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You are here: Home / Group Mein Chudai Kahani / दीदी जीजू के चुदाई वाले ग्रुप की मेम्बर बनी

दीदी जीजू के चुदाई वाले ग्रुप की मेम्बर बनी

अगस्त 30, 2025 by hamari Leave a Comment

Gang Bang Fuck

मेरा नाम है खुशबू. आज मैं आप को मेरी कहानी सुनाने जा रही हूँ की कैसे मुझे मेरा जीवन साथी मिला और कैसे उस ने मुझे पहली बार चोदा. ये घटना घटी तब मैं 23 साल की थी. शादी नहीं हुई थी लेकिन कुंवारी भी नहीं थी. जब मैं 18 साल की थी तब मेरे एक कजिन ने मुझे पहली बार चोदा था. Gang Bang Fuck

हम दोनों चुदाई से अनजान थे. दोनों में से एक को पता नहीं था की लंड कहाँ जाता है और कैसे चोदा जाता है. मेरी कोरी चूत में यूँ ही उस ने लंड घुसेड़ दिया था और तीन चार धक्के में झड़ गया था. मुझे बहुत दर्द हुआ था जो तीन चार दिन तक रहा था. उस के बाद दो और लड़कों ने मुझे चोदा था लेकिन मुझे कोई खास मजा आया नहीं था.

हुआ क्या की मुझे भोपाल में BA में एडमिशन मिला. रहने के लिए लेडीज हॉस्टल में तुरंत जगह ना मिली. मुझे चार महीना मेरी कजिन दीदी नीलम के घर रहना पड़ा. मैं खूब खूब आभारी हूँ दीदी की जिस ने मुझे आश्रय दिया और जिस की वजह से मैं मेरे पति को पा सकी जिस की वजह से ओर्गास्म का स्वाद ले सकी.

मेरे बारे में बता दूँ. पांच इंच फ़ीट छः इंच लम्बाई के साथ मेरा वजन है कुछ 62 किलो है मैं पतली लड़कियों में से नहीं हूँ जरा सी भरी हूँ. मेरा रंग गोरा है बाल और आँखें काले हैं. चहेरा गोल है. मुंह का ऊपर वाला होठ जरा सा आगे है और निचे वाला मोटा भरावदार है. मेरी सहेलियां कहती है की मेरा मुंह बहुत किस्सेबल दिखता है.

मेरा सब से ज्यादा आकर्षक फीचर है मेरे स्तन. जो मुझे देखता है उस की नजर पहले मेरे स्तनों पर जम जाती है. 36 साइज के स्तन पुरे गोल है और जरा भी झुके हुए नहीं है. मेरी अरेओला और निप्पल्स छोटी हैं और बहुत सेंसिटिव हैं. कभी कभी मेरी निप्पल्स ब्रा का स्पर्श भी सहन नहीं कर सकती है.

मेरा पेट भरा हुआ है लेकिन नितम्ब भरी और चौड़े हैं. मेरे हाथ पाँव चिकने और नाजुक हैं. अब क्या रहा मेरी भोस, इस के बारे में में नहीं बताउंगी मेरे वो कहेंगे. खैर मैं नीलम दीदी के साथ रहने चली आयी. उस के पति मेरे जीजू डॉ. मदन भोपाल में प्रैक्टिस करते थे. वो दीदी के फूफी के लडके भी लगते थे.

दीदी और जीजू सेक्स के बारे में बिलकुल खुले विचार के थे. दीदी ने खुद ने मुझे कहा था की कैसे मदन के एक दोस्त गौतम को लंड खड़ा होने की कुछ बीमारी थी और इलाज के जरिये कैसे दीदी ने गौतम से चुदवाया था. अपने पति के सिवा गैर मर्द का वो पहला लंड था जो दीदी ने लिया था.

इस के बाद दीदी ने अपने बॉस पर तरस खा कर उस से भी चुदवाया था. दीदी और जीजू का एक क्लोज्ड ग्रुप था जो अक्सर ग्रुप चुदाई करता था. नए मेंबर की पूरी जान पहचान के बाद ही ग्रुप में शामिल किया जाता था. शुरू शुरू में शर्म के मारे मैं दीदी और जीजू से दूर रही ज्यादा बात भी नहीं करती थी.

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जीजू हर रोज मेरे स्तन की साइज के अंदाज़ लगाते थे लेकिन कभी उन्होंने छेड़छाड़ नहीं की थी. दीदी धीरे धीरे मेरे साथ बातें बढ़ाने लगी और कभी कभी डर्टी जोक्स भी करने लगी. ऐसे ही एक मौके पर उसने मुझे बताया था की चुदाई के बारे में उनकी क्या फलसफा है. एक दिन कॉलेज जल्दी छुट गयी और मैं जल्दी घर आ पहुंची.

दोपहर को घर पर कोई होगा ये मैंने सोचा न था. मेरे पास चाबी थी दरवाजा खोल मैं अंदर गयी. सिटिंग रूम के दरवाजे में ही मेरे पाँव थम गए जो सीन मेरे सामने था उसे देख कर मैं हिल ना सकी. सोफे पर जीजू लेते थे. उनके पाँव जमीं पर थे. पतलून निचे सरका हुआ था. दीदी उन पर सवार हो गयी थी.

जीजू का टाइट लंड दीदी की चूत में फसा हुआ था. दीदी कूल्हे उठा गिरा कर लंड चूत में अंदर बाहर करती थी. जब दीदी के कूल्हे ऊपर उठाते थे तब जीजू का मोटा सा आठ इंच लम्बा सा लंड साफ़ दिखाई देता था. जब कूल्हे निचे गिराती थी तब पूरा लंड चूत में घुस जाता था.

दीदी के स्तन जीजू के मुंह पास थे और मेरे ख्याल से जीजू उस की निप्पल्स भी चूस रहे थे. मैंने ऐसा खेल कभी देखा नहीं था. मेरा दिल धक धक करने लगा बदन पर पसीना छा गया और भोस ने पानी छोड़ दिया. इतने में जीजू ने मुझे देख लिया. चुदाई की रफ़्तार चालू रखते हुए वो बोले “अरे खुशबू कब आयी, आजा आजा शरमाना मत.”

मैं तुरंत होश में आयी और भाग कर मेरे कमरे में चली गयी. दूसरे दिन जीजू प्रैक्टिस पर गए तब मैंने दीदी से कहा “दीदी मुझे माफ़ कर देना मैं अनजाने में आ पहुंची थी. मुझे पता नहीं था की जीजू उस वक्त घर पर होंगे और तुम… तुम….” दीदी ने मुझे आश्वासन दिया कि कुछ बुरा हुआ नहीं था.

वो बोली “देख खुशबू सेक्स के बारे में हम बिलकुल खुले विचार के हैं. चोदने चुदवाने से हम संकोच नहीं रखते हैं. हम दोनो बिच समझौता भी हुआ है की तेरे जीजू किसी भी लड़की को चोद सकते हैं और मैं किसी भी मन पसंद मर्द से चुदवा सकती हूँ. लेकिन ऐरे गैर के साथ हम चुदाई नहीं करते. हमारा एक छोटा सा ग्रुप है जिन के मेंबर्स आपस में ग्रुप सेक्स करते हैं.”

मुझे ये सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ.

मैंने पूछा “तो तुम ने जीजू के अलावा और किसी से….”

दीदी: “हाँ चुदवाया है और तेरे जीजू ने दूसरी दो लड़कियों को चोदा भी है.”

मैं: “आप के ग्रुप में कोई भी शामिल हो सकता है?”

दीदी: “नहीं आने वाला मर्द या लड़की सब को मंजूर होना चाहिए. ज्यादातर हम जाने पहचाने व्यक्ति को ही बुला लेते हैं.”

मैं: “मैं पूछ सकती हूँ की कौन कौन है आपके ग्रुप में?”

दीदी: “अभी नहीं. वक्त आने पर बताउंगी.”

मैं: “किस ने ये ग्रुप शुरू किया और कैसे?”

दीदी: “मदन के एक दोस्त को लंड ना खड़े होने की बीमारी थी. इलाज के जरिये मैंने उसे चुदवाया. मदन वहां मौजूद थे. दोस्त के बाद तुरंत मदन ने मुझे चोदा. उनको और ज्यादा मजा आया. वो कहने लगे की दूसरे लंड से चुदाई चूत को चोदने में और ज्यादा मजा आया.

उन के दोस्त ने वचन दिया की वो ऐसी लड़की से शादी करेगा जो मदन से चुदवाने तैयार हो. ऐसी मिल भी गयी और उन की शादी भी हो गयी. वचन के मुताबिक दोस्त की पत्नी ने मदन से चुदवाया. उस वक्त मैं और दोस्त भी मौजूद थे हम ने भी मस्त चुदाई कर ली. बाद में दूसरे दो कपल्स शामिल हुए.”

मैं: “एक बात पूछूं?”

दीदी: “क्या?”

मैं: “जिसे ये लोग ओर्गास्म कहते हैं वो क्या होता है?”

दीदी: “ओर्गास्म तो महसूस किया जाता है. दुनिया का सब से उत्तम आनंद ओर्गास्म में है. कई लोग उसे ब्रह्मानंद का भाई कहते हैं तो कई लोग उसे छोटी मौत कहते हैं. ओर्गास्म दौरान व्यक्ति अपने आप को भूल जाती है और बस आनंद ही आनंद का अनुभव होता है.”

मैं: “हर एक च…चू…चुदाई के वक्त ओर्गास्म होता है?”

दीदी: “ना. आदमी को होता है. उस वक्त लंड से वीर्य की पिचकारियां छुटती है. लड़की को ना भी हो एक बार हो या एक से ज्यादा भी हो. चोदने वाला सही टेक्निक जनता हो तो लड़की को एक बार की चुदाई में दो या तीन ओर्गास्म दे सकता है.”

मैं: “जीजू कैसे हैं?”

दीदी: “बहुत अच्छे.”

मैं: “आप लोग रोज… रोज….?”

दीदी: “हाँ रोज जीजू मुझे चोदते हैं कम से कम एक ओर्गास्म होने तक. कभी कभी दो ओर्गास्म भी करवाते हैं. तूने अब तक चुदवाया नहीं है क्या?”

मैं: “सिर्फ तीन बार. बहुत दर्द हुआ था पहली बार. थोड़ी सी गुदगुदी हुई थी वहां इन से ज्यादा कुछ नहीं.”

दीदी: “वहां भोस में?”

मैं: “हाँ जब… जब.. वो छोटे दाने से टच होता है न?”

दीदी: “वो छोटे दाने को क्लाइटोरिस कहते हैं. आदमी के लंड बराबर का अंग है वो. अच्छी तरह क्लाइटोरिस को उत्तेजित करने से ओर्गास्म होता है. छोड़ ये बातें. साफ़ साफ़ बता चुदवाना है अपने जीजू से?”

दीदी की बात सुनते ही मैं शर्मा गयी. जीजू का लंड याद आ गया. तुरंत मेरी चूत ने संकोचन किया और क्लाइटोरिस ने सर उठाया. निप्पल्स कड़ी होने लगी. मैं कुछ बोल न सकी. दीदी मेरे पास आयी. मेरे स्तन थाम कर बोली “तूने पैडेड ब्रा तो नहीं पहनी है ना? कितने अच्छे है तेरे स्तन. तेरे जीजू कहते हैं की ऐसे स्तन पाने के लिए तूने काफी चुदाई की होगी.”

मैं: “दीदी मैं तो मोटी हूँ कौन पसंद करेगा मुझे. सब लोग पतली लड़कियां ढूंढते हैं.”

दीदी: “अरे थोड़ी सी मोटी हो तो क्या हुआ. खूबसूरत जो हो कोई न कोई मिल जाएगा. चुदवाने की इच्छा हो तो बोल मैं मदन से बात करुँगी.”

मैंने धीरे आवाज से हाँ कह दी. उस शाम खाना खाते समय मैं जीजू से नजर नहीं मिला सकी.

वो तो बेशरम थे. बोले “क्या ख्याल है साली जी, पसंद आया मेरा लंड?”

दीदी: “मदन छोड़िये बेचारी को. बहुत शरमाती है. अब तक उसने तीन बार ही लंड लिया है.”

जीजू: “अच्छा तब तो कुंवारी जैसी ही है ऐसा न?”

दीदी: “हाँ ऐसा ही. और उसने ओर्गास्म महसूस नहीं किया है. वो ऐसे लडके को ढूंढ रही है जो उसे अच्छी तरह से चोदे और ओर्गास्म करवाए.”

जीजू: “अरे वह खुशबू अपने जीजू को छोड़ दूसरे से चुदवाने चली हो.”

मैं: “ऐसा नहीं है. मुझे डर था की आप ना बोले तो….?”

जीजू: “ना बोलूं, तेरे जैसी खूबसूरत साली को चोदने से कौन मुर्ख जीजू ना बोलेगा, हो जाय अभी.”

बोले बिना मैंने सर झुका दिया. मेरे होठों पर की मुस्कान मैं रोक ना सकी और जीजू से छिपा ना सकी. जीजू उठ कर मेरी कुर्सी के पीछे आये मेरे कन्धों पर हाथ रख कर आगे झुके और मेरे गाल पर किस करने लगे. मुझे गुदगुदी होने लगी मैं छटपटा गयी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

दीदी बोली “तुम दोनों बैडरूम में चले जाओ में बाद में आती हूँ.”

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जीजू मेरा हाथ पकड़ कर बैडरूम में पलंग पर ले गए. मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन जीजू का लंड याद आते ही उन से चुदवाने की इच्छा जोर कर देती थी. जीजू ने मुझे नाईट ड्रेस पहनने दिया और खुद ने भी पहन लिया. जीजू अपने पाँव लम्बे कर के पलंग पर बैठे और मुझे अपनी गोद में बिठाया मेरे पाँव भी लम्बे रख दिए.

मेरी पीठ उन के सीने से लगी हुई थी. उन के हाथ मेरी कमर से लिपट कर पेट तक पहुँच गए. मेरा चहेरा घुमा कर उसने मेरे मुंह पर किश की. फ्रेंच किश का मुझे कोई अनुभव ना था क्या करना वो मुझे पता ना था. मैं होठ बंद किये बैठी रही. उन्होंने जीभ से मेरे होठ काटे और जीभ मुँह में डालने का प्रयास किया.

मैंने मुंह खोला नहीं. उस ने मेरा निचे वाला होठ अपने होठों बिच ले कर चूसा. मेरे बदन में झुरझुरी फ़ैल गयी और मेरी दोनों निप्पल्स और क्लाइटोरिस कड़ी होने लगी. पेट पर से उन का हाथ मेरे स्तन पर आ गया. मैंने मेरे हाथ की चौकड़ी बना कर स्तन धक रखे थे. मेरा हाथ हटा कर उसने स्तन थाम लिए.

नाईटी के ऊपर से सहलाने लगे और बोले “खुशबू तेरे स्तन तो बहुत बड़े हैं और टाइट भी हैं.” मैं कुछ बोली नहीं उन के हाथ पर हाथ रख दिया लेकिन हटाया नहीं. कुछ देर तक स्तन सहलाने के बाद उस ने नाईटी के हुक खोल दिए. मुझे शर्म आती थी इसीलिए मैंने नाईटी के पहलुओं को पकड़ रखे हटाने नहीं दिए.

वो फिर से मेरे मुंह पर किस करने लगे तो मैं भूल गयी और उसने नाईटी पूरी खोल दी. जैसे उन्होंने नंगा स्तन हथेली में लिया वो चीख पड़े और बोले “ये क्या चुभ गया मेरी हथेली.” मैं “देखूं तो.” उन का इशारा था मेरी नुकीली निप्पल्स से. उस की उँगलियों ने निप्पल्स पकड़ ली मसली और वो बोले “ये ही चुभ रही थी.”

अब बात ये है की मेरी निप्पल्स बहुत सेंसिटिव है. उन की उंगलियां छूटे ही वो कड़ी हो गयी और बिजली का करंट वहीँ से निकल कर क्लाइटोरिस तक दौड़ गया. मेरी भोस ने रस बहाना शुरू कर दिया. उन का एक हाथ अब फिर से पेट पर उतर आया और पेट पर से जांघ पर चला गया.

मेरी दाहिनी जांघ उसने ऊपर उठायी. जांघ के पिछले हिस्से पर उस का हाथ फिसलने लगा. घुटन से ले कर ऊपर भोस तक उसने जांघ सहलाई लेकिन वुलवा को छुआ नहीं. मुंह पर किश करते हुए उसने दूसरे हाथ से पजामा की नाड़ी खोल दी. मैं इतनी एक्साइट हो गयी थी की मैंने पजामा उतारने में कोई विरोध किया नहीं बल्कि कूल्हे उठा कर सहकार दिया.

अब उन का हाथ मेरी नंगी जांघ का पिछले हिस्सा सहलाने लगा. दूसरा हाथ भोस पर लग गया. उस की उँगलियों ने क्लाइटोरिस ढूंढ ली. दूसरे हाथ ने चूत का मुंह खोज लिया. उस ने एक साथ क्लाइटोरिस टटोली और चूत में दो उंगलियां भी डाली. उन की एक्साईटमेंट भी कुछ कम नहीं थी.

उन का टाइट लंड कब का मेरे कूल्हे से सट गया था. लंड जो काम रस बहा रहा था इस से मेरे नितम्ब गीले हो चुके थे. एक ओर मेरी चूत ने फटाके मारने शुरू किये तो दूसरी और लंड ठुमका लेने लगा. उस ने किस छोड़ दी मुझे थोड़ा अलग किया और अपना पजामा उतार दिया. झटपट उन्होंने कंडोम पहन लिया.

एक हाथ से लंड सीधा पकड़ रख के उस ने मेरे कूल्हे ऐसे रख दिए की लंड का मत्था मेरी चूत में घुस गया. मैंने होले से चूतड़ निचे किये. आसानी से जीजू का पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया. मैं पीछे की और ढ़ल कर उस के सीने पर लेट गयी. अपने कूल्हे हिला कर धीरे धक्के से वो मुझे चोदने लगे.

साथ साथ उन की उंगली क्लाइटोरिस सहलाती रही. इस पोजीशन में लेकिन थोड़ा सा ही लंड चूत में आ जा सकता था. इसीलिए उन्होंने मुझे धकेल कर आगे झुका दिया और चौपाया कर दिया. वो पीछे से ऊपर चढ़ गए. अब उस को कमर हिलाने की जगह मिल गयी. लम्बे धक्के से वो चोदने लगे.

पूरा लंड बहार खिंच कर वो एक झटके से चूत में घुसेड़ने लगे. मेरी योनि की दीवारें लंड से चिपक गयी थी. थोड़ी ही देर में धक्के की रफ़्तार बढ़ने लगी. आगे झुक कर उन्होंने मेरे स्तन थाम लिए और चोदते चले. मुझे बहुत मजा आ रहा था. मैंने मेरा सर पलंग पर रख दिया था.

इतने में जीजू जोर से मुझ से लिपट गए लंड चूत की गहराई में घुसेड़ दिया और पांच सात पिचकारियां मार कर झड़ गए. उनके लंड ने ठुमक ठुमक ठुमके लगाए और मेरी चूत में कुछ फटाके हुए. बहुत मजा आया. लंड निकाल कर वो उतर गए. इतने में दीदी आ गयी.

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उसने पूछा “आया न मजा?”

मैंने सर झुका दिया.

जीजू बोले “छोटा ओर्गास्म हुआ खुशबू को. तुम कुछ करना चाहती हो?”

दीदी: “ना अभी नहीं. मेरी राय है की उसे लंड से ही पक्का ओर्गास्म करवाना चाहिए.”

जीजू: “तो कल हम गौतम के घर जा रहे हैं खुशबू को भी ले जायेंगे. ग्रुप में अच्छा रहेगा. क्या कहती हो खुशबू, आएगी ना?”

दीदी: “वहां दूसरे दोस्त भी आएंगे और ग्रुप चुदाई करेंगे. मजा आएगा. आना है ना?”

मैं: “मैंने कभी ऐसा किया नहीं है.”

जीजू: “कोई हर्ज नहीं. मन चाहे उस की साथ चुदाई कर सकोगी कोई रोकेगा नहीं कोई जबरदस्ती नहीं. तेरी मरजी के खिलाफ तुझे कोई कुछ करेगा भी नहीं.”

मैं मान गयी दूसरे दिन हम तीनो समय सर जीजू के दोस्त गौतम के बंगले पर जा पहुंचे. एक दूजे से मिल कर सब बहुत खुश हुए. दीदी ने परिचय करवाया “ये है खुशबू मेरी मौसी की लड़की…” गौतम “वाह आइये आइये खुशबू. कैसी हो? आप के जैसा हमारा भी एक नया मेहमान आया है. ये है अंकित मेरे चचेरे भाई. मुझ से एक साल छोटे हैं. सतना में उनकी प्लास्टिक मॉल्डिंग्स की फैक्ट्री है. शादी नहीं की है लेकिन कुंवारे भी नहीं है. क्यों अपूर्वा?”

अपूर्वा गौतम की पत्नी थी. बहुत खूबसूरत थी. हसती हुई वो बोली “सही.” अंकित “ये सब भाभी की कृपा है.” अंकित को देख मेरे बदन में झुरझुरी फ़ैल गयी. कितना हैंडसम आदमी था वो, पहली नजर से ही मेरे दिल में बस गया. मैं मन ही मन प्रार्थना करने लगी की हे भगवान वो ही मुझे चोदे ऐसा करना. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अंकित मस्कुलर आदमी थे. पांच फ़ीट सात इंच लम्बाई के साथ वजन होगा कुछ 70 किलो. रंग थोड़ा सा श्याम. भरावदार चेहरा और चौड़ा सीना सपाट पेट और पतली कमर. खम्भे जैसे हाथ पैर. गौतम ने बताया की अठारह साल की उम्र में उस ने अपनी एक नयी नवेली चाची को चोदा था. उस के बाद तीन लड़कियों को चोद चुके थे लेकिन शादी के लिए कहीं दिल लगता नहीं था.

उन्हें पतली लड़कियां पसंद नहीं थी जरा सी भरी हुई बड़े बड़े स्तन वाली चौड़े और भरी नितम्ब वाली लड़की वो ढूंढते थे. जब से हम आये तब से वो मुझे बेशरमी से घुर घुर कर देख रहे थे मुझे बहुत शर्म आ रही थी. शाम का भोजन के बाद हम सब खास कमरे में गए. गौतम के बारे में दीदी ने मुझे बताया की वो काफी पैसे वाले आदमी थे. शहर से बाहर बड़े प्लाट पर उस का बंगला था.

उस ने ग्रुप चुदाई के वास्ते एक अलग कमरा सजा रखा था. कमरे में सो बड़े पलंग बड़ी सीटियां सोफे बाथरूम इत्यादि थे. दीवारों पर बड़े बड़े आईने लगे हुए थे जिस में आप अपने आप को और दूसरे को चोदते देख सकते थे. ये सब देख कर मुझे गुदगुदी होने लगी थी. गौतम ने शैम्पेन की बोतल खोल दी. शराब ने अपना काम किया. सब का संकोच दूर होने लगा. कपड़े उतार कर सबने नाईट ड्रेस पहन लिए.

गौतम बोले “वाह आज तो नए मेहमान आये हैं. मजा आ जायेगा. अंकित खुशबू हम चारों एक दूजे के साथ की चुदाई के हामी हैं. एक मर्द के साथ दो औरत और एक औरत के साथ दो आदमी ऐसे भी चोदते हैं कोई बंधन नहीं रखते. तुम भी मन पसंद आदमी या औरत से चुदाई कर सकोगे. बदले में आशा है की दूसरा कोई तुम्हारे साथ चुदाई करे तो तुम करने दोगे.

“कबुल” अंकित ने सर हिला कर हाँ कहा. मैं शर्म से कुछ बोल ना सकी.

दीदी ने कहा “खुशबू ने अब तक दो ओर्गास्म ही पाए हैं.”

गौतम: “कोई हर्ज नहीं आज ज्यादा हो जायेंगे. एक लंड से नहीं होगा तो दूसरा करवाएगा. मैं चिट्ठी डाल कर तय करता हूँ की कौन किस के साथ पहले जुड़ता है. पहली चुदाई के बाद हम पार्टनर्स बदलेंगे. मंजूर?”

सब ने हाँ कहा. गौतम ने चिट्ठी डाली. गौतम के साथ सविता दीदी का नाम आया जीजू के साथ अपूर्वा का और अंकित के साथ मेरा. मेरे दिल की धड़कन बढ़ गयी. मेरी भोस ने पानी बहाना शुरू कर दिया. अब आगे की कहानी आप अंकित के मुंह से सुनिए-

मदन ने कहा “ऐसा हो तो सविता क्यों रह जाय, अंकित हो सके तो दोनों बहनों को स्वाद चखना.”

सविता: “हाँ गौतम तुम भी खुशबू को एक बार चोद लेना. मदन तो कभी भी उसे चोद सकेंगे हमारे घर. तुम को दूसरा मौका ना जाने कब मिले.”

इतना कह कर सविता मदन को छोड़ कर गौतम की गोद में जा बैठी. अपूर्वा भाभी के साथ मदन पलंग पर चले गए. मैं खुशबू के पास गया और उस के पहलू में बैठ गया. शर्म से उस का चेहरा गुलाबी हो गया था और वो बहुत ही प्यारी लग रही थी. अच्छी मुस्कान के साथ वो दान्त बिच उंगली काट रही थी.

मेरा लंड ज्यादा तन गया. उस के कंधे पर हाथ रख कर मैंने कान में पूछा “खुशबू पसंद आया मैं तुझे.” वो ज्यादा शरमाई उसने बोले बिना सर हिला कर हां कही. मैंने कान पर चुम्बन किया तो उस के रोएं खड़े हो गए. सिमट कर वो मेरे पहलू में आ गयी. कान पर से मेरा मुंह उस के गाल पर उतर आया.

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गाल पर किश करते हुए मैंने उसे मेरी और घुमाया और आगोश में लिया. उसने अपने हाथों की चौकड़ी बना कर सीने से लगा रखी थी. मैंने होठों से उस के होठ छू लिए. कितने कोमल और मीठे थे उस के होठ. पहले मैंने होठ छुए दबाये नहीं. जीभ निकाल कर मैंने उस के होठ पर फिराई तो उस ने मुंह हटा लेने की कोशिश की शायद फ्रेंच किश का ये पहला अनुभव था उस के लिए.

मैंने उस का सर पकड़ रखा और किस जारी रखी तब उस को मजा आने लगा और उस ने अपने होठ खोल दिए. मैंने निचे वाला होठ मेरे मुंह में लिया और चूसा. मेरी जीभ उस के मुंह में डाल कर मैंने चारो ओर घुमाई. उसने जोरों से अपने होठ मेरे होठों से चिपका दिए. मेरी जीभ से उस की जीभ खेलने लगी.

किस चालू रखते हुए मैंने उस के हाथ पकड़ कर मेरी गर्दन से लिपटाये. ऐसा होने से से उसके स्तन मेरे सीने से लग गए. मैंने जब आलिंगन दिया तब उस के भारी स्तन मेरे सीने से दब कर चौपट हो गए. थोड़ा सा अलग हो कर मैंने स्तन पर हाथ फिराया तो उस ने मेरी कलाई पकड़ ली लेकिन हाथ हटाया नहीं.

उसके गोल गोल टाइट स्तन मैंने सहलाये और धीरे से दबाये. एक के बाद एक कर के मैंने नाईटी के हुक खोल दिए. जब नाईटी खुल गयी तब पता चला की उस ने ब्रा पहनी नहीं थी. उस के नंगे स्तन मेरी हथेलियों में कैद हो गए. उस की साँस की रफ़्तार बढ़ने लगी. मैंने ज्यादा लड़कियां चोदी नहीं थी लेकिन जितनी चोदी थी उन में से किसी के स्तन खुशबू के स्तन जैसे सुन्दर नहीं थे.

खुशबू के स्तन बड़े बड़े गोल भारी और टाइट थे मेरी हथेलियों में समाते नहीं थे. चिकनी चमड़ी के निचे खून की नीली नसें दिखाई दे रही थी. दो इंच की अरेओला गुलाबी रंग की थी. अरेओला के बिच किसमिस के दाने जैसी कोमल निप्पल थी जो उस वक्त उत्तेजना से कड़ी हो गयी थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उंगलिओं से मैंने अरेओला टटोली और निप्पल को चिपटी में ले कर मसली. स्तन के निचे हाथ रख कर मैंने उठाया और बाद में हौले से दबाया. इतनी साइज के होने पर भी खुशबू के स्तन नरम नहीं थे. एक के बाद एक कर के मैंने दोनों स्तन से खिलवाड़ की निप्पल्स मसली और खींची. उस के मुंह से आह निकल पड़ी और वो शिथिल हो कर ढ़ल गयी.

मैंने उसे सीटी पर लेता दिया और मैं पहलू में लेट गया. मैं फ्रेंच किश करने लगा. कई देर तक स्तन सहलाने के बाद मेरा हाथ उस के पेट पर उतर आया. उसी वक्त मैंने निप्पल मुंह में ली और जीभ से टटोली. खुशबू की उंगलियां मेरे बालों में घूमने लगी. मुझे पसंद है वैसा ही खुशबू का पेट था जरा भरा हुआ और चिकना. उस की नाभि गहरी थी.

मैंने उंगली नाभि में डाली तब उसे गुदगुदी हो गई और वो छटपटाने लगी. उसने मेरा हाथ हटा दिया. अब मेरा हाथ पजामा की नाड़ी खोल कर उस की मोंस पर पहुँच गया. रेशमी घुंघराले झांट में मेरी उंगलियां खेलने लगी. जैसे मेरा हाथ मोंस से निचे उतर कर भोस पर पहुंचा की उसने जांघें ऊपर उठा ली.

मैंने हाथ से उस की जांघें लम्बी की और ऊपर मेरी जांघ रख दी. मेरा टाइट लंड उस की जांघ साथ दब गया. मेरी उंगलियां बे रोक टोक भोस पर घूमने लगी. मैंने उसे कान में पूछा “खुशबू मेरा लंड महसूस कर सकती हो?” जवाब में उस ने करवट बदली और मेरे सन्मुख हो गयी. एक हाथ से लंड पकड़ लिया. जैसा पकड़ा वैसा ही छोड़ दिया और बोली “इतना मोटा, मुझे लग नहीं जायेगा, बहुत बड़ा है, मुझे डर लगता है.”

मैंने कहा “संभाल के करूँगा लगने नहीं दूंगा. दर्द हो तो तुरंत बोल देना. यकीन है न मुझ पर?”

खुशबू: “है न. पूरा यकीन है.”

मैंने उस का हाथ पकड़ कर फिर से लंड पर रख दिया इस वक्त उस ने लंड मुट्ठी में थाम लिया. लंड ने ठुमका लगाया और और ज्यादा काम रस बहाया. मैंने उस के पजामा की डोरी छोड़ दी. शर्म से उसने थोड़ी देर तक खुला हुआ पजामा पकड़ रखा लेकिन बाद में खुद ने कूल्हे उठा कर पजामा उतरने दिया.

गोरी गोरी भरपूर जांघें देख कर मेरा लंड और ज्यादा तन गया. दो जांघें और ऊँची मोंस के बिच खड्ढा सा हो गया था जिस के ताल में था उस का सब से रसीला अंग उस की भोस. जब जांघें इकट्ठी थी तब भोस का थोड़ा हिस्सा ही दिखाई दे रहा था. मैंने जांघें चौड़ी करना ट्राई किया लेकिन नाकामयाब रहा.

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मैं अब बैठ गया. हाथ से जांघें सहलाते हुए मैं स्तन पर चुम्बन करने लगा. कई देर तक निप्पल्स चूसी. होले होले मैं उस के पेट पर और पेट पर से जांघ पर चुम्बन करने लगा. उस को गुदगुदी होने लगी और जांघ की पकड़ नरम पड़ी. अब मेरा हाथ दो जांघ बिच जा सका. मैंने होले से जांघें चौड़ी की इस बार उस ने विरोध किया नहीं.

बाद में उस ने खुद पाँव ऊपर उठा लिए. मैं अब उसे सीटी की धार पर ले आया. मैं जमीन पर बैठ गया. उसने अपने पाँव ऊपर उठा कर पसार रखे. उस की भोस अब मेरे सामने आयी. एक्साईटमेंट से सूजे हुए बड़े होठ वाली उस की भोस काम रस से गीली गीली हुई थी. गुलाबी रंग के कोमल छोटे होंठ सूज कर दरार से बहार निकल आये थे.

चार इंच लम्बी दरार के अगले कोने में उस की टाइट क्लाइटोरिस थी क्लाइटोरिस एक इंच लम्बी होगी. मोटी क्लाइटोरिस का मत्था छोटी सी चेरी जैसा था और काम रस से चमक रहा था. मोंस पर और बड़े होठ की बाहरी भाग पर काले घुंघराले झांट थे जो उस ने काट रखे थे. भोस से खुशबू आ रही थी.

जैसे मैंने भोस पर चुम्बन किया खुशबू कूद पड़ी बल पकड़ का मेरा सर हटा दिया. पहले मैंने उँगलियों के हलके स्पर्श से भोस सहलाई. क्लाइटोरिस को ज्यादा कड़ी होती हुई मैं देख सका. मैंने मेरे होठ क्लाइटोरिस से चिपका दिए. जीभ से क्लाइटोरिस को टटोला और होठों बिच ले कर चूसा.

खुशबू के कूल्हे हिलने लगे. भोस के होठ चौड़े कर के मैंने दो उंगलियां चूत में डाली और जी-स्पॉट ढूंढ लिया. क्लाइटोरिस चूसते चूसते मैंने जी-स्पॉट सहलाया. खुशबू से सहा नहीं गया. मेरे बाल पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खिंच लिया और मेरे कान में बोली “चलो न अब कितनी देर?” मैंने फ्रेंच किश शुरू कर दी और स्तन थाम लिए.

लंड पकड़े बिना ऐसे ही मैंने धक्के लगाने शुरू किये मैंने सोचा था की लंड को चूत का मुंह मिल जायेगा. अपूर्वा भाभी ले साथ ऐसा हुआ था ना, लेकिन खुशबू के साथ ऐसा हुआ नहीं. लंड का मत्था इधर उधर टकराया लेकिन चूत में घुस पाया नहीं. मेरी नाकामयाबी देख खुशबू को हसी आ गयी.

आखिर मुझे हाथ में लंड पकड़ना पड़ा और चूत के मुंह पर धरना पड़ा. खुशबू की चूत गीली थी और लंड का मत्था भी गिला था. फिर भी लंड को अंदर घुसाने में देर लगी. मैंने पूछा “दर्द होता है क्या?” खुशबू की आँखें बंद थी उसने मेरे कूल्हे पकड़ रखे थे. बोले बिना उस ने मेरे कूल्हे अपनी और खींचे और चूत सिकुड़ कर लंड का मत्था दबाया.

हलका दबाव से मैंने स र र र र करते आधा लंड चूत में उतर दिया. मैंने रुक गया लंड ने ठुमका लगाया और चूत को और चौड़ी की. मैंने करते लंड वापस खिंचा और रुके बिना ऐसे ही अंदर डाला. अब की बार पूरा लंड चूत में घुस जाने के बाद में रुका. लंड ने फिर ठुनका लगाया चूत ने सिकुड़ कर जवाब दिया.

खुशबू जोरों से मुझे फ्रेंच किश करने लगी और अपने नितम्ब घूमाने लगी. चूत की दीवारें मोटा लंड से खुल जाय तब तक मैं रुका. बाद में मैं हाथों के बल आधार हुआ. दोनों के पेट बिच से भोस की और देखते हुए मैंने लंड निकाला. खुशबू के हाथ मेरे कूल्हे पर थे उस ने मुझे रोक दिया पूरा लंड निकलने ना दिया.

जब लंड का मत्था चूत के मुंह में रहा तब मैं फिर रुका और लंड से ठुमका मरवाया. ठुमके से लंड थोड़ा सा और मोटा हुआ और चूत का मुंह और चौड़ा कर दिया. चूत ने भी सिकुड़ कर लंड का मत्था दबाया. स र र र र करते फिर से मैंने लंड चूत में उतार दिया. ये खेल हम कई देर तक खेलते रहे.

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चूत और लंड काम रस से लथपथ हो गए थे. हमारी एक्साईटमेंट बढ़ती जा रही थी. अब मैंने धीरे धक्के से चोदना शुरू किया. शुरुआत में मैं संभाल के लंड डालता था क्यों की खुशबू की चूत छोटी थी और मेरा लंड था मोटा. जैसे जैसे चुदाई चली वैसे वैसे चूत खुली होती चली.

काम रस भी बहता चला और लंड आसानी से अंदर बाहर होने लगा. लंड की मोटाई से भोस की दरार गोल बन गयी थी और क्लाइटोरिस खिंच कर चूत की और आ गयी थी. इस से हुआ क्या की लंड के हर धक्के के साथ क्लाइटोरिस लंड की डंडी के साथ घिसने लगी. खुशबू ने मुझे बाद में बताया था की ऐसी हरकत से उसे बहुत मजा आता था क्लाइटोरिस से निकला बिजली का करंट सारे बदन में फ़ैल जाता था.

मेरे धक्के के साथ साथ वो भी अपने नितम्ब इस कदर हिलाती थी की चूत के हर कोने तक लंड का मत्था पहुँच जाए. होले होले मेरे धक्के की रफ़्तार बढ़ने लगी. देखते देखते में खुशबू की योनि फट फट फटाके मारने लगी. वो मछली की तरह छटपटाने लगी. मेरे हाथों और कन्धों पर दांत गड़ा दिए. नाख़ून से मेरी पीठ खरोंच डाली. फिर भी उसे ओर्गास्म होता नहीं था.

सविता ये सब देख रही थी. मेरी नजर से उस की नजर मिली तो वो समझ गयी. सविता हमारे पास आयी. उसने कहा “अंकित तुम निप्पल्स पर मुंह लगा लो.” मैंने एक निप्पल मुंह में ली और दूसरी चिपटी में. ऐसा करने में मुझे थोड़ा सा झुकना पड़ा और हमारे पेट बिच फैसला पड़ा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तुरंत सविता ने अपना हाथ खुशबू की भोस पर रख दिया और क्लाइटोरिस रगड़ डाली. क्लाइटोरिस को छूते ही खुशबू को जोरों का ओर्गास्म हो गया. अपने हाथ पाँव से वो मुझ से लिपट गयी कूल्हे से झटके देने लगी चूत से लंड निचोड़ने लगी. उस का सारा बदन तिस सेकंड के लिए अकड़ गया उस के रोएं खड़े हो गए आँखें मींच गयी और मुंह से लार निकल पड़ी. वो बेहोश सी हो गयी.

ओर्गास्म का आफ्टर शॉक दो मिनिट तक चला. मैं झड़ा नहीं था लंड अभी भी टाइट ही था लेकिन मैं रुक गया था. सविता का हाथ हमारे पेट बिच फस गया था. थोड़ी देर बाद खुशबू होश में आयी लेकिन ओर्गास्म के मार से शिथिल हो गयी थी.

वो बोली “ये क्या हुआ मुझे, मैं कहाँ हूँ?”

मैं थोड़ा आधार हुआ जिस से सविता अपना हाथ निकाल सके. खुशबू के गाल पर किस कर के मैंने कहा “प्यारी तुम मेरे साथ हो. जो हुआ वो ओर्गास्म था. आया न मजा?”

खुशबू: “आया न. लेकिन आप का ये.. ये.. तो अभी मैं महसूस कर रही हूँ. आप को ओर्गास्म नहीं हुआ?”

मैं: “ना नहीं हुआ. लेकिन अब होगा.”

खुशबू दूसरी चुदाई सहन कर सके ऐसा लगता नहीं था. इसीलिए मैंने लंड निकाला और उतर गया. मैंने देखा की दूसरे पलंग पर अपूर्वा भाभी चार पाँव हो गयी थी और मदन उसे पीछे से चोद रहे थे. मेरा लंड देख मदन बोले “सविता क्या ख्याल है तेरा? अपूर्वा ने और खुशबू ने अंकित का लंड लिया है तू ही बाकी रही हो. अंकित सविता को छोड़ना है?”

गौतम भैया के साथ चुदाई कर के सविता हमारे पास आयी थी. जब मैंने खुशबू की चूत से लंड निकाला तब सविता की नजर चमक उठी. वो बोली “मैं पकड़ लूँ?” मैं भला कैसे ना कह सकता था. सविता ने आ कर मेरा लंड थाम लिया. मुझे तो किसी को भी चोदना था. सविता फिर मेरे पास आयी और मेरे कान में बोली “जीजू अपनी बड़ी साली को अपना लंड नहीं चखाओगे?”

मुझे ये रिश्ता मंजूर था सविता मेरी साली सही. इस वक्त मैंने धीरज से काम नहीं लिया. सविता को बाँहों में उठा कर पलंग पर पटका उस की जांघें चौड़ी कर दी और घच्च से लंड चूत में घुसेड़ दिया. उस के मुंह से आह निकल गयी. मैं रुका नहीं दना दन धक्क मार कर चोदने लगा. मेरा दिमाग सर से उतर कर मेरे लंड के मत्थे में जा बैठा था.

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सविता ने खुद अपने पाँव इतने उठाये की घुटने कान से लग गए. उस की भोस ऊपर उठ आयी और मेरा लंड पूरा उस की चूत में जाने लगा. पंद्रह बिस धक्के बाद हम दोनों एक साथ झड़े. मेरे लंड ने आठ दस पिचकारियां मार कर वीर्य से उस की योनि छलका दी. हम दोनों कई देर तक पड़े रहे.

सब थक गए थे. मैंने खुशबू को फिर से आगोश में लिया और नींद में खो गया. दूसरे दिन सुबह सविता ने मुझ से पूछा “कैसी लगी खुशबू की चूत?” खुशबू पास ही थी. वो शर्मा गयी. सविता ने उसे पूछा “कैसा लगा अंकित का लंड? साफ़ साफ़ बताओ तुम लोग शादी करोगे या नहीं?” मैंने खुशबू की और देखा मुस्कराते हुए उस ने सर हिला कर हाँ कही.

मैंने कहा “एक शर्त है.”

सविता: वो क्या?

मैं: “आप के ग्रुप में हमें शामिल करना होगा.”

सविता: “अब क्या बाकी है? शामिल तो हो ही गए हो.”

खुशबू: “अब तो बताओ ना दीदी दूसरे कौन कौन है ग्रुप में.”

सविता: “मेरे जेठ जी राज जेठानी सिमा फार्म की एक लड़की शामली जो मेरी दोस्त है वो और उस का पति मोहन इतने हैं.”

चाय के समय सविता ने हमारा रिश्ता डिक्लेअर कर दिया. सब खुश हुए और बधाई देने लगे. सविता और मदन भोपाल जाने को निकले. खुशबू ना गयी. मेरे कान में कहने लगी “एक ओर्गास्म से मेरा दिल भरा नहीं है दूसरा कब करवाओगे?” मुझे निमंत्रण की जरुरत थी क्या? दो घंटे की जोर दर चुदाई कर के मैंने उसे तीन ओर्गास्म करवाए.

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