Jawan Kamuk Bhabhi Kahani
नमस्ते दोस्तो, मैं शिप्रा एक नई सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. मैं 26 साल की लड़की हूँ और शादीशुदा हूँ. मेरी शादी को छह महीने हुए हैं. मैं अपने पति के साथ ससुराल से दूर एक बड़े शहर में रहती हूँ. मुझ पर जब से जवानी चढ़ी थी तब से मुझे चुदने में बहुत मज़ा आता है. खासकर जब मैं कुतिया बन कर चुदती हूँ, मुझे अपनी चूत में लंड लेने में बड़ा मजा आता है. लंड चूसना भी मुझे अच्छा लगता है. Jawan Kamuk Bhabhi Kahani
शादी से पहले मेरे चार मर्दों के साथ अवैध संबंध थे और मैं अपने जिस्म की भूख उनके साथ मिटाती थी. वो चारों लोग मुझसे अलग अलग समय में मिलते थे और मुझे खूब बुरी तरह से रगड़ते थे. मेरे पति यह सब कर नहीं कर पाते थे जिससे मेरी प्यास बढ़ने लगी थी.
लेकिन मेरी सेक्स की इच्छा जल्दी पूरी हो गई. मेरी ससुराल में एक शादी निकल आई और मुझे अपने पति के साथ घर जाना पड़ा. घर में सभी लोग शादी की तैयारी में जुट गए थे. उसी दौरान वहां मुझे एक अजनबी मर्द से मिलना हुआ. वो मेरे पति के दोस्त थे. उनका नाम शिशु पाल था.
शिशु पाल जी मुझे देखते ही मुझ पर फिदा हो गए और मेरे आगे पीछे मंडराने लगे. मैं उनकी नीयत समझ गई. मैं भी उन्हें बढ़ावा देने लगी और थोड़ी देर बाद हमारे बीच इशारे शुरू हो गए. मौका मिलते ही मैंने उन्हें ऊपर आने का इशारा कर दिया. मैं ऊपर गई, तो मेरे पीछे पीछे शिशुपाल जी भी आ गए. उन्होंने मुझे दबोच लिया.
मैं इठलाकर बोली- शिशु पाल जी, आप ये क्या कर रहे हो, मुझे छोड़ दो.
वो मेरे होंठों को चूमते हुए बोले- शिप्रा, तुम बहुत सुन्दर और सैक्सी हो. मैं तुम्हें भोगना चाहता हूँ.
बस ये कह कर उन्होंने मेरे मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
मैं बोली- नहीं शिशु जी, मैं आपके दोस्त की बीवी हूँ. मेरे साथ ऐसा मत करो.
वे मुझे खींचकर बाथरूम में ले गए. मैं उनकी बांहों में कसमसा रही थी. उन्होंने मुझे पलटा कर अपनी बांहों में भर लिया और ब्लाउज़ के अन्दर हाथ डालकर मेरे मम्मे दबाने लगे. मैं दिखावे के लिए उन्हें रोक रही थी, पर मैं गर्म होने लगी थी. उन्होंने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.
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मैं सिसयाकर बोली- आह नहीं नहीं… आह ओह ओह प्लीज शिशु जी… नहीं नहीं आहह ओहह प्लीज उईइ मुझे जाने दो.
वे बोले- चिंता मत कर शिप्रा, कुछ नहीं होगा.
कुछ देर तक वे मेरे मम्मों को निचोड़ते रहे.
फिर उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे पेट को सहलाते हुए कहा- शिप्रा… आह क्या चिकना पेट है तुम्हारा.
वो मेरे पेट को सहलाते हुए धीरे धीरे अपना हाथ नीचे सरकाने लगे.
मैं बोली- नहीं नहीं शिशु जी, प्लीज़ छोड़ दो न… मत परेशान करो!
पर उन्होंने अपना हाथ मेरी पैंटी के अन्दर घुसा दिया और मेरी चिकनी चूत को सहलाने लगे.
मैं सिसयाकर बोली- प्लीज ऐसा मत करो आह नहीं… आह नहीं ओह ओह प्लीज छोड़ दो ना!
वे बोले- वाह शिप्रा मेरी जान… क्या चिकनी चूत है, मजा आ गया.
उन्होंने मेरे चेहरे को पीछे किया और मेरे होंठों को चूमने लगे. मैं चुंबन का मजा लेने लगी.
वो मेरी चूत सहलाते हुए बोले- शिप्रा, कुछ नहीं होगा, सूरज को नहीं पता चलेगा कि हम यहां क्या कर रहे हैं. बस तू साथ दे… जल्दी से हो जाएगा.
मैं बोली- मैं तो तैयार हूँ, शिशु जी जल्दी से जो करना है, करो.
उन्होंने मेरा बदन सहलाते हुए तेजी से मेरे कपड़े उतारे और खुद भी नंगे होकर मुझसे चिपक गए. मुझे उन्होंने दीवार से चिपका दिया और मेरे मम्मों को निचोड़ने लगे.
वे मुझे गाली देते हुए बोले- शिप्रा कैसा लग रहा है रंडी.
मैं उनकी गाली सुनकर सिसयाने लगी- आहह इस्स… अहहह ओहह… हआह हह धीरे-धीरे मसलो न… दर्द हो रहा है आहह आहह!
वे बेदर्दी से मेरे मम्मों को निचोड़ते रहे. फिर उन्होंने बारी बारी से मेरे निप्पलों को चूसना शुरू कर दिया और मेरी चूत में उंगली घिसने लगे. मैं सिसयाने लगी- आहह ओह… इस्स आह… आह ओह… छोड़ दो नाआअ प्लीज! छोड़ दो. वे तेजी से चूत में उंगली घिस रहे थे जिस वजह से थोड़ी ही देर में मैं झड़ गई और हांफने लगी. उन्होंने मुझे पलटा लिया और मेरे होंठों को चूमने लगे. उन्होंने मुझे बिठा दिया और अपना लंड निकाला.
मैं लंड सहलाती हुई बोली- बाप रे शिशु जी… ये लंड है या एक लोहे की छड़… बाप रे कितना लंबा मोटा लंड है.
वे खुल कर गाली देते हुए बोले- मादरचोद कुतिया… लंड देखती रहेगी या मुँह में भी लेगी हरामजादी?
मुझे गाली सुनते हुए चुदने में बेहद मजा आता है.
मैं गर्म होकर उनके लंड का सुपारा चूमकर बोली- शिशु जी, इस हब्शी लंड को मैं अपने मुँह में जरूर लूँगी.
और मैं अपने हाथों से लंड को सहलाने लगी. वे मेरे मम्मों को सहलाने लगे, मैं उनके लंड का सुपारा चूसने चाटने लगी.
वे बोले- आह हरामजादी… शिप्रा चूस रांड… चूस भैन की लौड़ी… और चूस आह क्या लंड चूसती है मादरचोद… मजा आ गया… चूस बहनचोद चूस!
उन्होंने मेरा सर पकड़कर मेरे मुँह में लंड पेला और धक्के मारना शुरू कर दिया. क्या लंड था… खूब मोटा और लम्बा! जब भी मेरे गले से टकराता, मेरी सांसें रुक सी जाती थीं. तभी कमरे में पति आ गए और आवाज देकर बोले- शिप्रा तुम बाथरूम में हो? मैं डर गई और मैंने लंड छोड़ दिया, पर शिशु जी मेरे मुँह में लंड डालकर बोले- सूरज, यहां तो मैं नहा रहा हूँ. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरे पति बोले- अरे… वो शायद नीचे के बाथरूम में होगी, मैं नीचे देखता हूँ.
वे नीचे चले गए.
मैं लंड निकाल कर बोली- शिशु जी मेरे पति ढूंढ रहे हैं, मुझे जाने दो ना!
वे बोले- तू चिंता मत कर बहनचोद, कुछ नहीं होगा. बस थोड़ा सा और लंड चूस ले.
वो लंड मेरे मुँह में डालकर तेजी से घिसने लगे. मैं औकक औकक आक करने लगी और लंड को चूसने लगी. करीब 15 मिनट के बाद मेरे मुँह में धमाका हुआ और मेरा मुँह उनके वीर्य से भर गया.
वे बोले- आह हरामजादी क्या लंड चूसती है मादरचोद… आह मजा आ गया. पूरा माल पी ले मादरचोद कुतिया!
मैं पूरा वीर्य गटक गई. उनका लंड अभी भी तना हुआ था.
मैं लंड को चाटती हुई बोली- शिशु ये तो अभी भी खड़ा है?
वो बोले- शिप्रा, ये असली लंड है मादरचोद, तुझे चोदने के बाद ही बैठेगा.
मैं बोली- प्लीज़ शिशु जी, मेरे पति बुला रहे हैं, अब तो जाने दो.
उन्होंने शॉवर चालू किया और मुझे अपनी बांहों में लेकर बाथरूम में लिटा दिया.
वो बोले- शिप्रा तू साथ दे, जल्दी से हो जाएगा.
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उनके अनुभवी हाथ मेरे बदन के उभारों को सहलाने लगे और मैं उनकी बांहों में कसमसाने लगी. हमारे गीले नंगे बदन एक हो गए. हमारे बीच में कोई दूरी नहीं बची थी. उनका खड़ा लंड मेरी चूत से सट गया था. पहले तो मैं ना-नुकुर करती रही, फिर कुछ देर में मैं सब कुछ भूल गई और मैंने टांगें फैला दीं.
वो मेरी फ़ैली टांगों के बीच में से मेरे ऊपर चढ़ गए. उनका लंड मेरी चूत को चूमने लगा और मैं गर्म होकर सिसयाने लगी- हाय आहह… इस्स अहह ओहहह शिशु कितना तड़पाओगे… चोदो चोदो… जल्दी से मेरी आग बुझा दो! शिशु ने सुपारा चूत पर टिका दिया. मेरी सांस भारी होने लगी और मैं आंखें बंद करके लंड के घुसने का इन्तजार करने लगी. शिशु ने एक झटके में सुपारा चूत में घुसा दिया.
मेरी कराह निकली- आहह धीरे-धीरे शिशु… ये आपकी ही चूत है… इस पर रहम करो.
उन्होंने मेरे मम्मों को दबाना शुरू कर दिया और लंड चूत में सरकाने लगे. उनका लंड पतिदेव के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था. मैं कराह रही थी- आहह आऊ… धीरे-धीरे… आआह… ऊऊईई… आहह इस्स बापरे धीरे-धीरे डालो… आआह ऊऊईई शिशु… कितना मोटा लंड है बाप रे… जान निकल गई ओहहह इस्स.
उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया और चूमने लगे. इससे मेरी सिसकारियां दब गईं और मैं उम्म अम्म करने लगी. कुछ ही देर में पूरा लंड मेरे अन्दर समा गया. उनका लंड बच्चेदानी तक घुस गया था. मेरी प्यास बुझने लगी थी.
शिशु मुझसे चिपकते हुए बोले- शिप्रा, क्या बात है रानी… मज़ा आ गया क्या मस्त कसी हुई चूत है मादरचोद… आह काफी दिनों बाद ऐसी मस्त चूत मिली है.
थोड़ी देर तक वो मुझे चूमते रहे.
मैं अपनी कमर हिलाकर बोली- शिशु, जल्दी से चोदो ना!
वो मुस्कुरा कर उठे और मेरे बदन को सहलाने लगे. उनके हाथ मेरे मम्मों पर कस गए और मम्मों को दबाते हुए तेजी से चोदने लगे. पहले मुझे दर्द हुआ और मैं होंठों को भींचकर सिसयाने लगी- इस्स आहह… आऊ धीरे-धीरे… आआऊऊईई करो.
कुछ ही पलों में उनकी ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मेरी चूत फैल गई और मेरा दर्द कम हो गया. अब मैं आंखें बंद करके चुदाई का मज़ा लेने लगी और अपनी कमर हिलाकर उनका साथ देने लगी. शिशु मेरे मम्मों को निचोड़ने लगे और खींच खींच कर झटके से चोदने लगे.
वो बोले- शिप्रा, कैसा लग रहा है रंडी?
उनका लंड मेरी बच्चेदानी तक घुस रहा था. मैं मस्ती में सिसयाने लगी- आहह इस्स… मज़ाहह आ रहा है अहहह ओहहह… आह ओहहह शिशु कितना मोटा लंड है… सच में बहुत मज़ा आ रहा है… आह… और तेज रगड़ो… आह फाड़ दो मेरी चूत को. शिशु की तूफानी चुदाई से मैं जल्दी ही झड़ गई और हांफने लगी- आहह आहहह शिशु… बस बस रूको… आहह आऊ छोड़ दो न! ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो बोले- शिप्रा, बस थोड़ी देर सहन कर ले रानी.
उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधों पर फंसाईं और मेरे ऊपर उठक बैठक करने लगे. मेरा बदन दोहरा हो गया और मैं कराहने लगी- आहह आऊ… धीरे-धीरे दर्द हो रहा है… आहह मर गई आइइइ आहह! कोई 15 मिनट चोदने के बाद उन्होंने लंड बाहर खींचा और मेरे मम्मों के बीच में फंसाकर घिसने लगे.
थोड़ी देर बाद मैंने मुँह खोल दिया और उन्होंने लंड मेरे मुँह में पेल दिया. वो लंड रगड़ने लगे. मैं फिर से औकक आकक करने लगी. जब मैं थक गई, तो लंड को मुँह में भरकर चूसने लगी. थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड बाहर खींचा और बोले- कैसा लगा बहनचोद?
मैं उठकर बोली- शिशु, मज़ा आ गया.
उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और लंड चूत में घुसा दिया. मैंने अपनी टांगें उनकी कमर में फंसा दीं और उछलने लगी. उन्होंने अलग अलग तरीके से मुझे खूब रगड़ा और फिर से लेट गए. अब मैं उनके लंड की सवारी करने लगी. कुछ मिनट उन्होंने अपने वीर्य से मेरी चूत भर दी. उनके वीर्य की गर्मी से मैं फिर से झड़ गई. मैं उनके ऊपर गिर गई और हांफने लगी.
वो मेरे होंठों को चूमते हुए बोले- मादरचोद साली… क्या बात है मज़ा आ गया!
मैं भी आह करती हुई उन्हें चूमने लगी.
वे मुझसे चिपककर और मेरे होंठों को चूमकर बोले- शिप्रा, कैसा लगा मादरचोद?
मैं उनके होंठों को चूमकर बोली- शिशु जी, मजा आ गया, पर अब मुझे जाने दो.
शिशु ने मेरे होंठों को कसकर चूमा और बोले- ठीक है बहनचोद, अभी तो जा. तुझे तो बाद में अच्छी तरह से चोदूँगा मादरचोद!
मैं बोली- शिशु जी अब तो मैं आपकी हूँ, बाद में मुझे जी भरकर चोद लेना, पर अभी जाने दो.
उन्होंने मुझे छोड़ दिया. मैंने कपड़े पहने और उन्हें चूमकर मैं नीचे चली गई. फिर तो जब भी मौका मिलता, वे मुझे पकड़ते और रगड़ देते. मुझे सबसे छुपकर चुदाई करने में मजा आ रहा था. वो वहां करीब चार दिन रूके और मुझे कई बार भोगा. शादी के बाद मैं और पतिदेव वापस आ गए.
कुछ दिन बाद पापा का फोन आया कि वह कुछ सामान शिशु के साथ भेज रहे हैं. मैं तो शिशु के आने की बात से ही खुश हो गई. जिस दिन शिशु आने वाले थे, मैं इंतजार करने लगी. थोड़ी देर बाद घर की बेल बजी. मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि शिशु जी थे. पति उनसे बातें करने लगे.
पतिदेव बोले- यार, तुम रुको और शिप्रा से बात करो, मैं ऑफिस का जरूरी काम करके आता हूँ. मुझे थोड़ा समय लग जाएगा.
मैं बोली- हां, आप काम करके आओ, मैं शिशु जी को बोर नहीं होने दूँगी.
वो चले गए. मैं और शिशु रह गए.
वे बोले- वाह शिप्रा, क्या मस्त लग रही है हरामजादी… चल अन्दर चल. आज तो तुझे जी भरकर चोदूँगा मादरचोद.
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मैंने दरवाजा बंद किया और हम दोनों अन्दर आ गए. उन्होंने मुझे दबोच लिया और मेरे बदन से खेलने लगे. उन्होंने मुझे चूमना शुरू कर दिया और सोफे पर बैठ गए. उन्होंने मुझे खूब दबाया और खूब चूसा. कमरे में मेरे और उनके कपड़े उड़ने लगे और थोड़ी देर बाद हमारे नंगे ज़िस्म जमीन पर ही उलझ गए. मेरी टांगें हवा में उठ गईं. उन्होंने मेरी चूत में लंड डाल दिया और रगड़ने लगे.
मैं मस्ती में आ गई और बोली- इसी लंड की प्यास थी… आह और तेज तेज रगड़ो… फाड़ दो मेरी चूत को!
उन्होंने तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी.
मैं कराहने लगी- आहह आऊ… इस्स अहहह ओहहह… शिशु क्या लंड है मज़ा आ गया और तेज रगड़ो.
मैं चुपचाप सब कुछ करवा रही थी. उन्होंने करीब 40 मिनट तक मुझे अच्छी तरह से चोदा और अपना रस मेरे अन्दर छोड़ दिया.
वो मेरे ऊपर गिरे और हांफते हुए बोले- शिप्रा, कैसा लगा… मेरी कुतिया… मज़ा आया कि नहीं?
मैं उनके बदन को सहलाती हुई बोली- शिशु, मज़ा आ गया.
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे छोड़ दिया और बोले- शिप्रा, तुम्हारे पापा ने तेरे लिए कुछ सामान और प्यार भेजा है. पहले मैं तुझे प्यार कर लूँ, बाद में तू सामान भी देख लेना.
फिर क्या था, उन्होंने मुझे ड्राइंग रूम में ही दो बार निपटा दिया.
मैं बोली- शिशु जी अब छोड़ दो न, मैं नहा कर आती हूँ, फिर आप जी भरकर प्यार कर लेना.
वे बोले- शिप्रा, क्या मैं नहला दूँ?
मेरा मन खुश हो गया पर मैंने कहा- आप रहने दो, मैं खुद ही नहा लूंगी.
मैं अपने बेडरूम के बाथरूम में घुस गई. मैंने शॉवर चालू किया और नहाने लगी. मैंने दरवाजे खुले ही छोड़ दिए थे. थोड़ी देर बाद शिशु ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरे मम्मे दबाने लगे.
मैं चौंकने का करती हुई बोली- शिशु जी आप यहां क्या कर रहे हैं?
वे बोले- अरे मादरचोद, तुझे नहला रहा हूँ.
उन्होंने मेरे मम्मों को निचोड़ना शुरू कर दिया और कहा- क्या कड़क मम्मे हैं मादरचोद रांड, मजा आ गया.
मैं सिसयाने लगी- आहह ओह… धीरे धीरे आह… उईइ इइइ स्सस सहह प्लीज छोड़ दो ना… दर्द हो रहा है.
उन्होंने मेरी चूत पर साबुन लगा दिया और घिसने लगे. थोड़ी देर बाद चूत झाग से भर गई. वे मेरी चूत में उंगली डाल कर घिसने लगे. मेरा बदन ऐंठने लगा और मैं ‘आहह ओह इस्स आह ओह…’ करने लगी. उनका लंड मेरी पीठ से चिपका हुआ था. थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे छोड़ दिया और मुझे पलटा लिया. मैंने उनके होंठों को चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथ से लंड को सहलाने लगी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वे बोले- मादरचोद कुतिया, जल्दी से मुँह में ले हरामजादी रंडी.
मैं हंसी और उनके बदन को चाटते हुए बैठने लगी. मैं घुटनों पर बैठी और दोनों हाथों से लंड को सहलाने लगी. मैंने शिशुपाल के हब्शी लंड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.
शिशुपाल मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोले- शिप्रा, कैसा लगा मेरी कुतिया?
मैंने कहा- हां शिशु जी, आपके लंड का स्वाद मस्त है.
शिशु जी मेरे होंठों पर लंड घिसने लगे. मैंने मुँह खोला और शिशुपाल ने मेरे सर को पकड़ कर धीरे धीरे लंड को मेरे मुँह में घुसाना चालू कर दिया. मैं उम्म औकक करने लगी और उनको हटाने लगी पर उन्होंने मुझे दबोच कर रखा था. धीरे धीरे उनका लंड मेरे गले तक घुस गया और उनके अंडे मेरे होंठों से चिपक गए. मेरी सांस रुकने लगी, आंखों से आंसू निकलने लगे और मैं तड़पने लगी. मेरी हालत देखकर उन्होंने लंड निकाल लिया, तब मेरी जान में जान आई.
मैं हांफने लगी और बोली- शिशु जी, आपने तो मेरी जान निकाल दी.
वे लंड को मेरे गालों पर रगड़ने लगे और बोले- शिप्रा, तू चिंता मत कर छिनाल, मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगा.
उन्होंने फिर से अपने लंड को मेरे मुँह में डाला और घिसने लगे. मैं फिर से औक औक करने लगी. जब शिशु लंड बाहर खींचते, तो मैं होंठों से लंड को कस लेती और लंड मेरे होंठों को रगड़ता हुआ निकलता. ऐसा करने में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
शिशु बोले- वाह हरामजादी छिनाल वाह… तू तो काफी मजेदार तरीके से लंड चूसती है… चूस बहनचोद चूस!
मैं बोली- शिशु जी, आपके लंड का स्वाद बड़ा मस्त है… मजा आ गया.
काफी देर तक मैं लंड चूसती रही. फिर वो मेरे मम्मों के बीच में लंड फंसा कर घिसने लगे.
वे बोले- अरे वाह मेरी रंडी, क्या कड़क मम्मे हैं… मजा आ गया.
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मैं अपने मुँह से लंड का सुपारा चूसने लगी. मैंने उनके अंडे भी खूब चूसे. हम 69 की पोजीशन में आ गए. उन्होंने लंड मेरे मुँह में रगड़ना शुरू कर दिया. मैं औक औक करने लगी. वह तेजी से लंड रगड़ने लगे और थोड़ी देर बाद उन्होंने वीर्य से मेरा मुँह भर दिया.
वे बोले- पी साली कुतिया, पूरा माल गटक जा मादरचोद रांड.
मैं धीरे धीरे पूरा वीर्य गटक गई और उनके लंड को चाट कर बोली- वाह शिशु, आपका माल स्वादिष्ट था, मजा आ गया.
वे मेरे मम्मों पर पेशाब करने लगे और मैं पेशाब से मम्मों को धोने लगी. मैंने मुँह खोल दिया और वे मेरे मुँह में पेशाब करने लगे. मैं उनका पूरा पेशाब पी गई. हम फिर शॉवर के नीचे खड़े हो गए. मैंने उनके बदन को अपने मम्मों से खूब रगड़ा और अगले पड़ाव की तैयारी में लग गए.
हम दोनों गीले बदन नंगे ही बाहर आए. उन्होंने मुझे पलंग पर लेटाया और मेरी चूत को निहारने लगे. उन्होंने मेरी जांघों को खूब चूमा और चाटा. फिर झुककर मेरी चूत को चूमा और अपना मुँह मेरी चूत में घुसेड़ दिया. थोड़ी ही देर में उनकी लपलपाती जीभ मेरी चूत के अन्दर घूमने लगी.
मैं तो बस उछलती रही और उनका सर पकड़कर और अन्दर करती रही. शिशु जी ने मुझे ऐसे पांच मिनट तक चाटा और मैं झड़ गई. मैं तो इसी से ही थक गई, लेकिन अभी तो सफ़र की शुरूआत थी. उन्होंने मेरे ऊपर चढ़कर मम्मों को चाटना शुरू कर दिया. उनका लंड फिर से खड़ा हो गया और मेरी चूत से टकराने लगा. मैं अपनी कमर उचकाने लगी.
वह बोले- मादरचोद रांड, तू तो चुदने के लिए तैयार हो गई.
मैं टांगें फैलाकर बोली- शिशु जी अब सहन नहीं हो रहा प्लीज, जल्दी से लंड मेरी चूत में घुसा दो ना!
उन्होंने अपना लंड चूत पर रखा और एक झटके में लंड अन्दर डाल दिया. मेरी आहह निकल गई.
मैं बोली- शिशु, आपने तो मेरी चूत को गड्डा बना दिया है.
उन्होंने मेरी दोनों टांगें अपने कंधों पर फंसाई और तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी.
मैं कराहने लगी- आहह आऊ… धीरे-धीरे आहहह… शिशु मज़ाहह आहह रहा है.
मैं अपनी गांड उचकाने लगी.
वह बोले- मादरचोद कुतिया साली… मजा आ रहा है कि नहीं?
मैं बोली- शिशु जी आपने तो मेरी जान निकाल दी… आह काफी मजा आ रहा है.
वो मेरे ऊपर उठक बैठक करने लगे. उनका लंड मेरी चूत में सीधा सीधा घुस रहा था और मैंने उनकी कमर कस ली थी. मैंने थोड़ा सा उठ कर देखा, तो देखती रह गई. वो बड़ी बेदर्दी से मेरी चूत को चोद रहे थे. मेरी चूत को शिशु ने भोसड़ा बना दिया था. उनका लंड तेजी से चूत में अन्दर बाहर हो रहा था. तभी चूत ने पानी छोड़ दिया और कमरे में फच फच की आवाज गूंजने लगी.
मैं बोली- शिशु जी आपने तो मेरी चूत की मां चोद दी है, अब चूत को फाड़ दोगे क्या… प्लीज़ थोड़ी धीरे धीरे चोदो ना!
वे बोले- तू चिंता मत कर बहन की लवड़ी, कुछ नहीं होगा रंडी, तेरी चूत मस्त है. मैंने कई लड़कियों और औरतों को चोदा है, पर तेरी जैसी चुदासी औरत कोई नहीं थी. साली रंडी तुझे चोदने में बड़ा मजा आ रहा है.
वे मुझे चूमने लगे और तेजी से मेरी चुदाई करने लगे. शिशु काफी मस्त तरीके से चोद रहे थे. मैं ‘अम्मम उम्म…’ करने लगी. उनके झटके काफी तेज हो गए, पलंग भी चरमरा रहा था और मुझे लगा कि कहीं पलंग ना टूट जाए. थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गई. अब मुझसे उनका लंड सहन नहीं किया जा रहा था.
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मैं कराहती हुई बोली- आहह आह शिशु प्लीइइज… आई ईई छोड़ दोओ.
मगर वे झटके मारते हुए बोले- शिप्रा मादरचोद कुतिया, अभी तो मुझे मजा आने लगा है… और तू बोल रही है कि छोड़ दो. हरामजादी रंडी अभी तो मैं तुझे जी भरके चोदूँगा मादरचोद.
उन्होंने लंड निकाल कर मेरे मुँह में डाला और कहा- लंड चूस छिनाल.
मैं लंड चूसने लगी.
वे बोले- चल कुतिया बन जा शिप्रा.
मैं चुपचाप कुतिया बन गई. वे मेरे पीछे आए और मेरी चूत में लंड घुसा दिया. उन्होंने मेरे कंधों को पकड़ा और तेजी से मेरी चूत में लंड पेलने लगे.
कमरे में मेरी चीखें गूंजने लगीं- आईईईई ऊईईईई बचाओ आईईई मर गयी.
उन्होंने मेरे पुट्ठों पर चांटे मारने शुरू कर दिए. कमरे में फच फच के साथ चट चट चटाक की आवाज सुनाई दे रही थी. उन्होंने चुदाई रोकी और मेरे बालों को पकड़कर मुझे पीछे खींच लिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरे मम्मों को निचोड़ते हुए कहा- क्यों री कुतिया साली… कैसा लग रहा है मादरचोदी?
मैं बोली- शिशु जी, आपने मुझे काफी देर तक चोद लिया है… प्लीज अब छोड़ दो ना… बाद में चोद लेना. मुझे प्यास लग रही है.
वे बोले- साली मादरचोद रांड, अभी तेरी प्यास बुझाता हूँ.
उन्होंने मुझे अपने ऊपर से गिरा दिया और मेरे मुँह में लंड डाल दिया. मैंने उन्हें देखा. वे धीरे धीरे मेरे मुँह में पेशाब करने लगे.
वे मेरे बालों को सहलाते हुए बोले- शिप्रा अपनी प्यास बुझा ले बहनचोद छिनाल.
मैं अपनी आंखें बंद करके धीरे धीरे उनका पेशाब पीने लगी. पूरा पेशाब पीने के बाद मैं उनके लंड को चूसने चाटने लगी.
मैं बोली- शिशु जी, आपकी गर्म गर्म पेशाब पीने में मजा आ गया.
उन्होंने मुझे खड़ा कर दिया और मेरे मम्मों को सहलाते हुए बोले- शिप्रा तू बहुत बड़ी कुतिया है हरामजादी. तेरे जैसी चुदक्कड़ औरत मुझे अब तक नहीं मिली.
मैं बोली- हां शिशु जी, मैं तो बस लंड की दीवानी हूं. मुझे चुदाई में मजा आता है, पर मेरे पति को चुदाई करने का टाइम नहीं मिलता.
वे बोले- तू चिंता मत कर मादरचोद रांड… आज तुझे जी भरकर चोदूँगा मादरचोद.
हम दोनों चिपक गए और एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. थोड़ी देर बाद ही उनका लंड फिर खड़ा हो गया और मेरी चूत से टकराने लगा.
मैं बोली- शिशु जी, यह शैतान तो फिर खड़ा हो गया!
वे बोले- अरे मादरचोद, ये भी तुझे अभी और चोदना चाहता है.
मैं बोली- प्लीज शिशु जी, अब बिल्कुल भी हिम्मत नहीं है. आपने तो मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया है.
वे बोले- बहनचोद रंडी, अब मैं तेरी गांड मारूंगा.
मैं डर गई और मैंने कहा- हे भगवान्, आप क्या करने की सोच रहे हैं. एक बार मेरे पति ने डालने की कोशिश की थी, तो वे नाकामयाब हो गए थे. सिर्फ उनके टोप से ही मैं चीखने लगी थी और यह तो मूसल है शिशु जी… मैं आपकी हर बात मानूँगी, पर मेरी गांड को छोड़ दो.
वे मुझे चूमने लगे और बोले- अरे मेरी जानेजाना, तुझे बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा. मैं बिल्कुल आराम से तेरी गांड मारूंगा.
मैं नहीं नहीं करती रही पर उन्होंने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे मम्मों को सहलाते हुए बोले- शिप्रा मान जा मेरी लौंडिया, देखो दर्द हुआ तो मैं लंड निकाल लूँगा.
वे मुझे चूमने लगे और मेरे मम्मों को दबाने लगे. थोड़ी देर बाद मैं गर्म हो गई और सिसकारी लेने लगी. उन्होंने मेरी दोनों टांगों को फैलाया और मेरी चूत के नीचे एक तकिया रख दिया. मेरी गांड उठ गई और वे मेरी गांड सहलाने लगे.
वे बोले- आह मादरचोद रांड… क्या नरम नरम पुट्ठे हैं.
मैं हंसी और बोली- शिशु जी, आपने तो मेरी ना को भी हां में बदल दिया.
उन्होंने अपनी उंगली मेरी गांड में घुसा दी. मैं एकदम से पलट गई. वे उठ कर सामने टेबल से तेल की शीशी ले आए और अपनी उंगली तेल में डुबो कर मेरी गांड में डालने लगे. मुझे बड़ा मजा आ रहा था और मैं सिसयाने लगी ‘आहह ओह इस्स आह आह ओह.’ थोड़ी देर में उन्होंने पूरा तेल मेरी गांड के अन्दर भर दिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घिसने लगे.
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मुझे मजा आने लगा और मैं बोली- शिशु जी जल्दी से लंड गांड में घुसा दो.
मैंने भी उठकर उनके लंड पर तेल लगाकर चिकना कर दिया.
वे बोले- चल कुतिया, लेट जा मादरचोद.
मैं तकिये पर लेट गई और अपनी उंगलियों से अपनी गांड फैला कर बोली- प्लीज शिशु जी, अपना लंड धीरे से डालना, मेरी गांड मत फाड़ देना.
उन्होंने मेरी टांगें फैलाईं और लंड मेरी गांड में घुसाने. मेरी गांड फैलने लगी.
मैं कराहने लगी- आह शिशु जी… ओह ओह… प्लीज शिशु जी नहीं… ईईई उफ अह छोड़ दो ना… काफी मोटा लंड है… आईईईई ऊईईईई आआह.
शिशु ने मेरी कमर पकड़ी और जोर लगाया, तो उनका मोटा सुपारा मेरी गांड में घुस गया. मेरी गांड छिल गई. मैं थोड़ी सी तड़पी, फिर शांत हो गई. शिशुपाल जी शायद इसी का इंतजार कर रहे थे; उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और जोर का झटका दे मारा. उनका आधा लंड मेरी गांड में घुस गया.
मैं जोर से चीखी- आईईई ईईई… मर गयी मम्मीईईई… ईईई आहह… बचाओ शिशु जीईई.
शिशु ने मेरी चीख पर कोई ध्यान नहीं दिया और फिर से एक बार जोर से झटका दे मारा. इस बार पूरा लंड मेरे अन्दर हो गया. मेरी आंखों में अंधेरा छा गया और मुझे लगा कि धरती हिल गयी है. फिर शिशु जी ने जो लंड पेला, मुझे ऐसा लगा कि मेरी गांड के दो टुकड़े हो जाएंगे.
मैं चीखने लगी- आई ईईई ऊईई ईई बचाओ… आह छोड़ दो नाआ.
शिशुपाल बोले- वाह हरामजादी, वाह क्या बात है… आह मजा आ गया. अरे वाह मेरे सूरज… कसम से क्या बीवी लाया है… क्या चूसती है रांड आह क्या चुदती है. बड़ी मस्त गांड है शिप्रा की. आह देखो ये हरामजादी साली कुतिया कैसे गांड मरा रही है.
वे जोश में आ गए और तेजी से मेरी गांड मारने लगे. कमरे में मेरी चीखें गूंजने लगीं- आईई ईई ऊईईईई… आआह बस रुकोओ आहह धीरे धीरे. मैंने सोचा कि जब मेरे पति कोशिश कर रहे थे तो उनका लंड गांड में घुसा भी नहीं और उन्होंने कहा कि गांड कसी हुई है, पर शिशु ने तो मेरी गांड में अपने लंड को घुसा दिया.
मैंने मन में कहा कि साले सूरज तुझे गांड मारना नहीं आया, तो मेरी गांड को दोषी बना रहा था. शिशु को देख कैसे मेरी गांड का फालूदा बना रहे हैं. शिशु ने पांच मिनट में मेरी गांड को पोला कर दिया और मेरा दर्द कम हो गया. मेरी चीखें कम हो गईं और मैं सिसयाने लगी- आहह ओह इस्स… प्लीज छोड़ दो ना दर्द हो रहा है.
शिशु रूककर मेरे गालों को चूमने लगे और बोले- दर्द कम हुआ कि नहीं?
मैं बोली- हां थोड़ा सा कम हो गया है मजा भी आ रहा है.
उन्होंने मेरे बदन को करवट लेकर लिटा लिया और मेरे मम्मे दबाने लगे.
मैं- आह आह धीरे धीरे मसलो… आह ओहह हह प्लीज.
शिशुपाल जी धीरे धीरे मेरी गांड मारने लगे.
वो लंड अन्दर बाहर करते हुए बोले- सच में यार… बड़ी मस्त गांड है तेरी… साली हरामजादी रंडी.
मैं बोली- शिशु जी, आज से मैं भी आपकी और मेरी चूत और गांड भी आपकी.
शिशु जी ने रफ्तार बढ़ा दी और मैं मस्ती में सिसयाने लगी- आहह ओह… क्या मस्त लंड है आपका… आह मजा आ गया आह… और तेज शिशु जी… और तेजी से मेरी गांड मारो!
वे पूरी ताकत से मुझे चोद रहे थे. मेरा बदन दुखने लगा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था.
मैं बोली- शिशु जी मुझे अपनी गांड का स्वाद तो चखा दो प्लीज.
उन्होंने अपना लंड निकाल लिया और मैं उठ कर लंड को चाटने लगी.
वह बोले- आह मादरचोद रांड… चाट साली… और चाट कुतिया.
मैं बोली- शिशु जी… आह आपका लंड चाटने में बड़ा मजा आ रहा है.
उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में डाला और घिसने लगे. मैंने जी भरकर लंड को चाटा और फिर अपनी गांड में घुसा कर बैठ गई. शिशु जी नीचे से मेरी गांड मारने लगे और मेरा बदन उछलने लगा.
मैं कराहती हुई बोली- आहह आह आह अब छोड़ भी दो ना!
उन्होंने मेरे मम्मों को निचोड़ते हुए कहा- आह बहनचोद शिप्रा, मजा आ रहा है चोदने में, रंडी साली कुतिया शिप्रा, तुझे कैसा लग रहा है मादरचोद?
मैं- आह बड़ा मजा आ रहा है.
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वे देर तक मेरी गांड मारते रहे, मजा लेते रहे. फिर उन्होंने मुझे पलटा कर लिटा दिया और मेरी टांगें अपने कंधों पर फंसा लीं. वो फिर से तेज गति से मेरी गांड मारने लगे. मैं ‘ओहहहह ओह प्लीज छोड़ दो ना.’ करती रही, पर वे मेरी गांड चुदाई करते रहे. उन्होंने मेरी गांड को एकदम ढीला कर दिया था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
करीब पंद्रह मिनट तक वे अपने लंड से मेरी गांड का फालूदा बनाते रहे और फिर उन्होंने मेरी गांड को अपने वीर्य से भर दिया. उनके वीर्य से मेरी गांड की सिकाई हो गई और मैंने अपनी टांगें उनके कंधों से उतारकर बिस्तर पर फैला लीं.
उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा- शिशु जी, आपने तो मेरी जान निकाल दी, बाप रे कितनी बुरी तरह से मेरी गांड और चूत को पेला.
वे बोले- मेरी मादरचोद रांड, साली तू तो चुदने के लिए ही बनी है बहनचोद. तुझे चोदने में मुझे काफी मजा आया.
उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. मैं लंड चूसती रही. फिर वह धीरे धीरे मेरे में पेशाब करने लगे और मैं उनका पेशाब पीने लगी. पूरा पेशाब पीने के बाद मैं बाथरूम में नहाने चली गई. नहाने के बाद शिशु जी ने मुझे फिर बिस्तर पर लिटा दिया और फिर से मुझे चोदने लगे.
उस दिन उन्होंने मुझे कपड़े नहीं पहनने दिए. उन्होंने पूरे घर में अलग अलग जगहों पर मुझे जी भर कर चोदा. शिशु 4 दिन रुके. वो मुझे सूरज के ऑफिस जाने के बाद से लेकर सूरज के आने तक खूब चोदते. अभी भी जब भी उन्हें मौका मिलता है, तो वह मुझे चोदने के लिए मेरे शहर आ जाते हैं. इस दौरान मैं कई बार गर्भवती भी हुई, पर उन्होंने हर बार मेरा गर्भपात करवा दिया.
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