Girlfriend Boyfriend Romantic Kahani
मैं एक कूरियर कंपनी में ऑफिस असिस्टेंट का काम करता हूँ। मेरी उम्र 25 साल है। मैं दिखने में बहुत ज्यादा स्मार्ट तो नहीं हूँ, लेकिन काफी खूबसूरत हूँ। मैं रोज नए-नए कपड़े पहनता हूँ, स्टाइलिश शर्ट-पैंट, कभी-कभी जींस-टीशर्ट, ताकि ऑफिस में अच्छा लगूँ। Girlfriend Boyfriend Romantic Kahani
हमारी कंपनी बड़े-बड़े पार्सल और सामान को बुक करके रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे पर भेजती है, फिर वो देश-विदेश के दूसरे शहरों में पहुँचते हैं। कभी-कभी मुझे भी वैन में सामान भरकर स्टेशन तक जाना पड़ता था। कंपनी में लगभग 50 लड़के-लड़कियाँ और महिलाएँ काम करती हैं।
सबके बीच हल्का-फुल्का माहौल रहता है, हँसी-मजाक चलता रहता है। इसी कंपनी में नेहा भी काम करती थी। उसकी उम्र करीब 19 साल थी। वो बुकिंग क्लर्क के पद पर थी। नेहा बहुत फैशनेबल लड़की थी। वो भी रोज नए-नए ड्रेस पहनकर आती थी- कभी सलवार-कमीज, कभी कुर्ती-लेगिंग्स, कभी टाइट टॉप और स्कर्ट।
उसका चेहरा इतना आकर्षक था कि देखते ही दिल धड़क जाता था। उसकी काली-काली झील जैसी गहरी और चमकदार आँखें ऐसी थीं कि कोई भी उसे पाने की चाहत कर सकता था। उसकी सुराहीदार गर्दन और बालों का जूड़ा ऐसा लगता था, जैसे मोरनी के सिर पर कलगी लगी हो।
इसे भी पढ़े – भैया के लंड से मैं, मम्मी और बहन तीनो चुदी
वैसे तो उसके बाल इतने लंबे थे कि कमर के नीचे तक लटकते रहते थे, लेकिन ज्यादातर वो जूड़ा बनाती थी और चोटी बनाकर रखती थी। चलते-चलते उसके बाल उसके नितंबों से बार-बार टकराते रहते थे। वो अपने बालों को भी रोज नए-नए तरीके से सजाकर आती थी- कभी पोनीटेल, कभी ब्रेड, कभी खुले छोड़ देती।
जब वो बात करती थी, तो उसकी सुरीली और खनकदार आवाज सुनकर ऐसा लगता था कि बस वो बोलती ही रहे। उसके कुर्ते के भीतर ब्रा में कसे हुए मध्यम आकार के उरोज और उनके नुकीले निप्पल ऐसे खड़े रहते थे, जैसे हिमालय की दो नुकीली चोटियाँ शान से सिर ऊँचा करके खड़ी हों।
और उसकी कमर? उसका तो कहना ही क्या! जब वो चलती थी, तो ऐसा लगता था जैसे कोई मस्त हिरनी चल रही हो। उसका सिर से पैर तक पूरा जिस्म बेहद आकर्षक और खूबसूरत था। जब मैं नेहा को देखता था, तो मेरा दिल उलझने लगता था।
लेकिन काम के चक्कर में मुझे उससे बात करने का मौका बहुत कम मिलता था। बस “हैलो” ही हो पाता था। मैं नेहा से बात करने, उससे घुलने-मिलने के चक्कर में हमेशा रहता था। सच तो ये था कि नेहा मुझे बहुत अच्छी लगती थी। मैं उस पर मरता था।
मैं उसे अपना बनाकर शादी करना चाहता था। मैं यहाँ अपने परिवार के साथ रहता हूँ और नेहा वसई में रहती है। उसके माता-पिता के अलावा उसकी एक छोटी बहन है, जो अभी पढ़ रही है। जब मैं सुबह 10 बजे ऑफिस जाता, तो नेहा से एक बार जरूर “हैलो” करता।
नेहा और बाकी स्टाफ का टाइम टेबल सुबह 10:30 से शाम 6:30 तक रहता था। लेकिन काम ज्यादा होने पर कभी-कभी ओवरटाइम भी करना पड़ता था। जैसे सब ऑफिस में आपस में बातचीत होती है, हल्का-फुल्का हँसी-मजाक चलता है, वैसे ही नेहा और मेरे बीच भी चलता रहता था।
इसे भी पढ़े – कुंवारी बहन को वासना के जाल में फंसाया
लेकिन नेहा को मेरे दिल की अंदर की बात मालूम नहीं थी। मैं उसे दिल से बहुत चाहता था। एक दिन लंच का समय था। सब स्टाफ अपना-अपना लंच बॉक्स निकालकर खाना खाने की तैयारी में थे। नेहा भी खाना खाने बैठी ही जा रही थी कि मैं वहाँ पहुँच गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “अरे वाह! आज तो मैं सही टाइम पर आ गया।”
नेहा ने हँसते हुए कहा, “हाँ-हाँ, आओ ना।”
मैंने नेहा की टेबल के सामने स्टूल डालकर बैठ गया। लंच बॉक्स से एक रोटी निकालकर खाते हुए बोला, “वाह, क्या मस्त खाना है? मजा आ गया।”
नेहा ने खाना खाते हुए कहा, “क्या खाक मजा आएगा? मैं तो साधारण खाना रोज लेकर आती हूँ।”
मैंने कहा, “मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ। बहुत अच्छा है खाना।”
और मैंने रोटी की तारीफ करते हुए कहा। फिर रोटी खत्म करके “थैंक यू” बोला और चलने लगा।
नेहा ने लंच बॉक्स मेरी तरफ सरकाते हुए कहा, “अरे और खाइए ना। एक रोटी से क्या होता है?”
मैंने कहा, “बस बहुत हो गया,” और उठ गया। हाथ धोकर नेहा के पास आया और बोला, “अच्छा नेहा, मैं चलता हूँ। ओके। बाय-बाय।”
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बाय।”
उस दिन के बाद जब भी ऑफिस में हम दोनों आमने-सामने होते, दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते और हाल-चाल पूछ लेते। धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ने लगी।
इसे भी पढ़े – खूबसूरत लड़की साथ बड़े प्यार से सेक्स किया
एक दिन मैं नेहा के पास जाकर बोला, “आज तुम्हारे साथ बैठकर चाय पीने की इच्छा हो रही है। तो पी लेंगे?”
उसने कहा, “मैंने कब मना किया?”
फिर हमने पियून को आवाज दी। चाय आ गई। चाय पीते-पीते हम बात करने लगे।
मैंने पूछा, “नेहा, तुम कहाँ रहती हो?”
उसने कहा, “वसई में।”
मैंने कहा, “मैं भी विरार में रहता हूँ।”
फिर मैंने पूछा, “तुम्हारे घर में कौन-कौन है?”
उसने कहा, “मम्मी-पापा और एक छोटी बहन। वो अभी पढ़ रही है।”
तब तक चाय खत्म हो गई। उस दिन के बाद हम दोनों में नजदीकियाँ बढ़ गईं। जब भी मौका मिलता, हम दोनों आपस में बहुत बातें करते। ऐसे ही दिन बीतते गए और हम दोनों की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला। एक दिन मैं उसे मूवी ले गया।
थिएटर में हमने बहुत रोमांस किया। मैंने उसके हाथ पकड़े, गाल पर किस किया, लेकिन नेहा ने मुझे ऊपर से नीचे तक आने नहीं दिया। वो शरमा रही थी, लेकिन खुश भी थी। फिर एक दिन मैं उसे लेकर लॉज चला गया। दोनों ही अपनी कसर निकालने के लिए बेचैन थे।
इसे भी पढ़े – बड़े घर की लड़की की वासना वाली कहानी
जैसे ही हमने रूम में प्रवेश किया, नेहा मुझे पलंग पर लिपट पड़ी। मैंने अपने जूते निकाले और नेहा को अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने उसके चेहरे को दोनों हाथों में थामकर उसके गालों पर कई चुम्बन ले डाले। उसके होंठों पर चुम्बन किए। नेहा भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।
फिर मैंने ऊपर से ही उसके स्तनों पर हाथ रख दिया और उन्हें दबाने-मसलने लगा। उसके निप्पल्स मेरी हथेलियों में सख्त हो गए। फिर मैंने उसके होंठों का रसपान किया। नेहा की साँसें तेज हो गईं। जब मेरे मन भर गए, तो नेहा ने खुद अपना कुर्ता और ब्रा उतार दिया।
मैं भी नग्न हो गया। नेहा का ये पहला मौका था। बंद कमरे में दूधिया उजाले में मैंने भी पहली बार किसी स्त्री का पूरा बदन देखा था। नेहा का भी पहला मौका था। उसका वास्ता आज मुझसे पड़ा था। थोड़ी ही देर में हम दोनों एकाकार हो गए। दोनों की साँसें तेज हो गईं। कमरा स्वर लहरियों से गूँजने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दोनों के भीतर का तूफान जैसे-जैसे आगे बढ़ता जा रहा था, वैसे-वैसे हमारी स्पीड भी बढ़ती जा रही थी। नेहा जब काफी उत्तेजित हो गई, तो उसने मेरी कमर कसकर पकड़ ली। हम दोनों अपनी मंजिल पाने की भरपूर कोशिश करने लगे। थोड़ी ही देर में आनंद के सागर में तैरते हुए दोनों किनारे पर पहुँच गए।
मैं जोर-जोर से साँस भर रहा था। नेहा की साँसें भी तेज चल रही थीं। उस दिन नेहा लड़की से औरत बन गई थी। उसकी कच्ची कली फूल बन गई थी। जब हम एक-दूसरे से अलग हुए, तो दोनों के चेहरों पर संतोष का भाव था। दोनों के बीच की दीवार ढल चुकी थी।
इसे भी पढ़े – चाची और मामी ने साथ में चुदवाया
हम दोनों आराम से पलंग पर लेट गए। मैंने सोटे-सोटे नेहा के नाजुक अंग से फिर छेड़छाड़ करने लगा। नेहा ने मेरे हाथ को हटाते हुए कहा, “अब नहीं प्लीज… फिर कभी।” मैंने मुस्कुराकर कहा, “ठीक है, जैसे तुम कहो।” लेकिन दोनों की आँखों में अभी भी वो प्यास बाकी थी। हमने एक-दूसरे को गले लगाया और चुपचाप लेटे रहे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखकर बोली, “तुम्हें पता है, मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ।”
मैंने उसके माथे पर किस करते हुए कहा, “और मैं तो तुम पर मरता हूँ, नेहा।”
उस दिन के बाद हमारी मुलाकातें और गहरी हो गईं। कभी लॉज में, कभी छुपकर ऑफिस के बाद, कभी वीकेंड पर बाहर। नेहा अब मुझसे खुलकर बात करती थी। वो शरमाती भी थी और चाहत भी जाहिर करती थी। हम दोनों का प्यार अब सिर्फ शारीरिक नहीं रहा था, बल्कि दिल से दिल तक जुड़ चुका था। मैं अभी भी सोचता हूँ कि एक दिन नेहा को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाऊँगा। वो मेरी हो जाएगी, पूरी तरह। और हम साथ में खुश रहेंगे।
प्रातिक्रिया दे