Ganv Ki Randi Aurat
गाँव का नाम था रामपुर। साहूकार लाला राम सिंह के बड़े-बड़े खेत थे। वहाँ मजदूरी करने वाली औरतों में सबसे मशहूर थी राधा। उम्र 28 साल, लेकिन शरीर देखकर कोई भी 22 साल की कह देता। राधा बहुत गरीब थी। पति 5 साल पहले शहर में मजदूरी करते हुए मर गया था। अब वह अकेली दो छोटे बच्चों को पाल रही थी। Ganv Ki Randi Aurat
लंबा कद, गेहुँआ रंग, मोटी-मोटी जांघें, भारी-भारी गांड और ऊपर दो बड़े-बड़े स्तन जो हर कदम पर हिलते थे। उसकी कमर पतली थी, लेकिन चूत और गांड दोनों बहुत फूली हुई और हमेशा भूखी रहती थीं। राधा की एक खास आदत थी – सेक्स की भूख। गाँव के मर्द उसे “सेक्सी मजदूरनी” कहते थे।
दिन भर खेत में काम करते हुए भी वह अपनी चूत को खाली नहीं रखती थी। सुबह उठते ही वह अपने कमरे में एक बड़ा काला डिल्डो और एक एनल प्लग निकालती। पहले वह नहाती, फिर नंगी होकर आईने के सामने खड़ी हो जाती। अपने बड़े स्तनों को दबाती, चूचियों को मरोड़ती।
फिर दो उंगलियाँ चूत में डालकर गीला करती। “आह्ह्ह… आज फिर दिन भर गर्म रहना है…” कहकर वह पहले एनल प्लग को थूक से चिकना करती और अपनी मोटी गांड में धीरे-धीरे घुसा देती। प्लग पूरा घुसने के बाद गांड के अंदर फिट हो जाता, और वह हल्का सा काँप जाती।
फिर बड़ा मोटा डिल्डो – 9 इंच लंबा, मोटा सा – उसकी चूत में घुसा देती। चूत पहले से ही प्लग की वजह से टाइट हो जाती, लेकिन डिल्डो को जबरदस्ती अंदर धकेलती। “उफ्फ्फ… फट जाएगी आज…” लेकिन मजा भी बहुत आता। फिर पैंटी ऊपर चढ़ाती, साड़ी लपेटती। डिल्डो और प्लग दोनों अंदर रहते।
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चलते समय हर कदम पर डिल्डो चूत की दीवारों से रगड़ खाता, प्लग गांड में दबाव बनाता। खेत तक पहुँचते-पहुँचते उसकी चूत से रस टपकने लगता। खेत में काम करते हुए भी वह कभी-कभी झुककर घास काटते समय गांड ऊपर करके खड़ी हो जाती, ताकि प्लग और गहरा घुस जाए। दूसरे मजदूर मर्द उसे देखकर लंड हिलाते, लेकिन राधा सिर्फ मुस्कुराती।
साहूकार लाला राम सिंह भी उसे बहुत चाहता था। 55 साल का मोटा-तगड़ा आदमी। कभी-कभी वह खेत पर आकर राधा को अलग बुलाता और कहता, “राधा, आज थोड़ा और मेहनत कर, तुझे एक्स्ट्रा पैसे दूँगा।” राधा समझ जाती। शाम को लाला के गोशाले में जाकर वह अपना डिल्डो और प्लग निकाल देती, फिर लाला का मोटा लंड चूसती या गांड में लेती। लेकिन दिन भर खेत में वह अकेली अपनी toys से खेलती रहती।
एक दिन… गर्मी का मौसम था। जून की दोपहर। खेत में धूप इतनी तेज कि हवा भी गर्म लग रही थी। राधा सुबह से काम कर रही थी – कपास के पौधों में खरपतवार निकाल रही थी। उसकी साड़ी पसीने से भीग चुकी थी। ब्लाउज के बटन खुले हुए थे, स्तन आधे बाहर झाँक रहे थे।
अंदर डिल्डो और प्लग दोनों फुल स्पीड पर थे। चलते-चलते वह बार-बार रुककर पैर सिकोड़ लेती, क्योंकि orgasm आने वाला होता। “आह्ह… आज बहुत तेज हो रहा है…” दोपहर के करीब जब सब मजदूर खाना खाने चले गए, राधा अकेली रह गई। वह एक बड़े पेड़ की छाँव में बैठ गई।
पसीना पोंछते हुए उसने साड़ी ऊपर उठाई, पैंटी खींची और डिल्डो को तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगी। प्लग को भी हाथ से दबाती। “हां… हां… फाड़ दो मेरी चूत को… आज बहुत प्यासी हूँ…” उसे orgasm आ गया। चूत से पानी की फुहार निकली। लेकिन अभी संतोष नहीं हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी पास के झाड़ी में कुछ सरसराहट हुई। राधा ने सोचा – शायद चूहा या कोई छोटा जानवर। लेकिन जब उसने नीचे देखा तो उसका दिल धड़क गया। एक चमकदार काला सांप – मोटा, लंबा, लगभग 4-5 फीट का – घास में रेंग रहा था। उसकी आँखें चमक रही थीं। सांप सीधा राधा की खुली चूत की तरफ बढ़ रहा था।
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राधा डर गई, लेकिन उसकी चूत अभी भी गर्म और खुली थी। डिल्डो अभी भी आधा बाहर था। सांप की जीभ फड़फड़ा रही थी। वह राधा की जांघ पर चढ़ा, फिर धीरे-धीरे चूत की तरफ बढ़ा। राधा साँस रोककर देख रही थी। “नहीं… ये क्या कर रहा है…” लेकिन उसका शरीर हिल नहीं रहा था। वासना ने डर को दबा दिया था।
सांप की ठंडी, चिकनी देह राधा की गर्म चूत के होंठों को छू गई। राधा की साँस थम सी गई। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, लेकिन उसकी चूत अभी भी गर्म, भीगी और खुली हुई थी। डिल्डो आधा बाहर निकला हुआ था, चूत के रस से चमक रहा था। सांप की ठंडी, चिकनी देह उसके गर्म चूत के होंठों को छूते ही एक अजीब-सा झुरझुरी भर गई।
“न… नहीं… ये क्या…” राधा फुसफुसाई, लेकिन उसका शरीर हिलने का नाम नहीं ले रहा था। वासना ने डर को पूरी तरह दबा दिया था। सांप की जीभ फड़फड़ाते हुए चूत के बाहरी होंठों को चाटने लगी। ठंडी जीभ गर्म, भीगे मांस पर लगते ही राधा के मुंह से एक लंबी आह निकली – “आआह्ह्ह्ह…”
सांप धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसकी मोटी, चिकनी देह राधा की चूत के अंदर घुसने लगी। पहले सिर्फ सिर, फिर कुछ इंच। राधा की आँखें फैल गईं। “उफ्फ्फ… ये… अंदर जा रहा है… मेरा… चूत में… सांप…” लेकिन दर्द की जगह अजीब सा मजा आने लगा।
सांप की ठंडी देह गर्म चूत की दीवारों से रगड़ खाते हुए अंदर सरक रही थी। राधा ने अनायास ही अपने पैर और फैला दिए। सांप लगभग डेढ़ फीट अंदर चला गया। राधा का शरीर काँपने लगा। वह अपने दोनों हाथों से चूत के होंठ फैलाए हुए थी, जैसे सांप को और अंदर बुला रही हो।
“हां… हां… और अंदर… ठंडा… बहुत ठंडा… लेकिन कितना अच्छा लग रहा है…” सांप अंदर-बाहर हल्का-हल्का सरकने लगा। राधा की चूत सिकुड़-फैल रही थी। कुछ ही मिनटों में उसे पहला orgasm आ गया। चूत से पानी की फुहार निकली और सांप की देह को भिगो दिया। सांप और तेज हो गया।
राधा अब जोर-जोर से कराह रही थी – “आह्ह… फाड़ दो… मेरी चूत फाड़ दो… सांप की चुदाई… उफ्फ्फ… मैं मर जाऊंगी आज…” वह बार-बार झड़ रही थी। एक के बाद एक orgasm। सांप लगभग तीन फीट तक अंदर घुस चुका था। राधा की पेट में हल्की-हल्की उभान पड़ रही थी। वह पेड़ की जड़ पर लेट गई, पैर ऊपर करके, और सांप को अपनी चूत में पूरी तरह ले लिया।
लगभग आधा घंटा तक यह सिलसिला चला। राधा पांच बार झड़ चुकी थी। आखिरकार सांप धीरे-धीरे बाहर निकला। उसकी देह राधा के चूत के रस से चमक रही थी। राधा थकी हुई लेकिन संतुष्ट होकर लेटी रही। उसकी चूत अब पूरी तरह खुली और लाल हो गई थी।
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तभी पीछे से आवाज आई – “राधा… ये क्या कर रही है तू?”
राधा ने चौंककर देखा। साहूकार लाला राम सिंह खड़े थे। उनकी आँखें फटी हुई थीं। उन्होंने पूरा नजारा देख लिया था। उनके लुंगी में मोटा तंबू खड़ा हो चुका था।
“लाला जी… मैं… वो…” राधा घबरा गई।
लाला ने मुस्कुराते हुए कहा, “चुप कर राधा। आज तूने मुझे कुछ नया दिखा दिया। अब मेरी बारी है।”
लाला राम सिंह ने अपनी लुंगी उतारी। उनका 55 साल का मोटा, काला, 8 इंच का लंड खड़ा होकर लहरा रहा था। वे राधा के पास आए और उसके पैरों को और फैलाया। सांप वाली चूत अभी भी गीली और खुली थी। लाला ने बिना कुछ कहे अपना मोटा लंड एक ही झटके में राधा की चूत में ठोक दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“आआआह्ह्ह्ह… लाला जी… फट गई…” राधा चीखी। लाला ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। “साली, सांप से चुदवाती है… अब देख मेरा लंड कैसे फाड़ता है तेरी भूखी चूत को…” वे राधा को पेड़ की जड़ पर लिटाकर तेज-तेज चोद रहे थे। राधा के बड़े-बड़े स्तन उछल रहे थे।
लाला उन्हें दबाते, चूचियों को मरोड़ते। राधा की चूत सांप की वजह से पहले से ही ढीली और गीली हो चुकी थी, इसलिए लाला का मोटा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। “हां लाला जी… चोदो… जोर से चोदो… मेरी चूत सांप ने गर्म कर दी है… अब आपकी बारी है…”
लाला ने करीब 15 मिनट तक राधा की चूत को फाड़ा। फिर उन्होंने राधा को घुटनों के बल खड़ा किया और उसकी मोटी गांड में लंड घुसाने की कोशिश की। लेकिन राधा ने कहा, “लाला जी… वहां तो प्लग है…” लाला ने हंसकर प्लग निकाला और अपनी थूक से चिकना करके राधा की गांड में अपना लंड ठोक दिया। “आज तेरी गांड भी मेरी है…”
राधा की गांड सांप और डिल्डो की वजह से पहले से ही खुली हुई थी। लाला का लंड पूरी तरह घुस गया। वे राधा की कमर पकड़कर जोर-जोर से गांड मारने लगे। राधा अब लगातार चीख रही थी – आनंद और दर्द के मिले-जुले स्वर में। लाला ने राधा को दो बार चोदा – पहले चूत, फिर गांड। आखिरकार वे राधा के मुंह में झड़ गए। राधा ने पूरा वीर्य पी लिया।
शाम को जब मजदूर लौटे तो राधा सामान्य दिख रही थी, लेकिन उसकी चाल में अजीब सी लचक थी। लाला ने उसे एक्स्ट्रा 500 रुपये दिए और कान में फुसफुसाया, “रात को गोशाले में आना। आज पूरा गाँव तेरी चुदाई देखेगा।” राधा मुस्कुराई। उसकी भूख अभी शांत नहीं हुई थी।
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रात के नौ बजे राधा लाला के गोशाले में पहुंची। वहाँ लाला के अलावा तीन और आदमी थे – लाला का भतीजा मोहन (32 साल), खेत का मुखिया बुद्धू (48 साल), और गाँव का नाई कल्याण (40 साल)। चारों की आँखों में वासना साफ दिख रही थी।
लाला ने कहा, “राधा, आज तू हम सबकी रानी है। जो चाहे कर सकते हैं। लेकिन एक शर्त – तुझे हर एक की चुदाई सहनी पड़ेगी, और चीखना नहीं। सिर्फ आनंद लेना है।”
राधा ने शर्माते हुए सिर हिलाया। उसने अपनी साड़ी उतार दी। नंगी होकर वह गोशाले के बीच में खड़ी हो गई। उसके बड़े स्तन, मोटी जांघें, भारी गांड और अभी भी सूजी हुई चूत सब देख रहे थे। पहले लाला ने उसे अपने पास बुलाया और फिर से चोदा। इस बार उन्होंने राधा को अपनी गोद में बैठाकर चोदा। राधा ऊपर-नीचे उछल रही थी।
फिर मोहन आया। वह जवान था, लंड भी लंबा और पतला था। उसने राधा को घुटनों के बल बैठाकर मुंह में लंड दिया। राधा चूस रही थी। मोहन ने राधा की चूत में उंगलियाँ डालते हुए कहा, “क्या राधा, सांप भी चूसती है क्या?” राधा ने जवाब में और जोर से चूसा।
इसके बाद तीनों ने राधा को बारी-बारी चोदा। एक चूत में, दूसरा मुंह में, तीसरा गांड में। राधा चारों तरफ से भरी हुई थी। वह लगातार झड़ रही थी। गोशाला में सिर्फ चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं – “पक… पक… पक…” और राधा की कराह – “आह्ह… हां… और… जोर से…”
राधा उस रात कुल 7 बार चुदाई कराई। हर आदमी ने उसे दो-दो बार चोदा। आखिरकार जब सब झड़ चुके तो राधा गोशाले की मिट्टी पर लेटी हुई थी। उसकी चूत और गांड दोनों से वीर्य बह रहा था। शरीर पसीने और वीर्य से सना हुआ था। लेकिन चेहरे पर संतोष था।
लाला ने कहा, “राधा, अब तू गाँव की सेक्सी रानी है। रोज शाम को यहां आना। हम सब तुझे पालेंगे। पैसे, अनाज, कपड़े – जो चाहे मिलेगा। बस तेरी चूत और गांड हमारी रहे।”
राधा ने मुस्कुराते हुए कहा, “जी लाला जी। लेकिन एक शर्त – कभी-कभी सांप वाला खेल भी खेलना है।”
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सब हंस पड़े। अगले दिन खेत में राधा का रंग-ढंग बदल गया था। अब वह जानबूझकर ज्यादा झुककर काम करती, गांड ऊपर करके। मजदूर मर्द उसे देखते और लंड हिलाते। राधा मुस्कुराकर इशारा करती। दोपहर में फिर वही पेड़ के नीचे। इस बार तीन मजदूर छिपकर देख रहे थे – रामू, श्याम और गोविंद। जब राधा अपना डिल्डो और प्लग निकालकर खुद को उंगली कर रही थी, वे तीनों बाहर निकल आए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“राधा भाभी… हम भी शामिल हो जाएं?”
राधा ने देखा – तीनों जवान, तगड़े। उसने मुस्कुराकर कहा, “आ जाओ… लेकिन जल्दी करो, कोई देख न ले।”
तीनों ने राधा को घेर लिया। रामू ने चूत में डाला, श्याम ने गांड में, गोविंद ने मुंह में। राधा तीनों तरफ से चुद रही थी। वह खुशी-खुशी कराह रही थी – “हां… चोदो मुझे… सब मिलकर चोदो… मेरी भूखी चूत और गांड को भर दो…”
वे तीनों ने राधा को अच्छी तरह चोदा। फिर बारी बदलकर। राधा उस दोपहर कुल चार बार चुदाई कराई। शाम को लाला के गोशाले में फिर वही सिलसिला। इस बार लाला ने और दो दोस्त बुलाए थे। कुल छह आदमी। राधा अब पूरी तरह तैयार थी। उसने खुद कहा, “आज मुझे गैंगबैंग करो… सब एक साथ।”
गोशाले में राधा को चारों तरफ से चोदा गया। दो लंड चूत और गांड में, एक मुंह में, दो हाथों में। राधा का पूरा शरीर लंडों से भरा हुआ था। वह लगातार झड़ रही थी। “हां… फाड़ दो… मेरी चूत फाड़ दो… गांड फाड़ दो… मैं सबकी रंडी हूँ आज…” उस रात राधा ने 9 बार झड़ी। उसके शरीर पर वीर्य की परत चढ़ गई थी।
इसके बाद राधा गाँव की खुली रंडी बन गई। हर कोई उसे चोदता। खेत में, गोशाले में, कभी-कभी अपने घर में भी। वह दिन में डिल्डो और प्लग से खेलती, दोपहर में मजदूरों से चुदती, शाम को लाला और उसके दोस्तों से, और रात को कभी-कभी अकेली सांप वाला खेल भी खेल लेती। एक दिन लाला ने पूरे गाँव के 12 मर्दों को बुलाया। राधा को नंगी करके बीच में खड़ा किया। फिर सबने बारी-बारी राधा की चुदाई की।
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राधा पूरी रात चुदती रही। सुबह तक उसकी चूत और गांड सूज गई थीं, लेकिन वह खुश थी। राधा के दो बच्चे अब अच्छे से पल रहे थे। उन्हें अच्छा खाना, कपड़े, स्कूल मिल रहा था। राधा की गरीबी खत्म हो गई थी। बस उसकी एक ही शर्त थी – उसकी सेक्स भूख कभी खत्म न हो। कई महीनों बाद गाँव में एक नया साहूकार आया – लाला राम सिंह का रिश्तेदार, 60 साल का मोटा-धनी व्यक्ति। उसने राधा को देखा और कहा, “ये तो गाँव की हीरा है।” उसने राधा को अपने बड़े बंगले में रख लिया।
वहाँ राधा को रोज नई-नई चुदाई मिलती। कभी कुत्ते के साथ, कभी कई आदमियों के साथ, कभी toys के साथ। राधा की जिंदगी अब सिर्फ काम, खाना और चुदाई की हो गई थी। राधा अब 30 साल की हो चुकी थी, लेकिन उसकी चूत और गांड अभी भी 22 साल की सी टाइट और भूखी थीं। वह हर रोज कई बार चुदती, झड़ती और फिर तैयार हो जाती। रामपुर गाँव में राधा की कहानी आज भी सुनाई जाती है। “सेक्सी मजदूरनी” जो सांप से लेकर पूरे गाँव तक सबकी रंडी बनी, लेकिन कभी शिकायत नहीं की। वह अपनी भूख के अनुसार जीती रही।
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