Pakistani Incest Porn
मैं बेहनचोद (बेशक ये मेरा असली नाम नहीं है) उम्र 19 साल, कराची पाकिस्तान से हूँ। पिछले एक साल से मैं देसी सेक्स स्टोरीज़ का दीवाना और नियमित पाठक हूँ। बहुत सोच-समझ कर मैंने फैसला किया है कि अपनी असली बहन की सेक्स कहानियाँ आप सबके साथ शेयर करूँ। यकीन मानिए ये बिल्कुल सच्ची कहानियाँ हैं, नाम बदल दिए हैं पर घटनाएँ 100% सच्ची हैं। Pakistani Incest Porn
तो शुरू करता हूँ। हमारा परिवार अमीर है, पापा बिजनेसमैन हैं, घर में हर सुविधा है। हम माता-पिता के पाँच बच्चे बच्चे हैं। मैं चौथे नंबर पर हूँ। मेरी तीन बड़ी बहनें हैं और एक छोटा भाई। सबसे बड़ी हसीना (29) दो साल पहले शादी हो चुकी है, दूसरी समीना (25) एमबीए कर रही है, तीसरी फरीना (23) एमबीबीएस कर रही है, मैं (19) बीबीए कर रहा हूँ और सबसे छोटा राजू (11) स्कूल में पढ़ता है।
ये कहानी समीना बाजी की है। वो परिवार की सबसे खूबसूरत लड़की हैं। सच कहूँ तो उन्हें याद करके ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। ये करीब दस महीने पुरानी बात है। समीना बाजी को इस्लामाबाद किसी जॉब इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। वो अकेले जाना चाहती थीं पर घरवालों ने मना कर दिया।
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अम्मी ने मुझे कहा कि बाजी के साथ जाऊँ। मैं तो खुशी-खुशी तैयार हो गया। पापा ने शलिमार एक्सप्रेस में कराची से लाहौर तक का रिजर्वेशन करा दिया और लाहौर से इस्लामाबाद बस पकड़नी थी। समीना बाजी और मैं शलिमार एक्सप्रेस में चढ़े। हमारे पास चार सीटों वाला स्लीपर कम्पार्टमेंट था।
कम्पार्टमेंट में हमारे अलावा कोई नहीं था। बाजी हैरान थीं कि कोई और नहीं है। जब ट्रेन लांढी स्टेशन पहुँची तो गार्ड आया और दो जवान लड़के हमारे कम्पार्टमेंट में छोड़ गया। बोला, “ये आपकी सीटें हैं।” समीना बाजी को देखते ही दोनों के चेहरे खिल उठे।
हमें पूरी तरह इग्नोर किया पर आपस में बाजी के बारे में बात करने लगे। एक ने दूसरे से कहा, “आज रात तो मजा आएगा, हम अपने बाकी चार दोस्तों से ज्यादा लकी हैं जो अगले कम्पार्टमेंट में हैं।” मुझे और शायद बाजी को भी समझते देर न लगी कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है।
साफ था कि वो रात में बाजी को चोदने का प्लान बना रहे थे। खैर ट्रेन लाहौर की ओर बढ़ी। थोड़ी देर बाद बाजी वॉशरूम गईं और जब लौटीं तो नाइटी पहने थीं और मुझे ऊपर वाली बर्थ पर सोने को कहा। मैं ऊपर चला गया। नाइटी में बाजी का 38D-24-36 फिगर और गोरा रंग देखकर दोनों लड़के तो स्तब्ध रह गए।
जैसे ही मैं ऊपर सोने गया, एक लड़के ने बाजी से पूछा, “आप तो सोएंगी नहीं ना?”
बाजी बोलीं, “नहीं, मुझे सफर में नींद नहीं आती।”
लड़का बोला, “अच्छा है, हमें भी नींद नहीं आती।” और दोनों चुप हो गए।
ऊपर से मैं साफ देख सकता था। हर थोड़ी देर में बाजी मुस्कुरा रही थीं। करीब एक घंटे बाद एक लड़के ने पूछा, “आपका भाई गहरी नींद में सो गया ना?”
बाजी बोलीं, “हाँ, वो जल्दी और गहरी नींद सो जाता है।”
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ये तो साफ सिग्नल था कि बाजी पूरी रात चुदाई के लिए तैयार हैं। बाजी उठीं और बोलीं, “एक्सक्यूज मी” और फिर वॉशरूम चली गईं, शायद चूत धोने और सुखाने।
एक लड़के ने दूसरे से कहा, “मुझे तो ये लड़की रंडी लग रही है।”
दूसरे ने कहा, “हमें शादी थोड़े ही करनी है, बस चोदो और जान छुड़ाओ।”
पहले ने कहा, “माल तो मस्त है, ये चूत तो सारे दोस्तों में बँटनी चाहिए।”
दूसरे ने कहा, “पहले हम दोनों पर तो राजी है।”
पहले ने कहा, “मेरे लिए तो पूरी तरह राजी है, नाइटी खोलकर चूत भी दिखा दी।”
बाजी वॉशरूम से लौटीं और बैठ गईं। एक लड़का (साकिब) उनके पास बैठ गया। उसने बाजी को फ्रेंच किस किया और बाजी ने भी बिना हिचक जवाब दिया। ट्रेन चल रही थी और साकिब का हाथ बाजी के बदन पर चल रहा था। उसने नाइटी खोल दी। बाजी बोलीं, “इसे तो बाहर भेजो ना।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
साकिब बोला, “इससे क्या फर्क पड़ता है, ये डिस्टर्ब नहीं करेगा।”
बाजी मान गईं और नाइटी उतर गई।
थोड़ा किस-टच करने के बाद साकिब ने पूछा, “तुम्हें कितने बच्चे हैं?”
बाजी बोलीं, “कोई नहीं।”
“शादी को कितना अरसा हुआ?”
“अभी शादी नहीं हुई।”
साकिब चौंका, “तो कुँवारी हो?”
बाजी बोलीं, “नहीं।”
साकिब बोला, “तो प्राइवेट चलती हो?”
बाजी बोलीं, “हाँ, कभी-कभी।”
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बातें करते-करते वो बाजी के नंगे बदन से खेल रहा था। फिर बोला, “मेरा दोस्त कह रहा था तुम रंडी हो, मैं मान नहीं रहा था। अच्छा हुआ तुम सच में रंडी निकलीं।”
बाजी बोलीं, “मेरे रंडी होने से तुझे क्या ऐतराज है?”
साकिब हँस पड़ा, “कुछ नहीं।”
बाजी बिलकुल नंगी थीं और जानती थीं कि उनका भाई देख रहा है। वो सीट से नीचे उतरीं, साकिब की पैंट की जिप खोली, लंड बाहर निकाला और चूसने लगीं। दूसरी सीट पर फैजान ने भी अपना लंड निकाल लिया और बाजी की पीठ देखकर मुठ मारने लगा। साकिब “आह्ह… आह्ह…” कर रहा था। फैजान ने बाजी की चूत में उँगली डाल दी। बाजी ने न सिर्फ विरोध नहीं किया बल्कि चूत और खोल दी।
अब बाजी साकिब का लंड चूस रही थीं और फैजान उँगली से चोद रहा था। बाजी की सिसकारियाँ निकल रही थीं। थोड़ी देर बाद साकिब कपड़े उतारने लगा तो बाजी बोलीं, “दरवाजा तो अंदर से बंद कर दो।” साकिब ने दरवाजा बंद किया। बाजी सीट पर लेट गईं और साकिब उनके ऊपर चढ़ गया। दोनों हाथ बाजी के मम्मों में और लंड चूत में घुस चुका था। बाजी की “आह्ह्ह…” शुरू हो चुकी थी।
फैजान ने पूछा, “कैसा लग रहा है?”
बाजी बोलीं, “अच्छा लग रहा है।”
साकिब जोर-जोर से चोद रहा था। फैजान उठा और अपना लंड बाजी के मुँह में ठूँस दिया। बाजी चूसने लगीं। साकिब का लंड बाजी की चूत में अंदर-बाहर, अंदर-बाहर हो रहा था। थोड़ी देर बाद साकिब बोला, “मैं झड़ने वाला हूँ।”
बाजी बोलीं, “अंदर ही छोड़ दो।”
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साकिब एक जोर की चीख के साथ झड़ गया और बाजी के ऊपर लेट गया। थोड़ी देर बाद लंड निकालकर बाथरूम चला गया। बाजी अभी भी फैजान का लंड चूस रही थीं। फैजान भी एक चीख मारकर झड़ गया और बाजी ने सारा माल पी लिया। फैजान बोला, “वाह, ये मजा तो कॉल गर्ल भी नहीं देती।”
साकिब बाहर आया तो फैजान बाथरूम गया। बाजी अभी भी नंगी लेटी थीं। साकिब कपड़े पहनने लगा। बाजी बोलीं, “बस थक गए?”
साकिब बोला, “नहीं, अभी तो और भी दोस्त हैं ना।”
बाजी चौंकीं, “क्या कहा तुमने?”
साकिब हँसा, “हाँ वही जो तुमने सुना।”
फिर फैजान आया तो साकिब ने कहा, “जाओ हमीद वालों को ले आओ।”
फैजान बोला, “मुझे डर लग रहा है कहीं इसका भाई न उठ जाए।”
बाजी बोलीं, “वो अभी नहीं उठेगा, तुम लोग जो करना है कर लो।”
फैजान ने पूछा, “सबको ले आऊँ?”
साकिब बोला, “हाँ, इसे तो ये भी कम पड़ेंगे।” दोनों हँस पड़े।
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फैजान बाहर गया। साकिब ने दोनों स्लीपर बर्थ के बीच नीचे कंबल बिछाकर बेड बनाया और बाजी को नीचे खींच लिया। थोड़ी देर में फैजान लौटा और उसके साथ चार और लड़के थे। सब सीटों पर बैठ गए और नंगी समीना बाजी को घूरने लगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
खामोशी के बाद बाजी बोलीं, “कभी लड़की नहीं देखी क्या?”
एक लड़के ने कहा, “देखी तो बहुत हैं, पर अभी अपने नसीब पर यकीन नहीं हो रहा।”
बाजी हँसकर बोलीं, “तुम्हारा नसीब अच्छा है, आ जाओ मेरे पास।”
इस तरह बाजी की फिर से चुदाई शुरू हो गई। लड़के शोर मचा रहे थे तो साकिब ने कहा, “धीरे, कहीं इसका भाई न उठ जाए।” एक लड़के ने सुझाव दिया, “इसे हमारे कम्पार्टमेंट में ले चलो, वहाँ दिल खोलकर चोदेंगे।”
बाजी भी बोलीं, “हाँ चलो।”
सब लोग बाजी को चोदने अगले कम्पार्टमेंट चले गए और मैं चैन की नींद सो गया। सुबह ट्रेन अभी लाहौर नहीं पहुँची थी कि बाजी ने मुझे जगाया और चाय दी जो उनके चोदने वालों में से किसी ने खरीदी थी। मैं नीचे उतरा। कम्पार्टमेंट में सिर्फ साकिब, बाजी और मैं थे।
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बाजी ने साकिब से कहा, “ये मेरा भाई है।” साकिब ने मुझसे हाथ मिलाया और बोला, “तुम्हारी बहन बहुत अच्छी है।” मैं खामोश रहा।
मैंने साकिब से पूछा, “इस्लामाबाद की कोच कहाँ से मिलेगी?”
उसने कहा, “इसकी जरूरत नहीं, आज तुम लोग हमारे मेहमान हो। कल हम तुम्हें इस्लामाबाद ले जाएँगे।”
मैंने बाजी की ओर देखा। वो बोलीं, “कोई बात नहीं, कल चलेंगे। इंटरव्यू तो परसों है ना।”
साकिब ने मुझे कहा, “हमसे दोस्ती कर लो” और बाजी को आँख मारी। बाजी बीच में बोलीं, “जाहिर है मैं तुम्हारी दोस्त हूँ तो ये भी तुम्हारा दोस्त ही है।” मुझे समझते देर न लगी कि “दोस्ती” के बहाने बाजी फिर चुदवाना चाहती हैं। हम दोनों बहन-भाई लाहौर में साकिब वालों के यहाँ रुके जहाँ समीना बाजी की खुलकर चुदाई हुई। वो कहानी फिर कभी।
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