Village Bhaujai Chudai
मेरे पापा सिटी में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे और मैं अपनी मम्मी कविता के साथ गाँव में रहता था क्योंकि पापा की पे इतनी नहीं थी कि वो सिटी में घर रेंट पर लेकर हमें अपने साथ रख ले। और मेरा चाचा प्रह्लाद अभी बैचलर था और गाँव में खेती का काम करता था तथा मम्मी घर का काम करती थी। Village Bhaujai Chudai
पापा हर शनिवार शाम को घर आते और रविवार शाम को वापस चले जाते थे। ये घटना उस समय की है जब पापा को कंपनी ने एक साल के लिए दुबई भेज दिया था। उस समय मम्मी की उम्र 32 साल थी और मेरी उम्र 12 साल की थी। अब मैं आपको मम्मी के बारे में बताता हूँ।
मम्मी का रंग गोरा और शरीर भरा हुआ था। मम्मी की ब्रेस्ट बहुत बड़ी थी जो उनकी कमीज़ से ज्यादातर समय बाहर दिखती थी क्योंकि मम्मी काम करते हुए दुपट्टा उतारकर रख देती थी और उनके चूतड़ भी बहुत बड़े थे। पापा के जाने के एक महीने तक तो सब नॉर्मल चलता रहा.
पर उसके बाद चाचा मम्मी के बदन को घूरते रहते और फिर अपने लंड को लुंगी के ऊपर से सहलाते तो उनका लंड तन जाता था और लुंगी में आगे साफ खड़ा दिखाई पड़ता। मम्मी झुककर डस्टिंग करती तो चाचा उनकी चुचियों को देखते रह जाते। फिर चाचा तैयार होकर खेतों में चले जाते और लंचटाइम पर वापस घर आते।
मेरी समर वेकेशन चल रही थी और खेतों में काम बढ़ गया था तो चाचा वहीं रुक जाते और मम्मी लंच बनाकर मुझे लेकर खेतों में चली जाती और फिर चाचा के खेत के काम में मदद करती। उस दिन मैं क्रिकेट खेलने के लिए रुक गया तो मम्मी अकेले ही खेत की ओर चल दी।
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खेत घर से 20 मिनट की दूरी पर थे और 30 मिनट बाद हमारा बैट क्रैक हो गया तो हमने खेल बंद कर दिया तो मैं खेतों की ओर चल पड़ा। खेतों में फसल लगभग 5 फीट ऊँची हो चुकी थी और हमारे खेत अलग से जंगल के किनारे पर थे जहाँ हमारे सिवा कोई नहीं आता था।
मैं एक खेत के किनारे पर पहुँचा तो देखा कि मम्मी ने साड़ी उतारकर रख दी है और वो पेटीकोट और ब्लाउज में घुटनों के बल बैठकर काम कर रही हैं और उनके ठीक पीछे चाचा खड़े हैं। और फिर उन्होंने चुपके से अपनी लुंगी उतार दी और अब उनका 6 इंच का लंड तनकर खड़ा था जिसे वो हाथ से हिला रहे थे। मम्मी को कोई खबर नहीं थी।
फिर चाचा ने मम्मी के शोल्डर पर हाथ रखा तो मम्मी ने सिर पीछे किया तो मम्मी के लिप्स और गाल चाचा के लंड पर रगड़ गए और मम्मी झटके से खड़ी हो गई। तो चाचा ने मम्मी को अपनी तरफ किया और पकड़ लिया। तो मम्मी बोली, “प्रह्लाद ये तुम क्या कर रहे हो?”
“भाभी देख, तेरा पति एक साल तक बाहर है और तू चाहे तो मैं तेरी प्यास बुझा सकता हूँ। मैंने कल रात को तुझे अपनी चूत में उंगली करते देखा था और इतनी सुंदर चूत को लंड से ही ठंडा किया जा सकता है और मेरे लंड की प्यास भी बुझ जाएगी।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मम्मी रात की बात पर थोड़ा शर्मा गईं तो चाचा ने तुरंत मम्मी की चुचियाँ रगड़ दीं। तो मम्मी पीछे हट गईं तो चाचा बोले, “अब भाभी मान भी जा, यहाँ हमें कोई देखने वाला भी नहीं है और मैं चाहूँ तो जबरदस्ती तेरी चूत चोद सकता हूँ पर उससे ज्यादा मजा तेरी मर्जी से करने में आएगा।”
और चाचा ने मम्मी का दायाँ हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया, “देख भाभी तेरी चूत चोदने के लिए बिल्कुल तैयार है।”
मम्मी ने लंड पर अपनी पकड़ बनाकर उसको महसूस करने लगीं पर अभी भी हिचकिचा रही थीं तो चाचा बोले, “भाभी मैं ये किसी को नहीं बताऊँगा, बस तू एक बार मान जा।”
अब मम्मी चाचा के लंड को हाथ से रगड़ने लगीं और बोलीं, “ठीक है प्रह्लाद, बाहर किसी और मर्द के लंड से चुदने की बजाय अपने देवर के लंड से चुदाई करा लेती हूँ। अब एक साल तेरे लंड का ही सहारा है।”
ये सुनते ही चाचा तो जैसे पागल हो गए और मम्मी को जोर से चूम लिया और मम्मी के ब्लाउज के बटन खोल दिए। मम्मी ने ब्रा नहीं पहनी थी तो उनकी गोरी-गोरी चुचियाँ एक झटके में ही बाहर आ गईं। उनके निप्पल 1 इंच लंबे थे। चाचा ने दोनों चुचियाँ हाथ से जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया तो मम्मी की चीख निकलने लगी, “आराम से देवरजी, मेरी चुचियाँ किसी भैंस की नहीं कि दूध निकलेगा।”
चाचा हँसते हुए बोले, “भाभी तू चाहे तो इनमें से दूध भी आ जाएगा।”
मम्मी बोलीं, “अभी तो मेरा सेफ टाइम चल रहा है पर आगे के लिए ध्यान रखना।”
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अब मम्मी ने अपना पेटीकोट उतार दिया और लंड को छोड़कर झुककर पैंटी उतारने लगीं तो चाचा का लंड उनके लिप्स पर टच हो रहा था तो चाचा बोले, “भाभी चूसेगी?”
तो मम्मी बोलीं, “अब जब तेरे लंड से चुदने का प्रोग्राम कर लिया है तो मैं अब हर तरीके से सेक्स का मजा लूँगी।”
और मम्मी घुटनों के बल बैठकर चाचा के लंड के टिप को जीभ से टच किया तो चाचा की आह निकल गई और फिर मम्मी ने लंड के सुपाड़े को मुंह में भर लिया और जोर से चूसने लगीं तो चाचा और जोर से आह… आह… आह… की आवाज करने लगे।
और फिर मम्मी ने जितना हो सकता था लंड मुंह में भर लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं तो चाचा ने मम्मी के सिर को पकड़कर लंड पर आगे-पीछे करने लगे जैसे मम्मी के मुंह को ही चोद रहे हों। और मम्मी ने चाचा की गांड को पकड़कर सहारा लिया और खुद भी मुंह को और तेजी से आगे-पीछे करने लगीं।
मम्मी की गूँ… गूँ… गूँ की आवाजें आ रही थीं। और फिर 5 मिनट बाद चाचा ने मम्मी के सिर को छोड़ा तो मम्मी ने लंड को बाहर निकाला तो उनका लंड थूक में और ज्यादा चमक रहा था और ज्यादा मोटा लग रहा था। अब मम्मी जमीन पर पीठ के बल लेट गईं और अपनी टांगें फैला दीं।
मैंने पहली बार किसी जवान औरत की चूत देखी और वो भी अपनी मम्मी की। उसके पिंक रंग के लिप्स बाहर की तरफ निकले हुए थे और मम्मी उन्हें हाथ से रगड़ रही थीं और फिर अपनी एक उंगली चूत में डाल दी तो चाचा बोले, “भाभी अब तो तेरी चूत को लंड मिल रहा है तो उंगली मत कर।”
“प्रह्लाद जल्दी से आ जा, अब और नहीं रुका जा रहा।”
अब चाचा मम्मी के ऊपर लेट गया और कमर को ऊपर करके एक हाथ से लंड को चूत के ऊपर रगड़ने लगा तो मम्मी चटपटा उठीं और चाचा की गांड पर हाथ रखकर उन्हें नीचे करने लगीं तो मुझे उनकी चूत में लंड का सुपाड़ा जाता हुआ दिखाई दिया और मम्मी की मस्ती भरी हुई आह निकल गई।
अब चाचा ने एक जोर का झटका दिया और लंड पूरा अंदर चूत को फाड़ता हुआ दाखिल हो गया और मम्मी की चीख निकल गई और वो दर्द से कराहने लगीं, “प्रह्लाद जरा बाहर निकालो, बहुत दर्द हो रहा है… आह्ह्ह आह्ह्ह…” पर चाचा ने झटके लगाना शुरू कर दिए, “भाभी मजा लेना है तो थोड़ा दर्द तो सहना पड़ेगा।”
और फिर और जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए तो मम्मी चीखने लगीं और कुछ देर बाद चाचा का लंड आराम से अंदर-बाहर होने लगा तो मम्मी अब मजा ले रही थीं और अपनी गांड उठा-उठाकर चाचा का साथ दे रही थीं, “और जोर से चोद मुझे, आज चूत को फाड़ डाल मेरे देवरजी।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और चाचा ने स्पीड और बढ़ा दी और उनके लंड और मम्मी की चूत का घप-घप का शोर अब साफ सुनाई दे रहा था। 15 मिनट तक मम्मी को चोदने के बाद चाचा ने अपने लंड को चूत से बाहर निकाला और मम्मी की छाती पर चढ़ गए और इससे पहले मम्मी कुछ समझ पाती,
उन्होंने अपना लंड मम्मी के मुंह में डाल दिया और 5-6 झटके मारे और फिर उनका शरीर सख्त हो गया। उन्होंने मम्मी के सिर को पकड़ रखा था और उनका सारा पानी मम्मी के मुंह में झड़ गया और मम्मी के गाल फूल गए। पहले तो मम्मी थूकने की कोशिश कर रही थीं पर फिर उन्होंने सारा पानी पी लिया.
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और जब चाचा ने मम्मी के सिर को छोड़ा तब भी मम्मी उनके लंड को चूसती रहीं और जब लंड को बिल्कुल चूसकर सारा पानी पी लिया तब उन्होंने लंड को मुंह से बाहर निकाला। फिर चाचा भी मम्मी की बगल में ही लेट गए और दोनों गहरी साँस ले रहे थे तो चाचा बोले, “भाभी बहुत टाइट चूत है तेरी, साला पूरा लंड छिल गया।”
“नहीं देवरजी तेरा लंड ही इतना मोटा है, मेरी चूत तो आज फट ही गई थी। और मैंने आज तक तेरे भाई का लंड मुंह में नहीं लिया पर आज तेरे लंड को चूसने के बाद मुझे लंड के पानी का स्वाद पता चला। अब तो चूत की बजाय मैं तेरे लंड का पानी रोज पीऊँगी।”
और फिर दोनों उठकर कपड़े पहनने लगे तो चाचा बोले, “भाभी आज रात तुझे घर पर फिर से चोदूँगा।” तो मम्मी बोलीं, “मेरी जान तू जितना चाहे मुझे चोद।” और फिर मम्मी को चाचा ने चूमा और मम्मी घर की तरफ चल दीं।
अब मम्मी रोज खेत में जाकर चाचा से अपनी चूत की प्यास बुझाती और रात को घर में भी चाचा के लंड से मजे लेती। इस चुदाई के खेल को अब लगभग 18 दिन हो चुके थे। उस रात जब चाचा ने मम्मी को चोदकर उनकी चूत को ठंडा किया, उसके बाद वो दोनों बातें कर रहे थे।
‘भाभी, मेरा एक दोस्त है अभिषेक जो साथ वाले गाँव में ही रहता है और वो कल हमारे यहाँ सुबह पहुँच जाएगा और शाम को 6 बजे की ट्रेन से शहर चला जाएगा। उसने मुझे कई बार अपनी बीवी को चोदने का अवसर दिया है और हम दोनों ने मिलकर उसकी बीवी को कई बार एक साथ भी चोदा है। और अगर तुम तैयार हो तो वो तेरी चूत चोदना चाहता है।’
मम्मी बोली, ‘तूने मुझे क्या रंडी समझ रखा है जो तुझसे भी चुदूँ और तेरे दोस्तों से भी चुदूँ?’
‘नहीं भाभी, ऐसा नहीं। पर भैया की गैरमौजूदगी में अगर तुम चाहो तो दो लंडों से एक साथ चुदने का मजा ले सकती हो।’
तो मम्मी बोली, ‘जब तेरे साथ चुदाई का काम शुरू कर दिया है तो एक लंड और सही, चल बुला ले उसे भी। पर घर में तो चुदना मुश्किल है क्योंकि विकास घर पर होगा।’
‘भाभी, मैं उसे रेलवे स्टेशन से सीधा खेत पर ले जाता हूँ। तू दोपहर 12 बजे तक जाना और शाम तक चुदाई का खेल करके तू वापस घर आ जाना और मैं उसे खेत से ही स्टेशन ले जाऊँगा।’
मम्मी बोली, ‘हाँ, ये ठीक रहेगा।’
अगले दिन सुबह मम्मी ने घर का काम जल्दी से खत्म किया और 11:30 बजे खेत की ओर चल दी। तो मैंने पीछा किया। मम्मी हमारे खेत पर पहुँच गई तो वहाँ पर चाचा का दोस्त अभिषेक और चाचा मम्मी का वेट कर रहे थे। और मैंने वहीं खेत में अपनी पोजीशन ले ली।
मम्मी को देखकर अभिषेक मुस्कुराकर बोला, ‘भाभी, तेरी जवानी तो बड़ी मस्त लग रही है।’
मम्मी बोली, ‘देवरजी, अभी तो खेल शुरू करते हैं, फिर मेरी जवानी देखना।’
और मम्मी ने कपड़े उतारना शुरू कर दिया। ये देखकर तो अभिषेक ने तुरंत कपड़े खोल दिए और चाचा भी नंगा हो गया। अब तीनों नंगे खड़े थे।
अभिषेक ने हाथ आगे बढ़ाकर मम्मी की चुचियाँ सहलाना शुरू कर दिया और चाचा मम्मी के पीछे जाकर खड़े होकर मम्मी के मोटे-मोटे चूतड़ों को भींचना शुरू कर दिया। और मम्मी भी दोनों के लंड को हाथ से सहला रही थी। कुछ देर में ही उनके लंड तन गए। अभिषेक का लंड चाचा के लंड से मोटा और लंबा था। मम्मी उसके लंड के साइज को देखकर बोली, ‘ये तो मेरी चूत फाड़ देगा।’
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तो अभिषेक बोला, ‘भाभी, तेरी चूत ने एक बच्चा पैदा कर दिया तब ये नहीं फटी, तो एक लंड से कैसे फट जाएगी? तू बस आराम से मजे लूट और हमें भी अपनी चूत के मजे लेने दे।’
और थोड़ी देर तक वो तीनों खड़े रहकर फोरप्ले करते रहे। उसके बाद अभिषेक जमीन पर लेट गया और मम्मी उसके ऊपर लेटने लगी। एक हाथ से मम्मी ने उसके लंड को चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे शरीर को नीचे करते हुए उसके लंड को अपनी चूत के अंदर लेने लगी। साथ ही साथ मम्मी की चीख निकलने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पर मम्मी अभिषेक का पूरा लंड अंदर जाने के बाद ही रुकी और फिर थोड़ा आराम करके मम्मी अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ने लगी और ऊँह-आह की आवाजें करने लगी। अब अभिषेक ने मम्मी के चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़कर फैलाया और अपनी कमर को ऊपर उठाकर झटके देने शुरू कर दिए।
इधर चाचा ने अपने लंड पर खूब सारा थूक लगाकर बिल्कुल चिकना कर दिया था और उसे हाथ से सहला रहे थे। फिर चाचा मम्मी के ऊपर लेटने लगे तो मम्मी को जो होने वाला था उसका शक हुआ और वो बोली, ‘नहीं, एक साथ नहीं। मेरी चूत और गांड दोनों फट जाएंगी, ऐसा मत करो।’
पर चाचा हँसने लगे और बोले, ‘भाभी, शुरू में थोड़ा दर्द तो पहली बार जब चुद गई होगी तब भी हुआ होगा, पर अब तू रोज चुदाई के मजे लूट रही है तो आज एक बार दो लंडों से एक साथ चुदने का मजा ले ले। फिर तो तू गाँव के सारे मर्दों से ग्रुप में चुदना चाहेगी।’
और फिर चाचा ने अपने चमकते हुए लंड को मम्मी के गांड के छेद पर रखा। मुझे मम्मी के वो फैले हुए चूतड़ अच्छे से दिखाई दे रहे थे। चाचा ने हल्का सा झटका दिया तो लंड का सुपाड़ा फिसलकर गांड में चला गया और मम्मी दर्द से चीखने लगी और छूटने की कोशिश करने लगी।
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तो नीचे से अभिषेक ने कसकर पकड़ लिया और ऊपर चाचा लेट गए तो मम्मी अब सिर्फ छटपटा सकती थी। चाचा ने एक जोर का झटका दिया तो उनका लंड गांड को फाड़ता हुआ जड़ तक पूरा समा गया और मम्मी दर्द से रोने लगी। पर उन दोनों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था और अब दोनों ने चोदना शुरू कर दिया।
मुझे मम्मी की चूत और गांड में एक साथ उन दोनों के लंड चुदाई करते दिखाई दे रहे थे। अब मम्मी की चीखें भी कम हो रही थीं और उसकी जगह अब मम्मी आहें भर रही थी। और 5 मिनट बाद मम्मी भी पूरे जोश में आकर उनके धक्कों के साथ अपनी कमर हिला रही थी।
अब मम्मी ने अपने हाथ पीछे लेकर आए और अपने चूतड़ों को और फैलाकर पकड़ लिया तो चाचा का लंड और तेजी से अंदर-बाहर होने लगा। और फिर चाचा ने जोर की आवाजें करते हुए अपना पानी मम्मी की गांड में छोड़ दिया और फिर धीरे-धीरे कमर को हिलाकर शांत होने लगे।
फिर जब उनका लंड छोटा हो गया तो अपने आप ही गांड से फिसलकर बाहर आ गया और मम्मी की गांड का छेद थोड़ी देर खुला ही रहा और उसमें से चाचा के लंड का पानी थोड़ा सा बाहर आ गया, जिसे मम्मी ने अपने हाथों से अपने चूतड़ों पर फैलाकर लगा लिया।
और इधर अब अभिषेक ने मम्मी की चूत को चोदना तेज कर दिया तो मम्मी बोली, ‘अभिषेक, मुझे तेरा पानी पीना है।’ तो अभिषेक ने तुरंत मम्मी को अपने ऊपर से हटाया और खड़ा हो गया और जोर-जोर से अपने लंड को हाथ से पेलने लगा। मम्मी घुटनों के बल उसके लंड के सामने बैठ गई और अपना मुँह खोल लिया।
और फिर अभिषेक के लंड ने अपनी पानी की धार फेंकी जो सीधे मम्मी के मुँह में गिर रही थी और कुछ बूंदें उनके गाल पर भी गिर गईं। जब लंड ने पूरा पानी फेंक दिया तो मम्मी ने मुँह बंद करके सारा पानी पिया और गाल पर गिरी हुई बूंदें भी हाथ में लेकर चाट ली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तो अभिषेक हँसने लगा, ‘भाभी, लगता है बहुत प्यासी हो जो पूरा पानी पी लिया पर प्यास नहीं बुझी।’
मम्मी बोली, ‘देवरजी, तुम्हारे लंडों का पानी इतना टेस्टी है कि दिल ही नहीं भरता।’
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फिर वो तीनों ट्यूबवेल में जाकर नहाने लगे और उन दोनों ने मम्मी के शरीर को खूब साबुन लगाकर धोने के बहाने से रगड़ा और बीच-बीच में हर बार मम्मी की आह निकल रही थी। लगभग आधे घंटे पानी में रहने के बाद वो तीनों बाहर आए और नंगे ही चारपाई पर बैठ गए। मम्मी उन दोनों के बीच में बैठी थी और उनके लंड हाथ से सहला रही थी। तो अभिषेक बोला, ‘भाभी, मेरा मन तुझे चोदने को फिर से कर रहा है और इस बार तुझे कुत्तिया बनाकर सिर्फ मैं चोदना चाहता हूँ।’
तो चाचा बोले, ‘भाई, तेरी मर्जी है। मैंने भी तो कितनी बार तेरी बीवी को अकेले चोदा है।’ और ये सुनकर मम्मी तुरंत चारपाई से नीचे उतरकर कुत्तिया की तरह हो गई और अपनी कमर हिलाते हुए बोली, ‘तो देवरजी, तुम्हारी कुत्तिया चुदने के लिए तैयार है।’ और अभिषेक भी तुरंत अपना लंड हाथ में लेकर मम्मी के पीछे कुत्ते की तरह चढ़ गया और चुदाई शुरू कर दी। दोस्तों, इससे आगे मेरी मम्मी और चाचा ने बहुत चुदाई के अलग-अलग खेल खेले, जिनके बारे में आप लोगों को मैं बाद में लिखूँगा।
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