Teen Girl Doggy Sex Story
मेरा नाम सोनम है और मेरी उम्र अभी 21 साल है। मैं आज आप सब से अपनी रियल लाइफ की कहानी जो कि मैंने एक ब्लू फिल्म देखने के बाद की इच्छा थी और जो पूरी करने में मैंने अपने एक दोस्त की मदद ली थी, उसके बारे में बता रही हूँ। ये बात आज से 2 साल पहले की है। Teen Girl Doggy Sex Story
मैं और मेरी सहेलियाँ एक सहेली के यहाँ ब्लू फिल्म देखने के लिए इकट्ठा हुई थीं, जो वो अपने बॉयफ्रेंड के पास से लाई थी। वैसे तो हमने 2-3 बार ब्लू फिल्म देखी थी, पर आज उसने हमसे कहा कि ये वाली उन सबसे अलग है। और यकीन मानो, उस दिन से मेरा सेक्स का नजरिया ही बदल गया।
जैसे ही उसने फिल्म स्टार्ट की, हम सब सहेलियाँ देख के दंग रह गईं कि कैसे फिल्म की हीरोइन अपनी चूत में एक घोड़े का मोटा तगड़ा लंड डलवा कर चुदवा रही है और उसके लंड को बड़े ही प्यार से मुँह में लेकर चूस रही है। और अंत में घोड़ा अपने लंड का सारा पानी लड़की के मुँह में छोड़ देता है और लड़की वो सारा पानी पी जाती है।
फिर इस तरह कुत्ते, सूअर, गधे, बकरे और एक साँड़ के साथ इसी तरह सेक्स के मजे ले रही थी। और उस दिन मेरे मन में ये ख्याल आया कि इन सब के लंड का स्वाद कैसा होगा। मैं अपने एक बॉयफ्रेंड (आशीष) का लंड तो एक बार चूसी थी और बहुत मजा भी आया था, मगर उसका लंड इतना बड़ा नहीं था।
और उस दिन से मैं जब भी किसी जानवर को देखती तो सबसे पहले मेरा ध्यान उसके लंड पर जाता था। एक बार मैं अकेली एक बगीचे में बैठी थी और आशीष का इंतजार कर रही थी। मेरे पास एक बिस्किट का पैकेट था। तभी वहाँ एक हट्टा-कट्टा कुत्ता घूमता हुआ पहुँच गया और मेरे पीछे खड़ा रह गया।
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मेरा ध्यान एकाएक गया तो मैं डर गई, मगर जब मैं संभली तो मैंने देखा कि वो बिस्किट के पैकेट को घूर रहा है। फिर मैंने जब उसके शरीर को देखा तो मुझे एक आइडिया सूझा। मैंने आसपास देखा कि कोई है या नहीं। उस वक्त दोपहर का समय था और मैं बगीचे में झाड़ियों के बीच बैठी थी, इस वजह से किसी का भी ध्यान मुझ पर नहीं जा सकता था।
तब मैंने अपना काम शुरू करने का फैसला किया। मैंने बिस्किट का पैकेट खोल कर एक बिस्किट कुत्ते को दिखाया और पुकारने लगी, पर कुत्ता मेरे पास नहीं आया। तो मैंने उसके और वो बिस्किट फेंक दिया और वो फटाफट खा गया। फिर मैंने दूसरा बिस्किट दिखाया और पुकारा। इस बार वो मेरे नजदीक आया।
मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू किया और उसे धीरे-धीरे बिस्किट खिलाती रही। और जब मुझे ये यकीन हो गया कि अब ये कुत्ता मुझे कुछ नहीं करेगा, तब मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके लंड पर रख दिया। तो वो पीछे हट गया। तो मैंने उसे बिस्किट दिखाते हुए फिर से पास बुलाया और वापस उसका लंड पकड़ कर आगे-पीछे करने लगी। और इस बार वो शांति से खड़ा रहा।
मैं एक हाथ से उसे बिस्किट खिलाती और दूसरे हाथ से उसके लंड को सहला रही थी। कुछ ही मिनटों में वो मस्त हो गया और अब तक तो मैंने अपनी स्पीड भी बढ़ा ली थी। मैंने देखा कि उसका लंड पीछे से फूल गया था और वो मुझसे बार-बार चिपकने की कोशिश कर रहा था। और आखिरकार उसके लंड ने ढेर सारा पानी छोड़ा जो मैंने जमीन पर गिरा दिया।
इसके बाद उसका लंड फिर से नॉर्मल हो गया, पर अब वो मुझसे दूर नहीं गया। मैं समझ गई कि इसे भी मजा आया था। मैंने फिर से उसके लंड को पकड़ के हिलाना शुरू किया और इस बार मैंने अपना मन उसका पानी पीने का भी बना लिया था। पर उसका लंड हिला रही थी तभी आशीष का फोन आया और उसने मुझे डायरेक्ट सिनेमा हॉल बुलाया।
तो मैं जल्दी उठी और आजू-बाजू देख कर वहाँ से निकल गई। और मैंने पाया कि वो कुत्ता भी मेरे पीछे-पीछे आ रहा था। मैं बगीचे से बाहर निकल कर एक ऑटो लिया और सीधा सिनेमा हॉल पहुँच गई। और वहाँ मैंने आशीष के साथ फिल्म के साथ-साथ हाथ सेक्स का मजा भी लिया।
मगर आज के इंसिडेंट के बाद मेरी छुपी हुई ख्वाहिश जो कि उस ब्लू फिल्म से शुरू हुई थी, उसने अब मेरे मन पर कब्जा कर लिया था। और अब मैं भी उस फिल्म की हीरोइन की तरह किसी जानवर का मोटा तगड़ा लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी।
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जब फिल्म पूरी हुई तो मैंने आशीष से प्रॉमिस लिया कि जो मैं कहूँगी वो उसमें मेरी मदद करेगा। और मैंने बगीचे वाली सारी बात उसे की और उसके सामने अपनी इच्छा व्यक्त की। इस पर वो मेरे सामने एक टुक देखने लगा और उसने कहा तुम मजाक कर रही हो।
तब मैंने उससे कहा कि मैं सीरियस हूँ और मैं मजाक नहीं कर रही और मैं किसी भी जानवर से सेक्स करना चाहती हूँ। और मैंने उसे अपना प्रॉमिस भी याद दिलाया और कहा कि तुम्हें मेरी मदद करनी ही होगी। इस पर उसने मेरी मदद करने की तैयारी दिखाई और कहा कि मैंने कभी किसी लड़की को किसी जानवर से असल में चुदते हुए नहीं देखा और मैं उसका क्या परिणाम आता है वो भी नहीं जानता.
पर मैंने तुमसे प्रॉमिस किया है सिर्फ और सिर्फ इसलिए तुम्हारी हेल्प करूँगा। मगर अगर कोई भी तरह का लफड़ा हुआ तो उसमें मेरा नाम नहीं आना चाहिए और सिर्फ तुम ही उसके लिए जिम्मेदार होगी। मैंने उसकी शर्त कबूल कर ली। इस पर उसने मुझसे पूछा कि मैं तुम्हारी हेल्प कैसे करूँगा, मेरे पास तो कोई पेट भी नहीं है और अगर होता तो भी तुम उसके साथ सेक्स करती कहाँ।
तब मैंने कहा कि मेरी सहेली के मम्मी-पापा आउट ऑफ टाउन गए हैं और 3-4 दिन बाद आएंगे। तुम सिर्फ इतना करना कि उसे अपने दोस्त के साथ कहीं दूर एंजॉय करने के लिए भेज देना और अपने दोस्त को कहना कि जब तक तुम उसे फोन न करो तब तक उसे बाहर ही रखे। और मैं उसके पास से उसके घर की चाबी ले लूँगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इस पर उसने कहा कि आइडिया तो ठीक है पर पेट कहाँ से लाएँगे। इस पर मुझे वो बगीचे वाला कुत्ता याद आया और मैंने आशीष से कहा एक काम करते हैं, तुम अपनी कार लेकर मेरे साथ चलो, हम बगीचे से उस कुत्ते को उठा लेते हैं और जो प्रोग्राम हम कल करने वाले थे वो आज ही कर लेते हैं। इस पर वो राजी हो गया।
और उसने अपने फ्रेंड को फोन किया और उसे मेरी फ्रेंड को पिक करके कहीं घूमने जाने को कहा। उसके बाद मैं और आशीष उस गार्डन में गए और थोड़ी ही देर में उस कुत्ते को ढूँढ लिया। कुत्ता मुझे देख कर सीधा ही मेरे पास आ गया। जैसे ही वो कुत्ता मेरे पास आया, मेरी चूत की आग और भी तेज हो गई, जैसे कोई लोहा पिघलने की भट्टी हो।
और हम दोनों मेरी फ्रेंड के घर पहुँचे और तभी आशीष का फ्रेंड भी पहुँच गया। फिर मैंने अपनी फ्रेंड से उसके घर की चाबी ले ली और वो दोनों बाहर चले गए। उनके जाने के 5 मिनट बाद आशीष ने कार में से उस कुत्ते को बाहर निकाला और किसी को पता न चले इस तरह घर में दाखिल हो गया।
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फिर शुरू हुई मेरी चूत की अधूरी तमन्ना पूरी करने का सिलसिला। आशीष ने अपनी पैंट की बेल्ट निकाल कर उस कुत्ते के गले में डाल दी जिससे कि वो उस पर काबू कर सके। उसके बाद हम उस कुत्ते को बाथरूम में ले गए और उसे संसिल्क शैंपू से अच्छी तरह से नहलाया। मगर वो शोर मचाने लगा।
इस पर आशीष ने वहाँ मेरी सहेली के ड्रॉअर से सेलोटेप निकाला और कुत्ते के मुँह पर लपेट ली ताकि वो ज्यादा शोर न मचाए। बाद में जब कुत्ते को नहला कर हम बाथरूम के बाहर आए तो आशीष ने कुत्ते को बाँध दिया और खुद अपने कपड़े निकालने लगा। मेरे पूछने पर उसने कहा कि कुत्ते से पहले वो मुझे चोदना चाहता है।
और आके मेरे कपड़े भी निकाल दिए और मुझे किस करने लगा। आज जितनी एनर्जी इससे पहले कभी आशीष ने नहीं दिखाई थी, शायद इस ख्याल से कि आज उसकी गर्लफ्रेंड को वो एक नए अंदाज में देखने वाला है, वो ज्यादा उत्तेजित था। आशीष ने पहले मुझे किस की, बाद में मेरे दोनों बूब्स को जोर-जोर से मसलने लगा।
करीब 20 मिनट मेरे बूब्स मसलने के बाद उसने मुझे नीचे बैठाया और मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया और मैं उसका लंड चूसने लगी। करीब 9-10 मिनट में वो झड़ गया और मैंने उसका सारा पानी पी लिया। फिर उसने मुझे लिटा दिया और हम 69 पोजीशन में आ गए।
उसका लंड जो कि अभी नॉर्मल हो गया था, मैंने अपने मुँह में लेकर फिर खड़ा करने लगी। इस बीच वो मेरी चूत को एक भूखे शेर की तरह अपनी जीभ से चोद रहा था। एक तो आज मेरी तमन्ना पूरी होने की खुशी में मेरी चूत पहले से ही इतनी गरम थी, इस पर आशीष ने उसे और भड़का दिया।
मैं और कंट्रोल न कर सकी और मैंने भी अपना पानी छोड़ दिया। आशीष ने मेरा सारा पानी पी लिया। तब तक उसका लंड भी खड़ा हो चुका था। अब उसने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरे पैर चढ़ गया और मेरे तैयार होने की राह देखे बिना एक ही झटके में अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया।
मेरे मुँह से जोर की चीख निकल पड़ी, पर इसका उस पर कोई असर नहीं हुआ और वो पूरे जोर से मेरी चूत को चोदने लगा। मैं भी सातवें आसमान पर पहुँच गई थी। मुझे चोदते हुए आशीष मुझे गालियाँ देने लगा और कहने लगा, ले मेरे माचोदनी ले मेरा लंड, आज मैं तेरी चूत फाड़ डालूँगा, तुझे बड़े-बड़े लंड अपने अंदर लेने हैं, कुत्ते का, घोड़े का, हाथी का, पहले मेरा तो ले बहनचोद।
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मुझे ये सब सुन कर और मजा आ रहा था। मैं भी आशीष से और जोर से चुदवा रही थी। करीब 30-35 मिनट के बाद आशीष मेरे मुँह में अपना लंड डाल के झड़ गया। फिर शुरू हुआ असली सिलसिला जिसके लिए मैं और आशीष यहाँ थे। आशीष कुत्ते को लेकर मेरे पास आया और मुझसे कहा, लो कर लो जो करना चाहती हो इसके साथ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उठ के कुत्ते को सहलाना शुरू किया तो वो अपनी पूँछ हिलाने लगा और अपने मुँह पर सेलोटेप लगी होने की वजह से मुँह से ऊँ-ऊँ की आवाजें निकलने लगा। फिर धीरे से मैंने उसके लंड को पकड़ कर रगड़ना शुरू किया। उसका लंड पकड़ते ही मेरे अंदर एक आग सी दहक गई और मेरी चूत में से लावा निकलने लगा।
मैं खड़ी हुई और अपनी चूत उस कुत्ते की पीठ पर रगड़ने लगी। करीब 5-6 मिनट मैंने ऐसा किया। बाद में जब उसका लंड खड़ा हो गया तो आशीष को उसे उल्टा लिटाने को कहा। पर जैसे ही हम उसे उल्टा लिटाते तो वो फिर से खड़ा हो जाता। इस पर आशीष ने मुझे कुत्ते का बेल्ट दिया और खुद ड्रॉइंग रूम में पड़ी हुई मेज लेकर आया और उसे उल्टा रख दिया।
उसके बाद उसने कुत्ते को मेज के बीच में लिटा दिया और मेज के टांगों के साथ कुत्ते की टाँगें भी सेलोटेप से बाँध दीं ताकि वो खड़ा न हो सके और मुझसे कहा, लो तुम्हारा काम हो गया, अब कर लो। फिर मैंने वो किया जिसकी मुझे बरसों से तमन्ना थी। हाँ, मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया।
वाह्ह्ह क्या अहसास था वो और उसके लंड का स्वाद भी कुछ अलग सा था। मैं मानो जन्नत में पहुँच गई थी। मैं उसके लंड को पहले अपनी जीभ से चाटा, फिर पूरा का पूरा अपने मुँह में ले लिया और अपने मुँह से उसे चोदने लगी। थोड़ी ही देर में उसका लंड पीछे से गुब्बारे की तरह फूल गया, आगे से लंबा और पीछे से टेनिस बॉल से भी ज्यादा मोटा।
और कुछ देर और चूसने के बाद वो हुआ जो मुझे आज भी याद है। उसने अपने लंड से एक जोरदार पिचकारी मेरे मुँह के अंदर मारी और अपना सारा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। वाह्ह्ह क्या मिठास थी उस पानी में। मुझे वो स्वाद आज भी याद है, मानो जैसे अभी ही की बात हो और मैंने अभी उसका पानी पिया हो।
उसका सारा का सारा पानी पीने के बाद मैंने जब उसका लंड अपने मुँह से बाहर निकाला तो कुछ बची हुई बूंदें मेरे होठों पर गिर गईं। इस पर आशीष ने पूछा कैसा था तो मैंने उसे कहा लो खुद ही चख लो और उसने मुझे किस करते हुए उसका पानी चाट लिया।
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फिर मैंने उसकी टाँगों से और उसके मुँह से सेलोटेप निकाल दी और खुद किचन में चली गई। और जब मैं वापस आई तो मेरे हाथ में दूध का गिलास था। ये देख कर आशीष बोला ये अच्छा काम किया, बिचारा को भूख लगी होगी तो तुम इसे दूध पिलाओ।
इस पर मैं बोली इसे दूध ऐसे ही नहीं मिलेगा, इसे और भी बहुत सारा काम करना बाकी है। इसे मेरी बरसों से जलती हुई इस चूत की आग को बुझाना है। और ये कह कर मैंने वो छोटी मेज सीधी की और उसपर अपनी टाँगें फैला कर सो गई और अपनी चूत का मुँह खोल के उसमें थोड़ा दूध डाल दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इस पर आशीष समझ गया कि अब उसे क्या करना है। उसने कुत्ते को मेरी चूत के पास किया। मेरी चूत में दूध होने की वजह से कुत्ता मेरी चूत चाटने लगा। मैं भी थोड़ा-थोड़ा दूध अपनी चूत में डालती रही और वो उसे चाटता रहा। कभी-कभी वो अपनी पूरी की पूरी जीभ मेरी चूत में डालकर मुझे चोद रहा था।
तकरीबन 30 मिनट तक ये सिलसिला चलता रहा। इस दौरान मेरी चूत अंदर ही अंदर और जलती रही। उसके चाटने से मेरी चूत की आग और भड़कने लगी और आखिरकार मैं वापस झड़ गई और उस कुत्ते ने दूध के साथ मेरी चूत का सारा रस भी चाट कर साफ कर दिया।
फिर मैंने देखा कि कुत्ते का लंड वापस अपनी नॉर्मल पोजीशन में आ गया है तो मैंने उसे अपने हाथ में लिया और जोर से आगे-पीछे करने लगी और कुछ ही मिनटों में उसका लंड वापस खड़ा हो गया। फिर मैंने आशीष को इशारा किया और खुद मेज पर लेट गई।
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आशीष ने कुत्ते के आगे के पैर मेज के ऊपर किए और मैंने उसका लंड पकड़ कर मेरे पैरों के बीच के ज्वालामुखी में डाल दिया और आशीष ने कुत्ते की कमर को पकड़ कर उसे आगे-पीछे हिलाना शुरू किया। कुत्ते का लंड अब मेरी चूत में आसानी से आगे-पीछे होने लगा था।
थोड़ी ही देर में कुत्ते को भी मुझे चोदने में मजा आने लगा और वो खुद ही मुझे कुत्ते की तरह चोदने लगा। उसकी स्टैमिना किसी भी इंसान से कहीं ज्यादा थी। वो पागलों की तरह मुझे चोदे जा रहा था। मैं भी सातवें आसमान पर पहुँच गई थी और इस दौरान मैं 5 बार झड़ गई थी।
तकरीबन 40-45 मिनट चोदने के बाद उसका लंड मेरी चूत में फूल गया और उसका पीछे का हिस्सा जो कि टेनिस बॉल से भी ज्यादा बड़ा हो गया था, वो मेरी चूत के साथ अंदर चिपक गया और वो मेरी चूत में धीरे-धीरे अपना गरमा-गरम पानी छोड़ रहा था। तकरीबन 10 मिनट तक उसका लंड इस पोजीशन में मेरी चूत में चिपका रहा, फिर धीरे से निकल गया।
उसके बाद उस कुत्ते ने अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटना शुरू किया और अपना और मेरा सारा पानी चाट-चाट कर साफ कर दिया। उससे चुदने के बाद तो मुझमें इतनी ताकत भी नहीं थी कि मैं खुद खड़ी हो सकूँ। मैं थोड़ी देर लेटी रही। फिर जब मुझमें थोड़ी ताकत आई तो मैं खड़ी हुई और किचन की ओर चल दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इस पर कुत्ते ने फिर से मेरी चूत चाटना शुरू कर दिया, पर मुझमें अब चुदने की ताकत नहीं थी। इसलिए मैंने आशीष को कहा इसे कसकर पकड़ ले और मैं अंदर से एक बड़ा कटोरा दूध का भर लाई और उस कुत्ते को दे दिया। और वो कभी दूध को तो कभी मेरी चूत को देखने लगा। कटोरा रखने के बाद मैंने अपने सारे कपड़े पहन लिए। तब तक आशीष भी तैयार हो चुका था।
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फिर हमने कुत्ते को कोई न देखे इस तरह गाड़ी में डाल दिया और आशीष अपनी कार लेकर उसे कुत्ते को बगीचे में छोड़ आया। और मेरी सहेली के वापस आने का टाइम भी हो गया था। इसलिए मैं उसके घर में सबकुछ अच्छी तरह से रख दिया ताकि उसे पता न चले कि यहाँ क्या हुआ था। और उनके आने से पहले आशीष वापस आ गया और उनके आते ही मैंने उसे चाबी हाथ में देते हुए उसका शुक्रिया अदा किया और कहा कि आज तूने मेरी लाइफ बना दी।
इस पर वो बोली लगता है तुमने आशीष के बहुत मजे किए हैं। पर ये तो हम तीनों ही जानते थे कि हमने कौन से मजे लिए थे। उस दिन मेरी बरसों की ख्वाहिश पहली बार पूरी हुई और उस कुत्ते ने मेरी बरसों की प्यासी चूत को आज कुछ हद तक शांत किया। पर ये इस सिलसिले का अंत नहीं था, ये तो अभी शुरुआत ही थी। उसके बाद क्या-क्या हुआ और मैंने और आशीष ने और क्या-क्या गुल खिलाए, ये सब दूसरी बार। तो दोस्तों, कैसी लगी आपको मेरी ये सच्ची कहानी।
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