Kaamwali Chudai
मेरा नाम राहुल है, याद है ना आपको? मैं मुंबई से हूं। आज जो मैं आपको स्टोरी सुना रहा हूं वो मेरी और मेरी नौकरानी की है। उसकी उम्र 22 साल थी, 2 बच्चों की मां थी इसलिए उसका जिस्म जरा भरा हुआ था। बड़े-बड़े मम्मे और गांड ऐसी थी जैसे डबल रोटी के 2 पीस इकट्ठे रखे हों। मैं पहले दिन से उस पर गर्म था। Kaamwali Chudai
जब वो झाड़ू लगाते हुए नीचे झुकती तो उसके मम्मे उछल कर गले में आ जाते। जब पोछा लगाने के लिए बैठती तो उसकी गांड और भी टाइट हो जाती। वो अपनी गांड उठा-उठा कर पोछा लगाती थी और मैं पागल हो जाता था। उस वक्त मुझे पता नहीं था कि मैं उसे चुपके-चुपके देखता हूं।
एक दिन वो मेरे कमरे में झाड़ू-पोछा कर रही थी। उसने बारीक सी सलवार कमीज पहनी हुई थी और उसका गले का हिस्सा काफी बड़ा था। आज भी उसके मम्मे दिख रहे थे। मैं फिर से गर्म होना शुरू हो गया। मैंने उसके जिस्म का खूब नजारा किया और मेरा लंड टाइट हो चुका था।
मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। जैसे ही वो सफाई कर के कमरे से जाने लगी, मैं भाग कर उसे पीछे से पकड़ लिया और अपना लंड उसकी गांड से चिपका दिया। वो एकदम घबरा गई और कहने लगी, साहिब जी ये आप क्या कर रहे हैं?
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मैंने कहा, मेरी जान तुम्हें प्यार कर रहा हूं।
कहने लगी, साहिब जी मुझे छोड़ दीजिए, किसी ने देख लिया तो क़यामत आ जाएगी।
मैंने कहा, कोई नहीं देख रहा, ये मेरा घर है, यहां मेरी इजाजत के बगैर कोई नहीं आ सकता।
तो वो कहने लगी, साहिब जी लगता है आज आपकी तबीयत ठीक नहीं है।
मैंने कहा, हां नूरी (उसका नाम), जब से मैंने तुम्हें देखा है, तब से मेरी तबीयत खराब रहने लगी है।
तो कहने लगी, जाइए साहिब आराम कीजिए।
मैंने कहा, नहीं नूरी, इस बीमारी का इलाज सिर्फ तुम्हारे पास है।
तो वो कहने लगी, वो कैसे?
मैंने कहा, अगर तुम चाहो तो मेरी तबीयत ठीक हो सकती है।
मेरा लंड अभी तक उसकी गांड के साथ चिपका हुआ था और वो भी उसे महसूस कर रही थी।
कहने लगी, साहिब दूर हटाइए, मुझे कुछ चुभ रहा है।
मैंने कहा, क्या चुभ रहा है?
तो कहने लगी, पता नहीं।
मैंने कहा, बताओ ना क्या चुभ रहा है।
मुझे शर्म आती है।
मैंने कहा, मेरी जान जिसने की शर्म उसके फूटे करम।
कहने लगी, साहिब मुझे छोड़ दीजिए, मुझे घर जाना है।
मैंने कहा, चली जाना, रोज ही घर जाती हो, आज जरा देर से चली जाना।
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मुझे लग रहा था कि वो भी काफी गर्म हो रही है मगर जानबूझ कर नाटक कर रही है। फिर मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके गाल चूमने लग गया।
तो वो कहने लगी, साहिब मुझे शर्म आ रही है, मुझे छोड़ दो ना।
मैंने कहा, नहीं, मैं आज तुम्हें प्यार करना चाहता हूं।
कहने लगी, साहिब आप मुझसे प्यार करते हैं?
मैंने कहा, हां बहुत मेरी जान।
कहने लगी, साहिब मैं एक गरीब औरत हूं और आप एक अमीर आदमी हैं, भला अमीर और गरीब में कैसे प्यार हो सकता?
मैंने कहा, मैं इस गरीबी और अमीरी को नहीं मानता, प्यार सिर्फ प्यार होता है।
तो कहने लगी, साफ-साफ कहिए ना कि आप क्या चाहते हैं।
मैंने कहा, बता दूं तो?
कहने लगी, हां बताइए ना।
मैंने उसे अपनी बाहों में भींच कर कहा, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं।
तो उसने एक झटके से मुझे दूर हटा दिया, नहीं साहिब ये नहीं हो सकता, मैं शादीशुदा हूं, मेरे दो बच्चे हैं।
मैंने कहा, तो क्या हुआ, मैं भी तो तुमसे प्यार करता हूं। तुमने आज तक मुझसे जो बात कही मैंने कभी इनकार किया? तुम्हें किसी चीज की जरूरत पड़ी मैंने तुम्हें लाकर दी, तो क्या मेरा इतना भी हक नहीं कि मैं तुमसे कुछ मांग सकूं? ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तो कहने लगी, हां साहिब जी आपके मुझ पर बहुत एहसान हैं, ठीक है मैं आज आपके एहसानों का बदला चुका दूंगी, आप जो चाहेंगे मैं आपको दूंगी।
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मैं खुश हो गया। तो मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। वो भी गर्म हो चुकी थी और मेरे होंठ चूस रही थी। फिर मैंने उसके मम्मों पर हाथ रखा तो उसकी सिसकारी निकल गई, कहने लगी, आह्ह्ह्ह स्स्स्स ओ साहिब जी आपने तो मेरे बदन में आग भर दी, दबाइए इन्हें जोर-जोर से और मुझे और ज्यादा मजा दीजिए।
मैंने उसके मम्मे अच्छी तरह दबाए और फिर उसे कमीज उतारने को कहा। तो उसने अपनी कमीज उतार दी। उसने काले रंग का ब्रा पहन रखा था। मैंने एक झटके से उसका ब्रा भी उतार दिया और उसके बड़े-बड़े मम्मों पर टूट पड़ा जैसे भूखा बच्चा मां का दूध पीता है। मैं भी उसका दूध पीने लगा।
उसे बहुत मजा आ रहा था, कहने लगी, पी लीजिए साहिब सारा दूध, मुन्ना तो पीता नहीं। मैं काफी देर तक उसका दूध पिया। फिर मैंने उसकी सलवार में हाथ डाल दिया और उसकी फुद्दी को हाथ से मसलने लगा। अब वो और भी गर्म हो गई और उसकी सांसें और भी तेज हो गईं।
मैं समझ गया कि वो अब काफी हॉट हो चुकी है। मैंने एक झटके से उसकी सलवार उतार दी। उसने नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी। उसकी फुद्दी पर बाल थे। जब मैंने उससे पूछा, बाल नहीं साफ करती? तो कहने लगी, साहिब जी मुझे टाइम ही नहीं मिला, सारा दिन लोगों के घर काम करती हूं, रात को जाकर सो जाती हूं।
मैंने कहा, क्यों तेरा मर्द तुझे रात को चोदता नहीं है? तो कहने लगी, नहीं साहिब वो नशा करता है इसलिए वो मुझे अच्छी तरह से नहीं चोद सकता, जल्दी झड़ जाता है। मैंने कहा, कोई बात नहीं मेरी जान, आज मैं तुम्हें अच्छी तरह से चोदूंगा और तुम्हारी अधूरी जवानी को पूरा कर दूंगा।
तो कहने लगी, साहिब फिर देर किस बात का इंतजार है, शुरू कीजिए ना। आज मुझे अच्छी तरह चोदिए, कई सालों से भूखी हूं, लंड को तरस चुकी हूं, फुद्दी की आग बहुत तंग करती है, आज बुझा दीजिए इस आग को। फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसकी टांगें खोल दीं और उसकी फुद्दी को चाटना शुरू कर दिया।
वो बहुत मस्त हो रही थी। आज कई सालों के बाद उसकी फुद्दी को किसी ने छुआ था इसलिए वो पागल हो रही थी। बार-बार मुझे अपनी चूत को खा जाने को कह रही थी। फिर मैंने भी जी भर कर उसकी फुद्दी खाई। मेरा लंड अब बिल्कुल तैयार था उसकी फुद्दी में उतरने के लिए मगर पहले उससे चूसना लगवाना चाहता था।
जब मैंने अपनी सलवार उतारी तो मेरा लंड देख कर वो एकदम घबरा गई और कहने लगी, हायययय साहिब जी आपका कितना लंबा और मोटा है, मेरे मर्द का तो उससे बहुत छोटा है, वो तो खड़ा होने पर भी इससे आधा होता है। मैंने कहा, कोई बात नहीं, मेरी जितना लंबा मजा भी उतना ही आएगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने उसे चूसने को कहा। पहले उसने मना किया मगर फिर मान गई और किसी माहिर गश्ती की तरह मेरा लंड चूसने और चाटने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। फिर वो कहने लगी, साहिब अब और मत तड़पाइए, जल्दी से घुसा दीजिए इसे मेरी फुद्दी में और फाड़ दीजिए। आज मेरी फुद्दी को बहुत दिन से लंड नहीं मिला, इसे आज बुझा दो मेरी प्यास।
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फिर मैंने उसकी टांगों को अपने कंधों पर रखा और एक झटके से लंड उसकी चूत में उतार दिया। अचानक इतना लंबा और मोटा लंड वो बर्दाश्त न कर सकी और कहने लगी, आराम से साहिब, बहुत मोटा है, दर्द होता है, आराम-आराम से चोदिए ना। फिर मैं आहिस्ता-आहिस्ता चोदने लगा। जब उसे मजा आने लगा तो वो भी मेरा साथ देने लगी और अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। अब उसे दर्द नहीं हो रहा था बल्कि मजा आ रहा था और वो मुझे जोर-जोर से चोदने को कह रही थी। मेरा लंड गोली की तरह उसकी फुद्दी में आ-जा रहा था।
वो पागल हो रही थी। फिर मैंने अपना लंड निकाला और उसे घोड़ी बनाया और लंड उसकी फुद्दी में घुसा कर अच्छी तरह चोदा और उसने भी अच्छी तरह चुदवाया और अपनी बरसों की प्यास बुझाई। फिर मैं बड़ी मुश्किल से झड़ गया। तो वो कहने लगी, लीजिए साहिब मैंने आपके एहसानों का बदला चुका दिया। मैंने कहा, नहीं ये तो सिर्फ मेरे पहले एहसान का बदला था, बाकी के एहसानों का क्या बनेगा? तो कहने लगी, कोई बात नहीं साहिब, वो भी एक-एक करके उतार दूंगी। उसके बाद मैं उसे रोज चोदता और वो भी खुशी-खुशी मुझसे चुदवाती।
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