Devar Bhabhi Chudai
ये उन दिनों की बात है जब मेरी उम्र 10 साल की थी और मम्मी की उम्र 30 साल थी। मम्मी की जवानी पूरे जोरों पर थी। जब वो नाइटी में घर में काम करतीं तो उनकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ नाइटी से बाहर आने को बेताब रहती थीं और उनके चूतड़ भी बहुत भारी थे। Devar Bhabhi Chudai
मेरे पापा के दोस्त जब घर पर आते तो वो भी मम्मी के चूतड़ों को घूरते रहते थे। उन दिनों मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ थीं और पापा ऑफिस टूर पर गए हुए थे। उस सुबह उमेश चाचा हमसे मिलने घर पर आए। उन्हें देखकर मम्मी बहुत खुश हो गई थीं। मुझे समझते देर न लगी कि आज मम्मी चाचा से चुदेंगी। मैं ड्राइंग रूम में टीवी देख रहा था। वहाँ एक बड़ा ड्रेसिंग मिरर लगा हुआ था जिससे मैं किचन को देख सकता था।
मम्मी बोलीं, “मैं चाय बनाकर लाती हूँ।”
“भाभी, मैं आपकी मदद करता हूँ,” कहकर चाचा भी किचन में चले गए।
मैंने मिरर से देखा कि वो मम्मी के साथ खड़े होकर मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फेर रहे थे और मम्मी चाय बनाते हुए मुस्कुरा रही थीं। फिर चाचा ने चूतड़ों को जोर से मसल दिया और मम्मी के गाल पर एक किस कर दी। मम्मी ने बाहर मेरी तरफ देखा और समझकर कि मैं टीवी देख रहा हूँ, उन्होंने भी चाचा के लंड को पैंट के ऊपर से रगड़ दिया। तब तक चाय तैयार हो गई तो दोनों ड्राइंग रूम में चाय लेकर आ गए। दोनों वहाँ बैठकर चाय पी रहे थे और बातें कर रहे थे।
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मम्मी बोलीं, “उमेश, मेरी कमर में कई दिनों से दर्द हो रहा है।”
“कोई बात नहीं भाभी, मैं तेल की मालिश कर देता हूँ, अभी ठीक हो जाएगा।”
दोनों ने तुरंत चाय खत्म करके उठे। मम्मी तेल की बोतल लेकर आईं और बोलीं, “उमेश, मालिश बेडरूम में करते हैं और विक्की बेटा हमें डिस्टर्ब मत करना।”
मैंने कहा, “ठीक है मम्मी” और मन ही मन सोचा कि अब मम्मी अपनी चूत की मालिश करवाएंगी। दोनों बेडरूम में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। मैं तुरंत की-होल से देखने लगा। दोनों एक-दूसरे से लिपटकर खड़े थे। चाचा अपने दोनों हाथों से मम्मी के चूतड़ दबा रहे थे और मम्मी के होंठों पर उनके होंठ थे। कुछ देर तक उन्होंने मम्मी के होंठों का रस पिया और फिर अलग हुए। दोनों ने तुरंत अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगे एक-दूसरे के सामने खड़े थे।
“भाभी, तेरी चुचियाँ तो और मोटी हो गई हैं,” ये कहकर चाचा मम्मी की चुचियों को चूसने लगे और मम्मी उनके सिर पर हाथ फेर रही थीं।
“उमेश, जरा चूत में उंगली डालो…”
चाचा ने चुचियाँ चूसते हुए दाहिने हाथ की दो उंगलियाँ मम्मी की चूत में डालकर हिलाने लगे तो मम्मी की आँखें बंद हो गईं और वो मज़ा लेने लगीं। अब मम्मी से मस्ती के कारण खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा था तो चाचा ने चुचियाँ चूसना छोड़ दिया और बेड के किनारे पर जाकर बैठ गए।
मम्मी फर्श पर उनके पैरों के बीच में बैठकर उनके लंड से खेलने लगीं, हाथ से धीरे-धीरे हिलाने लगी और फिर मुँह लंड के पास ले जाकर जीभ फेरी, प्रीकम को चखा और धीरे-धीरे पूरा लंड उनके मुँह में समा गया। मम्मी चाचा के लंड को पूरे जोश से चूस रही थीं।
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उनके गाल हर सक्शन के साथ पिचक और फूल रहे थे और चाचा कराह रहे थे, “ओह्ह भाभी… गुड… थोड़ा हाथ से भी हिलाओ।” मम्मी ने सक्शन के साथ हाथ से भी लंड पेलना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद जब मम्मी ने लंड मुँह से निकाला तो लंड थूक से चमक रहा था।
चाचा बेड से उठे और मम्मी को बेड का किनारा पकड़ाकर डॉगी पोजीशन में कर दिया और खुद उनके पीछे खड़े हो गए। उन्होंने मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फेरा, फिर दाहिने हाथ में लंड लेकर बाएँ हाथ से चूतड़ फैलाए और लंड मम्मी की चूत के छेद पर रगड़ा तो मम्मी आहें भरने लगीं, “ओह्ह उमेश प्लीज अब डाल दो… अब और नहीं रुका जा रहा।”
“तो ये ले भाभी,” और एक झटके में ही चाचा का पूरा लंड मम्मी की चूत में चला गया। मम्मी की हल्की-सी चीख निकल गई। चाचा ने कमर हिलाना शुरू कर दिया। हर झटके पर उनकी कमर मम्मी के चूतड़ों से टकरा रही थी। कमरे में चुदाई का शोर गूँज रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मम्मी हल्की-हल्की आहें भर रही थीं, “ओह्ह… आह्ह… ऊफ़… है मेरे प्यारे देवर… बस ऐसे ही चोदता रह मुझे… क्या मज़ा दे रहा है तू अपनी भाभी को।” मम्मी की बातें सुनकर चाचा को भी जोश आ गया और वो और जोर से कमर हिलाने लगे। मम्मी कुतिया बनी हुई थीं इसलिए उनकी चुचियाँ लटक रही थीं और जोर-जोर से हिल रही थीं।
तभी मम्मी बोलीं, “उमेश मैं छूट रही हूँ… आआआह्ह…” और मम्मी ने अपना ऑर्गेज़्म पा लिया, पर चाचा अभी भी धड़ाधड़ कमर हिला रहे थे। उन्होंने हाथ आगे करके मम्मी के बाल पकड़ लिए और मम्मी को बिल्कुल घोड़ी बनाकर चोद रहे थे। कमरे में पच-पच का शोर गूँज रहा था।
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तभी चाचा बोले, “भाभी मेरा पानी आ रहा है।” मम्मी बोलीं, “मुझे तुम्हारा पानी पीना है।” चाचा ने लंड चूत से निकाला और मम्मी बेड से हटकर चाचा के पैरों के बीच बैठ गईं। चाचा ने अपना लंड मम्मी के मुँह में पेल दिया। मम्मी लंड को हाथ से पलटते हुए चूसने लगीं।
तभी चाचा कराहने लगे, “ओह्ह… आह्ह…” और मैंने देखा कि मम्मी के गाल अचानक फूल गए। मम्मी ने चाचा का सारा पानी पी लिया और काफी देर तक लंड मुँह में रखकर चूसती रहीं जब तक लंड छोटा नहीं हो गया। “ओह भाभी, काफी दिनों बाद तेरी चूत मिली पर बहुत मज़ा आया।” फिर दोनों बेड पर लेट गए। मम्मी उनके लंड से खेल रही थीं और चाचा उनकी चुचियों को धीरे-धीरे दबा रहे थे।
“भाभी, मेरा एक दोस्त आज रात को आ रहा है, वो 3 दिन के लिए यहाँ रुकेगा।”
मम्मी बोलीं, “फिर हम चुदाई कैसे करेंगे?”
“भाभी अगर तुम तैयार हो तो उसे भी इस खेल में शामिल कर लेते हैं।”
“तुमने क्या मुझे रंडी समझ रखा है?”
“भाभी, एक साथ दो लंड से चुदोगी तो ज्यादा मज़ा आएगा और सिर्फ 3 दिन की बात है, उसके बाद वो चला जाएगा और किसी से नहीं कहेगा।”
मम्मी बोलीं, “ठीक है।”
रात को 8 बजे चाचा का दोस्त सुनील घर पर आया। मम्मी ने सिर्फ एक ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी थी जिसमें से मम्मी के चूतड़, चुचियाँ और चूत साफ दिख रहे थे। मम्मी कुछ ज्यादा ही झुककर सुनील को स्नैक्स ऑफर कर रही थीं। सुनील का लंड तनकर खड़ा हो चुका था।
फिर हमने डिनर किया और मैं अपने रूम में सोने चला गया। चाचा और सुनील गेस्ट रूम में चले गए, पर कुछ देर बाद मैंने उन्हें मम्मी के रूम की तरफ जाते देखा। उन्होंने रूम में जाकर लॉक लगा दिया। मैं तुरंत की-होल से देखने लगा। दोनों अपने कपड़े उतार रहे थे और मम्मी नंगी बेड पर लेटी हुई थीं।
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“यार उमेश, तेरी भाभी तो बहुत शानदार पीस है।”
चाचा बोले, “पहले चोद तो ले, फिर पता चलेगा।”
मम्मी हँसने लगीं और उठकर सुनील का लंड हाथ में लेकर सहलाने लगीं। वो और तन गया। मम्मी ने तुरंत उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। इसी समय चाचा ने मम्मी की कमर से पकड़कर कुतिया की तरह किया और अपने लंड पर थूक लगाकर मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लंड धीरे-धीरे मम्मी की चूत में पूरा चला गया। अब उन्होंने चोदना शुरू कर दिया और मम्मी सुनील का लंड चूस रही थीं। कुछ देर बाद मम्मी ने चूसना बंद किया और बोलीं, “उमेश तुम बेड पर लेट जाओ।” चाचा पीठ के बल लेट गए। मम्मी उनके ऊपर चढ़ गईं, हाथ बीच में डालकर चाचा का लंड अपनी चूत में लिया और कमर हिलाने लगीं।
फिर मम्मी ने हाथ पीछे करके अपने चूतड़ फैलाए तो गांड का छेद बाहर आ गया। बोलीं, “सुनील, तुम अपना लंड मेरी गांड में डालो।” सुनील ऊपर चढ़ा। उसने लंड का सुपाड़ा मम्मी की गांड पर रखकर हल्का पुश किया तो सुपाड़ा अंदर चला गया.
पर मम्मी दर्द से बिलबिला उठीं। सुनील ने और पुश किया तो मम्मी चीखने लगीं, “ओह सुनील ये नहीं जाएगा, निकाल लो।” मम्मी उठने लगीं, पर नीचे से चाचा ने पकड़ लिया और ऊपर से सुनील ने चूतड़ और फैलाकर लंड पुश करता गया।
मम्मी की आहें शुरू हो गईं और आखिर सुनील का पूरा लंड मम्मी की गांड में चला गया। सुनील ने लंड थोड़ा बाहर निकाला और फिर पेल दिया। काफी देर तक धीरे-धीरे पेलता रहा। फिर मम्मी की गांड ढीली हुई। नीचे से चाचा ने भी कमर हिलानी शुरू की और ऊपर से सुनील ने स्पीड बढ़ा दी।
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मम्मी उनके बीच में कभी दर्द से कभी मस्ती में सिसकारियाँ ले रही थीं। कुछ देर बाद सुनील का शरीर सख्त हो गया और वो मम्मी की पीठ पर लेट गया। मैं समझ गया उसका पानी मम्मी की गांड में गिर गया। काफी देर तक लंड गांड में रखने के बाद निकाला तो मम्मी की गांड का छेद कुछ देर तक खुला रहा और उसमें से पानी बह रहा था। सुनील मम्मी के मुँह के पास आया, मम्मी ने उसका लंड मुँह में लेकर चाटकर साफ कर दिया। इधर चाचा अभी भी चोद रहे थे।
उन्होंने मम्मी को कसकर पकड़ा और होंठ चूसने लगे। फिर कुछ देर बाद मम्मी उनके ऊपर से हटीं और बाथरूम जाने लगीं। चल भी नहीं पा रही थीं। उनके चूतड़ पूरे खिल गए थे और हर कदम पर काँप रहे थे। जब मम्मी वापस आईं तो दोनों बेड पर लेटे थे। मम्मी उनके बीच में लेट गईं और सुनील ने उठकर मम्मी की चूत चाटनी शुरू कर दी। उस रात मम्मी की एक और भरपूर चुदाई हुई और अगले 2 दिन तो उन्होंने मम्मी को बिल्कुल रंडी की तरह चोदा, जिसके बारे में मैं आपको अगली बार लिखूँगा।
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