Indian Bhabhi Porn Story
मेरा नाम राजवीर है। मैं 24 साल का नौजवान हूँ। सुंदर लड़की को देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगता है और बेकाबू हो जाता है। चोदने की इच्छा हो जाती है। मन करता है उसके नर्म-नर्म गालों को छू लूँ और उसके होठों को चूस लूँ। अपनी बाहों में भरकर उसकी चूचियों को दबा दूँ और अपने लंड को उसके बुर में डाल कर चोद डालूँ। Indian Bhabhi Porn Story
शादियों के दिन थे और शादी का माहौल था। मेरे तीसरे छोटे साले की शादी थी और हमलोग ससुराल में इकट्ठा हुए। काफी लोग होने की वजह से हर कमरे में कई लोगों का इंतजाम था। मेरी सलहज यानी पहले साले की बीवी का नाम था कल्पना। गेहुँआ रंग, भरा हुआ बदन, 34-30-36 के आँकड़े जैसा, गदराई जवानी और गजब की सुंदर।
इच्छा होता कि दबोच कर बस चबा ही डालूँ। इठलाती हुई जब चलती, अपनी साड़ी को सामने हाथ से चूत के पास संभालती हुई, तब मन करता कि बस इसकी गर्म चूत को क्यों न मैं ही पकड़ लूँ और मसलता रहूँ। साड़ी से वो अपनी मस्त और तनी हुई चूचियों को भरसक ढकती रहती लेकिन वो बगल से ब्लाउज के माध्यम दिखता रहता। झुकी हुई निगाहों से देखती और मुस्करा देती। हमारा लौड़ा और खड़ा हो जाता। शाम के करीब 4 बजे थे और मैं उसकी तरफ देखे जा रहा था।
तभी खिलखिलाती हुई बोली, “क्यों जीजाजी, क्या चाहिए?”
मेरे मुँह से निकल पड़ा, “तुम।”
चौंक कर बोली, “क्या कहा?”
मैंने जवाब दिया, “मेरा मतलब तुम्हारे हाथ की एक कप चाय।”
चाय पीकर जैसे-तैसे शाम गुजरी और रात हुई। एक कमरे में ऊपर पलंग पर मर्दों को सोने के लिए कहा गया और ठीक नीचे जमीन पर औरतों के लिए गद्दे लगाए गए। किस्मत देखिए, पलंग के जिस किनारे पर मैं था, ठीक उसके नीचे जमीन पर सबसे पहले कल्पना का बिस्तर था।
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मन में बड़ी गुदगुदी हो रही थी। लंड था कि उठे जा रहा था। मैंने ठान लिया कि बच्चू आज न चूकना। बस मौका देख कर पहल कर ही देना। फिर सोचा कि एक बार टच तो लेकर देखूँ।
मैंने कल्पना से पूछा, “कल्पना, ये मेरा तकिया एकदम किनारे में क्यों रख दिया। पलंग पर बीच में रखती।”
वो बोली, “क्यों आप करवट बहुत ज्यादा लेते हैं?”
फिर आहिस्ते से बोली, “प्लीज आप मेरे ऊपर मत गिर जाएगा।”
दोस्तों, उसका ये बोलने का अंदाज ऐसा था कि कोई बेवकूफ ही समझ न पाए। फिर क्या था, मैंने चादर तानी, लंड हाथ में लिया, और लेटे हुए सबके सोने का इंतजार करने लगा। आखिर रात कुछ गुजरी और थके हुए सभी लोग एक-एक कर गहरी नींद में सो गए सिवाय मेरे और कल्पना के, जो कि मैं जानता था।
हिम्मत जुटा कर मैं आहिस्ते से ऊपर पलंग के किनारे से उतर कर नीचे जमीन पर कल्पना के बगल में लेट गया। कमरे में पहले से ही अंधेरा था। मैंने पहले उसकी चादर आहिस्ते से थोड़ी सी अपने ऊपर ले ली और अपने बदन को उससे सटाया, मानो कह रहा हूँ कि मैं आ गया।
वो चुपचाप रही और मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने अपना हाथ अब धीरे से उसके कमर पर रखा और उसकी नरम लेकिन गर्म-गर्म नाइटी पर सरकाते हुए उसकी चूची पर रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। मैंने अब उसकी चूची को दबाया। वो शांत रही। और मैं मदहोश होने लगा। लंड खुशी के मारे फड़फड़ाने लगा।
लंड को मैंने उसकी गांड से चिपका दिया। और हाथ से दूसरी चूची को दबाने लगा। चाहत बढ़ी और मैंने अपने हाथों से उसकी नाइटी को ऊपर उठाया। अब मेरा हाथ उसके बदन पर था। हाथ को ऊपर लाते हुए और उसके नर्म-नर्म बदन का मजा लेते हुए मैंने उसकी नंगी चूचियों को छुआ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
गोल और एकदम सख्त। नर्म लेकिन गरम। निप्पल को दबाया और कसकस कर अब मैं चूचियों को दबा रहा था। होठों से मैं उसके गले को चूमने लगा। अब लंड चोदने के लिए बेताब हुआ जा रहा था। आखिर कब तक सहता। कोई आवाज भी नहीं कर सकते थे।
एक हाथ मैंने उसकी गर्दन के नीचे से घुसाकर उसकी तनी हुई चूची पर रखा और दूसरा हाथ मैंने सरकाते हुए उसकी चूत पर रख दिया। चूत पर घने बाल थे लेकिन फिर भी एकदम गीली थी। यानी चुदवाने के लिए तैयार। लंड तो बुर में घुसने के लिए बेताब था ही।
मैंने अपनी उंगली उसके बुर के दरार को छूते हुए अंदर घुसा दी। उसने एक आह सी भरी। वो भी चुदवाने को एकदम तैयार थी। उसके कान के पास मुँह ले जाकर मैंने फुसफुसाकर कहा, “मैं बाथरूम जा रहा हूँ, तुम थोड़ी देर बाद धीरे से आ जाओ जानेमान।”
आहिस्ते से उठकर दबदबे पाँव से मैं बाथरूम के अंदर घुस गया और दरवाजा हल्का सा खुला रख इंतजार करने लगा। पाँच मिनट बाद कल्पना आई और जैसे ही अंदर घुसी मैंने दरवाजा बंद कर चिटकनी लगा दी। अब क्या था। मानो सहनशीलता का बाँध बस टूट गया।
मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में भरा और अपने होठ उसके धड़कते होठों पर रख जोर-जोर से चूसने लगा। क्या होठ थे। जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ। ऐसा टेस्ट कि बस नशा आ गया। एक हाथ से मैंने उसके बाल पकड़ रखे थे चूमते हुए और दूसरे हाथ से मैं उसकी चूचियों को नाइटी के ऊपर से ही मसल रहा था।
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मेरा लंड पजामे के अंदर एकदम खड़ा हुआ परेशान हो रहा था। एक्साइटमेंट होने के बाद कपड़ा बहुत बुरे लगते हैं। नंगा बदन ही अच्छा लगता है। मैंने तुरंत अपने पजामे का नाड़ा खोल उसे हटाया। अंडरवियर निकाल फेंका। टीशर्ट उतार नंगा हो गया।
उसकी नाइटी के बटन को सामने से खोलना शुरू किया। जल्दी से उसके बदन से नाइटी निकाली, ब्रा के हुक को पीछे से खोला, और चूमते हुए दबाते हुए, कसकस कर एक-दूसरे को मसलते हुए पहले बेसब्री से उसकी नंगी आजाद चूचियों को हाथ में ले लिया।
सख्त भी थी और नरम भी थी। गरम भी थी और टाइट गोल-गोल भी थी। क्या कहूँ बस गजब की चूचियाँ थी। दबाओ तो चिटक-चिटक जाए। लेकिन बहुत-बहुत मजा आए। गहरी गुलाबी रंग की निप्पल्स के चारों तरफ ब्राउन रंग का गोलनुमा रोज।
सुगंध जो उसके शरीर से आ रही थी, और भी मदहोश किये जा रही थी। सेक्स का सुगंध बोला नहीं जा सकता। बस एंजॉय किया जा सकता है। वो अब भी पूरी तरह से नंगी नहीं थी। नाइलॉन का टाइट अंडरवियर उसके बुर को छुपाए हुए था। उसे जब हटाया तो कल्पना काफी शर्मा गई और अपना मुँह मेरी छाती में छुपा लिया।
मेरा लंबा और फड़फड़ाता हुआ लंड उसके बदन को चूत के आस-पास छूता जा रहा था। मैंने उसके थोड़ी को हाथों से उठाया अपनी आँखों की तरफ। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने उसे पलकों के ऊपर चूमा। दीवार के सहारे अपना लंड उसकी चूत के खिलाफ दबाया।
उसके होठों को चूसा और चूसता ही रहा। उसकी नंगी गोल-गोल मुलायम गरम सख्त सेक्सी चूचियों को खूब दबाया और मसला। आखिर रहा नहीं गया और उसकी चूची को निप्पल सहित अपने मुँह में भर लिया। उसकी दाहिनी चूची मसलते हुए, उसकी लेफ्ट चूची को मैं टेस्ट ले कर चूस रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझसे और रहा नहीं गया। मैंने मजा लेने के लिए उससे पूछा, “कल्पना रानी, तुम इतने दिन तक कहाँ छुपी थी? चोद दूँ?” उसने एक हाथ से मेरी पीठ को अपनी तरफ दबा रखा था और दूसरे हाथ से मेरे लंड को अपने मुलायम हाथों से पकड़कर बोली, “जीजाजी, जो भी करना है, जल्दी से कीजिए।”
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मैंने कहा, “क्या करूँ? बोलो ना, जान। तुम तो एकदम मलाई हो मलाई।”
उसने झट से जवाब दिया, “खा जाइए ना।”
“क्या-क्या खाऊँ रानी। तुम बड़ी मस्त चीज हो यार।”
उसने शरारती बातों का मजा लेते हुए कहा, “जीजाजी जल्दी से घुसा दीजिए ना।”
मैंने और मजा लेते हुए उसके कान के पास फुसफुसाकर कहा, “क्या घुसाऊँ और कहाँ।”
बोली, “धत्, आप बहुत बदमाश हैं। मैं जा रही हूँ।”
मैंने कस कर पकड़ तो रखा ही था। इन्हीं बातों में हम एक-दूसरे के बदन से लिपट-लिपट कर पता नहीं क्या-क्या कर रहे थे। बस कुछ न कुछ पकड़ा-पकड़ी, मसला-मसली, चूसा-चूसी चल रही थी।
आखिर मैंने कहा, “रानी, एक बार कहना पड़ेगा। सिर्फ एक बार। प्लीज।”
पूछने लगी, “क्या कहूँ जीजू?”
मैंने मजा लेते हुए कहा, “कह दो कि मेरे बुर में लंड डाल कर चोद दीजिए ना।”
उसने शरमाने के अंदाज से कहा, “छोड़िए ना, जीजू। और मत तड़पाइए।”
मैंने भी देखा कि अब ज्यादा देर करने में रिस्क है। मैंने अपना लंड उसके बुर के दरार पर रगड़ते हुए एक धक्का लगाया। लंड अंदर घुस तो गया लेकिन मजा नहीं आया। चुदाई का मजा तब ही है जब औरत को लिटा कर चोदा जाए। बाथरूम के फर्श पर मैंने कल्पना को लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
टाँगों को फैलाकर अपना लंड उसके बुर पर रखा और घुसाया। उसने भी थोड़ी सी मदद की और अपने बुर से मेरे लंड को समेट लिया। होठ चूसते हुए, चूचियों को दबाते हुए मैंने चोदना शुरू किया। वो भी नीचे से गांड उठा-उठा कर चुदवाने लगी। क्या चीज बनाई है ऊपर वाले ने ये चुदाई। बहुत-बहुत मजा आता है। जिसने चुदाई की है उसे ये पढ़कर महसूस हो रहा होगा कि हम दोनों कितना स्वाद ले रहे होंगे चुदाई का। बीच-बीच में चोदते हुए, उसकी चूची को चूस भी रहा था। चुदाई लंबी रखने के लिए मैंने स्पीड मीडियम ही रखी।
चूची चूसते हुए और भी कम। आखिर में लंड ने जब सिग्नल दिया कि अब मैं झड़ने वाला हूँ, तब मैंने कसकस कर चुदाई की। चोदता रहा, चोदता रहा, स्ट्रोक्स पे स्ट्रोक्स लगाता रहा। और वो उछल-उछल कर चुदवाई जा रही थी। ऐसा आनंद आ रहा था कि मालूम ही नहीं पड़ा कि हम दोनों कब एक साथ झड़ गए। जल्दी से हमने कपड़े पहने और बाहर निकलने के पहले मैंने कल्पना को कस कर अपनी बाहों में जकड़ा और चूमते हुए कहा, “सलहज साहिबा, वादा करो जब भी मौका मिलेगा तो चुदवाओगी।” “आप बहुत पाजी हैं” कह कर वो दबे पाँव चली गई।
मेरा नाम राजवीर है। मैं 24 साल का नौजवान हूँ। सुंदर लड़की को देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगता है और बेकाबू हो जाता है। चोदने की इच्छा हो जाती है। मन करता है उसके नर्म-नर्म गालों को छू लूँ और उसके होठों को चूस लूँ। अपनी बाहों में भरकर उसकी चूचियों को दबा दूँ और अपने लंड को उसके बुर में डाल कर चोद डालूँ।
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शादियों के दिन थे और शादी का माहौल था। मेरे तीसरे छोटे साले की शादी थी और हमलोग ससुराल में इकट्ठा हुए। काफी लोग होने की वजह से हर कमरे में कई लोगों का इंतजाम था। मेरी सलहज यानी पहले साले की बीवी का नाम था कल्पना। गेहुँआ रंग, भरा हुआ बदन, 34-30-36 के आँकड़े जैसा, गदराई जवानी और गजब की सुंदर।
इच्छा होता कि दबोच कर बस चबा ही डालूँ। इठलाती हुई जब चलती, अपनी साड़ी को सामने हाथ से चूत के पास संभालती हुई, तब मन करता कि बस इसकी गर्म चूत को क्यों न मैं ही पकड़ लूँ और मसलता रहूँ। साड़ी से वो अपनी मस्त और तनी हुई चूचियों को भरसक ढकती रहती लेकिन वो बगल से ब्लाउज के माध्यम दिखता रहता। झुकी हुई निगाहों से देखती और मुस्करा देती। हमारा लौड़ा और खड़ा हो जाता। शाम के करीब 4 बजे थे और मैं उसकी तरफ देखे जा रहा था।
तभी खिलखिलाती हुई बोली, “क्यों जीजाजी, क्या चाहिए?”
मेरे मुँह से निकल पड़ा, “तुम।”
चौंक कर बोली, “क्या कहा?”
मैंने जवाब दिया, “मेरा मतलब तुम्हारे हाथ की एक कप चाय।”
चाय पीकर जैसे-तैसे शाम गुजरी और रात हुई। एक कमरे में ऊपर पलंग पर मर्दों को सोने के लिए कहा गया और ठीक नीचे जमीन पर औरतों के लिए गद्दे लगाए गए। किस्मत देखिए, पलंग के जिस किनारे पर मैं था, ठीक उसके नीचे जमीन पर सबसे पहले कल्पना का बिस्तर था।
मन में बड़ी गुदगुदी हो रही थी। लंड था कि उठे जा रहा था। मैंने ठान लिया कि बच्चू आज न चूकना। बस मौका देख कर पहल कर ही देना। फिर सोचा कि एक बार टच तो लेकर देखूँ।
मैंने कल्पना से पूछा, “कल्पना, ये मेरा तकिया एकदम किनारे में क्यों रख दिया। पलंग पर बीच में रखती।”
वो बोली, “क्यों आप करवट बहुत ज्यादा लेते हैं?”
फिर आहिस्ते से बोली, “प्लीज आप मेरे ऊपर मत गिर जाएगा।”
दोस्तों, उसका ये बोलने का अंदाज ऐसा था कि कोई बेवकूफ ही समझ न पाए। फिर क्या था, मैंने चादर तानी, लंड हाथ में लिया, और लेटे हुए सबके सोने का इंतजार करने लगा। आखिर रात कुछ गुजरी और थके हुए सभी लोग एक-एक कर गहरी नींद में सो गए सिवाय मेरे और कल्पना के, जो कि मैं जानता था।
हिम्मत जुटा कर मैं आहिस्ते से ऊपर पलंग के किनारे से उतर कर नीचे जमीन पर कल्पना के बगल में लेट गया। कमरे में पहले से ही अंधेरा था। मैंने पहले उसकी चादर आहिस्ते से थोड़ी सी अपने ऊपर ले ली और अपने बदन को उससे सटाया, मानो कह रहा हूँ कि मैं आ गया।
वो चुपचाप रही और मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने अपना हाथ अब धीरे से उसके कमर पर रखा और उसकी नरम लेकिन गर्म-गर्म नाइटी पर सरकाते हुए उसकी चूची पर रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। मैंने अब उसकी चूची को दबाया। वो शांत रही। और मैं मदहोश होने लगा। लंड खुशी के मारे फड़फड़ाने लगा।
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लंड को मैंने उसकी गांड से चिपका दिया। और हाथ से दूसरी चूची को दबाने लगा। चाहत बढ़ी और मैंने अपने हाथों से उसकी नाइटी को ऊपर उठाया। अब मेरा हाथ उसके बदन पर था। हाथ को ऊपर लाते हुए और उसके नर्म-नर्म बदन का मजा लेते हुए मैंने उसकी नंगी चूचियों को छुआ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
गोल और एकदम सख्त। नर्म लेकिन गरम। निप्पल को दबाया और कसकस कर अब मैं चूचियों को दबा रहा था। होठों से मैं उसके गले को चूमने लगा। अब लंड चोदने के लिए बेताब हुआ जा रहा था। आखिर कब तक सहता। कोई आवाज भी नहीं कर सकते थे।
एक हाथ मैंने उसकी गर्दन के नीचे से घुसाकर उसकी तनी हुई चूची पर रखा और दूसरा हाथ मैंने सरकाते हुए उसकी चूत पर रख दिया। चूत पर घने बाल थे लेकिन फिर भी एकदम गीली थी। यानी चुदवाने के लिए तैयार। लंड तो बुर में घुसने के लिए बेताब था ही।
मैंने अपनी उंगली उसके बुर के दरार को छूते हुए अंदर घुसा दी। उसने एक आह सी भरी। वो भी चुदवाने को एकदम तैयार थी। उसके कान के पास मुँह ले जाकर मैंने फुसफुसाकर कहा, “मैं बाथरूम जा रहा हूँ, तुम थोड़ी देर बाद धीरे से आ जाओ जानेमान।”
आहिस्ते से उठकर दबदबे पाँव से मैं बाथरूम के अंदर घुस गया और दरवाजा हल्का सा खुला रख इंतजार करने लगा। पाँच मिनट बाद कल्पना आई और जैसे ही अंदर घुसी मैंने दरवाजा बंद कर चिटकनी लगा दी। अब क्या था। मानो सहनशीलता का बाँध बस टूट गया।
मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में भरा और अपने होठ उसके धड़कते होठों पर रख जोर-जोर से चूसने लगा। क्या होठ थे। जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ। ऐसा टेस्ट कि बस नशा आ गया। एक हाथ से मैंने उसके बाल पकड़ रखे थे चूमते हुए और दूसरे हाथ से मैं उसकी चूचियों को नाइटी के ऊपर से ही मसल रहा था।
मेरा लंड पजामे के अंदर एकदम खड़ा हुआ परेशान हो रहा था। एक्साइटमेंट होने के बाद कपड़ा बहुत बुरे लगते हैं। नंगा बदन ही अच्छा लगता है। मैंने तुरंत अपने पजामे का नाड़ा खोल उसे हटाया। अंडरवियर निकाल फेंका। टीशर्ट उतार नंगा हो गया।
उसकी नाइटी के बटन को सामने से खोलना शुरू किया। जल्दी से उसके बदन से नाइटी निकाली, ब्रा के हुक को पीछे से खोला, और चूमते हुए दबाते हुए, कसकस कर एक-दूसरे को मसलते हुए पहले बेसब्री से उसकी नंगी आजाद चूचियों को हाथ में ले लिया।
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सख्त भी थी और नरम भी थी। गरम भी थी और टाइट गोल-गोल भी थी। क्या कहूँ बस गजब की चूचियाँ थी। दबाओ तो चिटक-चिटक जाए। लेकिन बहुत-बहुत मजा आए। गहरी गुलाबी रंग की निप्पल्स के चारों तरफ ब्राउन रंग का गोलनुमा रोज।
सुगंध जो उसके शरीर से आ रही थी, और भी मदहोश किये जा रही थी। सेक्स का सुगंध बोला नहीं जा सकता। बस एंजॉय किया जा सकता है। वो अब भी पूरी तरह से नंगी नहीं थी। नाइलॉन का टाइट अंडरवियर उसके बुर को छुपाए हुए था। उसे जब हटाया तो कल्पना काफी शर्मा गई और अपना मुँह मेरी छाती में छुपा लिया।
मेरा लंबा और फड़फड़ाता हुआ लंड उसके बदन को चूत के आस-पास छूता जा रहा था। मैंने उसके थोड़ी को हाथों से उठाया अपनी आँखों की तरफ। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने उसे पलकों के ऊपर चूमा। दीवार के सहारे अपना लंड उसकी चूत के खिलाफ दबाया।
उसके होठों को चूसा और चूसता ही रहा। उसकी नंगी गोल-गोल मुलायम गरम सख्त सेक्सी चूचियों को खूब दबाया और मसला। आखिर रहा नहीं गया और उसकी चूची को निप्पल सहित अपने मुँह में भर लिया। उसकी दाहिनी चूची मसलते हुए, उसकी लेफ्ट चूची को मैं टेस्ट ले कर चूस रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझसे और रहा नहीं गया। मैंने मजा लेने के लिए उससे पूछा, “कल्पना रानी, तुम इतने दिन तक कहाँ छुपी थी? चोद दूँ?” उसने एक हाथ से मेरी पीठ को अपनी तरफ दबा रखा था और दूसरे हाथ से मेरे लंड को अपने मुलायम हाथों से पकड़कर बोली, “जीजाजी, जो भी करना है, जल्दी से कीजिए।”
मैंने कहा, “क्या करूँ? बोलो ना, जान। तुम तो एकदम मलाई हो मलाई।”
उसने झट से जवाब दिया, “खा जाइए ना।”
“क्या-क्या खाऊँ रानी। तुम बड़ी मस्त चीज हो यार।”
उसने शरारती बातों का मजा लेते हुए कहा, “जीजाजी जल्दी से घुसा दीजिए ना।”
मैंने और मजा लेते हुए उसके कान के पास फुसफुसाकर कहा, “क्या घुसाऊँ और कहाँ।”
बोली, “धत्, आप बहुत बदमाश हैं। मैं जा रही हूँ।”
मैंने कस कर पकड़ तो रखा ही था। इन्हीं बातों में हम एक-दूसरे के बदन से लिपट-लिपट कर पता नहीं क्या-क्या कर रहे थे। बस कुछ न कुछ पकड़ा-पकड़ी, मसला-मसली, चूसा-चूसी चल रही थी।
आखिर मैंने कहा, “रानी, एक बार कहना पड़ेगा। सिर्फ एक बार। प्लीज।”
पूछने लगी, “क्या कहूँ जीजू?”
मैंने मजा लेते हुए कहा, “कह दो कि मेरे बुर में लंड डाल कर चोद दीजिए ना।”
उसने शरमाने के अंदाज से कहा, “छोड़िए ना, जीजू। और मत तड़पाइए।”
मैंने भी देखा कि अब ज्यादा देर करने में रिस्क है। मैंने अपना लंड उसके बुर के दरार पर रगड़ते हुए एक धक्का लगाया। लंड अंदर घुस तो गया लेकिन मजा नहीं आया। चुदाई का मजा तब ही है जब औरत को लिटा कर चोदा जाए। बाथरूम के फर्श पर मैंने कल्पना को लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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टाँगों को फैलाकर अपना लंड उसके बुर पर रखा और घुसाया। उसने भी थोड़ी सी मदद की और अपने बुर से मेरे लंड को समेट लिया। होठ चूसते हुए, चूचियों को दबाते हुए मैंने चोदना शुरू किया। वो भी नीचे से गांड उठा-उठा कर चुदवाने लगी। क्या चीज बनाई है ऊपर वाले ने ये चुदाई। बहुत-बहुत मजा आता है। जिसने चुदाई की है उसे ये पढ़कर महसूस हो रहा होगा कि हम दोनों कितना स्वाद ले रहे होंगे चुदाई का। बीच-बीच में चोदते हुए, उसकी चूची को चूस भी रहा था। चुदाई लंबी रखने के लिए मैंने स्पीड मीडियम ही रखी।
चूची चूसते हुए और भी कम। आखिर में लंड ने जब सिग्नल दिया कि अब मैं झड़ने वाला हूँ, तब मैंने कसकस कर चुदाई की। चोदता रहा, चोदता रहा, स्ट्रोक्स पे स्ट्रोक्स लगाता रहा। और वो उछल-उछल कर चुदवाई जा रही थी। ऐसा आनंद आ रहा था कि मालूम ही नहीं पड़ा कि हम दोनों कब एक साथ झड़ गए। जल्दी से हमने कपड़े पहने और बाहर निकलने के पहले मैंने कल्पना को कस कर अपनी बाहों में जकड़ा और चूमते हुए कहा, “सलहज साहिबा, वादा करो जब भी मौका मिलेगा तो चुदवाओगी।” “आप बहुत पाजी हैं” कह कर वो दबे पाँव चली गई।
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