Jeth Bahu Secret Sex XXX
प्रिया मेरे छोटे भाई विशाल की पत्नी है। प्रिया काफी सुंदर महिला है। उसका बदन ऊपरवाले ने काफी तसल्ली से तराश कर बनाया है। मैं परम, उसका जेठ हूँ। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं। प्रिया शुरू से ही मुझे काफी अच्छी लगती थी। मुझसे वो काफी खुली हुई थी। विशाल एक यूके बेस्ड कंपनी में सर्विस करता था। हाँ, बताना तो भूल ही गया, प्रिया का मायका नागपुर में है और हम जालंधर बेस्ड हैं। Jeth Bahu Secret Sex XXX
आज से कोई पाँच साल पहले की बात है। हुआ यूँ कि शादी के एक साल बाद ही प्रिया प्रेग्नेंट हो गई। डिलीवरी के लिए वो अपने मायके गई हुई थी। सात महीने में प्रीमैच्योर डिलीवरी हो गई। बच्चा शुरू से ही काफी कमजोर था। दो हफ्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गई। विशाल तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया।
कुछ दिन वहाँ रहकर वापस आया। वापस अकेला ही आया था। डिसाइड ये हुआ था कि प्रिया की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आएगी। एक महीने के बाद जब प्रिया को वापस लाने की बात आई तो विशाल को छुट्टी नहीं मिली। प्रिया को लाने जाने के लिए विशाल ने मुझे कहा। सो मैं प्रिया को लाने ट्रेन से निकला।
प्रिया को वैसे मैंने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस जर्नी में हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली प्रिया बेपरदा हो गई। हमारी टिकट फर्स्ट क्लास में बुक थी। फोर सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। ऑफ-सीजन था इसलिए वो सीटें रास्ते में भी नहीं भरीं।
हम ट्रेन में चढ़ गए। गर्मी के दिन थे। जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी। मगर दूसरों की आँखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा, “अब आप चाहे कुछ भी समझें, मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूँगी। मुझे आप अच्छे लगते हो, आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूँगी।”
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मैं उसकी बात पर हँस पड़ा। “मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।” मैंने पहली बार उसके बेपरदा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया। अचानक मेरे मुँह से निकला, “अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुस्न छिपा है, उसका पता कैसे लगता।”
उसने मेरी ओर देखा, फिर शर्म से लाल हो गई। उसने बॉटल ग्रीन कलर की एक शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था। गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आँचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया। तब मैंने जाना कि उसने ब्लाउज़ के अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई है।
उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिए काफी बड़े-बड़े हो गए थे। ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिए उसकी आधी छातियाँ साफ दिख रही थीं। पतले ब्लाउज़ में से ब्रा न होने के कारण निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ नज़र आ रहा था। मेरी नज़र उसकी छाती से चिपक गई।
उसने बात करते-करते मेरी ओर देखा। मेरी नज़रों का अपनी नज़रों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूब्स को देखता पकड़ शरमा गई और जल्दी से उसे आँचल से ढक लिया। हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे। कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गई।
कुछ देर बाद लौटकर आई तो उसका चेहरा थोड़ा गंभीर था। हम वापस बात करने लगे। कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौटकर आ गई। मैंने देखा वो बात करते-करते कसमसा रही है। अपने हाथों से अपने ब्रेस्ट को हल्के से दबा रही है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“कोई प्रॉब्लम है क्या?” मैंने पूछा।
“न..नहीं।”
मैंने उसे असमंजस में देखा। कुछ देर बाद वो पास उठी तो मैंने कहा, “मुझे बताओ ना क्या प्रॉब्लम है?”
वो झिझकती हुई सी खड़ी रही। फिर बिना कुछ बोले बाहर चली गई। कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गई।
“मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।” उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैंने देखा उसकी आँखें आँसू से छलक रही हैं।
“क्यों क्या हुआ?”
मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं। मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया।
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“जी वो क्या है… वो मेरी छातियाँ भारी हो रही हैं।”
वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाए, आखिर मैं उसका जेठ था।
“मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।” उसने नज़रें नीची करते हुए कहा।
“बाथरूम जाना है?” मैंने पूछा।
“गई थी लेकिन वॉश बेसिन बहुत गंदा है इसलिए मैं वापस चली आई,” उसने कहा। “और बाहर के वॉश बेसिन में मुझे शर्म आती है, कोई देख ले तो क्या सोचेगा?”
“फिर क्या किया जाए?” मैं सोचने लगा। “कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फर्श पर गिरा नहीं सकती और यहाँ कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें दूध निकाल सको।”
उसने झिझकते हुए फिर मेरी तरफ एक नज़र डालकर अपनी नज़रें झुका लीं। वो अपने पैर के नाखूनों को कुरेदती हुई बोली, “अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूँ?”
“बोलो।”
“आप इन्हें खाली कर दीजिए ना।”
“मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूँ।” मैंने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा।
“आप अगर इस दूध को पी लो…”
उसने आगे कुछ नहीं कहा। मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया।
“लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुँह कैसे लगा सकता हूँ?”
“जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं, इसमें गलत क्या है? क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है?” उसने मुझसे कहा। “मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही-गलत के बारे में सोच रहे हो। प्लीज़।”
मैं चुपचाप बैठा रहा, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ। अपने छोटे भाई के निप्पल मुँह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी।
उसने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिए। “प्लीज़,” उसने फिर कहा।
लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला।
“जाइए, आपको कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है। आप अपने रूढ़िवादी विचारों से घिरे बैठे रहिए, चाहे मैं दर्द से मर ही जाऊँ।” कहकर उसने वापस अपने स्तनों को आँचल से ढक लिया और अपने हाथ आँचल के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बाँदने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से उसके मुँह से चीख निकल गई, “आआआह्ह्ह्ह!”
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मैंने उसके हाथ थामकर ब्लाउज़ से बाहर निकाल दिए। फिर एक झटके में उसके आँचल को सीने से हटा दिया। उसने मेरी तरफ देखा। मैं अपनी सीट से उठकर केबिन के दरवाज़े को लॉक किया और उसके बगल में आ गया। उसने अपना ब्लाउज़ उतार दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके नग्न ब्रेस्ट, जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थे, मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिए बेताब थे। मैंने अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फेरते हुए निप्पल के ऊपर लाया। मेरी उंगली की छुअन पाकर उसके निप्पल अंगूर की साइज़ के हो गए।
मैं उसकी गोद में सिर रखकर लेट गया। उसके बड़े-बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपना स्तन को नीचे झुकाया। उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था। मैंने जीभ निकालकर उसके निप्पल को छुआ।
“ऊऊफ्फ्फ्फ जेठजी अब मत सताओ। प्लीज़ इनका रस चूस लो।” कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया।
मैंने अपने होंठ खोलकर सिर्फ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा। मीठे दूध की एक तेज़ धार से मेरा मुँह भर गया। मैंने उसकी आँखों में देखा। उसकी आँखों में शर्म की परछाईं तैर रही थी। मैंने मुँह में भरे दूध को एक घूँट में अपने गले के नीचे उतार दिया। “आआह्ह्ह्ह…” उसने अपने सिर को एक झटका दिया।
मैंने फिर उसके निप्पल को ज़ोर से चूसा और एक घूँट दूध पिया। मैं उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा। “ओओह्ह्ह्ह ह्ह्हााान्न्न हााााान्न्न… ज़ोर से चूसो… ज़ोर ज़ोर से। प्लीज़ मेरे निप्पल को दाँतों से दबाओ। काफी खुजली हो रही है।” उसने कहा।
वो मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ फेर रही थी। मैंने दाँतों से उसके निप्पल को ज़ोर से दबाया। “उउुईईई…” कर उठी। वो अपने ब्रेस्ट को मेरे चेहरे पर दबा रही थी। उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़कर मेरे शर्ट के अंदर घुस गए। वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फेरने लगी। फिर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा।
“क्या कर रही हो?” मैंने उससे पूछा।
“वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ,” उसने कहा।
“क्या कर रहा हूँ मैं तुम्हारे साथ?” मैंने उसे छेड़ा।
“दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीबी के स्तनों से।”
“काफी मीठा है।”
“धत्त!” कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिए और मेरे चेहरे पर झुक गई। इससे उसका निप्पल मेरे मुँह से निकल गया। उसने झुककर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ किया। फिर वो अपने हाथों से वापस अपना निप्पल मेरे लिप्स पर रख दी।
मैंने मुँह को काफी खोलकर निप्पल के साथ उसके बूब का एक पोर्शन भी मुँह में भर लिया। वापस उसके दूध को चूसने लगा। कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तनों को दबा-दबाकर जितना हो सकता था दूध निचोड़कर मेरे मुँह में डाल दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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“अब दूसरा।”
मैंने उसके स्तनों को मुँह से निकाल दिया, फिर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस स्तन को पीने लगा। उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फिर रहे थे। हम दोनों ही उत्तेजित हो गए थे। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाकर मेरे पैंट की ज़िप पर रख दिया। मेरे लंड पर कुछ देर हाथ यूँ ही रखे रही। फिर उसे अपने हाथों से दबाकर उसके साइज़ का जायज़ा लिया।
“काफी तन रहा है,” उसने शरमाते हुए कहा।
“तुम्हारे जैसी हूर पास इस अंदाज़ में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाए।”
“म्म्म अच्छा। और आपके क्या हाल हैं?” उसने मेरे ज़िप की चेन को खोलते हुए पूछा।
“तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है?”
उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अंदर कर ब्रिफ को हटाया और मेरे तने हुए लंड को निकालते हुए कहा, “देखूँ तो सही कैसा लगता है दिखने में।”
मेरे मोटे लंड को देखकर खूब खुश हुई। “अरे बाप रे कितना बड़ा लंड है आपका। दीदी कैसे लेती है इसे?”
“आजाओ तुम्हें भी दिखा देता हूँ कि इसे कैसे लिया जाता है।”
“धत्त, मुझे नहीं देखना कुछ। आप बड़े वो हो,” उसने शर्मा कर कहा।
लेकिन उसने हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की।
“इस पर एक बार किस तो करो,” मैंने उसके सिर को पकड़कर अपने लंड पर झुकाते हुए कहा।
उसने झिझकते हुए मेरे लंड पर अपने होंठ टिका दिए। अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था। उसके झुकने के कारण मेरे मुँह से निप्पल छूट गया। मैंने उसके सिर को हल्के से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोलकर मेरे लंड को जगह दे दी। मेरा लंड उसके मुँह में चला गया। उसने दो-तीन बार मेरे लंड को अंदर-बाहर किया फिर उसे अपने मुँह से निकाल लिया।
“ऐसे नहीं… ऐसे मज़ा नहीं आ रहा है।”
“हाँ अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिए,” मैंने अपने कपड़ों की तरफ इशारा किया।
मैंने उठकर अपने कपड़े उतार दिए फिर उसे बाहों से पकड़कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके नादान से अलग कर दिया। अब हम दोनों बिलकुल नग्न थे।
तभी किसी ने दरवाज़े पर नॉक किया। “कौन हो सकता है।”
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हम दोनों हड़बड़ी में अपने-अपने कपड़े एक थैली में भर लिए और प्रिया बर्थ पर सो गई। मैंने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल दी। इस बीच दो बार नॉक और हुआ। मैंने दरवाज़ा खोला, बाहर टीटी खड़ा था। उसने अंदर आकर टिकट चेक किया और कहा, “ये दोनों सीट्स खाली रहेंगी इसलिए आप चाहें तो अंदर से लॉक करके सो सकते हैं,” और बाहर चला गया।
मैंने दरवाज़ा बंद किया और प्रिया के बदन से चादर को हटा दिया। प्रिया शर्म से अपनी जाँघों के जोड़ को और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसके हाथों को पकड़कर हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा, “प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।”
मैं उसके ऊपर चढ़कर उसकी चूत पर अपना मुँह रखा। इससे मेरा लंड उसके मुँह के ऊपर था। उसने अपने मुँह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुँह में मेरा लंड चला गया और उसकी चूत पर मेरे होंठ सट गए। “आह परम जी क्या कर रहे हो, मेरा बदन जलने लगा है। विशाल ने कभी इस तरह मेरी चूत पर अपनी जीभ नहीं डाली।”
उसके पैर छटपटा रहे थे। उसने अपनी टाँगें हवा में उठा दीं और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं उसके मुँह में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा। मेरे हाथ उसकी चूत की फाँकों को अलग कर रखे थे और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी। वो पूरी तन्मयता से अपने मुँह में मेरे लंड को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
काफी देर तक इसी तरह 69 पोज़ीशन में एक-दूसरे के साथ मुंह मैथुन करने के बाद लगभग दोनों एक साथ झड़ गए। उसका मुँह मेरे रस से पूरा भर गया था। उसके मुँह से छूटकर मेरा रस एक पतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था।
मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठकर बैठ गई। हम दोनों एकदम नग्न थे और दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनों एक-दूसरे से लिपट गए और हमारे होंठ एक-दूसरे से ऐसे चिपक गए मानो अब कभी भी न अलग होने की कसम खा ली हो। कुछ मिनट तक यूँ ही एक-दूसरे के होंठों को चूमते रहे, फिर हमारे होंठ एक-दूसरे के बदन पर घूमने लगे।
“अब आ जाओ,” मैंने प्रिया को कहा।
“जेठजी थोड़ा संभलकर। अभी अंदर नाजुक है। आपका बहुत मोटा है, कहीं कोई ज़ख्म न हो जाए।”
“ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।”
प्रिया उठकर बर्थ पर चौपाया हो गई। मैं पीछे से उसकी चूत पर अपना लंड सटा कर हल्का सा धक्का मारा। गीली तो पहले ही हो रही थी। धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धँस गया। एक बच्चा होने के बाद भी उसकी चूत काफी टाइट थी। वो दर्द से “आआआह्ह्ह्ह…” कर उठी। मैं कुछ देर के लिए उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा। कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो प्रिया ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड पूरा अंदर चला जाए।
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“डालो ना, रुक क्यों गए?”
“मैंने सोचा तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिए।”
“इस दर्द का मज़ा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है, दर्द तो करेगा ही।” उसने कहा।
फिर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे-पीछे करने लगी। मैं पीछे से शुरू-शुरू में संभलकर धक्का मार रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के से उसके दूध भरे स्तन उछल-उछल जाते थे। मैंने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके स्तनों को अपने हाथों से थाम लिया। लेकिन मसल नहीं नहीं तो सारा बर्थ उसके दूध की धार से भीग जाता।
काफी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने अपने सिर को ज़ोर-ज़ोर से झटकना चालू किया। “आआह्ह्ह्ह्ह शिवााााम्म्म तुम इतने दिन कहााा थे। ओओह्ह्ह्ह मााााईईई माााार्र्र जाऊँगीीी। मुझे माााार्र्र दााालोोो मुझे मसाााल्ल दााालोोो…” और उसकी चूत में रस की बौछार होने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुछ धक्के मारने के बाद मैंने उसे चित लिटा दिया और ऊपर से अब धक्के मारने लगा। “आह मेरा गला सूख रहा है।” उसका मुँह खुला हुआ था और जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। मैंने हाथ बढ़ाकर मिनरल वॉटर की बोतल उठाई और उसे दो घूँट पानी पिलाया। उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस किया।
“चोदो परम चोदो। जी भर कर चोदो मुझे।”
मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा। काफी देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने रस में डूबे अपने लंड को उसकी चूत से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।
“आजा मेरे ऊपर,” मैंने प्रिया को कहा।
प्रिया उठकर मेरे बर्थ पर आ गई और अपने घुटने मेरी कमर के दोनों ओर रखकर अपनी चूत को मेरे लंड पर सेट करके धीरे-धीरे मेरे लंड पर बैठ गई। अब वो मेरे लंड की सवारी कर रही थी। मैंने उसके निप्पल को पकड़कर अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गई।
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मैंने उसके निप्पल को सेट करके दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुँह में गिरी। अब वो मुझे चोद रही थी और मैं उसका दूध निचोड़ रहा था। काफी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी, “परम मेरा निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।” हम दोनों साथ-साथ झड़ गए। काफी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लंबी-लंबी साँसें लेती रही। फिर जब कुछ नॉर्मल हुई तो उठकर सामने वाली सीट पर लेट गई।
हम दोनों लगभग पूरे रास्ते नग्न एक-दूसरे को प्यार करते रहे। लेकिन उसने दोबारा मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया, उसके बच्चेदानी में हल्का-हल्का दर्द हो रहा था। लेकिन उसने मुझे आश्वासन दिया, “आज तो मैं आपको और नहीं दे सकूँगी लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लूँगी अपने अंदर। और हाँ, अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनों भाइयों में से किसका बच्चा आता है।” उस यात्रा के दौरान कई बार मैंने उसके दूध की बोतल पर ज़रूर हाथ साफ किया।
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