Sexy Bhabhi Porn
हमारे इलाके में एक भाभी रहने के लिए आई। क्या माल थी वो! ऊँचाई लगभग ५’७″, गेहुँआ रंग, भरा-पूरा सुडौल बदन, तीखे नैन-नक्श। वो इतनी कामुक और आकर्षक थी कि देखते ही मन डोल जाता। उसकी गांड तो मानो रुई से भरी हुई थी—पूरी फूली हुई। फिगर लगभग ३४-२८-३६ का होगा। Sexy Bhabhi Porn
जब वो मटक-मटक कर चलती तो नुक्कड़ के सारे लड़के आहें भरते और सबके लौड़े में सनसनी दौड़ जाती। उसका नाम था जूली। सब उसे अंजू बुलाते थे। उसकी एक बेटी थी, चार-पाँच साल की। पति भी था—संतोष भाई—जो खुद को अंबानी से कम नहीं समझता था। प्लान तो उसके भी हाथी की गांड मारने के थे, मगर भोसड़ी के की औकात झांट भर भी नहीं थी।
मेरे बारे में बता दूँ—मैं छः फुट का हूँ, लुक्स में औसत, लेकिन टर्नआउट स्मार्ट और स्टाइलिश। एक्सरसाइज की वजह से बॉडी फिट है, कट्स भी हैं। मेरा लंड करीब सात इंच का है। अपने ग्रुप में मैं सबसे छोटा हूँ, बाकी सब बड़े हैं। एक शाम की बात है, अमित भैया मुझसे बोले, “दीपेश, लगता है अंजू तुझे लाइन दे रही है।”
मैंने ध्यान दिया तो सच में वो मुझे घूरती थी। बस स्टॉप पर बेटी के लिए खड़ी होती तो होंठों पर जीभ फेरती, आँखों से इशारे करती और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराती। हमेशा लो-कट या स्लीवलेस ब्लाउज पहनती। मेरे पास झुककर मुझे अपने गहरे गले के दर्शन देती।
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उसकी गली देखकर तो मेरा बंबू तंबू में खड़ा हो जाता। एक दिन वो गांड मटकाते हुए बेटी के साथ जा रही थी। मैं पीछे-पीछे चल पड़ा और पास पहुँचकर बोला, “भाभी, संतोष भाई घर पर हैं क्या?” वो अदा से बोली, “नहीं।” मैं उसकी बेटी के साथ खेलते हुए उसकी बिल्डिंग तक पहुँच गया।
वो सीढ़ियाँ चढ़ रही थी, मैंने हाथ उसकी गांड पर रखा और चुटकी काटी। उसने पीछे मुड़कर देखा, मुस्कुराई और बोली, “कल मिलना, दस बजे पार्क चलेंगे।” रात भर मैं उसके बारे में सोचता रहा और दो बार मुठ मारी। सुबह स्टेशन पर दस बजे मिले।
मैंने उसे अपनी मोटरबाइक पर बिठाया। वो सेक्सी परफ्यूम लगाकर आई थी। आज तो एकदम माल लग रही थी—नीली शिफॉन साड़ी, नीला स्लीवलेस लो-कट ब्लाउज, नीले झुमके, नीली बिंदी और मैचिंग सैंडल। मन कर रहा था अभी लंड निकालकर उसकी गांड में ठूँक दूँ और मुँह पर अपना चीक गिरा दूँ। वो मुझसे चिपककर बैठी और अपने मम्मे मेरी पीठ में गड़ा रही थी। पार्क पहुँचकर हम पैदल चलने लगे।
मैंने कहा, “अंजू, तुम बहुत सेक्सी लगती हो।” वो मुस्कुराई और बोली, “तुम भी बहुत स्मार्ट हो।”
मैं: थैंक्स। तुम्हें मैं पसंद हूँ अंजू?
अंजू: बेवकूफ, अगर पसंद न होते तो तुम्हारे साथ पार्क में क्यों आती?
मैं: अंजू, तुम बहुत खूबसूरत हो।
अंजू मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और मेरे बालों में हाथ फेरने लगी।
अंजू: तुम्हें मेरी कौन-सी चीज सबसे पसंद है?
मैं: सब कुछ, पर सबसे बेस्ट तुम्हारी बैकसाइड।
अंजू: ठीक से बताओ न जानू।
मैं: तुम्हारी गांड अंजू, मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। जब तुम मटककर चलती हो तो क्या हिलती है, मन करता है तुमसे वो सब कर दूँ।
तब तक हम एक सुनसान जगह पर पहुँच चुके थे। मैंने अंजू की कमर में हाथ डाला और कहा, “क्या तुम अपनी शादी से खुश हो?” अंजू ने मेरा कंधा सिर रखकर कहा, “संतोष न मेरी परवाह करता है न मेरी जरूरत पूरी करता है। उसका तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता।
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साला मादरचोद दो मिनट में ही झड़ जाता है और गांड उठाकर सो जाता है। इसलिए तो मैं नया यार ढूँढ रही थी और नसीब से तुम मिल गए। बताओ न जानू, तुम मेरे साथ क्या-क्या करना चाहते हो और मुझे किस तरह संतुष्ट करोगे?” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “रानी, बस देखती जाओ।”
अंजू: तो दिखाओ न अपना केला।
मैं: कौन-सा केला?
वो: वही जो तुम्हारी टाँगों के बीच उगा है।
मैं: ठीक से नाम लो तो दर्शन दूँगा।
वो शरमाई, मुझसे लिपट गई और कान में फुसफुसाई, “दिखाओ न जानू अपना हथौड़ा… अपना लौड़ा।”
मैं: ठीक है, पर तुम इसका क्या करोगी?
वो शरारत से आँखें मटकाकर बोली, “बस देखते जाओ मेरे राजा।”
मैं: रानी, खुद ही निकाल लो न बाहर।
वो हँसी और मेरी जीन्स का बेल्ट खोलने लगी। मैंने अंदर अंडरवियर नहीं पहना था। वो बेल्ट निकालकर बटन खोल दी और मुँह से मेरे लंड को टटोलकर बाहर निकालने लगी। साथ में मुँह से आवाज निकालती—म्म्म्म्म्म। “कितना बड़ा और मोटा है तुम्हारा जान! मुझे जन्नत में पहुँचा दो… म्म्म्म्म।”
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उसकी मोअन्स सुनकर मेरा पूरा खड़ा हो गया। वो मेरे लंड को बाहर निकालकर हँसने लगी। फिर चॉको-बार की तरह चूसने लगी। जीभ से रगड़ने लगी, साथ में आवाज—म्म्म्म्म, यम्मी। मुझे बहुत मजा आने लगा। मैंने उसके मुलायम रेशमी बाल पकड़े और धक्के देने लगा—आआह्ह्ह अंजूओओओ… क्या चूसती हो!
वो बोली, “आज मैं तुम्हें नया मजा दूँगी” और जीभ से मेरे सुपाड़े का छेद चाटने लगी। टोपी के पीछे की रिंग और उसके परिधि पर चाटती रही। मुझे स्वर्ग सा लग रहा था। मैं उसके मम्मे दबा रहा था, कंधों को मालिश कर रहा था। उसने जीभ मेरे लंड के ऊपर-नीचे वाली साइड पर फिरानी शुरू की—मेरा उतेजना चरम पर था।
मैं चिल्लाया, “हाँ बेबी, हाँ… मजा आ रहा है। आज से तुमसे ही मुठ मरवाऊँगा, अपने हाथ से बंद!”
वो नशीली आँखों से देखकर बोली, “अब देखो।” उसने मेरे लंड की टोपी होंठों से पकड़ी और आगे-पीछे करने लगी जैसे लॉलीपॉप चूस रही हो। मैं पागल हो गया। लगा अभी झड़ जाऊँगा।
मैंने कहा, “रानी, चलो अब तुम्हारी बारी।”
वो मुस्कुराई। मैंने अपना लंड उसके मम्मों के ऊपरी हिस्से पर घुमाया, फिर घुमाते हुए उसकी गर्दन और मुँह पर। फिर कंधों से होते हुए बाँहों पर। उसकी चिकनी बेदाग काँख देखकर मजा आया। मैंने उसकी बाँहें ऊपर कराईं और लंड को उसकी चिकनी काँखों में रगड़ने लगा। उसे जबरदस्त उत्तेजना हो रही थी।
वो बोली, “हाँ राजा, ऐसे ही करो। मुझे यही अनकन्वेंशनल चीजें अच्छी लगती हैं।”
मैंने थोड़ा और रगड़ा फिर उसके मुँह पर लंड से थप्पड़ मारने लगा। वो होंठों से पकड़ने की कोशिश करती, मैं तड़पाता रहा। फिर मैंने उसका ब्लाउज खोला। ब्लाउज खुलते ही उसके ३४ इंच के बूब्स उछलकर बाहर आने को बेताब हो गए। मैंने ब्रा से बाहर निकाले और चारों तरफ लंड घुमाया। निप्पलों पर लंड से थप्पड़ मारे।
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वो चीख पड़ी, “उइई माँ… मेरे शेरू, तुम तो बड़े चंट हो!”
मैं: रानी, तुम भी तो बहुत बड़ी चुदासी सुहागन हो।
फिर मैंने ब्रा का हुक खोले बिना दोनों चुचियों को अंदर दबाया और लंड को हुक के नीचे से घुसाकर दोनों मम्मों को दबाकर धक्के देने लगा। उसे स्वर्गिक मजा आ रहा था। वो बोली, “वो मदरचोद बेवकूफ ऐसा कुछ नहीं करता। तुम कितने अच्छे हो। तुम्हारी बीवी कितनी खुशकिस्मत होगी। और जोर से… और जोर से… आउर्र्र डालोओओ!” वो चीख रही थी। फिर होंठ खोलकर जीभ बाहर निकालकर मेरे लंड को चाटने लगी। “और जोर से ठोको… चोदो मेरे मम्मों को… चोद चोद कर घोड़ा बना दो मम्मों के बीच!”
मैंने पूछा, “मैं छूटने वाला हूँ, कहाँ गिराऊँ?”
वो: मुँह में नहीं, मेरे मम्मों और नाभि में गिरा दो।
मैंने लंड बाहर निकाला, वो मेरे बॉल्स को प्यार से एक-एक करके चूसने लगी।
मैंने कहा, “अंजू, मैं तुम्हारी चुदाई करना चाहता हूँ।”
वो: यहाँ नहीं डार्लिंग, घर चलकर मेरे गुद का गुदगवान बना देना जान। बाहर मुझे अपना वीर्य चखने दो।
वो मेरे बॉल्स चूस रही थी। मैंने चिल्लाया, “मैं गयाआआआ…” वो लंड को किस करके मेरी गांड में उँगली डालकर आगे-पीछे करने लगी। मेरी हालत ऐसी हुई कि जबरदस्त पिचकारी उसके मम्मों और नाभि में गिराई। वो हँसते हुए अपनी उँगली चाटने लगी और लंड पर लगे स्पर्म को लिक करने लगी।
बोली, “तुम्हारा चीक कितना गाढ़ा और टेस्टी है। उनका तो लगता है पानी की मिलावट कर दी हो।”
फिर उसने मुझे साफ किया, अपनी नाभि को अंदर-बाहर करके सारा माल अपनी चूत में सरका दिया। मैंने जीन्स पहन ली। वो मेरे एब्स को चूम रही थी, चाट रही थी। मुझे गजब का मजा आया था।
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मैंने पूछा, “अंजू, संतुष्टि मिली?”
वो: हाँ सैयाँ… तुमने बिना छुए ही मेरी चड्ढी गीली कर दी। घर जाकर चूत में डालोगे तो पता नहीं क्या होगा, कहीं बाढ़ न आ जाए।
मैं हँस पड़ा। मैंने रुमाल से उसके मुँह, होंठ, काँख, मम्मे और नाभि साफ की। वो बोली, “थैंक यू जान” और मुझसे लिपट गई। “तुमने मुझे इतनी अच्छी तरह ट्रीट किया कि मैं अभी घर जाकर तुम्हारे लंड का रस पीना चाहती हूँ और अपनी गहराई में लेना चाहती हूँ।”
हम तैयार हुए, मैंने बाइक स्टार्ट की और उसके घर पहुँचे। घर में कोई नहीं था—बेटी स्कूल में, संतोष भाई ऑफिस में। दरवाजा बंद करते ही अंजू ने मुझे दीवार से सटा दिया और बेतरह किस करने लगी। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस रही थी। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा, फिर ब्लाउज के बटन खोले।
ब्रा में कैद उसके मम्मे बाहर उछले। मैंने ब्रा ऊपर सरकाई और एक मम्मा मुँह में लेकर चूसने लगा, दूसरे को दबाने लगा। वो सिसकारियाँ ले रही थी—आआह्ह्ह… जानू… चूसो… काटो मेरे निप्पल… मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया।
उसे बेड पर पटका और साड़ी ऊपर उठाकर पेटीकोट के अंदर हाथ डाला। उसकी पैंटी पूरी गीली थी। मैंने पैंटी उतारी—उसकी चूत एकदम चिकनी और गुलाबी थी, जैसे कभी बाल उगे ही न हों। रस टपक रहा था। मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं और जीभ से चूत चाटने लगा।
वो पागल हो गई—आआह्ह्ह… राजा… क्या कर रहे हो… मजा आ रहा है… और अंदर… जीभ अंदर डालो…
मैंने दो उँगलियाँ उसकी चूत में घुसाईं और जी-स्पॉट रगड़ने लगा। वो कमर उछाल रही थी। कुछ ही देर में वो झड़ गई—उसका रस मेरे मुँह पर छूटा। वो काँप रही थी। फिर वो उठी, मुझे लिटाया और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। अबकी बार पूरा गले तक ले रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसके बाल पकड़े और मुँह चोदा। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया। उसकी गांड देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे—वो चिल्लाई, “हाँ मारो… अपनी रंडी समझकर मारो…” मैंने लंड उसकी चूत पर रगड़ा और एक झटके में पूरा अंदर ठूँक दिया।
वो चीखी, “माँ मरीईईई… कितना मोटा है… फाड़ दी मेरी चूत…”
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मैंने धक्के शुरू किए। पहले धीरे-धीरे फिर तेज। कमरा हमारी चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था—चप-चप… आह्ह्ह… और तेज… चोदो मुझे… अपनी रखैल बना लो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… मैंने स्पीड बढ़ाई, उसके मम्मे पकड़कर खींचते हुए ठोका। वो फिर झड़ी। उसकी चूत ने मेरे लंड को इतना कसकर जकड़ा कि मैं भी नहीं रुका। मैंने कहा, “कहाँ डालूँ?”
वो: अंदर… अपनी रानी की कोख में भर दो… मुझे प्रेग्नेंट कर दो…
मैंने जोरदार झटके मारे और गहराई में सारा माल उड़ेल दिया। हम दोनों हाँफ रहे थे। वो मेरे सीने पर गिर पड़ी। हम नंगे ही लिपटकर लेटे रहे। उसने कहा, “आज तुमने मुझे वो सुख दिया जो शादी के बाद कभी नहीं मिला। अब मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ। जब मन करे, बुला लेना। संतोष को तो मैं कभी चूत नहीं दूँगी।”
मैंने उसे किस किया और कहा, “अंजू, तुम मेरी गुलाम बन गई हो। अब रोज चुदाई होगी।”
वो मुस्कुराई और बोली, “जितना चाहो चोदो अपने इस माल को।”
उस दिन के बाद हमारा सिलसिला चल पड़ा। जब भी मौका मिलता, मैं उसकी चूत और गांड दोनों मारता। कभी पार्क में, कभी उसके घर, कभी मेरे घर। वो मेरी परमानेंट रखैल बन गई। और संतोष भाई? वो आज भी खुद को अंबानी समझते हैं—बेचारे को पता भी नहीं कि उनकी बीवी की चूत में मेरा माल रोज तैरता है।
RK says
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