Hard Fuck Kahani
आप सबका मेरी दुआ है कि लंड वालों को चूत और चूत वालियों को लंड की कमी न होने पाए। हाँ तो दोस्तों इस बार की कहानी भी मुझे मेरे 1 फैन ने भेजी है जिनकी ऐज 48 साल है और उनकी वाइफ 45 साल की स्मार्ट और थोड़े गदराए बदन की महिला है और उनके 2 बच्चे भी है राजी 20 साल और सोनिया 18 साल दोनो बच्चे अच्छे बोर्डिंग में पढ़ते है. Hard Fuck Kahani
और घर पे मिया बीवी और उनके डैड यानी कि बच्चों के दादा रहते है समीर की सेक्स लाइफ बहुत अच्छी चल रही थी कि अचानक उनकी हँसते खेलते परिवार में हादसा हो गया समीर की वाइफ आरती की रोड एक्सिडेंट में मौत हो गई जैसे तैसे ये वक्त भी कट गया 2 महीने बाद दादा जी ने कहा बेटा बच्चे तो बोर्डिंग में है मुझसे तेरा अकेलापन देखा नहीं जाता तू अभी जवान है दूसरी शादी क्यों नहीं कर लेता.
डैड के बहुत जोर देने पर समीर ने दूसरी शादी कर ली उसकी बीवी की ऐज करीब 23 साल रही होगी लंबी चौड़ी काया वाली गोरी सी लड़की थी बबिता नाम था उसका बच्चे भी नई मम्मी पा कर बहुत खुश थे. शादी के कुछ दिन बाद बच्चे वापस चले गए और समीर भी दिन भर अपने काम पर जाता.
घर में सिर्फ ससुर और बहू रह जाते थे और बबिता अभी बहुत ही जवान थी और उसका पति 1 अधेड़ तो उसके जिस्म की प्यास बुझ नहीं पाती थी. इसलिए वो कुछ उदास सी रहती थी दादा जी की पारखी नजरों ने बबिता की उदासी भांप ली और वो उसको खुश रहने की सलाह देने लगे कि बहू हंसा बोलो करो.
पर बहू हंसने बोलने से कहाँ चूत की खाज मिटती है शादी को 6 महीने हो गए पर बबिता की चूत की गर्मी बजाए ठंडी होने के और भड़कती जा रही थी. ऐसे में 1 दिन उसने ससुर जी को नहाते में उनका टॉवल नीचे गिर जाने से उनका लंड देख लिया जो कि साइज में उसके हसबैंड से 2” बड़ा था यानी कि हसबैंड का 5” था तो उनका 7”.
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उनका लंड देख कर बबिता की प्यास और भड़क गई और उसके मन में अपने ससुर के प्रति गंदे विचार आने लगे पर बहू होने के नाते उसकी हिम्मत नहीं पड़ रही थी पर उसने मन ही मन अपने ससुर से चुदवाने की ठान ही ली थी पर ससुर जी बहुत धार्मिक किस्म के बंदे थे वो बात अलग है कि टीवी पर वो हमेशा ही एडल्ट प्रोग्राम देखना पसंद करते थे।
अब बबिता उनके सामने पल्लू नहीं लेती थी और झाड़ू खटके वक्त तो वो पूरी तरह से ही पल्लू गिरा देती थी जिससे कि उसकी चूचियाँ साफ नजर आती थी. पर ससुर जी उस तरफ देख कर फौरन ही नजरें घुमा लेते थे पर बबिता ने भी ठान ही लिया कि आखिर कब तक इनके अंदर का शैतान नहीं जागेगा.
और अब तो वो बहुत ही महीन से सूट पहनती थी और रात को समीर के आने के बाद खूब जम कर चुदवाती थी. हलांकि उसकी प्यास बुझती नहीं थी पर वो जानती थी कि बगल में बाबू जी का रूम है और वो उन लोगों की मादक सिसकारी भरी आवाज जरूर सुन रहे होंगे.
यही सोच कर वो अपने मुँह से जानबूझ कर किसी बीएफ के चुदाई सीन की तरह आआह्ह्ह्ह्ह ओओओह्ह उफ्फ्फ की आवाजें निकालती थी जब कि समीर कहता भी था कि प्लीज बबिता धीरे आवाज करो बगल में बाबू जी सुनेंगे तो क्या सोचेंगे. पर बबिता तो यही चाहती ही थी उसके बाद समीर को 15 दिन के लिए बाहर जाना पड़ गया.
वो बोला कि शहर से राजू को बुला लेता हूँ वो रुक जाएगा पर बबिता ने मना कर दिया कि बेकार में उसकी पढ़ाई का हर्जा होगा रहने दो मैं और बाबू जी मैनेज कर लेंगे. समीर के जाने के बाद दूसरे दिन बबिता ने मन में ठान ही लिया कि आज चाहे कुछ भी हो मैं बाबूजी से चुदवा कर ही दम लूँगी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुबह नहाने के बाद उसने बहुत ही सेक्सी सी नाइटी निकाली और उसने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी सिर्फ नीचे रेड कलर की पैंटी डाल कर वो बाबू जी के रूम में नाश्ता देने गई. तो बाबू जी बहू के इस रूप को देख कर सन्न रह गए पर उन्होंने झट से नजरें दूसरी तरफ फेर ली और बबिता वहीं बैठ गई और रोने लगी तो बाबू जी बोले-
बाबू जी- क्या हुआ बहू तुम रो क्यों रही हो अरे समीर सिर्फ 15 दिन के लिए ही तो गया है बेटा चुप हो जाओ प्लीज रो मत मैं हूँ ना.
बबिता- बाबू जी मैं समीर के लिए नहीं रो रही अब आपको कैसे बताऊँ…?
बाबू जी- क्या हुआ बेटा मुझे बताओ तो शायद मैं कुछ कर सकूँ.
बबिता- बाबू जी आपको बताने वाली बात नहीं है अगर सासु मा होती तो शायद वो मेरा दर्द समझ सकती.
बाबू जी- बेटा मुझे तुम अपना दोस्त समझ सकती हो अब तेरी सासु मा तो है नहीं तो मुझे बता कि क्या परेशानी है.
बबिता- बाबू जी आप तो जानते ही है कि अभी मेरी ऐज ही कितनी है और आपका बेटा…
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बाबू जी- हाँ तो क्या हुआ मेरे बेटे को…?
बबिता- बाबू जी आप बुरा तो नहीं मानेंगे…?
बाबू जी- नहीं बेटी तू बोल ना मैं बुरा नहीं मानूँगा.
बबिता- बाबू जी आपका बेटा मुझे संतुष्ट नहीं कर पाता है.
बाहू की बात सुन कर बाबू जी चेहरा लटक गया बोले बहू अब भला इसमें मैं क्या कर सकता हूँ तू बता जो तू बोले वो कर दूँ.
बबिता- बाबू जी मुझे कहना तो नहीं चाहिए पर कह रही हूँ कि मुझे आपके साथ……
उसकी बात भी अभी पूरी नहीं हुई थी कि दादा जी गुस्सा से गरम हो गए.
बाबू जी- बहू…. तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया भला ऐसे बात सोचने की हिम्मत भी कैसे हुई तुम्हारी मैं तेरे पिता के बराबर हूँ.
जब बाबू जी गरम हुए तो बबिता के 1 बारगी तो होश ही उड़ गए पर उसने भी अपने तेवर गरम कर लिए.
बबिता- ठीक है अगर आप मेरी बात नहीं मानते तो मुझे तलाक दिला दीजिए और अपने बेटे के लिए किसी और का इंतजाम कर लीजिए मैं आज ही ये घर छोड़ कर जा रही हूँ.
बहू का ये रूप ससुर के लिए नया था और उसके तेवर देख कर उनकी हालत और भी खराब हो गई बाबूजी- बेटी तू जरा ठंडे दिमाग से सोच अगर तू चली गई तो क्या तुझसे कोई शादी करेगा…?
बबिता- हाँ मैं अभी जवान हूँ सुंदर हूँ कोई भी शादी कर लेगा मुझसे पर आप अपने लड़के के लिए परेशान हो जाओगे सोच लीजिए कायदे से.
बहुत देर सोचने के बाद बाबू जी बोले बेटी मैं तुझे भला क्या मजा दे पाऊँगा मैं भी तो बूढ़ा हो चला हूँ और फिर तेरी सासु को मरे 12 साल हो चुके है तब से मैंने किसी से सेक्स नहीं किया है और फिर जब तू मेरे जवान लड़के से खुश नहीं है तो फिर मैं तो काफी बूढ़ा हूँ. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बबिता- मैं कुछ नहीं जानती मुझे बस आपके साथ सहवास करना है.
बाबूजी- ठीक है बेटी अगर तेरी यही मर्जी है तो यही सही.
बबिता- चलिए तो अपने कपड़े उतारिए.
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बबिता ने बाबू जी कपड़े उतार डाले और अब बाबूजी सिर्फ बड़ा सा कच्छा पहने थे उनको अभी भी बहुत शर्म आ रही थी पर बबिता तो वासना की देवी बनी हुई थी सच ही कहा है किसी ने जब औरत पर वासना सवार होती है तो वो कोई भी रिश्ता नहीं देखती.
बबिता ने झट से बाबू जी के होंठों को चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथ से उनका 1 हाथ अपनी नाइटी के ऊपर से ही अपनी चूची पर दबा लिया चूची पर हाथ रखने के बाद वो बाबू जी का हाथ अपनी चूची पर दबा रही थी जिससे बाबू जी समझ गए कि ये अपनी चूचियाँ दबवाना चाहती है और बाबू जी ने उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूसने लगे.
बबिता ने अपनी जीभ बाहर निकाली जिसे बाबू जी ने अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगे अब बाबू जी भी उत्तेजित होते जा रहे थे उन्होंने अपना २सरा हाथ उसकी नाइटी की डोरी खोलने में लगा दिया और अगले पल ही उसकी नाइटी नीचे पड़ी थी उसकी कड़ियल चूचियाँ सामने की तरफ तनी हुई थी जिसे देख कर बाबू जी को जोश आ रहा था.
और ऊपर से बबिता की रेड कलर की डिजाइनर पैंटी जो बहुत ही छोटी सी थी और पूरी तरह से उसकी चूत को ढंक भी नहीं पा रही थी उसकी जालीदार पैंटी में से उसकी झाँटों के बाल बाहर निकल रहे थे. बबिता ने बाबू जी के कच्छे में हाथ डाल दिया था अंदर उनका ७″ लंड उछल कूद मचाए हुए था जिसे उसने हाथ में पकड़ लिया लंड हाथ में बबिता ने जैसे ही पकड़ा बाबू जी मुँह से सिसकी निकल पड़ी.
बाबू जी – आआह्ह्ह्ह बहूऊऊ ये तूने क्या किया आज तूने सोए हुए साँप को जगा दिया ओओओफ्फ्फ कितना गर्म हाथ है तेरा और तेरी चूचियाँ जी करता है खा जाऊँ इनको.
बबिता- हाँ तो मना किसने किया है खा जाइए ना इनको.
और जोर जोर से बाबू जी का लंड रगड़ने लगी बाबू जी ने उसकी चूचियों को मुँह में भर लिया और चूसने लगे दूसरी पे हाथ फेर कर कभी मसल तो कभी दबा रहे थे.
बाबू जी- बहू आज 12 साल बाद मैंने किसी लेडी का बदन छुआ हूँ बहुत मजा आ रहा है.
बबिता- बाबू जी आज सारी लाज शर्म को ताक पर रख दीजिए और भूल जाइए कि आज आप मेरे ससुर है अगर ये रिश्ता हम दोनों याद रखेंगे तो सेक्स का मजा नहीं आएगा बिल्कुल किसी बाजारू औरत की तरह बिहेव कीजिए मेरे साथ और मैं भी आपके सामने किसी रंडी की तरह बिहेव करती हूँ ठीक है ना…?
बाबू जी- हाँ मेरी प्यारी बहुरानी आज तू मेरी बहू नहीं बल्कि मेरी रानी है आज तुझे ऐसा मजा दूँगा कि तूने मेरे बेटे से भी नहीं लिया होगा बता कितना बड़ा है समीर का…?
बबिता- बाबू जी उसका 5” का है और आपका 7” का.
बाबू जी -तुझे मेरे लिंग की लंबाई कैसे पता?
बबिता- मैंने 1 दिन आपको नहाते वक्त देखा था और आपकी टॉवल गिर गई थी और उसी दिन से मैं आपसे सहवास करना चाहती थी.
बाबू जी- बहू देखो अब हम लोग जब चोदा…चोदी पर उतर ही आए है तो अब ये सहवास और लिंग वाली जबान का इस्तेमाल मत करो अब पूरी तरह से खुल कर चुदाई भाषा यानी कि देसी जबान का प्रयोग करो. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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बबिता- ठीक है बाबू जी.
बाबूजी- फिर से बाबू जी….?
बबिता- अच्छा अच्छा मेरे चोदू राजा अब तो ठीक..?
बाबू जी – हाँ मेरी छिनाल बहू अब ठीक है चल अब जरा अपनी चड्डी भी उतार और चूत का नजारा दिखा.
बबिता उनसे हट के दूर चली गई और बड़े ही कामुक अंदाज में उसने अपनी पैंटी पर हाथ फेरना शुरू कर दिया वो अपनी चूत पे हाथ फेर रही थी और फिर पीछे की तरफ घूम कर उसने अपने चूतड़ बाबू जी की तरफ कर दिए और पैंटी थोड़ी सी सरका कर नीचे कर दी.
उसकी सफेद गुलाबी उभारदार गांड देख कर बाबू जी की तबीयत हरी हो गई वो तुरंत उसके पास गए और उसकी गांड पर हाथ सहलाने लगे बबिता झुकी हुई खड़ी थी और बाबू जी उसके चूतड़ पर हाथ फिरा रहे थे अचानक ही बाबूजी ने ताड़…ताड़ थपकी मारना शुरू कर दी उसकी गांड पर.
बबिता- आआह्ह्ह्ह बाबू जी ये क्या कर रहे है आप तो मार रहे है.
बाबू जी – बहन की लौड़ी , रंडी , छिनाल मैं मार नहीं रहा बल्कि प्यार कर रहा हूँ तेरी गद्देदार गांड इतनी सुंदर है मुझे तेरी सासु की याद आ गई चल थोड़ा सा और झुक जा और मुझे गांड का मजा लेने दे.
बबिता खड़े…खड़े ही और झुक गई और बाबू जी ने पीछे से उसकी गांड पे अपना मुँह रखा और और उसकी गांड को चूमने लगे 1 हाथ से उसकी लटकी हुई चूची को भी दबाते जा रहे थे उसके बाद उन्होंने अपने हाथ से बबिता की गांड फैलाकर अपनी जीभ उसकी गांड में घुस्स दी और अंदर चलाने लगे.
बबिता- आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह उफ्फ्फ ये आप क्या कर रहे है आआयई बहुत मजा आ रहा है मैंने आज तक गांड नहीं चुसवाई कभी और ना तो मुझे पता था कि गांड भी चुसाई जाती है और अंदर घुसाइए अपनी जीभ बहुत मजा आ रहा है आआह्ह्ह्ह.
बाबू जी- बहू आज तुझे बहुत मजा आएगा तू हमेशा ही मुझसे चुदवाएगी समीर को भूल ही जाएगी आज तुझे ऐसे ऐसे मजे दूँगा कि तू भी याद रखेगी कि किसी बूढ़े से पाला पड़ा था.
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अब बाबू जी ने बबिता को सीधा किया और उसे बेड पर लिटा दिया। वो खुद उसके ऊपर चढ़ गए और उसके होंठों को जोर-जोर से चूसने लगे। बबिता भी अब पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी, वो बाबू जी की पीठ को सहलाने लगी और उनके लंड को हाथ से मसलने लगी।
बाबू जी ने अपना मुँह नीचे किया और बबिता की चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगे, एक को मुँह में भरकर चूसते और दूसरे को हाथ से मसलते। बबिता की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं – “आआह्ह्ह्ह… बाबू जी… चूसो जोर से… मेरी चूचियाँ दबा दो… उफ्फ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”
बाबू जी ने धीरे से अपना हाथ नीचे ले जाकर बबिता की चूत पर रखा। चूत पहले से गीली थी, वो उंगली से उसकी चूत के होठों को सहलाने लगे। बबिता की कमर उछलने लगी – “आआह्ह्ह्ह… वहाँ… हाँ… उंगली अंदर डालो…” बाबू जी ने एक उंगली उसकी चूत में घुसेड़ दी और अंदर-बाहर करने लगे। बबिता जोर-जोर से साँस लेने लगी, उसने बाबू जी का लंड पकड़ लिया और जोर-जोर से हिलाने लगी।
बाबू जी बोले – “छिनाल… तेरी चूत कितनी गर्म है… जैसे आग लगी हो… ले अब मैं तेरी प्यास बुझाता हूँ…”
वो नीचे सरके और बबिता की चूत पर अपना मुँह रख दिया। जीभ से चूत के होठों को चाटने लगे, क्लिट को चूसने लगे। बबिता पागल हो गई – “आआह्ह्ह्ह… बाबू जी… चाटो मेरी चूत… खा जाओ इसे… उफ्फ्फ… जीभ अंदर घुसाओ… मैं झड़ने वाली हूँ…” बाबू जी ने जीभ अंदर डाली और तेज-तेज चाटा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बबिता की बॉडी अकड़ गई और वो झड़ गई, उसका रस बाबू जी के मुँह में आ गया। बाबू जी ने सब चाट लिया। अब बाबू जी ऊपर आए और अपना 7 इंच का लंड बबिता की चूत के मुँह पर रखा। धीरे से दबाया, बबिता दर्द से कराह उठी – “आआह्ह्ह्ह… धीरे… बड़ा है आपका… फाड़ दोगे…”
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बाबू जी ने उसके होंठ चूमे और एक झटके में आधा लंड अंदर डाल दिया। बबिता चीखी – “आआआआह्ह्ह्ह… मर गई… निकालो…” लेकिन बाबू जी रुके नहीं, धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुसेड़ दिया। बबिता की चूत टाइट थी, लेकिन गीली होने से आसानी से घुस गया। अब बाबू जी ने धक्के मारना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज। कमरे में पच-पच की आवाजें गूँजने लगीं।
बबिता भी अब मजा लेने लगी – “आआह्ह्ह्ह… चोदो बाबू जी… जोर से चोदो… आपका लंड कितना मोटा है… फाड़ दो मेरी चूत… उफ्फ्फ… हाँ ऐसे ही…” बाबू जी उसके मम्मे मसलते हुए चोदते रहे। फिर उन्होंने बबिता को घोड़ी बनाया। पीछे से उसकी गांड पकड़ी और जोर-जोर से ठोके मारने लगे। बबिता की चूचियाँ हिल रही थीं – “आआह्ह्ह्ह… हाँ… गांड पर थप्पड़ मारो… चोदो मुझे… मैं आपकी रंडी हूँ… जोर से…” बाबू जी ने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे और तेज चोदने लगे। करीब 15 मिनट बाद बबिता फिर झड़ गई।
बाबू जी भी तेज हुए और बोले – “ले छिनाल… मेरा रस ले… तेरी चूत में भरता हूँ…” और उन्होंने अपना वीर्य बबिता की चूत में छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए लेट गए।
थोड़ी देर बाद बबिता बोली – “बाबू जी… आपका लंड कमाल का है… समीर से तो दस गुना बेहतर… अब रोज चोदना मुझे…” बाबू जी मुस्कुराए – “हाँ मेरी रानी… अब तू मेरी है…”
और अगले 14 दिन उन्होंने रोज चुदाई की। कभी किचन में, कभी बाथरूम में। समीर के आने के बाद भी चोरी-छिपे जारी रहा। बबिता अब खुश थी, और बाबू जी भी जवान हो गए थे।
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