Horny Girls Group Chudai
ये कहानी आज से दो साल पहले की है। मैं जब कॉलेज में पढ़ रहा था। मेरे पड़ोस में तीन लड़कियाँ रहने आईं, जिसमें से एक की शादी हो चुकी थी। मेरा स्वभाव बहुत ही शांत था, मगर अंदर से मैं कितना कमीना हूँ, मुझे पता था। मैं उनसे कभी बात नहीं करता था। Horny Girls Group Chudai
मेरी मम्मी उनके घर आती-जाती थीं। एक दिन मुझे उनके घर कुछ सामान देने भेजा। मैंने इंकार कर दिया। मेरी माँ के ज्यादा कहने पर मैंने सोचा, चला जाता हूँ। मैं उनके घर में गया। मैंने बाहर गेट पर से आवाज़ दी तो कोई नहीं आया। मैं जैसे ही दरवाज़ा ठोकने गया, मेरा हाथ लगते ही दरवाज़ा खुल गया।
मुझे लगा शायद भूल गई होंगी। मैं अंदर गया। अंदर जाकर मैंने फिर से आवाज़ दी, अब भी कोई नहीं आया। मैंने सोचा शायद अंदर वाले रूम में होंगे। मैं अंदर गया। जब अंदर पहुँचा तो वहाँ भी कोई नहीं दिखा, मगर बाथरूम से पानी के गिरने की आवाज़ आ रही थी।
मुझे लगा कोई नहा रहा है। मैंने सामान टेबल पर रखा और दरवाज़े की ओर चल दिया। फिर सोचा, कौन नहा रहा है, ज़रा देख तो लूँ। वैसे भी घर में कोई नहीं है। मैंने खिड़की के होल से देखा तो सबसे बड़ी बहन नहा रही थी। वो तीन बहनों के नाम हैं: 1 जो सबसे बड़ी है काजल। 2 री का कल्पना और 3 री का अंशिका।
काजल की शादी हो चुकी थी। मैंने देखा कि वो नहा रही थी, वो भी सिर्फ पैंटी में। उसके क्या बड़े-बड़े बूब्स थे। ये देखकर मेरा ८ इंच का लंड खड़ा हो गया। मैं अपने लंड को मसलने लगा। वो अपने बूब्स पर साबुन लगा रही थी और धीरे-धीरे उसे मसल रही थी।
इसे भी पढ़े – कजिन बहन साथ लाइफ का पहला सेक्स किया
मुझे तो लगा मेरा लंड अभी पैंट फाड़कर बाहर आ जाएगा। थोड़ी देर बाद उसने अपनी पैंटी खोली और अपनी गांड और चूत पर साबुन लगाने लगी। मुझसे तो बर्दाश्त से बाहर हो रहा था। वो अपनी चूत में साबुन लगाकर उसमें उंगली डाल रही थी। मुझे लगा अब मुझसे नहीं रहा जाएगा तो मैं जाने लगा।
पीछे मुड़ते ही जैसे थोड़ा आगे बढ़ा, मेरे पाँव से कुछ टकरा गया और आवाज़ आई। मुझे लगा शायद मैं पकड़ा जाऊँगा, इसलिए मैंने जोर से कहा, कोई है घर में? तो उसने बाथरूम से आवाज़ दी, कौन है? मैंने कहा, तुम्हारा बाजू वाले घर से आया हूँ, मम्मी ने कुछ सामान भेजा है।
उसने कहा, टेबल पर रख दो और पूछा, इधर और कोई नहीं है क्या?
मैंने बोला, नहीं।
फिर मैंने पूछा, सब कहाँ गए?
उसने कहा, सब शादी में गए हैं।
मैंने कहा, मैं जाता हूँ।
वो कुछ नहीं बोली। जब मैं दरवाज़े तक पहुँचा, उसने आवाज़ लगाई, अरे सुनो, थोड़ी देर रुको, मुझे ज़रा काम है।
मैं एक चेयर पर बैठ गया। थोड़ी देर में वो बाहर आई और कहा, ज़रा मेरा सामान ला दोगे? मैंने कहा, ज़रूर। उसने पैसे दिए और मैं सामान लाने चला गया। 20 मिनट बाद वापस आया तो वो टेबल पर बैठी आईने में देखकर अपना बाल बना रही थी। मुझे देखकर वो बोली, तुम नहीं गए शादी में?
मैंने कहा, नहीं।
उसने कहा, मम्मी?
मैंने कहा, एक घंटे बाद जाएँगी।
वो बोली, तुम्हें कुछ काम है?
मैंने कहा, नहीं, कोई काम नहीं है।
उसने कहा, मुझे यहाँ के बारे में कुछ नहीं पता है। मैं एक हफ्ता पहले ही दिल्ली से आई हूँ। तुम मुझे यहाँ के बारे में कुछ बता सकते हो?
मैंने कहा, ठीक है।
फिर उसके सामने वाली चेयर पर बैठ गया। हम बहुत देर तक बातें करने लगे। फिर उसने मेरी पैंट की ओर देखा। मेरी पैंट थोड़ी गीली थी। जब मैं उसे नहाते हुए देख रहा था तब गीली हो गई थी। उसने कहा, अरे ये तुम्हारी पैंट तो गीली हो गई है। मैंने जल्दी से अपनी लंड पर हाथ रख लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसे भी पढ़े – मिसेज गोयल को मोटे लंड का दम दिखाया
उसने कहा, अरे छुपाते क्यों हो? ये सब चीज छुपानी चाहिए। लगता है आज तुमने मुठ मारी है।
मैंने कुछ नहीं कहा।
उसने पूछा, तुमने कभी लड़की को किया है?
मैंने कहा, नहीं।
उसने कहा, चलो झूठ मत बोलो।
मैंने कहा, सच में नहीं किया।
उसने कहा, मेरे पास आ जाओ, मैं तुम्हें करने का तरीका बताती हूँ।
मैं उसके बाजू में बैठ गया। उसने मेरा लंड पकड़ लिया और ऊपर से ही दबाने लगी। मेरा लंड अंदर ही बंद सांड की तरह मचलने लगा। थोड़ी देर बाद उसने मेरा लंड बाहर निकाला और अपने मुँह से चूसने लगी। मैं भी उसके बूब्स पर हाथ फेरने लगा। 15 मिनट के बाद उसने मेरी पैंट और टी-शर्ट उतारी और खुद भी नंगी हो गई।
मैं खड़ा हुआ और उसे धक्का मारकर बेड पर गिरा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा। और वो आवाज़ निकालने लगी, आआआओ… ओआआओउईईई… म्मा… आआ… कितना मज़ा आआआ… आआआ रहा ह्ह्ह्है… आआहाहाहा… बहुत देर तक मैं उसकी चूत चाट रहा था।
फिर उसने कहा, अब और मत तड़पाओ, डाल दो अपना लंड मेरी चूत में और फाड़ दो मेरी चूत। मैंने अपना लंड उसकी चूत के ऊपर रखकर एक ज़ोर से धक्का मारा तो मेरा लंड ढाई इंच अंदर चला गया। वो चिल्ला उठी, आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… कितना मोटा है तुम्हारा लंड, मेरी तो जान ही निकल गई… ओओओआह्ह्ह्ह…
मैंने एक और ज़ोर का धक्का लगाया। अब मेरा लंड पूरा अंदर चला गया था। मैं ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करने लगा। वो चिल्लाती रही, आआह्ह्हाााह्ह्ह्ह्ह… मर गई… आआह्ह्हआआआ… छोड़ दो मुझे… आआहाहाह्हा… मैंने ऐसा ही कुछ आधा घंटा किया, अलग-अलग स्टाइल में।
तब तक उसका दो बार झड़ गया था। थोड़ी देर बाद मेरा गिरने वाला था। मैंने कहा, मेरा गिरने वाला है। उसने मेरा लंड अपनी चूत से निकालकर अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने और हिलाने लगी। मेरा सारा कम उसके मुँह में ही गिर गया।
उसने सारा रस पी लिया और 15 मिनट तक मेरा लंड चूसी रही। फिर मैंने कहा, अब मुझे जाना चाहिए। आज तुम्हें चोदकर बहुत मज़ा आया। उसने कहा, किसी को मत बोलना और हम रोज़ ऐसा ही काम करेंगे। उस दिन कल्पना के साथ जो हुआ, वो मेरे जीवन का पहला अनुभव था।
इसे भी पढ़े – पति के काम पर जाने पर असंतुष्ट भाभी ने चुदवाया
मैं घर लौटा तो मम्मी ने पूछा, “कितनी देर लग गई? सामान दिया?” मैंने हाँ में सिर हिलाया और अपने कमरे में चला गया। रात भर नींद नहीं आई। बार-बार कल्पना की नंगी बॉडी, उसके बड़े-बड़े बूब्स, उसकी चूत की खुशबू और उसकी चीखें याद आ रही थीं। मेरा लंड बार-बार खड़ा हो जाता।
मैंने दो बार मुठ मारी, लेकिन संतोष नहीं हुआ। अगले दिन कॉलेज गया, लेकिन मन नहीं लगा। शाम को घर लौटा तो देखा कल्पना बाहर खड़ी थी। उसने मुझे देखकर मुस्कुराई और इशारे से बुलाया। मैं डरते-डरते उसके घर गया। घर में कोई नहीं था। काजल और अंशिका कहीं गई हुई थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कल्पना ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे बाहों में भर लिया। “कल का मज़ा याद है? आज फिर से?” उसने कहा। मैंने हाँ कहा। हम बेडरूम में गए। इस बार मैंने उसे धीरे-धीरे कपड़े उतारे। उसके बूब्स को खूब दबाया, चूसा। उसकी चूत को उंगली से सहलाया।
वो सिसकारियाँ भरने लगी, “आह… हाँ… ऐसे ही… चोदो मुझे…” मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और ज़ोर-ज़ोर से चोदा। इस बार एक घंटे तक चला। हम दोनों पसीने से तर हो गए। उसके बाद वो बोली, “तुम बहुत अच्छे हो। रोज़ आना।” मैंने हाँ कहा।
ऐसे ही एक हफ्ता बीत गया। रोज़ शाम को मैं उसके घर जाता, जब बाकी बहनें बाहर होतीं। कल्पना ने मुझे सब सिखाया – 69 पोज़ीशन, डॉगी स्टाइल, रिवर्स काउगर्ल। उसके बूब्स इतने बड़े थे कि मैं उन्हें दबाते-दबाते थक जाता, लेकिन मज़ा आता। एक दिन हम चुदाई कर रहे थे, तभी दरवाज़े पर नॉक हुआ।
हम डर गए। कल्पना ने कपड़े पहने और बाहर गई। वो काजल थी, जो पहले लौट आई थी। मैं पीछे छिप गया। काजल ने पूछा, “कौन है अंदर?” कल्पना ने कहा, “कोई नहीं, टीवी चल रहा है।” काजल चली गई। उस रात मैं सोचता रहा कि काजल को कैसे पटाऊँ। काजल शादीशुदा थी, लेकिन उसका पति शहर से बाहर जॉब करता था, महीने में एक बार आता।
वो देखने में गोरी, लंबी, फिगर ३६-३०-३८ का। उसके चूतड़ इतने उभरे हुए कि चलते समय हिलते, मन करता दबा दूँ। अगले दिन मैंने प्लान बनाया। मैं जानबूझकर काजल के घर के बाहर घूमता रहा। वो बाहर आई तो मैंने बात शुरू की, “हैलो दीदी, कैसी हैं?”
इसे भी पढ़े – अपने दोस्तों के साथ मेरी ब्लू फिल्म बनाई भाई ने
वो चौंकी, क्योंकि मैं पहले कभी नहीं बोलता था। फिर मुस्कुराई, “अच्छी हूँ। तुम?”
हम बातें करने लगे। मैंने बताया मैं कॉलेज जाता हूँ, पढ़ाई करता हूँ।
वो बोली, “मुझे बोरिंग लगता है अकेले। मेरे पति बाहर रहते हैं।”
मैंने मौका देखा और कहा, “अगर आप कहें तो मैं शाम को आ सकता हूँ, बातें करेंगे।”
वो हँसी, “ठीक है।”
शाम को मैं गया। कल्पना घर पर नहीं थी, अंशिका भी नहीं। काजल अकेली थी। हम बातें करने लगे। वो चाय लाई। मैंने उसके हाथ छुए। वो शरमा गई।
फिर मैंने कहा, “दीदी, आप बहुत सुंदर हैं।”
वो बोली, “झूठ मत बोलो।”
मैंने उसके करीब आकर कहा, “सच में। आपके पति खुशकिस्मत हैं।”
वो चुप हो गई। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा। वो नहीं हटी। फिर मैंने उसे किस किया। वो विरोध नहीं की। धीरे-धीरे मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन खोले। उसके बूब्स बाहर आ गए – बड़े, गोरे, निप्पल गुलाबी। मैं उन्हें चूसने लगा। वो सिसकारियाँ भरने लगी, “आह… मत करो… कोई आ जाएगा…” लेकिन मैं नहीं रुका।
मैंने उसकी साड़ी उतारी। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली, वो चिल्लाई, “ओह… हाँ…” फिर मैंने अपना लंड निकाला। वो देखकर बोली, “इतना बड़ा? मेरे पति का छोटा है।” मैंने उसे बेड पर लिटाया और चोदना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज़।
वो चिल्लाती रही, “आह… फाड़ दो… चोदो मुझे…” हमने दो घंटे तक चुदाई की। अलग-अलग पोज़ में। उसका तीन बार ऑर्गेज़्म हुआ। आखिर में मैं उसके मुँह में झड़ा। वो सारा पी गई। उसके बाद वो बोली, “ये राज़ रहेगा। लेकिन फिर से करो।” मैंने हाँ कहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसे भी पढ़े – रंगीन मिजाज सरकारी अफ़सर को खुश किया
अब कल्पना और काजल दोनों से मेरी चुदाई चलने लगी। मैं टाइम मैनेज करता। कभी कल्पना से सुबह, कभी काजल से शाम। लेकिन अंशिका बाकी थी। अंशिका सबसे छोटी, 19 साल की, कॉलेज स्टूडेंट। वो पतली, फिगर 32-28-34, लेकिन चेहरा मासूम। मैं सोचता, इसे कैसे पटाऊँ।
एक दिन कल्पना और काजल बाहर गईं। अंशिका अकेली थी। मैं उसके घर गया, बहाना बनाकर कि किताब चाहिए। वो बोली, “आओ अंदर।” हम बातें करने लगे। वो शर्माती थी। मैंने कहा, “तुम बहुत क्यूट हो। बॉयफ्रेंड है?” वो बोली, “नहीं।” मैंने उसके हाथ पकड़े। वो नहीं हटी। फिर मैंने किस किया।
वो विरोध की, “नहीं… दीदी आ जाएँगी…” लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। मैंने उसके टॉप उतारे। उसके छोटे-छोटे बूब्स, लेकिन टाइट। मैं उन्हें दबाया। वो गर्म हो गई। मैंने उसकी जींस उतारी। उसकी चूत कुंवारी थी, टाइट। मैंने उंगली डाली, वो चिल्लाई, “दर्द हो रहा है…”
मैंने धीरे-धीरे किया। फिर अपना लंड डाला। पहले टोपा, फिर आधा। वो रोने लगी, “आह… निकालो…” लेकिन मैंने पूरा डाला और चोदना शुरू किया। धीरे-धीरे उसे मज़ा आने लगा। वो बोली, “हाँ… चोदो… तेज़…” हमने एक घंटा चुदाई की। उसका पहला अनुभव था, खून निकला।
आखिर में मैं उसके पेट पर झड़ा। वो बोली, “ये राज़ रहेगा। लेकिन फिर से।” अब तीनों बहनों से मेरी चुदाई चलने लगी। कल्पना के साथ मेरी पहली चुदाई के बाद, मेरा जीवन बदल गया। पहले मैं शांत, अंतर्मुखी लड़का था, लेकिन अब मैं हर समय सेक्स के बारे में सोचता। कल्पना चुदाई में एक्सपर्ट थी। रोज़ शाम को मैं उसके घर जाता।
एक दिन हमने किचन में किया। वो चाय बना रही थी, मैं पीछे से आया, उसके चूतड़ दबाए। वो बोली, “रुको, कोई आ जाएगा।” लेकिन मैंने साड़ी ऊपर की और लंड डाला। वो सिंक पकड़कर खड़ी रही, मैं पीछे से चोदता रहा। पानी गिरता रहा, हमारी सिसकारियाँ गूँजती रहीं। “आह… तेज़… फाड़ दो…” वो चिल्लाई।
मैंने 30मिनट चोदा, फिर उसके मुँह में झड़ा। ऐसे ही हमने बालकनी में, सोफे पर, हर जगह किया। कल्पना को ब्लोजॉब देना पसंद था। वो घुटनों पर बैठकर मेरा लंड चूसती, आँखें मिलाती। मैं उसके बाल पकड़कर मुँह चोदता। एक बार हमने पूरी रात की। उसकी बहनें बाहर थीं। हमने 5 बार चुदाई की। सुबह वो थक गई, लेकिन बोली, “तुम देवता हो।”
काजल से मिलना अलग था। वो २६ साल की, शादीशुदा, लेकिन पति से असंतुष्ट। उसका पति छोटा लंड वाला था, जल्दी झड़ जाता। काजल को मैंने पटाया तो वो पागल हो गई। पहली बार के बाद, वो मुझे फोन करती, “आ जाओ, अकेली हूँ।” मैं जाता। काजल को रफ सेक्स पसंद।
इसे भी पढ़े – पड़ोसन भाभी चूत में डिल्डो वाइब्रेटर घुसाती 1
मैं उसके बाल खींचता, थप्पड़ मारता (हल्के से), वो और गर्म हो जाती। “हाँ… मारो… चोदो…” वो कहती। उसके बूब्स दबाते हुए मैं चोदता। एक दिन हमने बाथरूम में किया। वो नहा रही थी, मैं अंदर घुसा। पानी के नीचे चुदाई। उसकी चूत गीली, फिसलन भरी। मैंने दीवार से सटाकर चोदा।
वो चिल्लाई, “ओह गॉड… इतना मज़ा कभी नहीं आया…” मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, वो झड़ गई। काजल ने मुझे एनल सेक्स सिखाया। पहले डर लगा, लेकिन उसने क्रीम लगाई, धीरे से डाला। टाइट था, लेकिन मज़ा आया। वो बोली, “मेरे पति ने कभी नहीं किया।” हमने हर हफ्ते 3-4 बार किया। काजल प्रेग्नेंट नहीं होना चाहती थी, इसलिए कंडोम यूज़ करती। लेकिन कभी-कभी मुँह में या बूब्स पर झड़वाती।
अंशिका सबसे चुनौतीपूर्ण थी। वो 19 की, वर्जिन। मासूम, लेकिन अंदर से हॉट। पहली चुदाई के बाद वो शर्माती, लेकिन मुझे मैसेज करती, “भैया, आओ ना।” मैं जाता। अंशिका को सॉफ्ट सेक्स पसंद। मैं उसे किस करता, लंबे समय तक फोरप्ले। उसके छोटे बूब्स चूसता, निप्पल काटता। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो सिसकारती, “आह… धीरे…” उसकी चूत टाइट, गुलाबी। मैं उंगली से सहलाता, फिर लंड डालता। पहले दर्द होता, लेकिन बाद में मज़ा। एक दिन हमने पार्क में किया। रात को, झाड़ियों के पीछे। डर था, लेकिन एक्साइटमेंट। मैंने उसे घोड़ी बनाया, चोदा। वो दबी आवाज़ में चिल्लाई।
घर लौटे तो वो बोली, “ये बेस्ट था।” अंशिका को ऑरल सेक्स सीखा। वो मेरा लंड चूसती, शुरू में हिचकिचाती, लेकिन बाद में एक्सपर्ट। मैं उसकी चूत चाटता, वो झड़ जाती। हमने लाइब्रेरी में, कार में, हर जगह ट्राई किया। अंशिका ने कहा, “तुम मेरे पहले और आखिरी हो।”
तीनों बहनों से अलग-अलग चुदाई ने मुझे व्यस्त रखा। लेकिन एक दिन सब बदल गया। कल्पना को शक हुआ। वो बोली, “तुम काजल से भी करते हो?” मैंने मना किया, लेकिन वो जान गई। फिर तीनों ने मिलकर प्लान बनाया। एक शाम मुझे बुलाया।
इसे भी पढ़े – लंड की प्यासी भाभी सेक्स करवाने लगी
घर में तीनों थीं। कल्पना बोली, “सच बता।” मैं डर गया, लेकिन कबूल किया। वो हँसीं, “हम बहनें हैं, शेयर करेंगी।” उस रात हमने ग्रुप सेक्स किया। तीनों नंगी, मैं बीच में। कल्पना के बूब्स चूसता, काजल की चूत चाटता, अंशिका का लंड चूसती। मैंने बारी-बारी चोदा। पहले कल्पना, फिर काजल, फिर अंशिका। वो एक-दूसरे को किस करतीं। मैंने तीनों को नंगी किया। कल्पना की चूत चाटी, काजल के बूब्स चूसे, अंशिका का लंड चूसा। फिर बारी-बारी चोदा। कल्पना पहले, डॉगी। काजल रिवर्स, अंशिका मिशनरी।
वो एक-दूसरे के बूब्स दबातीं। रात भर 4 राउंड। सुबह थकान, लेकिन खुशी। ऐसे ही महीनों चला। हर दिन नया एडवेंचर। कभी आउटडोर, कभी रोल प्ले। कल्पना टीचर बनती, काजल नर्स, अंशिका स्टूडेंट। सेक्स टॉय यूज़ किए। वाइब्रेटर से अंशिका को तड़पाया। काजल को हैंडकफ लगाकर चोदा। कल्पना को ऑइल मसाज दी, फिर चुदाई। उसके बाद हमारा ग्रुप बना। लेकिन सावधानी बरतते। दो साल तक चला, फिर वो चली गईं। लेकिन यादें बाकी हैं। लेकिन यादें। मैं अब भी सोचता, वो तीन बहनें मेरी ज़िंदगी का बेस्ट पार्ट थीं।
प्रातिक्रिया दे