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बेटी की शादी के लिए माँ का बलिदान

जून 22, 2026 by hamari Leave a Comment

XXX Dehati Chudai Story

ये कहानी मेरे दोस्त की माँ की है, जिसे मैंने चोदते हुए सुनी। उस दिन रात को दो बार चोदने की वजह से दोनों थके हुए थे। हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर चुम्मा-चाटी कर रहे थे। मेरा मुरझाया लंड अभी भी उनकी चूत में था। तभी मैंने उनको पूछ लिया कि ऐसा क्या हुआ जो आपको अपने बेटे से चुदवाना पड़ा। तो उन्होंने कहा कि ये लंबी कहानी है। XXX Dehati Chudai Story

जब मेरी शादी होने वाली थी तब ससुराल वालों ने ५०००० रुपये दहेज में मांगे थे, जिसे मेरे घर वाले देने में असमर्थ थे। एक दिन मेरे होने वाले ससुर कुछ काम से हमारे घर आए और रात को हमारे घर रुके। रात को खाने के बाद उनका बिस्तर बिछा दिया गया और वो लेट गए। मेरा बाप खेत चला गया।

तभी मेरे ससुर ने कहा कि बदन बहुत दर्द कर रहा है, तो मेरी माँ तेल लेकर आई और मेरे ससुर को कहा कि अपने कपड़े उतारिए, मैं मालिश कर देती हूँ। ससुर ने अपने कपड़े उतार दिए और माँ खाट के कोने पर बैठकर उनकी मालिश करने लगी।

उस वक्त माँ ने ब्लाउज, पेटीकोट और साड़ी पहनी हुई थी। उनका ब्लाउज ट्रांसपेरेंट था और उस वक्त ब्रा नहीं थी, इसलिए उनके निप्पल साफ दिख रहे थे। माँ ने ससुर की पीठ पर और छाती पर मालिश करने के बाद उनके पैरों पर तेल लगाने लगी। वो दोनों बातें कर रहे थे।

तभी माँ की साड़ी का पल्लू सरक गया। उनके हाथ पर तेल लगे होने की वजह से उन्होंने पल्लू ऊपर तो किया पर वो बार-बार सरककर नीचे गिर रहा था। माँ की ३८ इंच की चुचियाँ देखकर और माँ के कोमल हाथों के स्पर्श की वजह से मेरे ससुर के अंदर का मर्द जाग चुका था।

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उनका लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था। तभी माँ ने उनसे कहा कि समधि जी, दहेज की रकम बहुत ज्यादा है, कुछ कम नहीं हो सकती क्या? तो ससुर ने कहा कि कम तो हो सकती है पर… और वो अटक गए। वो माँ की चुचियों को घूर रहे थे। तो माँ ने उनसे पूछा, पर क्या?

तो उन्होंने माँ को बैठकर माँ के दोनों हाथों को पकड़कर खाट पर डाल दिया और माँ के ऊपर चढ़कर कहा कि तुम्हें मेरे साथ सोना पड़ेगा। माँ उनकी इस हरकत से घबरा गई और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी। पर छुड़ा न पाई और मेरे ससुर को कहने लगी कि वो उन्हें छोड़ दें।

पर ससुर ने माँ को और कसके पकड़ लिया और कहा कि देखो, वैसे भी तेरा पति खेत गया है और तुम्हारी बेटी सो रही है, मान जाओ और मेरी रात को रंगीन बना दो, मैं दहेज में सिर्फ २०००० लूँगा। फिर भी माँ नहीं मानी और अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करती रही।

तभी ससुर ने उनकी बाईं चुची को अपने हाथ में ले लिया और कहा कि देखो मान जाओ, नहीं तो मैं तुम्हारी बेटी की जिंदगी हराम कर दूँगा, उसे और कहीं भी रिश्ता नहीं मिलेगा। तो माँ थोड़ी संत हुई और मेरे ससुर से कहने लगी, अगर इसके बारे में किसी को पता चल गया तो मेरा क्या होगा?

तो ससुर ने कहा, वैसे भी यहाँ तुम्हारी बेटी के अलावा और कोई तो है नहीं और तुम्हारी बेटी सो रही है, तो किसी को पता चलने का सवाल ही नहीं है। और फिर मेरे ससुर ने साड़ी के पल्लू को माँ की चुचियों पर से हटा दिया और ब्लाउज खोलकर माँ की चुचियाँ दबाने लगे।

माँ अब चुपचाप पड़ी हुई अपनी इज्जत मेरे ससुर को सौंप रही थी। मेरे ससुर ने माँ की एक चुची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। वैसे भी मेरे ससुर ने सिर्फ छोटी सी धोती पहनी थी। माँ की बड़ी-बड़ी चुचियाँ तनकर और बड़ी हो गईं। अब माँ भी उनकी हरकतों का मजा लेने लगी और उनके सिर को चुचियों पर दबाने लगी।

थोड़ी देर के बाद मेरे ससुर ने माँ को अपने लंड के ऊपर बिठा दिया और माँ की दोनों चुचियों को दबाने लगे। थोड़ी देर माँ की चुचियों से खेलने और चूसने के बाद माँ का ब्लाउज उतार दिया। अब माँ ऊपर से पूरी नंगी थी। फिर ससुर ने माँ के पैरों पर अपना हाथ रखा और उनकी जांघों को सहलाने लगे।

माँ बहुत गर्म हो गई थी और वो ससुर की छाती को चूमने लगी। फिर ससुर ने माँ को अपने बगल में लिटा दिया और उनका पैर अपने पैरों पर खींच लिया और उनके पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर पैरों को सहलाने लगे। उनके ऊपर-नीचे होने की वजह से साड़ी तो पहले ही खिंचकर माँ से अलग हो गई थी और उनका पेटीकोट भी कमर के पास इकट्ठा हो गया था।

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ससुर और दबा-दबाकर माँ के पैरों को सहला रहे थे और माँ पूरी तरह गर्म हो गई थी और खुद ही अपनी दोनों चुचियों को अपने हाथों से दबाने लगी। फिर ससुर ने माँ की पैंटी को खींचकर उतार दिया और माँ को चित लिटाकर उनकी चूत में उंगलियाँ डालने लगे।

माँ पूरी तरह गर्म हो गई थी और मुँह से सिसकारियाँ भरने लगी। और जैसे ही ससुर उनकी चूत में उंगली घुसाते, वो अपने चूत को ऊपर उठाकर उन्हें अंदर ले लेती। फिर ससुर ने माँ का पेटीकोट खोलकर उतार दिया और माँ को पूरा नंगा कर दिया। अपनी धोती खोलकर वो भी नंगे हो गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उनका १० इंच लंबा और ३ इंच मोटा लंड पूरा तनकर माँ को चोदने को उतावला हो रहा था। तभी ससुर माँ की चूत के पास झुके और चूत को चौड़ी करके चाटने लगे। माँ ने उन्हें रोकते हुए कहा, ये आप क्या कर रहे हैं? तो ससुर ने माँ को धकेलते हुए कहा, चुपचाप बिस्तर पर लेट जा और मुझे तेरे हुस्न का मजा लेने दे।

और वो फिर से चूत चाटने लगे। और फिर थोड़ी देर में माँ ने पानी छोड़ दिया। फिर ससुर ने अपना लंबा लंड माँ की चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर उतार दिया। माँ भी इस अचानक हमले को सहन न कर पाई और उठकर ससुर से लिपट गई। और फिर ससुर ने चोदना शुरू कर दिया। माँ चुपचाप उनसे चुदवाती रही।

ससुर ने माँ को आधे घंटे तक चोदा और फिर माँ के ऊपर लेट गए। उस दिन उन्होंने माँ को तीन बार चोदा। ये सब मेरा बाप खिड़की से देख रहा था। दूसरे दिन मेरे ससुर चले गए लेकिन माँ उदास थी, वो कुछ बोल नहीं रही थी। माँ पूरे दिन गुमसुम थी।

रात को जब मैं सो गई उसके बाद मेरे बाप ने माँ को पूरा नंगा कर दिया लेकिन माँ अभी भी उदास थी। मेरा बाप उनके ऊपर लेट गया और चुचियों को दबाते हुए कहा कि डरो मत, तुमने जो हमारी बेटी के लिए किया वो मेरा काम था और ये सब तुमने किया उसके लिए मैं नाराज नहीं हूँ।

उसके बाद माँ नॉर्मल हुई और दोनों चुदाई का मजा लेने लगे। लेकिन अभी भी २०००० की जरूरत थी। मेरे बाप ने बहुत जगह हाथ फैलाए पर कोई फायदा नहीं हुआ। फिर उन्होंने माँ को कहा कि जैसे तुमने अपने आप को भर्ती के ससुर के साथ सोकर दहेज की रकम कम करवाई थी, उसी तरह तुम्हें साहूकार के साथ सोकर पैसों का इंतजाम करना पड़ेगा।

पहले तो माँ तैयार नहीं हुई पर मेरी वजह से मान गई। माँ दूसरे दिन साहूकार के पास पैसे मांगने गई। उस वक्त वहाँ साहूकार के अलावा कोई नहीं था। जब माँ ने उनसे पैसे मांगे तो साहूकार ने मना किया कि मैं इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकता। माँ ने बहुत विनती की पर नहीं माना।

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जब माँ वापस आने लगी तो साहूकार ने माँ को रोका और वो उठकर माँ के पास आया और माँ के कंधों पर हाथ रखकर माँ की पीठ सहलाने लगा और माँ से कहा कि मैं तुम्हें पैसे तो दूँगा लेकिन तुम्हें भी मुझे कुछ देना पड़ेगा। जब माँ ने उनसे पूछा क्या, तो उसने कहा तुम्हारा ये भरा हुआ बदन।

तो माँ दूर जाकर खड़ी हो गई तो वो फिर से माँ के पास आया और माँ को पीछे से पकड़ लिया और माँ के नाभि के पास अपने हाथों से सहलाते हुए कहा कि देखी रकम बड़ी है, वैसे तो तुम चुका नहीं पाओगी लेकिन हाँ तुम मेरा बिस्तर गर्म करती रहो, मैं तुम्हारे कर्जे से १०० रुपये कम करता रहूँगा।

माँ वहाँ चुपचाप खड़ी थी तो साहूकार की हिम्मत बढ़ गई और माँ के पल्लू को कंधों पर से सरका दिया और माँ की चुचियाँ दबाने लगा। फिर थोड़ी देर दबाने के बाद वो माँ को अंदर के कमरे में ले गया। वहाँ जाकर उसने माँ की पूरी साड़ी उतार दी और माँ को वहाँ बिछे खाट पर डाल दिया।

फिर उसने अपना कुर्ता उतार दिया और माँ के पास लेटके माँ की चुचियाँ दबाने लगा। फिर उसने माँ का ब्लाउज खोल दिया, चुची को चूसने लगा और दूसरी को दबाने लगा। वो पूरा माँ के ऊपर चढ़ गया और जोर-जोर से चुचियों को चूसने लगा।

माँ जो कि पहले से ही उससे चुदवाने के लिए अपने आप को तैयार करके गई थी, साहूकार के सिर को अपनी चुचियों पर दबाने लगी। साहूकार माँ की गर्दन के पास भी जोर-जोर से चाट रहा था। वो चुचियों को चूसते-चूसते कभी-कभी जोर से काट देता पर माँ मजबूरी की वजह से चुपचाप पड़ी रही।

थोड़ी देर चुचियों से खेलने के बाद वो माँ को चोदने के लिए पूरी तरह तैयार था। वो माँ के ऊपर से उठा और अपनी धोती उतारकर पूरा नंगा हो गया। उसका लंड कोई ज्यादा बड़ा नहीं था, उसके लंड की साइज ५ इंच थी जो कि पूरी तरह तनकर खड़ा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर वो माँ के पास आया और माँ के पेटीकोट को खोल दिया और माँ की पैंटी उतार दी। वो माँ की गोरी-गोरी मांसल जांघों को देखकर जैसे पागल हो गया। वो माँ के पैरों के पास आ गया और माँ के घुटनों के पास अपनी जीभ लगाकर माँ की चूत तक चाटने लगा।

वो माँ की चूत में अपनी उंगली डालने लगा। फिर चूत को फैलाकर अपनी जीभ डालकर चाटने लगा। उसने एक हाथ माँ की कमर के नीचे डालकर चूत चाट रहा था और दूसरे से माँ के पैर सहला रहा था। माँ धीरे-धीरे गर्म हो गई और अपने मुँह से मदक आवाजें निकालने लगी।

फिर थोड़ी देर चूत को चाटने के बाद वो ऊपर बढ़ने लगा। वो चाटते-चाटते फिर से ऊपर पहुँच गया। माँ की चुचियों पर अपनी जीभ घुमाने लगा और बीच में चुची को मुँह में भरके चूस लेता। फिर उसने अपना छोटा सा लंड माँ की खुली हुई चूत पर रखा और धक्का मारने ही वाला था कि पूरा अंदर उतार गया।

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ऐसा लग रहा था जैसे डेढ़ इंच के पाइप में आधे इंच का रॉड डाल दिया हो। फिर माँ ने अपने फैले हुए पैरों को पास कर दिया और चूत को दबा दिया जिससे चूत दब गई, छोटी हो गई। वो माँ की चुचियों को चूसते हुए जोर-जोर से माँ को चोदने लगा।

उसने माँ को करीब ५-६ मिनट तक चोदा और झड़कर माँ के ऊपर लुढ़क गया। लेकिन माँ की प्यास अभी बुझी नहीं थी। माँ ने उनको बिस्तर पर लेटने को कहा और उसके लंड को सहलाने लगी और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। करीब आधे घंटे तक चूसा, तब जाकर खड़ा हुआ। और फिर वो माँ के ऊपर आकर माँ को चोदने लगा। इस बार भी ५-६ मिनट के बाद झड़ गया।

और माँ को चूमके खड़ा हो गया और कपड़े पहनने लगा। माँ ने भी अपनी चूत को अपने पेटीकोट से साफ किया और कपड़े पहन लिए। जैसे ही माँ कपड़े पहनकर बाहर निकली, साहूकार ने माँ को अपने पास खींच लिया और कहा कि वो रात को घर पे आएगा और पैसे दे दिए।

माँ ने पैसे लिए और जल्दी से घर आ गई। उस वक्त मैं घर पे नहीं थी। माँ ने पैसे दे दिए और कपड़े निकालकर नंगी हो गई और मेरे बाप को बाहों में भरके खाट पे ले गई और उनसे चुदवाकर अपनी प्यास बुझा ली। उस दिन माँ ने अपनी आधी प्यास को घर आकर मेरे बाप से शांत की और फिर मेरे बाप को बताया कि वो रात को घर आएगा और मुझे चोदकर कर्जे में से १०० रुपये कम करेगा।

तो मेरे बाप ने कहा घर क्यों बुलाया, यहाँ तो भर्ती होगी। वो जैसे ही आएगा उसे लेकर खेत चले जाना, वहाँ नीम के पेड़ के नीचे खाट बिछा होगा और वहाँ कोई नहीं आएगा क्योंकि उसके बगल में उसी का खेत है। शाम को खाने के बाद मैं सो गई और उसके बाद मैंने माँ को ब्लाउज और पेटीकोट में घर से बाहर जाते हुए देखा।

मैंने खिड़की से देखा तो माँ वहाँ अंधेरे में खड़ी थी। तभी साहूकार चोरों की तरह छुपते हुए घर की ओर आया और ऊपर चढ़ ही रहा था कि माँ ने उसे रोक लिया और उसे लेकर खेतों में चली गई। माँ उसे लेकर खेत में बिछे खाट पे ले गई और उसे वहाँ बिठाकर अपनी ब्लाउज खोलने लगी।

माँ ने जैसे ही ब्लाउज के दो हुक खोले, साहूकार ने माँ को रोक लिया और माँ को अपनी बाहों में लेकर खाट पे लेट गया और माँ की चुची को ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए माँ के गले को चूमने-चाटने लगा और माँ को कहा कि अगर तुम खुद अपने कपड़े उतारोगी तो मैं क्या करूँगा? और वो फिर से माँ को चूमने लगा।

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माँ भी उसे साथ देने लगी। माँ ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगी। दोनों सेक्स के इस खेल में खो गए और एक-दूसरे को प्यार करने लगे। उस दिन माँ ने उससे दो बार चुदवाया। अब ये सिलसिला रोज का हो गया।

वो हर रोज रात को आता और माँ के साथ खेत में जाकर दो बार चोदता और चला जाता। लेकिन रोज घर देर से आने और रात घर जाकर चुपचाप सो जाने की वजह से साहूकार की बीवी को उस पर शक हो गया। एक दिन उसकी बीवी उसका पीछा करते हुए खेत तक पहुँच गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

जब वो खेत में पहुँची तो वहाँ उसने साहूकार को मेरी माँ की चुचियों से खेलते हुए देखा। वो ये सब देखकर जोर से चिल्लाने वाली थी कि मेरा बाप जो उन दोनों की रखवाली कर रहा था, साहूकार की बीवी के मुँह पर हाथ रख दिया और उसे उठाकर साहूकार के कुएँ के पास बनी झोपड़ी में ले गया और वहाँ जमीन पर ले जाकर लिटा दिया और उसकी बीवी के ऊपर लेटके उसकी चुचियाँ दबाने लगा।

साहूकार की बीवी पहले तो चुदने की कोशिश करने लगी लेकिन मेरे बाप ने कहा कि अगर तेरा पति पैसों के लिए मेरी बीवी को चोदके अपनी प्यास बुझाता है तो तू मेरे लंड से अपनी प्यास बुझाने ले। लेकिन वो नहीं मानी लेकिन मेरे बाप ने उसे कसके पकड़ा हुआ था।

मेरे बाप ने अपनी धोती खोल दी और साहूकार की बीवी का पेटीकोट और साड़ी को ऊपर खींच लिया और उसकी पैंटी सरकाकर उसकी चूत में उंगली डालने लगा। फिर मेरे बाप ने उसकी चूत पर अपना थूक लगाया और अपना लंड उसकी चूत पर रखके दबा दिया। उसकी चूत टाइट होने की वजह से थोड़ा सा ही उसकी चूत में घुस पाया।

मेरे बाप ने उसके मुँह को कसके दबा रखा था। दो-तीन और धक्के मारे और करीब आधा लंड उसकी चूत में पेल दिया। वो अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। मेरे बाप ने दो-तीन और धक्के मारे और पूरा अंदर पेल दिया। वो दर्द से अंदर ही अंदर मचल रही थी।

मेरे बाप ने उसका दर्द भाँप लिया और थोड़ी देर रुक गए और उसके पैरों को अपने पैरों में फँसाकर मुँह पे उसकी साड़ी बाँध दी और उसके दोनों हाथ पकड़के उसकी चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही जोर-जोर से चूसने लगा। थोड़ी देर के बाद वो शांत पड़ गई और मजा लेने लगी।

फिर मेरे बाप ने उसका मुँह खोल दिया और उसकी ब्लाउज खोलकर उसकी गोल-गोल गोरी-गोरी तनी हुई चुचियों को चूसने लगे। मेरे बाप ने एक हाथ से उसकी बगल से पकड़ा और उसकी चुचियों को चूसते हुए धीरे-धीरे चोदने लगे। जब उसकी चूत चुदने के लायक हो गई तब मेरे बाप ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसे जोर-जोर से चोदने लगे।

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उसकी चूत को मेरे बाप ने करीब २५ मिनट तक चोदा। तब तक वो तीन बार अपना पानी छोड़ चुकी थी। फिर मेरे बाप ने उसको पूछा, कैसा लगा मेरी जान? वैसे तेरा मर्द तो कुछ काम का है नहीं, ठीक से चोद नहीं पाता, उसे मेरी बीवी के साथ मजा करने दो और रोज दोपहर को खेत में आया करो, मैं रोज तुम्हें जन्नत की सैर कराऊंगा।

तुम्हारा पति मेरी बीवी को चोदता है और तुम मुझसे चुदवाना, हिसाब बराबर। और फिर उससे लिपट गए। वो भी मेरे बाप से लिपट गई और कहा कि तुम्हारा काफी मोटा है और आज मुझे पहली बार इतना मजा आया है, मैं कल दोपहर को जरूर आऊंगी और शाम तक तुम्हारी बाहों में जन्नत की सैर करूंगी।

फिर दोनों खड़े हो गए और मेरे बाप ने धोती पहनी और उसने अपने कपड़े ठीक किए। फिर दोनों वहाँ से नीम के पेड़ की ओर आए। वहाँ साहूकार खाट पे लेटा हुआ था और मेरी माँ उसके बगल में लेटकर उसके सीने को सहला रही थी। मेरे बाप ने उसकी बीवी को चुपचाप उसके घर भेज दिया और वहाँ साहूकार के जाने का इंतजार करने लगे।

करीब आधे घंटे बाद साहूकार वहाँ से गया। वहाँ खाट पे मेरी माँ नंगी लेटी हुई थी। मेरे बाप ने अपनी धोती खोली और जाकर मेरी माँ पे चढ़ गए और उसकी चुची चूसने लगे। अब हर रोज मेरा बाप साहूकार की बीवी को चोदने लगा। वो भी रोज दोपहर को अपने खेत में आती थी और रोज तीन से चार बार मेरे बाप से चुदवाती थी।

मेरी माँ को भी सब पता था। कभी-कभी मेरा बाप उसे मेरी माँ के साथ चोदता था। एक दिन मेरी शादी की तारीख तय करने के लिए मेरे ससुर और उनके बड़े भाई हमारे घर आए। वो रात को वहीं ठहरने वाले थे। रोज की तरह मेरा बाप खेत में गया था। मेरे ससुर और उनके भाई सो गए। रात को सारा काम निपटाकर माँ अपने कपड़े बदलने लगी। मैं सो चुकी थी।

मेरी माँ में अभी सिर्फ अपनी साड़ी ही उतारी थी कि मेरे ससुर ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया। माँ पहले तो घबरा गई पर जब ससुर की आवाज सुनी तो वो शांत पड़ गई। मेरे ससुर के दोनों हाथ मेरी माँ के पेट पे थे और माँ के हाथ उनके हाथों पर थे और वो अपने दोनों हाथों से माँ का पेट सहला रहे थे।

धीरे-धीरे मेरे ससुर ने माँ की बड़ी-बड़ी चुचियों को अपने हाथों में ले लिया और उसे मसलने लगे। माँ अब धीरे-धीरे गर्म हो रही थी। माँ अपनी आँखें बंद करके मजा ले रही थी। मेरे ससुर उस वक्त पूरे नंगे थे। उनका लंड माँ के चूतड़ों के बीच में फँसा हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो मेरी माँ के कंधे को मुँह में लेकर चूस रहे थे। उन्होंने एक-एक करके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए और माँ की चुचियों को आजाद कर दिया। उन्होंने माँ के दोनों निप्पल को दबाने लगे। दोनों चुचियों को अपने हाथों से दबाने लगे। माँ के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।

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मेरे ससुर ने अपने हाथ चुचियों पर से हटाकर नीचे की ओर बढ़ाने लगे। उन्होंने पेटीकोट के ऊपर से ही माँ की चूत मसलने लगे। माँ इतनी गर्म हो चुकी थी कि इसलिए उन्होंने ससुर के हाथ अपनी चूत पर से हटा दिए और उनसे लिपट गई।

मेरे ससुर ने माँ का ब्लाउज निकाल दिया और माँ की कमर को पकड़ लिया और माँ को कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया। माँ की दोनों तनी हुई चुचियाँ ससुर के सीने पे दब गईं। उन्होंने माँ के चूतड़ों पर अपने हाथ रखे और उनके चूतड़ों को दबाते हुए माँ की चूत पे अपना लंड दबाने लगे।

तभी उन्होंने कुछ इशारे किए, जब मैंने उस ओर देखा तो पाया कि मेरे ससुर के बड़े भाई दरवाजे के पास पूरे नंगे खड़े थे और अपना लंड हिला रहे थे। तभी मेरे ससुर ने माँ के पेटीकोट को ऊपर सरकाने लगे। उन्होंने पेटीकोट को सरकाते-सरकाते कमर तक खींच लिया। इत्तफाक से उस वक्त माँ ने नीचे कुछ नहीं पहना था।

इसलिए मेरे ससुर माँ के चूतड़ों के बीच उंगली करने लगे। तभी उनके बड़े भाई वहाँ आए और पीछे से माँ को पकड़ लिया। माँ एकदम डर गई और हड़बड़ाकर मेरे ससुर को छोड़कर दूर खड़ी हो गई। ससुर ने माँ के पास जाकर माँ को बाहों में भर लिया और माँ को चूमते हुए कहा, “क्या हुआ मेरी जान, मेरा भाई ही तो है।”

और वो फिर से माँ की चुचियाँ दबाने लगे। फिर मेरे ससुर ने मेरी माँ को पीछे से पकड़ा और माँ की चुचियों को हाथ में लेकर सहलाने लगे, फिर माँ को चूमने लगे। माँ भी फिर से मजा लेने लगी। तभी ससुर ने अपना हाथ माँ की चूत की ओर बढ़ाया और पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया।

पेटीकोट सरक के नीचे गिर गया और माँ पूरी नंगी हो गई। ससुर ने अपनी दो उंगलियाँ माँ की चूत में डाल दीं। माँ के मुँह से आह… हूँ… की आवाज निकल गई। तभी ससुर की नजर उनके भाई पर पड़ी जो लंड हिला रहा था। ससुर ने उसे कहा, “अरे आओ तुम भी मजा करो, सामने पानी से भरा कुआँ है और तुम प्यास से मरे जा रहे हो।”

ये सुनकर वो भी माँ के पास आ गए और आकर माँ की कमर पर हाथ रखा और माँ को अपनी ओर खींच लिया और माँ के होंठों पर अपने होंठ रखके माँ को चूमने लगे। माँ ने भी उनको अपनी बाहों में भर लिया। उधर पीछे से मेरे ससुर ने माँ को पकड़ लिया और उनकी चुचियों को दबाने लगे। दोनों माँ को अपने बीच दबा रहे थे। एक माँ की चूत पर अपना लंड दबा रहा था तो एक माँ के चूतड़ों के बीच।

थोड़ी देर तक ऐसे ही दोनों माँ को चूमते रहे। फिर उन्होंने माँ को ले जाकर खाट पे डाल दिया। दोनों माँ के बगल में लेट गए और माँ का हाथ पकड़कर खाट पे दबा दिया। दोनों ने माँ की एक-एक चुची अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। दोनों पिछले घंटे से माँ के बदन से खेलके गर्म हो चुके थे और चोदने को बेताब कुत्ते बन गए थे। दोनों जोर-जोर से माँ की चुचियाँ काट-काटकर चूस रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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माँ भी गर्म हो चुकी थी और अपने आप को इन कुत्तों से चुदाना चाहती थी पर दोनों ने माँ को जकड़ रखा था। माँ हिल भी नहीं पा रही थी। मेरे ससुर माँ की चुची बुरी तरह चूस रहे थे, इसलिए उनका भाई माँ की चुची से हटकर माँ की चूत पे आ गए और जोर-जोर से चूत चूसने लगे। माँ सिसकते हुए उछाल रही थी। थोड़ी देर के बाद उन्होंने अपना लंड एक ही झटके में पूरा अंदर पेल दिया। माँ इसको सहन न कर पाई और चीख पड़ी। फिर वो माँ को जोर-जोर से चोदने लगे। मेरे ससुर भी माँ की चुची छोड़ दी।

उनके भाई ने माँ का पैर अपने पैर पे खींचके खाट पे लेट गए और ससुर ने पीछे से माँ की गांड़ में अपना लंड पेल दिया। फिर दोनों ने माँ के ऊपर के हिस्से को सीधा किया और दोनों एक-एक चुची को मुँह में लेकर चूसते हुए चोदने लगे। दोनों ने माँ को जगह बदल-बदलकर पूरी रात चोदा। सुबह जब मेरा बाप खेत से आया तो उन्होंने देखा कि दोनों अभी भी माँ की गांड़ और चूत में लंड डाले हुए माँ से लिपटकर माँ के कंधे पर अपने सिर रखके सो रहे थे। माँ चुदाई की वजह से दिन भर सोती रही।

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