Traditional Girl Chudai
यह मेरी सच्ची कहानी है। मैं एक अमीर माँ-बाप की खूबसूरत, चिकने बदन वाली, गोरी और सेक्सी फिगर 36-24-38 वाली 19 साल की लड़की हूँ। मुझे जवानी का घमंड था और दौलत का नशा भी, पर माँ-बाप का डर भी बहुत था। कॉलेज में लड़कों से फ्लर्ट करने की हिम्मत नहीं थी, पर इच्छा बहुत तेज थी। Traditional Girl Chudai
लेकिन एक दिन जब मैंने रात को चुपके से मम्मी-पापा की बात सुनी, तो सारा डर निकल गया। पापा मम्मी से कह रहे थे, “आराधना अब जवान हो गई है, इसे जरा मॉडर्न कपड़े पहनना सिखाओ। ये तो चर्च की नन जैसी रहती है।”
माँ बोलीं, “मैं इसे 15 दिन के लिए मुंबई ले जाती हूँ, इसके मामा के पास। और धीरे-धीरे सब सिखा दूँगी। पर आप इसे दिखावटी गुस्सा करना, ताकि ये और ज्यादा बोल्ड कपड़े पहनेगी क्योंकि जवान लड़कियों को मना करना बुरा लगता है।”
मैं बहुत खुश हो गई। अगले ही दिन ब्रेकफास्ट टेबल पर माँ ने पापा से कहा, “हम 15 दिन के लिए मुंबई हो आएँगे।” मैंने माँ से कहा कि छुट्टी में चलेंगे, पर माँ ने कहा कि गर्मी में मुंबई में मजा नहीं आएगा। मैंने झूठी नाराजगी दिखाते हुए तैयार हो गई। हम अगले दिन की फ्लाइट से मुंबई आ गए।
मामी बहुत मॉडर्न ख्याल वाली हैं। मामा की मर्जी से वो साड़ी नाभि से तीन इंच नीचे और बहुत छोटा ब्लाउज पहनती हैं। घर में नौकरों को भी फ्री शो मिलता रहता था। मैं दोपहर में सोने का नाटक कर रही थी, तभी मम्मी ने मामी को आने का मकसद बताया। मामी बोलीं, “15 दिन में इसे मैं नंगी घुमा दूँगी, पर तुम बीच में मत बोलना।”
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ये सुनकर मैं बहुत खुश हुई कि अब आएगा जवानी का मजा। शाम को मामी बोलीं, “चलो, तुम्हें घुमा कर लाते हैं।” हम बाजार गए। मामी ने मुझे एकदम टाइट लो-वेस्ट जींस, छोटे टॉप, मिनी स्कर्ट और ढेर सारे स्टाइलिश कपड़े खरीदकर दिए। मैंने ट्रायल रूम में बदमाशी की कि टॉप और स्कर्ट को बड़ा बताकर एक साइज और छोटा ले लिए।
मामी ने कहा, “जींस और टॉप पहनकर चलो।” उसमें मेरा रूप खुलकर उभर आया। लो-वेस्ट टाइट जींस में मेरा पेट दिख रहा था, स्लीवलेस बड़े गले का छोटा टॉप जिसमें पीठ नंगी दिख रही थी। हाई हील सैंडल पहनने के बाद तो लगा कि मेरी गांड और बूब्स कपड़े फाड़कर बाहर आ जाएँगे।
मामी ने मुझे क्रॉसरोड मॉल दिखाने के बहाने पूरे मॉल में घुमाया और मेरे बदन की खुली नुमाइश लगाई। लोग और लौंडे मुड़-मुड़कर देख रहे थे। मैं मन ही मन खुश हो रही थी। पर मामी को शक न हो इसलिए मैंने नाराजगी दिखाई कि “मामी, बहुत बदन दिख रहा है।”
मामी बोलीं, “भगवान की दी हुई खूबसूरती दिखाने में बुराई क्या है? भगवान खूबसूरत ही क्यों बनाता?” गाड़ी में ड्राइवर भी बैक मिरर में मुझे देख रहा था और मामी भी मंद-मंद मुस्कुरा रही थीं। घर पहुँचकर माँ ने भी घुसते ही टोका, “ये तुमने क्या पहना है?” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने मन ही मन कहा, “खुद ही तो चाहती हैं, पर कैसा ढोंग करती हैं।” मन ही मन सोचा कि अब जब जिस्म दिखाने की छूट मिल गई है, तो देखना मैं भी अब सेक्स का खुला मजा लूँगी और देखूँगी कि मेरे में भी क्या दम है, कितनों को निपटा सकती हूँ।
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शाम को मामा को स्कर्ट-टॉप पहनकर दिखाया तो मैंने तिरछी नजर से उनके लंड को खड़ा पाया। अगले दिन मामी ने अकेले में मुझे कहा, “छिनाल, स्कर्ट और टॉप 1 नंबर और छोटा लिया और सयानी बनती है?” मैं भी समझ गई कि मामी को चूतिया बनाना आसान नहीं।
मैंने कहा, “मामी, मेरे दिल की बात आपने समझ ली, पर माँ को मत बताना।” मामी बस मुस्कुरा दीं। मामी बोलीं, “मुझे सब समझ आता है। अभी तो मेरे सामने बच्ची है, पर देखना मैं तुझे मर्द को मुट्ठी में रखना, फ्लर्ट करना और जिस्म की नुमाइश करना सब सिखा दूँगी। मर्दों को तो नंगा बदन देखना अच्छा लगता है, फिर वो बाप भी क्यों न हो। हम औरतों को भी इस कमजोरी का फायदा उठाना चाहिए और ऐश करना चाहिए।”
मामी आगे बोलीं, “मर्द को भगवान ने चोदने के लिए बनाया और औरत को चुदवाने के लिए। तो चाहे एक हो या अनेक, क्या फर्क पड़ता है? मर्द औरत पर चढ़ेगा, चूत में लंड घुसाएगा, 5-7 मिनट कुदाई करेगा, मूथ झाड़ेगा, चूचियाँ दबाएगा और ठंड पड़ जाएगा। पर औरत एक बार में 8-8 मर्दों की प्यास बुझाने की ताकत रखती है और इसका जमकर फायदा लेना आना चाहिए। मर्द की जगह टाँगों के बीच में रखो और ज्यादा फायदा लेना हो तो लंड को चूस लो, सब सीधे रहेंगे।”
मैं मामी के इस दर्शन से हैरान थी, पर चूत के गहरे रहस्य समझ में आ रहे थे। अगले दिन मैंने मामी से पूछा, “मामी, क्या आप भी?” मामी बोलीं, “तेरे शहाने मामा से रुपये निकालने हों तो घर में थोड़े से कपड़े पहनकर जलवा दिखाओ।
जब नौकर को नंगा बदन दिखता है तो अपने आप बोलते हैं- लो पैसे ले लो, पर कपड़े पहन लो। ये मर्द अपनी बीवी को नंगा दूसरों के सामने नहीं देख सकते, पर दूसरी की औरत को नंगा ही चाहते हैं। कल रात ही तुम्हारे बारे में बोल रहे थे कि जब तक यहाँ है, तब तक पूरे कपड़े मत पहनने देना।”
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मैंने भी ठान ली कि वापस भोपाल जाने से पहले 5-7 लंड का मजा लेकर प्रैक्टिस करनी चाहिए, तभी थोड़ी हिम्मत खुलेगी। उसी समय घर का नौकर राजू सामने से निकला। ये मेरा पहला शिकार होगा… अगले दिन मैंने मामी के दर्शनशास्त्र की ट्रायल सोची। सब लोग बाहर गए, मैं घर पर रुकी।
नहाने के बाद सफेद छोटी सी स्कर्ट और खुली पीठ वाला जरा सा टॉप पहना। गोरी बाहें नंगी, पीठ नंगी, जाँघें कपड़े फाड़कर बाहर आने को बेताब, बूब्स उभरे हुए। राजू के सामने खूब डोली। तीन घंटे में राजू का लंड फड़फड़ा उठा। उसने मुझे किचन में बाँहों में घेर लिया, चूमा। बूब्स दबाए।
चूत पर हाथ फेरा और बोला, “साली कुतिया, चार दिन से नंगी घूम रही है। मेरा लंड दुखी हो रहा है। रात को मेरे कमरे में नंगी होकर, कुतिया की तरह चार पैरों पर रेंगते हुए आना और चुदवाना, समझी? अब तो जब तक यहाँ रहेगी, मेरे साथ-साथ तुझे माली विजय और चौकीदार बहादुर से भी चुदवाऊँगा। तेरे मुँह में, गांड में और चूत में हमारा मूथ भर देंगे।”
मैंने कहा, “राजा, खाली बातें करोगे या इस जवान शरीर का मजा लोगे? मुझे जरा अच्छे से मसल-मसलकर चोदना और चुदवाना, ताकि मुझे भी जवान होने का एहसास हो जाए।” राजू हैरान था कि वो शिकारी था या शिकार। रात हुई। मैंने सबके सोने के बाद चुपके से राजू के कमरे में जाकर दरवाजा खटखटाया।
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अंदर जाकर मैंने टॉप और स्कर्ट उतार दी। पूरी नंगी होकर चारों हाथ-पैरों पर रेंगते हुए उसके पास गई। राजू ने मुझे उठाया, बेड पर पटका। पहले मेरे होंठ चूसे, जीभ अंदर डालकर चाटा। फिर मेरे बूब्स को जोर-जोर से दबाया, निप्पल्स को चूसा, काटा। मैं सिसकार रही थी- “आह्ह… राजू… और जोर से… चूसो…”
उसने मेरी टाँगें फैलाईं। मेरी चूत पहले से गीली थी। उसने जीभ से चाटना शुरू किया। क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई, चूत के अंदर डाली। मैं कराह रही थी- “आह्ह… ओह्ह… राजू… अंदर डालो… लंड डालो…” उसने अपना मोटा काला लंड निकाला। करीब 7 इंच लंबा, मोटा। उसने मेरी चूत पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर डाला। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पहले धक्का लगा तो दर्द हुआ, पर मैंने टाँगें और फैलाईं। उसने पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। मैं चिल्लाई- “आह्ह्ह… मादरचोद… फाड़ दो… जोर से चोदो!” राजू ने स्पीड बढ़ाई। जोर-जोर से ठोकने लगा। मेरे बूब्स उछल रहे थे। वो उन्हें दबाता, चूसता।
मैं उसकी कमर पर टाँगें लपेटकर और जोर से धक्के ले रही थी। करीब 15 मिनट बाद उसने कहा, “कुतिया, अब मुँह खोल।” मैंने मुँह खोला। उसने लंड निकालकर मेरे मुँह में डाला। मैंने जोर-जोर से चूसा। उसका मूथ मेरे मुँह में फूट पड़ा।
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गर्म-गर्म वीर्य मेरे गले में गया। मैंने सब निगल लिया। फिर उसने मुझे पलटा, गांड ऊपर की। स्पिट करके गांड में लंड लगाया। धीरे-धीरे अंदर डाला। दर्द हुआ, पर मजा भी आ रहा था। वो गांड मारने लगा। मैं कराह रही थी- “आह्ह… राजू… गांड फाड़ दो… चोदो मुझे…” वो जोर-जोर से ठोकता रहा। आखिर में गांड में ही मूथ मार दिया। उस रात हमने तीन राउंड किए। सुबह होने से पहले मैं वापस अपने कमरे में आ गई। अगले दिन माली विजय और चौकीदार बहादुर को भी मौका मिला।
तीनों ने मिलकर मुझे दिन-रात चोदा। कभी चूत में, कभी गांड में, कभी मुँह में। मैंने सबका मूथ पिया, सबको चूसकर संतुष्ट किया। 15 दिन में मैंने 7-8 बार अलग-अलग लंड का मजा लिया। अब मैं बिल्कुल खुल चुकी थी। वापस भोपाल जाकर भी मैं अब कॉलेज में लड़कों से फ्लर्ट करती हूँ, और जब मौका मिलता है तो खुलकर चुदवाती हूँ। मामी का दर्शन सच साबित हो गया- औरत की ताकत अनगिनत मर्दों की प्यास बुझाने में है। और मैं अब उस ताकत को जमकर इस्तेमाल करती हूँ।
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