के बालों में उँगलियाँ फिराते हुए पूछा, “कैसे?”

अमजद: “तुम्हारा अंग-अंग बोल रहा था कि तुम चुदाई के लिए तड़प रही हो… और बहुत ही जबरदस्त चुदाई के लिए बनी हो…”

इस दफा खुद जोया ने अपना मुँह अमजद के मुँह से लगा दिया, और दोनों फिर ज़बानें लड़ाने लगे। दोनों एक-दूसरे से इस तरह लिपटे हुए चूम रहे थे मानो दोनों एक जिस्म हो। किसिंग करते हुए अमजद ने जोया की चादर जो उनके जिस्मों के दरमियान फँसी हुई थी, खींचकर हटा दी और जोया के भरे हुए बदन पर अपना हाथ फेरने लगा।

वो जोया की भारी-भरी छातियों को पकड़कर दबाते, फिर उसे हिलाकर छोड़ते तो वो कुर्ते के नीचे जेली की तरह हिलती। जोया के मुँह से सिसकारी निकलने लगी थी… स्स्स्स अह्ह्ह… उनके होंठ अमजद के होंठों की गिरफ्त में थे। फिर अमजद का हाथ जोया की रान को मसलता और उसकी सलवार ऊपर-नीचे होती।

अमजद उसके जाँघों को भी दबा रहा था। उसकी गांड के नीचे हाथ ले जाते और एक कूल्हे में अपनी उँगलियाँ गाड़ देता। आखिर में अमजद ने जोया की टांगों के बीच हाथ डाल दिया और उसकी चूत पकड़ ली। फिर जोया से थर्राई हुई आवाज में बोला, “जोया, तुम्हारी चूत कितनी गरम और नरम है! मेरे हाथ पर उसकी भाप लग रही है!”

जोया कुछ बोली नहीं लेकिन अपनी टांगें ढीली करके और खोल दीं, ताकि अमजद का हाथ ठीक से उसकी पूरी फूली हुई चूत को पकड़ सके। अमजद अपनी हथेली से जोया की चूत ऊपर से नीचे तक मसल रहा था और जोया खुद भी अपनी गांड को हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हिलाकर उसके हाथ का मजा ले रही थी।

अमजद ने दूसरे हाथ से जोया का मलमल का कुर्ता उठाकर उसकी बड़ी-बड़ी छातियाँ नंगी कर दीं और कुर्ते को जोया की गर्दन से ऊपर निकाल दिया, जिसे बाद में जोया ने निकाल दिया। अब जोया ऊपर से पूरी नंगी थी। उसके निप्पल कड़े हो चुके थे और छातियाँ भी फूल गई थीं।

जोया के निप्पल के चारों तरफ गहरे रंग का गोलाई वाला हिस्सा देखते ही अमजद पागल हो गया। और उसने उस पूरे हिस्से को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। जोया सिहर उठी… “ऊफ… अमजद… चूसो… बड़ा मजा आ रहा है… दबाओ इन नमकूल छातियों को… बहुत तड़पाती हैं मुझे…”

अमजद एक हाथ से छातियों को मसल रहा था और उसका दूसरा हाथ जोया की रानों के बीच सलवार के अंदर उसकी चूत को मसल रहे थे। जोया ने अंदर पैंटी पहनी हुई थी इसलिए थोड़ी मुश्किल हो रही थी लेकिन वो पैंटी अब गीली होने लगी थी। अमजद उसकी चूत के दरार को छेद रहा था और दाने को भी रगड़ रहा था।

अमजद बहत देर तक जोया की चूत को सलवार के ऊपर से मसलता रहा। अमजद ने सलवार के ऊपर से ही उसकी चड्डी को चूत की दरार से बाजू में किया और चूत की गीली दरार को महसूस किया। फिर उसमें अपनी बीच की उँगली को अंदर-बाहर करने लगा, यहाँ तक कि जोया की सलवार का काफी कपड़ा उसकी गीली चूत के सुराख के अंदर तक चला गया था।

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“बाजी तुम्हारी चूत वाकई बहुत मस्त है… और शादी के इतने साल बाद भी इतनी कसी हुई।”

“जिसका उपयोग ज्यादा न हो वो चीज कैसी रहेगी” जोया ने कहा।

अमजद समझ गया कि जोया की चूत भी उसके लंड को लेते हुए बहुत मेहनत करवाएगी।

जोया अपने बाजू फैलाए हुए और आँखें बंद करके लेटी हुई थी। वो कभी-कभी हल्का सा ‘आह’ करके कराहती और अपना सर हिलाती। लेकिन जब अमजद जोया की एक छाती अपने मुँह में लेने लगा तो जोया ने उसके सर पर हाथ रखकर उसे मना किया, “अमजद, नहीं… बहुत जोर से चूस रहे हो, दर्द हो रहा है। मेरे निप्पल्स पर अपना थूक मत लगाओ और बिल्कुल काटो मत… निशान पड़ जाएंगे।”

अमजद फौरन मान गया। उसे मालूम था कि ये भी जोया का एक नखरा है। अब तो खुद ही उसने उसके सर को छाती पर दबाकर चुसवा रही थी। फिर उसने कहा, “अच्छा अच्छा, तो लाओ तुम्हारी सलवार खोल दूँ।”

वो जोया की सलवार का नाड़ा खोलकर उसे उतारने लगा तो जोया ने अपनी मोटी गांड उठा दी, और अमजद ने आराम से उसकी सलवार और उसके साथ ही उसकी पैंटी भी निकाल दी। जोया का नंगा और चिकना गोरा गरम बदन चमक रहा था। उसकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ उसके सीने पर फैली हुई थीं और उसकी सुदोल जाँघों के बीच उसकी फूली हुई बिना बाल की गुलाबी चूत अमजद के लिए खुली पड़ी थी।

अमजद भी झट से नंगा हो गया था। उसका लंबा चौड़ा लंड तलवार जैसा खड़ा था। लंड की मालिश करते हुए सहलाते हुए अमजद उसके करीब आया तो जोया ने अपनी टांगें और खोल दीं। लेकिन अमजद नीचे झुका और जोया की गुलाबी नंगी चूत को हथेली से सहलाया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर नीचे झुका और उसकी फूली हुई चूत पर किस किया तो जोया मानो उछल पड़ी… “हाईईई… अमजद ये क्या कर रहे हो… वो गंदी जगह है… तुम्हारे भाईजान भी कभी वहाँ मुँह नहीं लगाते…” लेकिन अमजद नहीं माना। उसने कहा, “बाजी इतनी प्यारी गुलाबी और सुंदर चूत को गंदी कहती हो… मुझे तुम पसंद हो इसलिए तुम्हारी चूत भी मुझे प्यारी है…”

अमजद ने उसकी फूली हुई चूत को हल्के से थपथपाया और दूसरे हाथ से उसकी चुची दबाने लगा। फिर वो जोया के ऊपर उल्टा लेट गया जिससे उसका मोटा और लंबा लंड जोया के मुँह के पास लटकने लगा। अमजद ने कहा, “बाजी इसे पकड़ो ना… प्यार करो…”

जोया ने उस फनफनाते लंड को हाथ लगाया तो वो फुफकार उठा। जोया के मुँह से निकला, “बाप रे कितना मोटा और लंबा है… मेरे हाथ में भी नहीं समा रहा।” उसने दोनों हाथों से पकड़ा। “अमजद आज तुम मेरी फाड़ दोगे…”

“क्या फाड़ दूँगा बाजी?” “मुझे नहीं मालूम… मुझसे गंदी बातें मत करवाओ… एक तो वैसे ही मुझे अपने नीचे ले कर बाजी बाजी कर रहे हो।” कहते हुए उसने लंड की चमड़ी को ऊपर-नीचे करके सहलाया। इससे लंड के सुपाड़े से प्रीकम की धार सीधे उसके मुँह में गिरी। उसने बिना कुछ कहे वो जीभ से चाट लिया। फिर लंड को चूमा, जीभ से चाटा और उसके सुपाड़े को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी… लेकिन थोड़ा ही अंदर ले पाई।

इधर अमजद ने उसकी चूत के होंठों को फैलाकर जीभ अंदर डाल दी थी और जोया की गीली चूत में जीभ घुमा रहा था। इससे थोड़ी ही देर में जोया का बदन अकड़ने लगा… “आह्ह्ह… अमजाद… जोर्र से… आह… मेरा निकलने वाला… हैई… हैई… ओह्ह्ह…” कहते हुए उसने अपनी चूत अमजद के मुँह से चिपका दी और गांड उठाकर झटके दिए।

अमजद के मुँह में पूरा चूत का पानी लग गया और जोया की गांड से बहता हुआ चादर को भी गीला कर दिया। जोया निढाल हो गई थी। उसकी आँखें बंद हो गई थीं। अब अमजद उसके ऊपर से उठा और बोला, “मेरी जान… अब मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊंगा।” कहते हुए अमजद उसकी चूत पर अपने लंड का सुपाड़ा लगाकर उसे ऊपर-नीचे मसलने लगा।

‘बाजी… बाजी,’ अमजद ने गर्मी से भरी आवाज में कहा, ‘आपकी चूत इतनी गीली है कि तेल लगाने की जरूरत नहीं।’ जवाब में जोया भी गांड हिला-हिलाकर अपनी चूत अमजद के लंड के सुपाड़े से रगड़ने लगी और उसकी भारी छातियाँ आगे-पीछे हिलाने लगीं और बोली, “चूत में लंड लगाकर बाजी कहते हुए शर्म नहीं आ रही?” ये कहकर उन्होंने अमजद को चूम लिया।

फिर अमजद ने जोया की हिलती हुई जाँघों को पकड़कर रोक दीं और उन्हें घुटनों से मोड़कर छाती तक पीछे करके और खोल दीं। उसने जोया की गांड के नीचे 2 तकिए लगा दिए जिससे गुलाबी चूत का मुँह खुल गया। लेकिन चूत का सुराख अमजद के 3 इंच मोटे लंड के सुपाड़े के सामने बहुत ही छोटा लग रहा था।

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थोड़ी देर तक अमजद जोया की गीली चूत को देखता रहा, फिर अचानक बोला, “अरे जोया, एक बात पूछनी है तुमसे…”

जोया ने हैरान होकर अपना सर उठाया, “क्या बात, अमजद? क्या पूछना है?”

अमजद हँसते हुए बोला, “डाल दूँ अंदर? चोद दूँ तुमको?”

जोया ने अपना सर तकिए पर गिरा दिया और हँसते हुए अपने बाजू से अपनी आँखें छुपा लीं और कहा, “सामने मिठाई रखकर कहते हो कि खाना है या नहीं।”

फिर अमजद ने अपना भारी लौड़ा आहिस्ता-आहिस्ता जोया की चूत पर टिकाया और हल्का सा धक्का दिया। सुपाड़ा गीली चूत में जाकर फँस गया। दो बच्चों की माँ को भी लगा कि उसकी चूत फट जाएगी। चूत अंदर से फैलने लगी और खिंचाव से दर्द होने लगा। जोया के मुँह से निकला, “उईईई… मर गई… अब अमजद ने उसके निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।

और थोड़ी देर बाद थोड़ा जोर से लंड को दबाया। लंड चूत को फैलाता हुआ अंदर गया। अमजद को लगा किसी कसे हुए जबड़े में लंड फँस गया है। और जोया के मुँह से जोर से चीख निकल गई, “आआह्ह… अमजद निकाल लो… मैं नहीं ले पाऊंगी इतना मोटा…” और जोया की आँख से आँसू और चूत से खून निकल आया जो चूत के फैलने के कारण निकला था।

अमजद उसे चूमने लगा, “थोड़ा बर्दाश्त करो मेरी जान… अभी मजा भी आएगा… ये लंड सिर्फ तुम्हारे लिए है…” कहते हुए उसने जोया के मुँह पर अपना मुँह रख दिया। और फिर लंड को हल्के से आगे-पीछे करने लगा। इससे जोया की तकलीफ थोड़ी कम हुई। और मौका देखकर अमजद ने लंड को पूरा बाहर खींचा और अपनी कमर को सख्त करते हुए पूरी ताकत से धक्का लगाया तो लंड जोया की चूत फाड़ते हुए पूरा अंदर घुस गया।

अमजद ने जल्दी से उसके मुँह पर हाथ रखकर पूरा घुसा दिया। जोया की चूत ने खून की होली खेलकर लंड को लाल कर दिया और नीचे चादर भी। जोया की आँखें बाहर निकल आईं। वो चीख नहीं पाई क्योंकि उसके मुँह पर अमजद का हाथ था। अमजद थोड़ी देर ऐसे ही जोया की छाती पर पड़ा रहा। फिर थोड़ा उठकर उसके निप्पल को मुँह में लेकर प्यार करते हुए कहा, “मेरे लंड की किस्मत खुल गई…”

“क्यों?” कराहते हुए जोया ने पूछा।

“जिंदगी में पहली बार ये किसी चूत में पूरा घुसा है।”

“क्या? पूरा घुस गया..?”

“हाँ।”

“ओह्ह… इतने अंदर तक आज तक कुछ भी नहीं गया था… ऐसे लग रहा है जैसे तुमने चाकू से मुझे काट दिया है।”

अमजद उसे प्यार करते हुए बोला, “कैसा लग रहा है मेरी जान?”

“मुझे नहीं मालूम… अब क्या इसी तरह मेरे ऊपर पड़े रहोगे..?”

अमजद समझ गया कि अब जोया को चुदाई की जरूरत है। और सच में लंबे और मोटे लंड के अंदर जाते ही जोया की चूत में अजीब सी खुजली शुरू हो गई थी। इसलिए अमजद ने अब हल्के-हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए। जोया के मुँह से सुकून की एक लंबी ‘आह’ निकली, और उसने अमजद की गर्दन पकड़कर उसके होंठ अपने होंठों से चिपका दिए और अपनी चूत को हल्के-हल्के ऊपर-नीचे करने लगी।

किस को तोड़ते हुए अमजद ने जोया से कहा, “कसम से, जोया, क्या दहकती चूत है तुम्हारी! मेरे लंड को ऐसा पकड़े हुए है, जैसे पहली दफा लंड गया हो उसमें!” इस पर जोया ‘आह, आह’ करते हुए और जोर-जोर से अमजद के लंड पर अपनी गीली चूत आगे-पीछे करने लगी। “ईमान से, जोया.”

अमजद फिर बोले, “हमसे चुदवाते रहना। जब जी चाहे, कभी भी जरूरत पड़े तो फोन करके मुझे बुला लिया करना। हम तुमको अच्छी तरह चोदकर तुम्हारी गर्मी निकाल दिया करेंगे। आप भी खुश रहोगी और हम भी।” फिर वो भी उछल-उछलकर जोया की चूत मारने लगे। कमरे में उन दोनों की जाँघों के टकराने की ‘थप्प थप्प’ और तेज साँसों की आवाजें गूँज रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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और साथ ही जोया की चूत से लगातार निकलते हुए पानी के कारण लंड और चूत के मिलने से “फच्… फच्… फचक्क…” की आवाज आ रही थी। इस चुदाई के दौरान जोया कितनी बार झड़ गई, ये वो खुद ही भूल गई। नीचे की चादर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। करीब 1 घंटे की घमासान चुदाई के बाद पसीने से लथपथ अमजद ने कहा, “मेरा निकलने वाला है… कहाँ डालूँ?”

“अमजद… मेरे राजा… अंदर ही डाल दो… मुझे तुम्हारे बच्चे की माँ बना दो।”

अमजद ने उसे कसके पकड़ा। जोया ने अपने पैर अमजद की कमर के गिर्द जकड़ लिए। और अमजद ने पूरा लंड बाहर खींच-खींचकर जोरदार 8-10 धक्के मारे और अपना पानी जोया की चूत में भर दिया। उसके लंड से आज बहुत पानी निकला था। जोया की चूत में इतने जोर से पिचकारी फेंकी कि जोया उस पिचकारी से एक बार फिर झड़ गई।

दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। पंखा पूरी स्पीड में था लेकिन दोनों के नंगे बदन पसीने से भींगे हुए थे। जोया का चेहरा एक अलग मस्ती से चमक रहा था। मोटे और लंबे लंड को आखिर उसने अपनी चूत में ले ही लिया। थोड़ी देर बाद जब अमजद उसके ऊपर से उठा और लंड को बाहर निकाला तो “पुक्” की आवाज हुई।

अमजद ने देखा चादर पर खून और दोनों का पानी गिरा हुआ है। और जोया की चूत और फूल गई है। और उसका मुँह अब खुल गया है और उसका शेप “ओ” जैसा हो गया है। लेकिन जोया आराम से पैर फैलाए और चुचियों को खोले नंगी सोई हुई थी।

उसके खूबसूरत चेहरे पर खुले बालों की लटें पड़ी हुई थीं, और उसकी बंद आँखों की लंबी-लंबी पलकें उसके गालों पर कपकपा रही थीं, और उसके रस भरे होंठ अमजद के मुँह की थूक से चमक रहे थे। अमजद अब उसकी पीठ के पीछे से दोनों बाजू डालकर उसे कंधों से टाइट पकड़े हुए था।

अमजद ने बिना कोई जवाब दिए उसके कमीज की चेन पीछे से खींच दी और उसके गले के किस करते हुए जोया की मांसल चुचियों को दबाने लगा। पीठ के पीछे के हाथ से उसके ब्रा खोलने की कोशिश की तो हुक नहीं निकला। तब उसने कमीज को ऊपर किया।

जोया ने हाथ ऊपर किए और उसका गोरा बदन और ब्रा में कैद दोनों कबूतर अमजद की नजरों के सामने थे। जोया की चुचियों को अमजद ने अपनी बड़ी-बड़ी हथेली में थाम लिया और मसलने लगा। जोया अब जोश में आने लगी। ब्रा के ऊपर से अमजद ने चुचियों को होंठों में पकड़ लिया और चूसने लगा।

“आह्ह्ह अमजद… मेरे शौहर… दबाओ… इनको… चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है… मैं इस दिन का कब से इंतजार कर रही थी मेरे राजा…”

कुछ देर कमरे में जोया और अमजद की गीली चुम्बनों की आवाजें आती रहीं। उनकी ज़बान पूरी अमजद के मुँह में थी। जोया ने फिर दोनों हाथ अमजद की गर्दन में डाल दिए और उन्हें चुम्बन देती रहीं। वो दोनों अपनी ज़बानें एक-दूसरे के मुँह में पूरी अंदर डालते और देर तक चूसते, या फिर एक-दूसरे के होंठों को चूसते और अपने दाँतों से पकड़कर खींचते।

मेन बेड पर लेटा हुआ यह सब देख रहा था, और अपनी खड़ी हुई लंड को मसल रहा था। ‘बाजी तुम्हारी चुचियाँ मस्त हैं…’ कहते हुए उसने ब्रा की स्ट्रैप तोड़ दी और दोनों स्तन बाहर आ गए। उसके निप्पल के चारों तरफ गहरे भरे रंग का बड़ा सा गोला था और निप्पल भी कड़े हो गए थे।

‘बाजी क्या चुचियाँ हैं…’ कहते हुए उसने दोनों निप्पल को एक-एक करके आरों के गोले समेत मुँह में भरकर चूसना और काटना शुरू किया। इधर जोया उसके सर को पकड़कर अपनी छाती पर दबा रही थी। अमजद के हाथों ने जोया की सलवार का नाड़ा खींच दिया और वो जमीन पर गिर पड़ा। जोया को पता भी नहीं चला।

अब उसकी मोटी चूतड़ और मस्तानी चूत एक गुलाबी पैंटी में थी। अमजद के हाथ उसके चूतड़ और गांड को सहला रहे थे, दबा रहे थे। और जोया… “आआह्ह… ओह्ह… हाईई… मेरे राजा… दबाओ…” इसी बीच अमजद ने अपनी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया और कुर्ता निकाला। ऊपर से वो नंगा था। उसकी बालों से भरी छाती देखकर जोया उसके निप्पल को अपनी उँगली से दबाने लगी।

अमजद ने अपने होंठ जोया के होंठों पर रखना चाहे, तो जोया नहीं मानी, और तकिए पर सर इधर-उधर हिलाकर अपने होंठ अमजद के होंठों से बचाती रही। अमजद हँसने लगे और बोले, ‘कोई फायदा नहीं, जोया बेगम! तुम्हारे नखरों से मैं और गरम होता हूँ!’

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फिर जोश में आकर उन्होंने अपनी बॉडी जोया की बॉडी से लगा दी, और उसके हाथों को उसके सर के पीछे करके अपने हाथों से दबा दिए, और अपने होंठों से जोया के होंठों का फिर शिकार करने लगे। कई दफा उनका मुँह जोया के मुँह से लगा भी, पर जोया हटा लेती।

लेकिन कुछ देर बाद, जब जोया अपना सर हिला-हिला कर थकने लगी तो अमजद ने उसके खुले हुए मुँह को अपने मुँह से पकड़ ही लिया। मेरी जोया ने फिर अपना मुँह नहीं हटाया और अमजद दब्बा कर उसे चुम्बन करने लगे। अमजद ने जब उसके बाजू छोड़ दिए तो जोया ने अपने दोनों हाथ उसके गले में डालकर उसे और चिमटकर किस देने लगी।

अमजद अभी भी उसके साथ छेड़खानी कर रहा था। इतनी देर की चुदाई के बाद जोया को भी मूतने के लिए बाथरूम जाने की जरूरत महसूस हो रही थी। इधर अमजद की हरकतें जारी थीं। फिर उसने अमजद को हटाया और जल्दी से उठकर बाथरूम की तरफ गई। अमजद भी बैठ गया और फिर उठकर उसी दरवाजे से बाहर निकला। वो भी बाथरूम की तरफ गया और उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था।

जब उसने देखा कि जोया ने दरवाजा पूरा बंद नहीं किया है, वो दरवाजे को धकेलकर बाथरूम में घुस गया। जोया नीचे बैठकर मूत रही थी और अब उसने वो काली पैंटी भी निकाल दी थी। अमजद ने अंदर घुसते ही दरवाजा बंद कर दिया। दरवाजा बंद होने की आवाज से जोया ने पीछे मुड़कर देखा और अमजद को देखते ही कहा, “अमजद तुम बाहर जाओ… बच्चे अंदर सो रहे हैं… अभी उठ गए तो…”

लेकिन अमजद उसके करीब गया और उसे उठाया। और उसके बालों में हाथ डालकर उसका चेहरा अपने करीब खींचा और जोया के होंठों को बहुत ही कस के चूमा। बाथरूम में जोया को पिछली चुदाई की याद आने लगी। और इधर अमजद का मूसल फिर से तैयार होकर जोया के जाँघों के बीच से चूत के दरवाजे को खटखटा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अपने को छुड़ाकर जोया ने अमजद को धकेलते हुए कहा, “अमजद ये क्या कर रहे हो… तुम्हारे मन की मुराद हो गई न पूरी?” अमजद उसे फिर से खींचता हुआ बोला, “बाजी जान… अभी तो सारी रात बाकी है…” और फिर उसने जोया को घुमा दिया जिससे अमजद के लंड पर जोया की गांड लगने लगी। और उसने हाथ सामने लाकर जोया के बड़े-बड़े निप्पल को चुटकी में लेकर सहलाने लगा।

जोया उसे पीछे धकेलकर छुड़वाना चाहती थी, लेकिन इससे अमजद का लंड उसकी गांड पर और ज्यादा टच हो रहा था। एक बार तो जोया ने आगे झुककर अपने को छुड़ाने की कोशिश की और तभी अमजद का लंड फिसलकर उसकी चूत के छेद पर आ गया। अमजद ने एक धक्का मारा और आधा लंड चूत के अंदर घुस गया।

जोया के मुँह से चीख निकल आई। वो इस हमले के लिए तैयार नहीं थी। “आह्ह अमजद… उईईई…” करते हुए वो अमजद को धकेलने लगी लेकिन अमजद की गिरफ्त बहुत मजबूत थी। तब जोया ने उसकी तरफ तिरछी नजर से देखते हुए कहा,

“तुम बहुत लालची हो… अभी-अभी मुझे इतना परेशान किया… मेरे वहाँ अभी तक दर्द है… मैं हाथ भी नहीं लगा पा रही धोने के लिए… और तुम फिर से शुरू हो गए… एक तो तुम्हारा इतना मोटा और सख्त… मेरी नाजुक जगह को कितनी चोट पहुँचाता है…”

“मेरी नाजुक बाजी जान… तुम्हारी चूत है ही ऐसी कि कितना भी चोदू… दिल नहीं भरता।”

“छी… कैसी गंदी बात करते हो तुम अमजद…”

“अरे बाजी इसमें गंदा क्या है…” अमजद ने उसके गर्दन पर चूमते हुए कहा। और एक हाथ उसकी चुची पर रखा और दोनों को गोलाई से सहलाते हुए घुंडी को मसल रहा था।

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उसने जोया को अपने से चिपकाया और आधे अंदर घुसे लंड को धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा। चूत अभी-अभी धुली थी इसलिए लंड अंदर जाने लगा। उसने जोया को कमोड के पास खड़ा किया और उसका एक पैर कमोड के ऊपर रखा। दोनों हाथों से उसकी मोटी गांड को समेटा और जोया के होंठों पर अपने होंठ रखे और अपनी कमर को पीछे खींचकर एक तूफानी झटका दिया।

पूरा का पूरा लंड “फससस” की आवाज के साथ जोया की मस्तानी चूत के अंदर घुस गया। जोया थोड़ा दर्द से मचली लेकिन अमजद ने उसकी कमर और गांड को अपने से चिपका रखा था। लंड को पूरा अंदर डालने के बाद अमजद ने उसे बेहताशा चूमना शुरू किया। जोया हल्के-हल्के चीख रही थी… “हुम्म… हुम्म… ओह्ह… उफ्फ…”

“क्या हुआ बाजी, इतने दिन से शादीशुदा हो फिर भी चुदाई से डरती हो?” “तुम बहुत बदमाश हो… कमीने… अपनी बाजी को खराब किया तुमने… और इतने दिन से शादीशुदा हूँ से क्या मतलब है…? इतना मोटा मूसल और इतने अंदर तक आज तक कुछ भी नहीं गया… पूरी जगह चौड़ी हो गई है।” कहते हुए जोया ने नजर नीचे झुका ली।

अमजद अब हल्के-हल्के अपनी कमर हिला रहा था। फिर उसने जोया का कमोड के ऊपर का पैर अपने हाथ में लिया और अपनी कमर तक उठा लिया और उसी हाथ से जोया की गदराई कमर को थामकर धक्के लगाने लगा।

“ओह अमजद… धीरे… ये कौन सी स्टाइल है…?”

“बाजी ये इंग्लिश स्टाइल है।”

“भाड़ में गई तुम्हारी इंग्लिश स्टाइल… मेरे पैर में दर्द हो रहा है।”

“दर्द हो रहा है… लेकिन मजा भी तो आ रहा है ना?”

“खाक मजा आ रहा…” लेकिन अब चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और जोया भी हल्के-हल्के कमर हिलाने लगी थी।

अमजद ने अब उसे तड़पाने की सोची और अचानक अपना लंड बाहर खींच लिया। जोया की चूत अब गरम हो चुकी थी। इस तरह अमजद की हरकत से वो परेशान हो गई। “अब क्या हुआ… जो करना है जल्दी करो… देर करोगे तो बच्चे जाग जाएंगे…”

“बाजी नया बच्चा लाने के लिए… पहले बच्चे को कैसे नींद में सुलाना ये मुझे मालूम है… तुम फिक्र मत करो… कोई नहीं जागेगा।”

“लेकिन मुझे नींद आ रही है…”

“तो फिर जाओ…” कहते हुए अमजद ने अपनी बीच वाली उँगली उसके गीले चूत में डाल दी।

“आह्ह… अमजद… हरामी… ये क्या कर रहे हो… इस तरह क्यों सता रहे हो…?”

“बाजी ये बताओ मेरा लंड पसंद है क्या?”

“मुझे नहीं मालूम… और मुझसे ऐसी गंदी बात मत करो।”

लेकिन वो कोशिश कर रही थी कि अमजद की उँगली उसकी चूत को जोर से दबाए।

“बाजी एक बात बताओ।”

“क्या?”

 “तुम्हारी चूत इतनी टाइट कैसे है?”

“मुझे क्या पता… वो तो कहते हैं अब मजा नहीं आता।”

“तो भाईजान तुम्हें चोदते हैं?”

“अरे वो मेरे मियाँ हैं… उनका तो हक है…”

“उनका लंड तुम्हें कैसा लगता है?”

“मुझे नहीं मालूम…”

“अच्छा… फिर किसे मालूम…? भाईजान का लंड भी इतना मोटा है क्या?”

“इतना मोटा होता तो इतने दिन में तुम्हारा ये क्या तुम्हारा सर भी आराम से घुस जाता… समझे बुद्धू… सब मेरे मुँह से सुनाना चाहते हो क्या?”

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अमजद जा कर कमोड के ऊपर बैठ गया। उसका मोटा मूसल लंड आसमान की तरफ देखकर उछल रहा था। जोया ने ध्यान से देखा। लंड का सुपाड़ा एकदम फूला हुआ था और एक बड़े टमाटर जैसा लग रहा था। अभी-अभी चूत में था और प्रीकम भी निकल रहा था, जिससे सुपाड़े पर चमक दिख रही थी। नीचे का भाग मोटा और एक सख्त खंभे जैसा था, जिस पर नीली नसें उभर आई थीं, जिससे लंड की मोटाई और बढ़ गई थी।

अमजद ने उसे लंड की तरफ ललचाई नजर से देखते हुए देखा और हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और चूमते हुए कहा, “बाजी इसे सिर्फ देखती ही रहोगी क्या?”

“तो क्या करूँ?” “इसे प्यार करो ना…” कहते हुए उसने जोया का हाथ लंड पर रखा। पहले जोया ने हाथ खींच लिया, फिर पकड़ा और कहा, “ये तो हाथ में आता ही नहीं…” फिर भी उसे हल्के हाथ से सहलाने लगी।

अमजद ने उसे नीचे बिठाया और जोया का सर अपने लंड पर झुकाने लगा। “अमजद अब क्या कर रहे हो… जो करना है जल्दी करो ना…”

अमजद ने कुछ कहा नहीं लेकिन अपने पैर का अंगूठा उसकी चूत के मुँह पर लगा दिया और हल्के से चूत के दाने को रगड़ने लगा। उसके पैर का अंगूठा चूत के पानी से गीला होने लगा।

“अमजद अब क्या वहाँ पैर डालोगे?” “हा… हा… हा… तुम भी बाजी… ये बताओ कैसा लग रहा है…”

“आह्ह… अमजद… मेरा निकल रहा है… आह्ह…” कहते हुए जोया अपनी चूत खुद अंगूठे पर रगड़ने लगी और उसके अंगूठे पर गरम-गरम लस्लसा पानी उँड़ेल दिया। इधर अमजद ने उसका सर अपने लंड पर दबाया और लंड का सुपाड़ा जोया के होंठों पर लगा दिया। जोया ने उसे किसी तरह अपने होंठों के बीच लिया और चूसने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

“आह्ह बाजी… ओह्ह… तुम्हारे होंठ कितने नरम हैं… चूसो… आह्ह मजा आ रहा है… बाजी मेरी जान…” कहते हुए वो जोया का सर लंड पर दबाते हुए और अंदर तक डालने की कोशिश करने लगा। ऐसे ही एक झटका मारा तो लंड जोया के हलक तक चला गया और उसे जोर की खाँसी आने लगी। जल्दी से लंड को बाहर निकाला और “अवाक्क… अवाक्क…” करके थूक दिया।

फिर बोली, “उफ्फ… तुम क्या मेरी जान लोगे… इतना बड़ा… मेरे गले तक घुसेड़ दिया… मेरी तो साँस बंद हो गई थी…”

अमजद ने उसे अपनी तरफ खींचा। जोया ने थोड़ा विरोध किया लेकिन उसके सीने से चिपक गई। “अमजद आज रात को सोने नहीं दोगे क्या… यहाँ… बाथरूम से तो वहाँ जमीन पर ठीक था…” अमजद ने उसे वहीं बाथरूम में जमीन पर लिटाया और उसके पैरों के बीच आ गया। और हल्के से जोया की चिकनी चूत पर हाथ फेरा।

“बाजी कितनी गदराई हुई चूत है तुम्हारी।” “वो तो है… तुम सिर्फ ऐसे ही हाथ फेरते हुए बैठे रहोगे क्या… मुझे नींद आ रही है…” “अभी रुको तुम्हारी नींद उड़ा देता हूँ…” कहते हुए अमजद नीचे झुका, चूत को चूमा और फिर ऊपर हाथ बढ़ाकर उसने चुचियों की घुंडी को दोनों हाथों में पकड़ा।

फिर जीभ बाहर निकालकर गोरी जाँघों पर घुमाने लगा और धीरे-धीरे चूत के आस-पास जीभ से सहलाने लगा लेकिन चूत पर जीभ को नहीं लगाया। जीभ चूत के दरार तक ले जाता था लेकिन फिर वापस पीछे आता था। इससे जोया तड़प उठी। “ये क्या कर रहे हो… अमजद… उफ्फ…”

और अब जोया ने अपने हाथ से अपनी चूत की दरार को फैलाया। वाह… क्या नजारा था… पानी से लबालब भरी चूत… बाहर से गुलाबी और अंदर एकदम लाल… और अमजद ने उस खुली हुई दरार में जीभ घुसेड़ दी। इसके साथ ही जोया ने उसका सर अपनी चूत में दबा लिया। अब अमजद की जीभ ने चूत के अंदर हलचल मचा दी। पूरी जीभ अंदर डालकर गोल-गोल घुमाते हुए वो मथनी की तरह चूत को मथने लगा।

जोया ने घुटने मोड़ दिए और पैर भी फैला दिए ताकि अमजद को और अंदर तक जीभ डालने का मौका मिले। अमजद के हाथ अब घुंडी को इतनी जोर से मसल रहे थे मानो वो उन्हें चुचियों से तोड़ के अलग कर देगा। और जोया… “आह्ह… सी… सी… सी… अमजद… मेरे राजा… मुझे पागल मत बनाओ…”

ये सुनकर अमजद को और जोश आ गया। उसने अब जोया के मोटे नितंबों को दोनों हाथों से दबाया और अपनी जीभ और तेजी से अंदर घुमाने लगा। जोया की चूत ने गरम-गरम पानी छोड़ना शुरू कर दिया। अब उसने अपना मुँह वहाँ से हटाया और घुटनों के बल बैठ गया।

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अमजद ने जल्दी से उसके पैरों को सर तक मोड़ा। उसके घुटने चुचियों के पास और फिर एक हाथ से चूत को फैलाते हुए, दूसरे हाथ से उछलते हुए लंड को चूत के दरार में ऊपर से नीचे तक 8-10 बार सहलाया। चूत के ऊपर के दाने को जो कड़क होकर उभर आया था, लंड के सुपाड़े से दबाया। और फिर चूत के छोटे से छेद पर टिका दिया।

जोया इंतजार कर रही थी उस मूसल के अंदर जाने का। उसे मालूम था अंदर जाते हुए उसे फिर से दर्द होने वाला है लेकिन ये दर्द उसे अच्छा लगने लगा था और इसी का इंतजार था उसे। अमजद ने झुककर उसे चूमा और उसकी कमर ने हरकत की और “फच्” की आवाज के साथ लंड का सुपाड़ा चूत में मुँह को खोलता हुआ अंदर जाकर फँस गया।

अमजद ने उसे थोड़ा बाहर खींचा और इस बार और तेज धक्का दिया। “फर्र… फचक्क…” और जोया उछल पड़ी। “आह्ह… अमजद… रहम करो… तुम्हें क्या लगता है ये कोई खाली डिब्बा है…” अमजद के दोनों हाथ उसके बदन को सहलाते हुए चुचियों को बेदर्दी से दबाने लगे। जोया की आहें और कराहें, उसके जोश को दुगुना कर रही थीं। “हाईई… अमजद… मार डालोगे क्या… आज ही सब करना है…? उफ्फ… मेरे बच्चों को कौन देखेगा…?”

“बाजी बच्चा देने के लिए ही तो ये सब हो रहा है।”

“ओह्ह… इसके पहले दो-दो बच्चे पैदा किए लेकिन इतनी तकलीफ नहीं उठाई… आह्ह…”

“बाजी जान… आज की तकलीफ में मजा भी तो है… और मुझे क्या मालूम था कि इस उम्र में भी तुम्हारी चूत इतनी टाइट होगी…” कहते हुए अमजद ने अपने लंड पर दबाव बढ़ाया लेकिन नीचे जोया ने चूत को सिकोड़ लिया था। उसे एक तरकीब सूझी। उसने जोया की गांड के नीचे हाथ डाला और सहलाते हुए अचानक जोया की गांड पर जोर से चिकोटी काट ली।

और जोया ने “उईईई…” कहते हुए जोर से गांड उचकाई। इधर अमजद तैयार था। उसने भी उसी वक्त एक करारा धक्का लगा दिया और पूरा लंड चूत को चीरता हुआ जड़ तक चूत में समा गया। इससे भी जोया “मर गई… हाईई… जालिम… आज मार ही डालेगा तू… कमीने हरामी… बाजी बाजी कहता है लेकिन कितना बेरहम है… आह मेरी फाड़ के रख दी…”

अमजद अब जोया के मम्मों के ऊपर लेट गया था। जोया के पैर भी ऊपर थे। उसने हँसते हुए पूछा, “क्या फाड़ के रख दी बाजी..?”

“अरे कुछ शर्म कर… अंदर बेरहमी से डाल दिया है… और बाजी बाजी कहता है… शर्म नहीं आती।”

“ओह ये तो मैं पहले ही कह चुका हूँ कि बाजी कहते हुए चोदने में और मजा आता है… मेरा लंड 1 इंच ज्यादा लंबा और मोटा हो जाता है… तुम्हारी ये मस्त गांड और चुचियों ने मुझे पागल कर के रखा था… और तुम भी मुझे ज्यादा दुखाती थी…”

अब अमजद ने हल्के से लंड को थोड़ा बाहर खींचा और हल्के-हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए। जोया के मुँह से “आह… ओह्ह… उफ्फ… धीरे… थोड़ा आहिस्ता…” यही आवाज निकल रही थी। अमजद को लगा कि अब जोया की चूत थोड़ी फैल गई है और गीली भी हो गई है। तो उसने लंबे-लंबे धक्के लगाने शुरू कर दिए। पूरा लंड बाहर निकाल के सिर्फ सुपाड़ा चूत के मुहाने पर रखता और एक ही झटके में अंदर धकेल देता।

जोया भी इस चुदाई से मजा ले रही थी। “इतने जोर से क्यों धक्का मार रहे हो… अब क्या तुम खुद भी अंदर घुसोगे?”

“बाजी मेरा लंड तो बड़ी मुश्किल से अंदर गया है… मैं कैसे अंदर जाऊँगा…? एक बात बताओ बुरा लग रहा है क्या?”

“अरे नमकूल… मिठाई अगर जबरदस्ती मुँह में डाली जाए तो क्या वो कड़वी लगती है?”

“ओह तो मेरी जान को ये चुदाई मिठाई जैसी लग रही है… तो लो अब खाओ…” कहते हुए अमजद ने अब अपनी स्पीड और बढ़ा दी। जोया की चूत से पानी बहता हुआ उसकी गांड के रास्ते बाथरूम के फर्श पर बहने लगा था। अब जोया जोश में आने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

“अरे हरामी… मेरे किराए के शौहर… अमजद… अब क्या ताकत खत्म हो गई… जोर-जोर से कर ना… आह्ह… उफ्फ… फाड़ दे… पूरा अंदर डाल… ओह माँ… हाईई… हाईई… ओह ओह… ओह्ह… ओह्ह…” कहते हुए उसने अपने दोनों पैर अमजद की कमर से लपेट दिए। अमजद उसके चुचियों को मुँह में लिए जबरदस्त धक्के लगा रहा था।

इस चुदाई को अब तक करीब आधा घंटा हो चुका था। जोया की इस हरकत से अमजद समझ गया कि जोया झड़ गई है। जोया उससे लिपट गई। गहरी साँसें ले रही थी। आँखें बंद थीं। अमजद थोड़ा रुका। उसने देखा जोया पूरी लाल हो गई है। उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और जोया को चूमने लगा।

थोड़ी देर बाद जोया ने आँखें खोलीं। “ओह अमजद… बहुत मजा आया… मेरी जान…” कहते हुए वो उठकर बैठ गई। उसने देखा अमजद का लंड अभी भी सख्त है और लेफ्ट-राइट डोल रहा है। अमजद ने उसे हाथ में पकड़ रखा था।

“अब इसे हाथ में क्यों पकड़ के रखा है…? अभी भी कुछ बाकी है क्या?”

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“बाजी अभी तो सब बाकी है…” कहते हुए वो कमोड के ऊपर बैठ गया। जोया को पहली चुदाई याद आई और उसकी चूत ने फिर बगावत कर दी। वो सामने झुकी और लंड को पकड़ लिया और चूमने लगी। लंड पर उसी की चूत का जूस लगा हुआ था। उसे पूरा चाट के साफ किया। फिर वो उठी। उसे खड़े होने में तकलीफ हो रही थी क्योंकि पैर उसके सर तक मुड़े थे बहुत देर तक।

उसके खड़े होने पर अमजद ने देखा… उसका चिकना गोरा पेट… और कमर पर दो बल पड़ते हैं… और उफ्फ… उसके मोटे गोल-गोल चूतड़… उसने जोया को अपने पास खींचा।

“अब बस करो ना…” नकली नखरों से जोया ने कहा।

“बाजी… अभी तो असली मजा आएगा… अब तुम मेरे लंड की सवारी करो।”

“सवारी..?? ये क्या घोड़ा है?” “घोड़ा नहीं लेकिन घोड़े के लंड जैसा मेरा लंड तो है।”

जोया उसके पास खड़ी थी लंड को सहलाते हुए। अमजद ने उसे घुमा दिया। अब जोया की गांड अमजद के सामने थी। उसने कमोड पर बैठे-बैठे ही उसकी कमर पर जीभ से चाटा। जीभ की गीली नोक से उसके उभरे हुए चूतड़ पर भी चाटा और गोल बड़े चूतड़ पर जोर से थपकी दी। इससे जोया सिहर उठी।

“अब ये क्या कर रहे हो…?” “कुछ नहीं, तुम्हारे चूतड़ की खूबसूरती देख रहा हूँ।”

“अब इस बुढ़िया के चूतड़ देखकर क्या करोगे… मेरी आबरू तो खराब कर दी तुमने… अपनी नसरीन के चूतड़ देखो…” कहते हुए जोया मुस्कुरा दी।

“बाजी… अपने आप को बुढ़िया मत कहो… तुम्हारी जवानी पर तो हजारों नसरीन कुरबान… ऐसी गोरी मक्खन जैसी चूत और ऐसी गदराई गांड तो किसी जवान औरत के पास भी मुश्किल से मिलेगी…” कहते हुए अमजद ने उसकी कमर को पीछे से पकड़ा और अपने गोद पर खींचा।

जोया ने पैर फैलाए हुए थे, इसलिए उसकी चूत थोड़ी खुली थी। अमजद ने अपने लंड को हाथ में पकड़ा और जोया की गांड के छेद को सहलाया। एक उँगली उसकी गांड में डाल दी। जोया उछल पड़ी। “हाई… अमजद वहाँ नहीं…” लेकिन अमजद हँसते हुए बोला, “बाजी अभी डरो मत… अभी मैं सही जगह पर ही करूँगा…”

“तुम्हारा कोई भरोसा नहीं… मूसल की तो आँख है नहीं… उसे बस जगह मिलेगी और वो घुस जाएगा…”

“बाजी… मेरी जान उसकी आँख नहीं है लेकिन मेरी आँख तो है… और मैं देख रहा हूँ ये जगह और भी हसीन है… और कुँवारी भी है… मेरे लंड को तुमसे कुँवारापन भी तो चाहिए।”

“चलो हटो बदमाश… इस उम्र में मैं कुँवारी कैसे मिलूंगी…?”

“हाई बाजी…” (गांड के छेद में फिर उँगली डालते हुए) “ये कुँवारी है मैं जानता हूँ…” कहते हुए उसने जोया को पीछे खींचा। इस बार जोया ने खुद हाथ पीछे किया और उसके लंड को पकड़ा फिर अपने पैरों को फैलाकर जगह बनाई और लंड को अपनी चूत के छेद पर टिकाया।

अचानक अमजद कमोड से थोड़ा ऊपर उछला और लंड “गुप्प्प” से चूत के अंदर आधा घुस गया। जोया की कमर अमजद ने कसके पकड़ रखी थी और उसे नीचे दबाया। चूत गीली होने के कारण लंड फिसलता हुआ चूत की गहराई तक चला गया। फिर भी करीब 1 इंच बाहर था। और जोया खुद लंड के ऊपर-नीचे गांड करते हुए चुदवाने लगी।

“हाई बाजी… लगता है… अब तुम मुझे चोद रही हो…” “क्या करूँ तुम्हें फरीग करके मुझे सोना भी है… नहीं तो तुम मुझे सोने नहीं दोगे…” “वो तो मैं वैसे भी सोने नहीं दूँगा मेरी जान…” कहते हुए अमजद ने नीचे से झटका दिया और बचा हुआ लंड भी अंदर घुस गया। और सीधे जोया की बच्चेदानी से टकराया।

“आह्ह… मार डाला… लगता है तुम आज के बाद मुझे इस काम के काबिल नहीं छोड़ोगे… मेरे मियाँ को मैं क्या जवाब दूंगी… उफ्फ… ऐसा लग रहा है लोहे की सलाख अंदर डाल दी है… अमजद क्या खा के इतना मोटा और लंबा बनाया तुमने…?”

“क्या बाजी..?” “अपने इस मूसल को…” “इस मूसल का एक नाम भी है…” “हाँ… तुम्हारे ल… ल… लु… न्… द्… को…” जोया ने किसी तरह शर्माते हुए कहा।

“ठीक से कहो बाजी…” अमजद ने नीचे से कमर उचकाते हुए कहा।

“आह्ह… धीरे… लंड… यही सुनाना चाहते थे तुम…” तो सुनो आज तुम्हारा ये मोटा लंड मेरी नाजुक चूत का कचूमर बना देगा और मैं कभी चुदवाने के लायक नहीं रहूंगी।”

जोया के मुँह से लंड और चूत के साथ चुदवाना सुनकर अमजद का जोश और बढ़ गया। वो कमोड से उठा और अब लंड को चूत के अंदर रखते हुए जोया को कमोड की तरफ मुँह करवाया। उसके दोनों हाथ कमोड के ऊपर रखे और जोया की मोटी गांड को पकड़ा। अब वो डॉगी स्टाइल में थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मोटा और लंबा लंड हो तो डॉगी स्टाइल में तूफान आ जाता है। उसने जोया के बालों को खोल के पकड़ा और बाल पकड़ के लंबे-लंबे धक्के लगाने लगा। उसके इस जोश से जोया की चूत ने हार मान ली और वो झड़ने लगी। “ओये हरामी… मार… और जोर से मार… आज फाड़ दे अपनी बाजी की चूत… आह… उफ्फ… हाई… चोदो अमजद… आई… आई… आई… आह्ह… मैं गई…” कहते हुए उसने नीचे सर झुका लिया।

लंड तो “फच् फच्… फचक्क… फच्…” की आवाज के साथ अंदर-बाहर हो रहा था। अमजद ने देखा अब जोया लंड को चूत में जोर से पकड़ रही थी और इस कोशिश में उसकी गुलाबी गांड खुल रही थी और बंद हो रही थी। उसने अपनी उँगली में थूक लगाया और एक उँगली उसकी गांड में डाल दी।

जोया तो बेहोश जैसी थी। फिर भी उसके मुँह से “आह्ह…” निकला, लेकिन बोली कुछ नहीं। उँगली को गांड में अच्छे से घुमाते हुए अमजद ने गांड को थोड़ी ढीली की। फिर उसने उसकी स्पीड में चूत के जूस से गीले लंड को “फच्” से बाहर खींचा और बिना देरी किए गांड के मुँह पर रखा और एक जोर का धक्का दिया।

कड़क लंड कुँवारी गांड को फाड़ता हुआ आधा अंदर हो गया। और जोया उछल पड़ी… “अरे मार… डाला… मर गई… अमजद… बाहर निकालो… मैं मर जाऊंगी… मेरी 20 साल चुदाई में गांड में लंड नहीं डलवाया… आह्ह… मैं मर जाऊंगी… निकाल लो… प्लीज… बहुत दर्द हो रहा है… ये क्या… नगर पालिका का कचरे का डिब्बा है जो कुछ भी कहीं भी डाल रहे हो…”

“कुछ नहीं होगा बाजी… मेरी जान… अब तो अंदर डाल दिया है… अभी मजा आएगा…” कहते हुए वो उसे पुचकारने लगा।

“नहीं… मुझे दर्द हो रहा है… तुम कमीने हो… मुझे बिना बताए अंदर डाल दिया…”

इधर अमजद आधे घुसे लंड को अंदर-बाहर करता रहा और आगे झुककर जोया की चुचियाँ दबाता रहा। “वाह… क्या चुचियाँ हैं मेरी जान की… अब कुछ दिनों के बाद इसमें दूध भर जाएगा तो मैं पीऊँगा…”

“अच्छा दूध कैसे भर जाएगा?” “आज तुम हमल से हो जाओगी तो 3-4 महीने बाद दूध भरेगा ना…”

“तुमने जहाँ डाला है… वहाँ डालने से हमल नहीं होगा… और मेरा दूध पीकर तुम क्या बन जाओगे मेरे मालूम है।”

“घबराओ मत मेरी जान, जहाँ से हमल होगा… वहीं पर मेरा पानी डालूँगा… और दूध तो मुझे पीना है… क्या बनूँगा ये बाद की बात है…”

अब तक बातों में उलझाकर अमजद ने करीब पूरा लंड गांड में डाल दिया था। जोया की कुँवारी गांड सच में बहुत टाइट थी। और अब उसे भी मजा आने लगा था। वो भी गांड आगे-पीछे करते हुए गांड में लंड का मजा ले रही थी। फिर अमजद ने एक ही धक्के में बाकी बचा लंड अंदर डाल दिया और चुचियाँ एक हाथ से मसलते हुए एक हाथ को आगे से जोया की चूत में उँगली डालने लगा।

इससे जोया फिर से गरम हो गई। अमजद के धक्कों की स्पीड बढ़ गई। कुछ देर में उसे लगने लगा अब वो झड़ने वाला है। उसने लंड को बाहर खींचा। “पुक्” की आवाज से लंड बाहर आया और जोया की गांड का मुँह “ओ” जैसा खुल गया।

अमजद ने उसी रफ्तार में लंड को चूत के अंदर डाल दिया। अब उसने गांड और चूत में बारी-बारी से लंड डालना शुरू किया। जोया तो पागल हो गई। अब वो भी झड़ने के करीब थी। “आह… अमजाद… आज बहुत मजा आ रहा है… और जोर से… उफ्फ… मेरे राजा… चोदो…”

अमजद ने कहा, “मेरी जान मेरा बेटा अब तुम्हारी चूत में डाल रहा हूँ लो…” कहते हुए पूरे लंड को जड़ तक जोया की चूत की गहराई में घुसेड़ कर कमर को पीछे से कसके जकड़ लिया और उसके लंड से वीर्य का फव्वारा छूट पड़ा। पिचकारी पर पिचकारी… न जाने कितनी पिचकारियाँ छूटी… जोया की चूत में सैलाब आ गया।

और इस पिचकारी की गरमी से वो भी झड़ गई। उसकी चूत से वीर्य और उसके चूत का रस एक साथ जमीन पर टपकने लगे थे। करीब 5 मिनट दोनों ऐसे ही रहे। फिर अमजद ने लंड को बाहर खींचा। वो अभी भी कड़क था… लेकिन जोया से ठीक से खड़ा हुआ नहीं जा रहा था। पैर काँपने लगे थे। अमजद ने उसे सहारा दिया। फिर उसे बाहों में भरकर बहुत लंबा चुम्मा उसके होंठों पर दिया।

जोया ने कहा, “मुझे शर्म आ रही है।”

“अब कहे की शरम बाकी.. अब तो मेरे लंड में तुम्हारी चूत और गांड दोनों को अंदर तक देख लिया है।”

“चलो हटो नालायक कहीं के.. मैं अभी सेफ नहीं हूँ.. कुछ हो गया तो लोग क्या कहेंगे.. बुढ़ापे में माँ बन गई..”

“कोई कुछ नहीं कहेगा..”

कहकर अमजद ने उसे लिपटा लिया। फिर गरम पानी का शावर लगाकर दोनों ने अच्छे से नहाया। और इसके बाद जोया ने कहा, “बहुत थक गई हूँ.. दोनों..”

दोनों हॉल में नंगे ही आए। वहाँ देखा रात के 3 बज रहे थे। जोया अपने रूम में जाने लगी तो उसे याद आया कि उसके कपड़े तो अमजद के रूम में हैं। वह उन्हें लेने अमजद के रूम में घुसी तो पीछे-पीछे अमजद भी गया। उसने दरवाजा बंद किया और जोया को बेड पर धकेलते हुए कहा, “जान.. अब थोड़ी रात बाकी है.. यहीं मेरे पहलू में सो जाओ।”

“नहीं.. बच्चे अकेले हैं.. जाग गए तो.. बहुत बुरा होगा..”

“कोई सुबह के 8 बजे से पहले नहीं जगेगा.. तुम आज नंगी मेरे पहलू में सो जाओ।”

कहते हुए उसने जोया को बिस्तर पर दबोच लिया। दोनों नंगे थे।

“तुम बहुत बेशर्म हो.. गंदी बातें करते हो.. मुझे जाने दो..”

लेकिन अमजद की पकड़ मजबूत थी और जोया का इरादा कमजोर।

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और दोनों वैसे ही नंगे एक-दूसरे की बाहों में सोए रहे। अमजद ने फिर से जोया को गरम करना शुरू किया। इस बार जोया थकी हुई थी। उसने अमजद को अपने ऊपर खींचा और अमजद उसके पैरों के बीच आ गया। उसने अपना लंड चूत के सुराख पर सेट किया और पूछा, “बाजी, एक बार में पूरा डाल दूँ?” जोया ने मस्ती में जवाब दिया, “हाँ।” और अमजद ने आँव देखा न ताव अपना मोटा और लंबा लंड एक झटके में जोया की गदराई चूत में उतार दिया। जोया चीख पड़ी,

“अरे हरामी.. मेरी चूत को क्या एक दिन में ही फाड़ देगा.. मर गई.. तुम्हारा ये लंड है या बिजली का खंभा.. मेरे गले तक उतर गया है..” ये सुनकर अमजद को और जोश आ गया। इस बार उसने हल्के धक्के नहीं लगाए, सीधे राजधानी की स्पीड से चुदाई शुरू कर दी। और जोया.. “हाई.. हाई.. उफ्फ.. हाँ.. और जोर से.. और जोर से.. मेरे अमजद.. आह.. तुम्हारे इस लंड के लिए तो मैं पागल हूँ.. चोदो अपनी बाजी को.. ओह.. ओह्ह.. मेरा हो जाएगा..” कहते हुए उसने अमजद को जकड़ लिया और अपनी चूत को उसके लंड से चिपकाकर पूरा पानी निकाल दिया।

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