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जेठानी ने जेठ जी से पेलवाया देवरानी को

अप्रैल 16, 2026 by hamari Leave a Comment

Jeth Bahu XXX Fuck

मेरा नाम शीतल है और मेरी उम्र 22 साल है मैं बिहार से हूं और बिहार सरकार में जॉब करती हूं। मेरे ही शादी राहुल नाम के एक इनकम टैक्स इंस्पेक्टर से बिहार में ही हुई है जो मुंबई में ड्यूटी करता है। ये कहानी मेरे और मेरे जेठ के बीच की है तो मैं अपने पति के बारे में ज्यादा नहीं लिखूंगी। Jeth Bahu XXX Fuck

मेरी सरकारी जॉब के बाद मेरी शादी हो गई और शादी की पहली रात ही मेरे पति ने मुझे छोड़ छोड़ कर मेरे अंदर ही सारा माल भर दिया जिससे मैं शादी की पहली रात पर ही शायद गर्व से रह गई होगी क्योंकि मुझे ठीक 9 महीने बाद बच्चा हो गया था। मेरे पति तीन भाई हैं, बड़े भाई का नाम अंशु है और उनकी पत्नी का नाम अंजलि है मेरे छोटे देवर का नाम समर है।

मेरे जेठ अंशु भी मेरे ही डिपार्टमेंट में ऑफिसर हैं। मेरी जेठानी भी बा कर जब ही करती थी पर प्रेगनेंसी के टाइम उसने जॉब छोड़ दी और हाउसवाइफ बन गई। मेरा छोटा देवर शायद बीटेक कर रहा था इंदौर में। मेटरनिटी लीव के दौरान में अपने मायके में ही थी, उसके बाद मेरे जेठ ने थोड़ी पर भी कर मेरा ट्रांसफर उन्होंने अपने ही जिले में कर दिया तो मैटरनिटी लीव के बाद सीधा में अपने जीत और अपनी जेठानी के साथ रहने चली गई।

दोनों का डिपार्टमेंट से ही था तो हम साथ में ही जाते और साथ में ही फ्लैट पर वापस आ जाते, जेठ जी ने दो कमरों का फ्लैट ले रखा था। जिस टाइम मैं वहां गई थी मेरा बच्चा 3 महीने का था और मेरी जेठानी का बच्चा 8 महीने का था। मैं और मेरे जेठ ऑफिस जाते तो मेरी जेठानी दोनों बच्चों को आराम से संभाल लेती थी, वह बहुत ही सुंदर और स्वभाव की अच्छी थी वह बहुत ही बढ़िया हाउसवाइफ बनना चाहती थी।

मेरे जेठ लंबे तगड़े सुंदर नौजवान थे मैं भी काफी सुंदर थी मैं पहले से ही थोड़ी छवि टाइप की थी और प्रेगनेंसी के बाद थोड़ी और मोटी हो गई थी। अब मैं अपने जेठ की कुछ कहानी बताती हूं। हमारे बिहार तरफ पति के बड़े भाई को भैया ही बुलाना पड़ता है पर मैं उन्हें साफ मना कर दिए थे के मैं तो भैया नहीं बुलाने वाली मैं या तो जेठ जी कहूंगी या जीजू कहूंगी तो मैं उन्हें जीजू ही कह कर बुलाती थी।

शादी के जस्ट बाद में जब मायके आई थी तो मेरे पति के साथ मेरे जेठ और मेरा देवर भी मेरे माइके के आए हुए थे मुझे ले जाने के लिए और मम्मी पापा ने उन सबको भी बुलाया था थोड़ा घूमने के लिए। जब मेरे पति जेठ और मेरा देवर रात का खाना खा रहे थे तो मैं और मेरी बड़ी बहन किचन से लाकर उन्हें खाना परोस रही थी।

मैं पूछी की और लेंगे। मैं उन सबके सामने से किचन के दरवाजे तक आई फिर मैं सुनी की सबसे पहले मेरे जेठ धीरे-धीरे हंसने लगे उसके बाद मेरे पति और मेरा देवर भी हंसने लगा। मैं दोबारा जाकर अपने पति से पूछी की जेठ जी और लेंगे , उसके बाद तीनों और जोर से हंसने लगे।

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मेरा पति बोला कि तुम्हारे जेठ जी ने अभी लिया है कहां है। मुझे पहले समझ ही नहीं आया कि वो लोग क्यों हंस रहे हैं। मैं किचन मे आई और दीदी को बोली की बो लोग़ हंस ही रहे हैं। दीदी भी थोड़ी हंसी फिर उसने मुझे समझाया कि वो लोग शायद तुम्हारी लेने वाली बात को लेकर हंस रहे हैं।

तब मैं समझी फिर मैं किचन से बाहर निकली। तो मेरे देवर ने मुझे छेढ़ने के लिए हंसते हुए बोला की भाभी हम भी थोड़ा लेंगे। मैं अपनी साड़ी का पल्लू अपने कमर में खोजते हुए उसे अपनी हाथों में कल्छूल दिखाई और उसे पीटने का इशारा की। होली के अगले दिन में मायके से अपने ससुराल आ गई थी.

मैं तीन-चार महीने प्रेग्नेंट थी उस टाइम, सभी मेरे ससुराल के लोग बोल रहे थे कि मेरे जेठ जी को रंग खेलना पसंद नहीं है होली में उन्हें किसी ने भी रंग लगाने की हिम्मत नहीं की थी। मैंने अपनी जेठानी अंजलि से पूछा तो उन्होंने बताया कि पिछले सल ससुराल में भी सालियों ने ही सिर्फ रंग उन्हें लगाया था.

उन्होंने किसी को नहीं लगाया था। पर इस साल होली में यहां है तो किसी की हिम्मत नहीं हुई उन्हें रंग लगाने की मैं ही बस थोड़ा सा लगाया था वह भी डरते डरते। तो मैं अपनी जेठानी से कहा कि मैं नहीं डरती होली निकल गया फिर भी मैं आज तो उन्हें लगाऊंगी ही।

बहुत सुबह गार्डन में अखबार लिए बैठे थे मैं पीछे से एक बाल्टी रंग घोलकर ले गई और उनके ऊपर डाल दी। उन्होंने पीछे मुड़कर गुस्से से देखा फिर मुझे देख कर कुछ नहीं बोले। मैं धीरे से हैप्पी होली बोलते हुए वहां से नौ दो ग्यारह हो ली। अब जैसा कि मैंने बताया मैं अपने जेठ और जेठानी के साथ रहने के लिए फ्लैट में चली गई।

मैं और जेठ जी 10:00 सुबह ऑफिस गाड़ी से चले जाते जब वह गरीब खुद चला रहे होते थे तो शुरू शुरू में तो मैं पीछे बैठी फिर धीरे-धीरे उनके साथ ही आगे बैठने लगी थी। शाम में हम कभी-कभी साथ में ही आ जाते, मैं हमेशा शाम 5:00 तक आ जाती अगर कोई जरूरी मीटिंग नहीं होती तो वह कभी-कभी मीटिंग कर 9:00 बजे भी आते थे।

मेरी जेठानी मेरे बच्चे को और अपने बच्चे को दिन भर संभाल लेती है उसके बाद मैं आ जाती। मुझे दूध खूब आता था क्योंकि एक तो मैं दिन में भी अपने बच्चों को दूध नहीं पिला पाती थी और रात में भी सही से वह नहीं पी पता था। तो सुबह ऑफिस जाने से पहले मैं अपना दूध अपनी चूचियों से उन्हें दबा दबा कर निकाल देती थी और गिलास में रख कर जाते थे ताकि अगर कभी काम पड़े तो दीदी उन्हें बच्चों को पिला सके।

मेरी जेठानी का बच्चा 8 महीने कहां हो गया था तो वह तो गाय का दूध भी पी लेता था मेरी जेठानी मेरे बच्चे को ही अपना सारा दूध पिलाती थी। सुबह दूध निकाल कर जाने के बावजूद भी मुझे इतना दूध आता था कि शाम को आते-आते मेरी ब्लाउज गीली होने लगती थी काम को ऑफिस से आते ही मै दोनों बच्चों को अपनी छतिया से लगा लेती थी और उन्हें एक साथ दूध पिलाने लगती थी।

मेरी जेठानी है देख कर मुझ पर हंसती थी की कैसे गाय की तरह दोनों थानों से पिला रही है बच्चों को मैं भी खुद को ऐसा करते देख खूब हंसती थी पर मुझे अच्छा भी लगता था। एक बार तो शाम को आते हुए सीडीओ पर ही मेरी चूंचियों से दूध टपकने लगा और मेरी ब्रा और ब्लाउज को गिला करने लगा।

मैं जल्दी से अपने जेठानी के कमरे में गई दोनों बच्चे वही लेते हुए थे मैं अपना ब्लाउज और ब्रा ऊपर कर दी और दोनों बच्चों के मुंह में अपने दोनों निप्पल दे दी मेरी जेठानी भी वहीं बैठे हुई थी। जेठ जी भी नीचे गाड़ी लगा सिद्ध कमरे में ही आ गए वह तो अच्छा हुआ मैंने अपने चूचियों पर अपनी साड़ी का पल्लू डाल रखा था नहीं तो वह मेरी दोनों नंगी चूचियां देख लेते।

पर उन्होंने दोनों बच्चों को मेरी चूचियों से दूध पीते हुए तो देख ही लिया। मैं शर्म के मारे अपने चेहरे को ढक ली। जेठानी ने उन्हें हंसते हुए टाटा और बोला कि ऐसे ही डायरेक्ट कमरे में नहीं आना चाहिए। वह भी शायद शर्मा कर बाहर चले गए। मैं और मेरी जेठानी दोनों हंस रही थी धीरे धीरे।

मैं जेठ के जी के सामने पल्लू तो अब करती भी नहीं थी। मेरे जेठ और जेठानी के बीच बहुत ही प्यार है, मेरे जेठ जी मेरी जेठानी को हमेशा खुद से पहले एक निवाला खिलाते हैं। और एक मेरा पति था एक तो दूर में रहता ही था पर घर भी होता था तो कभी नहीं खिलाता था।

मेरे पति ने जरूर मुंबई में अपनी गर्लफ्रेंड बना रखी होगी मैं उसे जब भी मुंबई आने को बोलती तो वह मुझे मना ही कर देता था। इतनी ज्यादा सैलरी होने के बाद भी उसने मुझे कभी भी पैसे नहीं दिए और हमेशा मुझसे ही पैसे लेता था और अपने बड़े भाई से भी पैसे मांग लेता था।

एक बार मैं अपनी जेठानी और जेठ से फाइनेंस की बातें कर रही थी त मेरे जेठ को जब पता चला कि वह मेरे भी पैसे ले लेता है और मेरे जेठ से भी पैसा लेता है तो मेरे जेठ ने कहा कि तुम अपने पैसे उससे मत दिया करो उन्होंने मुझे कहा कि मैं अपने पैसे अपने मायके में दे द और खुद रखो मेरे जेठ अपने सारी सैलरी मेरी जेठानी को देते हैं।

उसके बाद में अपनी कुछ सैलरी अपने मायके देने लगी और बाकी की कुछ सैलरी खुद के पास रख बाकि सैलरी अपनी जेठानी को सेविंग्स के लिए दे देने लगी मेरे पति जब भी मुझसे अब पैसे मांगता तो मैं उसे कह देती कि खत्म हो गए। वह पक्का लड़कियों पर खूब पैसे उड़ता था मुंबई में।

जैसा कि मैंने बताया कि मैं ऑफिस जाने से पहले अपना दूध गिलास में निकाल कर जाती थी तो एक बार मैं नहाने से पहले अपना दूध गिलास में निकाल कर रख दी ,उसके बाद जब मैं नहा कर तैयार होकर हाल में आई तो देखी कि मेरे जेठ जी वही ग्लास वाला दूध पी रहे हैं।

मैं किचन मे अपनी जेठानी की हेल्प करने गई और उन्हें धीरे से बताई कि जेठ जी बच्चे वाला दूध पी गए हैं। इतने में जेठ जी दूध का गिलास खत्म कर उसे रखने के लिए किचन में आ गए। मेरी जेठानी ने उन्हें हंसते और प्यार से डांटे हुए कहा की कैसा दूध पी रहे थे सबह-सुबह। जेठ जी बोले की रात वाला दूध होगा तो मैं पी गया।

रात वाला दूध नहीं था वह बच्चे का दूध था मेरी जेठानी ने हंसते हुए उन्हें बोला।

तो क्या हुआ और भी तो दूध है ना घर में दूध वाला दे तो गया है ना वह पी लेगा। जेठ जी बोले और किचन से चले गए।

मैं और मेरे जेठानी हंस रही थी। जेठ जी को पता नहीं चला होगा की वो मेरा दूध था वह रात का गाय का दूध समझकर उसे पी गए। प्रेगनेंसी के बाद से ही मेरे पेट और कमर में थोड़ा-थोड़ा दर्द रहता था जिससे मैं अपनी जेठानी को बताई तो उन्होंने नहीं कहा की मालिश करवा लेना कभी तो एक शाम मै 5:00 बजे आई तो मेरी जेठानी ने एक मालिश वाली को बोल कर रखा था.

वह 7:00 के करीब आई थी और कुछ आधे घंटे मेरी पेट और कमर की मालिश कि उसने और जाने लगी। मालिश वाली जब मुझे मालिश करो जा रही थी तभी जेठ जी आ गए। उन्होंने मेरी जेठानी से पूछा कि कौन थी ये। तू मेरी जेठानी ने कहा कि शीतल को थोड़ा पीठ में दर्द था तो मालिश वाली को बुलाई थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मालिश की जरूरत थी तो मालिश वाली को बुला लिया ऐसे तो तुम लोग आगे प्लेबॉय भी मांगने लग जागी उन्होंने हंसते हुए कहा। मेरी जेठानी ने उन्हें तकिया से फेंक कर मारते हुए कहां की हां जरूरत पड़ेगी तो वह भी मंगवा लेंगे। कुछ देर बाद जब सभी एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे तो मेरे जेठ ने मेरी जेठानी से कहा के तुम्हें तो मालिश की जरूरत है ना या तुमने भी उससे करवा लिया।

नहीं मैंने नहीं करवाया है आपको ही करना पड़ेगा मेरी जेठानी हंसते हुए बोली।

आप सिर्फ दीदी की ही मालिश करते हैं या किसी और की भी कर सकते हैं मैं हंसते हुए पूछी।

कर तो सकता हूं पर फ्री में नहीं करूंगा जेठ जी ने हंसते हुए जवाब दिया।

अच्छा, तो मेरे लिए भी फ्री नहीं है, मै बोली।

फ्री में तो मैं तुम्हारी दीदी का भी नहीं करता, वह हंसते हुए बोले।

तो कितने पैसे लेंगे मुझसे। मैंने हंसते हुए पूछा।

जितना मन हो उतना दे देना वह हंसते हुए बोले।

दीदी कितना पैसा देती है मैं पूछी।

तुम्हारी दीदी पैसे नहीं देती है जेठ जी हंसते हुए बोले।

अभी तो आपने कहा कि मैं किसी की फ्री में नहीं करता और दीदी की मालिश फ्री में कर देते हो मैं हंसते हुए बोली।

पैसे नहीं देती इसका मतलब यह नहीं की कुछ नहीं देती है वह हंसते हुए बोले।

मेरी जेठानी ने उनका गल मजाक में खींचते हुए कहां के कुछ ज्यादा ही आज बोल रहे हो आप।

ऐसे ही हम मजाक की बातें करते रहे।

जेठ जी ने फिर बोला कि आगे से मालिश बाली को बुलाने की जरूरत नहीं है, अंजलि से ही करवा लेना तुम मालिश।

दीदी तो खुद दिन भर काम कर इतनी थकी हुई रहती हैं मैं उनसे मालिश कैसे करवाऊंगी आप कर सकते हो तो बोलो कितना चार्ज करोगे।

मैं अपने जेठ से हंसते हुए पूछी।

मेरे जेठ ने भी हंसते हुए कह दिया ठीक है जितना मन हो उतना दे देना।

उसके बाद खाना खाकर मैं और मेरी जेठानी किचन में गई तो आपस में बात करने लग मैंने अपनी जेठानी से कहा कि बढ़िया है आपकी मालिश जीजू ही कर देते हैं तो मेरी जेठानी ने कहा कि तेरा मन है तो तू भी करवा ले। तो कुछ देर बाद मैं अपने देश के ही कमरे में लेटी हुई थी मेरे जठ ने मेरे ऊपर एक चादर डाल दिया मैं पेट के बल लेट गई वह मेरी कंधे से कमर तक पहले धीरे-धीरे हाथों से दबाने लगे।

मैं उन्हें बोली के हाथों में दम नहीं है क्या तो वह जोर-जोर से मेरी कंधे से लेकर मेरी कमर तक चादर के ऊपर से ही दबाया। मेरी जेठानी भी वहीं पर बच्चों के साथ बैठी हुई थी और उन्हें सुला रहे थे। एक बार मेरे जेठ का हाथ मेरे नंगे कंधे पर लगा मुझे बहुत सेक्स चढ़ा उसे दिन जब वह मेरी कमर को कसकर नीचे दबाते तो मेरी बुर पूरे गद्दे में दब जाती मुझे बहुत सेक्स का अर्ज हो रहा था।

कुछ देर उन्होंने और दबाया उसके बाद मैं दोनों बच्चों को लेकर अपने कमरे में आ गई और सो गई मुझे पता था कि आज वह दोनों चुदाई* करेंगे इसलिए मैं दोनों बच्चों को ही लेकर आ गई थी। आठ दस दिन लगातार हर शाम मेरे जेठ ने मेरी पीठ और कमर दवाई। वह मेरी कमर से नीचे नहीं आते थे।

उसके बाद मैं ही मना कर दिया क्योंकि मुझे उसके बाद सेक्स की बहुत अर्ज उठती थी। एक बार सामने जब मैं ऑफिस से आई तो हाल में सोफे पर बैठकर अपने बच्चे को दूध पिलाने लगी मेरे जेठ भी वहीं सोफे पर बैठे हुए थे मेरी जेठानी वहां पर नहीं थी वह कमरे में सो रही थी।

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मैं अपने बच्चों को दूध पिला दे और उसे अपने जेठ के गोद में दे दी और उनके बेटे को अपने गोद में अल्लाह अपने दूसरे छाती का दूध उसे पिलाने लगी और मैं अपने सीने को पल्लू से ढके हुए भी थी। मैं डेट दी की और अच्छी की वह मेरे बेटे के होठों के ऊपर लगे दूध को अपनी उंगलियों से हटाया और अपनी उंगलियों को अपने मुंह में लेकर मेरे दूध को टेस्ट किया।

मैं यह देखकर हैरान परेशान हो गई और अपने मन में हंसते हुए दूसरी और मुंह घुमा ली ताकि उन्हें यह ना लगे कि मैं उन्हें ऐसा करते हुए देख लिया है। मेरे मन में अब अपने जेठ के प्रति अलग भाव आ गए थे आज मेरा दूध टेस्ट करते हुए मैं उन्हें देखी थी, मेरा दूध उन्हें शायद पसंद आया था।

और उन्होंने उसे जानबूझकर भी टेस्ट किया उनके उन्हें पता ही था कि बच्चों के मुंह पर मेरा ही दूध लगा है फिर भी उन्होंने उसे टेस्ट किया। तभी मेरे मन में एक विचार आया कि अपने जेठ के मुंह पर अगर मैं अपनी दूध की फुहारे उड़ा दूं तो कैसा दिखेगा यह सोचकर मैं मन ही मन हस्ती रही।

अब मैं कभी-कभी अपनी जेठानी को बिना बताए अपने जेठ के कॉफी या उनके दूध में अपने दूध की दो-चार बूंदे डाल देती थी। एक बार तो मेरे दूध बहुत ही ज्यादा निकल रहे थे और दोनों ही बच्चों का पेट भी भरा हुआ था तो मैं शाम में अपना दूध गिलास में निकाल दी। और रात में उसी गिलास में थोड़ा गाय का दूध मिलाकर जेठ जी को दे दी।

ऐसा करने में मुझे पता नहीं क्यों अंदर से बहुत खुशी होती थी। मेरे जेठ की आदत थी कि वह बहर से कुछ खाते नहीं थे पर उन्हें यह बहुत पसंद था कि कोई बाजार जाए तो उनके लिए कुछ ना कुछ खाने को लाइन मैं ससुराल में भी देखी थी कि जब भी कोई बाजार से आता तो उनके लिए कुछ ना कुछ जरूर लता उनका छोटा भाई उनकी मम्मी मेरा पति या मेरी जेठानी या मेरी बड़ी ननद कोई भी जाती तो उनके लिए कुछ ना कुछ खाने के लिए जरूर लाते। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब मैं भी अपने जेठ के लिए कुछ ना कुछ लाने लगी थी ऐसा करना मुझे अब अच्छा लगने लगा था मेरे जेठ कपड़े भी खुद अपने नहीं खरीदते थे मेरी जेठानी ही खरीदती थीं। एक बार मैं देखी कि मेरे जेठ के चड्डी में छेद है। मैं और मेरी जेठानी संडे को बाजार गई हुई थी तो मैं अपनी जेठानी को याद दिलाई कि जेठ जी के लिए भी कुछ ले लीजिए।

तो तो उन्होंने कुछ-कुछ उनके लिए टी शर्ट और शर्ट लिए चड्डी नहीं ली उन्होंने तो मैं ही चुपके से दो-चार चड्डी उनके साइज की ले ली। अब अगले दिन वह वही छेद वाले चड्डी पहन रहे थे तो मैं जल्दी से उनके हाथ से वह चड्डी छीन ली और उसके छेद को और बढ़ाते हुए चड्डी को फाड़ दी।

इससे पहले कि वह कुछ बोले मै उनके हाथ में दो-तीन नई चड्डी रख दी और किचन में भाग गई। एक बार हमारे जिले में कुछ मंत्री आने वाले थे तो मुझे और मेरे जेठ जी को और सारे सरकारी कर्मचारियों को उनके स्वागत के लिए दो दिन शहर के बड़े होटल में रुकना था और मैनेजमेंट देखना था।

मेरी जेठानी ने कहा की आप दोनों जाओ वैसे भी दो दिन की ही तो बात है। दो बच्चों को संभाल लेंगी। तो मैं और मेरे जेठ जी सुबह 7:00 बजे होटल के लिए निकल गए जो हमारे रूम से 30, किलोमीटर दूर था। होटल पहुंचकर सारे स्टाफ को पहले रूम अलाउट होना शुरू हुआ जिसे मुझे ही करना था तो जेठ जी ने कहा कि तुम किसी लेडी स्टाफ के साथ रूम शेयर कर लो क्योंकि रूम लिमिटेड थे और बाहर के भी गेस्ट बहुत सारे आ रहे थे।

तो मैं उनसे बोली की किसी और के साथ रूम शेयर करने से बेहतर तो यही होगा कि मैं आपके ही साथ रूम शेयर कर लूं। तो उन्होंने भी हां ठीक है बोल दिया। अब उस दिन मैंने बहुत ही ज्यादा काम किया सारे स्टाफ और आने वाले लोगों की लेडिस में सिक्योरिटी चेकिंग और उनका आईडी कार्ड तैयार करना सब कुछ मुझे ही देखना पड़ा क्योंकि सारी जिम्मेदारी सेफ्टी और सिक्योरिटी की मेरे जेठ को ही मिली हुई थी जिसे उन्होंने मुझे सौंप दिया था।

रात तक मैं इतनी थक गई मेरा शरीर दर्द कर रहा था और मेरी छतिया भी दर्द कर रही थी उनमें से काफी दूध निकाल कर मेरे ब्लाउज को जिला कर रही थी तो मैं अपनी छाती के दूध को निकाल कर एक होटल में डाल दी और जब रात 10:00 बजे मेरे जेठ जी कमरे में आए तो मैंने दो काफी बनाई और अपना सारा दूध अपने जेठ के कॉफि में मिलाकर चुपचाप उन्हें दे दी।

हम दोनों एक ही बेड पर सो गए मैं काफी थकी हुई थी तो मुझे जल्दी नींद आ गई। अगले दिन भी सुबह से ही हम दोनों जल्दी-जल्दी तैयार होकर कॉन्फ्रेंस के लिए निकल गए दो-तीन मीटिंग हुई बैक टू बैक और उसके बाद 2:00 बजे मंत्री जी आए। उसे दिन तू मुझे 1 मिनट भी फुर्सत नही मिली चैन से बैठने की।

दिन भर उस दिन मुझे किसी न किसी के लिए कुछ ना कुछ लिखना था किसी के लिए भाषण लिखना था तो किसी का कुछ मेरे हाथ तो जैसे काम ही नहीं कर रहे थे। शाम 6 बजे मुझे मेरी ब्लाउज में गीला गीला महसूस होने लगा मैं छूकर देखी तो मेरी ब्रा और ब्लाउज गीली हो चुकी थी मेरी दूध से।

मै वॉशरूम जाने में अपने सीने को अच्छी तो मेरी ब्लाउज पर गिल गिल धब्बे भी मेरी दूध के देखने लगे थे मैं सीधे अपने कमरे की ओर अपने पल्लू से अपने ब्लाउज को ढकते हुए जाने लगी। मैं अपने कमरे में पहुंचे अपनी चूचियों से अपना दूध निकालने की कोशिश करने लगी पर मेरे हाथ इतना दर्द कर रहे थे कि मैं उन्हें निकाल भी नहीं पा रही थी।

मैं बेड पर बैठकर अपनी दोनों चूचियों को अपने ब्लाउज के दो तीन बटन ऊपर से खोलकर बाहर निकाल दी थी और उन्हें दवा कर कप में निकालने की कोशिश कर रही थी। पर मेरे दोनों हाथ इतने दर्द कर रहे थे कि मैं उन्हें सही से दवा ही नहीं पा रही थी और दूध भी नहीं निकल पा रही थी पर दूध बूंद बूंद कर निकल मेरे कपड़े को गिला कर रहा था।

तभी कमरे का दरवाजा खुला मै पीछे मुड़कर हड़बड़ाते हुए देखी तो जेठ की दूसरी चाभी से दरवाजा खोल कमरे में आ गए थे मैं अपनी पल्लू अपने सीने पर डाली और दूसरी और मुंह कर अपने ब्लाउज में अपनी चूचियों को डालने लगी। अरे तुम यहां हो मैं तुम्हें कितना ढूंढ रहा था कितना फोन भी किया है फोन देखो अपना जेठ जी दरवाजे से अंदर आते हुए ही बोले।

मैं अपनी चूचियों को अच्छे से ब्लाउज में अंदर भी नहीं कर पाई थी कि वह मेरे पास आकर खड़े हो गए मैंने अपने सीने पर अच्छे से पल्लू डाल लिया। वह मेरा फोन साइलेंट में है मीटिंग के टाइम से ही मैं अपना फोन देखते हुए बोली। चलो तुम्हारा ही काम है सारे लेडिस स्टाफ की मीटिंग होगी कुछ महिला सशक्तिकरण की टीम आई हुई है। वह बोले।

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मैं नहीं आ सकती मुझे थोड़ी प्रॉब्लम है मैं धीरे से बोली।

क्या प्रॉब्लम है वह मेरे पास आकर खड़े होते हुए पूछे।

मेरा ब्रेस्ट बहुत दर्द कर रहा है दूध नहीं पिलाने की वजह से, मेरे कपड़े भी गंदे हो रहे हैं मैं धीरे से नज़रे नीचे की हुई बोली। तो कप लो और उन्हें निकाल दो कप में जैसा कि तुम हमेशा करती हो वह हंसते हुए बोले। वही कोशिश कर रही थी मैं पर मेरे हाथ काम नहीं कर रहे हैं मैं अपने दोनों हाथ उनकी और उठाते हुए बोली जो इतने थक चुके थे कि थर थरा रहे थे।

मैं कुछ मदद कर सकता हूं क्या वह बोले।

आप भी पाओगे क्या मैं अपनी नज़रें नीचे की हुई अपने होठों को अपने दांतों से काटते हुए बोली।

मैं मन ही मन हंस भी रही थी।

उन्होंने कुछ देर सोचा फिर बोला ठीक है।

वह मेरे पास सट कर बैठ गए। मै कुछ देर सोची फिर उनके पास अपनी टांगों को मजबूत करते हुए खड़ी हो गई वह मेरी आंखों में ही देख रहे थे मैंने अपनी आंखें बंद कर ली हल्की सी और अपने ब्लाउज के ऊपर से अपनी एक चूची को निकाल कर उन उसकी निप्पल को अपने जीत के मुंह के आगे कर दी मैं अपने पल्लू से अपने पूरे सीन को ढकी हुई थी बस मेरा निप्पल हीं उन्हें दिख रहा था।

मेरे जेठ ने मेरे निप्पल को मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगे मेरे सीने से दूध उनके मुंह में जाने लगा धीरे-धीरे, मेरी अंदर ही सिसकारी निकल गई। मुझे लगा मेरे पूरे शरीर में करंट का झटका लगा हो। मैं जैसे साथ में आसमान पर थी मुझे पता नहीं लग रहा था कि मैं क्या महसूस कर रही थी मेरा मन जैसे बादलों के ऊपर उड़ रहा था मुझे यह सब सपने जैसा लग रहा था।

मेरी तंद्रा तब टूटी जब मेरे जेठ जी ने मेरी चूचियों पर अपना हाथ रख दिया और उन्हें कट कर दबाते हुए जोर-जोर से चूसने लगे मैं थोड़ी सब गई और मेरा हाथ भी मेरी च पर से हट गया उसके बाद मेरे जेठ जी ने मेरे ब्लाउज की एक और बटन को खोल दिया और मेरी दोनों च को बाहर निकाल दिया मेरा पल्लू अभी भी मेरे सीने पर था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वह अब मेरी दोनों चूचियों के निप्पल को जोर-जोर से चूसते हुए मेरा सारा दोस्त जल्दी-जल्दी पी रहे थे एक बार तो उन्होंने इतना दूध अपने मुंह में बाहर लिया कि उनके नाक से ही निकलने लगा और उन्हें मेरे निप्पल से अपना मुंह हटाना पड़ा। वह खास में लगे और मेरा दूध उनके नाक से निकलने लगा.

मैं उनके सर पर थपथपाई और उनके पीठ पर भी बहुत 1 मिनट में नॉर्मल हुई और अंतर्वासना मेरी दोनों चूचियों के निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और उन्हें चूसने लगे मुझे लग रहा था मेरा शरीर पूरा हल्का हो रहा है वह मेरी चूचियों के बीच में भी चूसने लगे मैं उनके बालों में अपनी उंगलियां डाल दी और अपने होंठ काटते हुए उनसे अपनी चूचियां चुसवा* रही थी.

मैं सोची की निप्पल से बाहर भी जेठ जी चूस रहे है वहां कौन सा दूध आता है। वह मेरी 36 डी की बड़ी-बड़ी चूचियों को पूरा चूस चाट कर गीला कर चुके थे और दूध को उन्होंने आखिरी बूंद तक निचोड़ लिया। जब दूध आना बंद हुआ तो उन्होंने मेरी चूचियों को प्यार से चूमते हुए उन्हें छोड़ दिया और दूसरी और मुंह घूमते हुए बोला कि अब तैयार हो जाओ 5 मिनट बाद ही मीटिंग शुरू हो जाएगी।

इतना बोलकर जेठ जी कमरे का दरवाजा बंद करते हुए बाहर चलें गए। मेरी ब्लाउज पहले ही गीली हो गए थे तो मैं आईने के सामने खड़ी हो गई और अपने ब्लाउस और ब्रा को अपने चूचियों से अलग कर दी और अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखते हुए मां मां मुस्कुराते हुए सोचने लगी की देखो कैसे मेरे जेठ जी ने पूरी मेरी चूची को चूस चूस कर गीला कर दिया है।

मैं अपनी चूची यो पर से अपने जेठ की स्लाइवा को बिना साफ किये दूसरी ब्रा और ब्लाउज पहनी और मीटिंग रूम के लिए निकल पड़ी। 10 बजे हम दोनों कमरे में आ गए मुझे काफी शर्म आ रही थी। आते ही मैं नहाने के लिए चली गई और और बाथरूम से है एक नाइट गाउन पहन कर बाहर आए जो मेरे घुटनों तक हीं थी वह लाल रंग की थी।

कुछ देर बाद जेठ भी बाथरूम में नहाने के लिए चले गए। बहु नहा कर आए तो कुछ ही देर में खाना लेकर लेटर कमरे में आ गया उन्होंने शायद कमरे में ही खाना मंगवा लिया था। हम दोनों बिना कुछ बोले खाने के लिए बैठ गए। जेठ जी ने जैसे ही पहले निभाना उठाया उन्हें शायद उनकी पत्नी अंजलि की याद आ गई मैं चुपके चुपके उन्हें देख रही थी उन्होंने थोड़ी देर बाद अपना पहला निवाला खाया।

खाना खत्म कर हम बिना बात किए बेड पर अपनी अपनी जगह लेट गए। मैंने गाउन के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था मेरी कर भी बॉडी पर गाउन पुरी गर्भ बना रही होगी मैं दूसरी और मुंह कर लेती हुई थी जेठ जी मेरे पीठ की और मुंह कर लेते थे। मेरा पूरा शरीर दो दिन से दर्द कर रहा था तो मैं करवटें बदल रही थी मुझे आज नींद नहीं आ रही थी एक तो बहुत ही ज्यादा थकावट और दूसरी मेरे दिमाग में मेरे जेठ के प्रति सोच।

तुम ही मेरे जेठ ने पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और मेरे कंधे को हल्के हल्के चलते हुए दबाने लगे मैं धीरे से आपकी मुझे इतना अच्छा और आराम लगा फिर वह मेरी पीठ को भी अपने हाथ से दबाने लगे मैं थोड़ा पीछे की और हो गई। वह भी साथ में मेरी ओर थोड़ा हो गए थे उन्होंने मेरे कंधे को दबाते हुए जैसे ही मेरी गर्दन पर मेरी नंगी स्किन को छुआ मुझे मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया मैं उनके तरफ मुड़ी कमरे में नाइट बल्ब जल रही थी।

हम दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे के और करीब हो गए और धीरे-धीरे अंधेरे में हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल गए और जेठ जी जैसे कितने दिनों के बुक है शेर की तरह मेरे होठों का रस पीने लगे। जेठ जी मेरे होठों को जोर-जोर से चूसने लगे जैसे वह उन्हें पूरा कहां जाना चाहते हो मैं भी उनके होठों को जोर-जोर से चूसने लग और अपनी जुबान उनके मुंह में डालकर उनके जुबान को चूसने लगी.

और वह भी मेरी जुबान को चूसने लगे वह अपनी जुबान मेरे मुंह में डालकर मेरी मां का पूरा जैसे नाप ही लेना चाह रहे हो उनका दाया हाथ मेरे कंधे से होते हुए मेरी मोटी मोटी बाजू को दबा रहा था और मेरी पीठ को भी बुधवार रहे थे जिससे मैं उनसे और चिपक गई थी और मेरी मोटी मोटी चूची उनके सीने में धंस गई थी।

मैं भी अपना बाया हाथ उनके गार्डन में डाल दी थी हम दोनों वैसे ही लेते हुए थे और मैं उनके गार्डन को दबा रही थी और हम एक दूसरे को होठों को कस रहे थे उनका दाया हाथ मेरी गांड के ऊपर से मेरी कमर और मेरे पठ पर हरकतें कर रहा था मैं भी अपने हाथ को उनके बालों से होते हुए उनके गर्दन और कान को सहला रही थी।

गोंड धीरे-धीरे मेरे होठों से होते हुए मेरे पूरे चेहरे पर अपने होठों से चूसने लगे और मेरे पूरे चेहरे पर चुम्मियों की बरसात कर उसे गिला कर दिया वह मेरे कंधे से मेरे गाउन को भी धीरे-धीरे सरका रहे थे। वो मेरी गाउन की ऊपर के दो बटन खोल दिए और मेरे गांव को मुझे स्मूथ करते हुए ही मेरी कंधों से नीचे कर दिया और अपने होंठ मेरे कंधे पर लगा दिया मेरे मुंह से हल्की सी शिसकारी निकल गई।

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वह अब मेरे कान से होते हुए मेरे पूरे कंधे और गर्दन को कस रहे थे फिर उन्होंने मुझे सीधा लिटा दिया और उनका एक हाथ मेरे सर के नीचे था और उन्होंने पहले मेरे माथे पर चुम्मा और फिर मेरे नाक पर उसके बाद मुझे मेरे होठों पर चुम्मा और नीचे आते हुए हर जगह चूमते हुए मेरे गले पर अपने होंठ लगा दिया और उन्हें तो जैसे वह खा जाना चाहते थे मेरी तो जान जैसे हलक में अटक गई थी।

उसके बाद उन्होंने मेरे सीने पर अपने होंठ लगा दिए और उसे पर अपनी चुम्मियों की बरसात करने लगे और मेरे कंधे से मेरे गांव को नीचे कर दिया और मैं पीठ के बोल लेते हुए ही थी कि उन्होंने मेरी दोनों बड़ी-बड़ी चूचियों को मेरे गांव से निकाल लिया और उन पर वो टूट पड़े।

वह मेरी चूचियों से पहले तो दूध पीने लगे उसके बाद वह मेरी पूरी चूचियों को चूस चूस और चाट चाट कर जैसे उन्हें पूरा ही खा जाना चाहते हो , मेरी गोरी गोरी चूचियों को उन्होंने लाल कर दिया था जो मुझे सुबह पता चला। वह मेरे निप्पल को चूस चूस कर मेरा सारा दूध आज उन्होंने खत्म कर दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

कुछ देर बाद वह मेरी चूचियों से हटकर नीचे की ओर मेरी पेट को चूसने लगे और मरे पेट पर भी चुम्मियों की बरसात करते हुए और नीचे की ओर जाने लगे मैं अपना अकाउंट थोड़ा पकड़ ली पर बहुत धीरे-धीरे गाउन को नीचे करते हुए मेरी पूसी तक पहुंच गए और मेरे पेड़ों पर चुम्मियों की बरसात करते हुए मेरी नाभि में जीभ डालकर उसे चूसने लगे.

उसके बाद वह मेरी पूसी तक पहुंच गए मैं पूरी तरह से मदहोश हो गई थी और जो वह करना चाहते थे हमें करने दे रही थी उन्होंने मेरे पूरे गांव को मेरी टांगों से नीचे कर दिया और मेरे पैर के तलवों को अपने हाथों में भर लिया और उन पर अपने जीव से चाटने लगे जैसे ही मुझे थोड़ा लगा कि मेरे जेठ जी मेरे पर चैट रहे हैं.

तो मैं उनसे अपना पर छुड़ाने की कोशिश की पर उन्होंने मेरी पर की सारी उंगलियां को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया था उन्होंने मेरी टांग को उठा रखा था और मेरे तलवों को चाट रहे थे और उन्हें काट भी रहे थे धीरे-धीरे वह मेरी मोट टांग को उठाते हुए और उन पर चूसते चूमते हुए ऊपर की ओर पर रहे थे.

और मेरी मोटी मोटी दोनों जांघों को वह कुतर कुतर कर काटने लगे हैं और उन्हें चूसने चाटने लगे मैं अपनी पूसी पर अपना हाथ रखे हुए थे फिर वह मेरी जांघों को चाटते चाटते मेरे हाथ को एक झटके में मेरी पूसी से हटाया और मेरी पूसी पर चुम्मियों की बरसात कर दी।

मेरी जैसे सिसकी निकल गई हो मैं धीरे से दो चार बार करें फिर उसके बाद तो जेठ जी ने अपने जब को इतनी तेजी तेजी से मेरी उसी के दाने पर अगर ना शुरू किया कि मैं बात भी नहीं सकती उनके दोनों गाल मेरी जंग हो पर थप थप बज रहे थे उन्होंने नीचे से मेरी मोटी मोटी चूतड़ों को अपने दोनों हाथों में थाम रखा था और मेरी बुर पर तेजी से दाएं बाय जीभ चला रहे थे।

फिर वो मेरी पूसी को अपने पूरे मुंह में जैसे भर लेना चाह रहे हो मेरी फूली हुई बुर को वह अपने पूरे मुंह में भरकर उसे चाटने चूसने लगे अपनी जीभ को वह मेरी बुर की दरारों में चलाने लगे। कुछ हि देर में मेरी बुर जैसे बह गई और उसने अपना सारा रस मेरे जेठ के मुंह में छोड़ दिया और वह मेरी बुर का सारा रस जल्दी-जल्दी चाट कर पी गए।

मेरा शरीर जैसे आसमान से नीचे की ओर गिर रहा हो मैं बिल्कुल हवा में और कर नीचे आ रही थी। जेठ जी अब मेरे नंगे शरीर पर लेट के और मेरे होठों को चूसने लगे उनके सीने में मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां चुभ रही थी अचानक वो मेरी टांगों के बीच में मेरी टांगों को फैलाते हुए अपने लिए जगह बना लिए और मुझे उनका बड़ा सा गरम लंड मेरी बुर पर घिसता हुआ फिल हुआ।

वह मेरी टांगों को और थोड़ा खोल दिए और मेरे होठों को चूसते हुए अपना एक हाथ ले जाकर नीचे मेरी बुर पर अपने लंड* को सेट कर एक हल्का सा झटका दिया। उनके पेनिस का अगला भाग मेरी बुर में घुस गया और मुझे जोड़ का दर्द हुआ। बच्चा होने के बाद मुझे मेरे पति ने सिर्फ एक बार चोदा था और बहुत दिन से मैं तो चुदाई* भी नहीं थी इसलिए मुझे इतना दर्द हुआ जैसे मैं कोई कुमारी लड़की हूं।

मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे मेरे जेठ जी मेरे चेहरे को चूमते हए जब उन्हें आभास हुआ कि मेरे आंसू निकल रहे हैं तो वह मेरे आंखों पर चूमते हैं मेरे माथे को चुमते हैं और मेरी आंखों से बहते आंसुओं को पीने लगते हैं पर वह नीचे धीरे-धीरे लंड को ऊपर नीचे करने लगे थे जिससे वह और अंदर ही जा रहा था उसके बाद उन्होंने एक जोर का झटका दिया जिससे उनका पूरा लंड* मेरी बुर** में समा गया।

मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने गर्म सरिया मेरे अंदर डाल दिया हो। मैं जोर से सीखने वाली थ पर मैं अपने दर्द को बर्दाश्त कर लिए मेरे जेठ जी मेरे होंठ चूसते रहे और फिर उन्होंने अपने कमर को चलाना शुरु कर दिया कुछ देर में मुझे मजा आने लगा हमारी चुदाई की मधुर आवाज तक अब आने लगे थे वह मेरे कान गले को चूसते हुए मेरे सीने पर भी चूड़ियों की बरसात करते हैं.

फिर वह मेरी जुबान को चाटने लगते हैं और ताबड़तोड़ मेरी चुदाई जारी रखते हैं। कुछ 15 मिनट बाद में झड़ जाते हैं और जेठ जी तब भी मेरी चुदाई को कंटिन्यू करते रहते हैं मैं अपने टांगों को उनकी कमर के चारों और लपेट लेती हूं वो दनादन मुझे पेलते रहते हैं.

कुछ उसके आधे घंटे बाद वह मेरी बुर में ही झड़ने लगते हैं तब तक मैं दो और बार झाड़ चुकी थी हम दोनों की सांस धीरे-धीरे शांत होने लगती है वह मेरे ही ऊपर लेटे हुए थे मैं भी उनके गले में अपने हाथ डाली थी और पीठ पर अपने हथेलियां को रखे हुए थी मेरी टांग अभी भी उनके कमर में उनके गांड के ऊपर कसी हुई थी।

मेरी टांगे धीरे-धीरे उनके कमर के ऊपर से हटने लगे हम दोनों ही साथ चुदाई* के वजह से पूरी तरह थक कर मस्त हो गए थे वह मेरी मेरे शरीर से लुढ़कते हुए दाएं तरफ होते हैं और मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लेते हैं और मेरी कमर पर अपनी दी टांग चढ़ा देते हैं उनका पेनिस अभी भी आ रही था जो मेरे उसी के ऊपरी भाग और नाही के थोड़ा नीचे चुभ रहा था धीरे-धीरे हम दोनों को नींद आ जाती है वैसे ही।

सुबह पक्षियों की चर्चा है से मेरी हल्की आंखें खोलने लगती है तो मैं पाती हूं कि मेरे जेठ जी पीट के बाल सो रहे हैं और उनकी भाई बाजू पर मेरा सर है और मेरी एक चूची और मेरा एक हाथ उनके सीने पर है और मेरी भाई टांग उनके कमर के ऊपर है मेरी मोटी जान हो और घुटने के बीच वाली जगह पर उनका पेनिस मुझे टक्कर मार रहा है हल्के हल्के स.

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मैं ऐसे सोई थी कि मुझे शर्म ही आने लगी खुद को ऐसा फील कर मैंने अपनी टांग को धीरे से अपने जीत के ऊपर से जैसे ही हटाना चाहा जेठ जी ने नींद में ही मेरी ओर करवट बदलते हुए मुझे जोर से अपनी बाहों में भर लिया और मेरी कमर पर अपनी दाईं टांग चढ़ा दी मैं बिल्कुल भी नही हिली और वैसे ही पड़ी रही, कुछ देर में मुझे नींद आ गई थी।

उसके बाद मेरी नींद खुली तो मेरे ऊपर चादर डाली हुई थी और जेठ जी वहां पर नहीं थे मैं जल्दी से उठ और अपना गांव ढूंढ कर उसे पहन ली मुझे बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आ रहे थे जैसे ही जेठ जी बाथरूम से निकले मैं उनसे बिना नजर मिलाई बाथरूम में चली गई और नहा कर तैयार होकर बाहर निकली।

हमें अब घर के लिए जाना था तो जेठ जी ने कमरे में ही ब्रेकफास्ट मंगवा लिया था जिससे मैं बिना कुछ बोले सर्वे की और हमने ब्रेकफास्ट किया बिना एक दूसरे की ओर देखें और बिना एक शब्द भी बोल उसके बाद हम घर चलने के लिए नीचे पार्किंग में आ गये।

आज मैं पीछे कहां गेट खोल पीछे बैठ गई जेठ जी गाड़ी चलाने लगे हैं मैं आज पता नहीं क्यों अपने सर पर पल्लू डाल ली मुझे इतनी शर्म आ रही थी घर जाते हुए कि मैं क्या बताऊं। मुझे अपने पति से कौन धोखा देने की उतनी लज्जा नहीं आ रही थी क्योंकि मुझे पता ही था वह पहले ही लड़की बाजी करता है मुझे तो अपने जेठानी से कैसे नजरे मिलाऊंगि उसकी चिंता हो रही थी।

घर पहुंच कर मैं थके हुए का बहाना कर सो गई। दो-तीन घंटे बाद में उठी तो धरे-धीरे में नॉर्मल बिहेव करने लगे और जेठ जी भी ऐसे भी हेल्प करने लगे जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो तो कुछ दिनों में मैं भी सब जैसे भूल ही गई थी। पर अब मुझे पहले जैसा फील नहीं होता था इतने दिनों बाद इतना अच्छा सेक्स मिलने की वजह से मुझे अब और ज्यादा सेक्स करने की इच्छा होती थी।

एक दिन तो मुझे इतना सेक्स चढ़ गया कि मैं कमरे में अकेली थी दोनों बच्चे मेरी जेठानी के पास ही थे तो मैं अपने सारी कपड़े खोल दी मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी मुझे बहुत ही गर्मी भी लग रहे थे मैं पूरी नंगी ही बेड पर लेट गई और याद करने लगी कि कैसे मेरे जेठ जी मेरी चूचियों का रस खींच खींच कर पी गए थे और कैसे उन्होंने मेरे पूरे शरीर पर अपनी जीभ से उन्हें गिला किया था और कैसे वह मेरी बुर* को चाट कर मेरा रस निकाला था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं अपने जीत के साथ हुई चुदाई के पलों को याद कर अपनी आंखें बंद कर अपनी नाजुक बदन पर हाथ फेर रही थी। मैंने कुछ ही देर पहले दोनों बच्चों को अपना दूध पूरा पिला दी थी निचोड़ निचोड़ कर जिससे अभी मेरा दूध तो नहीं गिर रहा था पर मैं अपने दोनों चूचियों को अपनी आंखें बंद कर सहला रही थी और याद कर रही थी कि कैसे जेठ जी इन्हें अपने जीभ से पूरा चूस रहे थे।

मैं धीरे-धीरे अपना अपनी हाथ को अपनी गहरी नाभि पर भी ले गई और याद करी की जेठ जी ने कैसे इसमें अपनी जुबान डालकर इन्हें चूसा था वह तो जैसे कुएं में से जीभ डालकर रस निकाल रहे हैं हो। फिर मेरा हाथ मेरी निगोड़ी चिकनी बुर पर चली गई जिस पर मैंने दो-तीन थपकी मारी।

तभी दरवाजा खुला और अंजलि दी मेरी जेठानी कमरे में आ गई और बोली शीतल क्या हुआ है तुझे ऐसे क्यों लेटी है। मेन दरवाजे में कुंडी नहीं लगाई थी बस उन्हें सटा दिया था जो की अंदर और बाहर से भी खुलता है। मैं घबराते हुए अपनी आंखें खोली और जल्दी से अपने नंगी बदन पर बेडशीट डाल उसे ढकने की कोशिश करने लगी।

मैं लज्जा के मारे अपना सर नीचे कर ली और अपने चेहरे को अपने घुटनों के अंदर छुपा ली। क्या हुआ तबीयत तो ठीक है तुम्हारी उन्होंने पूछते हुए कहां और मेरे पास आकर मेरे बच्चे को बेड पर लेटा दिया और मेरे सर पर हाथ फिरते हुए बोली। मैं कुछ नहीं बोली और अपने सर को और अपने घुटने के अंदर घुसा ली जैसे मैं शर्म के मारे जमीन मे धंसी जा रही हूं और मेरे आंखों से आंसू की बूंदे भी निकल गई।

मेरी जेठानी ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखते हुए मुझे अपनी और किया और मुझे गले से लगा लिया। कोई बात नहीं मेरी ही गलती है मुझे दरवाजा खटखटा कर आना चाहिए था। और मैं सब समझ सकती हूं मैं भी तुम्हारी तरह औरत ही हूं। उन्होंने मेरे चेहरे को ऊपर उठाया और मेरे आंसू पोंछी।

वह मुझे चुप करा कर मुझसे थोड़ी बातें की मेरे सर पर हाथ फेरा। उसके बाद उन्होंने हंसते हुए कहा की वैसे तो आज मेरा प्रोग्राम है कुछ करने का मगर अगर तू चाहे तो तू अपने जेठ जी के साथ आज प्रोग्राम कर सकती है। मैं थोड़ा शमी और चौंकते हुए बोली यह आप कैसी बातें कर रही हो दीदी।

कैसी बातें कर रही हूं तू मुझे नहीं बताये गि तो क्या मुझे पता नहीं चलेगा तुम्हारे जेठ ने मुझे सब बता दिया है। मैं फिर शर्म से नज़रे नीचे कर ली। उन्होंने मेरे सर को अपने सीने पर रखकर मेरे बालों में सहलाते हुए बोला। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है मगर हां तू बाहर में ऐसा किसी के साथ करती तो मुझे दिक्कत होती वह बोली।

घर के लोग एक दूसरे की जरूरत का ख्याल नहीं रखेंगे तो कौन रखेगा वह बोली। मैं शर्म के मारे कुछ भी नहीं बोल रही थी। उन्होंने कहा मैं बेबी को ले जाती हूं तुम ज्यादा सोचो मत सब परिवार के ही लोग हैं हम लोग , तुम आराम से सो जाओ। मैं फिर बिस्तर पर बेडशीट से खुद को ढक कर वैसे ही सो गई।

रात में मुझे फील हुआ कि मेरी बिस्तर में कोई है वह मेरे जेठ जी मेरे बेडशीट में आ गए थे वह मुझे बाहों में भरते हैं पहले तो मैं डर कर उनसे छूटने की कोशिश करती हूं मुझे लगा कौन आ गया है मैं अचानक से उठती हूं तो डर जाती हूं। उसके बाद जेठ जी मुझे कुछ करना हूं मैं भर लेते हैं और मेरे माथे पर चूमते हुए मुझे प्यार करने लगते हैं.

मैं पूरी नंगी ही थी उनके बाहों मे वह भी ऊपर से कुछ नहीं पहने हुए थे मैं शर्म के मारे अपने सर को उनके सीने में छुपाने लगती हूं। बहुत मेरे चेहरे को अपने सीने से लगाए हुए मेरी गल को हल्के हल्के तब दबा रहे थे मेरी नंगी चूचियां उनके सीने से लगी हुई थी मैं भी अब चुपचाप उनके साथ लेटी हुई थी मैं समझ गई की जठानी जी ने इन्हें भेजा है और उनके शरीर से खुशबू भी आ रही थी हल्की-हल्की तो मैं समझ गई की मैं जेठानी जी
के साथ चुदाई* करके आए हैं।

बहुत धीरे से मेरे गाल पर चूमते हुए कहते हैं कि तम्हें अगर कुछ जरूरत हो तो मुझे बोल दिया करो या मुझे इशारा किया करो मैं कुछ नहीं बोलता हूं वह मेरी बालों में हाथ फिर आ रहे थे और वह धीरे-धीरे मेरे गाल और मेरे होठों पर चमन लगते हैं वह मुझे लुटा देते हैं और खुद साइड में लेट कर मेरे ऊपर झुक कर मेरे चेहरे पर चुम्मियों की बरसात कर देते हैं वह मेरे होंठ चूसते रहते हैं थोड़ी देर बाद मैं भी उनके होठों को चूसने लगती हूं।

कुछ देर बाद वह अपना पेट भी उतार देते हैं और मुझे ऊपर से चूसते हुए मेरी चूची ऊपर चूसने लगते हैं और उन्हें पीने लगते हैं मेरे च से दूध निकल रहा था जिससे वह पी जाते हैं पूरा उसके बाद वह नीचे की ओर जाते हुए मेरे पेट और नाही से कुछ देर खेलते हैं उसके बाद बहुत लेट कर मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लेते हैं और मेरी जांघों को चूसते हुए मेरी बुर पर चूसने लगते हैं।

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वो मेरी बुर को चुस्त और चाटते हैं मुझे सेक्स चढ़ने लगा था और मेरी पूसी रस बहने लगी थी। कुछ 15 मिनट की चुसाई के बाद मेरी पूसी रस छोड़ देती है जिसे वो सारा पी जाते हैं। उसके बाद वह ऊपर आते हैं और वापस से मेरे होठों को चूसने लगते हैं.

उनका लंड* मेरी बुर पर ठोकर मार रहा था जिसे बहुत धीरे-धीरे मेरी बुर पर घिसते हुए उसे अंदर डालने लगते हैं मुझे हल्का सा दर्द होता है पर मैं अपनी पूरी टांगे खोल दी थी तो वह धीरे-धीरे अपना पूरा लण्ङ* मेरी बुर* में उतार देते हैं और कमर चला कर मेरी चुदाई** शुरू कर देते हैं।

कुछ आधे घंटे 40 मिनट को मेरी चुत* मारते रहते हैं मैं दो-तीन बार झढ़ गई थी, उसके बाद वह अपना पेनिस निकाल लेते हैं और मेरी पूसी पर झड़ जाते हैं। वह वहीं पर यह टॉवल से मेरी बस से और अपने पेनिस को साफ करते हैं और बाथरूम जाते है। मैं बेड पर खुद को बेडशीट से ढके हुए उनके आने का इंतजार करती रहती हूं और सो जाती हूं।

कुछ दिन में फिर सब नॉर्मल हो जाता है हम दोनों हमेशा नॉर्मल व्यवहार करने लगते हैं। एक शाम जब हम दोनों ऑफिस से आते हैं तो मैं हाल में बैठकर अपनी जेठ के बच्चे को दूध पिला रही थी। मेरे जेठ भी दूसरे सोफे पर बैठे थे मैंने अपने सीने को पल्लू से ढक रखा था। फिर मैं अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए उठकर जेठ के बेटे को उनकी गोद में देने जाती हूं और उनके गॉड से अपने बच्चों को लेती हूं अपने गोद में।

मैं उनके बेटे कौन के वेद में देता हूं और अपने बेटे को गोद में लेकर उनके सामने ह खड़ी थी वह नीचे अपने बेटे के मुंह की और देखते हुए उसके होठों और चेहरे पर लगे दूध को अपनी उंगलियों से साफ करते हैं और उन्हें अपने मुंह में ले लेते हैं वह अभी भी नीचे ही देख रहे थे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं उनके ठीक सामने ऊपर खड़ी थी मुझे उनको एक करता देख मन में हंसी आ रही थी उसके बाद जैसे ही उन्होंने ऊपर मेरी ओर देखा मैंने अपनी एक चूची निकाली और उनके मुंह की ओर दबा दी और हंसते हुए किचन में चली गई। मैं अपनी चूची से अपने दूध का फुहारा उनके मुंह पर छोड़ दी थी और अपने बच्चे को लेकर किचन में हंसते हुए आ गई थी।

मेरे ऐसा करने को शायद उन्होंने मेरी चुदाई* का इशारा समझ लिया उन्हें लगा मुझे चुदाई* चाहिए इसलिए वह खाना खाने के बाद सोने के लिए अपने कमरे में गये और 1 घंटे बाद चुपचाप मेरे कमरे में आ गए उस टाइम मुझे नींद नहीं आई थी। मुंबई कमरे में आते हैं लाइट बंद था मैं मोबाइल चला रहे थे.

उन्हें देखकर मैं चुपचाप साइड में मोबाइल रख देता हूं और वह आकर मेरे मकान में लेट जाते हैं और मेरी कमर में हाथ डल मुझे अपनी और खींचते हुए मुझे खुद के ऊपर लेट लेते हैं उनका पेनिस उनके पेट के अंदर खड़ा था जो सीधा मेरी बुर के नीचे दब रहा था वह मेरे माथे पर झूमते हैं और हम दोनों करीब 1 घंटे तक बिना कुछ बोले वैसे ही अटखेलियां करते रहते हैं।

भूख रोकने के ऊपर से ही मेरे हर एक अंग को दबाते हैं मेरी गांड को वो अपने दोनों हाथों से दबते रहते हैं। मेरी बुर रस काफी छोड़ चुकी थी, फिर वह मेरे गले से होते हुए सभी जगह चूसते हैं फिर मेरे ब्लाउज खोल मेरी चूचियों को निकाल लेते हैं और उन्हें चूस चूस कर पी जाते हैं वह मेरी पूरी चूची को जिला कर देते हैं.

उसके बाद वह नीचे जाते हुए मेरी सारी को उठाकर मेरी पैंटी उतार देते हैं और मेरी सारी में घुस मेरी बुर* को चाटने लगते हैं। कुछ देर में वह अपना पेंट उतार कर मेरी बुर* में लंड डालकर मेरी चुदाई शुरू कर देते हैं। मैं उनके कान और गले पर अपने होंठ लगा देता हूं और खुद की आवाजों को निकालने से रोकते हुए अपने जेठ से चुदाई* का मजा लेने लगती हूं।

मेरी बर पूरा रस छोड़ दी थी जिसे चुदाई* की मधुर आवाज निकलने लगती है। कुछ देर में वह भी अपना लंड निकाल मेरी बुर पर झड़ जाते हैं जिसे वह खुद ही मेरी पैंटी से साफ कर मेरी पेंटिं को बेड से नीचे फेंक देते हैं और मेरे माथे को चुमते हुए उठकर जाने लगते हैं।

उनके जाने से मुझे बहुत ही बुरा लगता है और मैं उनके दरवाजे तक जाने से पहले ही बोल देती हूं कि क्या आप मुझे वेश्या समझते हैं। वह लौट कर मेरी और आते हैं मैं बेड पर खुद को ढकी हुई लेटी हुई थी मैं अभी अपने ब्लाउस को भी सही नहीं करी थी वह मेरी ऊपर चढ़ जाते हैं और मेरे होठों को चूसते और काटते हुए बोलते हैं दोबारा ऐसी बात करोगी तो थप्पड़ लगाऊंगा.

वह मेरे माथे पर चूमते हुए मेरे पूरे चेहरे को चूसते हैं मेरी गालों को काटते हैं। वो फिर मुझे पूरा नंगा करने लगते हैं और खुद के भी सारे कपड़े उतार देते हैं वह मेरे हर अंग को चूसने लगते हैं मेरे पैरों के तलवों को चाटते हैं और मेरी जांघों को चाटते हैं.

फिर वह मेरी चूचियों से बचा हुआ दूध भी पीने लगते हैं उसके बाद वह मुझे घुमा देते हैं और मेरी टांगों को मोड़ देते हैं मेरी गांड उनकी औरत थी वह मेरी चूतड़ों पर चूसने और चाटने लगते हैं और उन्हें जैसे पूरा खा जाना चाहते हो मेरी बड़ी-बड़ी गांड को पूरा चाट कर और चूसते रहते हैं।

वह मुझे डॉगी स्टाइल में लेट दिए थे और पीछे से मेरी बुर में लण्ङ डाल देते हैं और मेरी चूतड़ों को दबाते हुए पीछे से चुदाई करने लगते हैं। वह मेरी गांड पर हल्के-हल्के थप्पड़ भी लगा रहे थे और उनके जाघे मेरी गांड से कर टकराते हुए आवाज निकाल रही थी।

कुछ देर में वह मुझे उठाते हैं और मुझ जैसी भारी लड़की को भी अपनी गोद में उठाकर बिस्तर से नीचे खड़े हो जाते हैं और मुझे अपने कंधे पर कर रखना बोलते हैं और मेरी जान और गांड को अपने हाथों में उठाकर धाम देते हैं और अपने खड़े लड को मेरी बुर पैर दबा देते हैं मैं कसकर अपने टांगों को उनकी कमर में फसे हुए थे।

उनका लंड मेरी बुर* में सरसराता हुआ घुस जाता है और वह मुझे अपने गोद में उठाए हुए हैं चोदने लगते हैं मैं अपने दांत उनके कंधे पर और गर्दन पर लगा देता हूं हल्के से। अब वह मुझे बेड पर लेट देते हैं और मेरे दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखकर मेरी चुदाई* करने लगते हैं।

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उसके बाद वह मेरे ऊपर लेट जाते हैं और मैं अपनी टांगों को उनकी कमर पर लपेट लेती हूं और वह मुझे कस कस कर चोदने लगते हैं। जिससे मेरी आवाज निकलने लगती है मैं खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाती हूं पहले तो मैं अपनी आवाज को दबाने के लिए अपने हाथ अपने मुंह पर रख लेती थी या अपने देश के कंधे पर रखकर अपनी आवाज को दबा लेती थी.

पर अभी वह मुझे इतनी जोर जोर से बोल रहे थे कि मेरी आवाज निकल ही जा रही थी। मैं तीन बार चल चुकी थी वह भी जल्दी-जल्दी मुझे ऑर्गेज्म हो रहा था। कुछ देर में वह भी अपना लंड* निकालते हैं और मेरी बुर पर अपना गरम-गरम रस फेकने लगते हैं।

को मेरी ब** को साफ करते हैं और वह मुझे उठा लेते हैं अपने गोद में और बाहर हाल में बाथरूम की ओर जाने लगते हैं मैं डर भी रही थी कि कहीं अगर बाहर मेरी जेठानी में देख ली तो क्या सोचेगी मैं हल्के हल्के उन्हें मना भी करने लगती हू पर वह मुझे अपनी गोद में उठाए हुए हैं बाथरूम में ले जाते हैं और पानी से मुझे साफ करते हैं मुझे सुसु भी आ रही थी.

और शायद उन्हें भी सूसू लगी थी तो वह मेरे सामने ही सूसू करने लगते हैं और मैं भी बैठ जाती हूं उनके सामने ही मुतने के लिए। उसके बाद दोनों एक दूसरे को साफ करते हैं और वह मुझे गोद में उठाकर वापस कमरे में लाते हैं और पेट पर मुझे लेट आते हैं और मेरे ऊपर चढ़कर लेट जाते हैं.

वह हम दोनों को एक पतली चादर से ढक देते हैं और मैं कुछ भी नहीं बोल रहे थे हम दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे के होठों को कस रहे थे और एक दूसरे से चिपके हुए थे हम दोनों दो बार चुदाई* कर थक भी गए थे तो थोड़ी देर में हमें नींद आ जाती है। उसके बाद मेरी नींद तब खुलता है जब शायद गेट खोल कर मेरी जेठानी हमारे कमरे में आ गई थी.

और बहुत देर से उठाते हुए कहती है उठिए सुबह हो गई है। मेरी नींद खुलती है और मैं खुद को नंगी अपने जेठ की बाजू पर हाथ रखी हुई सोई हुई पाती हो मेरा एक हाथ अपने जेठ के सीन पर था और मेरी एक टांग उनके कमर पर था वह पेट के बोल लेते हुए थे।

मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोलती हूं और चुपचाप सोने का बहाना कर लेती रहती हूं क्योंकि चादर से मैं पूरी ढकी हुई थी जेठानी मेरी आती है और वह जेठ के चेहरे से सिर्फ चादर हटती है और उनके माथे पर चुनते हुए उन्हें उठाती है। बहुत शायद उनके होंठ पर भी चूमती है और उनके पूरे चेहरे पर अपने चेहरे रगड़ते हुए उन्हें उठाती है।

अच्छे से ख्याल रखा कि नहीं इसका मेरी जेठानी पूछती है। जेठ जी शायद आंखें अब खोल लिए थे और जी बाजू पर मेरा सर था उसे बज यू को और भी अपने करीब करते हैं जिससे मैं और उनके सीने में दब जाती हूं मेरी चूचियां तो पहले से ही उनके साइड के शरीर से लगी हुई थी वह और भी उनके शरीर में धंस कर दब जाती है और मुझे महसूस होता है कि दबने ने की वजह से मेरी चूची से एक दो बूंद दूध की निकाल कर उनके शरीर पर लगी होगी।

कैसे लगी आपको मेरी जेठानी ने पूछा।

बहुत ही प्यारी है मेरे जेठ ने जवाब दिया।

अच्छे से ख्याल रखा ना इसने आपका मेरी जेठानी ने पूछा।

हां बहुत अच्छे से ख्याल रखा मेरे जेठ ने हंसते हुए जवाब दिया।

चलिए अब उठ जाइए जेठानी ने कहा।

अभी 6:00 हैं यार और आज छुट्टी भी है तुम भी आकर सो जाओ।

मेरे चैट मेरी जेठानी का हाथ पकड़ कर अपनी बाहों में खींचते हुए बोलते हैं। मेरी जेठानी 1 मिनट वही और बैठी रहती है और जेठ जी को चूमते हुए उन्हें बाई करती है और कमरे से बाहर चली जाती है। मेरी जेठानी के कमरे से बाहर जाते हैं जीत की मुझे अपने सीने में दवा लेते हैं मेरी चूचियां और भी उनके सीने में दब गई जिससे दूध निकाल कर उनके सीने में लगने लगा मैं उनके चौड़े सीने पर अपने होंठ लगा दी और उन्होंने चूमने लगी।

जिससे उन्हें पता लग गया कि मैं जगी हुई हूं तो वह भी मेरे अंगों को जलने लगे और मेरे होठों को चूसने लगे और मेरे चूचियों से सारा दूध पीने लगे उसके बाद उन्होंने अपना लड मेरी बुर में डाल दिया और हम दोनों साइड बाय साइड लेते हुए हैं चादर में चुदाई करने लगे मेरी एक टांग उनकी कमर पर था और वह मेरी गांड को दबाते हुए मेरी बुर* में लंड पेल रहे थे।

कुछ 1 घंटे वह मुझे वैसे ही चोदते रहे। उसके बाद वह मेरी गांड पर अपना रस निकाल दिया मैं भी करीब तीन चार बार झाड़ चुकी थी रात भर में तीन बार चुदाई* के बाद मेरा शरीर बहुत हल्का लग रहा था और मुझे मजा भी बहुत आया था। उसके बाद चटनी चाहिए बाहर चले गए और मैं अपने कपड़े पहन कर चुपचाप बाथरूम गई और नहा ले उसके बाद में किचन में जाकर कुछ काम करने लगी तब मेरी जेठानी में दोनों बच्चे को लेकर हॉल में आ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं बच्चों के हूं दूध पिलाने के लिए दूध उबालने लगी तुम मेरी जेठानी किचन में आए और मुझे हंसते हुए बोली कि सारा दूध अपने जेठ को ही पिला दोगी तो बच्चों को क्या पिलाओगी मैं दूसरी ओर मुंह कर शरमाते हुए काम करने लगी। उसे रात को खाना खाकर सभी सोनी की तैयारी कर रहे थे तो मेरी जेठानी मेरा हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ही रोक ली शायद जेठ जी ने उन्हें ऐसा करने को कहा होगा।

उसके बाद हम सभी जेठानी के बेड पर ही सोने लगे वेद काफी लंबा चौड़ा था तो एक साइड जीत और जेठानी बीच में बच्चे और दूसरी और मैं सो जाती थी। अब हमें जब भी कभी सेक्स करना होता तो हम तीनों मेरे कमरे में आ जाते और पूरी तरह नंगे होकर मेरे जेठ जी हम दोनों को पूरी लाइट चालू कर चोदते थे।

मैंने कभी किसी को कंडोम नहीं पहनाया था मेरा पति तो मुझे हमेशा बिना कंडोम का ही छोड़ा था और मुझे प्रेग्नेंट कर दिया था पर जीत जी के लैंड पर मैं पहली बार कंडोम चढ़ा रही थी और उन्होंने जितना मुझे 3 महीने में चोदा इतना मेरे पति ने मुझे शादी के बाद अभी तक नहीं चोदा था।

एक बार मेरे जेठ को कुछ लोगों को लेकर जाकर ट्रेनिंग करवानी थी हरियाणा में तो हम दोनों अकेली रह जाती है ऊपर से मुझे ऑफिस भी जाना होता तो मेरे जेठ जी ने कहा कि किसी को बुला लेते हैं तो हम हमारे छोटे देवर को बुला लिया। मेरे देवर समर के आने के बाद जेठ जी चले जाते हैं।

उसके अगले शाम जब मैं ऑफिस से आता हूं तो देखती हूं कि समर मेरा देवर मेरी जेठानी को किसी चीज के लिए मना रहा था वह मैं पिछले दिन भी नोटिस करी थी। तो मैं अपने जेठानी से पूछता हूं कि क्या बात है बार-बार वह आपको क्या बोल रहा है तो मेरी जेठानी हंसते हुए मुझे बताती है कि यह मिली से शादी करना चाहता है और उसी के लिए बोल रहा है।

उसके बाद समर वही है मुझे कहता है की भाभी प्लीज आप इन्हें समझाओ ना मिली और मैं एक दूसरे को प्यार करते हैं हमारी शादी करवा दे मेरी जेठानी का भी मन था पर वह समर को छेड़ने के लिए उस डाल रही थी ए और हां कभी ना कर रही थी।

हम दोनों देवरानी जेठानी सोफे पर बैठे हुए थी और मेरे हाथ में चाकू था मैं सब्जी काट रही थी समर बोलते हुए हमारे पैरों के पास आकर बैठ गया था और वह हम दोनों से रिक्वेस्ट कर रहा था खास कर मेरी जेठानी से उसका हाथ मेरे घुटने पर था।

मैं उससे बोली की ठीक है मैं करवा दूगी पर पहले अपनी आंखें बंद करो उसने अपनी आंखें बंद करी मैंने अपने टांगे उठा और अपनी साड़ी को ऊपर करते हुए उसके सर को अपनी साड़ी में घुसा दे और बोली कि चलो अब इधर किस करो वह वहां से हटने लगा मेरी जेठानी भी हंसने लगी कि क्या करवा रही है वह वहां से छुटकारा उठ गया.

मैं उससे बोली कि हम दोनों क इस चाटने पड़ेगी तुम्हें तभी तो साबित होगा कि तुम लड़की को खुश कर पाते हो या नहीं मैं उसे हंसते हुए बोली। मेरी जेठानी भी हंसते हुए मुझे पहले तो मना करी पर फिर उन्होंने भी कहा चलो ठीक है यह टेस्ट पास कर लो उसके बाद ही कुछ सोचूंगी मैं।

पहले तो समर ने मना कर दिया फिर वह हमारी टांगों के पास आकर बैठ गया उसने दोनों की टांगे पकड़ ली हम दोनों ने अपनी पैंटी उतार दी और समर में पहले मेरी बुर और जांघों पर अपना होंठ लगाया पहले तो शायद उसे अच्छा नहीं लगा और ना ही उसे चूमना आ रहा था.

पर मेरे गोरी गोरी बुर की रस से मदहोशी से उसे कुछ-कुछ होने लगा वह शायद पहली बार किसी की बुर* देख रहा था वो जैसे तैसे मेरी बुर* को चाट रहा था मैं उससे करीब आधे घंटे तक बुर चटवाती रही और उसके बाद झड़ गई फिर वह मेरी जेठानी की बुर में हल्के हल्के चाटने लगा और वह भी आधे घंटे बाद झड़ी और उसके पूरे सर को अपनी जांघों में दबा ली।

उसके बाद हम दोनों ने हंसते हुए उसे कहा की ठीक है तुम्हारी शादी मिली से करवा देंगे। कुछ साल बाद में अपने जेठ से प्रेग्नेंट भी हो गई थी जानबूझकर, और उसे छुपाने के लिए मैं एक बार छुट्टी लेकर एक दिन के लिए चुपचाप फ्लाइट से मुंबई चली गई मैं शाम को मुंबई पहुंची और उसके बाद रात भर में पांच बार अपने हस्बैंड से चुदाई* करवाई और सुबह की फ्लाइट से वापस आ गई।

इसे भी पढ़े – शाम्भवी की चूत का दीवाना बन गया

उसके बाद मैं अपने जेठ के बच्चे की मां बन गई जिसे मैंने आज तक किसी को नहीं बताया है। अभी भी मैं अपने जेठ और जेठानी के साथ ही रहती हूं मेरी जेठानी का एक ही बेटा है और मेरा एक बेटा और एक बेटी जेठ के साथ है। दोस्तों मेरा दिल करता है कि किसी को तो बता दो इसके बारे में। पर मेरी हिम्मत भी उतनी नहीं होती है पर मुझे थोड़ा-थोड़ा तो लगता है कि मेरी जेठानी को तो पता ही चल गया होगा कि मेरी जो बेटी है वह मेरे जेठ से ही हुई होगी।

आपको क्या लगता है कि मैं इस सब बातें खुलकर अपने जेठ और जेठानी को बता दूं। कहानी पूरी पढ़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको कहानी अच्छे लगे तो कमेंट करें। कृपया गंदे कमेंट ना करें और ना ही सेक्स के डिमांड करें या मिलने की डिमांड करें। आप अपने सुझाव हमें मिल भी कर सकते हैं। anjalisingh100198@gmail.com वैसे मेरी एक फीमेल दोस्त है जो लेस्बियन है अगर किसी लड़की को उसके साथ किसी प्रकार का रिलेशन या सेक्स चैट भी करना हो तो आप मुझे मेल कर सकते हैं। धन्यवाद।

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