Kunwari Ladki Chudai
मैं अखिल हूँ, एक छोटे से गाँव से। मेरे पापा आर्मी में ऑफिसर थे, इसलिए बचपन से ही मुझे डिसिप्लिन और सादगी की आदत पड़ी। मैं तब 22 साल का था, देखने में काफी हैंडसम – गोरा रंग, लंबा कद, चौड़ी छाती और मुस्कान जो लड़कियों को घायल कर देती। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद मैं ग्वालियर में एक छोटे से स्कूल में पार्ट-टाइम कोचिंग देता था। Kunwari Ladki Chudai
स्कूल आना और चुपचाप चले जाना – हमारे हेडमास्टर को भी खबर नहीं लगती थी। मैं सादा जीवन जीता था, ज्यादा दोस्त नहीं, बस किताबें और अपना काम। लेकिन जीवन में कभी-कभी ऐसी घटनाएँ होती हैं जो सब कुछ बदल देती हैं। ये कहानी उसी बदलाव की है, जो मेरी जिंदगी में एक 18-19 साल की लड़की ने ला दिया।
बात कुछ यूं शुरू हुई। एक दिन स्कूल में एक पैरेंट मेरे पास आए। वो एक मध्यम वर्गीय परिवार से लगते थे, साधारण कपड़ों में। उन्होंने कहा, “सर, मेरी एक बेटी है, वो 12वीं में है। उसे इंग्लिश में थोड़ी दिक्कत है। क्या आप उसे घर पर ट्यूशन दे सकते हैं?” पहले तो मैंने मना कर दिया।
मैं सोचा, स्कूल का काम ही काफी है, घर-घर जाकर पढ़ाने का टाइम कहाँ? लेकिन वो बार-बार रिक्वेस्ट करते रहे। बोले, “सर, प्लीज। वो बहुत होशियार है, बस इंग्लिश में कमजोर है। आपकी फीस जो भी होगी, हम देंगे।” आखिरकार उनकी जिद के आगे मैं झुक गया।
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मैंने कहा, “ठीक है, कल से शुरू करते हैं। आपका पता बता दीजिए।”
उन्होंने पता दिया – शहर के बाहर एक छोटी कॉलोनी में। मैंने अगले दिन जाने का वादा किया और चला गया। अगले दिन शाम को मैं उनके घर पहुँचा। घर साधारण था, लेकिन साफ-सुथरा। दरवाजा खटखटाया तो एक बुजुर्ग महिला ने खोला – शायद दादी।
उन्होंने मुझे अंदर बुलाया और लिविंग रूम में बिठाया। थोड़ी देर बाद वो लड़की आई। माय गॉड! क्या खूबसूरत थी वो। उम्र 18-19 साल, लेकिन बदन ऐसा कि कोई 25 साल वाली लगे। गोरा रंग, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें जो काजल से सजी थीं, और होंठ गुलाबी।
उसने सलवार-कमीज पहनी थी, जो उसके कर्व्स को हाईलाइट कर रही थी। बूब्स करीब 34 के, कमर पतली और हिप्स राउंड। वो आई, मुस्कुराई और बोली, “गुड इवनिंग सर।” मैंने भी गुड इवनिंग कहा और उसे बगल में बिठाया। उसका नाम था कीर्ति। हमने पढ़ाई शुरू की।
पहले दिन सब नॉर्मल रहा – मैं उसे ग्रामर, वोकैबुलरी सिखाता रहा। वो बहुत अटेंटिव थी, मेरी हर बात पर नोट्स बनाती। लेकिन उसकी आँखों में एक चमक थी, जो मुझे थोड़ा असहज कर रही थी। कई दिन बीत गए। रोज शाम को मैं जाता, एक घंटा पढ़ाता और चला आता।
कीर्ति बहुत तेज़ थी, जल्दी सीखती। लेकिन धीरे-धीरे मैंने नोटिस किया कि वो पढ़ाई से ज्यादा मुझे घूरती है। उसकी नजरें मेरे चेहरे पर, मेरी छाती पर, कभी मेरी पैंट की तरफ। एक दिन तो वो बोली, “सर, आप कितने हैंडसम हैं। आपकी मुस्कान तो दिल चुरा लेती है।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैं हँस दिया और टॉपिक चेंज कर दिया। लेकिन मन में एक हलचल सी होने लगी। वो इतनी सुंदर थी कि मेरा मन भी डोलता, लेकिन मैं खुद को कंट्रोल करता। एक दिन मैं पहुँचा तो कीर्ति ने दरवाजा खोला। वो अकेली लग रही थी। बोली, “सर, आज दादी और मम्मी बाहर गए हैं। लेकिन कोई बात नहीं, आप पढ़ाओ।”
मैं अंदर आया और टेबल पर बैठ गया। पढ़ाई शुरू हुई, लेकिन कीर्ति आज कुछ अलग थी। वो बोली, “सर, मैं आपको गौर से देखना चाहती हूँ।” मैं हँसा, “क्यों? मैं कोई ताजमहल हूँ जो मुझे गौर से देखना चाहती हो?” वो मुस्कुराई और बोली, “नहीं सर, लेकिन आप उससे भी अच्छी चीज़ के मालिक हैं।”
पहले तो मैं समझा नहीं, लेकिन जब समझा तो मेरा चेहरा लाल हो गया। वो मेरे लंड की तरफ इशारा कर रही थी! मैं तुरंत उठा और बोला, “ये क्या बेहूदा बातें कर रही हो? मैं जा रहा हूँ।” वो कुछ नहीं बोली, बस मुस्कुराती रही। मैं घर से निकल आया, मन में उथल-पुथल। रात भर सो नहीं पाया। क्या वो सच में मेरे साथ…?
अगले दिन मैं फिर गया। सोचा, शायद कल का मूड था। लेकिन जैसे ही मैं अंदर आया, कीर्ति बोली, “सर, आप बैठिए, मैं अभी आती हूँ।” वो चली गई। थोड़ी देर बाद आई तो मेरा दिल धड़क उठा। वो पूरी तरह सेक्सी लग रही थी! उसने टाइट पंजाबी सूट पहना था – गुलाबी रंग का, जो उसके बॉडी को चिपक रहा था।
बूब्स ऊपर उठे हुए, निप्पल्स का शेप साफ दिख रहा था। बाल खुले, लिपस्टिक लगाई, और खुशबू ऐसी कि कमरा महक उठा। वो आई और बोली, “सर, आज घर पर कोई नहीं है। दादी जॉब पर गईं, मम्मी पड़ोस वाली आंटी के साथ शॉपिंग गईं।” मैंने कहा, “तो मैं भी जाता हूँ, कल आऊँगा।”
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मैं उठने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। बोली, “नहीं सर, मैं आपको ऐसे नहीं जाने दूँगी। आपके लिए चाय बनाई है, रुकिए।” मैंने कहा, “नहीं, कल पी लूँगा।” लेकिन वो नहीं मानी। उसने मुझे जोर से पकड़ा और अचानक लिपट गई। उसके गर्म बदन का स्पर्श मुझे मिला तो मैं सिहर उठा।
वो मेरे होंठों पर किस करने लगी, ज़ोर-ज़ोर से। उसके होंठ नरम, गुलाबी, और मीठे। वो बोलती जा रही थी, “सर, मैं आपको आज ऐसे नहीं जाने दूँगी। अपने अरमान पूरे करके ही जाने दूँगी।” मैंने उसे दूर करने की कोशिश की, “ये ठीक नहीं है कीर्ति। तुम अभी छोटी हो।”
वो बोली, “किसी को ऐसे तड़पाना भी ठीक नहीं है सर। मैं रात-दिन आपके बारे में सोचती हूँ।” उसकी आँखों में वासना थी, बदन की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी। मैं भी कब तक बर्दाश्त करता? आखिरकार मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसकी जवानी इतनी कातिल थी कि मैं पागल हो रहा था।
मैंने पूछा, “क्या तुम पहली बार किसी को किस कर रही हो?” वो बोली, “जी हाँ सर, लेकिन मैं अक्सर पापा और मम्मी को रात में सेक्स करते देखती हूँ। जब मुझे जोश आता है तो मैं उंगली डालकर अपनी चूत की आग शांत करती हूँ।” उसके मुँह से “चूत” शब्द सुनकर मैं हैरान रह गया।
इतनी मासूम दिखने वाली लड़की इतनी बोल्ड! मैं उसे बेतहाशा चूमने लगा – गाल, गर्दन, कान। उसके कान में फुसफुसाया, “तुम कितनी हॉट हो कीर्ति। तुम्हारी बॉडी मुझे पागल कर रही है।” वो बोली, “नहीं सर, अब मुझे उस अच्छी चीज़ को गौर से देखना है जो आपके पास है।”
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मैंने कहा, “देखो ना, तुम्हें मना किसने किया है?” उसने मेरी पैंट खोलनी शुरू की। मैं खड़ा रहा। थोड़ी देर में उसने मेरी पैंट और अंडरवियर नीचे सरका दी। मेरा 7 इंच का लंड बाहर आ गया, एकदम टाइट और लाल। वो देखकर मुस्कुराई और बोली, “वाह सर, कितना बड़ा और मोटा है। मैं इसे चूसना चाहती हूँ।”
मैंने कहा, “छी छी, क्या गंदी बात कर रही हो?” वो बोली, “अरे यही तो वो जीवन रस है जो मैं पीना चाहती हूँ।” इतना कहकर उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया। पहले तो धीरे-धीरे चूसा, फिर लॉलीपॉप की तरह चाटने लगी। उसकी जीभ लंड के टॉप पर घूम रही थी, मैं आहें भर रहा था। “आह कीर्ति… कितना मज़ा आ रहा है… तुम तो एक्सपर्ट हो…”
वो चूसती रही, मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था। उसके मुँह की गर्मी और चूसने का तरीका मुझे जन्नत की सैर करा रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए। उसका सूट निकाला, ब्रा खोली – वाह, क्या बूब्स थे! गोल, टाइट, 34 साइज़ के, निप्पल्स गुलाबी और तने हुए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उन्हें मसलना शुरू किया। वो सिसकारियाँ ले रही थी, “सर… दबाओ… चूसो इन्हें…” मैंने एक बूब मुँह में लिया और चूसने लगा। दूध जैसा स्वाद, मैं पागल हो गया। दूसरा हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया। उसकी चूत गीली हो चुकी थी, बालों से भरी, लेकिन गर्म।
मैंने उंगली अंदर डाली तो वो चीखी, “आह सर… और अंदर…” जब उससे रहा नहीं गया तो बोली, “सर, बेडरूम में चलते हैं।” हम बेडरूम में गए। वो मुझे लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गई। खुद ही मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। धीरे से दबाया, लेकिन दर्द हुआ तो निकाल लिया।
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बोली, “दर्द हो रहा है सर।” मैंने कहा, “तुम लेटो, मैं करता हूँ।” वो नीचे लेट गई। मैंने उसके पैर फैलाए, चूत को चाटा – गुलाबी, गीली, खुशबूदार। वो तड़प रही थी। फिर मैंने अपना लंड चूत के मुँह पर रखा और धीरे से दबाया। आधा अंदर गया तो वो चीखी। मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए और किस करते हुए एक ज़ोर का धक्का मारा। पूरा लंड अंदर! वो आँसू बहाने लगी, लेकिन मैं रुक गया। धीरे-धीरे सहलाया। दस मिनट बाद वो नीचे से हिलने लगी। बोली, “सर, अब हिलाओ… बाहर-अंदर करो…” मैंने धक्के देने शुरू किए।
फच्च-फच्च की आवाज़, उसकी सिसकारियाँ – “आह सर… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” मैं तेज़-तेज़ चोद रहा था। 15 मिनट बाद वो ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगी, “सर, चोदो… मैं जाने वाली हूँ…” मैंने स्पीड बढ़ाई और हम दोनों एक साथ झड़े। मेरा गाढ़ा माल उसकी चूत में। फिर वो मेरे लंड को देखकर हँसी, “कितना सुंदर ताजमहल है आपका।” मैंने कहा, “मेरा तो क़ुतुब मीनार है, ताजमहल तो तुम्हारी चूत है।” हम हँसे और उसके बाद मौका मिलते ही चुदाई करते रहे। कभी क्लास में, कभी घर पर, कभी पार्क में। कीर्ति मेरी गर्लफ्रेंड बन गई, और हमारी सेक्स लाइफ हॉट बनी रही।
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