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घर की रंडियों के मजे लिए

नवम्बर 22, 2025 by hamari

XXX Gharelu Sex Hindi Kahani

प्रिय भाइयो और बहनो, कहते हैं ना कि किसी की किस्मत ऐसी होती है कि पांचों उंगलियां घी में और सिर कड़ाही में, बस समझो मेरी किस्मत भी ऐसी ही थी। मेरी उम्र तब लगभग 19 या 20 साल की थी। हमारे घर में मेरे अलावा पापा-मम्मी और दो बड़ी बहनें थीं। पापा बिजनेस बढ़ाने के चक्कर में ही रहते थे, इस कारण अधिकतर घर से बाहर टूर पर ही रहते थे। XXX Gharelu Sex Hindi Kahani

पैसों की कोई कमी नहीं थी, लेकिन एक बात थी कि हमें छोड़ हमारे सभी रिश्तेदार जैसे बुआ, चाचा, मौसी आदि हमसे ज्यादा सम्पन्न थे। एक बात और थी कि हमारे घर का माहौल शुरू से ही बहुत बोल्ड था। इसका कारण शायद हमारी मम्मी थीं, जो उस समय चालीस के आसपास की होंगी।

उनका नेचर बड़ा ही बिंदास था, और ऐसा ही उन्होंने मेरी दोनों बहनों को बनाया था। मतलब कि जब से मैंने होश संभाला, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमारे घर का अंदर का माहौल बड़ा ही फ्रैंक था। मेरी माँ और दोनों बहनें आपस में छोटी-बड़ी बहनें ही लगती थीं। तीनों का जिस्म मांसल, गोरा और चिकना था। शरीर ऐसा गढ़ा हुआ कि मक्खन की बत्ती ही लगती थी।

इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह थी कि हमारे घर में इतना अधिक खुलापन था कि आम भारतीय इसे सपने में भी नहीं सोच सकता। घर में मेरी माँ और दोनों बहनें आमतौर पर ऐसे कपड़े पहनती थीं कि उनमें से उनका आधे से अधिक शरीर दिखता था। मेरी दोनों बहनें भी अपने स्कूल-कॉलेज में अपने कपड़ों और शरीर को लेकर चर्चा में रहती थीं।

जब से मैंने होश संभाला, यानी मैं दुनिया-दारी समझने लगा, तब से मैंने अपनी माँ और बहनों को ऐसी हालत में देखा है। मैं सूरत से बड़ा भोला-मासूम दिखता हूँ, जिस कारण सभी मुझे अब तक बच्चा ही समझते हैं। शायद इसी कारण मेरी दोनों बहनें और माँ शुरू से ही मेरे सामने अपने कपड़े बदल लेती थीं।

हमारा घर एक कॉलोनी में है, जो गली के सबसे आखिरी में है। एक तरफ गली है और दूसरी तरफ बगीचा। सामने भी खाली प्लॉट हैं, जिस कारण हमारा कोई पड़ोसी नहीं है। इस कारण सेफ्टी के लिए पापा ने घर के चारों ओर ऊँची-ऊँची दीवारें बनवा दीं, जिससे कोई झाँक भी नहीं सकता।

घर के पीछे आँगन में खाली जमीन पड़ी हुई है, जहाँ हम लोग कपड़े-बर्तन धोते हैं या कभी-कभी फुर्सत में वहीं बैठ भी जाते हैं। यहाँ दो जमुन और आम के पुराने घने पेड़ लगे हैं, जिस कारण यहाँ काफी ठंडक और छाया बनी रहती है। ऐसा नहीं है कि यह खुलापन केवल मेरी माँ और बहनों तक ही सीमित है।

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हमारे पापा भी जितनी देर तक घर में रहते हैं, उसमें ज्यादातर समय केवल अपनी V-शेप जॉकी ही पहनते हैं। मैंने उन्हें कभी भी घर में कमर के ऊपर कुछ पहने नहीं देखा। मतलब सिर्फ अंडरवियर, और उसमें से उनका तना हुआ लिंग बड़ा ही अजीब-सा लगता था। जितने दिन पापा घर में रहते, मम्मी भी उनसे चिपकी-सी रहतीं।

आमतौर पर मम्मी इस समय अपनी नाइटी ही पहनती थीं, जो दो पीस में थी, लेकिन इतनी पतली थी कि उसमें से उनका गोरा और मांसल बदन झलकता था। इसी तरह मेरी दोनों बहनें भी पापा के सामने केवल स्पोर्ट्स नैकर या फिर अपने नाइट गाउन में ही घूमती रहतीं।

वे दोनों घर में बड़े गले की टी-शर्ट्स या लेडीज़ इनरवियर यानी समीज ही पहने घूमतीं, जिसमें से उनकी ब्रा भी दिखती रहती थी। कोई काम करते समय वे दोनों झुकतीं तो उनके मोटे-मोटे पपीते की तरह के स्तन बाहर आने को होते, और उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता, फिर चाहे पापा सामने बैठे हों या मैं।

यह सब देखकर पापा भी बड़ी बेशर्मी से अपने उत्तेजित लिंग को, जो उनकी V-शेप अंडरवियर में से दिखता था, अपने हाथों से खुजलाते थे। पापा जब कभी हमारे लिए कपड़े वगैरह लाते, तो मेरी मम्मी और बहनों के कपड़े इतने ज्यादा बॉडी को एक्सपोज करने वाले होते कि उनमें से वे अपना पूरा भूगोल दिखाती रहतीं।

पापा जब उन कपड़ों को पहनवाकर ट्रायल करवाते, तो यदि कोई कपड़ा कहीं से टाइट होता, तो खुद मदद करके मेरी दोनों बहनों को पहनवाते। मम्मी तो घर में साड़ी पहनती ही नहीं थीं, केवल ब्लाउज़ और पेटीकोट। ब्लाउज़ भी ऐसा जिसका गला इतना डीप नेक कि उनके पूरे बोबे बाहर आने को होते।

इसके अलावा ब्लाउज़ की पीठ भी पूरी तरह नंगी ही होती, मतलब पीठ पर भी नाम का कपड़ा होता, जिसमें मम्मी की ब्रा की पट्टी दबी रहती। और इतना छोटा कि कई बार मम्मी कोई सामान वगैरह रखने के लिए हाथ ऊँचा उठातीं, तो नीचे से उनके मांसल उरोज आधे से ज्यादा बाहर आ जाते।

लेकिन मम्मी भी बड़ी बेशर्मी से उन्हें धीरे से अंदर कर लेतीं। पापा कई बार ऐसी फिल्मों की सीडी लाते, जिनको शायद ही कोई परिवार साथ बैठकर देखे। लेकिन हमारे यहाँ हम पाँचों एक साथ बैठकर ऐसी फिल्मों का आनंद उठाते और पापा बीच-बीच में ऐसी भद्दी-भद्दी कमेंट्स करते कि निगाह शर्म से झुक जाए।

लेकिन मेरी मम्मी और दोनों बहनें भी उनके साथ मजे लेकर शोर मचाकर फिल्म के मजे लेतीं। मेरी दोनों बड़ी बहनों ने कभी भी मेरे सामने अपने कपड़े बदलने में कोई शर्म नहीं दिखाई। कई बार तो मैं ही उठकर बाहर चला जाता। यह सब देखकर मेरे मन में भी सेक्स के प्रति रुझान बढ़ने लगा और मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी गधा बन गुलाब जामुन खाऊँ।

मतलब अब मैं पहले की तरह इस सब को गंदा न मानते हुए इसका आनंद लेने लगा। ऐसा नहीं है कि यह माहौल केवल हमारे घर में ही है, बल्कि शायद इसका बीज तो हमारे नानाजी के यहाँ से ही पड़ा हुआ है। मेरी एक मौसी, जिसकी शादी दो साल पहले ही हुई है, वह भी एक्सपोजर के मामले में मेरी माँ और बहनों को कड़ी टक्कर देती है।

उसके ससुराल में बड़ों का पर्दा करना पड़ता है, इसलिए वहाँ वह सती-सावित्री बनकर रहती है। लेकिन गर्मी की छुट्टियों में हमारे घर आते ही ऐसी रहती है मानो सीधे गोवा से चलकर आ रही हो। और यहाँ तो उसे किसी बात की शर्म-हया का प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि यहाँ उसके जीजाजी यानी हमारे पापा वैसे तो रहते नहीं और यदि आते भी हैं तो वे खुद यह सब पसंद करते हैं।

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इस बार जब मौसी हमारे घर गर्मी की छुट्टियों में आईं, तो साथ में बिजली की समस्या साथ लाई। वैसे तो हमारे घर में इनवर्टर है, लेकिन उसकी भी अपनी लिमिट है। इस कारण मम्मी सुबह का खाना जल्दी बना लेतीं और बाकी के काम हम सब मिलकर घर के पीछे की खुली जगह पर करते।

इस बीच किसी समस्या के कारण घर के सीवेज सिस्टम में कोई दिक्कत आ गई और कई कोशिशों के बाद भी बाथरूम का गंदा पानी बाहर नहीं जा पाता। इसलिए घर के सभी मेंबर्स केवल टॉयलेट यूज करते, बाकी नहाना-धोना, कपड़े-बर्तन सब पीछे के खुले हिस्से में करते।

मेरी माँ, बहनें और मौसी वहीँ खुले में मेरे सामने ही नहा लेतीं। वैसे तो वे मेरी ओर पीठ करके ही नहातीं, लेकिन नहाने के बाद मेरे सामने ही अपनी ब्रा वगैरह पहनतीं। वैसे तो मैंने अभी तक मम्मी के अलावा इन तीनों के निपल्स नहीं देखे थे, इसलिए मैं भी जुगाड़ में रहता था।

कई बार तो इन चारों में से कोई न कोई मुझसे अपनी ब्रा के हुक लगवाती या फिर कोई अपनी पीठ पर साबुन लगवाती। यह सब देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो जाता और मैं जानबूझकर ब्रा के हुक लगवाने में देरी करता या फिर पीठ पर साबुन लगाने में अपने पूरे हाथों को अपनी माँ, मौसी या बहनों के मांसल बदन पर फेरता।

एक दिन जब मेरी दोनों बहनें सुबह से ही अपना रिजल्ट लेने के लिए अपने कॉलेज गई थीं और मम्मी किचन में खाना बना रही थीं, तब मौसी घर के पीछे नहा रही थीं। तो मैंने कहा कि मौसी जल्दी नहाओ, तो वो बोली कि तुझे जल्दी है तो तू भी साथ ही आ जा, मुझे अपने पैरों की एड़ियाँ घिसनी हैं।

तो मैं भी मौके का फायदा उठाने के लिए जल्दी से अंडरवियर में जा पहुँचा। मौसी उस समय दीवार की तरफ मुँह करके नहा रही थी और उसने केवल पेटीकोट और ब्रा पहन रखी थी। मुझे देख वह बोली कि आ जा बेटा, मेरी पीठ पर पसीने के कारण बहुत खुजली हो रही है, जरा साबुन लगा दे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तो मैं बोला क्यों नहीं, और मैंने साबुन हाथ में लिया और उसकी ब्रा का हुक खोलकर पानी डालते हुए साबुन मलने लगा। मौसी की मांसल पीठ पर जी भरकर हाथ फेरने के बीच मैंने मौसी की अंडरवियर को वहीँ पड़ा देखा। तो मैं बोला कि मौसी, लाओ मैं आपके पैर रगड़ देता हूँ और तेजी से हाथ में एक ब्रश लेकर मौसी के सामने जा बैठा।

अब मौसी का फ्रंट मेरी तरफ था और उनके मांसल उरोजों को देख मेरी आँखें फटी-सी रह गईं। बड़े-बड़े काले निपल्स देख मेरा लंड कड़क हो गया। और अचानक मुझे आगे देख मौसी ने अपने दोनों मोटे-मोटे स्तनों को अपने हाथों से ढक लिया। तभी मम्मी आ गईं और हँसते हुए बोलीं कि मौसी क्या शरमा गई, अरे ये तो अपना बच्चा है, इससे क्या शरमाना। और वहाँ से चली गईं।

तो मौसी कुछ रिलैक्स हुईं। तब मैं बोला कि लाओ पैर ऊपर उठाओ, मैं अभी रगड़कर साफ कर देता हूँ। यह सुन मौसी एक ऊँची डोली पर बैठ गईं और मैं वहीँ जमीन पर बैठ गया। मौसी का पेटीकोट तो वैसे भी पहले से ही घुटनों के ऊपर तक उठा हुआ था और मैंने ऊपर से पैर हिलाकर उसे जाँघों तक पहुँचा दिया।

मौसी की सफेद केले के तने के समान चिकनी जाँघें देख मेरा लंड अंडरवियर में से फटकर बाहर आने को लगा। मैं जानबूझकर मौसी की टाँगों को पकड़कर जोर-जोर से रगड़ रहा था, जिस कारण उसे अपना बैलेंस बनाने के लिए अपने दोनों हाथों को साइड की दीवार और लोहे के पाइप को पकड़ना पड़ रहा था।

इस पोजीशन में उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे, जिन्हें मैं पागलों की तरह घूर रहा था। तभी मम्मी ने अंदर किचन से मौसी से कुछ पूछा और मौसी जवाब देने के लिए पीछे देखने लगी। तो मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उसके गीले पेटीकोट का एक कोना पकड़कर उसकी जाँघों के जोड़ के बीच से हटा दिया, जिसका मौसी को आभास भी नहीं हुआ।

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और मैंने उसकी दोनों टाँगों को और चौड़ा कर दिया। पेटीकोट के अंदर का नजारा बड़ा चौंकाने वाला था। मौसी की चिकनी, सफेद, मुलायम चूत को देख मेरा लंड पागल-सा हो गया। मौसी ने जब मेरी ओर देखा तो वह मुझे पेटीकोट के अंदर झाँकते देख चुप रही।

और फिर कुछ ही पलों के बाद शायद मन में कुछ विचार कर अपने एक हाथ को अपने गीले पेटीकोट में डालकर मेरे सामने अपनी चूत को सहलाने लगी। जब मैंने अपनी निगाहें चोरी से उधर डाली, तो मैंने देखा कि मौसी अपनी चूत के दोनों लिप्स के बीच एक मोटे-से पिंक बिंदु को रगड़ रही थी और आँखों को आधी बंद कर ऊपर चढ़ाते हुए जोर-जोर से साँस ले रही थी।

तभी मौसी धीरे से बोली कि जरा पीछे हट, मुझे जोर से पेशाब लगी है। तो मैं समझा कि शायद मुझे यहाँ से हटाने का विचार होगा। तभी उसने अपने एक हाथ से अपना गीला पेटीकोट अपनी मोटी-मोटी चूतड़ों के नीचे से निकाला और अपने दोनों सफेद चिकने चूतड़ों को मेरे सामने नंगा कर मेरी तरफ अपनी चूत करके मूतने बैठ गई।

मौसी मुझसे थोड़ी ऊँची जगह बैठी थी, इस कारण उसकी चूत, जो इस पोजीशन में बिल्कुल चौड़ी हो चुकी थी और उसके दोनों लिप्स चौड़े होकर मूतने की पोजीशन में थे, ने मेरी ओर एक कुटिल मुस्कान फेंकी और मेरे लंड को अपनी हथेलियों से दबाते हुए, जो कि तनकर अंडरवियर में से बाहर आने को मचल रहा था, कहा कि इसे भी थोड़ी हवा-पानी खिला दे, बेचारा अंदर ही अंदर मर जाएगा।

तो मैंने फौरन ही अपना लंड बाहर निकाला और मौसी के सामने मूतने बैठ गया। मैं फटी-फटी आँखों से अपनी मौसी की चूत को मूतते हुए देख रहा था, और मौसी एक हाथ से मेरे लंड को पकड़कर धीरे-धीरे सहलाती जा रही थी। बाद में मौसी फिर से उसी तरह अपनी चूत को मेरे सामने चौड़ी करके बैठी रही और अपने दोनों पैरों से मेरे कड़क लंड को सहलाती जा रही थी।

और कहने लगी कि जीजी तुझे बच्चा समझती है और यहाँ बच्चा बच्चे पैदा कर सकता है। मैं भी अब मौसी के और करीब जाकर बैठ गया और अपने एक हाथ से उसकी फूली हुई चूत को सहलाता रहा। और पीछे देख-देखकर किसी को आता न देख उसके पपीते समान मोटे-मोटे स्तनों को मुँह में भर चूसता रहा।

इस तरह जब तक मेरी बहनें नहीं आईं, तब तक हम दोनों उसी तरह एक-दूसरे को हाथों से सहलाते हुए नहाते रहे। उस पूरे दिन मौसी मुझे अकेले में पकड़-पकड़कर अपनी चूत में हाथ लगवाती या फिर अपने मांसल बोबों को मेरे मुँह में देकर उन्हें जोर-जोर से चूसने की जिद करती।

मेरे ख्याल से यहाँ उसे मौसा जी की कमी महसूस हो रही होगी और इस कारण वह मेरा फायदा उठाना चाहती थी। खैर, जैसे-तैसे दिन तो बीत गया, लेकिन जब रात को सोते समय लाइट फिर चली गई, तो सबने ऊपर छत पर सोने का प्लान बनाया। छत पर अंधेरा था, लेकिन ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी।

पापा भी सैटरडे नाइट होने के कारण कुछ देर पहले ही घर आए थे। छत पर सबसे कोने में मैं और मौसी सो गए, उसके बाद दोनों बड़ी बहनें और फिर मम्मी और सबसे आखिरी में पापा थे। गर्मी के कारण मैं और पापा केवल अपनी V-शेप अंडरवियर पहने थे, जबकि मौसी ने एक महीन कपड़े की नाइटी पहन रखी थी।

मेरी दोनों बहनों में से एक ने तो केवल समीज पहन रखी थी और दूसरी ने शर्ट और नैकर। मम्मी सबसे आखिरी में आईं और अपना ब्लाउज़ खोलकर पापा के पास ही सो गईं। कुछ देर बाद मौसी ने मेरे अंडरवियर में हाथ घुसाकर मेरा लंड टटोला, तो मैं उत्तेजित हो गया। और मैंने भी बड़ी बेशर्मी से अपना हाथ मौसी की नाइटी में घुसा दिया।

मौसी ने न तो ब्रा पहनी थी और न ही पैंटी। उसके चूचक बड़े कड़क होकर तने हुए थे। मौसी मेरा लंड सहलाती जा रही थी और उसकी चूत भट्टी की तरह तप रही थी। मैंने अपनी दो उंगलियों को मौसी की चिकनी चूत में घुसाने लगा, तो वह बोली कि रे, पास सामान नहीं है क्या? जो तू उंगलियों का सहारा ले रहा है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं बोला कि तुम ही बताओ कि यहाँ सबके बीच में क्या करूँ। तभी मम्मी-पापा के बीच कुछ हलचल होने का आभास हुआ। मम्मी अंधेरे में छत के एक कोने में पेशाब करने के लिए गईं और बीच रास्ते में से ही अपना पेटीकोट कुल्हों के ऊपर उठा दिया, जिससे मम्मी के गोरे-गोरे मांसल चूतड़ आधे चाँद की रोशनी में दिखाई देने लगे।

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मौसी से मैं बोला कि मम्मी ने भी पैंटी नहीं पहनी है, तो मौसी धीरे से बोली कि अभी थोड़ी देर पहले तेरे पापा ने ही उतारी थी। मम्मी की पेशाब करने से एक सिटी-सी आवाज आने लगी, जिसे देख मेरे लंड, जो कि मौसी के हाथों में था, और जोश में आ गया, जिसे मौसी ने महसूस कर लिया। और हँसते हुए बोली कि चूत की आवाज से ही तेरा ये हाल है, तो जब मिल जाएगी तो तेरा क्या होगा रे।

तभी मम्मी पापा के पास आईं, तो पापा उठ बैठे और हम सभी की ओर एक निगाह डालकर, मम्मी के पेटीकोट में हाथ डालकर और फिर धीरे से मुँह भी डालकर मम्मी की चूत चाटने लगे। इसे देख मौसी की हालत खराब हो गई और मेरी जो दो उंगलियाँ मौसी की चूत में थीं, वह गर्म चिकने स्राव से भीग गईं।

तभी पापा-मम्मी दोनों जल्दी से नीचे चले गए। मेरी दोनों बहनें तो घोड़े बेचकर सो रही थीं। एक बहन, जो कि जस्ट हमारे पास में ही सोई हुई थी, करवट बदलकर अपनी दोनों टाँगों को फैलाकर सो गई, जिस कारण उसकी पैंटी समीज में से दिखाई पड़ने लगी।

यह नजारा देख मेरा खुद पर काबू नहीं रहा और मैंने धीरे से अपना एक हाथ अपनी बहन की पैंटी पर रख दिया और धीरे-धीरे उंगलियों से टटोलने लगा। मैंने पाया कि उसकी पैंटी से केवल उसकी चूत के लिप्स ही ढके थे, जबकि आसपास से जाँघों के जोड़ खुले हुए थे। कि अचानक मेरी बहन कुनमुनाई और उसने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रगड़ने लगी।

जैसे ही मैंने अपना हाथ पीछे किया, मौसी जान गईं और बोलीं कि क्या मैं कम पड़ रही हूँ, जो तू उसकी चूत टटोल रहा है। ऐसा कह मौसी उठी और अपने दोनों पैर फैलाकर मेरे सीने पर चढ़ बैठी। और उसने अपनी चूत को फैलाकर मेरे होठों पर रख दिया। मैंने भी तुरंत मौसी की चूत को अपने मुँह में भर इतना जोर से चूसना शुरू किया कि मौसी बिलबिला-सी गई।

मैंने जैसे ही अपना अंडरवियर खोला, तो मौसी मेरे लंड के उभार को देख रुक नहीं पाई और पलटकर मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। शायद इसे सेक्सी लैंग्वेज में 69 की पोजीशन कहते हैं। अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तो मैंने तत्काल मौसी को पलटकर उसकी चूत में अपना लंड पेल दिया।

लेकिन अभी तो मैं अनाड़ी खिलाड़ी था और मौसी खिलाड़ी, इस कारण मौसी की उत्तेजना को काबू में करने में मुझे बड़ी परेशानी हो रही थी। फिर भी हम दोनों लगभग साथ में ही झड़े। हमने अपने कपड़े ठीक किए और सो गए। सुबह ठंडी हवाओं के कारण मेरी नींद खुली, तो हल्का उजाला होने लगा था।

और मैंने देखा कि मेरी एक बहन अपना एक हाथ अंडरवियर में डालकर सो रही थी। शायद रात में चूत सहलाते-सहलाते नींद लग गई होगी। मौसी की चूत में से चिपचिपा-सा सफेद वीर्य, जो कि मेरा ही था, भी साफ दिखाई पड़ रहा था, क्योंकि उसकी नाइटी जाँघों के ऊपर तक चढ़ी हुई थी।

मेरी एक दूसरी बहन, जो कि शर्ट में थी, उसके तकिए के पास उसकी ब्रा पड़ी थी और उसके शर्ट के ऊपर के दो-तीन बटन खुले हुए थे, जिसमें से उसके मांसल स्तन बाहर आने को हो रहे थे। जब मैं नीचे टॉयलेट के लिए आया, तो पापा-मम्मी के बेडरूम की खिड़की खुली दिखाई पड़ी।

मैंने सावधानी से अंदर झाँका, तो मम्मी-पापा को नंगे एक-दूसरे से चिपके पाया। मम्मी की हल्की झाँटों वाली चूत में से पापा का लंड आधा बाहर चूहारे की तरह लटका पड़ा था। शायद रात में मजे मारकर यूँ ही सो गए होंगे। आज संडे था। पापा बोले कि चलो आज सभी वाटरपार्क चलते हैं। और सभी फटाफट तैयार होकर चल पड़े।

कार में आगे तो मम्मी-पापा बैठ गए और पीछे हम तीनों भाई-बहन और मौसी। उन तीनों के बैठने के बाद मेरे लिए जगह ही नहीं बची, क्योंकि तीनों के बदन पर चरबी ही इतनी थी। फिर भी मैं उनकी गोद में ही चढ़ बैठा, जिस कारण मेरे हाथ और कोहनियाँ उनके स्तनों और जाँघों को टच कर रहे थे।

लेकिन फैमिली मेंबर होने के कारण हमें कोई परेशानी नहीं थी। मौसी जानबूझकर मेरे लंड को टटोल रही थी। और मेरी एक बहन, जिसने मिनी स्कर्ट पहनी थी, उसका स्कर्ट भी मेरे बैठने से उसकी नर्म सफेद जाँघों से भी ऊपर चढ़ चुका था। लेकिन मेरी बहन को इसकी कोई परवाह नहीं थी।

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वाटरपार्क में जाने पर सबसे पहले हमें कॉस्ट्यूम्स किराए के लेना थे। लेकिन आमतौर पर जो कॉस्ट्यूम्स इंडियन लेडीज़ के लिए होती हैं, वे बड़ी ही बुरी हालत में थीं, जिन्हें पहनने से चारों ने मना कर दिया। तो स्टोरकीपर ने हमें कुछ इम्पोर्टेड स्विमसूट्स दिखाए, जो कि वेस्टर्न कल्चर के हिसाब के थे।

वह तो उन्हें हमें देने में झिझक रहा था कि कहीं उनके छोटे साइज़ को देख लेडीज़ कस्टमर्स नाराज़ न हो जाएँ। लेकिन हमारी इन चारों विभूतियों ने उन्हें पहनने में ज़रा भी शर्म-सकुचाहट नहीं दिखाई। पीछे से वह धीरे से बोला कि इन कॉस्ट्यूम्स को आज तक किसी इंडियन लेडी ने नहीं पहना, आज यह पहला मौका है।

इन कॉस्ट्यूम्स का साइज़ थोड़ा छोटा था, जिस कारण मेरी माँ, मौसी और दोनों बहनों के शरीर पर वह छोटी लग रही थीं। इन सभी का मांसल बदन ऐसा लग रहा था मानो अब फटे तब फटे। ब्रा में से उनके स्तन बाहर लटक रहे थे और पैंटी की पीछे की स्ट्रिप पूरी तरह से गांड की दरार में घुस गई थी।

आगे की स्ट्रिप भी बड़ी मुश्किल से चूत की फांकों को अपने अंदर समेटे थी। सभी लोग हमारे परिवार को ही देखे जा रहे थे। कुछ आवारा लड़कों का ग्रुप तो हमारे पीछे ही पड़ गया, जिसे वहाँ की सिक्योरिटी गार्ड्स ने वहाँ से भगाया। हम सभी ने वहाँ पानी की सभी स्लाइड्स का भरपूर आनंद उठाया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मम्मी के स्तनों से चूचियाँ तो बार-बार बाहर आ रही थीं, जिन्हें मम्मी हर बार अंदर करतीं। और मौसी की चूत तो दो बार साफ दिखाई पड़ गई। तो एक बार पापा ने जानबूझकर अपनी उंगलियाँ मौसी की चूत पर रगड़ दीं। मेरा लंड भी फटने की कगार पर था, जब मैं एक-एक लेडीज़ को लेकर वहाँ की सबसे ऊँची स्लाइड पर जाता और नीचे आता।

तब वहाँ के इंस्ट्रक्टर्स पीछे जेंट्स को बैठा देते थे और आगे एक लेडीज़ को। मेरा लंड पहले से ही बमबम हो रहा था और ऊपर से लंड के आगे इन लेडीज़ की गांड का मुलायम टच। बस इसे वही अनुभव कर सकता है, जो ऐसा कर रहा हो। जब बड़ी तेजी से हम नीचे आते, तो इन चारों लेडीज़ को तो आँख मिचमिच चिल्लाने से ही फुर्सत नहीं रहती और मैं बड़ी स्टाइल से अपनी उंगलियों से उनकी चूत को रगड़ देता।

मौसी के साथ तो एक बंद राइड में नीचे उतरते समय हम बीच में ही फंस गए। तब हम एक पाइप में थे। तभी मैंने अपनी दोनों उंगलियाँ मौसी की चूत में घुसा दी, तो वह बोली कि पागल मत बनाए, यहाँ सबके बीच कैसे चुदवाएँगे। आज तो तेरे पापा भी मेरे पीछे हाथ धोकर पड़े हैं। बार-बार पानी में मेरी चूत पर हाथ फेर रहे हैं। और तेरी माँ भी कह रही है कि अब तो तू भी जवान हो गया है, तो कुछ प्लान बना और सभी तड़पती चूतों का बाजा बजवा दे।

यहाँ वाटरपार्क में एक कॉन्टेस्ट भी थी, जिसमें कुछ प्राइज़ थे, जैसे मनीबैक यानी आपके टिकट के पूरे पैसे वापस, या फिर लंच/डिनर फ्री। इसके अलावा और भी बहुत सारे थे। हमारी किस्मत भी खुलना लिखी थी। हमें वहाँ की लग्जरी कॉटेज में एक रात बिताने का चांस मिला। हमारी तो लॉटरी पड़ थी।

हम भागते हुए उस लग्जरी कॉटेज में पहुँचे, तो हम दंग रह गए। वह पूरी तरह से प्राइवेसी वाला एक कोने में बना था, जिसके अंदर ही स्विमिंग पूल और एक काँच का डिस्को रूम भी बना था, जिसमें इतने सारे पानी के शावर लगे थे कि मानो खूब तेज बारिश हो रही हो। बड़े-बड़े बेडरूम्स और मोज-मजे के सारे इंतजाम थे।

वेटर को बुलाना हो, तो बेल बजाओ और वह तुरंत हाजिर हो जाता। इसके अलावा वहाँ आपको कोई भी डिस्टर्ब करने वाला नहीं था। वह भी कल इसी समय तक, यानी 24 घंटे टोटल फ्री। हम सभी वहाँ पहुँचे और पूल में कूद पड़े। अब हमारे साथ की लेडीज़ को किसी तरह की शर्म ही नहीं रह गई थी।

मम्मी को शायद ब्रा टाइट पड़ रही थी, इसलिए मम्मी ने सबसे पहले अपनी ब्रा उतार फेंकी। और अब मम्मी अब नममात्र की छोटी-सी पैंटी में अपनी इज्जत ढके धिंगामस्ती कर रही थीं। मेरी दोनों बहनों की शायद पैंटी टाइट थी, इस कारण वे बार-बार अपनी पैंटी की फ्रंट साइड को अपनी चूत से अडजस्ट कर रही थीं, जिस कारण उनकी चूत की झलक भी दिखाई पड़ ही जाती थी।

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मौसी तो शायद मम्मी की थोड़ी शर्मपाल रही थी, नहीं तो आज तो वह पापा और मुझसे चुदवाने के लिए उतावली हो रही थी। पापा भी मम्मी की आँख बचाकर बार-बार मौसी के चूतड़ों और चेस्तों को दबा देते थे। और मेरे ख्याल से यह सब हरकत मम्मी और मेरी दोनों बहनों से छुपी नहीं थी।

शाम को लगभग चार बजे हमें भूख लगने पर पापा ने फोन पर हैवी नाश्ते और एक क्रेट बियर की बोतलों का ऑर्डर किया। वैसे तो बियर हममें से किसी के लिए भी नई चीज नहीं थी, क्योंकि पापा तो घर में रेगुलर पीते ही थे। और कई बार मम्मी भी उनका साथ दे देती थीं, लेकिन केवल शौकिया तौर पर।

और मैं तो कई बार चोरी-छिपे बची-खुची बियर के दो-चार घूँट मारकर सो जाता था। मेरी दोनों बहनों ने जरूर एक बार मस्ती में बियर पी ली थी, तब उन्हें संभालना मुश्किल पड़ गया था। केवल मौसी के बारे में हमें नहीं मालूम था। तो मौसी ने धीरे से राज खोला कि वह तो मौसा जी के साथ कई बार ऐसी मीटिंग्स और आउटिंग में जाती है, जहाँ सभी लेडीज़ को बियर पीना शान समझा जाता है।

तो हमारी भी पार्टी शुरू हुई और सभी ने अपनी-अपनी लिमिट में बियर गटकी। इसके बाद हम सभी भागते-दौड़ते शावर रूम में पहुँचे। वहाँ पर हाई-फाई म्यूजिक सिस्टम लगा था। हमने एक फास्ट बीट म्यूजिक सीडी लगादी, जिसके बजते ही मैंने शावर भी ऑन कर दिए।

अब तो मानो संगीत और बियर के साथ-साथ पानी का भी नशा चढ़ रहा था। अधनंगे बदनों में बियर के कारण कामोत्तेजना भी छा रही थी, जिसका सबसे ज्यादा असर शायद मम्मी और पापा को हो रहा था। इस कारण वे कह रहे थे कि तोड़ दो सारे बंधनों को और केवल मर्द-नारी बन जाओ।

अपने मन की दबी सभी इच्छाएँ पूरी कर लो। ऐसा मौका शायद ही जीवन में कभी आए। इसके बाद तो पापा ने मौसी की ब्रा को खींचकर उसे टॉपलेस कर दिया। मम्मी ने इसमें बिना कोई ऑब्जेक्शन लिए, मौसी को अपने मोटे-मोटे पपीते के समान उरोजों को हाथों से नहीं ढकने दिया और उन्हें जोर-जोर से मसलने लगीं।

मेरी एक बहन ने दूसरी बहन की ब्रा उतार फेंकी, तो उसने भी उसके साथ वही किया। मेरी दोनों बहनें एक-दूसरे से चिपकती जा रही थीं। जबकि पापा ने तो मौसी को पकड़कर मुँह से उसके स्तनों को चूस रहे थे, तो हाथों को मौसी की पैंटी में डालकर उसकी चूत की गहराई नाप रहे थे।

शावर के पानी का प्रेशर इतना तेज था कि उसके आर-पार दिखाई भी नहीं पड़ रहा था। तभी मम्मी अचानक मेरे पास आईं और मुझसे चिपककर डांस करने लगीं। पहले तो मैंने इसे नॉर्मली लिया। लेकिन जब मम्मी ने अपने दोनों स्तनों को मेरे सीने से रगड़ना शुरू किया, तो मैं थोड़ा चक्कर में पड़ गया।

तभी अचानक मम्मी मुझे पीछे धक्कलाते हुए काँच की दीवार तक ले गईं और मुझे उससे सटाकर मेरे पैरों में बैठ गईं और मेरे उत्तेजित लंड को अंडरवियर से बाहर निकालकर उसे मुँह में लेकर चूसने लगीं। मेरा चकित होना स्वाभाविक था। लेकिन मैं कहीं मम्मी के मुँह में ही खाली न हो जाऊँ, इस डर के कारण मैं स्वयं पर कंट्रोल कर रहा था।

लेकिन किसी को भी वहाँ इतना मजा नहीं आ रहा था। इस कारण हम सभी रिसॉर्ट्स के बड़े बेडरूम में पहुँचे, जो कि फुली एयरकंडीशन्ड था। हमने अपने बदन को पोंछा और सभी किंगसाइज़ बेड पर जा बैठे। मम्मी ने बड़े आइडिया से कहा कि जो चाहे बिना शर्म जिसे चाहे अपना पार्टनर बनाए। लेकिन कोई किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करेगा।

और मेरी दोनों बहनों को कहा कि तुम दोनों भी मोज-मजे में थोड़ी सावधानी रखना। पहले ही हमारा ग्रुप पूरा नहीं है, मतलब लेडीज़ तो चार थीं, लेकिन हम जेंट्स केवल दो ही थे। इसके बाद तो असली धमाल मचा। पापा मौसी के ऊपर जोर की तरह चिपक गए। और जैसे ही पापा ने मौसी की चूत में अपना मोटा लंड पेला, मम्मी तुरंत ही पापा के सामने अपनी चूत को जीभ से चटवाने पहुँच गईं।

पापा चोद तो मौसी को रहे थे, लेकिन चूत मम्मी की चाट रहे थे। ऐसे ही मेरी दोनों बहनों ने भी अपने कपड़े खोल मेरे सामने अपनी नग्नता पेश कर दी। मैंने भी एक के स्तनों को चूस-चूसकर उनका रस निचोड़ दिया और दूसरी की चूत में अपनी दोनों उंगलियों को पेल-पेलकर उसको तैयार कर दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

और फिर उसकी भी चूत को चाट-चाटकर खाली कर दिया। लेकिन मुझे इस बात का डर था कि कहीं वे प्रेगनेंट न हो जाएँ। इस डर से मैं उन्हें चोद नहीं रहा था। लेकिन वे कहाँ मानने वाली थीं। बार-बार अपनी कचौड़ी जैसी रसभरी चूतों को मेरे मुँह के पास लाकर रगड़ रही थीं।

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इसलिए मैंने भी अपना लंड बारी-बारी से उनकी चूतों में पेलकर उन्हें खाली कर दिया। और खुद जाकर मम्मी की चूत को पेलने में लग गया। मम्मी तो वैसे भी चुदवाने के लिए पागल हो रही थीं, क्योंकि पापा तो मौसी को चोद ही नहीं रहे थे। और मौसी भी पागलों की तरह चिल्ला-चिल्लाकर चुदवा रही थी। मेरे लंड पेलते ही मम्मी मुझसे जोर की तरह चिपक गईं और बोलीं, बहनचोद लवड़े, अब अपनी माँ भी चोद दे। देख ये साली रंडी अपने बहन के खसम से ही चुदवा रही है।

तो मौसी भी जोर से बोली कि तेरे में दम होता तो आज तेरा मरद मेरी चूत के ऊपर मुँह नहीं मारता। तो सभी जोर-जोर से हँसने लगे। इसके बाद तो पूरी रात हम सभी अपने पार्टनर बदल-बदलकर चुदाई के मजे मारते रहे। उस दिन से तो मानो दुनिया ही बदल गई। घर में हम सभी का कपड़ों का खर्चा खत्म-सा हो गया। और जीवन टेंशन-फ्री। मौसी ने धीरे से इस प्लान में अपने पति यानी हमारे मौसा जी को भी शामिल कर लिया, जो कि हमेशा ही मेरी दोनों बहनों के पीछे हाथ धोकर पड़े रहते। और इस तरह मोज-मजे के साथ जीवन बीत रहा है।

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