Incest Threesome
मेरी दीदी की एक सहेली थी, जिसका नाम मेघा था। मेघा दीदी को रोज़ अपनी मम्मी-डैडी की सेक्सी बातें बताती थी। एक दिन मेघा ने दीदी से कहा, “आज मेरे डैडी ने किचन में मम्मी को किचन पर ही बिठाकर उनके साथ सेक्स करना शुरू कर दिया।” Incest Threesome
दीदी ने पूछा, “तूने कैसे देखा?”
मेघा बोली, “मैं बेडरूम में पढ़ाई कर रही थी कि अचानक ‘आआआआआ… उई माँ…’ की आवाज़ आई। मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और देखा तो डैडी मम्मी की दोनों टाँगें फैलाकर उन पर सटे हुए थे। मम्मी आँखें बंद करके ‘आआआआ… आआआ…’ कर रही थीं। मम्मी बोलीं, ‘ज़रा नीचे उतरो’, तो मुझे लगा बाहर आ रहे हैं। मैंने झट से दरवाज़ा बंद कर लिया।
लेकिन मम्मी की मदहोश आवाज़ अभी भी आ रही थी। बेडरूम में एक खिड़की थी जो हमेशा बंद रहती थी। मैंने खिड़की के पतले सुराख़ से देखा – वहाँ का सारा दृश्य साफ़-साफ़ दिख रहा था। डैडी मम्मी के दोनों चूचियों को मुँह में लेकर चूस रहे थे, ब्लाउज़ भी नहीं निकाला था। मम्मी की दोनों जाँघें दिख रही थीं।
मम्मी पूरा मज़ा ले रही थीं। ये सब देखने के बाद मेरी चूत में जैसे कोई कीड़ा घूमने लगा। मेरे चूचियों पर मेरा हाथ अपने आप चला गया। मैं धीरे-धीरे उन्हें सहलाने लगी। जैसे मेरे तन-बदन में आग लग गई हो। नीचे मेरा हाथ पहुँच गया और बीच की उंगली चूत में घुमाने लगी। कब मैं ज़ोर से हिलाई, मुझे पता ही नहीं चला। मेरी चूत से पानी गिरा। तब तो मुझे बहुत मज़ा आया।”
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दीदी बोली, “ऐसा मज़ा लेना हो तो मेरे घर आ जा। मैं और तुम दोनों एक-दूसरे से मज़ा लेंगे।”
मेघा बोली, “आज तुम मेरे घर चलो। शाम को परमिशन मैं मम्मी से लेती हूँ कि मैं तुम्हारे घर आज रात प्रोजेक्ट के लिए जा रही हूँ। पहले भी कई बार मैं तुम्हारे घर आई हूँ, मम्मी ज़रूर परमिशन देंगी।”
कॉलेज छूटने के बाद दीदी और मेघा परमिशन लेकर हमारे घर आ गईं। मैं उस समय घर पर नहीं था। बाहर से आया तो देखा मेघा और दीदी मेरे बेडरूम में बैठी थीं। मैं तो सोचा, “आज तो सब चौपट हो गया।” मम्मी-डैडी भी घर पर नहीं थे।
मैंने दीदी से कहा, “दीदी, पानी देना।” दीदी जब पानी देने आईं तो मैं भी किचन में चला गया। दीदी से बोला, “मेघा कब आई?”
दीदी बोली, “मेरे साथ, और आज यहीं रुकेगी।”
मैं बोला, “मुझे पहले ही लगा था कि आज की रात अपनी सुहागरात नहीं हो पाएगी।”
दीदी बोली, “उसकी चिंता मत करो। आज तो तुम्हें घर वाली और बाहर वाली दोनों साथ मिलेंगी।”
मैं बोला, “कैसे?”
दीदी बोली, “मेघा को सब पता है। रतन, तुम सिर्फ़ जल्दी सोने का नाटक करना, मैं सब संभाल लूँगी।”
मम्मी-डैडी का फ़ोन आया कि वो बाहर से रात का खाना लेकर आ रहे हैं। दीदी ने मेघा के बारे में बताया और कहा कि उसके लिए भी खाना लाना, वो भी आज प्रोजेक्ट बनाएगी। मम्मी-डैडी आए, हम सब ने डिनर किया और करीब 9:30 बजे सोने चले गए।
दीदी ने कहा, “रतन, मेघा भी खाट पर सोएगी, तुम्हें प्रॉब्लम तो नहीं?”
मैं बोला, “सोने दो।” हमारी खाट 6×6 की बहुत बड़ी थी। मैं किनारे, दीदी बीच में, मेघा किनारे।
लाइट ऑफ़ करके सो गए। आधे घंटे बाद दीदी ने मेघा से फुसफुसाकर कहा, “अब रतन सो गया, आओ शुरू करते हैं।”
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दीदी तो एक मज़े की खिलाड़ी की तरह मुझसे पहले भी मज़ा ले चुकी थी, इसलिए उसे सब मालूम था कि कहाँ से जल्दी सेक्स का मज़ा मिलता है। दीदी ने धीरे-धीरे मेघा के सारे कपड़े निकाल दिए। मेघा सिर्फ़ ब्रा और अंडरवियर में रह गई। धीरे-धीरे उसके निप्पल सहलाने लगी।
मेघा जल्दी ही उत्तेजित हो गई, ज़ोर-ज़ोर से “आआआआ… आआआ…” करने लगी। दीदी को भी सेक्स चढ़ने लगा। दीदी अपना चूतड़ मेरी तरफ़ रगड़ने लगी। मैं झट से दीदी की साइड में घूम गया और अपना लंड दीदी की चूत पर ऊपर से रगड़ने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेघा दीदी के सहलाने का मज़ा आँखें बंद करके ले रही थी। इधर दीदी ने पीछे से अपनी नाइटी धीरे से उठाकर अंडरवियर थोड़ा सरका दिया, जिससे मेरा लंड दीदी की चूत में पूरा घुस गया। दीदी “आआआआ… उई माँ…” करके मेघा से चिपक गई। मेघा भी दीदी से चिपक गई।
जब दीदी के बॉल दबाते हुए मेघा ने दीदी की चूत पर हाथ घुमाया तो पूछा, “ये क्या डालकर रखी है?”
दीदी हँसने लगी, बोली, “इसी से बहुत मज़ा मिलता है।”
मेघा बोली, “तो मेरे में भी डालो।”
दीदी ने कहा, “रतन को जगाना पड़ेगा।”
मेघा थोड़ा डर गई, बोली, “क्यों?”
दीदी बोली, “रतन का तो है।”
मैं भी हँसने लगा।
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मेघा बोली, “रतन, तुम बहुत नॉटी हो। तुम शुरू से अपनी दीदी की चूत में लंड डालकर रखे हो और मैं यहाँ खाली हाथ से करवा रही हूँ!”
मैंने आव देखा न ताव, दीदी की चूत से लंड निकाला और बीच में जाकर मेघा से चिपक गया। मेघा ने भी मेरा साथ दिया। मेघा का फिगर बता दूँ – हाइट 165 सेमी, 32-28-34। मैं मेघा के साथ मज़ा ले रहा था। मेघा की ब्रा और अंडरवियर निकालकर अलग किया।
मेघा के बॉल धीरे-धीरे मसलने लगा। इधर दीदी मेरा लंड मुँह में लेकर चोको बार कर रही थी। मैंने दीदी और मेघा को साथ में सुला दिया और मेघा की चूत में लंड डाला तो बड़े आसानी से घुस गया, क्योंकि मेघा बहुत पानी छोड़ चुकी थी। दीदी के बॉल मसलता और मेघा की चूत पर लंड का थप्पड़ लगाता।
दस मिनट मेघा की चूत पर थप्पड़ लगाता तो दस मिनट दीदी की चूत में लंड घुसाकर थप्पड़ लगाता। इधर दीदी को जब तीसरी बार चूत में लंड घुसाया तो वो फचाक-फचाक पानी गिराने लगी। मैं मेघा की चूचियाँ छोड़कर दीदी से पूरी तरह चिपक गया। दीदी की दोनों संतरे जैसे चूची को मुँह में बारी-बारी से लेकर चूसा।
दीदी इंग्लिश स्टाइल में जब चूमा तो पूरी निहाल हो गई और ज़ोर से चूतड़ हिलाने लगी। 20 मिनट में पूरी सुस्त पड़ गई और मुझसे बोली, “बस, अब मेघा के साथ जा।” मेघा जैसे तैयार सोई थी। मेघा तुरंत बोली, “अब मुझे डॉग शॉट करो, मैं इसके बारे में बहुत सुनी हूँ।”
मैंने मेघा को तुरंत झुकाकर डॉग शॉट लगाने लगा। वो भी मेरे शॉट का जवाब अपने चूतड़ हिलाकर देती – “आआआआ… मज़ा… मज़ा बहुत आ रहा है रतन… सैयाँ ज़ोर से… और ज़ोर से…” कुछ देर बाद बोली, “बस, थोड़ा रेस्ट दो, मेरी टाँगें दुख रही हैं।” मैंने मेघा को खाट पर लिटाया और उसकी दोनों गोरी-गोरी चूचियों को सहलाने लगा।
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उसके चूत के दाने को भी धीरे-धीरे मसलाने लगा। वो चिल्लाने लगी, “राजा… मत सताओ… अब ज़रा जल्दी अपना बैंबू घुसाओ!” मैंने अपना लंड घुसाकर मेघा की चूत में… मेघा की पप्पी ले लगा। नीचे से मेघा अपना चूतड़ रेल इंजन के पहिए जैसा हिलाने लगी।
करीब आधे घंटे बाद मेघा की चूत से जो पानी गिरा, लगता था कोई नल फिट किया हो। अंदर मेघा की मदमस्त सिसकारियाँ बंद होने का नाम नहीं ले रही थीं। मेघा पानी छोड़ती हुई कराहने लगी, बोली, “थोड़ा दर्द हो रहा है।” मैं बोला, “पहली बार है, थोड़ी तकलीफ़ होगी।” मेघा बोली, “अब थोड़ा आराम दो।”
उधर दीदी उठी और उसके साथ शुरू हो गया। मुझे दीदी की चूची बहुत पसंद है – गोरी-गोरी सफ़ेद, पर निप्पल का काला टीका मेरे लंड को बार-बार चोदने को मजबूर कर देता था। दीदी की निप्पल धीरे-धीरे सहलाने लगा। दोनों निप्पल एकदम काले जामुन जैसे कड़क हो गए। और मेरा लंड जैसे दीदी की चूत फाड़ देगा, इस तरह दीदी की चूत में अंदर-बाहर होने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं कभी दीदी के निप्पल दबाता, कभी दीदी की जीभ की पप्पी लेता। दीदी सब करते “आआआआ… उई रतन… ज़रा आआआआ…” और दीदी से पूरी तरह सट गया। दीदी इतना होने पर धीरे-धीरे अपना पानी छोड़ने लगी। दीदी के चूत का पानी मुझे बहुत अच्छा लगता है।
मैं झट से दीदी के चूत पर अपना मुँह लगा दिया और धीरे-धीरे दीदी के चूत का पानी खींचने लगा। दीदी एकदम मस्त आवाज़ निकालने लगी। एक-एक बूंद पानी मैं पी गया। दीदी अब एकदम निढाल होकर खाट पर सो गई, बोली, “रतन, आज तो तुमने जन्नत दिखा दी।”
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मैं बोला, “दीदी, थोड़ा और… मेरा अभी तक गिरा नहीं।”
दीदी बोली, “आज तुम्हारा मेघा गिराएगी।”
मेघा का वज़न दीदी से कम था। मैंने मेघा को उठाकर गोद में भर लिया। मेघा बोली, “इतना मज़ा आएगा, मैं सपने में नहीं सोची थी।” मेघा एक बार फिर से सहवास करने लगी। एक घंटे में थक गई। बोली, “बस और नहीं।” तब दीदी उठी और मेरा लंड अपने मुँह में रखकर चोको बार करने लगी।
करीब 20 मिनट करती रही। मैं भी दीदी के चूचियों को सहलाता रहा। मेरा भी वीर्य गिरा। दीदी ने मेरे वीर्य की एक-एक बूंद पी डाली। मेघा देख रही थी। दीदी ने कहा, “सब ख़त्म।” मेघा बोली, “कुछ तो गिरा नहीं?” दीदी बोली, “सब गया मेरे पेट में।” और एक बार दीदी फिर से लिपट गईं। इस बार मेघा भी साथ। अब दोनों मेरे लंड को साइड-साइड से चूमने लगीं। तभी घड़ी का अलार्म बजा। हमने देखा तो 4 बज चुके थे। अब डैडी के उठने का समय हो गया। हम सब जल्दी से कपड़े पहनकर सही ढंग से सो गए।
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