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बस में सेक्स का अनोखा अनुभव

जनवरी 9, 2026 by hamari 5 Comments

Strange Things Sex Hindi Story

मैं 32 साल का हूँ और अपना बिज़नेस है, अब सब सेटल हो गया है लेकिन ज़िंदगी में एक खालीपन सा रहता है। आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ वो उस वक्त की है जब मैं अपने बिज़नेस के लिए बहुत स्ट्रगल कर रहा था। पैसे की नहीं, काम की स्ट्रगल थी। Strange Things Sex Hindi Story

पूरे राज्य में घूमना पड़ता था, बाहर जाता तो ऑफिस संभलता नहीं था, और उस वक्त मेरी वाइफ भी मेरे साथ नहीं रहती थी – कुछ सोशल प्रॉब्लम्स थे। खाना बनाने तक की दिक्कत थी। मम्मी-पापा उस वक्त बड़ौदा में थे। इसलिए मैंने दो एडवर्टाइज़मेंट दिए – एक लड़की जो मेरा ऑफिस (जो घर में ही था) संभाल सके, और दूसरी जो घर पर खाना बना सके।

इंटरव्यू में बहुत लोग आए। एडवर्टाइज़मेंट के दो दिन बाद शाम को एक औरत और उसका पति मेरे घर आए। औरत ने अपना नाम मोना बताया, पति का नाम अल्फ्रेड। उम्र करीब 36-38 साल रही होगी। उसने कहा कि उसे खाना बनाने का बहुत एक्सपीरियंस है और ऑफिस का काम भी संभाल सकती है।

हमारी बातचीत कुछ ऐसी हुई (मिक्स्ड लैंग्वेज में):

मैं: आपको किस टाइप का एक्सपीरियंस है, खाना बनाने में?

मोना: मैं सब कुछ बना लेती हूँ। ऐसा है तो आप मेरे हसबैंड से पूछ लीजिए।

(उसका पति बोला “Yes she can prepare both kind of food. Veg & NoVeg as well)

मैं: आपने पहले कहाँ काम किया है?

मोना: इससे पहले मैं एक डॉक्टर के यहाँ रसोई करती थी और उसके बाद एक NRI के लिए भी खाना बनाती थी। पर वो दूसरी सिटी में था और मेरे बच्चे यहाँ थे, इसलिए टाइमिंग संभालना मुश्किल था।

मैं: कितने बच्चे हैं आपके? और यहाँ काम करेंगी तो टाइमिंग कैसे अडजस्ट होगा?

मोना: मेरे दो बच्चे हैं, 1 लड़की जो 10th में है और 1 लड़का जो 7th में है। और रही बात टाइमिंग की तो मैं इसी शहर की हूँ तो चाहे कभी देरी हो जाएगी तो भी घरवालों को चिंता नहीं रहेगी, कि चलो मैं यहीं पर ही हूँ।

हमने करीब आधा घंटा बात की। मैंने कहा ठीक है सोचकर बताता हूँ क्योंकि और कैंडिडेट्स भी देखने हैं। मैं उन्हें भूल ही गया था लेकिन तीन दिन बाद शाम 7 बजे मैं घर पर अकेला था और काम कर रहा था। तभी डोरबेल बजी। मैं सिर्फ़ टी-शर्ट और शॉर्ट्स में था, सोचा कोई दोस्त आया होगा, दरवाज़ा खोला। सामने मोना अकेली खड़ी थी। सफ़ेद साड़ी में थी। मैंने उसे वेलकम किया और लोअर सिटिंग पर बिठाया। हम 90डिग्री एंगल पर बैठे।

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मैंने पूछा आने का कारण?

वो बोली सर आपने जॉब के बारे में कुछ बताया नहीं।

मैंने कहा सॉरी भूल गया था। अभी डिसाइड नहीं किया। मैंने कहा “मुझे एनर्जेटिक और भरोसेमंद लड़की चाहिए जिस पर मैं दोनों काम के लिए पूरा भरोसा कर सकूँ”।

अचानक वो रोने लगी और सचमुच जॉब के लिए गिड़गिड़ाने लगी।

मैं: देखिए आप रोना बंद कर दीजिए। क्योंकि मुझे जो काम है उसमें आप फिट नहीं हैं। मैंने डिसाइड कर लिया है कि मुझे ऐसी लड़की चाहिए जो दोनों काम कर सके।

मोना: आप एक बार काम तो देखकर करके देखिए मैं ऐसे दिल लगाकर काम करूँगी कि आप सब कुछ भूल जाएँगे और आपको कोई कमी नहीं रहेगी ऐसा संतोष दूँगी।

“ऐसा संतोष दूँगी” ये सुनते ही मेरे दिमाग में सेक्सुअल ख्याल आने लगे। मैंने उसे और उसके बॉडी को गौर से देखा। गहरे रंग की, मोटी बॉडी, बहुत बड़े बूब्स और हिप्स। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, गहरा क्लिवेज दिख रहा था। मेरा लंड खड़ा होने लगा।

मैंने कहा: अच्छा चलो अगर आप ठीक तरह से दोनों काम संभाल लोगी तो कोई प्रॉब्लम नहीं। पर मैं जो भरोसा करके आपको जॉब दे रहा हूँ उसका मुझे सही रिस्पॉन्स चाहिए।

मोना: अरे सर आपको कोई फरियाद का मौका नहीं दूँगी। आपने जब मुझ पर भरोसा किया है तो आपको उसका पूरा रिवॉर्ड मिलेगा।

मैं: चलो ये तो ठीक है कि आप रसोई संभाल लोगी लेकिन मेरे बिज़नेस का क्या? मुझे कभी-कभी बाहर जाना पड़ता है और आपको भी कभी इसी सिलसिले में मेरे साथ आना पड़ेगा। क्योंकि उसमें नाइट हाल्ट करना पड़ता है और कभी-कभी २-३ दिन भी लगते हैं। इसी लिए मैं आपको रखना नहीं चाहता था, आप बाल-बच्चों वाली हैं और काम के वक्त अगर बाद में घर से मना कर दिया तो मैं उस टाइम कैसे किसी को ढूँढने जाऊँगा! अरे बाहर जाने की बात तो छोड़ो कभी यहाँ काम करते भी देर रात हो जाती है।

मोना: सर मुझे अभी काम की ज़रूरत है, अगर ये प्रॉब्लम है तो मैं घर की बात संभाल लूँगी।

मैं: वो तो ठीक है लेकिन यहाँ काम और घर का भी? आप कैसे संभालेंगी?

मोना: कोई प्रॉब्लम नहीं सर, अभी मुझे घर की चिंता नहीं है क्योंकि मेरे हसबैंड की जॉब नहीं है तो घर वो संभाल लेंगे। और रही बाहर जाने की और देर रात तक काम करने की बात। तो आप जैसे नेक इंसान के होते हुए क्या चिंता? मेरे हसबैंड भी आपसे मिलने के बाद खुश हैं और उन्होंने ही कहा है चाहे कुछ भी अडजस्ट करना पड़े तो भी ऐसे इंसान के साथ काम करने का मौका नहीं गँवाना।

मैं: अच्छा तो ठीक है, आप कल से काम शुरू कर देना।

मोना: कल से क्यों? आप अभी क्या खाएँगे? चलिए आप मुझे रसोई कहाँ है बता दीजिए और वहाँ क्या कुछ है क्या नहीं वो भी देख लेती हूँ और आपके लिए कुछ बना देती हूँ।

मैं: अरे नहीं अभी के लिए कुछ नहीं बनाना है, आप टाइम देखिए 7:30 हो गया है। घर पर आपकी सब चिंता करते होंगे।

मोना: नहीं नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं है। अगर काम करना है तो देरी क्या जल्दी क्या। और आपने मुझे जिस भरोसे के साथ काम दिया है तो मेरा फ़र्ज़ बनता है कि मैं आपकी हर ज़रूरत को देखूँ।

उसकी आँखों में एक शरारत सी थी जैसे वो मुझे ओपन इनविटेशन दे रही हो। मैं वहाँ से उठा और बोला चलिए मैं आपको रसोई दिखा देता हूँ। मैंने उसे आगे चलने को कहा क्योंकि धीरे-धीरे मेरे अंदर कामदेव जाग रहे थे और उसके बड़े-बड़े बूब्स देखने के बाद मैं उसके बट्स भी देखना चाहता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो आगे चली तो मैंने देखा कि उसके बट्स बहुत बड़े थे और मेरे मन हुआ कि मैं उसी वक्त उसकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर करके उसकी गाँड मार दूँ। लेकिन मैं सब्र से काम लेना चाहता था (सब्र करके जो मज़ा आता है वो जल्दी में नहीं आता। ये मेरा खुद का एक्सपीरियंस है, और मैं वैसे ही करता हूँ।

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अगर मैं किसी के साथ तुरंत ही कुछ करना चाहता हूँ तो वो संभव नहीं है, क्योंकि जब तक मैं सामने वाली को जान न लूँ उससे सेक्स की बात बनती ही नहीं)। और हम लोग रसोई में पहुँचे। मैंने उसे एक-एक करके सब डिब्बे खोलकर बता रहा था तो उसने कहा आप सिर्फ़ अपना हाथ लंबा करके दिखा दीजिए मैं खुद खोलकर देख लेती हूँ।

और बीच में उसने मुझे पूछा अभी क्या खाना बनाना है, मैंने कहा सिर्फ़ चाय लूँगा क्योंकि अभी कुछ खाने का मन नहीं है। उसने चाय बनाना शुरू किया और दूध कहाँ है ऐसा पूछा। तो मैं हँस पड़ा और वो भी समझ गई और हँस दी। मैंने कहा फ्रिज में है और पीछे की ओर इशारा किया जहाँ फ्रिज था।

वो दूध लेने के लिए झुकी और साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया। मैं तो उसके बड़े-बड़े बूब्स को देखता ही रह गया जो कि साइज़ के कारण उसकी ब्लाउज़ में से बाहर आने को तड़प रहे थे। उसने ज़्यादा अटेंशन नहीं लिया और ऐसे ही दूध लेकर सीधी खड़ी हो गई, मेरा और उसके बीच सिर्फ़ ४-५ इंच का फासला था।

जब मैंने देखा कि उसका पल्लू पूरी तरह गिर गया है और उसके बड़े बूब्स तने हुए हैं तो देखता ही रह गया। दूध का बर्तन बड़ा था इसलिए वो दोनों हाथों से पकड़े हुए थी उसने ध्यान दिया कि पल्लू गिर गया है पर वो लाचार थी कि कैसे पल्लू वापस लगाया जाए।

तभी मेरी और उसकी नज़र एक हुई, वो बड़ी शरमाई सी थी और कह न सकी कि मैं उसका पल्लू वापस लगा दूँ। मैंने खुद ही पूछा कि क्या मैं आपका साड़ी का पल्लू लगा दूँ तो उसकी आँखें नीची हो गईं। मैंने उसके बहुत करीब गया और साड़ी का पल्लू उठाया और उसके कंधे पर लगाया।

उसने कहा ज़रा ठीक से रख सकते हैं आप। मैं उसका पल्लू ठीक कर रहा था और तभी मेरा हाथ उसके बूब को छू गया। मुझे एक बड़ा झटका सा लगा कि कितने बड़े और टाइट बूब्स हैं और मेरा लंड खड़ा हो गया। पर मैं थोड़ा पीछे हट गया, और उसने चाय के पानी में दूध मिला दिया।

मैंने सब नॉर्मल होने का दिखावा किया और कहा कि बाकी के डिब्बे आप देख लें तब तक चाय बन जाए। तब वो भी मान गई। अब की बारी सब स्पाइसेस के डिब्बे की थी जो उसके राइट हैंड की तरफ़ थे और मैं उसके लेफ्ट में। मैंने फिर से सब डिब्बे हाथ लंबा करके दिखाना शुरू किया।

वो मुझसे थोड़ी ही हाइट में छोटी थी (मेरी हाइट 5’7″है और उसकी शायद 5’4″ होगी)। जब ऊपर वाले शेल्फ के डिब्बे की बारी आई तो मुझे उसके करीब जाना पड़ा, वैसे ही उसकी बॉडी बहुत बिग थी इसलिए उसने भी जगह रोक रखी थी। मैं जैसे ही उसके करीब गया पर मेरा हाथ पर्फ़ेक्ट एंगल में नहीं आ रहा था तो मैं उसके पर्फ़ेक्ट पीछे खड़ा हो गया।

और उसे सब इशारा करके दिखाने लगा, मेरे इशारे के साथ ही वो डिब्बा उतारकर देखती थी, जब वो डिब्बा उतारकर देखने के लिए प्लेटफॉर्म पर रखती तो थोड़ा पीछे की ओर झुकती, उसके इसी झुकाव से मेरा लंड उसके बट्स से लग जाता जैसे-जैसे उसने डिब्बे देखे मेरा लंड एकदम टाइट हो गया।

अब वो उसकी बट्स के बीच की गहराई में छू रहा था। तब तक चाय तैयार हो गई और मैंने बोला कि चलो अब ड्रॉइंग रूम में ही जाकर बैठते हैं। हम लोग फिर वहाँ से ड्रॉइंग में आ गए और चाय पीने लगे। तब तक ९ बजे से ज़्यादा टाइम हो गया था। चाय पूरी होने के बाद मैंने पूछा आपको कहाँ जाना है, तो उसने अपना एड्रेस बताया, मैं जानता था कि अभी उसको इस टाइम पर वहाँ जाने के लिए रिक्शा या कुछ भी नहीं मिलेगा।

फिर भी मैंने जानबूझकर पूछा आप कैसे जाएँगी, तो उसने कहा अगर कुछ मिल गया तो ठीक है नहीं तो वैसे मैं पैदल ही आती जाती हूँ। क्योंकि रिक्शा वगैरह में ज़्यादा पैसे चले जाते हैं। तो मैंने कहा अगर आपको ऐतराज़ न हो तो मैं आपको घर छोड़ दूँ। उसने कहा नहीं साहब आप क्यों तकलीफ़ लेते हैं।

तो मैंने कहा नहीं आपको मेरी वजह से देरी हो गई है और वैसे भी अभी आपको इतनी रात को अकेले जाने देना शोभा नहीं देगा। मैं ही आपको घर छोड़ देता हूँ इसी बहाने आपका घर भी देख लेंगे। तो वो मान गई। उस टाइम मेरे पास कार नहीं थी सिर्फ़ बाइक थी। मैंने बाइक स्टार्ट की और उसे बैठने को बोला।

वो आसानी से नहीं बैठ सकी तो मैंने कहा आराम से आप ठीक तरह बैठ जाए। तो उसने मेरा शोल्डर पकड़कर अपने आप को अडजस्ट किया। उस अडजस्टमेंट में उसके दोनों बूब्स मेरे पीछे दब गए और मेरा लंड फिर से छटपटाने लगा। मैंने थोड़ा आगे जाकर एक आइसक्रीम पार्लर से दो आइसक्रीम और दो डेयरी मिल्क चॉकलेट उसके बच्चों के लिए ली।

उसका घर सिटी के आउटर साइड में था और मैं जानता था कि वहाँ पहुँचने में कम से कम आधा घंटा लगेगा वैसे भी दिसंबर महीना था और ठंड भी बड़ी कातिल थी। इसी लिए मैं बाइक धीरे चला रहा था, उसे भी ठंड लग रही थी और वो और करीब आकर बैठ गई अबकी बार उसके दोनों बूब्स मेरी पीठ पर चिपक गए थे और मेरा लंड पूरे अटेंशन में।

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जैसे ही हम पक्की सड़क से उतरकर कच्ची सड़क पर उतरे एक गड्ढे के कारण बाइक उछली और उसका हाथ मेरे कंधे से फिसला, फिसलते ही उसका हाथ सीधे मेरे लंड पर ही गिरा और उसने अडजस्ट होने का प्रयास किया तो उसके हाथ से मेरा लंड उसके हाथ से पूरा दब गया। मेरा हाल बिगड़ जा रहा था पर दोनों में से कोई कुछ भी नहीं बोला।

जब मैंने उसके घर के करीब पहुँचने को आए तो रास्ता पूछा तभी हमारी बातचीत शुरू हुई। उसके घर पहुँचे तो घर का दरवाज़ा बंद था। तभी उसने पूछा सर मुझे कैसे कपड़े पहनकर आना पड़ेगा, क्योंकि मेरे पास सिर्फ़ साड़ी ही है। मैंने कहा ठीक है आप साड़ी पहनकर ही आए।

उसने दरवाज़ा नॉक किया तो थोड़ी देर बाद एक लड़की ने दरवाज़ा खोला, मैं समझ गया कि ये उसकी लड़की है। उसने मुझे अंदर आने को कहा, मेरे मना करने पर भी बहुत ज़िद करके उसने घर में बुलाया। घर देखते ही मालूम पड़ गया कि वो रॉ हाउस है। मैंने जब उसके हसबैंड का पूछा तो उसने बताया कि वो देर रात को आते हैं।

मैंने कहा तुमने तो बोला था कि उसकी जॉब नहीं है। तो वो थोड़ा उदास हो गई और बोली, नहीं सर वो जॉब पर नहीं जाते अब वो शराब पीने जाते हैं तो बड़ी देर रात को लौटते हैं और कभी-कभी तो सुबह में आते हैं। तो मैंने पू00 पूछा बच्चों का कौन खयाल रखता है, तो उसने कहा यहाँ पीछे ही मेरी सास रहती है तो बच्चे वहीं चले जाते हैं, आज मैंने बोला था कि मैं जॉब के लिए मिलने जा रही हूँ इसलिए बच्चे यहीं हैं।

ज्यादातर वो मेरी सास के साथ ही रहते हैं। बाद में उसने चाय का फ़ोर्स किया पर मैंने वहाँ ज़्यादा रुकना मुनासिब नहीं समझा और वहाँ से निकल गया। पूरे रास्ते में मुझे उसकी हॉट बॉडी के ही खयालात आते रहे, और मैं घर गया पर दिमाग से वो नहीं निकल रही थी। ऐसे ही मुझे कब नींद आ गई पता नहीं चला।

दूसरे दिन मैं अपने टाइम से उठा और नहाकर फ्रेश हो गया। परफ़ेक्ट 10 बजे वो घर पर आ गई। मैंने उसको बोला कि अभी खाना नहीं बनाना है क्योंकि मैं दिन को नहीं खाता और काम की वजह से कभी टाइम नहीं मिलता तो दिन में खाने की आदत ही छूट गई है। तो उसने कहा सर ऐसे तो आपको विकनेस आ जाएगी और अभी तो आपको बहुत कुछ पाना है।

मैंने फिर उसकी आँखों में तूफ़ान देखा, पर मैंने कुछ और करने का मुनासिब नहीं समझा क्योंकि उस टाइम और भी लोग काम करने को आए हुए थे। थोड़ी देर में उसको सब मेरे बिज़नेस का काम सिखा रहा था, वैसे भी कुछ ख़ास काम नहीं था उसको सीखना पर कुछ मैंने सिखाया कि ऐसे काम रहता है।

दोपहर का टाइम था करीब 1 बजे थे और मेरे एक क्लाइंट का फ़ोन आया कि उसको एक बड़े ऑर्डर के लिए मेरे कुछ सैंपल्स चाहिए और थोड़ा गुड्स भी चाहिए। मैंने कहा ठीक है कब चाहिए आपको, वो बोला अभी हो सके तो अभी आप किसी को भेज दीजिए।

मैंने हाँ भर दी और मेरे पैकिंग डिपार्टमेंट में गया जहाँ पर एक लड़का था जो हमेशा मेरा गुड्स डिलीवरी का और सैंपल पहुँचाने का काम करता था। महेश उसका नाम था, मैं उसको ही ज्यादातर भेजता था क्योंकि वो ३ साल से मेरे साथ था और डीलिंग का काम में एक्सपर्ट था, मुझे भी उस पर पूरा भरोसा था।

जब मैंने उसे ये बात बताई कि फ़ौरन तुमको जाना पड़ेगा, तो वो कुछ बोल नहीं पाया पर थोड़ा मायूस हो गया। जबकि मैं उसे भाई की तरह जानता था मैंने पूछा महेश कोई प्रॉब्लम है? उसने बड़े डर से कहा साहबजी मेरी बीवी प्रेग्नेंट है और कभी भी उसको हॉस्पिटल ले जाना पड़ सकता है। फिर भी आप कहें तो… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं उसकी प्रॉब्लम समझ गया पर मैं खुद परेशान हो गया क्योंकि आज ही क्लाइंट को सब डिलीवर करना था। मैंने उसको बोला कोई बात नहीं तुम एक काम करो मैं तुम्हें जो लिस्ट देता हूँ वो गुड्स निकाल के रखो और पैक करवा दो और जो सैंपल की लिस्ट है उसे अलग से पैक करके मुझे ऊपर दे जाओ।

उसके बाद तुम ये सब बंद करके घर चले जाओ और कुछ अच्छी खबर लेकर ही आना और मैंने अपनी जेब में से 2000 रुपये निकालकर दिए तो उसके चेहरे पर चमक आ गई और वो बोला थैंक यू सर। मैंने कहा ठीक है चलो वो सब बाद में होता रहेगा तुम ये सब पैकिंग करके ऊपर दे जाओ, मुझे भी तैयार होने है जाने के लिए।

मैं खुद टेंशन में आ गया था क्योंकि क्लाइंट का प्लेस कुछ 200 किमी की दूरी पर था। वहाँ जाना और डील करके वापस आना मुझे कुछ बोरिंग सा लग रहा था क्योंकि मेरे मन मोना में लगा हुआ था। ये सब बातें मोना के सामने ही हुई और मैं ऊपर अपने बेडरूम में चेंज करने के लिए गया, पीछे-पीछे वो भी वहाँ आई और बोली सर आपका कुछ मूड बिगड़ गया है, क्या आपको जाना पसंद नहीं है?।

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तो मैं स्ट्रेंज हो गया और उसको क्या जवाब दूँ ये सोच में पड़ गया? मैंने उसको ऐसे ही बोल दिया कि मेरे पैरों में दर्द हो रहा है और काफी दूर जाना है, कल जब आपको छोड़कर आ रहा था तब बाइक स्लिप हो गई और मेरे घुटने में लगा था। तभी से मेरे घुटनों में दर्द है। तभी वो थोड़ा सोचकर बोला अगर… आप!!

फिर वो रुक गई मैंने कहा हाँ बोलिए क्या कह रही थी आप। उसने कहा अगर सर आप चाहें तो मैं भी आपके साथ चलूँ? मुझे भी पता चल जाएगा कि कभी किसी को कुछ अर्जेंट में पहुँचाना हो तो कैसे बात करते हैं और कैसे डील करते हैं। और मैं साथ रहूँगी और बातें होती रहेंगी तो आपको दर्द की तरफ़ ध्यान भी नहीं जाएगा।

मैंने कहा देखो मोनाजी वैसे मुझे कोई आपत्ति नहीं है पर 200 किमी दूर जाना और वापस आने में देर लग जाएगी, कल सुबह भी हो सकती है, और जंगल के बीच में से रास्ता पड़ता है, आपने आज से जॉइन किया है तो मुझे भी अच्छा नहीं लगेगा कि आपको पहले दिन से ही तकलीफ़ हो।

उसने कहा इसमें तकलीफ़ की क्या बात है आप ही ने भरोसा करके मुझे रखा है तो तकलीफ़ कैसे। और रही कल आने की बात तो मेरे घर से कोई प्रॉब्लम नहीं है। प्लीज़ आप मुझे एक नंबर लगा दीजिए मैं घर पर बोल देती हूँ ताकि बच्चे मेरी सास के वहाँ चले जाए।

मुझे लगा कि मेरी मन की मुराद पूरी होने जा रही है और मैंने उसको नंबर लगा दिया तो उसने बच्चों को बोला कि मुझे काम के सिलसिले में बाहर जाना है और कल शाम तक वापिस घर आ जाऊँगी। तभी मैंने बोला आप चाय बना लें तब तक मैं कपड़े चेंज कर लेता हूँ। मैंने उसके जाते ही नहाया और बॉडी स्प्रे लगाकर कपड़े पहन लिए।

मैं हर रोज़ जीन्स और टी-शर्ट पहनता हूँ पर मैंने मौके का फायदा लेने के लिए ट्राउज़र और टी-शर्ट लगा ली। जब मैं बाहर आया तो महेश भी सब पैकिंग करके आ गया था। हमने साथ बैठकर चाय पी और महेश को बोला कि तुम जाकर रिक्शा ले आओ क्योंकि मुझे बस में ही जाना पड़ेगा। ट्रेन वहाँ जाती नहीं है।

तो महेश ने बोला हाँ सर, वहाँ के लिए बस 20मिनट के बाद है तब तक हम वहाँ पहुँच जाएँगे। मैं, मोना और महेश सब बंद करके रिक्शा में बस स्टैंड पहुँचे, महेश को मैंने बोला कि तुम मुझे छोड़कर जाओ और अपनी बीवी का खयाल रखना और जब तक बच्चा न आ जाए तब तक तुम्हारी छुट्टी।

तभी महेश ने बोला सर अपना काम? मैंने कहा उसकी फ़िक्र तुम न करो अभी तुम्हारी फैमिली इम्पॉर्टेंट है और ३-४ दिनों की ही तो बात है तब तक अगर कोई ऑर्डर आएगा तो मैं तुम्हें बुला लूँगा। और महेश चला गया। थोड़ी देर में बस भी आ गई, हम लोग सब सामान लेकर बस में चढ़े और दरवाज़े के नज़दीक ही बैठ गए क्योंकि हमारे पास तीन बड़े बैग थे।

तभी कंडक्टर आया और बोला चलिए आपके पास इतना सामान है तो आप पीछे वाली सीट पर बैठ जाए ताकि और लोगों को आने-जाने में तकलीफ़ न हो। मैंने कहा ठीक है और हम पीछे की सीट पर चले गए। बस में सब आगे की तरफ़ बैठे थे क्योंकि बस जंगल के रास्ते से निकलने वाली थी और बहुत गड्ढों की वजह से उछलती भी बहुत है, मैंने देखा कि पिछली ४ लाइन में कोई बैठा नहीं था, और हमारी सिटी को छोड़ने के बाद शायद ही कोई बस में आएगा।

मैंने एक-एक करके तीनों बैग उठाए और पीछे रख दिए और जानबूझकर ऐसे रखे कि पीछे वाली सीट पर और कोई आ न सके। मैं बैग रखकर खिड़की की ओर बैठ गया और मोना को मैंने अपने बाजू में आकर बैठने का इशारा किया। वो आकर बैठी पर थोड़ी सी उलझन में थी, उसके मुँह पर से साफ़ दिख रहा था।

मैंने पूछा आपकी तबीयत तो ठीक है न? तो वो बोली सर अगर प्लीज़ आप मुझे खिड़की की तरफ़ बैठने दें तो अच्छा रहेगा क्योंकि मुझे बस में कभी-कभी चक्कर आते हैं। मैंने कहा ठीक है, और उससे कहा तुम खड़ी होकर इस तरफ़ आ जाओ। वो खड़ी हुई और खिड़की की तरफ़ आने लगी, उसकी बॉडी बिग साइज़ की थी.

उसकी वजह से वो मेरे पैरों के पास से खिसक नहीं सकती थी, तभी वो मेरी तरफ़ पलटी और कहा सर प्लीज़ थोड़ी हेल्प कर दें। और मैंने आव देखा न ताव और मेरी दोनों हथेलियाँ उसकी बड़ी गाँड पर रखी और ज़ोर से उसे आगे की तरफ़ धक्का दिया, उसकी गाँड छूने से मुझे माल पड़ा कि कितनी मांसल है उसकी गाँड।

पर धक्का देते देते मेरे दो थंब्स उसकी गाँड के गली में चले गए, मैंने सोचा चलो अच्छा है फिर मैंने अपने दोनों थंब्स को और अंदर प्रेस किया और वो दोनों गली की भीतर चले गए। यूं करके करीब आधी मिनट के बाद वो खिड़की वाली सीट पर बैठी और उसने बड़ी लंबी साँस ली।

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जैसे ही उसने साँस भरी उसके दोनों बूब्स आगे की तरफ़ बाहर आए और मैं उसे देखता ही रहा। मुझे ध्यान ही न रहा कि मैं उसके बूब्स की तरफ़ देख रहा हूँ। जब बस ने झटका खाया तब जाकर मैं होश में आया। और मेरी उसकी नज़र एक हुई तो वो मेरे सामने हँस रही थी। तभी टिकट काटने के लिए कंडक्टर आया और मैंने अपने लास्ट स्टेशन के दो टिकट कटवा लिए।

करीब आधा घंटा ऐसे ही निकल गया और मुझे प्यास लगी तो मैंने उसको कहा कि आपके पैरों के नीचे वो मेरा बैग है उसमें पानी की बोतल है आप क्या ज़रा मुझे देंगी। उसने कहा हाँ और वो आगे की तरफ़ झुकी पर वो अपने मोटापे की वजह से बैग तक नहीं पहुँच पा रही थी, मैंने उसको देखा और समझ गया कि उससे बोतल नहीं निकलेगा।

मैंने कहा आप रहने दो मैं ही निकाल देता हूँ। मैं पानी की बोतल लेने के लिए झुका, जबकि मेरा हैंडबैग उसके सीट के नीचे रखा था इसलिए मुझे उसको छूना ही पड़ा, मैंने अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रखा और बैग की ज़िप खोलकर बोतल को निकाला। जब बोतल निकाल कर मैं ऊपर खींचने गया तो मेरा हाथ बोतल सहित उसके दोनों पैरों के बीच में साड़ी के अंदर चला गया।

अब मेरा हाथ उसके दोनों पैरों के बीच और साड़ी के अंदर फँस गया था। मैंने उसकी तरफ़ देखा तो वो बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में मुस्कुरा रही थी और मैं भी हँस पड़ा। तभी उसने अपनी दोनों हाथों से अपनी साड़ी को पकड़ा और साड़ी ऊपर उठाई। उसने अपनी साड़ी अपने घुटनों से ऊपर तक ले ली मैंने देखा क्या दिल बहलाने वाला सीन था।

और मैंने बोतल निकाल ली, थोड़ा पानी पिया और उसको पूछा। उसके हाँ कहने पर मैंने बोतल उसके हाथों में दी उसने ऊँचे से पानी पीने का ट्राई किया, बस कच्ची सड़क पर चल रही थी इसलिए पानी उसके मुँह में कम बाहर ज़्यादा गिर रहा था। उसके पानी पीने के ट्राई में आधी से ज़्यादा बोतल खाली हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने जब बोतल वापस लेने के लिए उसकी तरफ़ देखा तो पानी मुँह में से गिर कर उसके चेस्ट पर पड़ा था उसकी वजह से उसकी साड़ी भीग गई थी और उसके बूब्स पर चिपक गई थी। उसकी साड़ी काफी भीग गई थी, मैंने बोला मोना जी आपके साड़ी बहुत भीग गई है और बाहर सर्दी भी बहुत है आपको कहीं ठंड न लग जाए।

तो वो बोली सर आप मेरे सर हैं आप पोज़ीशन में मुझसे बड़े हैं इसलिए आप मुझे नाम से ही बुलाए। ऐसा कह कर वो अपनी साड़ी को कंधे से हटाया और उसे सुखाने का प्रयत्न करने लगी। मेरी नज़र उसके सीने पर ही गड़ी हुई थी। उसने जब साड़ी को सुखाने के लिए नीचे लिया तो मैंने देखा कि पानी से उसका ब्लाउज़ भी गीला हो गया था।

ब्लाउज़ गीला होने की वजह से उसके बड़े बूब्स दिख रहे थे जब मेरी नज़र थोड़ी नीचे गई तो मेरा लंड एकदम से झटके से खड़ा हो गया। उसने ब्लाउज़ के नीचे कुछ नहीं पहना था, उसके एरिओला और तने हुए निप्पल्स मुझे साफ़ दिख रहे थे। मैंने सोचा कि कब मैं ये बड़े-बड़े बूब्स को चूस पाऊँगा मन तो ऐसा हुआ कि दोनों को पकड़ के मुँह में डाल दूँ और अपने दाँतों से काट लूँ।

पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी। अब आसमान में सूरज डूबने वाला था, हल्की हल्की रोशनी ही बाहर से आ रही थी। मैंने जानबूझकर सीधा हो गया और थोड़ी आह भरी। तभी उसका ध्यान मेरी ओर गया और पूछा सर क्या हुआ। मैंने कहा मोनाजी देखिए ना मेरे घुटनों में बहुत दर्द हो रहा है और ये बस की सीट्स में ठीक से बैठ भी नहीं पा रहा हूँ, उसकी वजह से और दर्द हो रहा है।

तभी उसने बोला आपको कहाँ दर्द होता है। मतलब कौन से पैर में। मैंने उसे बताया कि मेरे राइट पैर के घुटने में दर्द है। उसने कहा एक काम कीजिए सर, आपका लेफ्ट लेग आप मेरे पैरों के ऊपर रख दीजिए और थोड़े नज़दीक आ जाइए मैं आपके घुटने दबा देती हूँ।

मैंने कहा नहीं मैं ये काम आपसे नहीं करवा सकता, तो उसने कहा नहीं सर मैं आपकी तकलीफ़ नहीं देख सकती। तो मैंने कहा तकलीफ़ तो बहुत है, तभी वो बोली मैं आपकी सब तकलीफ़ दूर कर दूँगी। और उसने मेरा लेफ्ट लेग उठाया और उसके पैरों पर रख दिया ऐसा करने से मैं उसको सटकर बैठ गया फिर उसने मेरे राइट घुटने को दबाना शुरू किया।

वो बड़े प्यार से मेरा घुटना दबा रही थी। मेरे दोनों हाथ मेरे पैरों के ऊपर थे उसकी वजह से जब वो मेरे राइट घुटने को दबा रही थी तो उसके बड़े बूब्स मेरे हाथों को छू रहे थे बड़ा मज़ा आ रहा था। मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ अडजस्ट किए ताकि उसके बड़े बूब्स मेरे अलग-अलग हाथ में सेट हो जाए।

बाहर लगभग अंधेरा सा हो गया था और बस जंगल में एंटर हो रही थी इसलिए बस की बत्ती भी बंद कर दी गई। अब मेरे में थोड़ी हिम्मत आई मैं जानता था कि मेरे हाथ उसके बूब्स को छू रहे हैं और उसे भी ये पता है, तब भी वो कुछ परवाह नहीं कर रही थी। तकरीबन ५ मिनट के बाद मैंने हौसला एकट्ठा किया और अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स पकड़ लिए।

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वो एकदम रुक सी गई पर मैंने ठान लिया था कि मौका गँवाना नहीं है इसलिए मैंने अपनी पकड़ और बढ़ा दी। तो उसने मेरी तरफ़ मुँह घुमाया और बोली सर कोई देख लेगा। मैं समझ गया कि अब मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया है। तो मैंने उसके दोनों बूब्स को अच्छी तरह मसलाना शुरू कर दिया।

सच मानो दोस्तों उसका एक बूब मेरा हाथ में भी नहीं आ रहा था। इतने बड़े थे उसके बूब्स। इसी मस्ती में मेरा लंड एकदम तन हो चुका था और पैंट फाड़कर निकलना चाहता था। मैंने पहले से ही ट्राउज़र पहन रखा था इसलिए मेरा उठा हुआ लंड साफ़ दिख रहा था। और उसके मेरे घुटने की तरफ़ झुकाव से मेरा लंड उसके बूब्स को टच कर रहा था।

मैंने धीरे से उसके ब्लाउज़ के हुक खोलने ट्राई किया पर उसके बड़े बूब्स के प्रेशर की वजह से मुझसे ये हो न सका। मोना ने मुझे हँसकर कहा क्या हुआ नहीं खुला और वो सीधी हुई पर थोड़ी झुकी हुई ही रही। ऐसे में उसने अपना ब्लाउज़ अनहुक कर दिया और फिर मेरे घुटने की तरफ़ झुक गई।

इस बार उसका हाथ मेरे खड़े लंड से जा टकराया तो उसने घुटने जगह हल्के से मेरे लंड पर अपनी उँगलियाँ फिराई। मैं तो जैसे पागल हो गया था एक तरफ़ उसके खुले बूब्स मेरे हाथ में थे और दूसरी तरफ़ वो मेरे खड़े लंड पर उँगलियाँ चला रही थी। मुझे अब होश नहीं रहा मैंने उसकी दोनों निप्पल्स को अपने थंब और उँगली के बीच पकड़ा।

उसकी निप्पल्स काफी टाइट हो गई थी और बड़ी मोटी भी थी। साइज़ में मानो कि वो १ सेमी से ज़्यादा बड़ी थी और आगे की तरफ़ उतनी ही लंबी। इसी वजह से मैंने आराम से पकड़ लिया और गोल-गोल घुमाने लगा। मैंने महसूस किया कि उसके शरीर का टेम्परेचर बढ़ गया है, यानी कि वो गर्म हो गई थी। उसकी गर्म साँसें मुझे अपने लंड पर महसूस हो रही थी।

उसने मेरे लंड को अब अपने पूरे हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगी। उसके ऐसा करने से लंड और भी टाइट हो गया। उसने मेरी तरफ़ मुड़ कर कहा सर आपका तो बड़ा टाइट है जैसे कि लोहे की सलाख। मैंने धीरे से कहा कि अभी रे लोहा गर्म है उस पर थोड़ा पानी गिरेगा तो ये और भी सख्त हो जाएगा, इतना सुनकर वो हँस पड़ी और बोली कौन सा पानी गिराना पड़ेगा।

तो मैंने कहा अभी तो इसी हालत में कौन सा पॉसिबल है हाँ। तो वो समझ गई और मेरे पैंट की ज़िप खोलने लगी पर ट्राउज़र की ज़िप लॉक थी इसलिए वो खोल नहीं पाई तो उसने मेरे लंड को ऊपर से ही मुँह में दबोच लिया। मैं तो आसमान में उड़ने लगे बहुत दिनों के बाद किसी ने मेरा लंड मुँह में लिया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने इसी उफ़ान में उसके बूब्स को जोरों से दबा दिया तो ये क्या, मेरे हाथ में कुछ गीला पन महसूस हुआ मैंने एक हाथ बाहर निकाला और अपनी जीभ से टेस्ट किया तो वो दूध जैसा टेस्ट था। मैंने उसको पूछा कि क्या तुम्हारे में से अभी दूध निकलता है, तो वो बोली पीओगे क्या सर।

मैंने कहा अभी तो तुम अपना काम जारी रखो। अब मुझसे रहा नहीं जाता था तो मैंने उसके सिर को ऊपर उठाया और अपने पैंट की ज़िप को खोल दिया। वो थोड़ी सीधी हुई तो मैंने झट से उसके बूब्स को दबोच लिया और निप्पल में से निकलता दूध चाटने लगा। उसने आहें भरना शुरू किया, बस के इंजन की आवाज़ की वजह से कोई हमारी आवाज़ें नहीं सुन रहा था।

उसके दोनों बूब्स को मैं ज़ोर से प्रेस करने लगा पर बड़े होने कारण पूरी पकड़ में नहीं आ रहे थे तो मैंने एक बूब को दो हाथों से पकड़ा निप्पल को मुँह में भर लिया अब मैं ज़ोरों से दोनों हाथों से उसका राइट बूब दबा रहा था और निकलता दूध पी रहा था।

तभी मैंने उसके एरिओला को मुँह में भरके अपने दाँतों से दबा दिया तो उसके मुँह से हल्की सी चीख निकल गई मैं समझ गया कि उसको मज़ा आ रहा है वरना और कोई होती तो चिल्ला के मोहल्ला एकट्ठा कर लेती। अब मैंने उसके लेफ्ट बूब का भी यही हाल किया।

इसी दौरान उसका हाथ मेरे लंड को सहला रहा था मेरा मन कर रहा था कि अब उसके मुँह में मेरा लंड डाल दूँ। तो मैंने उसके बूब्स को छोड़ दिया और दोनों हाथों से उसके मक्खन जैसे गालों को पकड़ कर किस करने लगा। वो भी मस्त हो गई थी। ५-६ मिनट किस करने के बाद मैंने इशारे से उसको बोला कि मेरा लंड मुँह में लो, तो वो मना करने लगी।

उसने कहा मुझे पसंद नहीं है तो मैंने कहा क्यों अपने हसबैंड का नहीं लेती। वो बोली उसके लंड की वजह से मेरा मन उब गया है। वो रात को नहाए बिना उसका लंड मेरे मुँह में डाल देता था। तो मैंने कहा मोना मैं तो नहाकर आया हूँ ज़रा चख के तो देख लो। उसने कहा ठीक है पर अगर बदबू आएगी तो मैं नहीं करूँगी।

ऐसा कह कर वो मेरे लंड की तरफ़ अपना मुँह ले गई। मेरा लंड अभी भी अंडरवियर में ही था, उसने पहले अपने हाथों से मेरे लंड को सहलाया फिर आहिस्ता से उसने बाहर निकाला। अपने हाथों से आहिस्ता-आहिस्ता लंड को ऊपर नीचे करने लगी और फिर धीरे से उसने अपनी जीभ से मेरे लंड के हेड को चाटा और फिर सबसे ऊपरी हिस्से पर अपने मोटे और बड़े होंठों से किस किया।

मेरा हाल बुरा हो रहा था, अब की बार उसने मेरे डिक हेड को अपने मुँह में ले लिया और उसे मुँह में रख कर ही चूसने लगी। उसकी जीभ को डिक हेड पर गोल गोल घुमाने लगी। थोड़ी देर बाद उसने लंड को मुँह में से बाहर निकाला और फिर ऊपर नीचे करके सहलाने लगी।

वो जब भी लंड के नीचे की तरफ़ अपना हाथ ले जाती तब वो लंड के एंड में ज़रा ज़ोर से दबा देती थी इसकी वजह से मेरा और भी सख्त हो गया था। अब मेरी पोज़ीशन ये थी कि वो अगर उसको अभी मुँह में न ले ले तो मेरे लंड की सख्ताई के कारण मुझे दर्द हो रहा था। मैंने तुरंत अपने हाथों से उसके सिर के बालों को पकड़ा और उसका मुँह लंड के ऊपर रख दिया।

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वो समझ चुकी थी क्योंकि वो वेस्ट एक्सपीरियंस थी। उसने लपक से आधा लंड मुँह में भर लिया और चूसने लगी। मेरा मन करता था कि वो पूरा लंड मुँह में ले ले। इसी लिए मैंने उसके बालों को पकड़ के रखा और नीचे मेरे लंड को धक्का दिया तो मेरा लंड उसके मुँह में पूरा चला गया।

वो तड़फराई और ज़ोर से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। उसके ज़ोर से मैं समझ गया कि जब वो आराम से ये सब करती है तो फिर ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं करनी है। मैंने अब अपनी हाथों की पकड़ छोड़ दी तो उसने फट से मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाला तो मेरे लंड उसके मुँह के रस से तरबतर था।

वो मेरी तरफ़ देखी और बोली कि पूरा लंड तुम्हें मेरे मुँह में डालना है? तो बोलो ना ऐसा मत करो मुझे भी मज़ा आ रहा है तभी तो मैं तुम्हारा लंड चूस रही हूँ। मैंने कहा ठीक है। और वो फिर मेरे लंड की तरफ़ झुक गई। अब मैंने भी अपना हाथ उसके ऊपर से लेकर उसकी वैजाइना की ओर ले गया।

मैंने उसके साड़ी के ऊपर से ही उसके दोनों पैरों के बीच में हाथ डाला पर उसकी मोटी मोटी जाँघों के कारण मेरा हाथ नहीं जा पा रहा था। तो उसने अपने आप ही साड़ी को उठा लिया। अब मुझे लगा कि उसकी क्लिटोरिस और वैजाइना को छूना आसान होगा।

मैंने उसके अंडरवियर में अपना हाथ डाला तो मैदान बिल्कुल साफ़ था उसके वैजाइनल एरिया में एक भी बाल नहीं था जैसे कि उसने आज ही सफ़ाई की हो। मैंने बड़ा प्रयत्न किया कि उसकी चूत में उँगली डालू पर उसके मोटापे की वजह से ये संभव न हो सका पर इतना तो मुझे छूने पर मालूम हुआ कि वो एक बार तो झड़ गई है।

फिर मैंने उसके दोनों बूब्स को ही पकड़ लिया। अब मेरे दोनों हाथ पीछे से पकड़े हुए थे इसलिए मुझे उसके बूब्स पकड़ने में मज़ा आ रहा था और उसको भी। क्योंकि मेरे उसके पीछे से उसके बूब्स को मसलने के कारण वो मेरे लंड ज़ोरों से मुँह में ले रही थी। अबकी बार वो धीरे-धीरे करके मेरे पूरा लंड मुँह में समा रही थी, मैं महसूस कर रहा था कि मेरा लंड उसके गले तक जा रहा है।

उसके मुँह के रस से मेरा अंडरवियर भी गीला होता जा रहा था। उसका एक हाथ लंड के एंड पर था और दूसरे से वो मेरे बॉल्स को प्ले कर रही थी। उसके मुँह के रस ने मेरे लंड के नीचे के बॉल्स को भी गीला कर दिया था। अब मेरे उसके चूत को छूने से और ज़ोरों से बूब्स को मसलने कारण बहुत गर्म हो गई थी, यहाँ मेरी भी हालत ऐसी थी।

वो लंड को ऊपर से नीचे तक चूसने के साथ-साथ अब अपने हाथ से भी लंड को मास्टरबेट कर रही थी। मेरे प्री कम बाहर निकला तो उसने उसके टेस्ट किया तो वो और भी ज़ोरों से लंड को चूसने लगी मुझे पता चल गया कि ये मेरा सीमेन को निगलना चाहती है। अब मेरा भी हाल बुरा था मैं भी नीचे से हिल हिल कर मेरे लंड को उसके मुँह में धक्के देता जा रहा था।

मुझे जब लगा कि मैं अब झड़ जाऊँगा तो मैंने उसको कहा कि मेरा निकलने वाला है तो उसका चूसने का तरीका ही बदल गया। अब वो मेरे लंड को अपने मुँह में और होंठों से दबा दबा कर चूसने लगी। मैं भी नीचे से उसके बालों को पकड़ के धक्के मार रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी तो उसने अपने आप को स्टेडी कर लिया और सिर्फ़ मेरे लंड को दोनों हाथों से नीचे से पकड़ के रखा ताकि मेरा लंड इस उछल कूद में बाहर न आ जाए। मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और मेरा सीमेन सीधा ही उसके गले में पिचकारी छूटी।

बस मैंने वो लास्ट धक्का दिया और अपने लंड को उसका सिर पकड़ के उसके गले में ही सटा दिया। १-२ मिनट के बाद मैंने उसको छोड़ दिया तो वो रिलैक्स हो गई, उसने मेरे लंड को मुँह में ही रखा और ऐसे चूसने लगी जैसे नींबू का रस चूसा जाता है। मेरे छोड़ देने के बावजूद उसने न तो मेरा लंड छोड़ा न ही मुँह निकाला।

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वो मेरे लंड का रस पान कर रही थी। एक तरफ़ सीमेन निकल जाने के बाद भी मेरा लंड चूसाने के कारण मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी करंट दौड़ रही थी, और मेरे लंड सख्त ही खड़ा था। ५ मिनट तक वो लंड को चूसती रही उसके बाद उसने मेरे लंड को मुँह से निकाला। फिर वो चाटने लगी तब तक जब तक मेरा लंड पूरा साफ़ नहीं हुआ।

अब वो उसकी मुँह के रस से तरबतर हुए मेरे लंड को पकड़ के अपने बूब्स की ओर ली और दोनों बूब्स के बीच रख दिया। मैंने अब मेरे हाथ से लंड के एंड को पकड़ लिया तो उसने मेरे लंड को अपने दोनों बूब्स के बीच रख कर बूब्स से लंड को हिलाने लगी। मेरे लिए ये १st एक्सपीरियंस था, मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।

मैंने देखा तो मेरा लंड उसके बूब्स के अंदर तो जाता दिखाई देता था पर उसके बड़े बूब्स के पार नहीं निकलता था। उसके इतने बड़े-बड़े जो थे। वो अपने दोनों बूब्स की क्लिवेज में बार-बार अपना थूक गिराए जा रही थी जिसके कारण मेरा लंड दोनों बूब्स के बीच बड़े मज़े से सैर कर रहा था। मेरा लंड एक बार फिर खड़ा हो गया।

अब करे तो भी क्या करे, बस की छोटी सीट के कारण हम चुदाई भी नहीं कर सकते थे। मैंने उसको फिर से चूसने को कहा तो वो बोली मेरी कमर लंड चूसाते चूसाते अकड़ गई है, सर अभी मैं इसे मुँह में नहीं ले पाऊँगी। उसने थोड़ी देर तक मेरे लंड को अपने बड़े बूब्स के बीच सैर करवाई, पर कमर की अकड़न की वजह से अब वो सीधी हो गई।

उसने अपने ब्लाउज़ के हुक को बंद करना शुरू किया तो मैंने उसका एक हाथ पकड़ लिया और मेरा लंड उसके हाथ में थमा दिया, मैंने कहा इसका कुछ रास्ता करो तो वो हँस पड़ी और मुझे कहा, सर आपको इसी लिए बोल रही थी ना कि भूखा नहीं रहना चाहिए। चलो अब तो मैं हूँ आपको कभी भूखा नहीं रखूँगी। पर मुझे ब्लाउज़ तो बंद कर लेने दीजिए।

मैंने फौरन कहा कि मुझे इस से खेलना है। वो मुस्कुराई और कहा मैं आपको और कहीं जगह पे खेलने का मौका देती हूँ। फिर अपना राइट लेग उसने उठाया और सीट के ऊपर रख दिया, अपनी साड़ी भी उसने अब पूरी ऊपर तक चढ़ा ली। मेरी तरफ़ देख के उसने अपनी चूत की ओर इशारा किया।

मेरे नज़दीक आके बोली सर अब थोड़ा मज़ा इसके साथ भी लो, ऐसा बोलके वो मेरे करीब आ गई। मैं भी थोड़ा टर्न हो के उसकी ओर मुड़ा। ऐसी पोज़ीशन के कारण मेरा लंड वो आराम से पकड़ सकती थी और मैं भी उसके चूत के साथ खेल सकता था। मोना ने अपनी उँगलियों पर थोड़ा थूक लिया और मेरे लंड पर लगाया।

मेरा डिक हेड अब थोड़ा मोटा हो गया था। मैंने उसके चूत के साथ खेलना शुरू किया। उसकी मोटी मोटी जाँघों के बीच फूली हुई चूत को मैं उसके अंडरवियर के ऊपर से ही सहला रहा था वो मेरे लंड को पकड़ के हिला रही थी। साथ-साथ वो सीसकारियाँ भी ले रही थी।

मैंने कहा मोना अभी मैं ऊपर से ही खेल रहा हूँ और तुम्हारा ये हाल है अगर ये मैदान खुला होता तो तुम क्या करती। बीच में अंडरवियर भी तो है, तो वो आहें भरती बोली अगर बीच में आ रहा है तो फाड़ दो ना सर और मैदान खुला कर दो। मैं तो ये सुनकर दंग रह गया, आज तक मैंने इतनी उम्र की औरत के साथ कभी सेक्स नहीं किया था, पर मुझे मालूम नहीं था कि इस उम्र में भी लेडीज़ इतनी हॉट हो सकती हैं।

मैंने उसके अंडरवियर को कहाँ फाड़ दिया जाए ये सोचने लगा। अंधेरे की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था सिर्फ़ अंदाज़ा लगा कर ही करना था। मैंने उसकी अंडरवियर को टटोलना शुरू किया और पाया कि उसकी बीच की जगह पर छोटा सा छेद मेरी उँगली को महसूस हुआ।

अब मैं चूत को सहलाना का छोड़ कर वो छेद को बड़ा करने की ओर लग पड़ा था। इस तरफ़ मोना मेरा लंड से खेल रही थी कभी पकड़ कर हिला रही थी तो कभी हल्के हाथों से सहला रही थी। तभी मेरा प्रयत्न सफल हुआ और उसकी अंडरवियर का छेद मेरी उँगली जाए इतना हो गया मैंने ज़ोर से मेरी उँगली उसमें घुसेड़ी तो उसकी गीली हुई चूत में ही सीधी चली गई।

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वो उँगली के जाते ही एक झटका खा गई। मैं भी पूरी ताकत लगा कर उँगली को अंदर घुसेड़ दिया और उँगली को अंदर रखके ही मेरी उँगली गोल गोल घुमाने लगा। अब उसकी आवाज़ थोड़ी तेज़ हो गई थी। मैं भी उँगली अंदर बाहर करने लगा तो वो बहुत जोश में आ गई। मेरे लंड को टाइट पकड़ के ऊपर नीचे करने लगी।

अब मैंने उँगली चूत में से निकाली और उसके क्लिटोरिस को सहलाने लगा। अस उसल उसके सब अंगों की तरह वो भी बड़ी और मोटी थी। मैंने क्लिटोरिस को पकड़ के ज़ोर से मसल दिया। वो उछल ही पड़ी उसके हाथ से मेरा लंड छूट गया। मैं तो पागल हो उठा था उसकी बड़ी क्लिट को मसलाता ही गया वो अपने उफ़ान में थी तुरंत मैंने अपनी दो उँगलियाँ एक साथ उसकी चूत में डालनी चाही पर पता नहीं जा न पाई मैंने फिर ज़ोर लगाया और दोनों उँगलियों को घुसेड़ दिया।

उसकी चूत में से थोड़ा गीलापन आते ही अब मैं आराम से दोनों उँगलियों को अन्दर बाहर करके झटके देने लगा। उसने भी मेरा लंड अब पकड़ लिया और अपनी चूत की ओर खींचने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था उसकी ये हालत देख कर। करीब ३ मिनट के बाद वो झड़ गई और मेरे हाथ उसकी वैजाइनल फ्लूइड से भर गया।

मैं भी अब उफ़ान पर था मैंने मेरा गीला हाथ मेरे लंड पर लगा दिया, उसकी चिकनाहट भरे फ्लूइड से मेरा लंड भी ख़ुश हो गया, अब वो बड़े स्पीड में लंड को हिला रही थी और वैजाइनल फ्लूइड की वजह से मुझे भी मज़ा आ रहा था तभी मेरा सीमेन झटके से छूटा और सीधा उसके जाँघों पर गिरा।

मेरा सीमेन निकलने के बाद उसने ७-८ और झटके मेरे लंड को दिए। फिर मेरा लंड छोड़ कर मेरा सीमेन जो कि उसकी जाँघों पर गिरा था उसने अपने हाथ में लिया और उसने मेरे सामने ही मेरा सीमेन उसकी चूत के अंदर लगा दिया। अब हम दोनों थकान महसूस कर रहे थे, मैंने देखा तो उसके मुँह पर एक अजीब सा सुकून था।

क्यों ये नहीं पता (बाद में उसने बताया था, but its later on)। तब मोना ने अपनी कॉटन के हैंकी से मेरा लंड साफ़ किया बाद में अपने को भी और वो हैंकी उसने खिड़की में से बाहर फेंक दी। उसने मेरे लंड की वापस अंडरवियर में रखा और मेरे पैंट की ज़िप बंद कर दी, फिर अपने आप को भी सही किया।

पानी की बोतल ली और खिड़की से बाहर अपने हाथों को साफ़ किया फिर उसी गीले हाथों से मेरे हाथ भी साफ़ किए। मैंने अपने मोबाइल में देखा तो अभी हमारे स्टेशन तक पहुँचने में डेढ़ घंटा बाकी था और मोबाइल फिर से स्विच ऑफ़ कर दिया क्योंकि वैसे भी जंगल में सिग्नल नहीं आते थे।

अब मैं थोड़ा थक गया था, ज़िंदगी में पहली बार मुझे पता चला कि अगर कोई सेक्स का अच्छा साथी हो तो सफ़र में वाकई मज़ा आता है और चूत को चोदे बिना भी इतनी मस्ती ली जा सकती है। मैंने मोना से कहा कि वो पानी की बोतल दो तो, उसने बोतल मेरे हाथ में दे दी।

मैंने देखा तो जो कुछ भी पानी बचा था वो हाथ को साफ़ करने में ही चला गया। मेरा गला सूख जा रहा था, और इस रास्ते में पानी भी कहाँ मिलेगा। ये सोच कर मैं मचल गया थोड़ा गुस्सा भी हो गया। मैंने मोना को बोला देखो तुमने सारा पानी हाथ धोने में खर्च कर दिया अब मुझे प्यास लगी है तो पानी कहाँ से लाऊँगा। मेरा तो गला सूख जा रहा है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो थोड़ा उदास हो गई, उसको उसके किए पर शर्मिंदगी होने लगी। पर 1 मिनट के बाद उसने पूछा सर आपको बहुत प्यास लगी है। तो मैंने धीरे से कहा हाँ देखो मेरा गला सूख जा रहा है। और अब मेरे में स्टैमिना भी कम हो गया है। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने पास थोड़ा खींचा, मुझे लगा कि वो कुछ कहना चाहती है।

मैं उसके करीब गया तो उसने मेरा हाथ अपने बूब्स पर रखा और कहा “दूध से काम चलेगा सर, शायद आपकी प्यास भी मिट जाए और स्टैमिना भी वापस आ जाए। अभी तो आपको बहुत काम करना है, हमको रात को वापस भी तो लौटना है ना।” मैं कुछ न बोला तो वो मेरी चुप्पी में समझ गई और उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी गोद में ले लिया।

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वैसे भी पीछे की पूरी सीट लंबी थी और कोई नहीं था। तो मैंने अपने आप को सीधा सीट पर लिटा दिया और मेरा सिर उसकी गोद में था। अब उसने मेरे बालों में हाथ फेरा और अपनी उँगली मेरे मुँह में डाल दी। मैं तो फिर मस्ती में आ गया। उसकी उँगली चूसता रहा फिर मैंने अपने दोनों हाथ उसके हरे भरे बड़े बूब्स पर रख दिए और सहलाने लगा।

मैं ये महसूस कर रहा था कि मेरे छूते ही उसके बूब्स थोड़े टाइट हो गए थे और निप्पल्स भी उठ खड़ी हुई थी। मैंने सोते सोते ही उसके ब्लाउज़ के नीचे के तीन हुक खोलना चाहा तो तीनों टूट गए। अब उसके दोनों बूब्स को नीचे से बाहर आने को जैसे तड़प रही थी। मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था।

तो थोड़ी देर बाद उसने अपने दूसरे हाथ से अपना ब्लाउज़ राइट साइड से ऊपर कर लिया तो उसका राइट बूब उछल कर बाहर आ गया। मैंने तो भूखे बच्चे की तरह लपटा और उसके बूब की निप्पल मुँह में लेने लगा। मैं सीधा लेटा हुआ था इसलिए निप्पल सीधी मेरे मुँह में नहीं आ रही थी, मुझे थोड़ा अपना सिर ऊँचा करना पड़ता था।

तब उसने अपने राइट हैंड से अपने बूब को पकड़ा और नीचे की तरफ़ झुका दिया जिससे उसकी निप्पल आसानी से मेरे मुँह में आ गई। मैंने अपने लेफ्ट हैंड से लेफ्ट साइड से भी ब्लाउज़ को ऊपर कर दिया और उसके लेफ्ट बूब को नीचे से ही पकड़ कर मसलने लगा मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

मैंने उसको पूछा तो उसने भी बताया कि उसे भी मज़ा आ रहा है। मैं बड़े ज़ोरों से उसकी बूब को चूसाने लगा, कहीं निप्पल को मुँह में लेकर चूसता तो कभी एरिओला को मेरी जीभ से स्लर्प्ट करता। उसने अपना लेफ्ट हैंड मेरे सिर के नीचे लेकर मुझे अपने बूब में दबा दिया और बोली खा जाओ आज इसे पूरा का पूरा चबा जाओ।

हम लोग ऐसे ही मज़े ले रहे थे। तभी मैंने उसके दूध को उसकी निप्पल चूस चूस के मुँह में इकट्ठा किया और अपना हाथ ऊपर ले जाकर उसके सिर को मेरी ओर झुकाया, वो समझी कि मैं किस करना चाहता हूँ तो उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मेरे होंठों को चूमने लगी तभी मैंने अपने मुँह में भरे उसके दूध को उसके मुँह में डाल दिया वो उसको पी गई।

फिर हमने बड़े ज़ोरदार किस किया कब तक एक दूसरे के होंठों को चूसाते रहे कभी कभी जीभ भी चाटते थे। कई बार मैंने उसके होंठों को काट लिया क्योंकि उसके होंठ मोटे और बड़े थे जो मुझे बड़े पसंद थे। करीब करीब 7-8मिनट बाद मैं फिर से नीचे की तरफ़ गया और अब उसके लेफ्ट बूब को चूसाने लगा, जो कि उसके राइट बूब से भी बड़ा था।

जब थोड़ी देर मैं उसके लेफ्ट बूब को चूसाता रहा तो बाद में उसने मेरी टी-शर्ट के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसे ऊपर कर दिया। अपना राइट हैंड वो मेरे चेस्ट के बालों पर सहला रही थी। उसका राइट बूब मेरे सीने को छू रहा था और मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर उसने अपने राइट बूब की निप्पल मेरे सीने से सटा दिया और ज़ोर ज़ोर से अपने राइट बूब को दबाने लगी। उसके ऐसा करने से उसके राइट बूब से दूध निकल कर मेरे सीने पर गिरने लगा तो उसने अब वो दूध को मेरे सीने पर मलाना शुरू कर दिया। बाद में उसका हाथ मेरे एब्डोमेन पर लगा दिया और वहाँ भी दूध को मलाने लगी।

मुझे एक तरफ़ उसके निप्पल से दूध चूसाने में मज़ा आ रहा था तो दूसरी तरफ़ उसकी इस हरकत से। वो उसका हाथ मेरे सीने और एब्डोमेन पर सहला रही थी। मेरे उसकी गोद में सिर रखके लेटने की वजह से मेरा एब्डोमेन थोड़ा अंदर चला गया था और मेरा पैंट भी थोड़ा लूज़ हो गया था।

वो अपना हाथ चेस्ट और एब्डोमेन पर सहलाते सहलाते मेरे पैंट की लाइन पर चली गई तो मेरे लंड में फिर हलचल शुरू हो गई। उसने धीरे से हाथ अब मेरे पैंट में घुसाने का प्रयत्न किया। लेकिन बड़े अनोखे अंदाज़ में, वो चेस्ट से अपना हाथ सहलाते सहलाते मेरे एब्डोमेन पर पहुँचती फिर मेरे पैंट की ओर थोड़ा बढ़ के रुक जाती और वो फिर से मेरे चेस्ट पर वापस आ जाती।

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धीरे धीरे ऐसा करते वो मेरे अंडरवियर के अंदर तक पहुँच गई और मेरे लंड को नहीं छूते उसने उसके आस पास में हाथ से सहलाना शुरू किया। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। तो उसने मेरे पैंट का हुक खोल दिया और लंड को अंडरवियर से बाहर खींच लिया। आगे की सीट्स के बीच मेरे बड़े बैग्स पड़े थे इसलिए आगे किसी को कुछ दिखाई देने की टेंशन नहीं थी।

मुझे पता चल गया कि वो अब गर्म हो गई थी। उसने अपने मुँह में से थोड़ा थूक लिया और अपनी ही राइट बूब के निप्पल और उसके आस पास रगड़ने लगी। उसके ऐसा रगड़ने उसकी निप्पल और बड़ी हो गई। उसने अपनी निप्पल के नीचे अपना हाथ रखा और मुझे कहा कि मेरा बूब ज़ोर से दबाओ।

मैं भी मौज में आ गया और ज़ोर ज़ोर से उसका राइट बूब दबाने लगा। जब उसका पूरा हाथ दूध से भर गया तो उसने वो दूध मेरे लंड पर डाला फिर मेरे लंड को मसलने लगी। मुझे भी और मज़ा आने लगा अब उसका दूध मेरे मुँह से लेकर मेरे लंड तक पहुँच चुका था। तकरीबन उसके बाद 6-7मिनट तक वो मेरे लंड को मसलती रही और मैं उसके दूध को पीता रहा।

तभी मैंने खिड़की के बाहर थोड़ा रोशनी का नज़ारा देखा, मैंने उसको कहा मोना देखो तो, लगता है अब सिटी नज़दीक में है। तो उसने खिड़की में से देखा तो कहा कि हाँ लगता है सिटी बहुत दूर नहीं है। अब हम जंगल से बाहर आ रहे हैं। मेरी प्यास भी बुझ चुकी थी और उसके दूध से मेरा स्टैमिना भी वापस आ गया था।

मैं अपने आप को संभाल के सीधा बैठ गया और मोना ने भी अपने बूब्स को ब्लाउज़ के नीचे डाल दिया पर वो जाते भी कैसे उसके नीचे के तीन हुक जो मैं तोड़ चुका था। मैंने उसको थोड़ा हेल्प किया और उसके बूब्स को बड़े प्रेशर से ब्लाउज़ में घुसा दिया अब वो रिलैक्स थी।

तभी मैंने उसका हाथ पकड़ कर मेरे उठे लंड पर रख दिया तो वो हँस पड़ी और कहा सारा का सारा माल बस में ही निकाल देना है, मेरे लिए भी तो छोड़ो सर। मैं भी हँस पड़ा और फिर उसको एक बार मेरे लंड मुँह में लेने के लिए कहा तो वो मान गई और नीचे झुक कर मेरा लंड मुँह में ले लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

थोड़ी देर में जब सिटी की लाइट्स दिखने लगी तो मैंने कहा मोना अब सिटी आ गई है खड़ी हो जाइए। तो वो शरारत के मूड में थी और मेरे लंड पर अपने दाँत से काट लिया मैं तो हक्का बक्का रह गया, और फिर पूरा का पूरा लंड एंड तक मुँह में लिया और बाहर निकाला। फिर अपने हाथ से हिलाने लगी तब तक जब तक उसके मुँह का रस मेरे लंड पर से सूख न गया।

मैंने पूछा ऐसा काटा क्यों, तो बोली अभी काम करना है ना तो ये राजा साब फिर से जाग न जाए इसलिए उनको २ घंटे के लिए सुला दिया, सच मच उसके ज़ोर से काटने के बाद मेरे लंड ढीला हो गया तो उसने बड़े प्यार से उसको मेरे अंडरवियर में डाला और फिर मेरे पैंट की ज़िप बंद कर दी और बोली अब ध्यान धंधे में लगाइए अभी बहुत टाइम है। और हमारी बस सिटी बस स्टैंड में दाखिल हुई।

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बस जैसे ही सिटी बस स्टैंड में रुकी, हम दोनों उतरे। बाहर अभी भी ठंड थी, लेकिन हमारे बदन में आग लगी हुई थी। मैंने तीनों बैग उठाए और मोना मेरे साथ-साथ चल रही थी। उसने अपनी साड़ी ठीक कर ली थी, लेकिन ब्लाउज़ के टूटे हुक की वजह से उसके बूब्स हर कदम पर हिल रहे थे। मैंने उसे देखकर मुस्कुराया तो वो शरमाते हुए बोली, “सर, अब घर पहुँचकर ही आराम से खेलिएगा… यहाँ लोग देख रहे हैं।”

क्लाइंट का घर बस स्टैंड से करीब 15मिनट की दूरी पर था। हम रिक्शा लिए और वहाँ पहुँचे। डीलिंग जल्दी निपट गई – ऑर्डर कन्फर्म हुआ, पेमेंट भी आधा एडवांस मिल गया। क्लाइंट ने चाय-नाश्ता करवाया, लेकिन मेरा मन सिर्फ़ मोना पर था। वो भी बार-बार मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुरा रही थी।

वापसी की बस शाम 7 बजे की थी। हम स्टैंड पहुँचे तो पता चला कि अगली बस 9 बजे की है। मैंने मोना की तरफ़ देखा और बोला, “अब क्या करें?” वो शरमाते हुए बोली, “सर… अगर आप कहें तो मेरी एक सहेली यहीं पास में रहती है। उसके घर चलें? वहाँ आराम से बैठेंगे… और…” उसकी आँखों में वही शरारत थी जो बस में थी।

हम उसकी सहेली के घर पहुँचे। सहेली अकेली थी, उसने हमें अंदर बुलाया और चाय दी। थोड़ी देर बातें हुईं फिर वो बोली कि उसे बाज़ार जाना है, 2-3 घंटे लगेंगे। दरवाज़ा बंद करके चली गई और चाबी मोना को दे गई। दरवाज़ा बंद होते ही मोना मेरे गले लग गई।

“सर… अब तो कोई नहीं देख रहा… अब अपनी मोना को पूरा प्यार दो ना…”

मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया। साड़ी खींचकर फेंकी, ब्लाउज़ तो पहले से ही टूटा हुआ था – एक झटके में फाड़ दिया। उसके बड़े-बड़े बूब्स आज़ाद होकर उछल पड़े। मैंने दोनों को मुँह से दबोच लिया, दूध की धार निकल रही थी। वो सिसकारियाँ ले रही थी – “आह्ह… सर… चूसो… पूरा पी लो… आज से ये दूध सिर्फ़ आपका है…”

मैंने उसे बेड पर लिटाया, पेटीकोट ऊपर किया तो पैंटी पहले से ही फटी हुई थी। उसकी चूत एकदम साफ़, गुलाबी और गीली थी। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया तो वो कमर उछालने लगी – “सर… बस में तो सिर्फ़ उँगलियाँ डाली थीं… अब पूरा मुँह डालो ना… फाड़ दो मेरी चूत को…”

मैंने उसकी दोनों जाँघें चौड़ी कीं और जीभ अंदर तक घुसेड़ दी। वो पागलों की तरह चिल्ला रही थी – “हाय… मर गई… सर… आप अच्छा चाटते हो… आह्ह्ह… और ज़ोर से…” फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो देखकर डर गई – “सर… इतना मोटा… मेरी तो फट जाएगी…” मैंने उसकी चूत पर लंड रगड़ा, टॉप को अंदर धकेला तो वो चीख पड़ी – “धीरे सर… बहुत साल बाद कोई मेरे अंदर आ रहा है…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लगा जैसे पहली बार चोद रहा हूँ। वो आँखें बंद करके काट रही थी – “आह्ह… फाड़ दी… पूरी फट गई मेरी चूत… लेकिन मज़ा… ओह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है सर…”

मैंने स्पीड बढ़ाई – धक-धक-धक… कमरा फच-फच की आवाज़ों से गूँज रहा था। वो नीचे से कमर उछाल-उछाल कर साथ दे रही थी – “और ज़ोर से सर… आज अपनी मोना को रंडी बना दो… रोज़ चोदना मुझे… आपका लंड ही मेरी ज़िंदगी है अब…”

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मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से पेलना शुरू किया। उसके बट्स इतने बड़े थे कि हर धक्के में लंड पूरा गायब हो जाता था। वो चिल्ला रही थी – “हाँ… ऐसे ही… गाँड मारो मेरी… चूत और गाँड दोनों आपकी… आज से मैं आपकी रखैल हूँ सर…” आखिर मैं झड़ने वाला था। उसने कहा – “अंदर ही डाल दो सर… गोली खा लूँगी… आपका माल मेरी कोख में चाहिए…” मैंने ज़ोर का झटका मारा और उसकी चूत में पूरा माल उड़ेल दिया। वो भी साथ ही झड़ गई – उसकी चूत से पानी और मेरा वीर्य मिलकर बेडशीट भीग गई।

हम दोनों नंगे ही लिपटकर लेटे रहे। उसने मेरे सीने पर सर रखा और बोली – “सर… आज आपने मुझे औरत होने का सही मतलब समझाया… अब रोज़ आपकी सेवा करूँगी… चूत भी, बूब्स भी, गाँड भी… सब आपका है…” रात ९ बजे हम वापस बस में चढ़े। पूरी रात उसने मेरे लंड को सहलाया, मैंने उसके बूब्स दबाए। सुबह घर पहुँचे तो उसने कहा – “सर… आज से आपका खाना, आपका ऑफिस और आपकी चूत… तीनों मैं संभालूँगी…” और सच में… उसके बाद की हर रात… वो मेरे बिस्तर पर ही सोती थी।

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