Free Sister Swap Porn Story
मैं शैलेश हूँ, आपकी सेवा में हाजिर हूँ फिर एक अनुभव की कहानी लिए। आज मैं मेरा एक और सेक्सपीरियंस बयान करने जा रहा हूँ। मैंने पहले बताया था कि मेरे कुटुंब में मैं, पिताजी, माताजी और मुझसे दो साल छोटी बहन सुधा हैं। पिताजी शहर की हाई स्कूल में टीचर हैं और हम सब को-ऑपरेटिव सोसाइटी में रहते हैं। Free Sister Swap Porn Story
मेडिकल कॉलेज में मेरा एक घनिष्ठ दोस्त था, नितेश। नितेश हॉस्टल में रहता था और अक्सर हमारे घर आया करता था। कभी-कभी रात को रुक भी जाता था। मेरी फैमिली से वो काफी मिलजुल गया था। मुझे थोड़ा शक पड़ा था कि उसकी नजर सुधा पर पड़ी थी। खैर, मुझे कोई एतराज नहीं था।
नितेश के पिताजी एक छोटे से गाँव के मुखिया थे। बड़ी लंबी-चौड़ी किसानी थी उनकी। गाँव के बीच उनका बड़ा मकान था जहाँ वो रहते थे। गाँव से बाहर दूसरा घर था जो मेहमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। नितेश की फैमिली में मेरी तरह माताजी, पिताजी और दो साल छोटी बहन अंकिता थी जिसने सुधा की तरह कॉलेज की परीक्षा दी थी।
ये कहानी उस समय की है जब कॉलेज में वेकेशन पड़ा और नितेश ने मुझे अपने गाँव जाने का आग्रह किया। सुधा को जब पता चला तो वो जिद करके मेरे साथ चली। मैं और नितेश काफी निकट थे। कई बार सेक्स की बातें करते थे, ब्लू मैगजीन पढ़ते थे और ब्लू फिल्में देखने जाते थे। मैंने उसे मंजुला भाभी की बात की थी लेकिन मैंने सुधा को चोदा था ये बताया नहीं था।
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एक दिन मैंने पूछा,
“तूने कोई लड़की को चोदा है या नहीं?”
“क्यों नहीं? हम खेत वालों को मजदूर की लड़कियाँ आसानी से मिल जाती हैं।”
“कितनी को चोदा है अब तक?”
“तीन। जब से एक पूनम मिली है तब से दूसरी को चोदने को दिल नहीं होता।”
“ऐसा तो क्या है उसमें?”
“तू जब हमारे गाँव आए तब देखना।”
“मुझसे चुदवाएगी वो?”
“क्या पता? मैं पूछूँगा।”
“तुझे कोई एतराज नहीं है, मैं पूनम को चोदूँ इसमें?”
“नहीं तो। किसके पास चुदवाना ये उसकी मरजी की बात है।”
मुझे और सुधा से मिलकर नितेश के माताजी-पिताजी खुश हुए। अंकिता सुधा से लग गई लेकिन पहले मुझे गौर से देखने के बाद। नितेश होशियार था, वो समझ तो गया लेकिन कुछ बोला नहीं। थोड़े दिन खाना-पीना, घूमना और पिकनिक पर जाने में चले गए। दिवाली आ रही थी, इससे नितेश की माताजी ने घरों की सफाई का काम निकाला था।
रोज पाँच-सात औरतें काम पर आती थीं। उनमें पूनम भी शामिल थी। उसे देखकर मैं दंग रह गया। पाँच फुट तीन इंच की ऊँचाई वाला उसका बदन गठीला था। रंग थोड़ा साँवला था। चेहरा गोल और आँखें काली-काली और बड़ी-बड़ी। होंठ पतले थे। जब हँसती थी तब गालों में खड्डे पड़ते थे। उम्र होगी शायद सोलह-सत्रह साल की।
इन सब से आकर्षक थे उसके स्तन। इतने बड़े स्तन लिए वो सीधी कैसे चल पाती थी ये एक समस्या थी। गोल-गोल और उन्नत स्तन थिरक जाते थे जब वो हँस देती थी। पतली कमर के नीचे भारी-भरकम नितंब थे। उसे देखते ही मेरा लौड़ा उठने लगा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
एक दिन पूनम ने खुद माताजी से कहा कि वो और अंकिता दूसरे मकान की सफाई करने जाएँगी। माताजी ने हाँ कह दी। इधर मैं और नितेश खेत में घूमने चले गए। दोपहर का समय हुआ तब नितेश ने कहा, “चल, घर जाएँ।” हम घर को तो चले, लेकिन मुख्य घर के बजाय उस मेहमान घर को चले जहाँ पूनम और अंकिता सफाई कर रही थीं। सुधा भी मौजूद थी।
जाते ही नितेश ने अंकिता से कहा, “अंकिता, तू और सुधा जा के चाय-नाश्ता ले आओ, समझी?” मुस्कुराती हुई अंकिता बोली, “हाँ भैया। लेकिन थोड़ी देर लगेगी।” नितेश ने कहा, “कोई बात नहीं” और अंकिता सुधा का हाथ पकड़ कर चली गई।
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हम दूसरे कमरे में गए जहाँ पूनम काम कर रही थी। जाते ही नितेश ने पूनम को बाहों में भर लिया और चुम्बन करने लगा। उसने कान में कुछ कहा तो शरमा के पूनम ने अपना चेहरा हाथों से ढक लिया। नितेश बोला, “मैंने पूछा कि हमारी चुदाई शैलेश देखे तो…”
मैंने कहा, “क्या जवाब दिया पूनम तूने?” पूनम बोली, “मैं कौन हूँ न कहने वाली? आपको पसंद आए वो कीजिए।” नितेश ने कहा, “हम दोनों से चुदवाएगी?” शर्म से वो टेढ़ा देखने लगी, कुछ बोली नहीं। नितेश बोला, “याद है, एक बार तूने पूछा था कि दो मर्दों से एक साथ चुदाई का मजा कैसा होता है? आज तुझे पता चलेगा। मैं और शैलेश तुझे एक साथ चोदेंगे।”
नितेश पूनम को पलंग पर ले गया और उसकी चोली निकाल दी। बड़े-बड़े स्तन खुले हुए। नितेश ने इशारा करके मुझे बुला लिया। मैंने तुरंत जा के स्तन पकड़ लिए और सहलाने लगा। नितेश फ्रेंच किस करने लगा। मैंने झुक कर स्तन की निप्पल मुँह में ली और चूसी।
नितेश के हाथों ने पूनम की घाघरी ऊपर से जाँघें सहलाईं। जैसे-जैसे उसके हाथ ऊपर सरकने लगे वैसे-वैसे पूनम की सुडौल जाँघें नंगी होती चली गईं। नितेश पलंग पर बैठा था और पूनम उसकी गोद में थी। मैं जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया और खुली जाँघों पर हाथ फेरने लगा।
आखिर नितेश की उँगलियाँ पूनम की भोस तक पहुँच गईं। पूनम की भोस काफी बड़ी थी। काले घुँघराले जांत उसने काट रखे थे। बड़े होंठ भरवदार थे। छोटे होंठ सूज कर बाहर झाँक रहे थे। कामरस से भोस की दरार गीली हो गई थी। तटर क्लिटोरिस का छोटा मठ्ठा दिखाई दे रहा था।
सारी भोस अच्छी तरह महक रही थी, जिसकी सुवास से मेरा लौड़ा तन के लोहे जैसा बन गया। नितेश ने एक उँगली से क्लिटोरिस को टटोला तो पूनम के नितंब हिलने लगे। भोस छोड़ कर नितेश के हाथ स्तनों पर जा पहुँचे तब मैंने मेरा मुँह भोस से लगा दिया। जीभ निकाल कर दोनों बड़े होंठों को चाटा।
बाद में जीभ से ही भोस की दरार टटोली और क्लिटोरिस को रगड़ा। पूनम का एक हाथ नितेश का लौड़ा पकड़े हुए था, दूसरा मेरे बालों में घूम रहा था। हम तीनों की उत्तेजना बढ़ने लगी। फटा-फट हमने कपड़े निकाल फेंके और पूनम को पलंग पर लेटा दिया। नितेश ने पूछा, “पूनम, पहले किसका लौड़ा लेना है?”
उसने नितेश का लौड़ा छोड़ मेरा पकड़ लिया और मुठ मारे लगी। “अच्छा शैलेश, तू उसकी जाँघें बीच आ जा।” कहते हुए नितेश पूनम के सर के पास बैठ गया और अपना लौड़ा उसके मुँह में धर दिया। पूनम को अपना मुँह पूरा खोलना पड़ा नितेश का मोटा लौड़ा अंदर लेने के लिए।
इधर मैंने उसकी जाँघें फैला के लौड़ा भोस पर टिका दिया और एक धक्के से सारा का सारा लौड़ा चूत में घुसेड़ दिया। उधर अपने हिप्स हिला कर नितेश पूनम का मुँह चोदने लगा तो मैं धीरे धक्के से उसकी टाइट चूत को चोदने लगा। पूनम के मुँह से उंउं… उंउं आवाज आने लगी और उसके चूतड़ घूमने लगे।
थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने फटाके मारने शुरू किए। मैंने लौड़ा पूरा बाहर निकाल के क्लिटोरिस पर रगड़ा। अचानक पूनम का बदन अकड़ गया और रोएँ खड़े हो गए। मैंने झट से लौड़ा चूत में डाल के तेजी से धक्के मारने शुरू किए। पूनम ने पानी छोड़ दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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नितेश ने उसके मुँह से लौड़ा निकाला तब वो बोली, “हाय दइया, ऐसी चुदाई तो कभी नहीं करवाई।” नितेश ने कहा, “अभी तो तूने कुछ नहीं देखा। सही चुदाई तो अब होगी।” हम दोनों ने कंडोम लगाए। मैं पलंग पर लेट गया। नितेश ने पूनम को मेरी जाँघों पर बिठाया और मेरा लौड़ा चूत में पेल दिया।
“शैलेश, अभी जरा रुकना, धक्के मत देना। पूनम, तू आगे झुक और गांड उधर कर।” मैं देख नहीं पा रहा था लेकिन पूनम के कराहने की आवाज से समझ गया कि नितेश उसकी गांड में लौड़ा डाल रहा था। जब पूरा लौड़ा डाला गया तब नितेश पूनम की पीठ पर झुका और बोला, “शैलेश, मैं गांड मार रहा हूँ और पूनम भी हिप्स हिलाएगी। वैसे ही तेरा लौड़ा चूत में आता-जाता रहेगा, तुझे धक्के लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
जैसा नितेश ने कहा था वैसा ही हुआ। नितेश ने पूनम की गांड मारनी शुरू की तो उसके हिप्स हिलने लगे और मेरा लौड़ा चूत चोदने लगा। चूत में फंसे हुए मेरे लौड़े पर नितेश के लौड़े का दबाव आता था। पूनम ने मेरे मुँह से मुँह लगा के फ्रेंच किस की। पीछे से नितेश ने उसके स्तन थाम लिए। दस मिनट तक पूनम की गांड मारने पर भी नितेश जरा नहीं।
मैंने कहा, “नितेश अब तू नीचे आ जा, मुझे गांड मारने दे।” हमने अदला-बदली की। गांड मारने का ये मेरा पहला अनुभव था। चूत के बजाय गांड इतनी टाइट होती है वो मैंने पहली बार जाना। नितेश के कहने से मैं पूरी ताकत से पूनम की गांड मारने लगा। दूसरी बीस मिनट तक मैंने गांड मारी तब पूनम बोली, “मैं तीन बार झर चुकी हूँ, अब तो बस कीजिए।”
“क्या खयाल है शैलेश?”
“आज के दिन वास्ते काफी है।”
“अच्छा पूनम, जरा उधर ठा तो मैं धक्के लगा सकूँ।”
पूनम ने हिप्स उठाए। नीचे से नितेश ने धक्के लगा के चूत मारना शुरू किया। मैंने गांड मारना चालू रखा। पूनम फिर एक बार झर पड़ी। उसकी गांड ने मेरा लौड़ा ऐसा दबोचा कि मुझे दर्द हो गया। मैं और नितेश एक साथ झरे और लौड़ा निकाल कर पूनम से अलग हुए। थकी हुई पूनम थोड़ी देर पड़ी रही, बाद में उठ कर बाथरूम में चली गई। हमने भी सफाई की और कपड़े पहन लिए।
आगोश में ले कर नितेश ने पूनम को किस किया और पूछा, “तुझे लगा तो नहीं ना? मजा आया?”
“बहुत मजा आया” वो बोली।
“फिर से ऐसे चुदवाओगी?”
“धत्त” कह के अपने आप को छुड़ा के वो भाग गई। पूनम के जाने के बाद जब हम अगले कमरे में आए तो अंकिता और सुधा को बैठे हुए देखा। मैंने पूछा, “कब की आई हो तुम?” सुधा ने कहा, “कब से? बीस मिनट हुई होगी, क्यों अंकिता?” अंकिता बोली, “हाँ।”
नितेश ने अंकिता से कहा, “बदमाश, चुपके-चुपके आ के देख रही थी ना?” मैं चौंक पड़ा। इतने में सुधा बोली, “हाँ नितेश भैया, वो मुझे खींच कर दिखाने ले आई थी।” अब मैं समझ गया। इन दोनों लड़कियों ने प्लान कर के ही हमारी चुदाई देखी थी।
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मैंने कहा, “नितेश, सुधा कुँवारी नहीं है, उसके वास्ते चुदाई कोई नई चीज नहीं है, लेकिन अंकिता?” नितेश ने कहा, “क्यों अंकिता, तू कुँवारी हो?” अंकिता शरमा गई और बोली, “ऐसे भी क्या पूछते हो भैया? आप जानते तो हैं।” मैं समझ गया कि अंकिता को किसी ने चोदा है जरूर। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
नितेश ने पूछा, “शैलेश ये बता, कौन खुश नसीब था जिसने सुधा को…” सुधा बोली, “बोलिए, बोलिए, रुक क्यों गए? सुधा को क्या?” नितेश आगे बोला, “ओ.के., जिसने सुधा को पहली बार चोदा है?” अंकिता ने आँख से मेरी ओर इशारा किया और बता दिया। नितेश बोला, “अच्छा, तो ये बात है? कब और कहाँ चोदा था? सुधा तू ही बता।”
सुधा बोली, “मंजुला भाभी के साथ ही। उसी वक्त।” नितेश बोला, “वाह रे मेरे शेर, एक साथ दो-दो चूत मारी तूने?” मैं क्या बोलूँ? मुस्कुराता रहा। अंकिता मुझसे आँख नहीं मिला पाती थी। मैंने पूछा, “अंकिता, तुझे किसने चोदा पहली बार?” सुधा बोली, “चुप रहो भैया, बेचारी अभी भी शर्म से बाहर निकली नहीं है।”
मैं बोला, “जैसे-जैसे चुदवाती चलेगी वैसे-वैसे शर्म कटती चलेगी और तेरी जैसी बेशर्म बन जाएगी।” अंकिता शर्म से लाल-लाल हो गई। नितेश ने उसके कंधे पर हाथ रखे और बोला, “मैं बताता हूँ। मेरी प्यारी बहन को मैंने ही पहली बार चोदा है।” अंकिता ने अपना चेहरा नितेश के सीने में छुपा दिया।
सुधा ने कहा, “पूरी बात करो नितेश भैया, कहाँ और कैसे आपने अंकिता को चोदा ये पूरी कहानी सुनाइए।” नितेश ने कहा, “बातें बाद में करेंगे। अभी तो दूसरा काम बाकी है। आ जाओ मेरे पास। और अंकिता, जा तुझे शैलेश बुला रहा है।” सुधा को गोद में लेते हुए नितेश ने कहा, “शैलेश, क्या खयाल है, बहनों की अदला-बदली करेंगे?”
मैंने कहा, “क्यों नहीं? बहनें जो राजी हों तो।” नितेश की गोद में बैठी सुधा बोली, “नहीं, हम भाइयों की अदला-बदली करेंगे, क्यों अंकिता?” मैं सोफा पर बैठा था। अंकिता अपने आप मेरे पास चली आई और खड़ी हो गई। मैंने उसकी कमर आसपास हाथ लिपटाया और पास खींची।
उसने मेरे गले में बाहें डाल दीं। मैंने उसकी ओढ़नी उतार दी, अब वो चोली-घाघरी में रह गई। चोली छोटी सी थी इसलिए उसके गोरे सपाट पेट का काफी हिस्सा खुला था। मैंने पेट पर चुम्बन किया तो वो चटपटा गई। बोली, “गुदगुदी होती है।” “ये तो तेरा पेट है। यहाँ…” भोस पर हाथ रखते हुए मैंने कहा, “यहाँ किस करूँगा तो क्या होगा?”
“धत्त, ऐसा नहीं बोलते” मेरे मुँह पर उंगली रख कर वो बोली। मैंने उंगली होंठों बीच ली और चूसी। दूसरे हाथ से चोली में कैद उसके स्तन को टटोला। मैं स्तन पकड़े हुए था कि उसने उंगली निकाली और नीचे झुक कर अपने होंठ मेरे होंठ से चिपका दिए। जब मैंने जीभ से उसके होंठ चाटे तब उसने मुँह खोला और मेरी जीभ उसके मुँह में घुस चारों ओर घूम चुकी।
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लौड़े की तरह जीभ को कड़ी बनाके मानो मैंने उसके मुँह को चोदा। हमारी फ्रेंच किस पूरी मिनट तक चली। मैंने मेरी जाँघें चौड़ी कर उसे बायीं जाँघ पर बिठाया। किस चालू रखते हुए मेरा हाथ उसकी चोली में कैद स्तन पर पहुँच गया। हल्के से मैंने स्तन सहलाया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पतले कपड़े से बनी चोली के नीचे उसने ब्रा पहनी नहीं थी इसलिए उसकी कड़ी निप्पल साफ नजर आती थी। कपड़े के आर-पार मैंने निप्पल को टटोला। अंकिता ने मेरा हाथ पकड़ा लेकिन विरोध किया नहीं। चोली लो कट थी। दोनों स्तनों का आधा हिस्सा खुला दिखाई दे रहा था।
मैंने उस गोरे-गोरे हिस्से पर चुम्बन किया। अंकिता ने मेरा सर अपने सीने से दबा दिया। एक-एक कर के मैंने चोली के हुक खोल डाले। चोली हटाते ही अंकिता के नंगे स्तन नजरअंदाज हुए तो मैं दंग रह गया। इतने खूबसूरत स्तन की मुझे उम्मीद नहीं थी।
गोरे-गोरे गोल-गोल बड़े श्रीफल के साइज के उसके स्तन कड़े थे। चिकनी पतली चमड़ी के नीचे खून की नीली नसें दिखाई दे रही थीं। स्तन के बीच बादामी कलर की दो इंच की एरिओला थी जिसके मध्य में छोटी सी निप्पल थी। उस वक्त एक्साइटमेंट से एरिओला उभर आई थी और निप्पल कड़ी हो गई थी।
मैंने पहले हल्के स्पर्श से सारा स्तन सहलाया, बाद में मुट्ठी में लिया। निप्पल को चिमटी में ले कर मसला। अंकिता के मुँह से आह निकल पड़ी। चिमटी छोड़ मैंने निप्पल को मुँह में लिया, जीभ से टटोला और चूसा। अंकिता के नितंब हिलने लगे। उधर नितेश ने सुधा को पलंग की धार पर लेटाया था और खुद जमीन पर बैठ उसकी भोस सहला रहा था।
भोस के होंठ चौड़े कर के वो जीभ से क्लिटोरिस टटोल रहा था। उसकी दो उँगलियाँ सुधा की चूत में डाली हुई थीं जो उसके जी-स्पॉट का मर्दन कर रही थीं। अचानक नितेश ने उँगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर कर के सुधा को चोदना शुरू किया। सुधा के चूतड़ हिलने लगे।
वो मुँह से सी-सी-सी आवाज करने लगी। नितेश ने फिर भी अपना मुँह क्लिटोरिस से हटाया नहीं। कई देर तक मैं अंकिता के स्तनों से खेलता रहा। अब वो मेरी गोद से सरक कर जमीन पर आ गई। मेरे पायजामा के आर-पार उसने लौड़ा टटोला। मैंने नाड़ा खोल दिया।
आठ इंच का कड़ा लौड़ा उससे निकर में से निकाला नहीं गया। मैंने निकर भी उतार दी और लौड़ा आजाद किया। फौरन उसने लौड़ा पकड़ लिया। मुट्ठी मारने लगी। लौड़ा और ज्यादा तन गया। टोपी हटा कर उसने लौड़े का मठ्ठा खुला किया और तुरंत अपने मुँह में ले लिया।
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मठ्ठे को जीभ और तालु के बीच दबाए रखे वो स्थिर हो गई। दो मिनट तक वो हिली नहीं। मुझे बहुत अच्छा लगता था। लौड़े में हल्के-हल्के ठुमके होते थे। बाद में उसने लौड़े का मठ्ठा चूसना शुरू किया, जैसे बच्चा लॉलीपॉप चूसता है वैसे। चूसते-चूसते जीभ से चाटा और मुट्ठी में पकड़ा हुआ लौड़े का हिस्सा घिसने लगी।
मेरे हिप्स भी हिल पड़े। मैंने उसका सर पकड़े धक्का देना शुरू किया। गीला मोटा लौड़ा उसका मुँह को पुछ-पुछ आवाज के साथ चोदने लगा। मुझे लगा कि मैं झर जाऊँगा। जब मेरे लौड़े में फटाके शुरू हुए और कामरस बहने लगा तब उसने लौड़ा मुँह से निकाला और उठ कर गोद में आ बैठी।
वो बोली, “आपने कभी अपने लौड़े का स्वाद लिया नहीं होगा, मैं चखवाती हूँ।” उसने मेरे मुँह से मुँह चिपका के फ्रेंच किस की तो उसके थूक के साथ मेरे लौड़े का पानी भी मेरे मुँह में आ गया। अब मैंने उसकी ओढ़नी उतार डाली। किस करते हुए अब मेरा हाथ उसकी जाँघ पर फिसलने लगा।
जैसे-जैसे मेरा हाथ घुटनों से ले कर भोस तरफ जाने लगा वैसे-वैसे उसकी घाघरी भी खिसकती गई और जाँघें नंगी होती चलीं। मेरा हाथ उसकी चिकनी जाँघ सहलाने लगा। उसने जाँघें सिकुड़ी हुई रखी थीं जो मैंने धीरे से खोल कर चौड़ी कीं। लेकिन जैसे मैंने भोस को छुआ अंकिता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और जाँघें फिर सिकुड़ लीं।
मैंने अंकिता को सोफे की धार पर लेटा दिया। नाड़ा खोल कर घाघरी उतार फेंकी। अंकिता ने अंदर निकर पहनी नहीं थी। मैंने उसके पाँव ऊपर उठाए और थोड़ा जोर लगा कर उसकी जाँघें चौड़ी कर दीं। अब मैं उसकी भोस देख सका। मोटे भरवदार बड़े होंठ वाली अंकिता की भोस उस वक्त सूज कर गुलाबी हो गई थी।
तीन इंच की दरार में से छोटे होंठ सूज कर बाहर निकल आए थे। क्लिटोरिस तटर हो गई थी। मैंने पहले उँगलियों से भोस को सहलाया, बाद में जीभ फिरा के चाटी। होंठ चौड़े कर दो उँगलियाँ चूत में डालीं। अंदर-बाहर करते हुए मैंने उँगलियों से चूत को चोदा और जी-स्पॉट को मसला।
उसी वक्त जीभ से क्लिटोरिस को टटोला। अंकिता की उत्तेजना बढ़ गई, उसके नितंब हिलने लगे और चूत में संकोचन होने लगे। मेरा लौड़ा पूरा तन गया। उधर नितेश अब पलंग पर लेटा था। सुधा उसकी जाँघों पर बैठी थी। नितेश का लौड़ा सुधा की चूत में फंसा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अपने चूतड़ उठा-गिरा के सुधा लौड़े को चूत से अंदर-बाहर किए जाती थी। कभी-कभी नितेश भी धक्का दे कर सुधा को चोदता था। नितेश के दोनों हाथ सुधा के स्तनों पर लगे हुए थे। नितेश का पूरा लौड़ा बाहर निकल कर फिर चूत में घुसता साफ दिखाई देता था।
चूत में उँगलियाँ और क्लिटोरिस पर जीभ से चोदते हुए मैंने अंकिता को झराया। उसकी भोस ने कामरस का फव्वारा छोड़ दिया। सिकुड़ कर उसकी जाँघों ने मेरा सर भोस से दबा रखा। चूत में फटाके हुए और सारे बदन पर रोएँ खड़े हो गए। जब उसका ऑर्गेज्म शांत हुआ तब मैं उठा।
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अंकिता को ठीक से लेटाया। मैं उसकी जाँघों के बीच आ गया। मैंने भोस टटोला तो उसने लौड़ा पकड़ कर भोस की ओर खींच लिया। उसने लौड़े का मठ्ठा क्लिटोरिस से रगड़ा। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने एक ही धके से सारा लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया।
अंकिता के मुँह से आह निकल गई। चूत में लौड़ा दबा के मैं रुका। लौड़ा झटके देने लगा जिसका जवाब चूत ने संकोचन कर के दिया। मैंने लौड़ा निकाला तो अंकिता ने मेरे चूतड़ पर हाथ रख कर मुझे अपनी ओर खींच लिया। लौड़ा फिर से चूत की गहराई में उतर गया।
हमें देख कर नितेश बोला, “शैलेश, डर ना मत। अंकिता दिखाती है इतनी नाजुक नहीं है। जोर से चोदना, वरना उसे संतोष नहीं होगा। क्यों अंकिता?” जवाब में अंकिता ने चूत सिकोड़ी और लौड़ा दबाया। मैंने कहा, “सुधा भी लौड़ा ले सकती है। तू भी उसे जोर से चोदना।”
मैंने धीमी गति से लंबे धक्के से अंकिता को चोदना शुरू किया। अकेला मठ्ठा चूत में रहे इतना लौड़ा मैं निकाल कर रुक जाता। चूत सिकोड़ कर अंकिता मठ्ठे को दबाती। लौड़ा झटका मारता और मैं एक धके से फिर लौड़ा चूत में पेल देता। ऐसा खेल हमने दस-पंद्रह बार खेला।
लौड़ा और भोस कामरस से तर-बतर हो गए। मैंने अंकिता से कहा, “तूने भी तेरी चूत का पानी चखा नहीं होगा। आ जा, चख ले।” गीला लौड़ा निकाल कर मैंने अंकिता के मुँह पर धर दिया। बड़े प्यार से उसने लौड़े का मठ्ठा चाटा और मुँह में ले चूसा। झर पड़ने के डर से मैंने लौड़ा खींच लिया और फिर से चूत में डाल दिया।
वो मुझे फ्रेंच किस करने लगी। मेरी मॉन्स उसकी मॉन्स के साथ ठुप-ठुप आवाज से टकराने लगी। मेरे बॉल्स उसकी गांड से टकराने लगे। अंकिता अपने हिप्स घुमा-घुमा के क्लिटोरिस को लौड़े के साथ घिसने लगी। मेरे मोटे लौड़े ने उसकी भोस की दरार पूरी चौड़ी कर रखी थी।
पलंग पर अब सुधा को नीचे लेटा कर नितेश ऊपर आ गया था। सुधा के घुटने कंधे तक उठाए हुए थे। नितेश का लौड़ा भी मेरे जैसा था और सुधा की चूत में आता-जाता दिखाई दे रहा था। बेरहमी से नितेश सुधा को जोर-जोर से चोद रहा था। उनको देख कर अंकिता और एक्साइट हो गई।
मुझसे लिपट गई और हिप्स हिला-हिला कर लौड़ा लेने लगी। मेरे धक्के की रफ्तार और गहराई बढ़ गए। उसकी चूत सिकुड़-सिकुड़ कर लौड़ा चूसने लगी। लौड़े का खुला मठ्ठा योनि की करकरी दीवारों से घिसता चला। ऐसे में अंकिता झर पड़ी। योनि के फटाकों से मेरा लौड़ा भी एक्साइट हो गया और मैं जोर से झरा। हमारा ऑर्गेज्म तीस सेकंड चला।
नितेश अब तेजी से सुधा को चोद रहा था। जोर से चिल्लाते हुए सुधा झरी और उसके साथ नितेश भी झरा। थोड़ी देर तक मैं और नितेश लड़कियों पर यूँ ही पड़े रहे। जब हम उतरे तब हमारे लौड़े आधे खड़े थे। लड़कियाँ बैठ गईं और अपनी-अपनी भोस पोंछ-सफाई करने लगीं।
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हमारे लौड़े को देख सुधा बोली, “क्या बात है? अभी आपके लौड़े तने हुए हैं, झुके नहीं।” नितेश ने कहा, “तुम दोनों की चूत ऐसी रसीली है कि लौड़े को तृप्ति नहीं होती।” सुधा बोली, “क्या करेंगे इसका, अंकिता?” अंकिता बोली, “हम इसे मुँह का स्वाद चखाएँगे, लेकिन फिर अदला-बदली कर के।”
नितेश बोला, “मुँह का तो चखा है। गांड कैसी रहेगी शैलेश?” दोनों लड़कियाँ खुश हो गईं। अंकिता बोली, “लेकिन भैया, धीरे से मारना।” मैंने कहा, “घबराओ मत। हम टेक्निक जानते हैं। धीरे से मारेंगे। चलो, मेरे साथ कौन आती है?” बिना कुछ बोले सुधा मेरे पास आ गई।
अंकिता क्रीम की ट्यूब और कंडोम ले आई और नितेश के पास चली गई। दोनों चार पाँव खड़ी हो गईं। मैंने सुधा की गांड पर ढेर सारा क्रीम डाला। हल्का दबाव से एक उंगली गांड में डाली। धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर के और गोल घुमा के गांड के स्नायु को नर्म किया। थोड़ी देर में दो और बाद में तीन उँगलियाँ गांड में आती-जाती हो गईं। मैंने पूछा, “दर्द होता है सुधा?”
“अजीब किस्म का मजा आ रहा है भैया। मेरी बात मानोगे?”
“क्या?”
“जब मैं लौड़ा लेने को तैयार हो जाऊँ तब आप नितेश को…?”
“अंकिता का क्या खयाल है नितेश?”
“मैं भी वही चाहती हूँ।” अंकिता बोली। “थोड़ी देर तक मारने के बाद अदला-बदली करेंगे” नितेश ने कहा।
हम दोनों ने कुछ देर तक सिर्फ उँगलियों से उन लड़कियों की गांड मारी। जब गांड पूरी रिलैक्स हो गई तब हमने कंडोम पहन के उँगलियों की जगह लौड़ा डाले और आहिस्ता-आहिस्ता उन दोनों की गांड मारी। जब लौड़ा आसानी से आने-जाने लगा तब हमने पोजीशन बदली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं अंकिता के पीछे आ गया। आगे झुकी हुई अंकिता ने अपने चूतड़ चौड़े कर रखे थे। मैंने लौड़े पर क्रीम लगाया और लौड़ा गांड पर टिकाया। हल्का दबाव से मैंने लौड़ा अंकिता की गांड में डाला। अपनी बहन की गांड खोलने में नितेश ने अच्छा काम किया था। बिना कोई मुश्किल सारा लौड़ा गांड में उतर गया।
मैंने अंकिता से पूछा, “दर्द होता है?” सर हिला के उसने ना बोला। गांड को मेरे मोटे लौड़े से परिचित होने तक मैं रुका। दोस्तों, गांड में लौड़े का अनुभव कोई अजब किस्म का है। जिसने आजमाया न हो इसे ठीक से बताना मुश्किल है। अंकिता की गांड के स्नायु ने मेरा लौड़ा जकड़ रखा था और संकोचन कर के और ज्यादा पिस डालते थे।
आखिर मैंने धक्के लगाने शुरू किए। टाइट पकड़े हुए लौड़े को आहिस्ता-आहिस्ता निकालना-डालना पड़ा। जैसे-जैसे चुदाई चलती रही वैसे-वैसे गांड नर्म होती चली। पंद्रह-बीस धक्के बाद गांड चूत जैसी चौड़ी हो गई। अब मैं तेजी से गांड मारने लगा। आगे झुक कर क्लिटोरिस को भी टटोलने लगा।
करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद अंकिता झरी। गांड में फट-फट-फट फटाके हुए। मुझे लगा कि आज मेरा लौड़ा टूट के गिर पड़ेगा। अंकिता के साथ मैं भी झरा। नर्म होते लौड़े को मैंने निकाला और अंकिता थक से मुँह के बल लेट गई। नितेश अभी सुधा की गांड मार रहा था।
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सुधा मुँह से आह्ह… आह्ह कर रही थी। नितेश के जोरदार धक्के से सुधा के लटके हुए स्तन झूल जाते थे। “कैसी है सुधा की गांड?” मैंने पूछा। “एक दम टना-टन,” कहते नितेश धक्का लगाने में जुट गया। नजदीक जा कर देखा तब पता चला कि नितेश का लौड़ा कैसा था। उसके लौड़े का मूल डंडी से ज्यादा मोटा था। इसी लिए जब लौड़ा पूरा गांड में उतर जाता था तब गांड ज्यादा चौड़ी होती थी। चूत का भी यही हाल होता होगा। जो कुछ हो, सुधा आनंद से लौड़ा लिए जा रही थी। थोड़ी ही देर में वो दोनों एक साथ झरे।
नितेश ने लौड़ा निकाला और सुधा लेट गई। हम सब ने सफाई कर के कपड़े पहन लिए और चाय-नाश्ता किया। सुधा बोली, “अब बताइए नितेश भैया, अंकिता को आपने किस हालात में चोदा था।” नितेश ने कहा, “मेरे बजाय अंकिता खुद बताएगी, ये अच्छा रहेगा।” सुधा बोली, “नहीं नितेश, आप ही बताएँ। हो सकता है कि शर्म की मारी अंकिता कोई रसीला हिस्सा छोड़ भी दे।” नितेश ने कहा, “अच्छा, तो बात ये हुई कि…” नितेश ने जो कहानी सुनाई वो आप अगले हफ्ते में पढ़ सकेंगे।
Raj says
Jis ladki horney hai 8598839589 pe msg kare full enjoy..