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पति की कमी देवर जी ने पूरी करी

मई 4, 2026 by hamari Leave a Comment

Devar Fuck Hot Bhabhi Story

मैं 23 साल की हूँ और दिखने में खूबसूरत और सेक्सी हूँ। 2 साल पहले की बात है, मैं एक एमएनसी में काम करती थी। उसी एमएनसी में नीरज भी काम करने के लिए आए। मैं उनसे सीनियर थी। नीरज बहुत ही हैंडसम थे। जब से उन्होंने ऑफिस जॉइन किया था, तब से ही मैं मन ही मन उन पर मर मिटी। मेरी अभी तक शादी नहीं हुई थी। Devar Fuck Hot Bhabhi Story

धीरे-धीरे हम दोनों में गहरी दोस्ती हो गई और फिर हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई। फिर 2 महीने के बाद हम दोनों ने शादी कर ली। नीरज का एक छोटा भाई भी था, नीरव। वो नीरज से 2 साल छोटा था। उसकी उम्र भी मेरी तरह 21 साल की थी। नीरज नीरव को बहुत ज्यादा मानते थे।

नीरव नीरज से ज्यादा हैंडसम था और ताकतवर भी। वो बहुत शरारती भी था। हम दोनों एक-दूसरे से खूब हँसी-मजाक करते थे। मुझे उसका हँसी-मजाक करना बहुत ही अच्छा लगता था। नीरज भी हम दोनों को देखकर बहुत खुश रहते थे। शादी के बाद नीरज ने मुझसे नौकरी छोड़ देने को कहा तो मैंने नौकरी छोड़ दी।

अब मैं घर पर ही रहने लगी। नीरव एमए फाइनल में पढ़ रहा था। नीरज से शादी हो जाने के बाद मैं उनके घर आ गई। सुहागरात के दिन जब मैंने नीरज का लंड देखा तो मेरे सारे सपने टूट गए। उनका लंड केवल ३ इंच लंबा और बहुत ही पतला था।

उन्होंने जब पहली-पहली बार अपना लंड मेरी चूत में घुसाया तो मेरे मुँह से केवल एक हल्की सी सिसकारी भर निकली और उनका पूरा का पूरा लंड एक ही धक्के में मेरी चूत के अंदर समा गया। मुझे कुछ पता ही नहीं चला। उन्हें बड़ी मुश्किल से 2 मिनट ही मुझे चोदा और झड़ गए। मैं उदास रहने लगी।

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नीरज ने शादी में दिनों की छुट्टी ले ली थी। वो घर पर ही रहते थे। दिनों के बाद जब वो ऑफिस जाने लगे तो उन्होंने मुझसे कहा, नीरव की बहुत देर तक सोने की आदत है। उसको जगा देना और कॉलेज भेज देना। मैंने कहा, ठीक है। नीरज चले गए। उनके जाने के बाद मैं नीरव को जगाने उसके रूम में गई।

मैंने नीरव को जगाया तो वो उठ गया। मैंने नीरव से कहा, जब तुम्हारे भैया की शादी नहीं हुई थी तब तुम्हें कौन जगाता था। वो बोला, भैया जगाते थे। नीरव फ्रेश होने चला गया और मैं उसके लिए नाश्ता बनाने चली गई। नाश्ता करने के बाद नीरव कॉलेज चला गया।

नीरज 9 बजे ऑफिस चले जाते थे और नीरव 10 बजे कॉलेज चला जाता था। नीरव कॉलेज से 3 बजे वापस आ जाता था जबकि नीरज रात के 7 बजे तक वापस आते थे। अगले दिन नीरज के ऑफिस चले जाने के बाद मैं नीरव को जगाने गई। जैसे ही मैं नीरव के रूम में पहुँची तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गई।

नीरव गहरी नींद में सो रहा था और खर्राटे भर रहा था। उसकी लुंगी खुलकर बेड के किनारे पड़ी हुई थी और उसका लंड खड़ा था। उसका लंड 8 इंच लंबा और बहुत ही मोटा था। मैं सोचने लगी कि बड़े भाई का लंड 3 इंच लंबा है और छोटे भाई का 8 इंच लंबा। कुदरत भी क्या-क्या करिश्मे करती है।

मैं बहुत ही सेक्सी थी और शादी के बाद नीरज मेरी प्यास जरा सा भी नहीं बुझा पाए थे इसलिए मैं नीरव के लंड को ध्यान से देखती रही। मुझे नीरव का लंड बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसके लंड को देखकर मेरे मन में गुदगुदी सी होने लगी। मैंने सोचा काश नीरज का लंड भी ऐसा ही होता तो मुझे खूब मज़ा आता। मैं बहुत देर तक उसके लंड को देखती रही।

अचानक मेरे मन में खयाल आया कि नीरव को कॉलेज भी भेजना है। मैं सोच में पड़ गई कि उसे कैसे जगाऊँ। वो जगने के बाद पता नहीं क्या सोचेगा। बहुत देर तक मैं खड़ी-खड़ी सोचती रही और उसके लंड को देखती रही। मैंने मन ही मन सोचा कि काश नीरव ही मुझे चोद देता तो मुझे जवानी का मज़ा तो मिल जाता। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं नीरव के नज़दीक गई और कहा, नीरव, 9:30 बज रहे हैं। उठना नहीं है क्या। वो हड़बड़ा कर उठा तो उसने खुद को एकदम नंगा पाया। वो कभी मुझे और कभी अपने लंड की तरफ देखने लगा। मैंने कहा, तुम ऐसे ही सोते हो क्या, तुम्हें शर्म नहीं आती। वो बोला, गहरी नींद में सोने की वजह से अक्सर मेरी लुंगी खुलकर इधर-उधर हो जाती है, आज तुमने भी मेरा लंड देख ही लिया, अब क्या होगा।

मैंने कहा, होगा क्या। उसने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा, भाभी, ये मुझे बहुत ही परेशान करता है। अक्सर सुबह को ये खड़ा हो जाता है। इतना कहकर उसने अपनी लुंगी उठानी चाही तो मैंने तुरंत ही उसकी लुंगी उठा ली और कहा, तुम ऐसे ही बहुत अच्छे लग रहे हो।

वो बोला, केवल मैं ही अच्छा लग रहा हूँ। क्या मेरा लंड अच्छा नहीं है। मैंने कहा, वो तो बहुत ही अच्छा है। वो बोला, पसंद है तुम्हें। मैंने कहा, हाँ। वो बोला, फिर ठीक है। चाहो तो हाथ लगा कर देख लो। मैंने कहा, कॉलेज नहीं जाना है क्या। वो बोला, जाना तो है। तुम इसे हाथ से पकड़ कर देख लो।

उसके बाद मैं कॉलेज चला जाऊँगा। मेरा मन तो नीरव से चुदवाने को कर रहा था लेकिन ये बात मैंने ज़ाहिर नहीं होने दी। मैंने कहा, अगर तुम कहते हो तो मैं पकड़ लेती हूँ लेकिन तुम कुछ और तो नहीं करोगे न। वो बोला, बिल्कुल नहीं। मैंने कहा, फिर ठीक है।

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मैं नीरव के बगल में बेड पर बैठ गई। जोश के मारे मेरी चूत गीली हो रही थी। उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया तो मैंने नीरव का लंड पकड़ लिया। थोड़ी देर तक मैं उसके लंड को पकड़े रही तो वो बोला, सहलाओ इसे। मैंने उसके लंड को धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया। मेरे सहलाने से उसका लंड और ज्यादा टाइट हो गया।

थोड़ी देर बाद मैंने कहा, अब जाओ, नहा लो। वो बोला, नहीं और सहलाओ। मैं उसका लंड सहलाने लगी। वो बोला, चुदवाओगी। मैंने कहा, नहीं। उसने पूछा, क्यों, मेरा लंड तुम्हें पसंद नहीं आया। मैंने कहा, मैंने कहा था न कि मुझे तुम्हारा लंड पसंद है। वो बोला, फिर चुदवा लो। मैंने कहा, मैं तुम्हारी भाभी हूँ। मैं तुमसे नहीं चुदवाऊँगी।

वो बोला, फिर तो तुम्हें सारी जिंदगी जवानी का मज़ा नहीं मिल पाएगा। मैंने पूछा, क्यों। वो बोला, भैया का लंड केवल 3 इंच का ही है। मैं जानता हूँ कि उनसे चुदवाने में किसी भी औरत को बिल्कुल भी मज़ा नहीं आएगा। मैंने कहा, तुम कैसे जानते हो कि उनका लंड छोटा है।

वो बोला, हम दोनों बहुत दिनों तक साथ ही साथ एकदम नंगे ही नहाते थे। हम दोनों एक-दूसरे के लंड के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। तुम मुझसे चुदवा लो। मैं तुम्हें जवानी का पूरा मज़ा दूँगा। मैंने कहा, तुम्हारे भैया को पता चलेगा तो वो क्या कहेंगे। वो बोला, कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि वो जानते हैं कि उनका लंड छोटा है और वो किसी औरत को पूरा मज़ा नहीं दे सकते। मैंने कहा, अच्छा देखा जाएगा। अब तुम जाओ नहा लो।

मैं नाश्ता बनाती हूँ। नीरव नहाने चला गया और मैं किचन में नाश्ता बनाने चली गई। नहाने के बाद नीरव ने नाश्ता किया और कॉलेज चला गया। उस दिन जब मैं रात में सोने के लिए अपने रूम में गई तो नीरज जाग रहे थे। मैं जैसे ही बेड पर उनके पास बैठी तो उन्होंने पूछा, कैसा लगा नीरव का लंड।

मैंने कहा, क्या मतलब है तुम्हारा। वो बोले, शादी से पहले मैं ही नीरव को जगाया करता था। अक्सर उसकी लुंगी खुलकर इधर-उधर हो जाती थी और उसका लंड दिखाई देता था। अब तो तुम ही नीरव को जगाती हो। मैं समझता हूँ कि तुमने अब तक नीरव का लंड देख लिया होगा। इसीलिए मैं पूछ रहा हूँ कि नीरव का लंड तुम्हें पसंद आया या नहीं।

मैंने शर्माते हुए कहा, आज जब मैं नीरव को जगाने गई थी तो उसकी लुंगी खुलकर बेड के किनारे पड़ी थी तभी मैंने उसका लंड देखा था। उसका लंड तो बहुत ज्यादा लंबा और मोटा है। उसकी बीवी को जवानी का भरपूर मज़ा मिलेगा। मेरी किस्मत में तो जवानी का मज़ा लिखा ही नहीं है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो बोले, मैं जानता हूँ कि मैं तुम्हें पूरा मज़ा नहीं दे सकता क्योंकि मेरा लंड तो किसी छोटे लड़के की तरह है। अगर तुम चाहो तो नीरव से चुदवाकर जवानी का पूरा मज़ा ले लो। मुझे जरा सा भी एतनीरज नहीं है और न ही मैं तुम्हें मना करूँगा। इस तरह घर की बात घर में ही रह जाएगी। किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा।

मैंने कहा, तुम नशे में तो नहीं हो। वो बोले, मैं पूरे होश में हूँ। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से तुम सारी जिंदगी जवानी का मज़ा न ले पाओ। तुम नीरव से चुदवाकर जवानी का पूरा उठाओ। मेरा मन तो पहले से ही नीरव से चुदवाने को हो रहा था। अब तो मुझे अपने पति से इजाजत भी मिल गई।

मैं बहुत खुश हो गई। मैंने कहा, ठीक है, देखा जाएगा। वो बोले, देखा नहीं जाएगा, तुम उससे कल ही चुदवा लो। कल उसे कॉलेज मत जाने देना और सारा दिन खूब जमकर चुदवाना और मज़ा लेना। मैंने कहा, ठीक है। मैं कल नीरव से चुदवाने की कोशिश करूँगी। उसके बाद हम सो गए।

अगले दिन नीरज के ऑफिस चले जाने के बाद मैं नहाने चली गई। नहाने के बाद मैंने अंदर कुछ भी नहीं पहना। मैंने केवल टॉवल को अपने बदन पर लपेट लिया क्योंकि आज मुझे नीरव से चुदवाना था। उसके बाद मैं बाथरूम से बाहर आ गई। नीरव अभी सो रहा था। मेरे मन में अभी भी उसके लंड का खयाल बार-बार आ रहा था।

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मैं उसके लंड को बार-बार देखना चाहती थी। मैं उसके रूम में पहुँची तो नीरव सो रहा था। आज उसकी लुंगी खुलकर बेड के नीचे ज़मीन पर पड़ी थी। उसका लंड एकदम खड़ा था। मैंने उसकी लुंगी उठाकर ड्रेसिंग टेबल पर रख दी। उसके बाद मैं नीरव के बगल में बैठ गई और उसके लंड को देखने लगी।

धीरे-धीरे मुझे जोश आने लगा और मेरी आँखें गुलाबी सी होने लगी। मेरा मन कर रहा था कि मैं उसके लंड को पकड़ लूँ लेकिन मेरे मन में खयाल आया कि नीरव क्या सोचेगा। कहीं वो बुरा न मान जाए। मैं बहुत देर तक उसके लंड को देखती रही। जोश के मारे मेरी चूत गीली होने लगी।

मुझसे और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उसके लंड को पकड़ लिया। नीरव फिर भी नहीं उठा तो मैं उसका लंड सहलाने लगी। 2 मिनट में ही नीरव उठ गया। उसने मुझे अपना लंड सहलाते हुए देखा तो बोला, लगता है कि आज चुदवाने का इरादा है। मैंने कहा, कुछ ऐसा ही समझ लो। वो बोला, फिर आ जाओ।

इतना कहकर नीरव ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मैं जोश में आ चुकी थी इसलिए कुछ भी नहीं बोल पाई। उसके लंड को हाथ लगाने से मेरे सारे बदन में आग सी लगने लगी थी। नीरव ने मेरे होंठों को चूमते हुए कहा, और तेजी से सहलाओ। मैं चुपचाप उसके लंड को तेजी से सहलाने लगी।

मैं उसका लंड सहलाती रही और वो मेरे होंठों को चूमता रहा। थोड़ी ही देर में उसका लंड एकदम टाइट हो गया। उसके लंड का सुपाड़ा बहुत ही मोटा था और एकदम गुलाबी सा दिख रहा था। मैंने अपनी उंगली उसके लंड के सुपाड़े पर फिरानी शुरू कर दी तो नीरव आहें भरते हुए बोला, ओह भाभी, बहुत मज़ा आ रहा है।

नीरव जोश के मारे पागल सा हुआ जा रहा था। उसने मेरे बदन पर से टॉवल खींचकर फेंक दिया तो मैं एकदम नंगी हो गई। मैंने शर्म से अपनी आँखें बंद कर ली। उसने मेरे निप्पल्स को मसलना शुरू कर दिया। मैं जोश से पागल सी होने लगी। मेरी चूत और ज्यादा गीली हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

नीरव ने मेरा चेहरा अपने लंड की तरफ करते हुए कहा, देखो भाभी, तुम्हारे सहलाने से ये पूरे जोश में आ गया है। मैंने अपनी आँखें खोल दी। वो बोला, इसे अपने मुँह में ले लो। उसने मेरा सिर पकड़कर अपने लंड की तरफ खींच लिया तो उसके लंड का सुपाड़ा मेरे मुँह से सट गया। उसने कहा, चूसो न इसे। मैंने उसके लंड के सुपाड़े को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

मैं बहुत देर तक उसके लंड को चूसती रही और वो एक हाथ से मेरा सिर सहलाता रहा और दूसरे हाथ से मेरे बूब्स को मसलता रहा। थोड़ी देर बाद उसके लंड का जूस मेरे मुँह में निकलने लगा। मैंने अभी तक नीरज के लंड के जूस का स्वाद नहीं लिया था इसलिए मुझे उसके लंड के जूस का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था।

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मैं उसके लंड का सारा जूस निगल गई। नीरव बहुत खुश हो गया और बोला, आज तो मज़ा आ गया। चुदवाओगी। मैंने कहा, नहीं। वो बोला, क्यों। अभी तो कह रही थी कि कुछ ऐसा ही समझ लो। अब कह रही हो, नहीं। मैंने कहा, तुम्हारा बहुत बड़ा है। दर्द बहुत होगा। वो बोला, तो क्या हुआ, मज़ा भी तो आएगा।

इतना कहकर उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी चूत को सहलाने लगा। मेरे सारे बदन में बिजली सी दौड़ने लगी। उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैंने भी जोश के मारे उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद नीरव ने एक उंगली मेरी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा तो मुझे खूब मज़ा आने लगा। मैंने भी जोश के मारे अपना चूतड़ उठाना शुरू कर दिया।

थोड़ी ही देर बाद मुझे लगा कि मेरी चूत से कुछ निकलने वाला है। मैंने शर्माते हुए नीरव से कहा, अपनी उंगली बाहर निकाल लो। वो बोला, क्यों, अच्छा नहीं लग रहा है। मैंने कहा, बहुत अच्छा लग रहा है। लेकिन मुझे लग रहा है कि मेरी चूत से कुछ निकलने वाला है। वो बोला, ये तो बहुत अच्छी बात है।

जैसे मेरे लंड से जूस निकला था उसी तरह तुम्हारी चूत से भी जूस निकलेगा। मैं नहीं जानती थी कि औरत की चूत से भी जूस निकलता है क्योंकि आज तक मेरी चूत का जूस कभी निकला ही नहीं था। इतना कहकर नीरव उठा और मेरे ऊपर ६९ की पोजीशन में हो गया। उसने अपनी जीभ मेरी क्लिट पर फिराते हुए मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

मेरे सारे बदन में सनसनी सी होने लगी। मैंने नीरव का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं एक हाथ से नीरव का सिर अपनी चूत पर दबाने लगी तो वो मेरी चूत को और ज्यादा तेजी के साथ चाटने लगा। मैं और ज्यादा जोश में आ गई। मैंने नीरव का लंड तेजी के साथ चूसना शुरू कर दिया।

अब तक मैं एकदम बेकाबू हो चुकी थी और चाहती थी कि नीरव मुझे चोद दे। तभी मेरी चूत से कुछ गर्म-गर्म सा निकलने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। नीरव ने मेरी चूत का सारा का सारा जूस चाट लिया। नीरव का लंड भी फिर से खड़ा हो चुका था। मेरी चूत का सारा जूस चाट लेने के बाद नीरव मेरे पैरों के बीच आ गया।

उसने मेरे दोनों पैरों को फैलाकर अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के बीच रख दिया। उसके बाद उसने मेरे दोनों बूब्स को मसलते हुए अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। मेरे सारे बदन में गुदगुदी सी होने लगी और जोश में आकर मैं सिसकारियाँ भरने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

थोड़ी ही देर में उसका लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। तभी उसने एक धक्का लगा दिया। दर्द के मारे मेरे मुँह से चीख निकल गई। उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में घुस गया था। मुझे लग रहा था कि किसी ने गर्म लोहे को बल्ल मेरी चूत में घुसेड़ दिया हो। लेकिन मैंने नीरव को बिल्कुल भी मना नहीं किया क्योंकि मैं पूरे जोश में आ चुकी थी और नीरव का पूरा लंड अपनी चूत के अंदर लेना चाहती थी।

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तभी उसने एक जोर का धक्का और लगा दिया। दर्द के मारे मेरे मुँह से जोर की चीख निकली और मेरी आँखों में आँसू आ गए। लग रहा था कि जैसे कोई गर्म लोहा मेरी चूत को चीरते हुए अंदर घुस गया हो। मैंने कहा, बाहर निकाल लो अपना लंड, बहुत दर्द हो रहा है।

उसने कहा, थोड़ा बर्दाश्त करो, फिर खूब मज़ा आएगा। उसका लंड मेरी चूत में 3 इंच तक घुस चुका था। तभी उसने एक धक्का और लगाया। मैं दर्द से तड़प उठी। लग रहा था कि कोई मेरी चूत को बुरी तरह से फैला रहा हो। मेरी चूत उसकी सीमा से बहुत ज्यादा फैल चुकी थी।

उसका लंड 4 इंच तक मेरी चूत में घुस चुका था। मैंने कहा, नीरव, अब रहने दो, बहुत दर्द हो रहा है। तुम इतना लंड ही डालकर मुझे चोद दो। बाकी का लंड बाद में घुसा देना। वो बोला, बाद में क्यों, क्या तुम मेरा पूरा लंड अपनी चूत में नहीं लेना चाहती। मैंने कहा, लेना चाहती हूँ। वो बोला, तो फिर पूरा अंदर लो।

इतना कहने के बाद उसने पूरी ताकत से एक जोर का धक्का और मारा। दर्द के मारे मैं तड़प उठी और मेरी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा। उसका लंड मेरी चूत में ५ इंच तक घुस गया था। मैं रोने लगी। वो बोला, रो क्यों रही हो। मैंने कहा, बहुत दर्द हो रहा है। मुझसे ये दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा है। मेरी चूत फट जाएगी।

तभी कॉलबेल बजी। हम दोनों घबरा गए। नीरव बोला, पता नहीं कौन आ गया इस समय। मैंने कहा, अब तो रहने दो और जा कर देखो कि कौन आया है। वो बोला, जाता हूँ, पहले मैं पूरा लंड तो घुसा दूँ। मैंने कहा, बाद में घुसा देना। वो बोला, नहीं, मैं अभी घुसाऊँगा। तुम अपने होंठों को जोर से जकड़ लो जिससे तुम्हारे मुँह से चीख न निकले। मैंने अपने होंठों को जोर से जकड़ लिया।

उसने मेरी कमर को पकड़कर बहुत ही जोर का धक्का लगा दिया। मैं मछली की तरह तड़पने लगी। मुझे लग रहा था कि मेरी चूत फट जाएगी। मेरे मुँह से चीख निकलने ही वाली थी कि नीरव ने अपने हाथ से मेरा मुँह दबा दिया। उसके बाद उसने पूरी ताकत के साथ 2 धक्के और लगा दिए। मेरे मुँह से केवल गू गू की आवाज ही निकल पाई और उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।

मैं दर्द के मारे तड़प रही थी और मेरा सारा बदन पसीने से नहा गया था। मेरे पैर थर-थर काँप रहे थे। मेरा दिल बहुत तेजी के साथ धड़कने लगा था और मेरी साँसें बहुत तेज चलने लगी थीं। लग रहा था कि मेरा दिल अभी मेरे मुँह के रास्ते बाहर आ जाएगा।

जरा सा रुकने के बाद नीरव ने एक झटके से अपना पूरा का पूरा लंड बाहर खींच लिया। मुझे लगा कि मेरी चूत भी उसके लंड के साथ ही बाहर आ जाएगी। फटाक की आवाज के साथ उसका लंड मेरी चूत से बाहर आ गया। उसने मुझे अपना लंड दिखाते हुए कहा, देखो भाभी, तुम्हारी कुंवारी चूत की निशानी मेरे लंड पर लगी हुई है। मैंने देखा कि उसके लंड पर ढेर सारा खून लगा हुआ था।

तभी उसने अपने लंड के सुपाड़े को फिर से मेरी चूत के मुँह पर रखा और पूरी ताकत के साथ जोर का धक्का लगाते हुए अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसाने की कोशिश की। लेकिन एक धक्के में वो अपना पूरा लंड मेरी चूत में नहीं घुसा पाया। उसने 2 धक्के और लगाए तब कहीं जाकर उसका लंड मेरी चूत में पूरा घुस पाया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मैं दर्द से तड़पते हुए चीखने लगी लेकिन नीरव कुछ सुन ही नहीं रहा था। पूरा लंड घुसा देने के बाद उसने फिर से एक ही झटके में अपना पूरा लंड बाहर निकाल लिया। तभी फिर से कॉलबेल बजी। मैंने कहा, पहले जा कर देखो तो सही कि कौन है। वो बोला, अभी जाता हूँ। उसने फिर से 2 धक्के लगाए और अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

पूरा लंड मेरी चूत में घुसाने के बाद उसने एक ही झटके से अपना पूरा का पूरा लंड बाहर खींच लिया। ऐसा उसने 3-4 बार किया। उसके बाद वो हट गया। मैं उठना चाहती थी लेकिन दर्द के मारे मैं उठ नहीं पा रही थी। मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा था। मैं सोचने लगी कि अभी तो उसने केवल अपना पूरा लंड ही मेरी चूत में घुसाया है।

जब वो अपना पूरा लंड घुसाते हुए मेरी चुदाई करेगा तब मेरा क्या हाल होगा। मैं तो मर ही जाऊँगी। नीरव ने लुंगी पहन ली और कहा, तुम बाथरूम में चली जाओ। मैं देखता हूँ कौन आया है। मैंने कहा, दर्द के मारे मेरा तो बुरा हाल है। मैं उठ ही नहीं पा रही हूँ और तुम कह रहे हो कि बाथरूम में चली जाओ।

वो बोला, फिर तुम चादर ओढ़कर लेटी रहो। मैं जा कर देखता हूँ कि कौन आया है। मैंने चादर ओढ़ ली। नीरव दरवाजा खोलने चला गया। थोड़ी ही देर में नीरव एक औरत के साथ मेरे पास आया। वो औरत बहुत ही खूबसूरत थी। मैंने पूछा, कौन है ये। वो बोला, ये निशा है।

निशा ने नीरव से पूछा, ये तो तुम्हारी भाभी है न। नीरव ने कहा, हाँ। वो बोली, ये चादर ओढ़कर क्यों लेटी हुई हैं। तबीयत तो ठीक है इनकी। नीरव बोला, मैं इनकी तबीयत ही ठीक कर रहा था कि तुम आ गई। मैंने भाभी से बाथरूम में चले जाने को कहा लेकिन ये खड़ी ही नहीं हो पा रही थी। इसलिए इन्होंने चादर ओढ़ ली है।

इतना कहकर नीरव ने मेरे ऊपर से चादर हटा दी। निशा मेरी हालत देखकर हँसने लगी। नीरव ने कहा, हँस क्यों रही हो। तुम्हारी हालत तो इससे भी ज्यादा खराब हो गई थी। वो बोली, क्या तुमने अपनी भाभी को आज पहली बार चोदा है। नीरव ने कहा, अभी चोदा कहाँ है। अभी तो मैंने केवल अपना पूरा लंड ही इनकी चूत में घुसाया था कि तुम आ गई।

निशा ने हँसते हुए कहा, “अरे वाह नीरव, भाभी को तो अभी शुरुआत में ही छोड़ दिया। अभी तो असली मज़ा बाकी है।” मैं चादर से खुद को ढकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मेरी हालत देखकर दोनों ही हँस रहे थे। मेरी चूत में अभी भी जलन हो रही थी, खून की वजह से चादर पर भी हल्का सा लाल निशान पड़ गया था। मैं शर्म और दर्द दोनों से लाल हो रही थी।

नीरव ने निशा की तरफ देखा और बोला, “तू आ गई तो अच्छा हुआ। भाभी को अकेले में समझ नहीं आ रहा था कि इतना बड़ा लंड कैसे हैंडल करना है। तू तो एक्सपर्ट है इस मामले में।” निशा ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। “भाभी, डरो मत। पहली बार सबको दर्द होता है जब इतना मोटा और लंबा लंड अंदर जाता है। मैंने भी नीरव का पहली बार लिया था तब तो रो-रोकर हालत खराब हो गई थी। लेकिन अब तो आदत पड़ गई है। मज़ा भी बहुत आता है।”

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मैं चुपचाप सुन रही थी। मेरे मन में एक अजीब सी उलझन थी। नीरज ने खुद इजाजत दी थी, नीरव ने इतनी आसानी से मुझे चोदा था, और अब ये निशा भी यहाँ थी। लग रहा था जैसे ये सब पहले से प्लान किया हुआ हो। निशा मेरे पास आई और बेड पर बैठ गई। उसने धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखा और कहा, “भाभी, रिलैक्स करो। मैं तुम्हें बताती हूँ कैसे मज़ा लिया जाता है। नीरव थोड़ा जल्दबाज़ है, वो सीधे धक्के मारने लगता है। लेकिन पहले चूत को तैयार करना पड़ता है।”

उसने नीरव को इशारा किया। नीरव मुस्कुराया और मेरे पैर फिर से थोड़े फैलाए। निशा ने अपना हाथ मेरी चूत पर रख दिया। उसकी उँगलियाँ नरम थीं। वो धीरे-धीरे मेरी चूत के होंठों को सहलाने लगी। दर्द अभी भी था, लेकिन उसकी उँगलियों से एक अजीब सा सुकून मिल रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

“देखो भाभी,” निशा बोली, “अभी सूजी हुई है, लेकिन थोड़ी देर में ये खुद खुलने लगेगी।” उसने अपनी एक उंगली धीरे से अंदर डाली। मैं सिसकारी भर उठी। दर्द कम हो रहा था और जगह-जगह गुदगुदी सी होने लगी। नीरव पास आया और मेरे बूब्स को सहलाने लगा। निशा ने दूसरी उंगली भी डाल दी और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगी। मेरी साँसें तेज़ हो गईं। अब दर्द की जगह एक गहरी चाहत जाग रही थी।

निशा ने नीरव से कहा, “अब तू धीरे-धीरे ट्राई कर। पहले सुपाड़ा ही अंदर डाल।”

नीरव ने अपना लंड फिर से मेरी चूत पर रखा। इस बार वो बहुत धीरे से दबाव डाल रहा था। सुपाड़ा अंदर गया तो मैंने आँखें बंद कर लीं। दर्द था, लेकिन पहले जितना नहीं। निशा मेरी क्लिट को सहला रही थी जिससे दर्द सहन करना आसान हो रहा था। धीरे-धीरे नीरव ने आधा लंड अंदर कर लिया। मैं सिसकारियाँ भर रही थी, लेकिन अब वो सिसकारियाँ दर्द की नहीं, मज़े की थीं।

निशा ने मेरे कान में कहा, “अब बोलो भाभी, मज़ा आ रहा है न?”

मैंने हल्के से सिर हिलाया। “हाँ… बहुत…”

नीरव ने अब रिदम बनाना शुरू किया। धीमे-धीमे धक्के। हर धक्के के साथ उसका लंड और गहराई तक जा रहा था। मेरी चूत अब उसकी आदत डाल रही थी। निशा मेरे होंठ चूम रही थी और उसके हाथ मेरे बूब्स पर थे। कुछ मिनट बाद नीरव ने स्पीड बढ़ाई। अब उसके धक्के जोरदार हो गए थे। मेरी चूत पूरी तरह से उसका लंड निगल रही थी। मैं जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थी। “आह्ह… नीरव… और जोर से… आह्ह…”

निशा हँसी, “देखा नीरव, अब भाभी भी बोल रही हैं।”

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नीरव ने मेरी कमर पकड़ी और तेज़-तेज़ चोदने लगा। उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था। मैंने अपनी टाँगें उसके कमर पर लपेट लीं। पूरा बदन काँप रहा था। अचानक मेरी चूत से एक तेज़ झटका आया। मैं चीख पड़ी और झड़ गई। मेरी चूत से गरम-गरम रस निकला। नीरव रुका नहीं। वो और जोर से धक्के मारने लगा। कुछ ही देर में वो भी कराहते हुए झड़ गया। उसका गरम वीर्य मेरी चूत के अंदर भर गया। हम तीनों कुछ देर तक हाँफते रहे। निशा ने मेरे माथे पर किस किया और बोली, “अब समझ आई न जवानी का असली मज़ा?”

मैं मुस्कुराई। “हाँ… बहुत अच्छा लगा।”

नीरव बोला, “अब से रोज़ ऐसा ही होगा भाभी। नीरज भैया को भी पता है, वो खुश हैं। और निशा भी कभी-कभी शामिल हो जाएगी।”

मैंने दोनों की तरफ देखा। मेरे मन में अब कोई शर्म नहीं थी। बस एक गहरी तृप्ति थी। उस दिन के बाद मेरी ज़िंदगी बदल गई। नीरज ऑफिस से आते तो मुझे खुश देखकर मुस्कुराते। नीरव कॉलेज से लौटता तो हम तीनों (कभी-कभी निशा भी) मिलकर खूब मज़े करते। नीरज कभी-कभी देखते भी थे, लेकिन उन्हें कोई एतराज़ नहीं था। वो कहते, “बस तुम खुश रहो, यही मेरे लिए काफी है।” और इस तरह मेरी वो अधूरी जवानी पूरी हो गई। नीरव के उस 8 इंच के लंड ने मुझे वो सुख दिया जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

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