First Sex Encounter
मेरा नाम अभय है। मैं 26 साल का जवान हूँ, कद 5’8” और बॉडी एथलेटिक। आजकल मैं एमबीए कर रहा हूँ। अपनी प्यारी दिल्ली का रहने वाला हूँ। पढ़ाई और काम के सिलसिले में अपने देश की 50 से ज़्यादा शहर घूम चुका हूँ, पर देश से बाहर घूमने का मौक़ा अभी तक नहीं मिला। ये अपना पहला सेक्स एक्सपीरियन्स आप सबसे शेयर कर रहा हूँ। First Sex Encounter
अगर मुझे आपने पसंद किया और अच्छा रिस्पॉन्स दिया तो अपने बाक़ी सारे सेक्सपीरियन्स भी शेयर करूँगा आप सबसे। मैं हैंडसम और इंटेलिजेंट तो हूँ पर कोई मॉडल या हीरो की तरह नहीं हूँ, सिर्फ़ एक आम लड़का हूँ जिसके दिल में दूसरों के लिए हमेशा इज़्ज़त ही रहती है।
मैं कभी किसी का बुरा नहीं चाहता और न बुरा करता हूँ। सॉफ़्टवेयर इंजीनियरिंग कर चुका हूँ और हॉबी के तौर पर कंप्यूटर कोर्स पढ़ाता भी हूँ। इसके अलावा स्कूल और कॉलेज के कुछ सब्जेक्ट्स भी पढ़ाता रहता हूँ बच्चों को। पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और पब्लिक स्पीकिंग की ट्रेनिंग भी देता हूँ इंस्टीट्यूट्स में। बस ऐसे ही थोड़ी इनकम आ जाती है।
मैं एकदम फ़िट रहता हूँ क्योंकि स्कूल और कॉलेज में स्पोर्ट्स में पार्टिसिपेट करता था, इसलिए एकदम एथलेटिक बॉडी है मेरी। मेरा लंड भी कोई इतना बड़ा नहीं है कि मैं ज़ोर-ज़ोर से बोलूँ कि 9 इंच का है, इतना मोटा है वग़ैरह। लेकिन मेरा लंड इतना बड़ा ज़रूर है कि एक लड़की के हाथ की उँगलियों की टिप से लेकर उसकी कलाई तक की लंबाई मेरे लंड से थोड़ी कम ही होती है, यानी मेरा लंड उनके हाथ की लंबाई से थोड़ा बड़ा है।
लेकिन लंड का साइज़ तो बाद में आता है। उससे पहले आता है आपका बिहेवियर, प्यार, रिस्पेक्ट, जुनून, जो आप लड़की को देते हो क्योंकि लड़की पहले प्यार चाहती है, रिस्पेक्ट चाहती है, फिर सेक्स चाहती है। लड़की के लिए सेक्स लास्ट में आता है लेकिन हम लड़के साले सेक्स को फ़र्स्ट प्रायोरिटी देते हैं जो कि ग़लत है।
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थोड़ा ज़्यादा बोर कर रहा हूँ ना? असल में हमारी वासना पर ये मेरी पहली स्टोरी है तो फ़िलॉसफ़ी झाड़ रहा हूँ। अगली स्टोरी में नहीं करूँगा। हा हा। उस वक़्त मैं कॉलेज पढ़ता था और साथ ही कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में टीचिंग भी करता था। मेरे साथ 4 टीचर्स और थे। 3 टीचर्स तो सीनियर थे जिनसे मैं भी पढ़ा था बतौर स्टूडेंट उसी इंस्टीट्यूट में।
मेरे ही बैच की एक लड़की को भी मेरे साथ जॉब मिली थी टीचर की, उसका नाम था सोनम (नाम बदला हुआ क्योंकि अब उसकी शादी हो चुकी है और उसके दो प्यारे बच्चे भी हैं, तो उसकी आइडेंटिटी को सीक्रेट रखना मेरा फ़र्ज़ है)। सोनम एकदम सिम्पल लड़की थी, दुबली-पतली, सिम्पल फ़ीचर्स।
ब्रेस्ट भी बहुत क्यूट, छोटे सेब जैसे और एकदम टाइट हिप्स। हाइट होगी उसकी कोई 5’5”। बहुत इंटेलिजेंट थी और मेरे साथ ही बैठती थी कंप्यूटर पर प्रैक्टिस करते हुए। जब हम पढ़ते थे तो मेरी उससे दोस्ती हो गई। हम दोनों की उम्र लगभग 19 साल थी उस वक़्त।
हमारे बैच में सोनम के सबसे ज़्यादा मार्क्स आए थे और मेरे सेकंड हाइएस्ट। अब जॉब पर हम दोनों को रिस्पॉन्सिबिलिटी मिली थी हमारी प्रिंसिपल मैम से कि ‘पेजमेकर’, ‘कोरल ड्रॉ’ और ‘वेंचुरा’ सब्जेक्ट्स के नए कोर्स डिज़ाइन करो। सीनियर टीचर्स को दूसरे सॉफ़्टवेयर के कोर्स दिए थे और हम दोनों को इन तीन सॉफ़्टवेयर के।
उन दिनों मैं जेटकिंग इंस्टीट्यूट से हार्डवेयर इंजीनियरिंग भी कर रहा था तो जेटकिंग में सुबह 7 बजे जाता था क्लास के लिए। तो इन नए कोर्स को डिज़ाइन करने के लिए अपनी प्रिंसिपल मैम से रिक्वेस्ट करके मैंने मॉर्निंग 9 बजे का टाइम करवा लिया ताकि जेटकिंग से सीधा अपने इंस्टीट्यूट आ जाऊँ और कोर्स डिज़ाइन करूँ।
ईवनिंग में तो क्लासेस लेनी होती थीं इसलिए मॉर्निंग का टाइम ही सूट करता था। उसे पटाने के लिए मैंने उसे भी रिक्वेस्ट की तो थोड़ी आना-कानी के बाद वो भी मान गई मॉर्निंग में आने के लिए। अब रोज़ हम दोनों इंस्टीट्यूट में बैठकर डिज़ाइन करते थे नए कोर्स।
मज़ेदार बात ये थी कि मॉर्निंग में बाक़ी टीचर्स 10 बजे आते थे। वॉचमैन बिल्डिंग के ऊपर ही रहता था तो 9 बजे इंस्टीट्यूट खोलकर ऊपर चला जाता था और हम अंदर कंप्यूटर रूम में बैठकर अपना काम करते थे। तब तक मैं बहुत कन्फ़्यूज़्ड था कि स्टेप आगे कैसे लूँ क्योंकि वो बहुत सिम्पल लड़की थी।
कहीं उसे शॉक न लग जाए और इंस्टीट्यूट आना ही न बंद कर दे। बहुत फट रही थी मेरी। एक दिन अचानक मौक़ा बन गया अपने आप। असल में हम पुरानी कोर्स की बुक्स को भी रेफ़र करते रहते थे तो एक दिन जब हम काम कर रहे थे तो उसने पुरानी बुक अपनी गोद में रखी हुई थी।
वो मेरे लेफ़्ट में बैठी थी। बुक से कुछ देखते हुए मैंने बुक पकड़ी अपने लेफ़्ट हैंड से तो मेरे हाथ का पिछला हिस्सा उसकी जाँघों पर टच हो गया। बाप रे बाप, क्या ज़बरदस्त करंट दौड़ गया मेरी बॉडी में। यार लाइफ़ में पहली बार किसी लड़की को टच किया था। एक सेकंड में ही मैंने हाथ हटा लिया।
उसने शायद ग़ौर नहीं किया था, वो नॉर्मली कंप्यूटर पर टाइपिंग कर रही थी। बस मुझे रास्ता मिल गया कि कैसे उसे पटाना है। अब रोज़ ही मैं बुक से कुछ देखने के बहाने से अपना हाथ उसकी जाँघों पर टच करता रहता था और हाथ बुक से हटाता ही नहीं था।
कुछ दिन में वो समझ गई कि मैं क्या करता रहता हूँ तो उसने बुक अपनी गोद में रखनी छोड़ दी। करीब 15 दिन तक मुझसे ढंग से बात भी नहीं की। लेकिन शुक्र है कि उसने प्रिंसिपल मैम को कोई शिकायत नहीं की। धीरे-धीरे फिर सब नॉर्मल हुआ तो मैंने उससे अच्छे से बात करनी शुरू कर दी।
8-10 दिन के बाद मॉर्निंग में जब हम कोर्स डिज़ाइन कर रहे थे तो उसने मुझसे पूछा कि, “आप बुक पकड़ के क्यों बैठते थे जब बुक मेरी गोद में होती थी?”
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हीईई, उसके इस सवाल और उसके मासूम चेहरे पर मरने का मन किया उस टाइम। कितनी क्यूट लग रही थी जैसे उसे दुनिया का पता ही नहीं हो। मैंने बहुत दिल से उसे जवाब दिया, “सोनम, आई एम सॉरी अगर आपको बुरा लगा पर आप मुझे बहुत अच्छे लगते हो और सच्ची बोलूँगा कि आपको टच करने के लिए ही मैं बुक पकड़ने का बहाना करता था। आई एम सॉरी प्लीज़। आगे से नहीं करूँगा लेकिन आप प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत होना और बात करनी मत बंद करना प्लीज़।”
बहुत दुख हो रहा था मुझे कि उस मासूम सी लड़की को मैंने इमोशनली हर्ट किया। और आप यक़ीन नहीं मानोगे कि उसने क्या जवाब दिया। मैं सोच भी नहीं सकता था उस टाइम ऐसा जवाब मिलेगा।
उसने कहा कि, “मुझे सच में बहुत बुरा लगा था जब ये रियलाइज़ हुआ कि आप मुझे ऐसे टच करते रहे। कुछ दिन तो इतना ग़ुस्सा आता रहा आप पर। मैंने अपनी फ़्रेंड से भी डिस्कस की बात तो उसने हँसते हुए सिर्फ़ इतना कहा कि मेरी लाइफ़ है तो डिसीज़न भी मुझे ही लेना है। मैंने बहुत दिन सोचा और फिर यही फ़ील किया कि आप मुझे भी बहुत अच्छे लगते हो इसलिए बतौर फ़्रेंड मैं आपके साथ रहना चाहती हूँ पर ये टच या और कुछ प्लीज़ मत करा करो।”
एक तरफ़ मैं ख़ुश हो रहा था कि वो मुझे लाइक करती है और दूसरी तरफ़ दिल टूट गया कि उसने स्ट्रिक्टली मना किया है टच तक करने से। पर मैंने हिम्मत नहीं हारी क्योंकि हर शरीफ़ लड़की पहली बार में इन चीज़ों से इंकार ही करती है। अब मैंने उससे बहुत बातें करना शुरू कर दिया, ख़ूब हँसाता था उसको, ख़ूब मज़ाक़ करता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कोर्स डिज़ाइन करने में भी ख़ूब मन लगाता था जिससे वो बहुत इम्प्रेस होती थी। लेकिन ये बात भी सच है कि कभी भी उसका नुकसान करने की कोई फ़ीलिंग नहीं आई मेरे मन में। मैं चाहता था उसके क़रीब आना, उसको प्यार करना, उसके साथ मस्ती करना पर कभी उसकी फ़ीलिंग्स को हर्ट नहीं करना चाहता था इसलिए वेट करता रहा मैं।
करीब एक महीने में वो बहुत फ़्रैंक हो गई मुझसे। अपने घर की बातें भी डिस्कस कर लेती थी मुझसे और मैं उससे उसके ड्रीम्स, उसका ड्रीम मैन, उसके प्यार के सपने पूछता रहता था। यार मेरी मंज़िल जो थी, उसकी तरफ़ तो यही सवाल पहुँचा सकते थे ना?
वो भी बहुत मासूमियत से जवाब देती थी और कई बार शर्मा के डाँट देती थी और उसका फ़ेस इतना क्यूट लगता था। आँखों में शर्म आ जाती थी। अब एक महीना हो चुका था तो मैंने सोचा कि यार बिना टच किए तो अगला स्टेप ले नहीं पाऊँगा। टच तो करना ही पड़ेगा। क्या किया जाए?
मुझे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था तो मैंने सोचा कि एक बार फिर से रिस्क लिया जाए। उसी स्टाइल में उसकी जाँघों को फिर से टच करूँगा लेकिन इस बार बहुत ध्यान से करना पड़ेगा ताकि उसे ये न लगे कि मैं फिर से जानबूझकर टच कर रहा हूँ।
इस बार एक आइडिया आया मेरे माइंड में। (थोड़ा इंटेलिजेंट तो हूँ यार! हा हा) मैंने क्या किया, इस बार बुक अपनी गोद में रखनी शुरू कर दी और कंप्यूटर पर टाइपिंग करते हुए उससे पूछता रहता था कि बुक में अब क्या लिखा है, अब कौन सी लाइन है वग़ैरह।
पुरानी कोर्स बुक थोड़ी बड़े साइज़ की थी तो मैंने उसे अपनी एक्सट्रीम राइट साइड में खिसका दी ताकि अगर बुक के राइट वाले पेज से कुछ पढ़ना हो तो उसको आगे झुकना पड़े या बुक पकड़नी पड़े। और वही हुआ। मैंने उसको एक-दो जोक सुनाए और उसका मूड अच्छा किया फिर अचानक मैंने उससे बुक से कुछ देखने को बोला।
हँसते-हँसते वो बुक में से टॉपिक ढूँढने लगी और उसने बुक पकड़ के अपने पास खींचनी चाही। बस जैसे ही उसने बुक पकड़ी और उसके हाथ का पिछला हिस्सा मेरी जाँघों पर लगा, उसी वक़्त मैंने भी बहाने से बुक से वही टॉपिक पढ़ना शुरू कर दिया जैसे उससे डिस्कस कर रहा हूँ।
वो भी मेरे क्वेश्चन्स का जवाब देने लगी पर उसे ये ध्यान नहीं आया कि उसका हाथ मेरी जाँघों पर टच कर रहा है। 1-2 मिनट ही ऐसी फ़ालतू की डिस्कशन चल सकती थी, मानते हो ना आप? इसलिए मैंने एक्टिंग की और एकदम से चिल्ला पड़ा। हा हा हा।
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वो बहुत डर गई कि मैं चिल्लाया क्यों।
मैंने उसे ज़ोर से बोला (सिर्फ़ एक्टिंग करते हुए) कि “ही राम, मेरी इज़्ज़त पर हाथ डाला तुमने, मेरी मान-मर्यादा को ठेस पहुँचाई तुमने, ये क्या कर डाला, मेरी नाज़ुक जाँघों को टच कर दिया, ही अब तो मैं कहीं मुँह दिखाने के क़ाबिल नहीं रहा। अब मेरा क्या होगा? मैं क्या करूँ?”
पहले तो वो बेचारी बहुत डर गई 4-5 सेकंड के लिए लेकिन मेरे डायलॉग सुनके समझ गई कि मैं उसे हँसाने के लिए ड्रामा कर रहा हूँ और वो ये भी समझ गई कि उसका हाथ मेरी जाँघों पर था। बस वो खिल-खिलाकर बहुत हँसने लगी। हँसते-हँसते उसकी आँखों से आँसू आ गए और मैं भी बहुत हँस रहा था क्योंकि लाइफ़ में पहली बार इतने इमोशनल डायलॉग बोले थे।
जब कुछ देर बाद हँसी कंट्रोल हुई तो फिर एक साथ बैठे लेकिन इस बार उसकी आँखों में इतनी प्यारी सी ख़ुशी थी और उसका फ़ेस रेड हो रहा था। मैं फिर से कंप्यूटर पर काम शुरू करने लगा तो मैंने धीरे से थोड़ा डर-डर के उससे पूछा, “सोनम, बुक मैं रख लूँ या…?” बस इतना ही बोला मैं।
उसने 1-2 सेकंड के लिए ग़ुस्से की एक्टिंग करते हुए मुझे घूरा फिर स्माइल करते हुए बुक अपनी गोद में रख ली। ओ माय गॉड! मैं तो बस फ़्रीज़ हो गया उसकी स्माइल पर। मतलब वो पट गई मुझसे। मेरे दिल में लड्डू फूट रहे थे। लेकिन फिर सोचा, बेटे सिर्फ़ बुक रखी है मेरा सिर नहीं रख लिया गोद में। इतना ख़ुश मत हो अभी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कंट्रोल किया अपनी फ़ीलिंग्स पर और फिर से थोड़ा डर के उससे पूछा, “सोनम, अगर मुझे कुछ देखना पड़ा बुक से और आपको टच हो गया मेरे हाथ तो?”
उसने फिर से मुझे 1-2 सेकंड देखा कन्फ़्यूज़्ड निगाहों से और फिर स्माइल करते हुए, नज़रें झुकाकर बोली, “आप प्लीज़ ज़्यादा टच मत करना।”
ओये बल्ले-बल्ले, लड़की पट गई। मेरी लाइफ़ की पहली लड़की जिसे मेरे दिल ने पसंद किया वही पट गई। हर एक के साथ ऐसा नहीं होता यार। इतना लकी फ़ील कर रहा था मैं। मैंने स्माइल करते हुए धीरे से डरते-डरते अपने लेफ़्ट हैंड की इंडेक्स फ़िंगर से उसके राइट गाल को टच किया हल्के से।
उसके मुँह से ठंडी आह निकल गई, उसने हाथों से बुक को कस के पकड़ लिया। यार हम दोनों की लाइफ़ का ये पहला टच था। मैंने 2-3 बार उसके गाल पर उँगली फेरी और उसके कान के ऊपर और कान के पीछे से होते हुए उसकी नेक तक लाया उँगली।
उसने अपनी आँखें कस के बंद कर लीं। मुँह से आहें निकलने लगीं उसके और बुक के पेज जो पकड़े थे लगभग फाड़ दिए उसने। मैंने सोचा कि यार इससे आगे नहीं जाता हूँ, कहीं बुरा न मान जाए। तब ही अंदर से आवाज़ आई, “अबे घोंचू, अगर उसे बुरा लगेगा तो ख़ुद ही रोक देगी। तू लगा रह। ये मौक़ा दुबारा नहीं मिलेगा।” बात भी सही थी, उसके एक्सप्रेशन्स बता रहे थे कि वो तैयार है इस एक्सपीरियन्स के लिए।
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(ये उसने मुझे बाद में बताया कि जिस सहेली से उसने मेरी बात डिस्कस की थी, उसी सहेली ने अपना एक्सपीरियन्स सोनम को डिटेल में बताया था पहली मुलाक़ात से पहले सेक्स तक का, जिससे सोनम के दिल में भी करंट आ गया था और इसी वजह से वो न ख़ुद को रोक पाई और न मुझे। यार थैंक्स करना चाहिए ना इन अच्छी फ़्रेंड्स का जो अपना एक्सपीरियन्स शेयर करके लड़की के मन से डर निकाल देती हैं या बहुत कम कर देती हैं और एक्साइटमेंट भर देती हैं। मेनी मेनी थैंक्स टु यू ऑल फ़्रेंड्स!)
बस फिर क्या था दोस्तों, मैंने रुकना मुनासिब नहीं समझा और अपने टच का जादू उस पर चलाने लगा। उसे पता भी नहीं था कि अब तक उसकी गोद में रखी फ़ाइल नीचे गिर चुकी है और उसके हाथ अपने ही सूट को कुचल रहे हैं। अब मैंने लेफ़्ट हैंड से उसके राइट कान और नेक के ऊपर हाथ फेरना चालू रखा और अपने राइट हैंड से उसके लेफ़्ट गाल को टच किया।
इस दो तरफ़ा अटैक से वो अपनी चेयर से जैसे उछल पड़ी। उसका फ़ेस एकदम लाल हो गया, साँसें तेज़-तेज़ चलने लगीं और उसने अपना फ़ेस टेरेस की तरफ़ उठा लिया, आँखें कस के बंद की हुई थीं उसने। मैंने राइट हैंड से भी उसके गालों को, ईयर्स को, नेक को टच करना शुरू किया और 5 मिनट तक करता रहा।
मारे एक्साइटमेंट के वो अपना सिर इधर-उधर पटक रही थी और मुँह से सिसकारियाँ निकाल रही थी। असल बात तो ये थी कि उसे भी नहीं पता था कि इस सिचुएशन में क्या करते हैं? मैं अब उठा और उसकी चेयर के पीछे आ गया। अपने हाथ हटाए नहीं बल्कि चेयर के पीछे आते-आते उनकी पोज़िशन चेंज कर दी।
अब लेफ़्ट हैंड उसकी नेक के पीछे से होता हुआ उसके लेफ़्ट गाल पर आ गया और राइट हैंड आगे से होता हुआ उसके राइट गाल पर आ गया। मैंने थोड़ा तेज़ कर दिया हाथ फिराना, वो पागल सी हो गई। उसका चेहरा उगते सूरज की तरह लाल सा हो गया।
मैंने अब दोनों हाथ उसके कंधे पर भी फेरने शुरू कर दिए। 3-4 बार फेरने के बाद हल्के हाथों से उसका पल्लू दोनों तरफ़ से नीचे गिरा दिया। वो तो बेहोश सी थी, उसे नहीं पता था क्या हो रहा है उसको। मदहोश सी बैठी थी और आहें ले रही थी। मैंने अपनी फ़िंगर्स उसके कंधे पर उसके सूट के अंदर डालने लगा और फटाफट निकाल लेता था ताकि वो वापस रियैलिटी में न आ जाए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
4-5 बार ऐसा करने के बाद मैंने अपनी फ़िंगर्स अंदर ही फिरानी शुरू की। उसकी ब्रा की स्ट्रैप के ऊपर से और आगे तक गया। राइट हैंड उसके गाल और आँखों पर लाया और लेफ़्ट हैंड से हल्के से उसका सूट कंधे से नीचे सरका दिया। हे भगवान, मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गईं।
लाइफ़ में पहली बार ये सब देख और कर रहा था। इतने क़रीब से एक लड़की का बदन पहली बार देखा था। मैंने अब तक अपने लंड का तो बताया नहीं कि क्या हाल हो चुका था। शायद पानी भी निकल चुका था एक्साइटमेंट के मारे। उसकी ब्रा की स्ट्रैप चिपकी हुई थी कंधे से।
अब मैं नीचे झुका और अपनी लाइफ़ की पहली किस करी, उसके सुनहरे कंधे पर, फिर उसकी गर्दन पर, उसके कान पर, उसके कान के पीछे। बस अब मैं पागल हो गया और उसको भी पागल कर दिया मैंने। मैंने उसके गर्दन से उसके गाल तक 10 किसेस कीं और उसकी आँखें, माथे और फिर से नेक पर चूमने के बाद धीरे से उसके लिप्स तक आया।
उसकी साँसों की गर्मी सही नहीं जा रही थी। उसका बदन ऐसे तप रहा था जैसे उसे बुख़ार हो गया हो। मैंने धीरे से अपने लिप्स उसके लिप्स पर रखे। वो मछली की तरह तड़प गई और उसकी साँस रुक सी गई। मैंने उसके नेक पर हाथ फेरना फिर से शुरू कर दिया और कुछ सेकंड्स के बाद वो थोड़ी नॉर्मल हुई।
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अब तक हमारे लिप्स सिर्फ़ चिपके हुए थे, उनमें कोई हरकत नहीं हुई थी। दोनों नए थे, अनाड़ी थे यार। अब मैंने उसके अपर लिप को अपने लिप्स से पकड़ना शुरू किया और धीरे-धीरे सक करना शुरू किया। 5-6 बार ऐसा करने पर उसके लिप्स थोड़े से खुले, बस यही सिग्नल था, मैंने झट से उसके अपर लिप को पूरा मुँह में लिया और हल्के से सक करना शुरू किया।
मेरे हाथ काँप रहे थे पूरे टाइम। लेकिन ये लिप किस करते ही जैसे उसमें और मुझमें जान आ गई, दोनों में एक नई प्यार की लहर आ गई। पहली बार उसकी बॉडी में कोई हरकत हुई। उसके हाथ ऊपर उठे और मेरे फ़ेस पर आए। वो मेरे फ़ेस, नेक, शोल्डर्स और चेस्ट पर तेज़-तेज़ हाथ फेरने लगी।
मेरी चेस्ट पर इतने ज़ोर के नोचा उसने कि जैसे चीर देगी मेरी चेस्ट को वो। अब हमारी किसेस स्मूच में बदल गईं। हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे। कभी ऊपर का तो कभी नीचे का। मैंने उसे कंधों से पकड़ के खड़ा कर दिया। और उसकी कमर में से हाथ डाल के उसे अपनी बाहों में भर लिया।
उसने कोई ऑब्जेक्शन नहीं किया और न ही किस करना बंद किया। उसके हाथ मेरी नेक और सिर पर घूम रहे थे। करीब 10 मिनट तक हमने ये अपनी लाइफ़ की फ़र्स्ट किस एंजॉय की। आँखें बंद और दुनिया का कोई पता नहीं चला हमको। जब आँखें खोलीं तो 1 मिनट तक एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे, तेज़ साँस लेते हुए। हाथ अपना काम कर रहे थे दोनों के।
अब दुबारा मैं उसके होंठों को चूसने के लिए झुका तो उसने भी स्माइल की और मुझसे और कस के लिपट गई। अब मैंने उसकी कमर से अपना हाथ नीचे करना शुरू किया। धीरे से उसकी प्यारी, छोटी और टाइट गांड पर अपना हाथ लाकर रखा। मैं बता नहीं सकता कि उस टाइम क्या फ़ीलिंग थी। एकदम टाइट चूतड़ की मज़ा आ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब लेफ़्ट हैंड भी नीचे लाया और उसके चूतड़ दोनों हाथों से कस के दबाने लगा। उसने मेरे लिप्स और ज़ोर से चूसने शुरू कर दिए। थोड़ी देर उसके चूतड़ दबाने के बाद मैंने अपना राइट हैंड उसकी लेफ़्ट ब्रेस्ट की ओर बढ़ाना शुरू किया। वो मुझे रोकने की कोशिश करने तो लगी पर सिर्फ़ मुँह से उम्म्ह आँह ही कर पाई।
उसके हाथों में वो ताक़त नहीं थी जो कि ग़ुस्से के वक़्त होती है रोकने के लिए। हल्का सा ज़ोर लगाया मैंने तो उसकी पकड़ से मेरी कलाई निकल गई और मैंने अपनी लाइफ़ का पहला ब्रेस्ट टच एक्सपीरियन्स किया। बेहनचोद, मैं तो मर ही गया उस टाइम।
इतने सॉफ़्ट, एकदम सिल्क के जैसे मुलायम और छोटे सेब के साइज़ के चूचे थे उसके। उसके निप्पल एकदम टाइट होके बाहर निकल रहे थे। मैंने जैसे ही निप्पल टच किया, वो ज़मीन से उछल पड़ी। मैंने धीरे-धीरे उसके लेफ़्ट चूचे को दबाने लगा। वो पागल से और पागल हो गई।
पागलों की तरह मेरे लिप्स, गाल, नेक, माथे, ईयर्स पर चूमने लगी और मुँह से आवाज़ें निकालने लगी। उहम्म्म… आआह्हा… ओउच्… अभय प्लीज़, मत करो प्लीज़… आह्ह्ह… उहम्म्… छोड़ दो प्लीज़, ये क्या कर रहे हो हाआआ… ओउच् ओउच्… ही राम, मर गई… उहम्म्…
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लेकिन मैं कहाँ छोड़ने वाला था क्योंकि मुझे पता था कि वो ये सब एंजॉय कर रही है और वैसे भी अपनी लाइफ़ का पहला एक्सपेरिमेंट था ये। इसमें अच्छे मार्क्स लाने ही थे तब ही तो आगे पीएचडी कर सकता था सेक्स की गेम में। हा हा। अपने लेफ़्ट हाथ को उसके चूतड़ों पर फिरा रहा था।
अब अपनी मिडिल फ़िंगर मैंने उसकी गांड पर लगानी शुरू की और प्रेशर तेज़ करने लगा। पहले टच किया और फिर ज़ोर-ज़ोर से उँगली उसकी गांड के छेद में दबाने लगा जैसे अंदर डालना चाहता हूँ। वो छटपटा रही थी, आहें भर रही थी और बेतहाशा मुझे चूमे जा रही थी।
मेरी उँगली सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड के छेद में थोड़ी सी घुस रही थी और मैं उसको अंदर-बाहर किए जा रहा था। वो बावली सी हो गई। मैंने अब उसको चूमना शुरू किया। उसकी गर्दन पर बहुत सारी किसेस कीं और फिर नीचे झुका उन छोटे-छोटे सेबों की तरफ़।
उसका हाथ मेरे सिर पर था और उसने कोई ऑब्जेक्शन नहीं किया बल्कि मेरे बालों में हाथ फेरती रही और उसको लेफ़्ट हैंड मेरी कमर में था। मैंने उसकी लेफ़्ट चूची को ही निशाना बनाया और उसके सूट के ऊपर से ही हल्के से किस किया। उसकी बॉडी एकदम तन गई। सिर हवा में फेंक दिया उसने और मेरे सिर के बालों को नोच लिया।
मैंने अब किसेस करनी शुरू कर दीं उसके चूचे पर। 10-15 किसेस ऊपर-नीचे करने के बाद मैंने अपने होंठों से बड़ा सा ‘ओ’ बनाते हुए उसके निप्पल को अपने लिप्स में पकड़ लिया। उसके मुँह से चीख़ ही निकल गई। उई माँ! आह्ह्ह… आह्ह्ह… नहीं प्लीज़, नहीं प्लीज़, आह्ह्ह… क्या कर रहे हो अभय? आह्ह्ह्ह…
मैंने अपने लिप्स का प्रेशर थोड़ा बढ़ा दिया उसके निप्पल पर और फिर मैंने उसके राइट निप्पल को भी ऐसे ही मुँह में लिया। अब उसके दोनों चूचों पर बेतहाशा किसेस करने लगा और लेफ़्ट हैंड वही उसकी गांड के छेद को खोल रहा था। मैं एक चूची को मुँह में लेता तो दूसरी चूची को राइट हैंड से दबाता रहता।
मैंने जी भर के उसकी चूचियों को चूसा और उसका सूट सारा गीला हो गया दोनों चूचियों के ऊपर से। अब लेफ़्ट हैंड को उसकी गांड से हटाके उसकी कमर में लगा लिया और अपने राइट हैंड को उसके चूची से खिसकाके नीचे करने लगा।
(आप भी कहोगे कि एक तरफ़ तो मैंने बताया कि ये मेरा पहला सेक्स एक्सपीरियन्स था, दूसरी तरफ़ मैं उसको एक एक्सपर्ट की तरह लव कर रहा था? यार इसमें भी क्रेडिट जाता है फ़्रेंड्स को लेकिन इस बार मेरे फ़्रेंड्स को। असल में बारहवीं के लास्ट एग्ज़ाम वाले दिन एग्ज़ाम देकर मैं अपने फ़्रेंड के साथ उसके घर गया तो उसने मुझे मेरी लाइफ़ की पहली बीयर पिलवाई और एक ब्लू फ़िल्म भी दिखाई। शाम तक मैं उसके घर में ही पड़ा रहा क्योंकि दारू और ब्लू फ़िल्म का नशा चढ़ा रहा मेरे सिर पर! हा हा)।
ख़ैर वापस सेक्सपीरियन्स एंजॉय करते हैं। मैंने अपना हाथ पहले उसके पेट पर फिराया और फिर काँपते हुए मेरा हाथ उस ख़ज़ाने की तरफ़ बढ़ा जिसे आज तक सिर्फ़ हवा ने ही छुआ था। सलवार के ऊपर से ही मैंने उसकी चूत की तरफ़ बढ़ना शुरू किया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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धीरे-धीरे, सहमे-सहमे मेरा हाथ उसकी झाँटों तक पहुँचा और मैं उसके प्यूबिक हेयर्स फ़ील करने लगा। जन्नत था वो वक़्त हम दोनों के लिए। आज भी वो लम्हे याद करके लंड खड़ा हो गया है। उसकी झाँटों पर ज़्यादा नहीं रुका और अपनी असली मंज़िल पर तेज़ी से बढ़ा मेरा हाथ।
हल्के से उसकी टांगों के बीच मेरा हाथ पहुँच गया और मैंने उस ख़ज़ाने के दरवाज़े की गर्मी महसूस की। एक हल्की सी दरार जैसा फ़ील हुआ उस जगह। थोड़ा प्रेशर बढ़ाया और उस दरार के थोड़ा अंदर एक फ़िंगर फिराने लगा, ऊपर से नीचे और फिर वापस।
अंदर से उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और उसकी सलवार भी। उसने एक हाथ से मेरी कमर नोच ली और दूसरे हाथ से मेरे सिर के बाल नोच लिए। सिर हवा में फेंक दिया और मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। आआह्ह्ह्ह… ओओफ़्फ़्फ़… ओओउउच्च्ह्ह… मत करो प्लीज़ज़… मर जाऊँगी मैं अभय… छोड़ दो मुझे प्लीज़… आह्ह्ह… ओओह्ह्ह्ह… प्लीज़ मत करो। प्लीज़ मत करो।
मारे घबराहट के उसके आँसू निकल आए। मैंने झट से उसके फ़ेस पर किसेस करना शुरू कर दिया और उसके लिप्स पर भी किस करने लगा तो वो अपना मुँह इधर-उधर करने लगी और आवाज़ें निकालने लगी। मैंने जैसे ही अपनी फ़िंगर का प्रेशर थोड़ा और बढ़ाया उसकी चूत की एंट्रेंस पर तो मेरी फ़िंगर उसकी चूत के मुँह पर तिल भर अंदर टच हुई और बस उसकी बॉडी बहुत तेज़ काँपी और उसे ऑर्गेज़म आ गया।
एक ज़ोर की चीख़ मारके सोनम मेरी बाहों में ढलक गई। मैं भी इतना गर्म और मदहोश हो चुका था तब तक कि उसे संभाल नहीं पाया और हम दोनों ज़मीन पर गिर गए। मैंने उसे देखा तो वो तो बेहोश हो गई थी। यार मेरी तो फट गई। मेरे हाथ-पाँव फूल गए।
नज़र पड़ी टाइम पर तो 9:50 एएम हो गए थे और अगले 10 मिनट में कोई भी टीचर या स्टूडेंट इंस्टीट्यूट में एंटर हो सकता था। मैं आँखें फाड़े उसे देख रहा था और वो बेहोश पड़ी थी। मैं तेज़ी से भागा और बाहर एक कोने में किचन थी, वहाँ वॉटर कूलर रखा था, उससे एक ग्लास में थोड़ा सा ठंडा पानी लाया और उसके मुँह पर छींटने लगा।
करीब 2 मिनट के बाद उसके बदन में हलचल हुई और धीरे से उसने आँखें खोलीं। मेरी जान में जान आई। मैंने सहारा देकर उसको उठाया और चेयर पर बिठाया। वो बहुत तेज़ रोने लगी। यार इधर 10 बजने वाले थे और ये रो रही थी। मैंने बड़े प्यार से उसे समझाया और चुप कराया।
उसे यक़ीन दिलाया कि कभी भी उसकी इज़्ज़त पर आँच नहीं आएगी और वो बिल्कुल भी डर न महसूस करे। वो थोड़ा रिलैक्स हुई। मैंने उसे पानी पिलाया और उसके कपड़े, हेयर्स ठीक किए। हैंकी गीला करके उसका प्यारा सा फ़ेस साफ़ किया। उसकी आँखों में आँखें डालके उसको स्माइल करवाया और एक प्यारी सी हग की उसको।
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उसने भी मुझे कस के पकड़ लिया और फिर मैंने उसके लिप्स पर एक किस की। उसने भी रिप्लाई में मेरे लिप्स पर किस की। मैंने उससे कहा कि कभी सपने में भी ये ख़याल मत लाना कि आपकी रिस्पेक्ट मेरी नज़रों में कभी कम होगी या हमारे बीच का रिलेशन किसी को पता चलेगा। वो सिर्फ़ मुसकराई और हाँ में सिर हिला दिया। फिर उससे अलग होने से पहले मैंने हँसते हुए उससे कहा कि अगली बार अच्छी डाइट खाके आना घर से क्योंकि ‘फ़ुल प्रैक्टिकल’ करूँगा तो वो ज़ोर से हँसने लगी और चिढ़ाने लगी कि मैं नहीं करने दूँगी और कुछ।
और फिर हँसते-हँसते धीरे-धीरे चलते हुए दूसरे क्लास रूम में चली गई। हम फटाफट दोनों क्लासेस के कंप्यूटर्स स्विच ऑन करने लगे और अगले 5 मिनट में एक-एक करके टीचर्स और स्टूडेंट्स आने लगे। दोस्तों, अपनी लाइफ़ के इस पहले सेक्सपीरियन्स में मैंने सोनम से सेक्स नहीं किया लेकिन जो तड़प, आग और जुनून महसूस किया था वो अलग ही था इस दुनिया से। करीब एक महीने तक हम ऐसे ही रोज़ लव करते रहे मॉर्निंग में और फिर मैंने उसको पहली बार चोदा। वो एक्सपीरियन्स अगली बार।
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