Chudasi Maa Pahlwan Beta Sex
ये उन दिनो की बात है जब मै नया नया जवान हुआ था मेरा शरीर मर्द जैसा बन गया था चौड़ी छाती मजबूत बाहे तगड़ी बॉडी बनाए हुए था, तब मेरे उपर ब्रह्मचर्य का भूत सवार था जहाँ बाकि के मेरे दोस्त लोग गंदे विचार से दूषित हो रहे थे दारू के नशे मे डूब रहे थे वही मै घंटो अखाड़े मे कुश्ती करता, दूध धी खाता और शरीर को बनाने पर ध्यान देता. Chudasi Maa Pahlwan Beta Sex
मुझे मेरे कुश्ती के गुरू जी हमेशा सिखाते थे तुम्हारा वीर्य तुम्हारे शरीर का मणि है, जैसे एक साप अपनी मणि के त्याग देने से मर जाता है, उसी प्रकार एक मर्द जब अपने वीर्य का त्याग करता है तो समझो मर गया, इसलिए अपने मणि को हर समय बचा कर रखना चाहिए.
मै गुरू जी के बताए नियम का हर समय पालन करता था, लड़की और स्त्री से दूर रहता अपना ध्यान हमेशा कुश्ती सीखने पढ़ाई करने पर लगाता। सब कुछ सही चल रहा था पर एक दिन एक गड़बड़ हो गया मै उस दिन दोपहर को अखाड़े से घर खाना खाने गया जब घर पहुँचा तो देखा घर का दरवाजा खुला था.
मै बिना कुछ बोले अंदर चला गया घर मे मुझे कोई नही दिख रहा था, तो मै अपनी माँ को आवाज दे के बुलाते हुए हर कमरे मे देख रहा था और जैसे ही मै उनके कमरे मे पहुँचा देखा माँ पंलग पर सो रही थी उनकी साड़ी जाध तक उठ हुई थी छाति पर भी पल्लू नही था, वह दृश्य मुझे बहुत कामूक सा लगा.
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मेरी नजर कभी माँ के गदराई गोरी जाध पर जा रही थी तो कभी सासो के खिंचने और छोड़ने से उपर नीचे होती, छाती पर मै उस दिन से पहले वैसा नजारा कभी नही देखा था. माँ के नंगे जाध और ब्लाउज मे कैद चूची को देखकर, मेरे लण्ड मे आग लग गया ना चाहते हुए मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो गया अभी मै उनके जिस्म को देखकर गर्म हो रहा था.
तभी माँ की नींद खुल गई और वह मुझे कमरे मे अपने बदन को घूरते हुए देखी, तो झट से उठी और अपने नंगे हुए बदन को ढकी मेरी नजर माँ से मिली वह मुझे देख रही थी, हम दोनो एक दुसरे को कुछ देर देखते रहे फिर मै कमरे से बाहर आ गया, तो वह भी मेरे पीछे ही कमरे से बाहर आयी.
और बोली वो मुझे थोड़ा आँख लग गया था, तुम बैठो खाना लेकर आती हूँ, और वह रसोई के तरफ जाने लगी मेरी नजर जाते हुए उनके उपर ही टिका हुआ था. मुझे माँ का बदन कामूक लगा उनकी चाल भी गजब की थी माँ ने उस दिन जो ब्लाउज पहन रखी थी.
उसमे उनका बदन खिल रहा था उनकी कसी हुई चूची चूची का ब्लाउज से बाहर आए क्लीवेज नंगी पीठ और सबसे कामूक मुझे तब लगा, जब माँ खाना लेकर के आयी तब मेरी नजरे उनके छाति पर चला गया तो देखा उनकी निप्पल खड़े होकर ब्लाउज के बाहर उभर के साफ दिख रहे थे मेरे लिए तो वह सब नया था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मै जल्दी से खाना खाया और अखाड़े के तरफ भागा और आकर खूब कुश्ती किया ताकि माँ के बदन को अपने जहन से निकाल दू. लेकिन मै जितना उनके जाध चूची और ब्लाउज मे खड़े निप्पल से ध्यान हटाता वह उतना ही मेरे सामने आकर दिखने लगती मैने तो यहाँ तक सोच लिया था.
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अब माँ को देखूंगा भी नही बल्कि घर ही नही जाऊँगा, पर होनी को कुछ और ही मंजूर था मै उस घटना के बाद घर बहुत कम जाने लगा, जाता भी तो बाहर से आवाज देकर घर मे घूसता, ऐसा कुछ दिन चला कुछ नही हुआ मै घर जाता तब भी माँ को सीधे नजर नही देखता.
पर एक दिन मौसम खराब था मै घर गया तो अचानक बारिश शुरू हो गयी घर पर सिर्फ माँ ही थ मेरी दादी और मेरे भाई बहन सब बगीचे मे गये हुए थे, आम चुनने के लिए वह हर रोज दोपहर को वही चले जाते थे तो जब मै घर पहुंचा तो बारिश होने लगी.
माँ कपड़े उठा रही थी वो मुझे देखते ही बोली, अरे अभय आओ थोड़ा मदद करो देखो सब ऐसे ही पड़ा हुआ है, और तेरी दादी और बच्चे बगीचे मे चले गये है तो मै भी माँ की मदद के लिए दौड़ा, माँ बारिश मे आधा भीग गयी थी उनके कपड़े उनके बदन से चिपक गये थे.
मै उनके बदन को ही घूर रहा था जो काफी कामूक लग रहे थे, उन्होने मुझे अपने बदन को घूरता देखकर बोली क्या देख रहे हो, जल्दी से सब हटाओ नह तो भीग जाएगे, मुझे बाद मे देख लेना यह सुनकर मै शर्मिदा सा महसूस किया और जल्दी से छत पर डाले हुए गेंहू को उठाने लगा.
माँ मेरे आगे बैठकर गेंहू उठा रही थी, उनके साड़ी का पल्लू उनके सीने से बार बार सरक रहा था, जो मेरी नजरो को अपनी ओर ना चाहते हुए भी खींच रहा था माँ भी मुझे देख रही थी पर कुछ बोल नही उल्टा साड़ी के पल्लू की अपने कमर मे खोस के गेंहू उठाने मे लग गयी.
मै भी उनकी मदद कर रहा था, पर ध्यान उनकी ब्लाउज मे कैद टाइट चूची पर ही था, जो पानी से भीग जाने के कारण से बहुत कामूक लग रहे थे, जैसे तैसे करके हमने सब गेंहू उठा लिए पर हम पूरे भीग गये थे, अब मेरा पूरा ध्यान माँ के बदन पर था वह भी मुझे देखकर मुस्का रही थी.
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फिर मुझसे बोली चलो बारिश मे नहाते है तो मै मना किया तो वह बोली ठीक है तुम्हारी मर्जी यह बोलकर वह तेज बारिश के बीच छत पर चली गयी, और इधर उधर घूमने लगी मेरी नजर उनके बदन पर थी, जो पानी मे भीगने से उनके कपड़े पूरा उनके शरीर से चिपक गया था.
जिस कारण से मुझे उनके शरीर का पूरा नंगा जैसा दिख रहा था उनकी निप्पल ने भी ब्लाउज के बाहर अपने उभार दिखा दिये थे मुझसे ये सब देख के रहा नही जा रहा था उपर से वह भी मुझे बार बार ऐसे देख रही थी जैसे मुझसे कुछ कह रही हो मै उनको देखते हुए, खुले छत पर आ गया.
वह मुझे देखकर भागने लगी तो मै उनको पकड़े के लिए आगे बढ़ा तो उनकी साड़ी मेरे हाथ मे आ गयी. वह रूकी नही तो साड़ी खुल गयी पर वह कुछ नही बोली, बल्कि बोलने लगी हिम्मत है, तो पकड़ो मुझे और वह छत पर बने एक कमरे मे चली गयी जो छत तक ऊंचा बना हुआ है.
पर छत नही है मै उस कमरे मे गया तो देखा, मेरी माँ कमरे मे दिवाल के सहारे से खड़ी थी, मै जैसे कमरे मे गया मेरी नजर उनके उपर गयी वह तेज सासे ले रही थी हमारी नजरे एक दुसरे के आँखो मे देख रहा था व बिल्कुल शांत होकर मुझे देख रही, मै भी कुछ देर देखता रहा.
फिर पता नही मुझे क्या हुआ मै दौड़ते हुए उनके पास पहुंचा और उन्हे पकड़ के किश करने लगा वह मेरा पूरा साथ दे रही थी. हम एक दुसरे को पागल की तरह चुम रहे थे, बारिश भी पुरे दम से बरस रही थी मै माँ को चूमते हुए उनकी चूची को मसल रहा था.
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वो आहे भर रही थी और अपना हाथ मेरे पैट के उपर से लण्ड पर रख दी तो मै अलग हो गया बोला नही मेरा ब्रह्मचर्य टूट जाएगा, तो माँ बोली टूटने दो और माँ ने अपने पेटीकोट की डोरी मेरे सामने खींच दी पेटीकोट नीचे गिर गया, और मेरे सामने उनकी नंगी जाध टांग और झाटो से भरी बूर मेरे सामने थी.
मै आँखे फाड़े वह सीन देख रहा था, उधर माँ ने अब तक अपने ब्लाउज और ब्रा भी निकल के मेरे तरफ उछला दी और बोली, अब भी ब्रह्मचर्य का पालन करोगे माँ जैसी आकर्षक महिला का नंगा बदन देखकर कोई नामर्द नही छोड़े मै तो बूर के भूखा शिकारी था जो अपनी आग को दबाए हुए बैठा था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ का नंगा बदन देखकर मैने भी अपने कपड़े निकाले माँ मुस्काते हुए मेरे पास आयी मुझसे लिपट गयी फिर हम दोनो के नंग जिस्म एक हो गये बारिश तेजी से बरस रही थी और मै तेजी से अपनी ही माँ चोद रहा था, माँ मुझे देखकर कामूक प्रतिक्रिया दे रही थी जो मेरे जोश को बढ़ा रहा था.
मै उनको आधे घंटे चोदा और परास्त हो के माँ के उपर गिर गया, हम दोनो कुछ दूर अपनी सासे शांत होने का इंतजार किये जब हम पूरी तरह से शांत हो गये, तब माँ ने मुझे बोला चलो नीचे चलते है हम नंगे बदन ही नीचे आ गये, नीचे आते ही माँ फिर से मुझसे लिपट गयी, और मुझे चुमने लगी. उसके बाद मे फिर उनको उनके ही रूम मे बेड पर चोदने लगा.
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अभी हमारा हुआ भी नही था की बगीचे से दादी और मेरे भाई बहन आ गये माँ ने मुझे अपने उपर से जल्दी हटाया, और मुझे पंलग के नीचे जाने का बोलकर खुद जल्दी से जो मिला उससे अपने बदन को ढकी. वह तो शुक्र है, कोई रूम मे आया नही क्योकि वह लोग भी भीगे हुए थे तो आते ही कल पर नहाने चले गये तब तक माँ कपड़े पहन के बाहर चली गयी दादी और मेरे भाई बहन से बात करते हुए, वह मेरे कमरे मे गयी मेरे कपड़े लेकर आयी, और मुझे देकर चली गई मै भी कपड़ा पहना.
और चुपके से माँ के रूम से निकल के घर के पिछले दरवाजे से निकल के अखाड़े मे पहुंच गया मुझे उसके बाद तो माँ मुझे अपना गुलाम बना ली, जब वह मुझे अकेले देखती मेरे से लिपट जाती और चोदने के लिए बोलने लगती, वह मुझे रात मे कभी घर पर तो कभी खेत मे बुलाती थी, और खूब मन से चुदती थी उन्होने छः महीने मेरा पूरा रस चूस लिया. मुझे अखाड़े से निकाल दिया गया, क्योकि मुझसे एक छोटा बच्चा भी कुश्ती मे पटखनी दे देता था, इतना होने के बाद भी माँ ने मुझे छोड़ा नही वह अब भी मुझे अपने जिस्म के आग मे भून रही है वो मेरा रस चूस रही है।
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