Desi Train Romance Sex Story
हैलो दोस्तों मैं विवेक, 23 साल का लड़का, 5.9 इंच हाइट, गोरा और अच्छा दिखने वाला, गोरखपुर (यू.पी.) का रहने वाला हूँ। मैं अभी एमबीबीएस सेकंड ईयर का स्टूडेंट हूँ। ये बात दो साल पहले की है जब मैं इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.ए. कर रहा था। होली की छुट्टी हो गई थी और मैं रात को 9 बजे सरयू एक्सप्रेस पर प्रयाग स्टेशन से बैठा। Desi Train Romance Sex Story
1-2 स्टॉप और आगे जाने के बाद ट्रेन बहुत ज्यादा भर गई थी। मैं विंडो के पास वाली सिंगल सीट पर बैठा हुआ था और बाद में वैसे ही सो गया। करीब 1 घंटे बाद मुझे लगा कि कोई मेरे पास आकर बैठ गया जो मेरी सीट पर थोड़ी सी जगह बची हुई थी वहाँ पर। मैंने देखा वो एक मुस्लिम औरत थी बुर्के में।
मैं फिर से सो गया और वो एक हाथ से विंडो को पकड़ी हुई थी और उसका हाथ मेरे जांघ से धीरे-धीरे रगड़ रहा था। और उसकी पीठ भी मेरे कंधों से रगड़ रही थी। अब मेरी नींद टूट गई। फिर मैंने अपना हाथ अपने जांघ पर रख लिया जिससे उसका हाथ मेरे जांघ के ऊपर रखे हाथ से रगड़ने लगा।
अब मैंने धीरे-धीरे उसकी कोहनी को हाथ से दबाना शुरू कर दिया पर वो कुछ भी नहीं बोली। फिर मैंने थोड़ा जोर लगाकर उसका हाथ मसलना शुरू कर दिया, वो फिर भी चुप ही रही। फिर मैंने धीरे-धीरे उसका हाथ मसलते हुए अपना हाथ उसके बुर्के के अंदर डालना शुरू कर दिया।
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वो अब भी बिल्कुल चुप थी। फिर जब मैं उसके चुचे के पास पहुँचने की कोशिश कर रहा था तो अंदर का कोई कपड़ा मेरे हाथ को रोक रहा था कि अचानक वो उठी और हाथ को बुर्के के अंदर डालकर कुछ किया और फिर से बैठ गई। जब मैंने दोबारा अपना हाथ अंदर डाला तो हाथ बड़े आराम से अंदर चला गया।
इस बीच ट्रेन के काफी लोकल पैसेंजर उतर गए थे और काफी सीट भी खाली हो गई थी। उसको मेरे पास से ना जाना पड़े इसलिए उसने सोने का बहाना कर लिया था। अब मैं हाथ अंदर डालकर उसके बड़े-बड़े चुचियों को दबा रहा था। इस बीच मैंने उसके निप्पल को जोर से दबा दिया.
तो वो बोली “क्या करते हो दर्द कर रहा है मेरे सरताज” और वो धीरे से अपने हाथों को मोड़कर मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही मसल रही थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। फिर मैंने बोला जानू मुझे तुम्हारी बूब्स पीने का मन कर रहा है तो वो बोली मेरे सरताज मन तो मुझे भी कर रहा है पर ट्रेन में कर भी क्या सकते हैं…
तो मैंने बोला मैं पहले बाथरूम जाता हूँ बाद में तुम चली आना वैसे भी पूरे डिब्बे में बस 4-5 लोग ही हैं वो भी सो रहे थे। मैं उठकर बाथरूम चला गया और थोड़ी देर उसके आते ही मैंने उसका बुर्का उठाया तो देखा वो कोई 29-32 साल की गोरी मुस्लिम औरत थी।
उसने बताया कि उसका पति कतर में रहते हैं। अब मैंने दरवाजा लॉक करके उसका बुर्का उतारा। काली ब्रा में उसके दूध जैसे चुचे हाजब ढा रहे थे। मैंने जल्दी से ब्रा भी उतारी और बूब्स को तेज-तेज चूसने लगा। वो मस्त होकर बोलने लगी “आह्ह्ह जानू आज पूरा दूध पी लो कुछ भी मत बचाओ.. काट-काट डालो इसको…… आज इसकी हर कसर पूरी कर दो। मेरे सरताज ये बहुत दिनों से सुलग रही थी आज इसकी पूरी गर्मी तुम पी जाओ..”
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और मैं दूसरे हाथ से सलवार के ऊपर से ही उसकी बुर रगड़ रहा था। अब उसने मेरी पैंट की चेन खोलकर मेरे लंड को अंडरवियर से बाहर करके खेलने लगी। वो मेरे लंड को जोर-जोर से मसल रही थी। वो बदबदा रही थी “या अल्लाह लंड रखते हो या मूसल जिसके बुर में जाता होगा वो तो पानी मांगने लगता होगा…. कितनों को चोदा आज तक सच-सच बताओ मेरे सरताज इस 10 इंच के लौड़े से”
फिर उसने अपनी चुचियों को मेरे मुँह से निकाला और जमीन पर बैठकर मेरे लंड को चूसने लगी। केवल 50% लंड ही उसके मुँह में जा रहा था… बाकी को वो किनारे से आइसक्रीम की तरह दाँत से काट-काटकर चाट रही थी। मैंने उसके मुँह में जोर का धक्का दिया तो वो खाँसने लगी और बोली “अल्लाह के लिए रहम कर पूरा नहीं जा पाएगा आधा ही मेरी हलक तक पहुँच जा रहा है….”
फिर मैंने कहा जान अब मुझे तुम्हें चोदने का मन कर रहा है तो वो बोली “मेरे सरताज मन तो मुझे भी कर रहा है पर यहाँ जगह कहाँ है?” फिर मैंने कहा नीचे से अपने बुर्के को उठाकर अपने हाथ में पकड़कर वॉश बेसिन को पकड़कर झुककर खड़ी हो जाओ बाकी मैं कर लूँगा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और वो सलवार का नाड़ा खोलकर बुर्के को हाथ में पकड़कर झुककर खड़ी हो गई। फिर मैंने उसकी ब्राउन पैंटी (जो पहले ही आधी भीग चुकी थी) उतारकर नीचे बैठकर उसके बूर को चूसने लगा और उसपर अच्छी तरह जीभ रगड़ने लगा तो वो घुमा-घुमा कर अपने बूर को और जोर से रगड़ने लगी.
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और सिसकिया कर बोलने लगी “आह्ह बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा बस इसी तरह रगड़ते रहो जीभ को भी अंदर डालो ना ऐसा मजा तो आज तक कभी नहीं आया था…. भोसड़े को काट खाओ मेरे राजा इसमें बहुत गर्मी भरी पड़ी है तुम सब चूस लोओओ… आह्ह्ह ऐसे ही करते रहो.. और तेज जानू रुकना नहीं मेहरबानी करके नहीं तो मेरी जान निकल जाएगी…”
फिर मैं खड़ा होकर उसके बूर के ऊपर अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया तो वो बोली “मेरे सरताज मेहरबानी करके जल्दी से पूरा अंदर डाल दो अब नहीं रहा जाता…. अंदर बहुत ज्यादा उलझन हो रही है इसको अंदर डालकर पूरी गर्मी मिटा दो..” फिर भी मैंने उसे तड़पाने के लिए लंड अंदर नहीं डाला.
तो वो खुद बूर को पीछे धक्का देकर लंड को अंदर लेने की कोशिश करने लगी और गिड़गिड़ाने लगी “देखो अभी कोई आ जाएगा तो कुछ भी नहीं हो पाएगा प्लीज पूरा एक बार में ही अंदर डाल दो ना मेहरबानी करके अब नहीं रहा जाता” फिर मैंने अपना लंड एक झटके से अंदर डाल दिया तो वो चिल्लाई “या अल्लाह मार डाला…. पूरा एक साथ ही डाल दिया…. इंसानों का लंड रखते हो या घोड़े का?”
फिर मैं उसकी चुची को पीते हुए धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया तो उसको आराम आने शुरू हो गया और थोड़ी देर बाद वो खुद गांड को पीछे धक्का दे-देकर पूरा लंड अंदर लेने लगी और बड़बड़ाने लगी “हाईई पूरा निकालकर एक साथ अंदर डालो ना जान बहुत मजा आ रहा है.. सच आज तक मैंने ऐसा लंड कभी नहीं देखा…
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आज के बाद कोई घोड़ा भी चोदेगा तो दर्द नहीं होगा.. और तेज धक्का दे….. मेरे सरताज पूरी गर्मी निकाल दो आज मेरे भोसड़े को एकदम फाड़ दो…. जब भी तुम मुझे मिलना ऐसा ही चोदा हमेशा… इतना बड़ा लंड से चुद के सच में बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी कुंवारी प्रेमिका का क्या हुआ होगा जब उसने तुम्हारे 10″ के लौड़े अंदर लिया होगा.” करीब ऐसा ही 15-20 मिनट चलता रहा और वो झड़ गई… और वो बोली “नहीं प्लीज इसमें अब मत करो बहुत दर्द हो रहा है” तो मैंने पूछा अब क्या करें.
तो वो बोली “मेरे गांड में लंड डालकर अपनी गर्मी मिटा लो मेहरबानी करके इतना जल्दी बुर नहीं सह पाएगी फिर से” तो मैंने उसके टाइट गांड में लंड डालकर करीब 5 मिनट रगड़ता रहा फिर स्पर्म निकलने के बाद हम दोनों कपड़े ठीक करके सीट पर आ गए और चुपचाप बैठ गए। करीब 1 घंटे बाद हम फैजाबाद पहुँच गए तो मैंने धीरे से लास्ट बार उसकी चुची दबाई और मुस्कुरा दिया तो वो भी धीरे से मुस्कुराकर धीरे से बोली वाकई आज बहुत ही ज्यादा मजा आया.. ट्रेन से निकलकर देखा उसके घर से स्टेशन पर कई लोग लेने आए थे… और मैं अपने रास्ते चला गया…
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