Hindi Sex Story Rishto Wali
दोस्तो, आपको बता चुका हूँ कि मामी के साथ दो बार सेक्स कर चुके के बाद मैं खुल गया था और मौका ढूँढता रहता था। एक बार मैं उनके घर गया, पता चला मामा आउटस्टेशन गए हैं तो मैं खुश हो गया। मामी किचन में थीं, बोलीं, “तुम रूम में बैठो, मैं खाना बनाकर आती हूँ।” Hindi Sex Story Rishto Wali
मामी मेरी सेक्सी तो थीं ही, उनके बूब्स यानी चूचियाँ ऐसी थीं कि बस दबा ही डालो। ब्लाउज़ में समाता ही नहीं था। कितनी भी साड़ी से वो ढँकतीं, इधर-उधर से ब्लाउज़ से उभरते हुए उनकी चूचियाँ दिख ही जाती थीं। जब वो झुकतीं, तब ब्लाउज़ के ऊपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा न सकें।
जब वो ठुमकती हुई चलतीं, तो उनके चूतड़ हिलते और जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबाओ। आज जब वो मेरे लिए चाय लाईं और मुझे कप रखने के लिए झुकीं, तो मैंने उनकी उस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा कि उन्होंने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। मुझे शैतानी सूझ रही थी। मैंने सोचा, आज तो मामी के साथ फिर मज़ा ले लिया जाए। और मामी के साथ सेक्स के आनंद की बात सोचने लगा।
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मामी ने पूछा, “चाय के साथ कुछ चाहिए?”
मैंने कहा, “बहुत कुछ, तुम दो तो।”
वो बोलीं, “क्या बोल रहे हो? घर में जो है सब मिलेगा।”
मैं बोला, “मुझे बाहर का कुछ नहीं चाहिए।”
वो बोलीं, “तब ठीक है।”
और फिर सेक्स के बारे में सोचने लगा कि काश मैं अभी मेरा तना हुआ लौड़ा मामी की इस बुर में डाल कर चोद सकता। है मेरा लंड! मानता ही नहीं था। बुर में लंड घुसने के लिए बेकरार था। लेकिन कैसे? मामी किचन में बिज़ी थीं। मुझे एक प्लेट में नाश्ता देकर और ठुमकती हुई चली गईं।
मैंने भी उन्हें एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उन्हें चोदने के लिए बेताब है। अब चोदना तो था ही। मैंने अब सोच लिया कि इसे आज चोदना ही होगा। धीरे-धीरे माहौल बनाना पड़ेगा, वरना कहीं मचल जाएँ या नाराज़ हो जाएँ तो मुश्किल हो जाएगी।
फिर मामी काम खत्म कर रूम में आईं। वो मुँह धोकर तौलिया हाथ में आईं और अपना मुँह पोछ रही थीं। उनका पल्लू नीचे गिर गया था। तभी मैं बोला, “मामी, आज तुमको एक जादू दिखाऊँगा। आँखें बंद करो, बंद करो ना प्लीज़, जब तक मैं न कहूँ खोलना मत।”
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उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं।
मैंने फिर कहा, “जब तक मैं न कहूँ, तुम आँखें बंद ही रखना, वरना तुम शर्त हार जाओगी।”
ठीक है, शरमाते हुए आँखें बंद कर वो खड़ी थीं। मैंने देखा कि उनके गाल लाल हो रहे थे और होंठ काँप रहे थे। दोनों हाथों को उन्होंने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था। मैंने हल्के से पहले उनके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन किया। अभी मैंने उन्हें छुआ नहीं था। उनकी आँखें बंद थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने उनकी दोनों पलकों पर बारी-बारी से चुम्बन रखा। उनकी आँखें अभी भी बंद थीं। फिर मैंने उनके गालों पर आहिस्ता से बारी-बारी से चूमा। उनकी आँखें बंद थीं। इधर मेरा लंड तन कर लोहे की तरह खड़ा और सख्त हो गया था। फिर मैंने उनकी ठोड़ी पर चुम्बन लिया। अब उन्होंने आँखें खोलीं और सिर्फ पूछते हुए कहा, “क्या है?”
मैंने कहा, “मामी, शर्त हार जाओगी। आँखें बंद।”
उन्होंने झट से आँखें बंद कर लीं। मैं समझ गया, वो तैयार हैं, बस अब मज़ा लेना है और चुदाई करनी है। मैंने अब की बार उनके थरथराते होंठों पर हल्का सा चुम्बन किया। अभी तक मैंने छुआ नहीं था उन्हें। उन्होंने फिर आँखें खोलीं और मैंने हाथ के इशारे से उनकी पलकों को फिर ढँक दिया।
अब मैं आगे बढ़ा, उनके दोनों हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारों तरफ घुमाया और उन्हें अपनी बाहों में समेटा और उनके काँपते होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा।
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वो झटके से अलग हुईं, बोलीं, “क्या करना चाह रहा है तू?”
मैं बोला, “मामी एक किस दे दो, तुमने कहा था ना घर के अंदर की चीज़ मिल जाएगी, अब मत मना करना।”
और मैंने उन्हें कस कर चूमा अबकी बार। क्या नरम होंठ थे, मानो शराब के प्याले। होंठों को चूसना शुरू किया और उन्होंने भी जवाब देना शुरू किया। उनके दोनों हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उनके गुलाबी होंठों को खूब चूस-चूस कर मज़ा ले रहा था।
तभी मुझे महसूस हुआ कि उनकी चूचियाँ जो कि तन गई थीं, मेरे सीने पर दब रही हैं। बाएँ हाथ से मैं उनकी पीठ को अपनी तरफ दबा रहा था, जीभ से उनकी जीभ और होंठों को चूस रहा था, और दाएँ हाथ से मैंने उनकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया।
बोलीं, “अब बस कर, ज़्यादा हो रहा है।”
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मैंने कहा, “मामी मौका है, प्लीज़ अलाउ करो ना। मामी एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नहीं उतारूँगा।”
मेरा लंड खड़ा होकर तना हुआ था और चोदने के लिए मैं तैयार। मैंने उन्हें झट से लिटाया, साड़ी उठाई, और अपना लौड़ा उनकी बुर में पेल दिया। अबकी बार खचाखच चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा। चोदते-चोदते पता नहीं कब लंड झड़ गया और मैंने कस कर उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया।
चूमते हुए चूचियों को दबाते हुए, मैंने अपना लंड निकाला और उन्हें जोर का किस कर उठ गया। किन्तु उन्होंने मुझे अपने करीब खींच लिया। और मैं उठने लगा तो उन्होंने फिर मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा, “राजा, डाल दे ना फिर से।”
“क्या डालूँ और कहाँ?” मैंने शरारत की। चुदाई का मज़ा सुनने में भी बहुत है।
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“डाल दे ना अपना ये लौड़ा मेरे अंदर।” उन्होंने कहा और मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका लिए। इधर मेरे हाथ उनकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे। कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता, कभी उनके होंठों को चूसता। और अब तो फिर से मस्ती लेने लगा क्योंकि वो बहुत गरम हो चुकी थीं। “हाँ हाँ, चोद दे अब, बस चोद दे, जल्दी कर।” और वो एकदम गरम थीं। फिर क्या था, मैंने लंड उनकी बुर पर रखा और घुसा दिया अंदर। एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लंड के लिए ही बनी थी।
फिर मैंने हाथों से उनकी चूचियों को दबाते हुए, होंठों से उनके गाल और होंठों को चूसते हुए, चोदना शुरू किया। बस चोदता ही रहा। ऐसा मन कर रहा था कि चोदता ही रहूँ। खूब कस-कस कर चोदा। बस चोदते-चोदते मन ही नहीं भर रहा था। क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। उछल-उछल कर चुदवा रही थीं। “तूने आज इतनी अच्छी चुदाई की है, मैं भी अब हर मौके में तुमसे चुदवाऊँगी। अब ना नहीं करूँगी।” प्लीज़ मौका मिलने पर मिस मत करना। और अब तो मामी मुझे फोन कर बुलाने लगी थीं।
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