Teen Girl Family Chudai XXX
मैं डिम्पी हूँ और मेरी उम्र 20 साल है। मैं पिछले 5 साल से अपने चाचा-चाची के साथ रहती हूँ, तब उनकी शादी हुई ही थी। चाचा का घर एक छोटा सा घर था जिसमें एक बेडरूम और एक हॉल था, और आँगन में छोटा सा टॉयलेट था। किचन और बाथरूम अंदर ही थे। Teen Girl Family Chudai XXX
मैं हॉल में सोती थी, लेकिन गेस्ट आने पर मुझे चाचा-चाची के रूम में शिफ्ट होना पड़ता था। तो दोस्तों, अब मैं अपनी रियल लाइफ में घटी कहानी बताती हूँ। तब मैं 15.6 साल की थी और गेस्ट आने की वजह से मुझे रूम में सोना पड़ा। रात को अजीब आवाज सुनकर मेरी नींद खुल गई।
नाइट लैंप की लाइट में मैंने देखा कि चाचा चाची की नाइटी ऊपर करके उनकी चूचियों से खेल रहे थे, जबकि चाची “आआ… ओओ… सी…सी…” की आवाज कर रही थीं और साथ में चाचा की लुंगी में हाथ डाले हुए थीं। वो बार-बार ये भी कह रही थीं, “धीरे करो, डिम्पी जाग जाएगी।”
जबकि मैं तो पहले ही जाग चुकी थी और चुपचाप उनको देख रही थी। बाद में चाचा उनकी टाँगों की तरफ चले गए और उनकी चूत पर अपना मुँह रगड़ने लगे। इस पर चाची ने “आह… उफ्फ… ओओ…” करना शुरू कर दिया और चाचा का लंड उनकी लुंगी से बाहर निकालकर सहलाने लगीं और उसे मुँह में लेकर चाटने लगीं।
मुझे ये देखकर हैरानी भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था। थोड़ी देर बाद चाचा उनकी टाँगों में बैठ गए और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगे। अब तो चाची और ज्यादा जोर से चिल्लाने लगीं, “ओ माँ… मैं मर जाऊँगी… प्लीज मुझे जल्दी चोदो… आउफ्फ… आग लगी हुई है… प्लीज जल्दी अपने लंड से इसे बुझाओ।”
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चाचा का लंड पूरी तरह खड़ा था और मैं ये सोच रही थी कि अब क्या होगा, क्योंकि चोदने का मुझे तब तक नहीं पता था। फिर चाचा ने अपना लंड उनकी चूत पर रखकर धक्का मारा और आधा लंड उनकी चूत में घुसा दिया। इस पर मेरी चाची चिल्लाईं, “ओ माँ… धीरे मारो… क्या आज फाड़ ही डालोगे बहनचोद… कल नहीं चोदना क्या?”
चाचा ने फिर एक और धक्का मारा और सारा लंड उनकी चूत में घुसा दिया। जबकि चाची चिल्लाईं, “माँ… मार गई… इसने मेरी चूत का कबाड़ा कर दिया।” चाचा का लंड अब मुझे नहीं दिख रहा था और मैं हैरान थी कि इतना बड़ा चाची की चूत में कैसे गया, क्योंकि उनकी चूत को मैं अपनी जैसी ही टाइट समझ रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर चाचा ने चाची के निप्पल्स चूसने लगे और धक्के मारने लगे। चाची भी अब बोल रही थीं, “आआ… मेरे राजा… आआ… और अंदर तक… आह्ह… मुझे चोद-चोदकर मेरा जूस निकालो… आआ… उफ्फ… और तेज धक्के मारो।” उधर चाचा ने भी स्पीड बढ़ा दी थी और फच-फच, सट-सट की आवाज शुरू हो चुकी थी।
साथ में वो कह रहे थे, “साली ऐसे ही चिल्लाती है… आज मैं सचमुच तुम्हारी फाड़ दूँगा।” और उन्होंने स्पीड और तेज कर दी। अब तो चाची ने भी अपनी गांड उछाल-उछालकर अपनी चूत का भोसड़ा बनवा रही थी। सच में मेरी चूत में भी चिंटियाँ रेंग रही थीं, पर मैं चुपचाप पड़े देखती रही।
करीब 15 मिनट के बाद चाचा ने अपना लंड निकालकर उनकी चूचियों पर रख दिया और हाथ से मुठ मारने लगे। तभी उनके लंड से सफेद गाढ़ा जूस निकलने लगा। मैं समझी उन्होंने सु-सु कर दिया, पर चाची उसे अपने हाथों से अपनी दोनों चूचियों पर मसल रही थीं और अपने लिप्स पर भी मसल रही थीं।
इसके बाद वो एक-दूसरे से चिपटकर सो गए। उसके बाद तो मैं 3-4 बार उन्हें चोदते देख चुकी थी। एक दिन चाची बाथरूम में स्लिप हो गईं और उन्हें कई जगह चोट लगी। उस दिन संडे था और मैं और चाचा दोनों घर पर थे। हमने उन्हें पेनकिलर पिल्स दीं और वो सो गईं।
कोई 2 घंटे के बाद वो उठीं और उठकर बैठने लगीं, पर उन्हें दर्द हुआ। तब उन्होंने मुझे मालिश करने को कहा। मैंने ऑयल गर्म करके उनके पास आ गई। वो सिर्फ गाउन में थीं, जबकि मैंने शर्ट और स्कर्ट पहन रखी थी। धीरे-धीरे मैंने उनकी टाँगों पर मालिश करने लगी, पर शायद उन्हें मजा नहीं आया।
वो बोलीं, “जा अपने चाचा को बुलाकर ला, वो करेंगे और तू बैठकर सीखना।”
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मैंने चाचा को हॉल से बुला लाई। वो लुंगी पहने पेपर पढ़ रहे थे। चाचा ने उनका गाउन थोड़ा ऊपर किया और मालिश करने लगे। मैं भी वहीं बैठ गई और सीखने लगी। चाचा उनके घुटनों तक मालिश कर रहे थे तो चाची ने कहा, “थोड़ा और ऊपर तक करो।” और अपना गाउन थाइज तक कर लिया।
अब चाचा उनके थाइज तक मालिश करने लगे तो उन्होंने गाउन और ऊपर कर लिया। अब उनकी झांटें साफ दिख रही थीं क्योंकि वो घर में पैंटी नहीं पहनती थीं और चाचा की उंगलियाँ उनकी झांटों को बार-बार टच कर रही थीं। वो “सी…सी…” करने लगीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने सोचा शायद दर्द के कारण कर रही हैं। तभी मैंने देखा उन्होंने अपना एक हाथ चाचा की लुंगी में घुसा दिया और कुछ सहलाने लगीं। इस पर चाचा ने मालिश उनके और ऊपर तक शुरू कर दी और बकायदा एक हाथ उनकी चूत पर ही रहने दिया और वहाँ की जोर-जोर से मालिश करने लगे।
चाची ने सिसकाते हुए कहा, “सारे बदन में मालिश करो।”
इस पर मैंने और चाचा ने उनका गाउन निकाल दिया। अब वो बिल्कुल नंगी थीं और चाचा ने उनके बूब्स पर भी मालिश शुरू कर दी, पर एक हाथ उन्होंने चूत और गांड पर ही रखा। अब वो अपनी उंगली से चूत और गांड दोनों को मसल रहे थे और एक हाथ से उनके निप्पल्स।
चाची कह रही थीं, “आह्ह… ओओ… गॉड… आह्ह… अब कुछ आराम आ रहा है।” तभी मैंने देखा कि चाचा की लुंगी हट गई थी और चाची उनके लंड को हाथ में लेकर जोर-जोर से सहला और मसल रही थीं। चाचा ने भी अपनी उंगली ऑयल में डुबोकर उनकी चूत में डाल दी।
कभी वो चूत में डालते, कभी गांड में। ये देखकर मेरी चूत गीली हो चुकी थी, पर मैं हिली नहीं। शायद वो भी मुझे भूल चुके थे और चाचा अपनी उंगलियों और अंगूठे से उनकी चूत और गांड चोद रहे थे। चाची भी उनके लंड को तेजी से हिला रही थीं और “आआ… आआ… ऊफ्फ…” कर रही थीं।
मैंने देखा चाची की चूत से पानी निकलकर उनकी झांटों और गांड को भिगो रहा था। कोई 10 मिनट बाद अचानक चाचा उठे और अपना लंड उनकी चूचियों पर रगड़ने लगे और फिर अपना जूस “सीसीसी…” करते निकाल दिया। उधर चाची भी अपना जूस फेंक चुकी थीं।
तो दोस्तों, उस खतरनाक मालिश के बाद चाचा घर से बाहर चले गए। तब चाची ने मुझसे कहा, “डिम्पी, मुझे सहारा दो ताकि मैं पेशाब करने जा सकूँ।” मैंने पहले उन्हें गाउन पहनाया और फिर सहारा देकर उन्हें टॉयलेट तक ले गई। लेकिन वहाँ पहुँचते ही चाची ने कहा, “तू यहीं खड़ी रह।”
फिर उन्होंने गाउन ऊपर उठाया, मुझे पकड़ा दिया और खड़े-खड़े अपनी चूत की फाँकें खोलकर मूतने लगीं। मैं पहली बार किसी औरत को खड़े होकर पेशाब करते देख रही थी। मैंने झुककर देखा- उनकी मूत की धार सीधे कमोड पर पड़ रही थी और चर्र्र्र… चेर्र्र्र्र… की एक मदहोश आवाज़ आ रही थी।
मैंने चाची से पूछा, “आप तो खड़े होकर कैसे करती हैं?”
चाची ने हँसते हुए कहा, “चल, तुझे सिखा दूँ।”
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फिर उन्होंने मेरी स्कर्ट के अंदर से पैंटी निकालने को कहा। मैंने निकालकर खड़ी हो गई। मेरी गीली चूत देखकर चाची बोलीं, “क्या बात है! मेरी मालिश इतनी पसंद आई कि तेरी चूत का तो पानी निकल गया।” ये सुनकर मुझे बहुत शर्म आई, पर उनके मुँह से “चूत” सुनकर मेरी चूत गुनगुना उठी।
फिर चाची ने मेरी चूत के होंठों को अपने दोनों हाथों से अलग किया और बोलीं, “अब मूत कर।” पहले तो मैं शरमाई, पर फिर अचानक मूतने लगी क्योंकि मुझे मूत आ ही रही थी। इस तरह मैंने पहली बार खड़े होकर पेशाब किया। मेरे पेशाब की कुछ बूँदें उनके हाथ पर भी गिर गईं।
मैंने “सॉरी” कहा तो वो बोलीं, “अरे, इसमें सॉरी की क्या बात है? धीरे-धीरे तू एक्सपर्ट हो जाएगी।” फिर हम किचन में आकर लंच बनाने लगे। काफी देर बाद चाचा वापस आए, पर वो गुमसुम थे। शायद इसलिए कि उन्होंने मेरे सामने चाची को मालिश करते हुए अपनी उँगलियों से चोद डाला था और अपनी मुठ भी मरवाई थी।
उनके सामने जाने में मुझे भी शर्म आ रही थी, पर जाना तो पड़ता ही था। रात तक चाचा चुपचाप रहे। तब चाची ने उनसे पूछा, “क्या हुआ?” पर वो कुछ नहीं बोले। इसके बाद चाची ने व्हिस्की की बोतल उनके सामने रख दी और पग बनाकर उन्हें दिया। मैं जानती थी चाचा कभी-कभी पी लेते हैं।
पर उस दिन चाचा ने काफी पी ली और अब वो खुलकर बोल रहे थे। उन्होंने चाची को भी 2 पग पिला दिए। अब वो दोनों एक-दूसरे को छेड़ने भी लगे। फिर चाचा ने कहा, “तुमने अपनी मालिश तो करवा ली, अब मेरी भी करो। मैं भी थक गया हूँ।”
चाची बोलीं, “ठीक है, मैं अभी कर देती हूँ। तुम अपने कपड़े निकालकर बैठो, मैं ऑयल लेकर आती हूँ।” और मुझसे बोलीं, “तू भी सीख लेना, शादी के बाद काम आएगा।” मेरी खुद की इच्छा भी उन्हें देखने की थी, सो मैं वहीं बैठ गई। चाची ऑयल लेकर आईं। तब तक चाचा ने अपने कपड़े निकाल दिए थे। अब वो सिर्फ अंडरवियर (कच्छे) में थे। चाची ने उनकी मालिश शुरू कर दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
थोड़ा ऑयल उनके गाउन पर लगा तो उन्होंने कहा, “ऑयल के दाग नहीं जाएँगे,” और गाउन निकाल दिया। अब वो पूरी नंगी होकर मालिश करने लगीं। पहले उन्होंने चाचा की टाँगों की मालिश की, फिर कमर और छाती की, फिर धीरे-धीरे उनके हिप्स की। मैंने देखा चाचा का लंड कच्छे में तंबू की तरह तन चुका था। एक हाथ से वो चाची की चूत और गांड को सहला रहे थे। फिर चाची ने मालिश बंद कर दी।
चाचा बोले, “क्या हुआ? पूरी मालिश करो।”
चाची बोलीं, “जितने तुमने कपड़े उतार रखे हैं, उतनी तो मैंने कर दी। अब अगर और करवानी है तो नंगे हो जाओ।”
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चाचा एक तो दारू के नशे में थे, दूसरे गर्म हो चुके थे। सो उन्होंने तुरंत अपना कच्छा निकाल दिया और नंगे हो गए। चाची उनके खड़े लंड को देखकर बोलीं, “क्या बात है! लंड महाराज तो लगता है मेरी चूत में घुसने को बेताब है।”
चाचा बोले, “पहले मालिश करो, फिर मैं तेरी चूत का भूरता भी बना दूँगा।”
मैं ये चुदाई-पिटी और चूत-लंड की बात सुनकर गुनगुना गई।
चाची मुझसे बोलीं, “डिम्पी, तुम भी देखो लंड की मालिश कैसे की जाती है। शादी के बाद तुम्हें भी अपने पति के लंड की मालिश करनी होगी।”
ये सुनकर मैं और शरमा गई, पर निगाहें चाचा के लंड पर ही रहीं। बल्कि मैं थोड़ा और नजदीक आ गई। फिर चाची ने ऑयल उनके लंड पर लगाया और दोनों हाथों से चाचा के लंड को ऊपर से नीचे मालिश करने लगीं। जब चाची का हाथ लंड के सुपारे से नीचे आता, तो उसकी खाल भी नीचे आ जाती और चाचा का सुपारा बिल्कुल चिकना और टमाटर की तरह लाल दिखाई देता।
उधर चाचा ने भी अपनी दो उँगलियाँ चाची की चूत में घुसा दी थीं और अंदर-बाहर कर रहे थे। दूसरा हाथ मेरी जाँघों को छू रहा था, क्योंकि मैं उनके काफी करीब बैठी थी। चाचा बीच-बीच में उँगली जोर से कर देते, तो चाची के मुँह से “आह्ह्ह्ह… क्या कर रहे हो” की आवाज़ निकल जाती।
करीब 5 मिनट बाद चाची बोलीं, “बस यार, और करूँ?”
चाचा बोले, “पूरी करो।”
ये सुनकर चाची उनके लंड के ऊपर आ गईं, अपने हाथ से उनका लंड पकड़ा, अपनी चूत पर रखा और बैठ गईं। बैठते ही उनके मुँह से निकला- “आआआ रे राम… मर गईं ले बहन के लौड़े… आज पूरी मालिश के मजे ले।” उधर चाचा का दूसरा हाथ पता नहीं जानकर या अनजाने में मेरी स्कर्ट के अंदर से मेरी चूत को छूने लगा। शायद नशे में होने के कारण वो ऐसा कर रहे थे।
फिर चाची बार-बार लंड पर उठती-बैठती रहीं। साथ में गंदी-गंदी गालियाँ भी निकालने लगीं- “बहन के लंड ले… झेल मेरी चूत को… आज तू क्या, मैं तेरे लंड का भूरता बना दूँगी।” उधर चाचा एक हाथ से उनकी आम जैसी चुचियों को मसलने लगे और दूसरा हाथ मेरी पैंटी में डाल दिया।
मैं तो बुरी तरह घबरा गई, पर अच्छा भी लग रहा था। अब वो अपनी उँगली से मेरे छोटे-छोटे चूत के बालों को छेड़ रहे थे और साथ में मेरी क्लिट (चूत का छोटा लंड) को भी मसल रहे थे। मेरी चूत से लिसलिसा पानी आने लगा था। जबकि चाची उनके लंड पर लगातार उठक-बैठक कर रही थीं।
अब चाचा भी पूरे जोश में आ गए और अपनी गांड उठा-उठाकर नीचे से धक्के मारने लगे। हर धक्के पर चाची के मुँह से “सीई… उफ्फ… ओ जान… और जोर से… आह्ह्ह्ह… और जोर से चोदो” की आवाज़ निकलने लगी। चाचा की उँगली मेरी चूत को बुरी तरह मसल रही थी और मुझे लग रहा था कि मैं आज मर जाऊँगी।
मुझे लगा वहीं मेरा पेशाब निकल जाएगा। मेरा बदन पूरी तरह अकड़ गया और अचानक मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। चाची का भी बुरा हाल था। उनकी चूत में जो 3 इंच मोटा लंड फँसा हुआ था, वो बार-बार चिल्ला रही थीं- “आआआ रजा… जोर से… जोर से चोदो… मैं झड़ने वाली हूँ।” और लगभग 2 मिनट के बाद चाचा से चिपक गईं। शायद उनकी चूत ने भी पानी फेंक दिया था।
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पर चाचा का लंड अभी भी टाइट था। वो चाची के ऊपर आ गए और मुझसे बोले, “तू चाची की चुचियाँ मसल, मैं इसे जन्नत की सैर कराता हूँ।” और चूत पर लंड रखकर कस-कसकर धक्के मारने लगे। क्योंकि चाची की चूत पानी निकल चुकी थी, तो अब जब भी लंड अंदर जाता, तो फुच-फुच की आवाज़ हो रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं चाची की चुचियाँ दबाने लगी। चाची ने भी अपना हाथ मेरी चूत पर ले जाकर खींचकर मेरी पैंटी निकाल दी और स्कर्ट ऊपर करके उँगली डालने लगीं। क्योंकि मैं भी कभी-कभी उँगली से चूत का पानी निकाल लेती थी, सो मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। चाचा लगातार धक्के मारते हुए मेरी चूत भी देखे जा रहे थे।
मैं तो मुश्किल से 5 मिनट में फिर झड़ गई और चाची की चुची पर लेट गई और उन्हें चूसने लगी। इसके दो मिनट बाद चाचा ने चाची की चूत जमकर मारी और बाद में अपना लंड चाची की चूत से निकालकर चाची की चुचियों के पास आ गए और मुठ मारकर लंड से वीर्य की पिचकारी मारने लगे- जो मेरे मुँह और बालों पर भी गिरी, और चाची की चुचियों और मुँह पर भी।
फिर उस रात चाची बोलीं, “तुम अब हमारे पास ही सो जाया करो।” वो दोनों नंगे थे, जबकि मैं स्कर्ट और शर्ट पहने थी। फिर हम सबने खाना खाया और सोने लगे। मैं उनके बेड पर ही थी, जबकि चाची बीच में थीं। दिन में दो बार चुदाई और शराब के नशे के कारण वो जल्दी ही सो गए। सोने से पहले चाचा ने लुंगी और चाची ने गाउन पहन लिया। मैं भी दिन भर की बातें सोचती न जाने कब सो गई।
सुबह कोई 5 बजे मेरी नींद खुली, क्योंकि चाचा और चाची जाग गए थे और बातें कर रहे थे। चाचा शायद चाची को फिर चोदना चाहते थे, क्योंकि वो चाची से लिपटे हुए थे और चाची उनसे कह रही थीं, “अभी सोने दो।” पर चाचा नहीं माने। उन्होंने चाची का गाउन ऊपर खींच दिया और चूत को सहलाने लगे। मैं नाइट लैंप की रोशनी में सब देख रही थी और अब ज्यादा शरमा भी नहीं रही थी।
चाचा ने चाची के होंठों पर जोरदार किस किया। वो उनके होंठ अपने होंठों में लेकर चूसने लगे और चूत को हाथ से सहला रहे थे। फिर उन्होंने चाची का गाउन निकाल दिया और चुचियों को मसलने लगे। चाची भी कुछ गर्म हो गई थीं। सो उन्होंने चाचा की लुंगी खोल दी और लंड को सहलाने लगीं। मैं अब उठकर बैठ गई थी और देख रही थी।
तो चाची ने कहा, “डिम्पी, तुम अच्छी तरह से चुदाई देख लो। शादी के बाद इससे पति तुम्हारे काबू में रहेगा।”
मैंने कहा, “क्या मैं लाइट ऑन कर दूँ?”
वो बोलीं, “ठीक है।”
मैंने लाइट ऑन कर दी।
तो चाचा बोले, “तुम भी नंगी हो जाओ और नजदीक आकर देखो।”
मैंने अपनी स्कर्ट और शर्ट निकाल दी और उनके पास आ गई। अब चाचा ने अपना लंड चाची की चूत पर रख दिया और उसे चूसने लगे। जबकि चाची ने मेरा हाथ पकड़कर चाचा के लंड पर रख दिया और बोलीं, “इसे सहलाओ।” चाचा का लंड बहुत गर्म था, पर मुझे पकड़ने में मज़ा आया।
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मैं उसे सहलाने लगी। उधर चाची मेरी छोटी-छोटी चुचियों से खेलने लगीं। वो कभी उन्हें दबा देतीं, कभी मुँह में लेकर चूसने लगतीं। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। जबकि चाचा लगातार जीभ से चाची की चूत चोदे जा रहे थे। चाची बहुत गर्म हो चुकी थीं। वो बार-बार “आआ… उउ… ओओ… मेरे राजा… आआ… चोदो… चोदो… मुझे… आआआ… बस ऐसे ही चोदते रहो” कह रही थीं।
तभी चाची ने जबरदस्ती मेरा सिर पकड़कर मेरा मुँह चाचा के लंड पर रख दिया। मेरे होंठ चाचा के लंड को टच करने लगे। तो चाचा अपना लंड मेरे होंठों पर रगड़ने लगे। लंड से बहुत प्यारी स्मेल आ रही थी और जी चाह रहा था कि मैं उसे चूसूँ।
तभी चाची इस तरह हो गईं कि उनका मुँह मेरी चूत पर आ गया और मेरा मुँह तो चाचा के लंड पर ही था। इस तरह चाचा चाची की चूत चूस रहे थे और चाची ने मेरी चूत को चूसना शुरू कर दिया। चाचा का लंड मेरे मुँह पर ठोकर मार रहा था।
चाची बोलीं, “डिम्पी, तुम चाचा का लंड मुँह में ले लो।”
मैं भी यही चाहती थी। सो मैंने तुरंत लंड को मुँह में ले लिया। उधर चाची मेरी चूत में जीभ डालने लगीं। मैं भी बहुत गर्म हो गई और “आआ… उफ्फ… चाची… आआ… चाटो ना…” बोलने लगी। जबकि चाचा मेरे मुँह को ही चूत मानकर धक्का मारने लगे।
मैं भी लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रही थी। उधर चाची मेरी चूत के क्लिट को चूसती और जीभ से चूत चोद रही थीं। सचमुच मैं जन्नत में थी और चूत से पानी गिरा रही थी। मैं चाची को बोल रही थी- “आआ… चाची… आआ… तुम्हारी जीभ से मेरी चूत चोदो… आआ… जीभ नहीं बल्कि ये लंड… हाई… आआ।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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चाचा भी जबरदस्त धक्के लगा रहे थे मेरे मुँह में। मैं भी अब चाची की जीभ पर चूत से धक्के मारने लगी थी। उधर चाची लगातार चूसते हुए गालियाँ भी निकाल रही थीं- “बहनचोद रंडी… मैं अपनी जीभ से ही तुम्हारी चूत की सील तोड़ दूँगी… तेरी चूत का मैं भोसड़ा बना दूँगी।”
मैं सिर्फ “उम्म्म… आआ” कर रही थी। करीब 10 मिनट बाद मुझे लगा मेरी चूत से कुछ निकलने वाला है। तो मैं चाची से बोली- “आआ… चाची… आआ… मेरी चूत से कुछ निकलने को है।” तो चाची और जोर-जोर से चोदने लगीं। उधर चाचा ने भी अपने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। “आउउउच्ह्ह… आआ… मेरा मूत… चाची के मुँह में ही निकल गया।”
उधर चाचा का लंड भी फूल रहा था। अचानक लंड से वीर्य की धार मेरे मुँह में गिरी। मैं लंड को मुँह से निकालना चाहती थी, पर चाचा ने जबरदस्ती निकालने नहीं दिया और सारा माल मेरे मुँह में ही डाल दिया। बड़ा कैसला स्वाद था उसका, गाढ़ा और चिकना भी। मुझे जबरदस्ती पीना पड़ा।
उधर चाची की गांड भी चाचा के मुँह पर जोर-जोर से चल रही थी और वो बोल रही थीं- “ले भतीजी के लंड… मेरी चूत का मूत पी… साले पी… मदरचोद।” और चूत का सारा रस चाचा के मुँह पर डाल दिया, जिसको चाचा चप-चप करके पी गए।
इस तरह चाचा ने चाची की चूत का रस पिया, चाची ने मेरी चूत का और मैंने चाचा के लंड का। फिर चाची चाचा का लंड चूसने लगीं और मुझसे अपनी चूत चाटने को कहा। चाचा मेरी चूत चाटने लगे। बल्कि वो चूत और गांड दोनों चाट रहे थे। मुझे भी चाची की चूत चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर में चाचा का लंड बिल्कुल तनकर तैयार हो गया। तो उन्होंने चाची की टाँगें अपने कंधे पर रखीं और मुझसे चाची के मुँह पर बैठने को कहा। मैं चाची के मुँह पर बैठ गई। उधर चाचा चाची की चूत पर लंड मसलने लगे। साथ में एक हाथ से मेरी चुचियाँ मसलने लगे।
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फिर उन्होंने एक जोरदार शॉट लगाकर चाची की चूत में लंड पेल दिया। तो चाची के मुँह से “आआआ” निकला और उनकी जीभ मेरी गांड में घुस गई। उधर चाचा चाची की चूत में धक्का लगाते, तो चाची की जीभ मेरी चूत में घुस जाती। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं भी अपनी गांड चाची की जीभ पर रगड़े जा रही थी और चाचा तूफानी रफ्तार से चाची को चोद रहे थे। सका-पक… सका-पक… फुच-फच… फुच-फच… की मज़ेदार आवाज़ आ रही थी और चाची की जीभ मेरी गांड को चोद रही थी। इस तरह चाचा ने 15 मिनट तक चाची को चोदा।
चाची की जीभ ने मेरी गांड को इस बीच 2 बार मेरी चूत से पानी निकालकर चाची के मुँह पर गिर चुका था। और चाची की चूत से भी पानी लगातार बह रहा था। फिर हम सब उठे और टॉयलेट गए। मैंने क्योंकि पहली बार गांड मरवाई थी (चाहे जीभ से ही), इसलिए मुझे लग रहा था कि मेरी गांड से टट्टी निकल जाएगी। सो मैं तुरंत कमोड पर बैठ गई और सच में टट्टी निकल गई, उन दोनों के सामने। उधर चाची मेरे सामने ही खड़ी-खड़ी मूतने लगीं और चाचा भी मूतने लगे। इसके बाद वो दोनों भी फ्रेश हुए और फिर हम इकट्ठे नहाए।
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