Hot Didi Bur Chudai Story
ये कहानी किसी और की नहीं मेरी अपनी है। वो भी मेरी अपनी एक कजिन के साथ किये गये सेक्स की कहानी। लेकिन इससे पहले कि मैं अपनी कहानी शुरू करूँ मैं आपको उस लड़की का परिचय करा दूँ जिसके बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूँ। जैसा कि मेरे बारे में आप सभी को पता है कि मैं राज हूँ मेरी उम्र सत्ताईस साल की है। Hot Didi Bur Chudai Story
दूसरी तरफ मेरी कजिन जिनका नाम कुसुम है मेरे से पाँच साल बड़ी है। वो वैसे तो शादीशुदा है लेकिन देखने पर कभी ऐसा नहीं लगता कि वो शादी सुदा है। वो काफी सुंदर और स्मार्ट लड़की है। आज मैं जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो कहानी आज से सात महीने पहले की है तब उनकी नई नई शादी हुई थी।
उस दिन मेरा एक दोस्त अपने किसी काम से शहर आया था। मैं पूरे दिन उसके साथ शहर में था। शाम को उसे वापस जाना था। मैं उसे स्टेशन छोड़ के वापस जब रूम पर आया तो मैंने जो देखा उसे देख के तो मेरी जैसे दुनिया ही बदल गई। मैं फर्स्ट फ्लोर पर रहता था। नीचे सीढ़ी के दरवाजे को बंद कर के जब अपने फ्लोर पर आया तो मैंने देखा कि रूम के सारे लाइट बंद थे।
मैंने सोचा कि शायद दीदी सो रही होंगी मैं धीरे धीरे अंदर गया। लेकिन जब मैं अंदर दाखिल होने के बाद जो देखा तो पाया कि दीदी जागी हुई थी। वो मेरे रूम में बेड पर लेटी हुई थी और टी.वी पर ब्लू मूवी देख रही थी। मैंने जब लाइट जलाया तो पाया कि वो उस वक्त सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
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दीदी ने जब मुझे देखा तो वो अपने आप को ढकने के लिए जैसे ही चादर को खींचा तो मैंने उस चादर को खींच लिया। दीदी ने अपने बगल में सरसों के तेल की एक डिब्बी भी रखी थी। इतना देख के मेरे लंड का पारा हाई हो गया। अब मेरे लिए बरदाश्त करना मुश्किल हो गया।
मैंने तुरंत उस कमरे के दरवाजे को बंद किया और अपने कपड़े उतारने लगा। दीदी भी अब समझ गई कि अब मैं उनके लिए एक भैया से अब एक सैय्या बनने जा रहा था और वो मेरे लिए दीदी से बीबी बनने जा रही थी। वो भी मेरे लंड को देखने के लिए जैसे बेचैन हो रही थी। मैंने एक एक करके अपने सारे कपड़ों को उतार दिया।
इसके बाद मैं उनके बगल में बैठ गया और उनके पैंटी को उतार दिया। इसके बाद जब मैंने जब उनके चूत को देखा तो लगा कि मेरे लंड से पानी टपक जाएगा क्योंकि अब तक मैंने इतनी सुंदर चूत नहीं देखी थी। मैंने वैसे तो उनसे पहले चार लड़कियों की चुदाई कर चुका था। जिसकी चर्चा मैंने अपने पहले के कहानियों में कर चुका हूँ।
लेकिन इतनी सुंदर चूत को देख के शायद ही कोई आदमी बिना चुदाई किये रहेगा। मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा तेल लगाया और जब ध्यान से देखा तो पाया कि दीदी ने अपने चूत में तेल लगा रखा था। मैंने देखा कि दीदी अब चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार थी।
मैंने अब थोड़ा भी देर करना उचित नहीं समझा और अपने लंड को उनके चूत पर सटाया तो दीदी ने बिना कहे ही अपने दोनों हाथों से चूत को फैला दिया। इतना देखके मेरी तो जैसे जोश ही दुगनी हो गई। मैंने अपने लंड को उनके छेद पर रखा और कमर को धीरे धीरे पुश किया तो वो आआह्ह की आवाज निकाली।
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मैंने देखा कि मेरे लंड का कोर्क उनके चूत के छेद में प्रवेश कर चुका था। मैंने अपनी कमर को एक जोर से झटके के साथ हिलाने के बाद धीरे धीरे हिलाने लगा तो वो ऊईईई। आआह्ह। नो। हाईई। ओओह्ह। नहीीईन। की आवाज निकाला। मैंने पूछा गया है तो वो बड़ी मुश्किल से आवाज निकाल पाई ह्ह्हााा आआह्ह्ह ओओह्ह.
अब मैंने अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया। मैंने टी.वी. बंद कर दिया और बोला अब तक तो अब थ्योरी देख रही थी। अब मैं आपके साथ प्रैक्टिकल कर रहा हूँ। और ऐसा कहते हुए मैंने फिर से अपनी कमर को जोर जोर से दो तीन झटके के साथ हिलाया तो वो ऊउईईई… आआह्ह्ह… नोओ… हाईई मर गईईई ओओह्ह.. नाह्हीईन… की आवाज के साथ चीख पड़ी।
मैंने उनसे पूछा क्या जीजाजी आपके साथ सेक्स नहीं करते तो वो बोली करते तो है लेकिन इतना मजा नहीं आता। मैंने पूछा क्यों तो वो बोली उनका लंड इतना बड़ा नहीं है। मैंने पूछा कितना बड़ा है तो वो बोली पाँच इंच का है। मैं समझ गया कि बात सही है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
एक उनका लंड पाँच इंच का और दूसरी तरफ मेरा लंड सात इंच का तो दीदी को मजा तो आना ही था। मैंने अब दीदी के दोनों चूचियों को बारी बारी से दबाया तो उनके दोनों पैर जोकि बिलकुल ही टाइट थे को दीदी ने थोड़ा सा ढीला किया और मैंने उनके दोनों पैरों को फोल्ड करने ले लिए बोला तो दीदी ने कर दिया.
अब मैंने जब अपने लंड को देखा तो पाया कि मेरा लंड अभी आधा ही उनके चूत में गया था। मैंने एक जोर से धक्का मारा तो उनके मुँह से फिर से ऊईईई। आआआह्ह्ह। नोओ। हाईई मार गई। ओओह्ह। नााह्हीईन। की आवाज निकल पड़ी और दोनों पैर फिर से टाइट हो गए।
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अब मैंने उनके पैरों को पकड़ के फोल्ड कर के उनके जांघों को फैला दिया। अब मैं अपने लंड को उनके चूत में आते जाते देख रहा था। कुछ देर तक वैसे ही कमर को हिलाते रहा तभी मेरे अंदर न जाने कहाँ से अचानक जोश आया और मैंने अपने लंड को पूरा उनके चूत में डालने के लिए एक जोर से झटका मारा तो वो ऊईई… आआह्ह्ह… नोओओ… हााईई मार गई। ओह.. नहीीईन… न सिर्फ पूरी तरह से काँप गई बल्कि छटपटाने लगी।
मेरा लंड अब उनके चूत में पूरा चला गया था। लेकिन उनकी चूत भी फट गई थी। वो मेरे लंड को निकालने की हर कोशिश कर रही थी मैंने उनसे बोला बस अब आपको मजा आने वाला है। थोड़ा देर और रुक जाइये। इस तरह से मैंने उनके दोनों हाथों को पकड़ लिया और अपनी कमर को हिलाता रहा।
मैंने देखा कि कुछ देर के बाद वो भी शांत होने लगी। मैं समझ गया कि उनको भी अब मजा आने लगा था। मैं अब उनके दोनों चूचियों को मसलने लगा और अपनी कमर को जोर जोर से हिलाने लगा तो वो भी मस्ती में अजीब ही मस्तानी आवाज निकाल के मेरे जोश को और बढ़ाने की कोशिश करने लगी।
कुछ देर के बाद जब मैंने महसूस किया कि मेरा स्पर्म उनके चूत में गिरने वाला है तो मैंने दीदी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया। दीदी भी मेरा भरपूर साथ देने लगी। कुछ देर के बाद मेरा पूरा स्पर्म दीदी के चूत में गिर गया। हमदोनों एक दूसरे के बाहों में जैसे ढेर हो गए। अब मैं उनके ऊपर ढेर हो गया।
कुछ देर के बाद मैं उठ के बैठा और अपने लंड को निकाला तो दीदी के चूत को देख के बोला कि क्या मस्त जिस्म पाया है अपने। आज अपने मुझे खुश कर दिया। दीदी बोली तुमने भी मुझे खुश कर दिया। मुझे लगता है कि सही मायने में आज ही मेरी सुहाग रात है।
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अब मैं उठ के अपने कपड़े को पहन के दूसरे कमरे में चला गया और बेड पर जाके सो गया। सुबह जब जगा तो देखा कि दीदी उठ के नहा के ठीक हो चुकी थी। मैं जब बाथरूम से बाहर आया तो वो मुस्कुरा के बोली कि अच्छी लगी रात की चुदाई। कुछ देर के बाद जीजाजी उनको लेने के लिए आ गये। दीदी तैयार हो चुकी थी। दोनों लोग उसी दिन चले गए।
उस रात की घटना के बाद मैं अक्सर उस पल को याद करता हूँ। दीदी की वो सुंदरता, उनकी आँखों में वो चमक, और हमारे बीच का वो गहरा कनेक्शन। मैंने कभी सोचा नहीं था कि परिवार में ऐसा कुछ हो सकता है, लेकिन उस दिन सब कुछ बदल गया। जब मैंने उन्हें ब्लू मूवी देखते हुए देखा, तो मेरे मन में कई सवाल उठे, लेकिन उत्तेजना इतनी ज्यादा थी कि मैंने सब कुछ भुला दिया।
उनकी ब्रा और पैंटी में वो इतनी सेक्सी लग रही थीं कि मेरे शरीर में गर्मी की लहर दौड़ गई। उनकी डिब्बी में रखा सरसों का तेल देखकर मुझे समझ आ गया कि वो खुद को तैयार कर रही थीं, शायद अकेले में मजा लेने के लिए। लेकिन अब मैं वहाँ था, और सब कुछ बदलने वाला था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जब मैंने उनके पैंटी उतारी, तो उनकी चूत की वो चिकनाई और सुंदरता देखकर मैं हैरान रह गया। वो बिलकुल गुलाबी रंग की थी, और तेल की वजह से चमक रही थी। मैंने धीरे से अपनी उँगलियों से उसे छुआ, तो दीदी की सिसकारी निकल गई। “भैया, क्या कर रहे हो?” उन्होंने शर्माते हुए कहा, लेकिन उनकी आँखों में विरोध नहीं था।
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मैंने कहा, “दीदी, आज हम दोनों को मजा आएगा।” फिर मैंने अपना लंड उनके छेद पर रखा, और धीरे-धीरे अंदर धकेला। दर्द से उनकी आँखें नम हो गईं, लेकिन जल्दी ही वो मजा लेने लगीं। मैंने उनकी कमर को पकड़ा और धक्के लगाने लगा, हर धक्के के साथ उनका शरीर काँपता। हम दोनों पसीने से तर हो गए थे, कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाजें गूँज रही थीं। चुदाई के दौरान मैंने उनके चूचियों को चूसा भी, वो इतनी मुलायम थीं कि मैं रुक ही नहीं पा रहा था।
दीदी ने मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए कहा, “राज, तुम्हारा इतना बड़ा है, जीजाजी का तो आधा भी नहीं।” मैंने हँसकर कहा, “अब मैं हूँ ना, जब चाहो बुला लेना।” वो शरमा गईं, लेकिन उनके धक्कों से पता चल रहा था कि वो पूरी तरह सरेंडर कर चुकी थीं। जब मैं झड़ा, तो उनका चेहरा संतुष्टि से चमक रहा था। और उस दिन के बाद हमारा रिश्ता और गहरा हो गया, कभी-कभी फोन पर बातें होतीं, और मौका मिलते ही हम फिर से मिलते। ये कहानी मेरी जिंदगी का एक यादगार हिस्सा है।
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