Desi Virgin Hotty Fuck XXX
हाय, मैं जयंत हूँ। आज मैं अपनी रियल स्टोरी बताने जा रहा हूँ। पहले अपना इंट्रो करवा दूँ- मैं 23 साल का हूँ, हाइट 5 फीट 6 इंच, वजन ज्यादा नहीं 54 किलो है, जो कोई भी लड़की उड़ा सकती है। वैसे दिखने में काफी स्मार्ट हूँ और जिस-जिस लड़की को मैंने चोदा है, वो कहती है कि तुम्हारा लंड बहुत ही मस्त है। ये मेरे बारे में थोड़ा-सा बता दिया। अब ज्यादा अपने बारे में नहीं लिखता, अपनी स्टोरी पर आता हूँ… Desi Virgin Hotty Fuck XXX
आज तक मैंने अपनी भाइयों की साली को जमकर चोदा है- मेरे सगे भाई की दो साली, मेरी मौसी के लड़के की साली, मेरे अंकल के लड़के की साली… तो आप मुझे सालीचोद भी बुला सकते हो। आज मैं अपनी मौसी के लड़के की साली को कैसे चोदा, वो बताता हूँ।
मौसी के लड़के का नाम है अरुण और उसकी साली का नाम है वैशाली। वैसे वैशाली दिखने में धांसू है, मगर उसकी बॉडी इतनी टाइट है कि किसी को भी चोदने का मन करे। अरुण की शादी में जब हम गए थे, तब ही मैंने वैशाली को देखा। भाई की साली इतनी मस्त हो और शादी में कोई हंगामा न हो, ऐसा कैसे चल सकता है? तो मैंने एक गंदा मजाक उसके साथ किया।
वो जो कुर्सी पर बैठी थी, उसके नीचे मैंने पिन लगा दी। और जब वो उस पर बैठी तो जाहिर है, पिन उसके मस्त कुल्हों में घुस गई और वो दर्द से छटपटाने लगी। क्या हुआ, देखने के लिए वो बगल वाले कमरे में गई। मैं भी उसके पीछे-पीछे चला गया।
इसे भी पढ़े – माँ चाचा ने रंगरेलियां मनाई
वहाँ उसने अपनी चोली ऊपर करके देखा और वहाँ से थोड़ा खून निकला हुआ था। उसने सब साफ करके कोई क्रीम लगाई और नीचे आई। मैं भी उसके पास जाकर बोला, “सॉरी।” उसने कहा, “किस बात के लिए सॉरी?” मैंने कहा, “जो चुभन आपको लगी, वो मैंने लगाई थी।”
वो पहले मुझे घूरने लगी, फिर सेक्सी स्माइली देकर हल्के से मुझे छूते हुए निकल गई। और क्या चाहिए? दोपहर को ही जब शादी खत्म हो गई, मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया। थोड़ी-बहुत इधर-उधर की बात की और उसे अपना सेल नंबर दे दिया। उसका नंबर भी ले लिया।
जब बारात के जाने का टाइम था, तब भीड़ में ही मैंने उसके चूची को छू लिया और वो बात का उसे भी पता चला, मगर उसने सिर्फ मुस्कुरा दिया। अब हमारे यहाँ ऐसा होता है कि बहू के साथ कोई हमारे यहाँ आता है तो भाभी के साथ उसकी बहन यानी वैशाली हमारे घर आई।
रात को जब भाई और भाभी अपने कमरे में जा रहे थे, तो मैं भाई को लेके और वो अपनी दीदी को लेके चुदवाने सामने से आ रही थी। हमने भाई-भाभी को एक कमरे में बंद कर दिया। मगर फिर मुझे मस्ती चढ़ी और मैंने वैशाली से कहा, “क्यों ना हम भाई-भाभी को थोड़ा परेशान करें?” वो भी मान गई।
मैंने कहा, “घर के पीछे चलो।” हम दोनों घर के पीछे गए, जहाँ भाई-भाभी का रूम पड़ता था। वहाँ एक खिड़की भी थी। वहाँ जाकर हम दोनों खड़े हो गए। हम तो भाई-भाभी को परेशान करने गए थे, मगर हम पहुँचे उससे पहले ही भाई-भाभी पूरे नंगे हो चुके थे। और ये सब हम दोनों ने देखा।
इसे भी पढ़े – रीमा भाभी चुदवाने के मूड में थी
वैशाली को सब अच्छा लगा। मैंने कहा, “अब कुछ नहीं होगा।” वैशाली तो देखने में भी मस्त थी। तो मैंने मौका देखकर कहा, “क्या देख रही हो? अपनी बहन की चूत फटते हुए?” अब वो भी मुझसे घुल गई थी। उसने भी सामने जवाब दिया, “नहीं, तुम्हारे भाई का लंड तो…”
मैंने कहा, “भाई से भी ज्यादा चिकना लंड तो मेरा है, इसको देखो।” वो हँस पड़ी। मैंने सोचा- हँसी तो मानो फँसी। मैंने उसे पीछे से ही अपनी आगोश में ले लिया। वो छटपटाने लगी, मगर अब मैं थोड़ा छोड़ने वाला था। मैंने उसे पीछे से कान काटा और एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
धीरे-धीरे उसके बूब्स को प्रेशर करता रहा। तब तक तो वो गर्म हो गई थी। मैंने कहा, “चलो टेरेस पर चलते हैं।” हम दोनों टेरेस पर आ गए। वहाँ मैंने उसे एक लिप किस की। वाह! क्या रसीले होंठ थे! मैंने 10 मिनट तक उसके होंठ चूसता रहा। बाद में धीरे से उसकी चोली खोल दी और उसके बूब्स को मसलने लगा।
क्या उसकी निप्पल थी- वाह यम्मी! मैंने दोनों निप्पल बारी-बारी चाटी। अब वो भी गर्म हो रही थी। तो उसने मेरे लंड को पैंट के अंदर से ही छुआ। उसके छूते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने अपना हाथ जल्दी से उसकी लाली चलाने लगा और उसकी गर्म साँसों को अपनी साँसों में समेटता रहा।
फिर धीरे से मैं नीचे बैठा और उसके पेटीकोट के अंदर चला गया। धीरे से उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से ही छुआ- मानो मक्खन बने हुए हों। अब मैंने महसूस किया कि उसकी पैंटी गीली हो गई है। मौके की नाज़ुकता देखकर मैंने उसे वहाँ पड़े खाट पर ही लिटा दिया।
इसे भी पढ़े – आंटी ने अपनी दूधभरी चुचियों को चुसवाया
एक-एक करके सब कपड़े उतार दिए और उसकी चूत को चूसने लगा। अब वो भी “आह्ह… मामा… अह्ही…” कर रही थी और मछली की तरह उछल रही थी। मुझे पता था कि अब वैशाली चुदवाने के लिए तैयार है। फिर भी मैंने उसकी चूत चाटना नहीं छोड़ा और उसकी मीठी “आह्ह… उह्ह… अह्हमा…” की कराहते सुनता रहा।
अब वैशाली का सब्र टूट रहा था। उसने मेरे बाल पकड़कर ऊपर उठाया और बोली, “अब रितु, हमसे नहीं रहा जाता, कुछ करो।” मैंने कहा, “क्या बोलो? क्या करना है?” वो शरमा गई और कुछ न बोली। मगर मैं भी उसके पास से बुलाना चाहता था। तो मैंने उसके कान पर काटा और उसके होंठ पर अपने होंठ लगा दिए।
अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और दोनों हाथ उसके बूब्स पर ले गया। अब तो वो उछल रही थी- मानो अब वो मुझे चोदेगी। तब मैंने एक हाथ उसकी चूत के पास ले जाकर धीरे से चूत में उँगली डाली। वो “श्श्श…” करने लगी। अब उसका सब्र खत्म था। उसने अपने हाथ को मेरे हाथ पर लाकर दबा दिया।
मैं भी गर्म हो रहा था, मगर शुरुआत वैशाली से करवाना चाहता था। मेरा इंतज़ार खत्म आ गया। अब वैशाली इतनी गर्म हो रही थी कि ठीक से बोल नहीं सकती थी। सिसक-सिसक कर बोली, “तुम्हारा लंड… अब मेरी चूत में डाल ही दो।” मैंने कहा, “लो, खुद ही डाल दो जितना चाहो।”
वो खड़ी हो गई, मेरी पैंट निकाली, लंड को अपने हाथ में ले लिया और बोली, “ये तो बड़ा चिकना है, इसे अब मेरी चूत में डाल ही दो।” मैंने उसे सीधा लिटाया। उसके दोनों पैर खाट के नीचे थे, तो उसकी चूत उभरकर सामने आ गई थी। अब तक तो इतनी सूज गई थी कि मानो लावा उबल रहा हो।
फिर मैंने कहा, “चलो वैशाली, जितना चाहे उतना ले लो।” उसने मेरे लंड को पकड़कर उसकी चूत पर रखा और बोली, “धीरे से डालो, पहली बार किसी से चुदवा रही हूँ।” मैंने कहा, “फिकर न करो वैशाली, मेरा चिकना लंड बहुत अच्छी तरह जानता है क्या करना है।” और ऐसा ही कहते मैंने हल्का-सा धक्का मारा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसे भी पढ़े – भाभी ने देवर को कामशास्त्र के आसन सिखाये
वो “श्श्शी…” कर गई। मैंने पूछा, “दर्द हुआ?” बोली, “हाँ, थोड़ा-बहुत।” फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा। हमें पता था कि दर्द तो अब होने वाला है। मैंने एक बार लंड निकाला, फिर से सेंटर पर लगाया। मैं भी उसके सब्र का इम्तिहान ले रहा था। उसके क्लिट पर लंड मसलने लगा।
अब तो वो इतनी गर्म हो गई थी कि खुद अपनी गांड उछालकर लंड लेने की कोशिश कर रही थी। अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था। मैंने कहा, “अब हो जाओ तैयार मेरे लंड लेने को।” वो बोली, “पिछले 1 घंटे से लेना है, पर तुम कहाँ देते हो? जल्दी से यार मेरी चूत में अपना लंड डालकर उसे शांत करो।”
मैं भी अब पोजीशन में आ गया। धीरे से उसकी चूत में अपना लंड लगाया और धीरे से पुश किया। वो इतनी उतावली थी कि खुद उछलकर लंड लेना चाहती थी। मैंने भी ज्यादा टाइम नहीं लिया, हल्के से धक्के से लंड डाला और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा।
वो अब “आह्ह… उहू… माँ… मार गई… डाल दो ना… डाल दो ना” ऐसा बोल रही थी। अब मैं भी धीरे से धोड़ा लंड बाहर निकालकर जोर से झटका दिया। मैंने उसे लड़की से औरत बना दिया। उसका सील टूट गया और वो दर्द से कराहने लगी। अब मैं कहाँ थमने वाला था? मैंने धीरे-जोर के झटके मारने लगा।
तीन बार में तो पूरा लंड डाल दिया। वो “आह्ह… उह्ह… माँ… मार गई… निकालो… अब नहीं सहा जाता… निकालो” करती रही। बाद में मैं भी थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा। जब उसका दर्द कम हुआ तो अब वो ही अपनी चूत हिला रही थी। अब मैं भी तैयार था। मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
इसे भी पढ़े – मेरे दोस्त से रंडी बन कर चुदी भाभी
उसकी “आह्ह… उह्ह… माँ… एह… आई लव यू… आह्ह” ऐसे शब्द सुनकर मेरी स्पीड बढ़ने लगी। 20 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “अपना पानी कहाँ निकालूँ?” उसने कहा, “अंदर ही डाल दो और चूत को शांत करो।” मैंने 2 घंटे में उसे 6 बार झड़ा चुका था। वो इतनी थक गई थी कि मेरा कम निकलने के बाद वो 30 मिनट तो मेरे सीने पर सर रखकर सोई रही। बाद में हम दोनों एक साथ उठे। उसने मेरे लंड को साफ किया और बोली, “इतना बड़ा लंड मेरी चूत में तूने डाल दिया.”
और चूसने लगी- मानो लॉलीपॉप हो। बाद में मैंने अपनी पैंट पहनी और उसने भी कपड़े पहने। वो अब चलने लगी, मगर उसकी चूत में दर्द की वजह से ठीक से चल नहीं पा रही थी। एक पैर इधर तो उधर डाल रही थी। मैं उसके पीछे था और थोड़ा हँस पड़ा। उस दिन भाई-भाभी के साथ हमारी सुहागरात मना ली। बाद में वैशाली 3 दिन तक रुकी और 3 दिन में मैंने उसे 14 बार चोदा। अब वैशाली के हर रोज़ फोन आते हैं और फोन सेक्स होता है। अभी भी वो मेरे चिकने लंड की तारीफ करती है।
प्रातिक्रिया दे