Lund Ki Pyasi XXX
दोस्तों आपका फिर से स्वागत है, आपने कहानी का पिछला भाग चुदासी देवरानी जेठानी की सेक्सी कहानी 1 पढ़ा होगा. गुंजन बोली, “सुबह जल्दी निकल लेते हैं। चलो वो तो मैं समझती हूं काम धंधे में ऐसा ही होता है। मगर शाम को रात को कोइ बात नहीं कोइ चीत नहीं बस दिन भर के थके सो जाते हैं। अभी हमारी शादी को दिन ही कितने हुए हैं। बाऊ जी ने शादी के बाद कहीं जाने भी नहीं दिया। ऐसा थोड़े ही होता है”। Lund Ki Pyasi XXX
साहिल बोला, “मैडम माजरा मुझे एक मिनट में समझ आ गया था कि गुंजन कि चुदाई सही नहीं हो रही। मैंने पूछा, “गुंजन सच बता, क्या भैया ढंग से सेक्स नहीं करते या उनमें कोइ प्रॉब्लम है”।
गुंजन बोली, “कोइ प्रॉब्लम नहीं है साहिल। मगर सेक्स करते हैं हफ्ता दस दिन में एक बार”।
मैंने कहा “तो गुंजन तुझे ज्यादा सेक्स चाहिए” ?
गुंजन बोली, “मुझे क्या हर नई ब्याहता लड़की को ज्यादा सेक्स चाहिए होता है”।
मैंने पूछा, “तो फिर”?
वो साफ़ साफ़ बोली, “तो फिर क्या साहिल? तुम कर लिया करो मेरे साथ सेक्स – चोद दिया करो मुझे, जब मेरा मन करे”।
“मैडम जब गुंजन ने मुझे चुदाई के लिए बोली तो एक पल के लिए तो मैं हैरान हुआ था। बात यहां तक आ चुकी थी “?
“मैडम इस बात के लिए तो मैं भी तैयार नहीं था। गुंजन को इस नजर से तो मैंने कभी भी नहीं देखा था। गुंजन आखिर थी तो मेरी भाभी ही – मेरे भाई की बीवी”?
मैंने गुंजन से कहा, “गुंजन मैं कैसे? तू भाई से बात करके देख”।
गुंजन बोली, “साहिल, की थी मैंने बात। वो बोलते हैं जिंदगी में सेक्स ही सब कुछ नहीं होता। अब साहिल ऐसे बातें तो लोग पचपन साठ की उम्र के बाद करते हैं जब मर्दों का लंड खड़ा नहीं होता और औरतों की चूत गरम ही नहीं होती। जवानी में थोड़ा करते हैं। तू साफ़ साफ बता, तू करेगा कि नहीं मेरी चुदाई”?
“मैडम मैंने सोचा लड़की जवान है – बीस साल की। अगर चुदाई चाहती है तो क्या गलत करती है। अगर मैंने ना चोदी तो कहीं और के साथ चुदाई चक्कर में ना पड़ जाए”।
“मैडम, मेरा बाप और मेरा चूतिया भाई तो सुबह के गए रात को ही घर आते हैं। और मैं ही कहां सारा दिन घर पर रहता हूं। ये मेरी भाभी गुंजन इधर उधर से चुदाई करवा कर घर की इज़्ज़त का ही ना कचरा करवा ले – साथ ही अपनी चूत का भी “।
फिर मैंने पूछा,” तो फिर ठीक है गुंजन, बोल कब करवानी है तूने चुदाई “?
“गुंजन तो मैडम लग रहा था कि उसी दिन तभी कि तभी चुदने का मन बना कर ही आयी थी”। वो बोली, “अभी चोद साहिल, मेरी चूट तो गर्म हुई पड़ी है। इसी लिए तो तेरे पास आयी हूं”।
साहिल बता रहा था, “मैडम मैंने कहा ठीक है गुंजन, मैं दरवाजा बंद करके आता हूं “।
“मैडम गुंजन तो चुदाई की पूरी तैयारी करके ही आयी थी”। वो बोली, “दरवाजा मैं बंद करके ही आयी हूं। तू चुदाई कर बस मेरी “। कह कर उसने पूरे कपड़े उतार दिए।
“मैडम, क्या बताऊं, गुंजन की छोटी छोटी ये तनी हुई चूचियां, छोटे छोटे नरम नाजुक चूतड़,और चूत पर सुनहरे भूरे चमकीले रेशम जैसे झांटों के बाल छोटे छोटे झांटों के बाल। मेरा तो मैडम छलांगें ही मारने लगा”।
“मैडम मैंने सोचा, अजीब हिजड़ा है मेरा भाई भी। ऐसी गज़ब की चूत, चूतड़ों वाली लड़की साथ लेटती है और उसका चुदाई का मन नहीं करता? गाली निकली मैडम मेरे मुंह से उसके लिए – “साला मादरचोद”।
“मैडम गुंजन की चुदाई की खुशी से ज़्यादा मुझे अपने निक्क्मे भाई और खड़ूस बाप पर गुस्सा आ रहा था, जिनके कारण इतनी खूबसूरत चूत बाहर का लंड ले रही थी “।
“बस जी मैंने भी लंड बाहर निकाल दिया”। गुंजन ने थोड़ा लंड चूसा और बोली, “चल साहिल, अब और मत तरसा, कर मेरी चुदाई। आज पूरे दस दिन हो गए, लंड के लिए तरस रही है मेरी चूत”।
“बस मैडम उस दिन मैंने गुंजन को चोद दिया – वो भी एक बार नहीं दो बार नहीं तीन तीन बार’।
चुदाई की बड़ी प्यासी हो रही थे गुंजन उस दिन। सिर्फ चूत की सील ही नहीं थी मगर मैडम चूत बड़ी टाइट थी।
“गुंजन हल्के शरीर वाली लड़की है। बाहों में ले कर चुदाई का मजा ही आ गया। बढ़िया से चुदवाती है गुंजन। चुदाई करवाते हुए ऐसे नीचे से ऐसे झटके लगाती है ऐसे चूतड़ घुमाती है – इतनी जोर जोर से उछलती है की क्या बताऊं I और इतनी जोर जोर की सिसकारियां लेती है कि डर ही लगा रहता है कि किसी ने सुन लिया तो “?
“और मैडम, इतनी सी चूत है गुंजन की”। साहिल ने अंगूठे और उंगली से बताया। “उस दिन जब वो चुदवाने आयी और मैंने चूसते हुए उसकी चूत देखी तो पहले तो मैं यही सोचता रहा की इसमें मेरा लंड घुसेगा ही कैसे”।
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“मगर मैडम जैसे मैंने अपना खड़ा लंड गुंजन की चूत के छेद रक्खा, गुंजन ने नीचे से वो चूतड़ों का ऐसा जोरदार झटका लगाया की पूरा लंड गुंजन की चूत के अंदर बैठ गया। गुंजन ने एक सिसकारी ली आह साहिल, चल लगा अब लगा धक्के, कर बढ़िया चुदाई मेरी”।
चुदाई करवा कर गुंजन बोली, “साहिल,बड़ी तस्सली के साथ चोदता है तू – पूरा मजा दे दिया तूने आज। तुम्हारे भैया तो चूत भी अपनी जिम्मेदारी समझ कर चोदते हैं। लंड अंदर डाला, धक्के लगाए, मेरा और अपना पानी छुड़ाया और चुदाई खत्म”।
“ना कभी मेरी फुद्दी चूसी ना गांड चूसी, ना लंड चुसवाया, ना कभी अपने लंड का गरम पानी मेरे मुंह में निकला”।
मैडम गुंजन बोल रही थी, “साहिल, अब कम से कम तू मुझे तीन हफ्ते तक तो रोज चोद, दो दो तीन तीन बार जैसे मर्जी चोद – ऐसे ही चोदता रह जब तक मुझे महावारी नहीं आती। कम से कम मेरी इस प्यासी फुद्दी की प्यास तो बुझे। उसके बाद फिर जब भी तेरा मन करे मुझे चोदने का, तू मुझे चोद दिया करना और जब मेरा मन करे तुझसे चुदाई करवाने का मैं तुझे बोल दिया करूंगी”।
“बस मैडम अब जब भी, जितनी बार भी गुंजन बोलती है चुदाई कर देता हूं”।
“अच्छा साहिल, तूने गुंजन की गांड चोदी है “? नेहा ने पूछा”।
“नहीं मैडम चोदी तो नहीं, पर जिस दिन वो बोलेगी, चोद दूंगा”।
मैडम एक दिन की बात है हम चुदाई कर के ऐसी लेटे हुए थे कि अचानक से गुंजन ने पूछा,”साहिल तूने कभी गांड चोदी है “?
साहिल बता रहा था। “मैडम मैंने पूछा, “गुंजन तू क्यों पूछ रही है ? तेरा गांड चुदवाने का मन कर रहा है क्या “?
गुंजन बोली, “साहिल कई बार मन तो करता है। जब भी तू मेरी गांड का छेद चाटता है गांड में खलबली सी मच जाती है। तेरा लंड गांड में लेने का मन करता है”।
मैडम मैंने गुंजन को बोल दिया, “गुंजन अब जब भी तेरा गांड चुदवाने का मन करे तू बोल देना “।
गुंजन बोली, “साहिल मैंने तो ऐसे ही पूछ लिया। अब जब तूने बोल ही दिया है तो जब मेरा मन गांड चुदवाने करेगा तुझे बता दूंगी”।
अब आप से क्या छुपाना मैड। जब से गुंजन ने ये गांड चुदवाने वाली बात बोली है, मेरा भी उसकी गांड चोदने का बड़ा मन होने लगा है।
मैडम बड़े ही नाजुक से चूतड़ है गुंजन के, ये छोटे छोटे “। साहिल ने हाथ खोल कर बताया।
और मैडम जब मैंने एक दिन गुंजन की गांड का छेद देखा तो क्या बताऊं आपको मैडम गुलाबी रंग का छोटा सा छेद – ऐसा लग रहा था जैसे किसी औरत के माथे पर गुलाबी रंग की छोटी सी बिंदी लगी हो”I
पर मैडम बात वहीं पर आती है, गांड हो या चूत – चोदने का मजा तब तक नहीं आता जब तक दोनों लड़के लड़की का मन चुदवाने का ना हो। जिस दिन गुंजन का मन करेगा गांड चुदवाई का उस दिन उसे गांड चुदवाने की दर्द में भी मजा आएग। क्यों मैडम ठीक कहा ना मैंने “?
नेहा बोली, “सही कह रहा है तू ?
साहिल ने कहा , और मैडम अब तो मैंने जैल भी ला कर रख ली है घर पर ही। क्या पता कब गुंजन का मन कर आये गांड चुदवाने का “।
“सही पूछो तो मैडम, अगर मुझे गुंजन जैसे बीवी मिल जाये ना, तो मैं तो कम से कम छः महीने तक दिन रात चुदाई करूं उसकी। माहवारी वाले दिनों में भी ना छोड़ूं। बाकी दिन चूत, माहवारी के दिनों में गांड”।
दीप्ती और नेहा फिर हंसी। दोनों ने एक दूसरी के तरफ देखा। दोनों ही अपनी अपनी चूत खुजला रहीं थीं।
दीप्ती बोली, बस कर भोसड़ी के साहिल, इतनी बारीकी से गुंजन की चुदाई बता रहा है, हमारी अपनी चूतें गरम हो गयी हैं।
साहिल बोला ,”मैडम गुंजन की मस्त चुदाई याद कर के तो मेरा भी खड़ा हो रहा है। अब मैडम एक एक चुदाई कर लें, अब नहीं रहा जा रहा”। कह कर साहिल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए। मस्त शरीर, मस्त लंड।
दीप्ती की नजर तो साहिल के लंड से हट ही नहीं रही थी।
नेहा बोली, “चलो जीजी आप करवाओ चुदाई पहले”।
साहिल उठा और दीप्ती को बोला, “आईये चलिए”।
दीप्ती बोली “कहां जाना है यहीं करेंगे चुदाई”।
“इनके सामने”? साहिल ने नेहा की तरफ देख कर कहा।
दीप्ती बोली “तो क्या हुआ? परसों भी तो अशोक और जनक ने हमें इक्क्ठे ही चोदा था”।
“देखो मैडम”, साहिल दीप्ती को बोला, “आप इक्क्ठी रहती हैं इस लिए मैं आप लोगों के चुदाई एक दूसरी के सामने कर दूंगा, मगर मैं अशोक के सामने चुदाई नहीं करूंगा। चुदाई बिलकुल अकेले में ही होनी चाहिए”।
अब बात तो साहिल ये भी ठीक ही कह रहा था।
नेहा ने कहा, “चल ठीक है चोद जीजी को और फिर मुझे। जब अशोक आ जाये तो तो फिर अकेले अकेले चोदना”।
दीप्ती तब तक अपने कपड़े उतर चुकी थी। साहिल उठ कर दीप्ती के सामने खड़ा हो गया। लंड चूसने के लिए। दीप्ती ने बड़े ही मजे से लंड चूसा। साहिल ने दीप्ती को उठाया और बाहों में ले कर उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर में बोला “आइये”। और साहिल ने दीप्ती को बेड पर लेटने का इशारा किया।
दीप्ती लेट गयी। साहिल ने दीप्ती के चूतड़ों के नीचे एक तकिया रख कर दीप्ती की चूत उठा दी । टांगें चौड़ी कर के साहिल ने अपना मुंह दीप्ती की चूत में घुसा दिया। कुछ देर चूसने के बाद उठा और बोला, “मैडम तैयार है आपकी चूत तो लंड के लिए”।
दीप्ती की टांगें तो चौड़ी ही थी, साहिल ने एक झटके के साथ अपना सात साढ़े सात इंच का लंड दीप्ती की चूत में बिठा दिया फच्च की आवाज के साथ।
दीप्ती ने “आआह ……साहिल”…. की आवाज के साथ साहिल को जकड लिया। आधा घंटा साहिल ने दीप्ती को चोदा।
दीप्ती दो बार झड़ी। दूसरी बार झड़ने के बाद दीप्ती बोली, बस साहिल अब नेहा को चोद। दिखा अपने लंड का दम नेहा को।
दीप्ती नेहा से बोली, “नेहा, बड़ा सही चोदता है ये साहिल”।
“आजा साहिल”। नेहा अपनी चूत को रगड़ रगड़ कर गीला कर चुकी थी I साहिल ने चूत में उंगली डाल कर कहा, मैडम आपकी ये तो रेडी है। और अगला घंटा उसने नेहा को चोद चोद कर नेहा का पानी छुड़ा दिया – दो बार। अशोक आया दो घंटे के बाद। दीप्ती और नेहा की चुदाई साहिल दो दो बार कर चुका था और तीन तीन बार उन दोनों का पानी छुड़ा चुका था।
साहिल अशोक से बोला, “क्या हुआ अशोक, फिर कोइ काम बता दिया था तेरे बाप ने “?
अशोक बोला, “कुछ ना पूछ यार।अच्छा ये बता तूने इन दोनों मैडमों की चुदाई की या नहीं “?
साहिल नंगा बैठा था, “तू ही पूछ ले, और अब तू भी कपड़े उतार ले। अब चुदाई का तीसरा दौर चलना है “।
अशोक बोला, “क्या ? तू दो दो बार चोद चुका है ? चूत में डाला या गांड में”।
साहिल बोला, “चूत में, गांड में डालने को इन्होने कहा ही नहीं”।
नेहा बोली, “अब मैं तो गांड चुदवाऊंगी”। और फिर दीप्ती के तरफ देख कर बोली, “जीजी आप “?
दीप्ती ने जवाब दिया, “मैं भी गांड में ही लूंगी। चूत की तो तसल्ली हो गयी। एक एक बार गांड चुदवाते हैं फिर सोचेंगे क्या करना है”।
नेहा ने अशोक को कहा , “आजा अशोक तू मेरे साथ आजा”। नेहा उठी तो अशोक ने पूछ लिया, “कहां जाना हैं मैडम ? यहीं डालते हैं गांड में लंड। शर्माना क्या और किससे”।
नेहा बोली, “नहीं अशोक अलग अलग बढ़िया है मस्त चुदाई होगी, जैसे मर्जी करो, जो मर्जी बोलो”।
अशोक ने भी ज्यादा नहीं पुछा। साहिल को बोला, “साहिल वो क्रीम जो गांड में लगाने के लिए लाया था तू , दे दे “।
साहिल ने साथ लाये लिफ़ाफ़े में से एक ट्यूब निकाल कर अशोक को दे दी, और एक अपने पास रख ली।
चलते चलते नेहा बोली, “साहिल पंद्रह बीस मिनट के बाद मैं अशोक को यहां भेज दूंगी। अशोक जीजी की गांड चोद देगा, तू मेरे पास आ जाना। दोनों जन दो दो गाँडों का स्वाद लो और हमे भी दो दो लंडों के मजे दो”।
साहिल बोला, “ठीक है मैडम”। फिर अशोक से बोला, “अशोक झड़ के मत आना, दीप्ती मैडम की सही गांड चोदनी है तुझे आज। और मुझे भी इन नेहा मैडम की गांड को चोद चोद कर पूरा मजा लेना है”।
नेहा और अशोक चले गए।
साहिल दीप्ती से बोला, “मैडम पहले तो आप उल्टी लेट कर अपने चूतड़ फैलाईये। मैं आपके चूतड़ और गांड चाटना चाहता हूं।
दीप्ती ने वैसा ही किया। चूतड़ फैला दिए। गांड का छेद सामने था। साहिल ने पहले तो चूतड़ चाटे। चाटते चाटते हल्के हल्के दांत भी मार रहा था। जब साहिल दीप्ती के चूतड़ पर दांत मरता तो दीप्ती सिसकारी लेती “आआह आआआह साहिल आआआह”। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीप्ती मस्ती में बोल रहे थी, “साहिल तू बहुत बढ़िया चोदता है। दो बार चोद कर मेरी चूत मस्त हो गई है। काट साहिल काट मेरे चूतड़ों पर काट। मेरी जांघों पर भी काट, मेरी चूचियों पर भी काट आआह”। दीप्ती मस्त हो रही थी। चूत चुदाई की मस्ती भी तो अभी नहीं उतरी थी।
साहिल ने कहा “मैडम आपके चूतड़ बड़े सेक्सी है। जब आप चलती हैं और जैसे ये हिलते हैं, देखने वाले का तो मुट्ठ मारने का ही मन करने लग जाता होगा”।
कुछ देर की चुसाई के बाद साहिल खड़ा हो गया। “आईये मैडम अब शुरू करते हैं।” साहिल ने दीप्ती की गांड पर जैल लगाई। थोड़ी जैल उंगली से अंदर लगाई और लंड छेद पर बिठा कर पूरा अंदर कर दिया। साहिल ने दीप्ती की कमर पकड़ी और लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगा। दीप्ती सिसकारियां ले रही थी बोल रही थी “आह आआह साहिल चोद मेरी गांड, सुजा दे इसे आज, फुला दे “।
साहिल भी बोलने लग गया, “क्या चूतड़ हैं मैडम आपके क्या गांड है। गद्देदार गठीली आह आआह मजा आ रहा है। ऐसी गांड नहीं चोदी कभी। अब जब भी बोलेंगी आऊंगा चोदने “।
साहिल दीप्ती को चोद रहा था। साहिल ने दीप्ती की कमर कस कर पकड़ी और लम्बे लम्बे हक्के लगाने लगा। दीप्ती सिसकारियां ले रही थी बोल रही थी “आह आआह साहिल चोद मेरी गांड, सुजा दे इसे आज, फुला दे “।
साहिल भी बोलने लग गया, “क्या चूतड़ हैं मैडम आपके, क्या गांड है। गद्देदार गठीली आह आआह मजा आ रहा है। ऐसी गांड नहीं चोदी कभी। मेरा मन कर रहा है मैं आपकी गांड चोदता ही रहूं चोदता ही रहूं”।
जैल के कारण जब साहिल के टट्टे गांड से टकराते थे तो आवाज आती थी “फ़ट्ट फ़ट्ट फ़ट्ट फ़ट्ट”। दीप्ती नीचे से अपनी चूत का दाना भी रगड़ रहे थी। और “आअह आअह” की आवाजें भी निकल रही थी।
उधर दूसरे कमरे में अशोक नेहा की गांड चोद रहा था, पागलों की तरह। “आअह मैडम लड़की की गांड चोदने का अपना ही मजा होता है। क्या मांसल गांड है, भरे भरे चूतड़ l लंड टकराने पर क्या मस्त हिलते हैं”।
“मैडम आपकी गांड तो लगता है पहले नहीं चुदी, पहली बार चुद रही है। आपकी गांड का छेद बड़ा टाइट है। लंड अंदर रगड़ कर जा रहा है”।
अशोक बीच बीच में अपना लंड पूरा बाहर निकालता और बड़ी तेजी के साथ एक झटके के साथ अन्दर धकेल देता था। “ये लो मैडम ये लो आअह ….आअह “।
नेहा भी बोलती, “आअह अशोक फिर कर ऐसे ही एक बार और “।
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बीच बीच में अशोक नेहा की चूत में भी लंड डाल देता था और बीस पच्चीस धक्के चूत में लगा देता था। कुछ ही देर की इस चुदाई के बाद नेहा झड़ गयी और बोली, जा अशोक अब तू जीजी की गांड चोद और साहिल को भेज दे। उसके लंड का भी मजा ले लूं अपनी आगे चूत मैं और पीछे गांड में।
अशोक दीप्ती वाले कमरे में चला गया और साहिल से बोला, “साहिल जा उधर, इनको मैं संभालता हूं। उन मैडम को अब तेरा लंड चाहिए”।
दीप्ती अशोक से बोली, “थोड़ा और चोदने दे अशोक। बस झड़ने ही वाली हूं मैं। फिर दीप्ती साहिल से बोली, “चल साहिल लगा जोर जोर से और छुड़ा दे मेरा पानी “।
अशोक बोला, मैडम मैं निकालता हूं आपका पानी। उधर नेहा मैडम चूतड़ उठा कर साहिल के लंड का इंतज़ार कर रही हैं। अशोक साहिल से बोला, “साहिल तू जा उधर, मुझे निकाले दे इनका पानी “।
साहिल ने लंड दीप्ती की गांड में से निकला और दुसरे कमरे की तरफ चल पड़ा। अशोक ने एक झटके से अपना लंड दीप्ती की गांड में धकेल दिया “ये लो मैडम बिठा दिया जड़ तक “।
दीप्ती ने फिर एक सिसकारी ली “आअह आअह क्या चोदते हो सालो तुम लोग। दोनों एक से बढ़ कर एक हो”। दीप्ती बोलती भी जा रही थी और मस्ती में जोर जोर चूतड़ भी घुमा रही थी। अशोक ने एकदम लंड गांड में से निकाला और बिना देर लगाए चूत में डाल दिया। अपनी उंगली उसने दीप्ती की गांड में डाल दी और उंगली टेढ़ी कर के आगे पीछे करने लगा।
दीप्ती को इससे बड़ा मजा आया। वो पीछे देखते हुए बोली ,”अब साले अब ये क्या कर रहा है तू – बड़ा मजा आ रहा ह। ऐसे ही कर “।
अशोक कुछ देर ऐसे ही करता रहा। अशोक के लम्बे लंड के लम्बे लम्बे धक्कों और गांड में घुसाई टेढ़ी उंगली की हरकत से दीप्ती पांच मिनट में ही झड़ गई। दीप्ती ने चूतड़ हिलने बंद कर दिए। दीप्ती को पूरा मजा आ चुका था। मगर अशोक का लंड वैसे ही खड़ा था खूंटे के तरह दीप्ती के चूत के अंदर।
दीप्ती ने पूछा, “क्या हुआ अशोक, तेरा लंड तो अभी भी खड़ा ही है। तू नहीं झडा अभी भी “?
अशोक बोला नहीं झडा मैडम। इतनी टाइट गांड और चूत चुदाई और इतनी देर खड़ा रहने के बाद तो अब हल्का हल्का दर्द भी कर रहा है।
दीप्ती अशोक से बोली ,”ऐसी बात है क्या ? चल इधर आ मैं दूर करती हूं तेरे लंड का दर्द। चल निकाल लंड मेरी चूत में से और आजा मेरे मुंह में डाल दे। ऐसे झड़ने वाला तो नहीं तू आज, मैं करती हूं तेरे इस खम्बे का इलाज “।
अधखुली आंखो अशोक ने लंड निकला – ये भी पता नहीं चल रहा था की लंड गांड में था की चूत में – दीप्ती से बोला, “आईये मैडम निकालिये मेरे लंड का गर्म पानी और पीजिये “।
अशोक खड़ा हो गया। दीप्ती उसका लंड चूसने लगी। बढ़िया से चूस रही थी और अपनी जीभ सुपाड़े के छेद पर घुमा रही थी। अशोक को मजा आ रहा थ। उसने दीप्ती का सर पकड़ लिया और बोला , “आह मैडम मजा आरहा है ऐसे ही चूसिये जोर जोर से आअह … निकालिये जो भी है मेरे लंड में अअअअअ मैडम”। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दूसरे कमरे में नेहा और साहिल की चुदाई जोरों पर थी। “आआह साहिल क्या मस्त चोदता है तू। लगा धक्के। पूरा लंड निकाल कर फिर अंदर डाल”।
साहिल ने पूरा लंड निकाला और फचाक से अंदर गांड में डाल दिया।
नेहा बोली, “आअह ये हुई ना बात साहिल आआह ऐसे ही चोद मुझे तू। मेरी गांड का भुर्ता बना दे आज फुला दे इसको “।
साहिल भी बोल रहा था। “ऐसी गांड चोदने का इतना मजा कभी नहीं आया। क्या टाइट है आपकी गांड। रगड़ कर जा रहा है मेरा लंड”।
नेहा बोली, “साहिल झड़ने वाली हूं मैं झड़ने वाली हूं लगा …लगा …लगा। मेरी चूत में डाल साहिल चूत में डाल साहिल आअह”.
साहिल ने अपना लंड नेहा की गांड में से निकाला और चूत में एक झटके से पूरा का पूरा अंदर डाल दिया।
साहिल ने लंड नेहा की चूत में डाल वो धक्के लगाए कि नेहा “आअह साहिल आअह साहिल आअह” की ऊंची आवाज के साथ ही आगे की तरफ ढेर हो गयी।
नेहा को मजा आ चुका था। दीप्ती ने इतनी जोर से सिसकारी ली थी दूसरे कमरे में दीप्ती और अशोक तक भी दीप्ती की इस सिसकारी की आवाज पहुंची होगी।
साहिल का लंड नहीं झडा था। साहिल सोफे पर बैठ गया – खड़े लंड के साथ। कुछ मिनटों के बाद नेहा उठी और बोली “मजा आ गया साहिल।
“क्या हुआ साहिल तेरा तो अभी भी खड़ा ही है।अब क्या करना है बता। पता नहीं कितनी बार पानी निकला आज मेरा”।
“बड़ी किस्मत वाली है तेरी भाभी गुंजन जिसे तेरी जैसी मस्त चुदाई करने वाला देवर मिला”।
“अच्छा एक बात बता साहिल गुंजन झेल लेती है तेरी ऐसे जोरदार चुदाई”? दीप्ती ने पूछा।
साहिल ने जवाब दिया, “अरे मैडम गुंजन चुदाई का मस्त मजा लेती है और मस्त मजा देती है। मन से चुदवाती है वो, बिलकुल आप दोनों मैडमों की तरह”।
नेहा बोली, “साहिल तू बैठ मैं देख कर आती हूं उधर जीजी का क्या चल रहा है फिर आ कर देखते हैं अब क्या करना है। तेरे खड़े लंड का इलाज तो करना पडेगा – ऐसे खड़ा खड़ा थोड़ा छोड़ना है “।
नेहा गयी और उलटे पैर लौट आयी। “जीजी अशोक का लंड जोर जोर से चूस रही है साथ ही अपने चूतड़ हिला रही है। लगता है मुंह में पानी छुड़ाएगी”।
“आजा साहिल, तू भी चुसवा मुझसे अपना लंड”।
साहिल सोफे पर बैठा हुआ अपना खड़ा लंड दबा रहा था। बोला “ठीक है मैडम बैठिये बेड पर डालूं लंड आपके मुंह में ।
नेहा बेड पर बैठ गयी। साहिल नेहा के सामने खड़ा हो गया। नेहा ने साहिल का तना हुआ लंड अपने मुंह में ले लिया और बड़े ही प्यार से चूसने लगी।
साहिल को लगा अब मजा आएगा। वो लंड धीरे धीरे आगे पीछे कर रहा था। जल्दी ही साहिल बोला मैडम “अब मैं झडूंगा”।
नेहा बोली कुछ नहीं बस सर हिला दिया। नेहा लंड चूस रही थी साथ साथ चूत रगड़ रही थी।
थोड़ी सी और चुसाई के बाद साहिल के मुंह से जोर की आवाज निकली “आआह…..ह्हआअह ….नेहा मैडम निकल गया मेरा”। और उसने नेहा का मुंह अपने गर्म पानी से भर दिया। दुसरे कमरे में अशोक दीप्ती के मुंह में पानी छोड़ चुका था। एक घंटे की चुदाई ने थका दिया था सब को। साहिल को तो दो घंटे हो गए थे चुदाई करते करते। वो तो बेड पर लेट ही गया। उधर से दीप्ती आयी। वो भी थक चुकी थी। आ कर साहिल के बगल में हे लेट गयी। “क्या मस्त लौड़े हैं तुम्हारे – साले झड़ते भी तो नहीं।
दीप्ती नेहा से बोली, “नेहा थोड़ा आराम कर ले फिर चाय बना दे कुछ नाश्ता करवा दें इनको। हम भी कुछ खा लें”।
नेहा बोली हां जीजी जाती हूं पकौड़े निकल लेती हूं पंद्रह मिनट लगेंगे। नेहा ने अशोक को आवाज लगाई, “अशोक इधर आ जरा मेरी हेल्प कर”। नेहा को भी मालूम था की साहिल ने बहुत ज़्यादा चुदाई की थी। दोनों के किचन में जाने के बाद दीप्ती साहिल से बोली, “साहिल तू मुझे अपना फोन नंबर दे जाना। मेरा चुदने मन करे हुए मैं तुझे बुलाऊं तो तू आएगा ?
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“आऊंगा मैडम, क्यों नहीं आऊंगा। मुझे तो खुद भी आपकी चुदाई में बड़ा मजा आया है”।
दीप्ती बोली, “कल भी तो आओगे तुम दोनों “?
“हां मैडम कल भी आना है और आगे भी जब भी आप बुलाएंगी मैं जाऊंगा, बस एक दिन पहले बताना आप मुझे”।
दीप्ती ने उठ कर साहिल का लंड मुंह में ले लिया।
नेहा और अशोक किचन से सामान ले आईं – पकौड़े और चाय।
नेहा दीप्ती से बोली, “जीजी चाय पी लो फिर चूस लेना”।
नंगे ही बैठे उन्होंने ये नाश्ता कर लिया।
दीप्ती ने पूछा। “आज का तो हो गया अब कल का क्या है”?
साहिल बोला, “मैं तो आऊंगा ही”। अशोक बीच में ही बोल पड़ा “मैं भी आऊंगा”।
साहिल बोला , “मैडम कल हम ग्यारह बारह बजे आएंगे और देर तक चुदाई करेंगे”।
नेहा बोली “ठीक है”। फिर हंस कर बोली, “हम भी अपनी चूतें और गांड के छेदों के ताले खोल कर इन्हें तैयार रखेंगी”।
साहिल और अशोक ने एक एक बार दीप्ती और नेहा के होठों को चूमा – चूत और गांड में उंगलियां डाली और हंसते हुए निकल गये। अगले दिन भी दोनों आये और चुदाई का बढ़िया दौर चला। दो दो तीन तीन बार चूत और गांड के रगड़ाई हुई साहिल ने दीप्ती को ज़्यादा चोदा और अशोक ने नेहा को। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
नेहा को अशोक से गांड चुदवाने का ज्यादा मजा आया। दो दिन फिर कोइ चुदाई नहीं हुई। दोनों ने एक दूसरी की चूत और गांड चाट चाट कर ही मजे ले लिए। नेहा के जाने का दिन भी आ गया। दीप्ती का खस्सी चोदू अजय भी सूरत से आ वापस आ गया था।
मगर अब दीप्ती को उसकी तरफ देखने की जरूरत नहीं थी। नेहा बढ़िया मस्त चुदाई का रास्ता बता चुकी थी। अगले दिन नेहा ने टैक्सी बुला ली। टैक्सी में बैठने से पहले बोली, “जीजी मैं नॉएडा जा कर रबड़ के लंड का आर्डर करती हूं। याद रखना कूरियर वाला पैकेट खोलने को बोलेगा”।
“पैकेट खोल लेना देख लेना। मुझे भी पता नहीं जीजी कैसा लंड आएगा। अगर तो सीधा सदा चूत में लेने वाला ही हुआ, तब तो कोइ मुश्किल नहीं, अगर कुछ अलग तरह का हुआ तो कूरियर वाला भी इसको इस्तेमाल करने का तरीका बता कर जाएगा”।
दीप्ती ने नेहा से पूछा, “नेहा ऐसा भी क्या तूने मंगवाया है जो कूरियर वाले को बताना पड़े”।
“जीजी असल में वो नॉएडा वाली दूकान वाला कह रहा था कि एक बिलकुल नए डिज़ाइन का सामान आया है और बहुत डिमांड चल रही है इसकी। दूकान वाले ने मुझे लंड की पिक्चर भी दिखाई थी। जीजी मुझे पिक्चर से तो कुछ ज़्यादा समझ नहीं आया। मुझे यहां आपके पास आने की भी जल्दी थी इस लिए मैंने दूकान वाले से कहा कि अभी तो मैं कहीं जा रही हूं वापस आ कर अच्छे से समझूंगी”।
“मैंने अपने लिए भी एक वैसा ही मंगवा लिया है”।
“जीजी और एक बात, कूरियर वाले से शर्माना मत। इन लंड और इस तरह के और सेक्स टॉयज का इस्तेमाल बताना भी उनके काम का हिस्सा ही है”।
“और जीजी अगर कूरियर वाला लड़का बढ़िया हुआ तो चांस ले लेना। ऐसे लड़के बड़ी मस्त चुदाई करते हैं। जीजी अगर लडक़ा मस्त चुदाई करता हुआ तो मुझे भी बता देना। अगर वो लंड ले कर मेरे पास पहले आ गया तो मैं आप को बता दूंगी”।
दीप्ती बोली, “मगर नेहा हो सकता है तुम्हारा और मेरे वाला कूरियर वाला एक ना हो”।
भवन ने जवाब दिया, “नहीं जीजी। दिल्ली के इस तरफ ये टॉयज़ बांटने वाला एक ही है। दुकान वाले के तीन चार लड़के ही हैं जो ये रबड़ के लंड, फुद्दीयां, चूतड़ और होंठ ले कर जाते हैं। दूकान वाला अपने ख़ास लड़कों को ही ये काम देता है”।
दीप्ती बोली, “नेहा तेरी बातें सुन सुन कर मेरी चूत फिर गीली हो गयी है। क्या हो गया है हमारी चूतों को”।
“जीजी मेरा भी आप वाला ही हाल है। लगता है नोएडा पहूंच कर पहला काम इसमें रबड़ का लंड लेने का ही करना पडेगा”।
अच्छा जीजी बाए।
बाए भवना।
इतनी चुदाई के बाद दीप्ती कुलश्रेष्ठ और उसकी देवरानी नेहा कुलश्रेष्ठ की प्यासी चूतों की आग काफी हद तक ठंडी हो चुकी थी। नेहा दीप्ती को चुदाई का जो रास्ता बता गयी थी वो कामयाब था। महीने में एक या दो बार ज़िप ठीक करने वाले आ कर दीप्ती के दोनों छेद – चूत और गांड चोद जाते थे।
मुंह में भी गर्म गाढ़ा पानी छुड़ा जाते थे। ज़िप ठीक करने वाले अशोक और जनक, अब जिस दिन दीप्ती के मुहल्ले में आते, खूब बन ठन कर आते थे। बीच में दीप्ती साहिल को भी बुला लेती। अशोक और जनक ठीक ठाक चोदते थे मगर दीप्ती को असली चुदाई का मजा साहिल के साथ ही आता था। हर बार कुछ नया करता था – नए तरीके से चुदाई करता था।
बीच में जब अजय कहीं बाहर जाता था तो कभी कभी साहिल रात को भी रुक जाता था। जिस रात वो रुकता था पूरी रात चुदाई होती थीI सब ठीक चल रहा था। फोन पर देवरानी नेहा बताया की उसने रबड़ के बिलकुल लेटेस्ट मॉडल के दो लंडों का आर्डर कर दिया है एक दीप्ती के लिए और एक अपने लिए। नेहा ने बताया की उसने पहले वाले से मोटा लंड मंगवाया है। अब मोटा लंड चूत में लेने का मन करता था।
लंड बैटरी चलित थे और थ्री इन वन थे – मतलब तीन काम करते थी। चूत, गांड और चूत के दाने, तीनो पर अपना कमाल दिखाते थे। बस अब इंतज़ार ही हो रहा था कि कब कूरियर वाला ये लंड ले कर आये। नेहा वापस जाने से पहले बता ही चुकी थी, कूरियर वाला इस लंड के प्रयोग करने का तरीका भी समझा कर जाएगा।
जब भी दीप्ती इस बारे में सोचती उसकी चूत गीली हो जाती थी और गांड का छेद फड़कने लग जाता था। तीन हफ्ते के लम्बे इंतज़ार के बाद आखिर कूरियर वाला पैकेट ले कर आया। नीचे घंटी बजी और आवाज आयी “कूरियर है मैडम”।
“कूरियर है मैडम”, आवाज सुनते ही दीप्ती की चूत ने एकदम पानी की पिचकारी छोड़ी। चलने में भी पता चल रहा था की पानी जांघों के गीला कर रहा थ। बस अब कूरियर वाला बढ़िया हो तो आज चूत और गांड दोनों की ईद हो जाएगी, और अगर कहीं कूरियर वाला आस पास का ही रहने वाला हुआ तो आगे का रास्ता भी खुल जाएगा।
दीप्ती घर में साड़ी तो पहनती नहीं थी, वही ब्लाउज और पेटी कोट ही पहनती थी। चलते वक़्त पीछे मोटे चूतड़ भी ठुमक ठुमक करते थे और आगे ऊपर चूचियां भी। दीप्ती ने ऊपर दुपट्टा ओढ़ा और नीचे आंगन में झांक कर कहा,”आ जाओ भैया, ऊपर आ जाओ”।
पहली नजर में तो कूरियर वाला ठीक लगा था। लम्बा, पतला, हल्का सांवला रंग, सर पर कूरियर कम्पनी की कैप पहनी हुई थी – टांगों के साथ चिपकी जींस पहनी हुई थी, ऊपर टी शर्ट और कूरियर कम्पनी की जैकेट। जैकेट के ऊपर नाम की प्लेट लगी हुई थी। कुल मिला कर दीप्ती को मुम्बई वाला लग रहा था। लड़का ऊपर आ गया। पैकेट दीप्ती के हाथ में दे कर बोला, “खोल कर देख लीजिये मैडम”।
दीप्ती को तो पता ही थी क्या है। घर के पते पर तो कोइ कूरियर आता ही नहीं था। बनावटी हैरानी के साथ दीप्ती ने बॉक्स को इधर उधर पलटा और ऊपर लिखे को पढ़ने का दिखावा करते हुए कूरियर वाले से पुछा, “क्या है इसमें”। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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कूरियर वाला बोला “मैडम जो आपने मंगवाया है वही होगा। खोल कर देख लीजिये”।
दीप्ती बॉक्स खोलने की कोशिश करने लगी। नेहा जैसे तेज तो थी नहीं दीप्ती। मजबूती के साथ बंद किया गत्ते का बॉक्स खुल नहीं रहा था।
कूरियर वाले लड़के ने कहा “लाईये मैडम मैं खोल देता हूं”। दीप्ती ने लड़के की तरफ देखा, जैकेट पर नाम की प्लेट लगी हुई थी, गणेश नाइक – मतलब महाराष्ट्रियन ही था।
गणेश ने बॉक्स खोला और अंदर से प्लास्टिक का उत्तम क़्वालिटी का प्लास्टिक का एक और बॉक्स निकाल कर दीप्ती के हाथ में पकड़ा दिया। “लीजिये मैडम अब खोल कर देखिये”।
दीप्ती बड़े असमंजस में थी, शर्मा भी रही थी। मुंबई वाली देवरानी नेहा होती तो अब तक लंड निकाल कर अपनी चूत में डाल भी चुकी होती। मगर ये दीप्ती तो हरियाणा के रोहतक की रहने वाली – केवल जुबान की ही तेज थी, वैसे सीधी ही थी।
गणेश ने ही प्लास्टिक का बॉक्स खोला और बड़ा सा रबड़ का लंड दीप्ती के हाथ में पकड़ा दिया। दीप्ती ने नजरें झुकाये ही देखा, बीच का हिस्सा तो असली लंड जैसा ही था, आठ इंच लम्बा और दो इंच मोटा। मगर उसके साथ कुछ और भी लगा हुआ था जो दीप्ती को समझ नहीं आ रहा था।
गणेश बोला, “मैडम, बिलकुल नया मॉडल मंगवाया है आपने”।
दीप्ती चुप रही।
गणेश बोला, “मैडम ऐसा कभी इस्तेमाल किया है” ?
अब दीप्ती ने दबी आवाज़ में कहा, “मेरे पास तो ऐसा वैसा कोइ भी नहीं है”।
अरे ? गणेश हैरानी से बोला, “ये पहला है “?
दीप्ती ने सर हिला कर हां कहा। गणेश बोला, “फिर तो आपको शुरू शुरू में दिक्क्त आएगी इसका सही इस्तेमाल करने में”।
“मैडम आप अगर कहें तो मैं समझा दूं कैसे इस्तेमाल करते हैं “?
दीप्ती बोली तो कुछ नहीं मगर गणेश की तरफ देख कर धीरे से हां में सर हिला दिया।
“आईये”, गणेश ने दीप्ती के कमर में हाथ डाला और कमरे के अंदर की तरफ ले चला। दीप्ती भी खिंचती चली गयी। गणेश ने कहा “मैडम ये पैटीकोट उतारिये”।
दीप्ती सकुचा रही थी। बाहर के लड़कों से चुदाई जरूर करवाती थी लेकिन चुदक्क्ङ और बेशरम भी नहीं थी। दीप्ती ने जब फिर भी दीप्ती ने ब्लाउज और पेटी कोट को हाथ नहीं लगाया तो गणेश ही पेटी कोट का नाड़ा खोलने लगा। दीप्ती ने मना भी भी नहीं किया। नाड़ा खुलते ही पेटी कोट नीचे सरक गया।
गणेश ने सोचा, क्या मजेदार चूतड़ हैं – फूले हुए। क्या चूत है – उभरी हुई। फिर गणेश ने दीप्ती को घुमा कर पीठ से ब्लाउज के हुक भी निकाल दिए I
दीप्ती अब बिलकुल नंगी थी। चूत गीली हुई पड़ी थी। गणेश ने चूत को हल्के से छुआ और बोला “मैडम ये तो तैयार है”।
“आईये मैं समझाता हूं ये लंड कैसे इस्तेमाल करते हैं”।
गणेश बोला, “मैडम बहुत मेंहगे वाला और बड़ा लंड मंगवाया है आपने” I
दीप्ती ने दबे स्वर में कहा, “ये वाला कितने का है”?
गणेश बोला “अट्ठारह हजार का”। दीप्ती हैरान हुई, “अट्ठारह हज़ार का” ?
गणेश दीप्ती के चेहरे की तरफ देख कर बोला, “क्या मैडम क्या ये आप ने नहीं मंगवाया ? लगता है किसी ने गिफ्ट किया है”I
“वैसे मैडम आज कल ढाई इंच मोटे और नौं इंच लम्बे लंडों की ज्यादा डिमांड है। मगर वो बड़े लंड गांड के लिए नहीं हैं – वो खाली चूत चोदने के लिए ही हैं। पच्चीस तीस साल की औरतें ये ज्यादा मंगवा रही हैं”।
फिर गणेश ने दीप्ती को बताना शुरू किया। “देखिये मैडम, ये इस लंड का मुख्य भाग है, बिलकुल मर्द के लंड जैसा। ये तो आप समझ ही गयी होंगी की इसको चूत में डालना है”।
ये जो लंड के अंतिम छोर से नीचे की तरफ लटक रहा है अंग्रेज़ी के C शब्द जैसा – जिसके सिरे पर नीम्बू के आकार का गोल गोल लगा हुआ है। इसको नीचे पीछे करके गांड में डालना है। और ये जो छोटा उंगली की तरह का उंगली के ही बराबर है ऊपर की तरफ, ये अपने आप आपकी चूत के दाने पर लग जाएगा और जैसे मर्द दाना चूसते हैं, वैसे आपका दाना चूसेगा”।
दीप्ती सोच रही थी ये तो कमाल है। उसने गणेश की तरफ देखा I
गणेश ने फिर लंड के आख़री सिरे को ऊपर किया जो चपटा सा था, और बोला, “मैडम, इस ढक्क्न को खोल कर ये जो दो सैल हैं ये इसके अंदर डाल देने हैं”। गणेश ने सैल लंड के अंदर डाल दिए और बात जारी रखी, “और फिर मैडम, इस बटन को ऑन करते ही लंड अपना काम करना चालू कर देगा “।
गणेश ने जैसे ही बटन ऑन किया लंड के आगे का सिरा, C के आगे लगा हुआ निम्बू की तरह का गोल भाग और उंगली की तरह के भाग का अंतिम छोर हल्की घररररर की आवाज के साथ वाइब्रेट करने लगे। रबड़ का लंड अपना काम करने के लिए तैयार था।
गणेश बोला “मैडम आपको लग कहा होगा की ये जरा मुश्किल है, मगर मैडम ऐसा नहीं है। मैं आपको इसे आपको पूरी तरह इस्तेमाल करके दिखाता हूं”।
दीप्ती गणेश के तरफ देखने लगी, आखों में लंड की प्यास साफ़ झलक रही थी।
गणेश ने दीप्ती को बताया। “मैडम इसे आप कैसे भी इस्तेमाल कर सकती हैं। जितने भी तरीकों से आप चूत या गांड चुदवाती हैं, उतने ही तरीकों से आप इस लंड को चूत में या गांड में ले कर मजे ले सकती हैं”।
“मैं अब बताता हूं की इस लंड का कौन सा भाग कहां डालना है और कैसे” ।
गणेश ने पूछा, “कैसे चुदवानी है मैडम इस लंड से” ?
दीप्ती का तो जैसे दिमाग ही काम नहीं कर रहा था वो बैठी ही रही।
गणेश बोला “चलिए मैं ही बताता हूं। वैसे तो, जैसा की मैंने बताया आप इसको कैसे भी इस्तेमाल कर सकती हैं, पर शुरू करने के लिए सब से आसान है आप बेड पर घुटनों और कुहनियों के बल उलटा लेट जाईये, जैसे पीछे से चूत चुदवाने चुदवाने के वक़्त करती हैं”। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीप्ती लेटने के लिए उठी की गणेश बोला “मैडम कोइ क्रीम भी ले आईये, ये नीम्बू जैसा गोल हिस्सा गांड में डाला जाता है”.
दीप्ती उठी और साहिल वाली जैल ले आयी।
गणेश ने जैल की टीयूब पकड़ी और सोचा, “तो ये मैडम गांड भी चुदवाती है”।
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दीप्ती उकडू हो कर उलटा लेट गयी। चूत तो गीली ही थी। गणेश ने रबड़ का लंड चूत में जड़ तक बिठा दिया। दीप्ती ने एक सिसकारी ली आआआआह। फिर गणेश ने गांड के छेद पर जैल लगाए कर गोल हिस्सा गांड में धकेल दिया और बोला, “मैडम आप पहले लंड को चूत में डालें या इस गोल हिस्से को गांड में डाले ये आपकी मर्ज़ी है, जैसे भी आपको अच्छा और आसान लगे”। अब लंड का उंगली जैसा हिस्सा दीप्ती के चूत के दाने के बिलकुल ऊपर था।
गणेश बोला, “लीजिये मैडम पूरी तैयारी हो गई है। एक हाथ पीछे करिये मैं बता दूं इसको चालू कैसे करते हैं और आपको बटन कहां है ये भी पता लग जाएगा”।
दीप्ती ने एक हाथ नीचे से अपनी चूत से पीछे निकल लिया। गणेश एक उभरे गोल मुलायम बटन पर दीप्ती की उंगली रखी।
गणेश ने समझाया मैडम इसको एक बार दबाओ तो वाईब्रेटर चालू हो जाता है और दुबारा दबाओ तो बंद हो जाता है। चलिए मैडम दबाईय और चुदाई का मजा लीजिये। दीप्ती ने बटन दबाया और घरररररर के आवाज के साथ वाईब्रेटर के साथ लंड चालू हो गया।
लंड का हिस्सा जो चूत के अंदर था हल्का आगे पीछे होने लगा, मगर बड़ी तेजी के साथI गोल निम्बू जैसा हिस्सा जो गांड के अंदर था वो कम्पन करने लग। उंगली जैसा हिस्सा जो चूत के दाने ऊपर था वो थोड़ा सा खाली सा था जिसमें चूत का दाना फिट सा हो गया था। इस उंगली जैसे भाग का अगला हिंसा खुलने बंद होने लगा जैसे मर्द के होंठ चूत के दाने को चूसते हैं।
दो मिनट भी नहीं हुए होंगे की दीप्ती को मजा आने लगा “आअह अअअअअह आआह आअह ये तो बहुत बढ़िया मजा देता है आआह आआह आआह”।
दीप्ती जोर जोर से चूतड़ हिला रही थी। इस लंड के साथ तो मजे के लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं थी। न गांड में उंगली करने की। ना चूत के दाने को रगड़ने की। लंड पहले से ही चूत में था.
दीप्ती के सिसकारियां बढ़ गयी थी “ह्म्म्मम्म हहमम हम्म्म ह्ह्हम्म्म हह”। दीप्ती को मजा आने वाला थ। दीप्ती के मुंह से एक सिसकारी निकली “हहह्म्म हहहम ह्ह्हह्हं” और वो झड़ गयी। दीप्ती को मजा आ चुका था। अब वो लंड का कम्पन बंद करना चाहती थी। नीचे चूत की तरफ से हाथ डाल कर लंड का स्विच ढूढ़ रही थी जो मिल नहीं रहा था।
दीप्ती जल्दी में बोली, “गणेश इसका स्विच नहीं मिल रहा, बंद करो इसको, नहीं तो मेरी चूत दुबारा गर्म हो जायगी”।
गणेश सोफे बैठा हुआ दीप्ती को चूतड़ हिलाते और लंड का मजा लेते देख रहा था। उसने अपना लंड हाथ में लिया हुआ था और वो मस्ती में मुट्ठ मार रहा था। गणेश उठा और दीप्ती के पीछे चला गया। दीप्ती नीचे चूत से हाथ निकल कर अभी भी स्विच ही ढूंढ रही थी।
गणेश ने दीप्ती की उंगली स्विच पर रक्खी और बोला “अब दबाईये”। दीप्ती ने स्विच दबाया और लंड औरऔर उसकी बाकी हिस्से वाइब्रेट करने बंद हो गए। दीप्ती खुद से ही बोली, “हे भगवान, कितना मजा देता है ये”। कुछ मिनट ऐसे ही उलटा लेटने क बाद दीप्ती ने पहले लंड अपनी चूत में से बाहर निकला और फिर नीम्बू जैसा गोल हिस्सा गांड में से निकाला और उठ कर सोफे पर बैठ गयी।
दीप्ती गणेश से बोली, “गणेश कमाल की चीज़ है ये तो”।
“मैडम अठारह हजार भी तो देखिये। वैसे पचीस हजार तक की कीमत वाले भी हैं। गणेश बोला तो मैडम आप समझ गयीं इसको कैसे चलाना है ? शरू शुरू में कुछ दिक्क्त आएगी फिर स्विच वगैरह भी ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपने आप हाथ वहीं पहुंच जाया करेगा”।
“तो मैडम चलूं मैं दो जगह और डिलीवरी देनी है”। दीप्ती बोली “ऐसे ही हैं क्या”?
“नहीं मैडम वो हल्के वाला है चार हजार वाला। खाली लंड है। दूसरी तो किसी ने फुद्दी मंगवाई है चोदने के लिए”।
दीप्ती चिल्लाई, “फुद्दी” ?
गणेश बोला “मैडम फुद्दी क्या गांड का छेद भी आता है। खाली गांड का छेद चाहिए या पूरे चूतड़। मुहं का छेद, वैसे ही होंठ जैसे असली के होती हैं। चूचियां – सब कुछ आता है चोदने के लिए”।
दीप्ती केवल इतना ही बोली “कमाल है “!!
गणेश जाने के लिए खड़ा हुआ I
दीप्ती बोली “थोड़ा रुक जाओ गणेश असली चुदाई का मजा नहीं लोगे “?
दीप्ती ने अपनी गीली चूत पर हाथ फेरते हुए कहा “अब चोद कर ही जाओ गणेश इसे”।
गणेश बैठ गया और लंड हाथ में ले लिया।
गणेश बोला, “मैडम लंड चूसो थोड़ा, खड़ा करो”I
गणेश दीप्ती के सामने खड़ा हो गया।
दीप्ती ने गणेश का लंड चूस चूस कर खड़ा कर दिया – आठ इंच का था।
दीप्ती बोली, “गणेश तुम्हारा लंड तो खासा लम्बा है, बोलो क्या चोदना है चूत या गांड”?
दीप्ती उठी, तभी गणेश बोला, “मैडम आपके चूतड़ बड़े सेक्सी हैं, चूसने का मन कर रहा है “।
दीप्ती बोली, “ऐसा है ? तो आओ फिर, चूसो मेरे चूतड़”I
दीप्ती गांड चुदवाने वाले पोज़िशन में गांड पीछे करके लेट गयी और चूतड़ खोल दिए। गांड का छेद गणेश के सामने था। गणेश छेद चाटने लगा। दस मिनट छेद चाटने के बाद गणेश बोला, “चलिए मैडम लेटिए “।
दीप्ती बोली, “गणेश गांड ही चोद दे। अगली चुदाई चूत की कर लेंगे। अभी गांड चुदवाने का मन हो गया है “।
गणेश ने कहा, “ठीक है मैडम, गणेश ने दीप्ती की चूत मे से अपनी उंगलियों से चिकनाहट वाला पानी निकला और गांड के छेद पर लगाया। थोड़ा अपना थूक छेद पर दाल कर छेद को चिकना किया और आठ इंच का लंड अंदर तक धकेल दिया। दीप्ती दर्द से कसमसाई और आगे की तरफ जाने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मगर गणेश ने दीप्ती के चूतड़ कस कर पकड़ लिए और जरा सा भी नहीं हिलने दिया और चुदाई चालू कर दी। आधे घंटे की चुदाई में दीप्ती एक बार चूत में पानी छोड़ चुकी थी। अब गणेश के तगड़े धक्कों ने उसे एक बार और छुड़ा दिया। मगर इस बार आअह की ऊंची आवाज के साथ गणेश भी दीप्ती की गांड में पानी छोड़ गया।
आधा घंटा आराम करने के बाद दीप्ती गणेश का लंड फिर चूसने लगी। लंड फिर तन गया। इस बार दीप्ती ने वैसे ही चुदवाया जैसे गणेश ने कहा था। सीधा लेट कर। नीचे तकिया रख के चूत उठा कर। गणेश ने जब पूरा लंड अंदर डाला तो दीप्ती बोल उठी, “गणेश मजा आ गया। सच में ही कहीं अंदर किसी चीज़ को दबा रहा है। चोद गणेश चोद अब”।
दीप्ती ने गणेश के होंठ अपने होठों में पकड़ लिए और चूसने लगी। ये चुदाई मस्त थी। लम्बी चली इस चुदाई ने दीप्ती को जन्नत दिखा दी। गणेश बोला, “झड़ने वाला हूं मैं “। इतना सुनना था की दीप्ती ने गणेश को कस कर पकड़ लिया और नीचे से जोर जोर से चूतड़ घुमाने लगी।
जल्दी ही गणेश झड़ गया। साथ ही दीप्ती भी झड़ गयी। थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद गणेश ने ढीला हुआ लंड दीप्ती की चूत में से निकाला और बाथ रूम की तरफ चला गया। वापस आकर कपड़े पहनते हुए बोला, “मैडम आप बहुत बढ़िया चुदवाती हो, मजा आ गया। मैं अपना नबर दे देता हूं जब मर्जी बुलाओ मुझे”।
कपड़े पहन कर जाने लगा तो बोला, “मैडम कभी पूरी रात का प्रोग्राम बनाओ मजा आ जाएगा चुदाई का “।
गणेश ने अपना नंबर दीप्ती को दे दिया।
दीप्ती बोली, “ठीक है गणेश। देखती हूं। और हां गणेश, कभी मौक़ा मिले तो वो दस इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा वाला ले कर आना। ले कर तो देखें कैसा लगता है चूत में लेने पर – गांड में तो तुम बोल रहे हो उसे डालते नहीं हैं”।
गणेश बोला, “जरूर मैडम ” Iऔर गणेश चला गया।
दीप्ती सोचने लगी, कहां तो खस्सी अजय के कारण चुदाई को तरसती थी और कहां अब जनक, अशोक, साहिल और ये गणेश – चार चार चोदने वाले हैं। और हाथ में पकड़े रबड़ के लंड को देख मन ही मन बोली, “ये भी कौन सा कम है”।
“बस अब एक बार विपिन इस बार की छुट्टियों में आ जाए और चोद दे तो सारी कमी पूरी हो जायेगी”।
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अब साहिल, अशोक, जनक के साथ साथ गणेश भी दीप्ती को चोदता था। अब जब भी दीप्ती का किसी से चुदवाने का मन करता वो उसको बुलवा लेती। दीप्ती को सब से ज्यादा मजा साहिल और गणेश के साथ ही आता। दोनों बड़ी बेरहमी से दीप्ती को चोदते थे – रगड़ रगड़ के। लेकिन दीप्ती को भी ऐसी ही चुदाई में मजा आने लगा था।
इन सब के बीच में कभी कभी दीप्ती रबड़ के लंड का भी मजा ले लेती थी। वक़्त बढ़िया गुजर रहा थाI अब अगले हफ्ते विपिन भी आने वाला था – दिसम्बर, जनवरी की दो हफ्ते की छुट्टियों में। दीप्ती यही सोचती रहती थी विपिन को कैसे पटाना है। “एक बार विपिन का ‘खास’ लंड ले कर देखें तो सही, नेहा तो बड़ी तारीफ कर रही थी विपिन के लंड की “। विपिन आ गया।
अजय ने खाली यही पूछा, “कितने दिनों के लिए आये हो विपिन “?
विपिन ने भी बस इतना ही बोला, ” तेरह दिन की छुट्टियां हैं भैया फिर एक्स्ट्रा क्लासिज हैं। तीन चार दिन के लिए नॉएडा जाऊंगा महेश भइया के पास”।
अजय बोला, “एक काम करो, नॉएडा पहले हो आओ। अगले हफ्ते मेरा सूरत के साथ साथ विशाखापट्टम का भी प्रोग्राम है। वहां के रेशम के कपड़े की मांग बढ़ रही है। इस बार पांच छः दिन लग जाएंगे”।
दीप्ती ने सोचा विपिन नेहा को चोदेगा इस बार तो – पक्का। साथ ही अजय के के सूरत और विशाखापट्टम के इन दिनों के प्रोग्राम ने उसकी अपनी चूत में खुजली मचा दी। विपिन नॉएडा चला गया था – तीन चार दिन के लिए। वैसे तो लक्ष्मी नगर से नॉएडा 20 किलोमीटर ही है, लेकिन महेश को लगता है कि विपिन उसके पास क्यों नहीं रुकता।
नेहा का फोन तो लगभग रोज़ ही एक बार आ जाता था दीप्ती को। विपिन के जाने के अगले दिन आया फोन आया तो दीप्ती ने पूछ ही लिया, “नेहा, विपिन से चुदाई हुई या नहीं अभी”।
नेहा बोली, “अभी नहीं जीजी। कल तो विपिन सीधा महेश के ऑफिस ही चला गया था, आज भी ऑफिस ही गया हुआ है। लेकिन जीजी इतना बोल गया है कि कल घर पर ही रहेगा ” और फिर नेहा बोली “और जीजी, ये कहते वक़्त वो मेरी चूत की तरफ देख रहा था “।
दीप्ती बोली, “तो नेहा, कल चुदाई पक्की “?
“जीजी लग तो रहा है “।
सीधी दीप्ती ने नेहा से पूछा, “नेहा मुझे बता मैं कैसे पटाऊं विपिन को “?
नेहा बोली, जीजी अगर कल विपिन मुझे चोदता है तो बोलने को तो मैं भी बोल सकती हूं, कि आप की भी चुदाई कर ले। मगर मुझे लगता है इतनी जल्दी भी खुलना ठीक नहीं। आप आते जाते उसे हाथ लगाओ, देखो वो भी आप को हाथ लगाता है ? जीजी आप के पास तो विपिन दो हफ्ते रहेगा, मौक़ा मिल ही जाएगा “।
दीप्ती बोली, नेहा, तुझे मालूम है अजय इसी हफ्ते के आखिर में छः सात दिनों के लिए के लिए बाहर जा रहा है। इसी लिए उसने विपिन को इस बार पहले नॉएडा जाने के लिए बोला”।
नेहा ने कहा, “लो जीजी, फिर क्या है। फिर तो मौक़ा ही मौक़ा। अगर विपिन से आपका फिट हो गया तो एक दिन मैं भी आ जाऊंगी रात रहने। इक्क्ठे चुदवायेंगी अपने इस बीस साल के देवर से”।
दीप्ती हंसी, “ठीक है नेहा, मजा आ जायेगा। चलो फिर, कल फोन करके बताना की क्या हुआ। तुम्हारी लाटरी लगी या नहीं “।
शाम तक भी नेहा का फोन नहीं आया। अगले दिन दीप्ती ने नेहा को फोन किया तो पता चला कुछ नहीं हुआ। उससे अगले दिन विपिन वापस आ गया, बिना नेहा को चोदे। मौक़ा ही नहीं मिला। अब जो कुछ करना था दीप्ती को ही करना था। अगले दिन अजय की फ्लाइट थी विशाखापट्टम के लिए। उस दिन की रात और अगला दिन तो ऐसे ही निकल गया। अजय जा चुका था। दीप्ती से रहा नहीं जा रहा था। नेहा का भी फोन आया था, वो भी विपिन से चुदवाने के लिए उतावली हो रही थी।
नेहा अपने आप से गुस्से से बोली, “इस खस्सी महेश ने तो इस बार विपिन का पीछा ही नहीं छोड़ा”।
उधर दीप्ती अब एक दिन और नहीं रुकना चाहती थी। अजय घर नहीं था। उसे उसी दिन चुदाई चहिये थी विपिन से। दीप्ती की चूत पानी पानी हुई पड़ी थी। दिसंबर का आख़री हफ्ता था, सर्दी चरम पर थी। दीप्ती ने मैक्सी डाली हुई थी। नीचे ना ब्लाउज ना चड्ढी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कमरे का हीटर चलाया हुआ था और तीन सीट वाले लम्बे सोफे पर कम्बल ले कर अधलेटी पसरी हुई टीवी देख रही थी। विपिन छोटे सोफे पर बैठा था। विपिन को सामने देख कर दीप्ती की चूत से नमकीन पानी के फव्वारे छूट रहे थे।
दीप्ती ने विपिन को बोला, “विपिन कम्बल में आ जाओ, सर्दी बड़ी है। अभी तो सात ही बजे है, डिनर में तो अभी टाइम है।
विपिन दीप्ती के पैरों की तरफ कम्बल में आ गया। दीप्ती और विपिन की टांगें एक दुसरे की टांगों में उलझी हुई थी। क्या विपिन भी चुदाई करना चाहता था ? या रिश्तों की एक झिझक दीप्ती और विपिन को रोक रहे थी। विपिन और दीप्ती दोनों ही टांगें इधर उधर कर रहे थे।
दीप्ती चाह रही थी की इसकी टांग विपिन के लंड को छूए तो देखें विपिन की क्या प्रतिक्रिया होती है। या विपिन किसी तरह दीप्ती की चूत को अपने पैर से छू ले तो फिर दीप्ती आगे बढ़े। दीप्ती के हाथ तो अंदर ही थे। दीप्ती ने धीरे धीरे कर के मैक्सी ऊपर कमर तक खींच ली और टांगें फैला ली जैसे लंड डलवाने के लिए तैयार हो । टांगें नंगी थीं और ये तो विपिन को भी पता चल रहा होगा।
दीप्ती को लगा विपिन अपने पैर आगे आगे कर रहा है। दीप्ती थोड़ा और नीचे खिसक गयी। विपिन का पैर अब दीप्ती की नंगी चूत से कुछ ही दूर था। अगर विपिन अपने टांग को थोड़ा सीधा करता तो, पैर सीधा की चूत को छू लेता। विपिन ने वही किया। विपिन ने पैर थोड़ा थोड़ा आगे सरकाया और उसके पैर का अंगूठा दीप्ती की चूत के साथ सट गया।
चूत तो बाहर तक गीली थी। दीप्ती के शरीर में एक करंट दौड़ गया। विपिन समझ गया की पैर कहां है और किसको छू रहा है I उसने पैर का अंगूठा ऊपर नीचे हिलाया और अनजान बनते हुए पूछा, “भाभी मेरे पैर को ये गीला गीला क्या है – कम्बल गीला है क्या “?
दीप्ती ने सोचा बहुत हो गई लुक्का छिप्पी।
दीप्ती ने कहा,” गीला ? नहीं गीला तो नहीं है विपिन “।
विपिन ने फिर अपने पैर का अंगूठा हिलाया। अंगूठा बिलकुल चूत की फांक के अंदर था।
दीप्ती ने बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकारी रोकी। विपिन बोला “भाभी कुछ तो है। मुझे गीला गीला लग रहा है”।
दीप्ती बोली ”तो देख क्यों नहीं लेता”। दीप्ती के इतना कहने की देर थी कि विपिन ने कंबल नीचे फेंक दिया।
विपिन के पैर का अंगूठा दीप्ती की चूत में ही था।
दीप्ती ने विपिन का पैर पकड़ा और जोर जोर से चूत में ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। साथ ही सिसकारी ली “आआह विपिन”। विपिन का लंड भी खड़ा हो गया। विपिन ने दीप्ती को सोफे पर ही लिटाया और छूट की फांकें खोल दी। गुलाबी चूत विपिन के आँखों के सामने थी। विपिन ने कई लड़कियां चोदी थी, मगर इतनी तसल्ली से कभी चूत नहीं देखी थी। गुलाबी रंग। ऊपर चूत का दाना। विपिन ने दीप्ती की गीली चूत के गीले चिकने दाने पर उंगली फेरी तो दीप्ती की सिसकारी निकली आअह विपिन “I
चूत के बीचो बीच छेद जिसमें लंड डाल कर ज़िंदगी का सब से बड़ा मजा लिया जाता है। जिस मजे के लिए लोग इतने पापड़ बेलते हैं – विपिन के सामने था।
विपिन बार बार चूत को किस कर रहा था – चूम रहा था – चूस रहा था।
दीप्ती ने पूछा, “क्या हुआ विपिन ऐसे क्यों कर रहे हो जैसे पहली बार चूत देखी है”?
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विपिन बोला, “भाभी चूतें देखी भी बहुत हैं, चोदी भी बहुत हैं, लेकिन इस तरह से नहीं। वहां तो ये होता है की अगर ऊपर लेट कर चुदाई करनी है तो लड़की नीचे अपनी उंगलियों से चूत की फांकें खोल कर लंड को जन्नत का रास्ता बता देती हैं”।
“और भाभी अगर पीछे से घोड़ी बना कर चुदाई करनी हो तो लड़का हाथ के अंगूठों से चूत चौड़ी करके लंड अंदर डाल देता”।
“गुलाबी चूत का नजारा करने और इस रह चूमने चूसने की तो फुर्सत ही नहीं होती”।
दीप्ती हंस कर बोली, “अच्छी तरह देख ले विपिन। इसी चूत को तूने इस बार चोद चोद कर गुलाबी से लाल कर देना है “।
विपिन ने चूत के छेद में अपनी उंगली डाल दी। दीप्ती ने विपिन का हाथ पकड़ लिया – “आअह विपिन जरा अंदर उंगली टेढ़ी कर के हिला”।
दीप्ती जब उंगली से चूत का मजा लेती थी तो ऐसे ही करती थी। सारी लड़कियां ही ऐसा करती हैं। विपिन ने उंगली टेढ़ी की और अंदर बाहर करने लगा। दीप्ती की सिसकारियां बढ़ती जारही थी “आअह आअह विपिन मजा आ रहा हैं। विपिन बस कर अब डाल लंड चूत में।
विपिन ने सोफे की गद्दी दीप्ती के चूतड़ों के नीचे रक्खी, टांगें फैलाई थोड़ी और ऊपर की तो गांड का छेद भी आँखों की सामने आ गया। विपिन ने एक बार छेद को चाटा तो दीप्ती ने जोर से चूतड़ हिलाये – जरूर मजा आ रहा होगा। अब विपिन से नहीं रहा जा रहा था। उसने लंड को चूत के छेद पर रक्खा और लंड एक ही झटके से फच्च की आवाज के साथ अंदर बिठा दिया।
दीप्ती को तो जैसे जन्नत मिल गयी। उसने विपिन को अपनी बाहों में भींच लिया और बोली, “चल विपिन अब चोद”। विपिन ने ने भी भाभी को बाहों में ले लिया और ज़बरदस्त धक्के लगाने लगा।
तभी दीप्ती विपिन के कान में बोली, “विपिन अंदर बेड पर चलते हैं। अच्छे से खुल के चुदाई करेंगे”।
विपिन ने बोला “ठीक हैं भाभी” और वो दीप्ती की चूत में से लंड निकाल कर खड़ा हो गया।
दीप्ती ने एक नजर विपिन के लंड को देखा – एक दम बांस के डंडे की तरह सीधा खड़ा था। दीप्ती ने एक बार विपिन का लंड मुंह में लिया और उठ गयी।
दोनों कमरे में आ गए।
दीप्ती बोली “विपिन तू लेट जा मैं थोड़ा तेरा लंड चूसूं”।
विपिन लेट गया। सच ही विपिन का लंड ख़ास था। लम्बा मोटा और सुपाड़ा फूला हुआ। दीप्ती ने लंड मुंह में लिया चूसते चूसते होंठ टाइट कर के लंड मुंह से बाहर निकला। सुपाड़ा बाहर निकलते वक़्त होंठ खुल गए और जब सुपाड़ा पूरा बाहर निकला तो होंठ बंद हो गए “पप्प” की आवाज के साथ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुछ देर दीप्ती यही करती रही। दीप्ती की चूत लंड मांग रही थी।
दीप्ती ने विपिन ने कहा “विपिन चलो अब चोदो – मगर थोड़ा अलग तरीके से”।
अलग तरीके से ? कैसे भाभी”? विपिन ने पूछा।
दीप्ती ने कहा “अपना पूरा लंड चूत से निकल कर चूत में डालो। जब तुम्हारे लंड का फूला सूपड़ा चूत के छेद को चौड़ा करता हुआ बाहर निकलेगा “पप्प” की आवाज के साथ ….. आह क्या मजा आएगा”।
विपिन को अपने लंड की इस खासियत का पता था। लड़कियां उसे अक्सर ऐसे ही चोदने के लिए बोलती थीं।
विपिन ने कहा, “फिर तो भाभी ऐसे सीधे लेट कर चुदाई नहीं हो पाएगी। इस तरीके से लम्बा लंड पूरा बाहर निकालना मुश्किल होता है।आप बेड के किनारे पर लेट जाईये और टांगें उठा कर चौड़ी कर लीजिये। मैं खड़ा हो कर आप की चुदाई करूंगा”।
दीप्ती बोली, “कैसे भी कर विपिन, बस मजा दे आज -जन्नत दिखा दे”।
दीप्ती चूतड़ बेड के किनारे पर चूतड़ टिका कर लेट गयी।
विपिन ने दीप्ती की गांड के नीचे तकिया रक्खा, चूत ऊपर उठाई, लंड एक ही बार में फच्च की आवाज के साथ पूरा चूत के अंदर बिठा दिया।
दीप्ती की सिसकारी निकली “आआआह विपिन”।
विपिन ने चुदाई शुरू कर दी – पूरा लंड बाहर निकाल कर एक झटके के साथ चूत में पेल रहा था। मजे के मारे दीप्ती के चूतड़ ऊपर नीचे हो रहे थे। पंद्रह बीस मिनट की चुदाई के बाद आआह उउउउह की आवाज के साथ दोनों का पानी निकल गया। विपिन कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहा फिर लंड निकाल कर सोफे पर बैठ गया।
दीप्ती ऐसे ही लेटी हुई थी। चूतड़ों के नीचे तकिया। टांगें उठी हुई और चौड़ी की हुई। विपिन को दीप्ती की चूत दिखाई दे रही थी साथ ही नीचे गांड की लाइन मस्त कर रही थी। दीप्ती की चूत से थोड़ा थोड़ा सफ़ेद पानी रिस रिस कर नीचे गांड की तरफ जा रहा था।
इस नज़ारे ने विपिन को मस्त कर दिया। उसका लंड फिर खड़ा हो गया। विपिन जा कर दीप्ती के पीछे खड़ा हो गया और लंड दीप्ती के चूतड़ों पर फेरने लगा। दीप्ती की आँखें मस्ती से बंद थी। आँखें खोल कर विपिन की तरफ देखा और पूछा, “क्या हुआ विपिन, फिर चोदने का मन आ गया क्या”।
विपिन बोला, “भाभी अब गांड चोदनी है”।
दीप्ती बोली, “तो फिर चोद – आजा – सोच क्या रहा है “।
जैसे दीप्ती लेटी हुई थी चूत का छेद विपिन के लंड के बिलकुल सामने था मगर गांड का छेद कुछ नीचे था। विपिन ने दीप्ती के चूतड़ों के नीचे एक तकिया और रखा और चूतड़ ऊपर उठा दिए। अब गांड का छेद लंड के बिलकुल सामने था। विपिन ने अपने हाथ से दीप्ती की चूत से निकल रहा चिकनाई वाला सफ़ेद पानी पोंछा और गांड के छेद पर और अपने लंड पर मल दिया। फिर थोड़ा थूक भाभी के गांड के छेद पर लगाया।
विपिन ने लंड का मोटा सुपाड़ा गांड के छेद पर रखा और अंडर धकेला। मोटा सुपाड़ा गया नहीं। विपिन ने थोड़ा थूक और लगाय। मगर सुपाड़ा फिर भी नहीं गया – कैसे जाता ? मोटा ही इतना था। दीप्ती का मन तो चाह रहा था की विपिन को जैल ला कर दे जो साहिल यहां छोड़ कर जाता है दीप्ती की गांड चोदने के लिए। मगर फिर सोचा विपिन ये ना सोचे ये मेरी ये भाभी तो चुदकक्ड़ है।
दीप्ती बोली, “विपिन, तेरा लंड मोटा है नहीं जा रहा, मुझे भी दर्द कर रहा है। तेरे लंड की मलाई से अभी भी भरी पड़ी है मेरी चूत। मैं थोड़ा जोर लगा कर निकलती हूं। तू लेसदार पानी मेरी गांड गांड के छेद पर लगा। गांड छेद चिकना हो जाएगा फिर डाल लंड”।
विपिन ने हाथ दीप्ती की चूत की पीछे रखा I दीप्ती ने हल्का नीच की जोर लगाया। फर….फर करके ढेर सारा चिकना पानी विपिन के हथेली पर आ गया। विपिन ने सोचा इतने लेसदार पानी तो एक गांड क्या चार गाँडों को चोदा जा सकता है।
विपिन ने खूब सारा सफ़ेद पानी अपने लंड पर लगाया, ढेर सारा दीप्ती की गाड़ के छेद पर और पहले एक उंगली से गांड के अंदर लगाया, फिर दो उंगली डाल दी। दो उंगली जाते ही मुकुइल जोर से चिल्लाई “आआह विपिन क्या कर रहा है ऐसे ही मजा आ जाएगा। डाल दे अब विपिन नहीं रहा जा रहा। खोल मेरी गांड को ….आआह”।
ऐसी कामुक सिसकारियां विपिन ने कभी नहीं सुनी थीं। “ले भाभी ले” और उसने सुपाड़ा अंदर कर ही दिया। दीप्ती थोड़ा आगे की तरफ हुई। विपिन ने लंड एक बार फिर बाहर निकाला। दीप्ती की चूत से बचा खुचा पानी हाथ में लिया – लंड और गांड के छेद पर मला और लंड अंदर डाल दिया।
विपिन का लंड भाभी की गांड में जड़ तक बैठ गया। दीप्ती को मजा आ गया जब लंड पूरा अंदर तक गया। लंड जड़ तक बैठ चुका था। अब रुकना विपिन के बस में भी नहीं था। उसने लंड पूरा बाहर निकाला और गांड के अंदर डाल दिया।
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यही तो चाहिए था दीप्ती को, “आआह विपिन बस अब चोद मुझे चोद मुझे दबा कर चोद आह आआह। रगड़ मेरी गांड “।
विपिन पूरा लंड बाहर निकाल कर फिर अंदर डाल रहा था। जब लंड का मोटा फूला हुआ सुपाड़ा बाहर निकलता तो दीप्ती की गांड का छेद बंद होता था ‘पप्प’ की हल्की आवाज के साथ – और साथ ही दीप्ती की सिसकारी निकलती थी “आआह विपिन यही है जन्नत, विपिन”।
दीप्ती साथ साथ अपने चूत का दाना रगड़ रही थी। बाढ़ आयी हुई थी दीप्ती की चूत में। अट्ठारह बीस मिनट की गांड चुदाई के बाद दीप्ती और विपिन दोनों झड़ गए, “आअह भाभी ये लो, भाभी आपकी गांड मस्त है भाभी आअह भाभी… और उधर आवाजें थीं आअह… विपिन, मजा आ गया। आअह विपिन भर दी तूने मेरी गांड”।
और धीरे धीरे दोनों शांत हो गए। विपिन का दिमाग़ ऐसी मस्त चुदाई के बाद सुन्न हो गया था। वो दीप्ती के चूतड़ पकड़ कर खड़ा था। ऐसा चुदाई का मजा उसे कभी नहीं आया था।
दीप्ती ने ही कहा, विपिन ? क्या हुआ ? क्या अभी भी मजा आ रहा है भाभी की चुदाई का “?
विपिन जैसे नींद से जागा, “हां भाभी”। उसने लंड बाहर निकला।
दीप्ती खड़ी हो गयी। विपिन ने दीप्ती के होंठ अपने होठों में ले लिए और चूसने लगा। विपिन का एक हाथ कभी दीप्ती के चूतड़ों पर जाता, कभी चूचियों पर और कभी चूत पर। “भाभी … भाभी …”I दीप्ती समझ गयी लड़के ने ऐसी धुआंधार चुदाई नहीं की अब तक। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीप्ती बोली, “विपिन क्या खायेगा। आज तूने बड़ी मेहनत की है। आज तेरे मनपसंद का डिनर बनेगा”।
विपिन बोला, “भाभी अभी तो ग्यारह ही बजे हैं, कहीं बाहर से मंगवा लो। कहां बनाओगी ? मेहनत तो आपने भी की है – मुझसे तो ज़्यादा ही की है”।
दीप्ती बोली, “ठीक है देखती हूं “।
दीप्ती ने फोन मिलाया और बात की – और फोन विपिन के हाथ में दे कर बोली, “ले विपिन अपनी मर्ज़ी का खाना मंगवाले”।
डिनर कर के दीप्ती और विपिन साथ साथ ही लेट गए। दीप्ती तो अभी भी नंगी ही थी। विपिन ने कपड़े पहने थे, क्यों के खाना डिलिवर करने वाले ने आना था। डिनर कर के विपिन ने भी कपड़े उतार दिए और भाभी दीप्ती के पास ही लेट गया।
विपिन के मन में एक सवाल था – “क्यों ? क्यों बड़ी भाभी ऐसे चुदवा रही है ? क्यों ? आखिर क्यों ? और क्यों नेहा, मेरी छोटी भाभी ने भी मेरा लंड चूसा था ? क्यों” ?
लेटे लेटे विपिन ने दीप्ती से पूछा, ” भाभी एक बात पूछूं, आप बुरा तो नहीं मानेंगी “?
दीप्ती ने कहा, “विपिन, अगर तूने ये पूछना है की मैंने तेरे से, अपने देवर से क्यों चुदवाई, तो मैं ही तुझे बता देती हूं – तेरे दोनों बड़े भाई नामर्द हैं। उनके लंड तेरे लंड के आधे साइज़ के भी नहीं और वो पांच सात मिनट से ज्यादा चुदाई नहीं कर सकते और झड़ जाते हैं – आधे चम्मच मलाई के साथ”।
“दस मिनट की रगड़ाई के बाद तो चूत गरम ही होना शुरू होती है”।
“विपिन, नेहा का तो कहना है कि तुम्हारी माता जी ने किसी असली मर्द से चुदवाई होगी जो तुम और शिखा पैदा हुए”।
“अब तुम ही देखो विपिन, तुम्हारे और तुम्हारे भाईयों कि नैन नक्श, डील डौल में कितना फर्क है – और लंडों और चुदाई करने कि दम ख़म में तो फर्क है ही। कहां आठ इंच का मोटा लंड, कहां साढ़े चार इंच का खिलौना। कहां आधे घंटे कि चुदाई, कहां दस मिनट में खलास। और कहा आधा कप गर्म राबड़ी, और कहां आधा चमच्च पानी”।
विपिन ने पूछा, “तो भाभी नेहा क्या करती है” ?
दीप्ती क्या जवाब देती -चुप रही।
विपिन बोला, “भाभी कल बुला लो नेहा भाभी को भी”।
दीप्ती बोली ,”सच विपिन “?
विपिन बोला, ” हां भाभी, मुझसे आप लोगों कि ये आधी अधूरी चुदाई नहीं देखी जाती”।
दीप्ती ने फोन उठाया और नेहा को मिला दिया।
नेहा आधी नींद में थी, “हेलो जीजी इतनी रात को” ?
दीप्ती बोली, “नेहा, आ जा कल सुबह। विपिन ने चोद दिया मुझे, क्या मस्त चोदता है। कल तुझे भी चोदेगा”।
“सच जीजी ? मैं सुबह ही आती हूं।
अगले दिन सुबह ग्यारह बजे ही नेहा आ गयी। दीप्ती और विपिन अभी नाश्ता करके ही हटे थे। दीप्ती सोफे पर बैठी थी और विपिन दीप्ती की गोद में सर रख कर आखें बंद करके लेटा हुआ था।
नेहा को देख दीप्ती बोली, “विपिन, नेहा आ गयी”।
“नमस्ते भाभी, आइये यहीं मेरे पास ही बैठ जाईये”। और विपिन थोड़ा सरक गया। नेहा विपिन के लंड के साथ जपने चूतड़ जोड़ कर बैठ गयी।
विपिन ने एक हाथ नेहा की जांघ पर रखा और बोला, “बोला भाभी क्या प्रोग्राम है आज का ? रात यहीं रुकेंगी”?
भवना ने विपिन के हाथ पर हाथ रख कर कहा, नहीं विपिन आज तो नहीं कल आऊंगी और दो रात यहां रुकूंगी। महेश दो दिन के लिए फिर चंडीगढ़ जा रहा है। बोल रहा था शिखा को भी मिल कर आएगा। और अगर हो सका तो शिखा को साथ ले कर आएगा”।
विपिन बोला, “शिखा वहां होगी, तभी तो लाएंगे भइया। वो तो कसौली गयी होगी अपनी सहेली के साथ मौज मस्ती करने”। विपिन ने बात करते हाथ नेहा की चूत पर रख दिया।
विपिन ने अब नेहा की चूत को उसकी सलवार के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। नेहा को मजा आने लगा। उसने हल्की सिसकारी ली “आह …” और अपना हाथ विपिन के हाथ पर रख दिया। पीछे विपिन का लंड खड़ा होने लगा। नेहा थोड़ा हिली – कसमसाई ।
दीप्ती मुस्कुराते हुए बोली, “क्या हुआ नेहा कुछ चुभ रहा है क्या “?
“चुभ नहीं रहा जीजी कुछ रगड़ खा रहा है – कुछ मोटा मोटा सा”। नेहा हंस कर बोली।
“क्या है रे विपिन तेरी जेब में, जो नेहा के पीछे रगड़ खा रहा है”। दीप्ती ने हंसते हुए पूछा। नेहा भी मुस्कुरा रही थी।
“आप ही देख लो भाभी”। विपिन ने नेहा से कहा।
नेहा विपिन के पैरों के तरफ खिसकी। विपिन के लंड का उभार देख कर लगता था लंड पूरा खड़ा हो चुका था। नेहा ने पैंट की ज़िप खोल लंड बाहर निकल लिया। लम्बा सख्त और मोटे सुपाड़े वाला विपिन का लंड। नेहा ने लंड हाथ में लिया और दीप्ती की तरफ देख कर बोली, “जीजी आप ने कहां कहां लिया जीजी विपिन का लॉली पॉप”।
दीप्ती बोली, “तीनों में। चूत में गांड में और मुंह में”।
वाह जीजी, कहां ज़्यादा मजा आया।
दीप्ती ने पिछले दिन की पूरी चुदाई बयान कर दी, मगर ये बताना नहीं भूली की कैसे विपिन ने उसकी चूत में से अपनी मलाई और चूत के पानी का मिक्सचर गांड पर पर लगा कर गांड का छेद चिकना किया और लंड अंदर डाला।
नेहा ने दीप्ती की तरफ देखा – ”इशारों इशारों में पूछा जीजी साहिल की लाई जेल तो पड़ी फिर ये चूत का पानी क्यों”?
दीप्ती ने भी इशारों में समझा दिया की नहीं नेहा नही। नहीं तो विपिन समझेगा के समझेगा की हमें चुदाई का ज्यादा ही चस्का लग गया है”।
मुंबई की नेहा एक सेकण्ड में समझ गयी की दीप्ती ने ऐसा क्यों किया होगा। लंड मुंह में से निकाल कर बोली, “मैं भी ऐसे ही चुदवाउंगी जीजी”।
और वो विपिन से बोली, “चलो विपिन उठो, चोदो अपनी छोटी भाभी की चूत और निकालो अपना गर्म पानी इसमें”।
दोनों उठे और उसी कमरे में लगे बेड की तरफ बढ़ चले।
दीप्ती ने नेहा को बोला, “नेहा अगर विपिन की लंड की सुपाड़े का मजा लेना है तो टांगें उठा कर, चौड़ी करके चुदाई करवाना। बाकी विपिन समझा देगा”।
नेहा बोली, “जीजी आप भी तो आओ”।
विपिन ने खड़ा लंड नेहा के हाथ में पकड़ा दिया। “ज़रा चूसो भाभी इसको”।
नेहा ने लंड इतनी जोर जोर से चूसा की विपिन को लंड नेहा के मुंह से बाहर निकालना पड़ा, “भाभी अगर ऐसे ही चूसोगी तो अभी निकल जायेगा मुंह में। बताओ कैसे चुदवानी है “?
नेहा बोली, “मुझ से मत पूछ विपिन। कैसे भी चोद, बस आज जन्नत दिखा दे। ऐसे चुदाई कर के तेरी ये भाभी भी इस चुदाई हमेशा याद रखे”।
चलो लेटो भाभी बेड के किनारे पर। पहले तो अपनी चूत और गांड के दर्शन करवाओ”।
नेहा चूतड़ बेड के किनारे पर टिका कर लेट गयी और टांगें चौड़ी कर दी। विपिन को चूत तो दिख रही थी गांड का छेद नहीं दिख रहा था। विपिन ने एक तकिया नेहा के चूतड़ों के नीचे रख कर चूतड़ उठा दिए।
“अब ठीक है”। विपिन बोला।
फर्श पर घुटनों के बल बैठ नेहा की चूत की फांकें खोली – गुलाबी टाइट छेद सामने था। विपिन देख रहा था और अपना लंड सेहला रहा था। विपिन ने चूतड़ खोल दिए। गांड का भूरे रंग का बंद छेद सामने दिख रहा था। विपिन ने नेहा की चूत चूसी, उसमें थोड़ा थूक डाला और खड़ा हो कर जांघो को खोला और एक ही बार में पूरा लंड चूत में बिठा दिया। “आआआह विपिन…” I नेहा ने मजे की एक सिसकारी ली।
दीप्ती देख रही थी। जैसे ही विपिन का लंड नेहा की चूत में गया उसकी भी एक सिसकारी निकली “आह …” और उसने भी अपने कपड़े उतार दिए। बेड पर घुटनों और कुहनियों के बल लेट कर दीप्ती नेहा के चूचियों के निप्पल चूसने लगी। दीप्ती के चूतड़ नेहा की चुदाई कर रहे विपिन के तरफ थे। विपिन नेहा के चूतड़ों पर हाथ फेरा, दो धप्प चूतड़ों पर लगाए और अपनी एक उंगली दीप्ती की गाड़ के छेद में डाल दी।
“आअह विपिन क्या कर रहे हो। गरम हो जाएगी मेरी फुद्दी। पहले नेहा का पानी निकालो दो बार फिर मुझे छेड़ना”।
मगर विपिन कहां रुकने वाला था। उसने उंगली दीप्ती की गांड के अंदर बाहर करनी शुरू कर दी। साथ ही वो जोर जोर से नेहा को चोद रहा था। जल्दी ही नेहा ने नीचे से चूतड़ हिलाने शुरू कर दिए। दीप्ती भी अपनी चूत का दाना रगड़ रही थी। विपिन की उंगली दीप्ती की गांड में थी और अब दीप्ती भी चूतड़ हिला रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुछ मिनटों के बाद तीनो का मजा छूट गया “आआह ..आअह.. आह्ह.. आई.. ह्ह.. ह्ह.. आअह”। विपिन ने अपना पूरा गर्म पानी नेहा की चूत में डाल दिया। नेहा ने एक सिसकारी ली। “आअह… विपिन मेरे विपिन मजा आ गया विपिन भर दी मेरी भी फुद्दी”। सब शांत हो गए। दीप्ती और विपिन सोफे पर बैठ गए।
दीप्ती बोली, “नेहा चूत बंद कर ले विपिन का चिकना सफ़ेद पानी बाहर नहीं आना चाहिए। मैं विपिन का लंड खड़ा करती हूं। अब तेरी गांड का नंबर है चुदने का। विपिन की यही सफ़ेद लेस तेरी गांड को चिकना बनाएगी”।
दीप्ती विपिन का लंड चूसने लगी। विपिन का लंड फिर खड़ा हो गया। दीप्ती खड़ी हुई और नेहा की गांड खोल कर थोड़ा चूसा और अपने थूक की पिचकारी अंदर डाल दी और विपिन से बोली “आ जाओ विपिन गांड तैयार है”।
दीप्ती एक तरफ हो गयी। विपिन ने नेहा की कमर पकड़ी और लंड गांड के छेद पर रख दिया। नेहा ने चूत ढीली की। सफ़ेद चिकना पानी चूत से निकल कर नीचे की तरफ बहने लगा। विपिन ने गांड के छेद के बिलकुल नीचे हाथ रख लिया और सफ़ेद पानी अपने लंड और नेहा की गांड पर लगा दिया। दूसरे हाथ की उंगली से सफ़ेद पानी गांड के अंदर भी लगा दिया। बिलकुल वैसे ही जैसे चूत से निकला पानी उसने दीप्ती की गांड पर लगाया था I
नेहा ने सिसकारी ली “आअह… विपिन”। विपिन ने लंड नेहा की गांड के छेद पर रखा और एक हल्का धक्का मर कर सुपाड़ा छेद में बिठा दिया। आअह…विपिन बड़ा मजा आ रहा है। जीजी बड़ा मजा आ रहा है”। दीप्ती उठी और नेहा के होंठ चूसने लगी। दीप्ती का एक हाथ नेहा की चूत के दाने को सेहला रहा था।
विपिन ने लंड बाहर निकाला, थोड़ा थूक गांड के छेद के ऊपर और अंदर मला और लंड पूरा अंदर बिठा दिया। “उन्ह… उन्हह” की आवाज के साथ। नेहा दर्द और मजे की सिसकारी लेना चाहती थी मगर दीप्ती ने उसके होंठ ही बंद कर रखे थे। दीप्ती ने सोचा, लड़की मजे में है – सिसकारी लेना चाहती है। दीप्ती ने नेहा के होंठ छोड़ कर उसकी चूचियां चूसनी शुरू कर दी। दीप्ती का एक हाथ नेहा की चूत में ही अपना काम कर रहा था।
विपिन के धक्के चल रहे थे। पूरा लंड बाहर फिर एक झटके से अंदर। हर धक्के पर नेहा की सिसकारी निकलती थी “आअह विपिन आआआह विपिन चोद दे मेरी गांड”। नेहा की गांड की बढ़िया रगड़ाई हो रही थी। आधे घंटे की चुदाई ने सब की तस्सल्ली कर दी। तीनो उसी बेड पर लेट गए।
अगले चार दिनों तक जब तक अजय नहीं आया, यही कुछ चलता रहा। इस बीच नेहा भी दो रात रुकने के लिए आ गयी। खैर इन दस दिनों में दीप्ती और नेहा की चुदाई तो खूब हुई। अब विपिन के जाने का दिन भी आ गया। “एक चोदने वाला विपिन जा रहा था और चार चोदने वाले लाइन में थे साहिल, अशोक, जनक और गणेश”।
दीप्ती और नेहा की चूतों की तस्सली हो गयी थी। नेहा को सुबह जाना था। महेश उस दिन वापस आने वाला था। जाते जाते नेहा विपिन से बोली, “विपिन तूने मस्त चोदा है दोनों भभियों को। तेरे लंड का जवाब नहीं। अब कब आएगा “?
विपिन बोला, “भाभी, जवाब तो आप दोनों भाभियों का भी नहीं। क्या मस्त टाइट चूत और टाइट ही गांड का छेद है आप के। गांड के छेद तो लगता था कुंवारे ही हैं। मेरा तो ये ट्रिप कामयाब हो गयाI नेहा ने टैक्सी ली और वो चली गयी।
जब विपिन भी जाने लगा तो दीप्ती बोली, “विपिन अब जल्दी जल्दी आया करना”।
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फिर विपिन बोला, “अब तो भाभी जल्दी जल्दी आना पड़ेगा। इस बार हो सकता है मेरा एक दोस्त भी साथ आये। तमिलनाडु का रहने वाला है। श्रीधर कह रहा था दिल्ली घूमना चाहता है”। दीप्ती बोली, “अच्छा ? ये तो बड़ी अच्छी बात है। और फिर शरारत से पूछा “कैसा है वो “? विपिन ने हाथ के अंगूठे और बीच की उंगली से एक गोला बनाया – “ऐसा”। अंगूठा और उंगली आपस में मिले हुए नहीं थे। मतलब लंड तगड़ा मोटा है तेरे दोस्त श्रीधर का। यही तो नेहा भी देखती थी। नेहा के हिसाब से लंड अंगूठे और बीच की उंगली में आ जाये तो गांड चुदवाओ।
और अगर अंगूठा और उंगली लंड को न पकड़ पाएं तो मतलब लंड बहुत मोटा है – गांड फाड़ देगा। सोच सोच कर दीप्ती की तो चूत और गांड तो ही फड़कने लग गयी। इतना मोटा लंड ? चूत की तो मौज हो जाएगी, मगर गांड? और फिर दीप्ती ने सोचा, “अब तो हम गांड भी खूब चुदवा रही हैं। जब तक विपिन आएगा तब तक तो गांड के छेद भी तैयार हो जाएंगे श्रीधर का मोटा लंड लेने के लिए”। दीप्ती बोली, “वाह विपिन जरूर ले कर आना। नेहा भी बड़ी खुश हो जाएगी”। ठीक है भाभी बाए।
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