XXX Holi Sex Play Chudai
हेलो दोस्तो मेरा नाम अनुप है। मै आप लोगो को आज मेरी हॉट और चुदक्कड़ बीवी विश्वा की एक सेक्सी कहानी बताने जा रहा हूँ। कहानी की शुरुआत करने से पहले मैं आप लोगो को मेरे और मेरी बीवी का एक छोटा सा वर्णन देना चाहूगा! मैं ३२ साल का शादीशुदा मर्द हूँ, मेरा रंग हल्का सावला और लिंग करीबन ५.५ इंच लंबा और १.५ इंच मोटा है। XXX Holi Sex Play Chudai
मैं यू.पी. का रहने वाला हूँ और बचपन से ही लखनऊ में पला बड़ा हूँ। वही मेरी बीवी २९ साल की एक बहुत ख़ूबसूरत गुजराती महिला है। उसका रंग दूध सा सफेद और घने केल बाल है। उसकी ऊचाई थोड़ी कम है करीबन ५.२”, लेकिन उसके स्तन और गांड काफ़ी मोटे है।
उसका फिगर ३६-२८-३८ है और वह ३४C कप साइज़ की ब्रा पहनती है। उसकी चूत गहरी गुलाबी रंग की है जिसके ऊपर घने काले बाल है। उसके फ़ूड से सफेद बगलो (अंडरआर्म्स) में भी थोड़े बाल हमेशा ही उसकी स्लीवलेस गाउन से दिखाई पड़ते है। सब्ज़ीवाले से ले कर तो पड़ोसी तक सबकी नज़र रहती है मेरी बीवी विश्वा पर।
उनमे से सबसे हवसी है मेरा पड़ोसी प्रदीप, जो की ३० साल का हट्टा कट्टा आदमी है, रंग से काला है पर लंड ११ इंच लंबा और ३.५ इंच मोटा है। वह ५ साल पहले ही अपनी बीवी सीमा के साथ हमारी कॉलोनी में रहने आया था। सीमा करीबन ५.५” लंबी है और उसका रंग हल्का सावला है और फिगर ३४-२४-३६ है।
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प्रदीप की नज़र जिस दिन से मेरी बीवी विश्वा पर पड़ी है उस दिन से वह उसके आगे पीछे करता रहता है। उसे कॉम्प्लीमेंट देने के एक मौक़ा भी छोड़ता है मानो फ़्लर्ट कर रहा हो। मुझे यह बात बिलकुल पसंद नहीं थी पर विश्वा उसकी तारीफ़ो से काफ़ी मोहित हो जाती थी और उसे कभी-कभार थोड़ा भाव भी दे देती थी।
यह बात है २०२१ की होली की, मैं और मेरी बीवी ने अपने घर में एक होली पार्टी रखी थी और कॉलोनी के रहने वालो को बुलाया था। इस पार्टी का एक नियम था की सिर्फ पानी और गुलाल का उपयोग ही किया जा सकता था क्युकी मेरी बीवी पक्के रंगो और वार्निश से बहुत डरती थी की कहीं उसकी कोमल त्वचा खराब ना हो जाए।
उसने यह बात ख़ास कर के प्रदीप की बीवी सीमा को बोली थी, क्युकी पूरी कॉलोनी में सबसे ख़राब रंगो का इस्तेमाल करने के लिए वह मशहूर थी। उसके लगाये रंग ७-८ दिनों तक नहीं उतरते थे। विश्वा की बात सुन कर सीमा मुस्कुराते हुए बोली, “भाभीजी आप बस कल तैल लगा कर तैयार रहना, बाक़ी की चिंता मुझपर और प्रदीप पर छोड़ दीजिए” यह बोल कर उसने प्रदीप की तरफ़ देख आँख मार दी।
प्रदीप ने भी एक स्माइल के साथ बोला कि भाभीजी आप घबराइए मत, मैं हूँ ना आपकी सुंदर त्वचा का ख्याल रखने के लिए। यह सुन कर विश्वा जरा सा शर्मा गई, इधर मैंने और सीमाने प्रदीप को घूर के देखा और उसने तुरंत अपनी नज़र झुका ली। होली के दिन सुबह मैंने और विश्वा ने सारी तैयारी कर के रखी थी.
हमारे आंगन में दो पानी के बड़े टब, दो बड़े टैंकर जिनको १० पाइप लगाये थे, ५ बाल्टी भर के पानी से भरे गुब्बारे और गुलाबी, लाल, पीले, नीले और हरे रंग के अबीर भी रखे हुए थे। मैं अपने पुराने टी शर्ट और शॉर्ट्स में बाहर खड़ा था और कॉलोनी के बाकी पुरुष और महिलाए भी आना शुरू हो गया था।
सीमा और प्रदीप भी आए। प्रदीप भी मेरी तरह ही कपड़े शॉर्ट्स पहना था लेकिन ऊपर सिर्फ बनियान पहन रखी थी। तो वही सीमा सफेद रंग की साड़ी, स्लीवलेस ब्लाउज पहन कर आई थी। उसकी ब्लाउज से उसका क्लीवेज करीबन १.५-२ इंच तक दिख रहा था। वह देख कर वहाँ कई युवा लड़को के लंड टाइट हो रखे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैंने तुरंत लाल रंग का अबीर लिया और सीमा के चेहरे और गर्दन से होते हुए उसके क्लीवेज में छोड़ दिया और उसने भी हरे रंग का अबीर ले कर मेरे चेहरे पर पोत दिया। फिर मैंने और प्रदीप ने भी एक दूसरे को अच्छे से अबीर लगाया। प्रदीप ने बोला की विश्वा कहीं नज़र नहीं आ रही, की उतनी देर में विश्वा बाहर आई।
उसे देख कर प्रदीप का लंड एकदम से टाइट हो गया और मुझे टेंशन हो गई की यह इसने क्या पहन लिया है। विश्वा ने एक सफेद रंग का एकदम पतला सा स्लीवलेस गाउन पहना था जिसका गाला बड़ा होने के कारण उसका क्लीवेज और अंडरआर्म्स साफ़ दिख रहे थे।
उसके अंडरआर्म्स के बाल देख कर सीमा बोल पड़ी लगता है भाभी की ने काफ़ी दिन से रोमांस नहीं किया है जो बगल के बाल वैक्स करना भूल गई। उस पर प्रदीप बोला की वो तो है ही इतनी सुंदर की इन सब से कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता। उतने में विश्वा एक हाथ में दो पानी के गुब्बारे और दूसरे में नीले रंग का अबीर ले कर दौड़ती हुई आई और सीमा की तरफ़ बढ़ने लगी।
यह देख कर सीमा गुब्बारों के टब की और भागने लगी। विश्वा ने सीमा को पीछे से पकड़ा और उसके सर पे नीले रंग का अबीर डाल दिया और दोनों गुब्बारे उसके सर पर फोड़ दिए जिससे की सीमा पूरी तरह भीग गई और उसकी सफेद साड़ी नीली पद गई। लेकिन सीमा तो काफ़ी पक्की खिलाड़ी थी.
उसने तुरंत अपनी ब्लाउज से गुलाबी रंग के अबीर का एक पैकेट निकाला और विश्वा के मुंह पर पोत दिया और बचा हुआ अबीर उसकी क्लीवेज में छोड़ दिया, फिर बगल वाली टब से दो पानी के गुबारे उठाये और एक एक गुब्बारा विश्वा के दोनों अंडरआर्म्स में रख के दबा दिए।
विस्वा के अंडरआर्म्स के बालों के कारण वो तुरंत फट गए और विश्वा का गाउन पूरी तरह गीला हो कर उसके आर पार दिखायी देने लगा और अब उस गाउन के अंदर पहनी गुलाबी रंग की विश्वा की ब्रा भी साफ़ दिख रही थी। लेकिन विश्वा भी इतनी जल्दी छोड़ने वाली नहीं थी, उसने तुरंत हरे रंग का अबीर हाथ में ले कर सीमा के पेटीकोट में हाथ डाल दिया.
जिससे की सीमा एकदम चौक गई और हड़बड़ी में पेटीकोट में फसी उसकी सारी छूट कर नीचे गिर गई और अब वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी और विश्वा का हाथ उसके पेटीकोट में फसा हुआ था और सीमा बेबस हो कर चिल्ला रही थी, “विश्वा!! उधर रंग मत डालो प्लिझझ्झ्झ!!”
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यह सुन कर विश्वा और जोश में आ गई और उसने एक पानी से भरा गुब्बारा सीमा की पैंटी में डाला और गांड़ पर एक थपकी मार कर फोड़ दिया जिससे की सीमा का पेटीकोट और पैंटी दोनों भीग कर गांड़ पर चिपक गए। अब सीमा का पारा चढ़ गया और उसने अपनी ब्लाउज से एक गुलाबी अबीर का पैकेट निकाला और मुट्ठी भर अबीर में पानी मिला कर विश्वा का चेहरा पोतने लग गई।
विश्वा हड़बड़ा कर बोली “अररेरेरे नहीईईई!!” और मुंह खोलते ही सीमा ने अबीर से रंगी गुलाबी उँगली विश्वा के मुँह में डाल कर उसका मंजन करने लगी जिसके बाद विश्वा “अररररर्रर्र छीईईई!! कह कर रंग थूकने लगी और गुलाबी रंग के कुल्ले करने लगी।
यह देख कर सीमा और बाक़ी महिलाएं हसने लगी और बोली “होली है भई होली है, बुरा ना मानो होली है”। यह देख कर प्रदीप का लंड टाइट हो गया था और वो मुझे बोला की चलो हम भी भाभियों के सैंग होली खेले… लेकिन मैं तो भांग पी कर भंड हो गया था तो मैंने बोला तुम जाओ मैं आता हूँ!
इधर विश्वा अपने दाँत से गुलाबी रंग छुड़वाने की कोशिश कर रही थी और उधर पल्लवी (मेरी दूसरी पड़ोसन) और सीमा एक बाल्टी में पानी भर रहे थे, पल्लवी ने सीमा से कहा कि हम इस बाल्टी में लाल रंग का अबीर डाल कर विश्वा को इससे नहला देंगे, तो सीमा ने मुस्कुरा कर बोला, अबीर नहीं अभी पक्के रंग से खेलेंग होली.
और यह बोल कर सीमा ने २ हरे रंग की पुड़िया निकाली, यह देख कर पल्लवी ने भी सीमा की तरफ़ आँख मार कर बोला “बहुत घमण्ड है ना इसे अपने गोरे रंग पर, आज तो पक्के रंग से रंगेगी” और दोनों हसने लगी। सीमा ने दोनों पैकेट रंग उस बाल्टी में घोल दिया जिससे की पानी का रंग गहरा हरा हो गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब प्लान के मुताबिक़, पल्लवी पीले रंग का गुलाल ले कर विश्वा की और दौड़ी, विश्वा ने यह देख कर तुरंत ही गुलाबी गुलाल का एक पैकेट खोल कर मुट्ठी में गुलाल भर लिया और पल्लवी को पकड़ लिया और उसके क्लीवेज में गुलाबी रंग डालने लगी, पल्लवी ने भी अपने दोनों हाथ विश्वा के गाउन में डाल कर मम्मो पर गुलाल रगड़ने लगी।
दोनों की खींचातानी में पल्लवी की कुर्ती और विश्वा की गाउन फट गई और विश्वा अभी सिर्फ़ पिंक ब्रा और पैंटी में रह गई, उन दोनों ने देखा कि सब लोग अब अपने अपने घर चले गए है और कोई मर्द वहाँ भी है यह सोच कर, विश्वा ने गुलाबी गुलाल ले कर पल्लवी की ब्रा में हाथ डाल दिया और उसके मम्मे रगड़ने लगी।
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पल्लवी ने भी अपने हाथ में हरा गुलाल ले कर विश्वा की ब्रा में हाथ डाल दिए और उसके मोटे मोटे स्तन पर अपने हाथो से हरा रंग मलने लगीं। इतने में सीमा पक्के रंग से भरी बाल्टी ले आई और विश्वा को बोली की पल्लवी को पकड़ के रखो उसपर हरे रंग से नहलायेंगे।
यह सुनकर पल्लवी भागने की नकल करने लगी और विश्वा उसे पकड़ कर खड़ी रही, लेकिन जैसे ही सीमा पास पहुँची, पल्लवी ने एक झटके में पलट कर विश्वा को पकड़ लिया और सीमा की तरफ़ देख कर बोली “जो गिरा सारारारा” विश्वा उनकी चाल समझ गई और सीमा के हाथ में पक्के हरे रंग से भरी बाल्टी देख कर बोली “अरे बाप रे इतना डार्क रंग नहीं प्लीज़!!”
सीमा ने पूरी बाल्टी रंग विश्वा के गोरे बदन पर डाल कर विश्वा को हरे रंग में भिगो दिया। विश्वा अपने आप को आईने में देख कर बोल पड़ी “हे राम!! कितना पक्का रंग है ये, निकलते नहीं निकलेगा!!” इतने सीमा ने विश्वा के पीछे जा कर उसकी ब्रा की हुक खोल दी और ब्रा निकाल कर फ़ेक दी।
विश्वा ने डर के अपने स्तन छिपाने की कोशिश की पर सीमा ने अपने दोनों हाथ में पक्का नीला रंग ले कर उसकी दोनो चुचिया पकड़ ली और उन्हें मसलने लगी जिससे की विश्वा के निप्पल्स टाइट होने लगे और वह सिस्कियाने लगी। लेकिन विश्वाने अपने आप को संभाला और सीमा को पकड़ कर उसका ब्लाउज फाड़ दिया।
सीमा ने ब्रा नहीं पहनी होने के कारण तुरंत उसकी चुचिया बाहर आ गई और विश्वा ने अपनी पैंटी में छिपाया हुआ एक पक्के गुलाबी रंग का पैकेट निकाला और उसे पानी में घोलने लगी।यह देख सीमा घबरा कर बोली “भाभी!! आपने तो बोला था पक्का रंग इस्तेमाल करना वर्जित है.”
तो विश्वा बोली “वो तो मैं खेलना नहीं चाहती थी, पर खैर अब जब मैं पक्के रंग से रंग ही गई हूँ तो सोचा मैं भी अच्छे से होली खेल ही लेती हूँ.” विश्वा ने तुरंत गुलाबी रंग से भरे हाथो में सीमा के स्तन पकड़ लिए और उन्हें मसलने लगी। उतनी देर में पल्लवी वहाँ पहुँची और अपने हाथ में गुलाबी रंग का गुलाल ले कर विश्वा की तरफ़ दौड़ी.
विश्वा इस हमले के लिए तैयार न्ही थी और अचानक से चौक गई, इसी का फ़ायदा उठाते हुए सीमा ने विश्वा के दोनों हाथ ऊपर उठा दिए जिससे कि उसके अंडरआर्म के बाल साफ़ दिखने लगे, पल्लवी ने भी मौके का पूरा फ़ायदा उठाया और इस बार अपना निशाना सीधे विश्वा के अंडरआर्म्स पर साधा और गुलाल विश्वा के अंडरआर्म्स में रगड़ते हुए मस्ती में उसके बगल के बाल खिचने लगी.
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और इसी के साथ सीमा और पल्लवी विश्वा को बेइंतहा छेड़ने लगे। एक तरफ़ सीमा विश्व के निपल्स को छेड़ने लगी तो दूसरी तरफ़ पल्लवी विश्वा के बगल के बाल खिचने लगी। विश्वा की साँसे तेज़ होने लगी और इस छेड़छाड़ की वजह से उसकी चूत से रस छूट गया और विश्वा की पैंटी उस रस में भीग गई।
यह देख पल्लवी मुस्करा कर बोली “शायद विश्वा कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित हो गई है।”
सीमा बोली “हाँ सही कहा चलो आज के लिए इतनी होली काफ़ी है”
पल्लवी को उसके पति ने आवाज़ लगायी तो वो बोली “चलो भाभी मैं आती हूँ” और वह भी चली गई। इस दौरान विश्वा अपनी पैंटी में हाथ डालकर अपनी छूत सहला रही थी। लेकिन जैसे ही विश्वा की हवस उतरने लगी, उसने देखा की सीमा अपने मम्मो से पक्का रंग हटाने की कोशिश कर रही है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
विश्वा ने सोचा बदला लेने का इससे बेहतर अवसर नहीं मिलेगा और उसने एक बाल्टी पानी में गुलाबी पक्का रंग घोला और चुपचाप बाल्टी ले कर सीमा के पीछे खड़ी हो गई और बोली “सीमा, रंग लगाऊ?” सीमा तो देखते ही डर गई और बोली “अररेरे विश्वा, अभी मैने रंग साफ़ किया है, फिर से मत डालो प्लीज़।”
लेकिन विश्वा ने एक ना सुनी और सीमा को नीचे बिठाया और उसपर पूरी बाल्टी गुलाबी रंग डाल दिया और उसके बाद उसे पकड़ कर रंग रगड़ने लगी। विश्वा ने सीमा की पैंटी खिच के फाड़ दी और दो उंगलिया उसकी चुत में डाल कर सहलाने लगी। सीमा के मुंह से ऊह आह की आवाज़ें निकलने लगी।
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प्रदीप यह नज़ारा काफ़ी देर से छुप कर देख रहा था और सही मौक़े का इंतज़ार कर रहा था। अभी सीमा पूरी तरह हतबल हो गई थी और वो समझ गई थी कि जल्द ही विश्वा को नहीं रोका गया तो वो उसकी चुत का पानी निकाल देगी। सीमा ने विश्वा का हाथ पकड़ के अपनी चुत से निकालने की कोशिश की, लेकिन विश्वा ने ऐसा होने नहीं दिया और तो और दूसरा हाथ बूब्स से हटा कर विश्वा ने एक उँगली सीमा की गांड में डाल दी। गांड में उँगली घुसते ही सीमा ज़ोर से चिल्लाई-
“हे भगवान” और उसकी चूत से इतना पानी निकला मानो कोई झरना बह रहा हो। विश्वा के हाथ का रंग मिलने के कारण वह पानी गुलाबी रंग का आने लगा। विश्वा ने वही पानी ले कर सीमा को पिलाया और उसका मंजन भी कर दिया। विश्वा मुस्कुरा कर बोली “ऐसे खेलते है असली होली.” आशा करता हूँ की आप इस कहानी का आनंद ले रहे होगे। अगर कहानी अच्छी लगे तो कमेंट्स में बताए, आगे का भाग जल्द ही डाला जाएगा, जिस में आप लोग सुनेगे की कैसे प्रदीप मेरी बीवी विश्वा के साथ होली खेलता है और उसकी ज़ोरदार चुदाई करता है। धन्यवाद!
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