Neighbour Chudai Story
मेरा नाम अभय है और मेरी उम्र 22 साल है। मैं दिल्ली में जॉब करता हूँ और रहने वाला बिहार का हूँ। आज मैं आप सबको अपनी पूजा दीदी की एकदम सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ। ये बिल्कुल रियल स्टोरी है और मुझे उम्मीद है आपको मेरी कहानी सुनकर बहुत मज़ा आएगा। Neighbour Chudai Story
चलिये कहानी शुरू करते हैं। ये बात मेरी क्लास 12वीं की है जब मेरी उम्र 18 साल थी। मैं दिल्ली में रहता था और मेरी दीदी, जिनका नाम पूजा है, वो भी दिल्ली में ही रहती थीं। पूजा दीदी के बारे में बताऊँ तो उनके दूध बहुत बड़े-बड़े थे, शायद ३६ के होंगे और गांड का तो क्या कहना—इतनी मोटी और मस्त गांड थी उनकी।
उनका एक निठल्ला पति भी था जो कुछ काम-धंधा नहीं करता था। किसी तरह उसकी एक जॉब लगवाई गई थी। लेकिन बात यहाँ पूजा दीदी की है। उन्हें देखकर हमेशा लगता था कि दीदी की चुदाई ज़रूर करूँगा। मम्मी-पापा एक शादी में दस दिन के लिए गए थे। घर पर कोई नहीं था तो मम्मी ने पूजा दीदी को ही मुझे खाना खिलाने को कहा था।
मैं मन ही मन सोच रहा था—अब तो मज़े आएंगे। मेरी किस्मत खुल गई। पूजा दीदी और मैं अकेले साथ रहने लगे। उनका पति सुबह जॉब पर चला जाता था और फिर मेरा टाइम शुरू हो जाता था। दीदी के बैग में मैं उनकी ब्रा और चड्डी ढूँढता था और उसमें अपना लंड हिलाकर अपना पानी गिरा देता था। क्या बताऊँ, जब दीदी को वही ब्रा पहने देखता था तो लंड और ज़्यादा टाइट हो जाता था।
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मैं किसी भी तरह मौका ढूँढ रहा था कि दीदी से गंदी बातें करने का चांस मिले। आ गई वो रात जब दीदी और मैं साथ बैठे थे। रात के ग्यारह बज रहे होंगे। दीदी ने पिंक कलर का सूट पहना था और नीचे ब्लू कलर की ब्रा। मैंने दीदी से कहा, “चलिये ट्रुथ और डेयर खेलते हैं।”
पूजा दीदी: ये ट्रुथ डेयर क्या होता है?
अभय: दीदी, ये गेम है। इसमें आपको ट्रुथ या डेयर में से एक चुनना पड़ता है। डेयर मिला तो जो मैं बोलूँ वो करना पड़ेगा, ट्रुथ माँगा तो सच बोलना पड़ेगा।
पूजा दीदी: चलो, जैसा तुम्हें ठीक लगे। खेलते हैं। मुझसे पूछो।
अभय: पहले आप बताइए—ट्रुथ या डेयर?
पूजा दीदी: ट्रुथ।
अभय: आपकी असली उम्र बताइए?
पूजा दीदी: मुझसे मेरी ही उम्र जानना चाहते हो? अच्छा ठीक है, मेरी उम्र है 21।
अभय: अच्छा दीदी, अब आप पूछिए।
पूजा दीदी: तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
अभय: (लग रहा था दीदी को बहुत इंटरेस्ट आ रहा है) नहीं दीदी, पहले एक थी, अब सिंगल हूँ।
पूजा दीदी: मुझे लगता ही था। चलो मुझसे पूछो। मेरा ट्रुथ है।
अभय: आपका शादी से पहले कोई बॉयफ्रेंड था?
पूजा दीदी: सुनो, ये बात सिर्फ़ तुम्हें बता रही हूँ, किसी और को मत बोलना। हाँ, था।
अभय: (मुझमें पता नहीं इतनी हिम्मत कहाँ से आई) आप दोनों के बीच कुछ हुआ था क्या?
पूजा दीदी: हाँ हुआ था।
अभय: क्या हुआ था? खुलकर बताएंगी?
पूजा दीदी: मुझे बहुत अजीब लग रहा है हम ऐसी बातें कर रहे हैं। एक काम करो, तुम बताओ तुम अपनी गर्लफ्रेंड के साथ क्या-क्या किए थे, फिर मैं बताऊँगी।
अभय: अच्छा ठीक है। हाँ किया था। उसके ऊपर वाले बहुत बड़े थे तो दबाता था।
पूजा दीदी: ये ऊपर वाले क्या होते हैं?
अभय: दीदी, बहुत बड़े दूध थे उसके, दबाने में मज़ा आता था।
पूजा दीदी: बस दबाने तक ही रहे या आगे भी कुछ किया?
अभय: हाँ, उसकी चड्डी में हाथ डाला था, चूत में उंगली की थी और अपना लंड चुसवाया था। फिर ब्रेकअप हो गया।
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पूजा दीदी: अनलकी लड़का! चलो मैं अपना बताती हूँ। मेरा बॉयफ्रेंड बनारस में रहता था। हमने बहुत मज़े किए। लगभग सब कुछ किया। वो मेरे दूध चूसता था, मेरी चूत में उंगली करता था, मेरी ब्रा में अपना पानी छोड़ देता था और मुझे वही ब्रा पहनने को बोलता था। मैंने उसका पानी भी पिया था। हमारी शादी नहीं हो पाई क्योंकि कास्ट इश्यू था। लेकिन उसके साथ बहुत मज़े आए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अभय: दीदी आप तो बहुत मज़े की हैं। मुझे तो आप बहुत शरीफ़ लगती थीं।
पूजा दीदी: बेटा कोई शरीफ़ नहीं होता, सब मज़े करते हैं।
अभय: दीदी एक और सवाल पूछूँ?
पूजा दीदी: क्या, बोलो।
अभय: दीदी अपना फर्स्ट नाइट का एक्सपीरियंस बताइए ना।
पूजा दीदी: ये कुछ ज़्यादा नहीं हो रहा?
अभय: दीदी बस बात ही तो कर रहे हैं।
पूजा दीदी: अच्छा ठीक है। अपने दीपक जीजा जी को देखे हो ना, एकदम पतले हैं। मैंने आज तक चुदाई नहीं करवाई थी शादी से पहले। इतनी उम्मीदें थीं उनसे। लेकिन सब उल्टा निकला। उनका लंड देखकर तो मूड ही ख़राब हो गया। मुझे मुँह में लेने को बोले। मैं मना भी नहीं कर सकती थी। वो दम लगाकर चोदते थे लेकिन मुझे कुछ फ़र्क़ तक नहीं पड़ता था। आज हमारी एक बेटी भी है लेकिन मैरिड लाइफ़ में वो मज़ा नहीं। खुद का निकालकर वो ख़ुश हो जाते हैं। मैं कभी सैटिस्फ़ाई ही नहीं होती।
अभय: दीदी, एक डेयर दूँ?
पूजा दीदी: हाँ बोलो?
अभय: दीदी, अपना ब्रा-चड्डी मुझे दे दीजिए ना। उसमें अपना पानी निकाल दूँगा। प्लीज़ दीदी।
पूजा दीदी: क्या बोल रहे हो? तुम्हारे मम्मी-पापा को पता चला तो क्या बोलेंगे?
अभय: दीदी प्लीज़, बस एक बार।
पूजा दीदी: ठीक है। जा रही हूँ। किसी को मत बताना। ये बात बस हमारे बीच रहेगी।
अभय: दीदी प्लीज़ मेरे सामने ही निकालो अपने कपड़े। मुझे भी आपको देखना है।
पूजा दीदी: बेटा बस मैं ही निकालूँ? तू अपना कुछ नहीं निकालेगा?
अभय: ठीक है दीदी।
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फिर मैंने अपना मोटा लंड (7 इंच) निकाला और दीदी मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगीं। क्या सीन था वो—इतने मोटे दूध, इतनी बड़ी गांड। जो आज तक सपना था वो अब सच हो रहा था। दीदी ने मेरा लंड देखा और बोलीं, “आज रात हमारे बीच जो भी होगा, किसी को बताना मत।” फिर दीदी बैठ गईं और मेरा मोटा लंड अपने मुँह में डाल लिया।
जब मैंने दीदी को कपड़े उतारने को बोला तो दीदी शरमाने लगीं और साथ ही बहुत एक्साइटेड भी लग रही थीं। उन्होंने मुझे भी कपड़े उतारने को कहा। मैंने अपना बॉक्सर उतारा और सिर्फ़ अंडरवियर में दीदी के सामने बैठ गया। मेरा ७ इंच का मोटा लंड देखकर दीदी बहुत ख़ुश थीं।
वो भी जल्दी से अपना सलवार-कमीज़ उतारकर ब्रा और चड्डी में बैठ गईं। मैंने दीदी को डेयर दिया था कि मुझे उनकी यूज़्ड ब्रा-चड्डी चाहिए। और उन्होंने वैसा ही किया। जब दीदी ने अपना ब्लू कलर का ब्रा उतारा तो उनके मोटे-मोटे दूध झूमकर बाहर आ गए। उन्होंने मुझे वो ब्रा दी और बोलीं, “जा कर ले, जो करना हो।” साथ में बोलीं, “जो करेगा मेरे सामने कर।”
मैंने जोश में अपना लंड बाहर निकाला और उनकी ब्रा से हिलाने लगा। क्या बताऊँ, कितना अच्छा लग रहा था। साथ ही पूजा दीदी के साथ आई कॉन्टैक्ट। वो मेरे लंड को बहुत ध्यान से देख रही थीं। मैं बहुत तेज़ी से हिला रहा था। तो दीदी बोलीं, “अभय इतना तेज़ मत हिलाओ, अभी हमारा गेम पूरा कहाँ हुआ है।”
अगला डेयर दीदी ने मुझे दिया—मुझे स्मूच करो। मैं भी कम नॉटी नहीं हूँ। बोला, “स्मूच तो करूँगा लेकिन स्मूच करते वक़्त मेरा हाथ कहीं भी जा सकता है।” पूजा दीदी बोलीं, “जो करना है करो लेकिन जल्दी से किस करो मुझे।” फिर क्या था। मैं दीदी के पास गया, उनके बाल खोले और उनके होंठों पर किस करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
साथ ही उनके मोटे-मोटे दूध दबाने लगा। उनके दूध इतने बड़े थे कि मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे। मेरा हाथ नीचे उनकी चूत में भी गया और मैंने उनकी चूत में उंगली डाल दी। दीदी सिसकारियाँ भरने लगीं। दीदी की चूत पूरी गीली थी। पूजा दीदी मुझे खड़े होने को बोलीं और अपने हाथों से मेरा लंड पकड़कर हिलाने लगीं। देखते-देखते उनके लार से मेरा गरम लंड गीला हो गया।
वो लंड चूसने में एक्सपर्ट लग रही थीं। मैंने भी जोश में उनसे डीप थ्रोट करवाया। उनसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। वो बोलीं, “अभय, बेड पर चलो। प्लीज़ मुझे चोद डालो।” मैं पूजा दीदी को चोदने के लिए तैयार था। जैसे ही मैंने दीदी की टाँगें फैलाईं, दीदी को याद आया कि उन्होंने दूध गर्म नहीं किया। गर्मी का टाइम था, दूध फट जाता था।
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तो दीदी बोलीं, “अभय थोड़ा रुक जाओ, मैं दूध गर्म कर लूँ, उसके बाद आराम से चोद लेना।”
दीदी ने अपनी चड्डी और ब्रा पहनी और सीधा किचन चली गईं। मैं दीदी के पीछे किचन में गया। मैंने कुछ नहीं पहना था और मेरा मोटा लंड खड़ा था। दीदी दूध गर्म कर रही थीं और मैं पीछे से उनकी गांड में लंड टच करवा रहा था।
पूजा दीदी बोलीं, “नॉटी लड़के, किचन में तो मुझे छोड़ दे।”
मैंने कहा, “पहली बार आपको चोदने का मौक़ा मिला है, ऐसे कैसे छोड़ दूँ।”
और साथ ही दीदी की गांड दबाने लगा। दीदी को दर्द हो रहा था और वो बोलने लगीं, “बस करो अभय, इतना तेज़ तो मेरा बॉयफ्रेंड भी नहीं दबाता था।”
मैं बोला, “दीदी शांत रहो और चुपचाप सहन करो।”
और मैंने अपनी मिडिल फिंगर दीदी की चूत में डाल दी।
दीदी बोलीं, “कमीने, एक तो बहन बोलता है, ऊपर से ये सब करता है।”
मैं बोला, “दीदी ये कलयुग है, यहाँ सब चलता है।”
दीदी गैस पर दूध गर्म कर रही थीं। तभी मैंने दीदी को दीवार की तरफ़ धकेला और उनकी एक टाँग ऊपर करके अपना लंड उनकी गीली चूत में डाल दिया। दीदी का रिएक्शन देखने लायक था। वो सिसकारियाँ भरने लगीं। मैंने दीदी को स्मूच करना शुरू किया और उनके 36 के दूध दबाने लगा।
दीदी को देखकर लग रहा था कि वो आज तक सैटिस्फ़ाई नहीं हुई थीं। मैं दीदी को तेज़-तेज़ धक्के मारने लगा। दीदी बोलीं, “अभय रुक जाओ, मुझे दूध गर्म करने दो, बेड पर चोद लेना।” लेकिन मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैं लगातार अपना लंड दीदी की गांड में लगा रहा था और बीच-बीच में गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था।
दूध गर्म होने के बाद हम दोनों बेड पर आ गए। दीदी लेट गईं और बोलीं, “आजा अभय, मुझे चोद दे और हाँ, आज तू मुझे फिर से माँ बना दे। तेरी मुठ की हर बूंद मेरी चूत में जानी चाहिए। आजा अभय मुझे चोद दे।” मैं भी दीदी पर चढ़ गया और उनके मोटे-मोटे दूध चूसने लगा।
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दीदी को बहुत मज़ा आ रहा था। जब दीदी ने कहा कि मुझे फिर से माँ बनाना है तो मेरे अंदर अलग ही जोश आ गया। मैं दीदी को अच्छे से चोदना चाहता था। मुझे अच्छे से पता था कि फोरप्ले बहुत ज़रूरी है। मैंने दीदी को स्मूच करते हुए उनकी गांड दबाई, मोटे दूध चूसे और चूत में उंगली की।
शादी के बाद भी दीदी की चूत बहुत टाइट थी। मैं दीदी की गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था। दीदी को बहुत मज़ा आ रहा था। दीदी ने मुझे परमिशन भी दे दी थी कि मैं अपना माल उनकी चूत में डाल सकता हूँ। मैं बहुत एक्साइटेड था। दीदी बोलीं, “अभय दूसरे रूम में चलो।”
हम दोनों इतने डेस्परेट हो चुके थे कि दूसरे रूम में जाते वक़्त भी एक-दूसरे को किस कर रहे थे। मैं दीदी की गांड दबा रहा था। वो धीरे-धीरे बोल भी रही थीं, “अभय धीरे करो, लग रहा है।” दूसरे रूम में पहुँचते ही दीदी बेड पर टाँगें फैलाकर बैठ गईं और बोलीं, “आज रात मुझे चोदकर फिर से माँ बना दे। आज मैं तेरे बच्चे की माँ बनूँगी।”
मुझे भी हद से ज़्यादा जोश चढ़ गया। मैं दीदी पर चढ़ गया और उनके दूध चूसने लगा। इसी बीच उनकी चूत में भी उंगली कर रहा था। दीदी मदहोश हो गई थीं। फिर मैं लेट गया और दीदी को बोला, “चल मेरा लंड चूस।” दीदी तो लंड चूसने में एक्सपर्ट थीं। पहले मेरे लंड की स्किन ऊपर चढ़ी हुई थी, उस पर अपना लार डालकर चूसने लगीं।
फिर स्किन नीचे करके जीभ से चाटने लगीं। क्या बताऊँ, बहुत मज़ा आ रहा था। लंड चुसवाने के बाद दीदी बोलीं, “अभय अब चूत में डालो, कंट्रोल नहीं हो रहा।” दीदी ने अपनी टाँगें खोलीं। आख़िर वो पल आ गया जिसका मैं सालों से इंतज़ार कर रहा था। मैंने अपना मोटा लंड दीदी की टाइट चूत में डाला। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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दीदी की चूत हद से ज़्यादा गीली थी, चुदाई में बहुत आसानी हो रही थी। जब दीदी को दर्द होता तो वो टाँगें सीधी करने लगतीं, मैंने उनकी टाँगें पकड़ लीं और तेज़ धक्के मारने लगा। उन्हें भी मज़ा आ रहा था। जब वो सिसकारी लेने को मुँह खोलतीं तो मैं स्मूच कर लेता और साथ ही मोटे दूध दबाता रहता।
दीदी को बहुत जल्दी थी कि मैं अपना माल उनकी चूत में डाल दूँ ताकि वो फिर से माँ बन सकें। लेकिन मुझे अभी और मज़े करने थे। मैंने दीदी को अपने ऊपर आने को बोला। दीदी मेरे ऊपर बैठीं और अपने हाथ से मेरा मोटा लंड पकड़कर अपनी चूत में डाल लिया। उनकी शक्ल देखने लायक थी। वो मेरे लंड पर उछल-उछल कर रही थीं। मैं उनके उछलते दूध दबा रहा था और बीच-बीच में गांड पर थप्पड़ मार रहा था।
मैंने कहा, “पहले बोल देतीं अगर मुझसे चुदना था तो।”
दीदी बोलीं, “अब चुद रही हूँ ना, मज़े ले ले मेरे।”
जोश इतना बढ़ चुका था कि कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने दीदी को बेड पर गिराया और तेज़ी से चूत में धक्के मारने लगा। मुझे लगा मेरा माल निकलने वाला है। चोदते-चोदते मैंने कहा, “दीदी मेरा निकलने वाला है।”
दीदी बोलीं, “चूत में छोड़ दो सारा, एक बूंद बाहर नहीं गिरनी चाहिए।”
मैंने वैसा ही किया। सारा माल दीदी की चूत में छोड़ दिया। फिर मैं दीदी के बगल में लेट गया और दीदी उठकर मेरा सारा लंड चूसने लगीं। अच्छे से जीभ से चाटने लगीं। मैं बहुत ख़ुश और सैटिस्फ़ाई था। आख़िर मैंने दीदी को चोद ही डाला। हम दोनों कडल करके नंगे ही सो गए।
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सुबह जब मैं उठा तो दीदी कपड़े पहन रही थीं। मैंने पीछे से पकड़ा और किस करने लगा। दीदी बोलीं, “हमारे बीच जो भी हुआ वो सिर्फ़ हमारे बीच ही रहेगा। कभी किसी को मत बताना।” मैंने आज तक किसी को नहीं बताया। हाँ, आज इस स्टोरी के ज़रिए मेरे प्यारे रीडर्स को पता चल ही गया। दीदी ने अपने पीरियड्स मिस किए और हमें पता चला कि दीदी प्रेग्नेंट हैं। दीदी बहुत ख़ुश थीं। दीदी ने मुझे बताया और मैं भी बहुत ख़ुश हुआ। उनके पति को आज भी यही लगता है कि उनका छोटा बेटा उनसे हुआ है। लेकिन सच बहुत अलग है।
पूजा दीदी आज भी दिल्ली में ही रहती हैं। जब भी मेरी छुट्टी होती है मैं उनके घर जाता हूँ। सेक्स करता हूँ, टच करता हूँ और हाँ, अपने ख़ुद के बच्चे को देखता हूँ। बच्चे बड़े हो गए हैं तो अब उतना सेक्स नहीं हो पाता, लेकिन टचिंग पूरी करता हूँ और अपना लंड हमेशा चुसवाता हूँ। वीकेंड पर जब घर नहीं आ पाता तो दीदी अपनी यूज़्ड ब्रा-चड्डी पार्सल करके भेज देती हैं। और जब भी मौक़ा मिलता है वो मुझसे मिलने आती हैं और चुदाई करवाकर जाती हैं।