Devar Bhabhi Gand Chudai Story
सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं सीधा किचन में गया क्योंकि भाभी ने मेरे रूम में चाय नहीं रखी थी। गुस्से में उठा और सीधा किचन की तरफ चला गया। दरवाज़ा खुला था… और वहाँ भाभी खड़ी थी, गैस पर चाय बना रही थी। साली ने गुलाबी रंग की पुरानी साड़ी पहनी थी जो पीछे से पूरी तरह चिपक गई थी… Devar Bhabhi Gand Chudai Story
और उसकी मोटी-मोटी गांड ऐसे उभर रही थी जैसे दो बड़े-बड़े आम रखे हों। उनकी उठी हुई गांड देखते ही मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा, मुँह सूख गया और अंदर ही अंदर बेचैनी शुरू हो गई। बिना कुछ सोचे किचन में घुस गया। भाभी को पता भी नहीं चला।
मैं सीधे पीछे से जाकर अपना हाथ उसकी गांड पर रख दिया… अरे वाह! कितनी गरम और मुलायम थी साली की गांड… हाथ अंदर तक धंस गया। भाभी एकदम से घबरा कर पीछे मुड़ी, “अरे… तू???” उसने आँखें बड़ी कर लीं, हाथ से मेरा हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन मैंने और ज़ोर से दबोच लिया।
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“छोड़ दे… कोई देख लेगा… तेरा भैया अभी-अभी बाहर गए हैं, अगर वापस आ गए तो दोनों को ही घर से निकाल देंगे।” लेकिन तब तक मेरा 7 इंच का लंड पैंट में बिल्कुल टाइट हो चुका था। मैंने पीछे से अपना खड़ा लंड उसकी गांड के बीच में सटाते हुए कहा, “भाभी… सिर्फ़ 10 मिनट… प्लीज़… आज सुबह से ही मन कर रहा है…”
और हाथ से उसकी साड़ी ऊपर उठाने लगा। साड़ी के नीचे कोई पैंटी नहीं थी! सिर्फ़ बिल्कुल नंगी, गोरी और गरम गांड… उफ्फ्फ़… क्या गर्माहट थी! भाभी सिसकी भरती हुई बोली, “पागल हो गया है क्या… दरवाज़ा तो खुला है… कोई आ जाएगा…”
मैंने उसके कान में धीरे से फूँक मारी और बोला, “तो जल्दी से पेटीकोट ऊपर कर लो ना भाभी… आज आपकी गांड मारने का मूड है, वरना पूरा दिन परेशान करूँगा…” तभी भैया के आने की आवाज़ सुनाई दी तो हम दोनों जल्दी से अलग हो गए और देखा कि भैया ने एक थैली पकड़ी हुई है जिसमें सब्ज़ी थी।
फिर भैया मुझे किचन में देखकर बोले, “क्या बात है आज सूरज पश्चिम से उग आया क्या? तुम किचन में कभी दिखाते नहीं इतनी सुबह में।” तो मैंने बोला, “भैया आज मुझे अपने दोस्तों के साथ टूर पर जाना है तो मैं आज जल्दी उठ गया और देखा कि मेरे रूम में चाय नहीं है, इसलिए मैं सीधे किचन में आ गया।”
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फिर भैया बोले, “यदि तुम रोज़ ऐसे ही सुबह उठते तो तुम्हारी भाभी तुम्हें खाना बनाना सिखा देती।” इस बात पर भाभी मुस्कुराईं और उनके गाल लाल हो गए। मैं हँसते हुए उन्हें ही देखता रहा। फिर भैया थैला वहीं रखकर आँगन में चले गए तो मैंने भाभी की कमर को अपनी तरफ़ खींचकर उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उनका पूरा शरीर मुझसे चिपक गया। उनके बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे, साँसें गरम-गरम मेरे गले पर लग रही थीं। मैंने उनकी गांड को दोनों हाथों से मसलते हुए कान में धीरे से बोला, “सुना भाभी, क्या कहा भैया ने?? ‘रोज़ सुबह उठा करो तो भाभी तुम्हें खाना बनाना सिखा देंगी…’ तो आज से रोज़ सुबह आऊँगा… और खाना नहीं, आपकी गांड खाने आऊँगा…”
भाभी ने शर्मा कर आँखें नीचे कर लीं, लेकिन गांड पीछे की तरफ़ थोड़ी सी और उठा दी… जैसे कह रही हों कि “ले, खा ले”। मैंने एक हाथ से उनकी साड़ी ऊपर उठा दी और पेटीकोट के अंदर हाथ डाल दिया। साली ने सच में पैंटी नहीं पहनी थी! बिल्कुल नंगी, गीली-गीली चूत पर हाथ लगा तो भाभी की साँस रुक गई।
मैंने उंगली से चूत के लिप्स को सहलाया और बोला, “वाह भाभी… सुबह-सुबह इतना पानी?? भैया के सामने तो डरती थीं… अभी तो खुद गीली हो रही हो…” भाभी ने सिसकते हुए कहा, “चुप कर हरामी… जल्दी कर… बस 5 मिनट हैं… चाय बनाते हुए…”
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मैंने सीधा पैंट की ज़िप खोली, अपना गरम लंड बाहर निकाला और उनकी गांड के बीच में सटाते हुए बोला, “5 मिनट में तो सिर्फ़ गांड मार सकता हूँ भाभी… चूत के लिए पूरा दिन चाहिए…” और एक ही झटके में पेटीकोट ऊपर उठाकर अपना लंड उनकी गीली चूत पर रगड़ने लगा… तो समय बर्बाद न करते हुए मैंने पहले भाभी की चूत मारने की सोची ताकि मेरा लंड गीला हो जाए।
चार-पाँच ज़ोर के शॉट मारे… चूत में पानी इतना था कि हर धक्के पर “फछ-फछ” की आवाज़ आ रही थी। मेरा लंड पूरा गीला हो गया, भाभी की चूत का रस उस पर लग गया। फिर मैंने लंड बाहर निकाला, भाभी ने पीछे मुड़कर पूछा, “क्या हुआ… क्यों निकाला??”
मैंने उनकी कमर दबाकर बोला, “भाभी थोड़ी और झुको ताकि मैं आपकी गांड मार सकूँ।” फिर भाभी ने वैसा ही किया। उसकी मोटी गांड एकदम ऊपर उठ गई, गांड का छेद बिल्कुल दिख रहा था। मैंने अपना लंड सीधा गांड के छेद पर रखकर ज़ोर से धक्का मारा… “आआआह्ह्ह… माँ… मर गई!!!”
भाभी के मुँह से चीख निकल गई, आँखों में आँसू आ गए थे उसके… लेकिन वो चुप रही क्योंकि आँगन में भैया अखबार पढ़ रहे थे। मैंने पहले धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया… पर जब पूरा अंदर तक घुस गया तो मुझे पता चल गया… भाभी सुबह से टट्टी नहीं की थी! गांड बिल्कुल टाइट थी… और अंदर से कुछ गरम-गरम प्रेशर फील हो रहा था।
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हर धक्के में भाभी की बॉडी एकदम से काँप जाती थी, उसका चेहरा दर्द से लाल हो गया था। मुझे देखकर मज़ा आ रहा था… एक तरफ भैया आँगन में बैठकर अखबार पढ़ रहे थे, दूसरी तरफ मैं उनकी बीवी की गांड फाड़ रहा था। मैंने ज़ोर-ज़ोर से ठोकना शुरू कर दिया… “फछ… फछ… फछ्ह्ह…” हर धक्के पर भाभी के मुँह से दबी हुई सिसकियाँ निकल रही थीं, “उह्ह्ह… उफ्फ्फ़… मर गई… धीरे हरामी… फट जाएगी…” मैंने उनके कान में फूँक मारते हुए बोला, “भाभी… आज सुबह टट्टी नहीं की ना??
इसलिए इतनी टाइट है गांड… इसी वजह से भाभी को नॉर्मल से ज़्यादा दर्द हो रहा था और वो चुपचाप दर्द सह रही थीं। अब तो रोज़ सुबह गांड मारूँगा… ताकि आपको टट्टी भी साफ हो जाए…” भाभी ने रोने वाली आवाज़ में कहा, “बस कर… बहुत दर्द हो रहा है… निकाल ले अब…” जब लंड निकाला तो गांड का छेद लाल हो गया था… भाभी काउंटर पर ही गिर पड़ीं, साँसें फूल रही थीं। मैंने पैंट ऊपर की और बोला, “अब जाओ भाभी… अब टट्टी करने में भी मज़ा आएगा…” भाभी के पैर काँप रहे थे और वो धीरे-धीरे बाथरूम की तरफ़ चली गईं…
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