Chudai Ki Pyasi Aunty
एक बार मुझे काम के सिलसिले में नासिक जाना पड़ा। वहाँ मैंने एक दोस्त के अंकल के घर पर रहने का इंतज़ाम किया था। अंकल करीब 48 साल के फ़ौजी थे और उनकी बीवी सुशीला आंटी करीब 40 के लगभग ख़ूबसूरत, न ज़्यादा मोटी न ज़्यादा पतली, मध्यम क़द-काठी की महिला थीं। Chudai Ki Pyasi Aunty
सुशीला आंटी की चूचियाँ, चूतड़, नाक-नयन काफ़ी आकर्षित करते थे। वो बैंक में काम करती थीं। वो बहुत एडवांस और खुले दिमाग़ वाली सेक्सी महिला थीं। उनका लड़का भी फ़ौज में हाल ही में जॉइन हुआ था। जब मैं वहाँ पहुँचा तो उन लोगों ने मेरी काफ़ी ख़ातिरदारी की।
उस वक़्त अंकल एक महीने की छुट्टी पर आए हुए थे और उन्हें आए अभी 10-15 दिन ही हुए थे। वो दोनों अंकल-आंटी मेरा बहुत ध्यान रखते थे। मुझे महसूस हुआ कि आंटी बहुत खुले विचारों वाली महिला थीं। अंकल के जाने से एक दिन पहले हम तीनों ने मिलकर शराब पी थी।
मैं अंकल के संकोच के कारण उस दिन सिर्फ़ 2 पैग ही रम का पीया था जबकि अंकल और सुशीला आंटी जी ने करीब 3-3 पैग ले चुके थे। दूसरे दिन अंकल वापस अपनी ड्यूटी पर चले गए। उनकी पोस्टिंग कश्मीर की घाटियों में लगी थी। अब घर पर मैं और सुशीला आंटी ही रह गए थे।
हम रोज़ खाना खाने के बाद करीब 11:30 बजे रात तक इधर-उधर की बातें करते थे। हम दोनों काफ़ी फ्रैंकली हो चुके थे। सुशीला आंटी पढ़ी-लिखी, खुले विचारों वाली महिला थीं और काफ़ी सेक्सी भी थीं। कभी-कभी बातों-बातों में सेमी नॉन-वेज जोक भी कर लेती थीं।
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मैं भी कभी-कभी उनसे डबल मीनिंग की बातें कर लेता था। वो कभी बुरा नहीं मानती थीं। रात में वो कभी नाइटी या शॉर्ट मिनी स्कर्ट और टी-शर्ट में होती थीं। जब वो मिनी स्कर्ट और टी-शर्ट में होती थीं तब कभी-कभी वो मनमोहक परफ़्यूम लगाती थीं।
उसकी महक मुझे इतनी भाती थी कि जी करता था उन्हें बाहों में लेकर चूमते हुए उनके शरीर की महक लेता रहूँ। एक बार हम दोनों को 2 दिन की छुट्टी थी। दिन तो आराम से गुज़र गया। शाम को मेरा पीने का मूड हुआ। मैंने सुशीला आंटी से कहा, “आंटी जी, मैं बाज़ार जा रहा हूँ और आप बुरा न मानें तो क्या मैं आज ड्रिंक कर सकता हूँ?”
तब वो बोलीं, “ठीक है, आज मेरा भी कुछ मूड है। मैं भी पीना चाहती हूँ।”
मैंने कहा, “ठीक है सुशीला आंटी जी, मैं बाज़ार से व्हिस्की या रम की बोतल लेकर आता हूँ और साथ ही साथ होटल से डिनर का ऑर्डर भी कर देता हूँ।”
तब वो बोलीं, “अरिजीत, ड्रिंक मत लाना, रम की बोतल घर में है। ऐसा करो, तुम होटल में डिनर का ऑर्डर दे देना।”
मैं बाज़ार जाकर डिनर का ऑर्डर दिया और होटल वालों से कहा, “ठीक 8:30 बजे डिनर घर पर डिलीवरी कर देना।” फिर रास्ते में दुकान से गरमा-गरम समोसे लेकर आया। जब घर पहुँचा तो देखा सुशीला आंटी नहाकर ब्लैक मिनी स्कर्ट और यलो टी-शर्ट पहनी थीं और हल्का सा मेकअप भी किया हुआ था।
आज उन्होंने काफ़ी आकर्षित परफ़्यूम लगाया था जिसकी महक पूरे कमरे में फैलकर मन में उमंगें-तरंगें भरने लगी। फिर वो किचन में जाकर रम की बोतल और 2 ग्लास लेकर हमारे लिए पैग बनाए। वो मेरे सामने बैठी थीं और हम दोनों पैग पीने लगे थे। पैग पीते-पीते मैंने कहा, “सुशीला आंटी, आज आप काफ़ी सुंदर दिख रही हैं, क्या बात है?”
वो बोलीं, “कुछ ख़ास नहीं, ऐसे ही मन हुआ तो थोड़ा तैयार हो गई।”
मैंने कहा, “आपने परफ़्यूम भी काफ़ी उत्तेजित लगाया हुआ है।”
तब वो केवल मुस्कुराकर रह गईं। मैंने कहा, “सुशीला आंटी जी, आप अपने चेहरे पर काजल लगा लीजिए, कहीं नज़र न लग जाए आपको।”
तब वो बोलीं, “तुम कैसी दुनिया में हो? इस ज़माने में नज़र वग़ैरह नहीं लगती है। वैसे भी अपनों से क्या शरम?” और वो मुस्कुराते हुए पैरों को फैलाकर इस तरह बैठ गईं कि मुझे उनकी मिनी स्कर्ट से सफ़ेद पैंटी दिखाई देने लगी।
बातें करते-करते हम दोनों 2-2 पैग पी चुके थे। इतने में डोरबेल बजी। मैं उठकर दरवाज़ा खोला तो होटल बॉय डिनर डिलीवरी देने आया था। जब मैं डिनर लेकर दरवाज़ा बंद करके वापस आया तो देखा सुशीला आंटी अपनी जगह पर नहीं थीं। मैं किचन में जाकर डिनर रखा तो किचन में भी सुशीला आंटी नहीं थीं।
मैंने सोचा वो टॉयलेट गई होंगी। मैं वापस आकर सोफ़े पर बैठ गया। कुछ देर बाद वो भी आकर मेरे सामने की बजाय मेरे क़रीब बैठ गई थीं। मैं भी टी-शर्ट और बरमूडा पहने हुए था। बातें करते-करते हम लोगों ने करीब और 2 लार्ज और 1 स्मॉल पैग पी लिए।
पैग पीते-पीते जब बातें कर रहे थे तब उनकी दाहिनी हाथ की हथेली मेरे बाएँ पैर की जाँघों पर थी और जब हम किसी जोक पर हँसते तो वो अपनी हथेली से मेरी जाँघों को दबा भी देती थीं। कभी-कभी तो उनकी दाहिनी चूची मेरे कंधों को भी स्पर्श हो जाती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जब हम दोनों को नशा चढ़ने लगा तब हम दोनों उठकर पहले खाना खाया। फिर मैं अपने कमरे में आकर बरमूडे से अंडरवियर निकालकर बरमूडा फिर से पहन लिया था क्योंकि रात में सोते समय हमेशा मैं अंडरवियर उतारकर सोता था। और नींद न आने के कारण टीवी ऑन करके केबल पर पिक्चर देखने लगा।
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इतने में सुशीला आंटी भी मेरे कमरे में आकर मेरे बगल में बैठकर टीवी देखने लगीं और बोलीं, “पता नहीं आज क्यों नींद नहीं आ रही है।” उन्होंने अभी तक ड्रेस नहीं बदली थी। वो अभी भी मिनी स्कर्ट और टी-शर्ट में थीं। केबल की पिक्चर इतनी अच्छी और सेक्सी थी कि मैं पिक्चर देखने में मशगूल था कि अचानक मुझे मेरी जाँघों पर सहलाते हुए किसी की हथेली महसूस हुई।
मेरा ध्यान पिक्चर से भटक गया और तिरछी निगाहों से देखा, सुशीला आंटी मेरी जाँघों पर हथेली फेर रही थीं। मैं इसी तरह बैठा रहा जैसे पिक्चर देखने में मगन हूँ। कुछ देर बाद मैंने भी उनके घुटनों पर हथेली रख दी। उन्होंने कुछ नहीं कहा और मेरी जाँघों को सहलाते हुए वो कभी-कभी मेरे लंड को बरमूडे के ऊपर से भी सहलाने लगीं। उनकी इस हरकत से मेरा लंड बरमूडे के अंदर तंबू की तरह तन चुका था।
इधर उनकी हरकत जारी थी, उधर मैं पिक्चर को मगन होकर ध्यान से देखने का नाटक करने लगा। करीब 12:30 बजे अचानक वो पिक्चर बंद हो गई और कुछ पलों में दूसरी पिक्चर चालू हो गई। हमें लगा शायद केबल वाले कोई पिक्चर का ट्रेलर दिखा रहे हों, पर कुछ ही पलों में XXX आने लगी।
चुदाई के सीन देखकर हम दोनों ने एक-दूसरे से नज़र मिलाई तो सुशीला आंटी मुस्कुराकर बोलीं, “हर मध्य रात्रि में अल्टरनेट डे पर XXX मूवी दिखाते हैं।” फिर वो बोलीं, “शरमाओ मत, तुम बच्चे थोड़ी हो, देख लो।” और हम देखने लगे। पिक्चर देखते-देखते हम पूरी तरह गरम हो चुके थे।
उनकी हथेली मेरे बरमूडे के ऊपर से लंड को सहला रही थी। मैं भी अब उनकी जाँघों को सहलाने लगा। करीब 25 मिनट बाद केबल वालों की बिजली ग़ुल हो गई और केबल बंद हो गया। तब मैं उठकर टीवी ऑफ़ किया और जब वापस अपनी जगह पर आने लगा तो देखा वो अपनी चूचियों को दबा रही थीं।
अब मैं उनके बगल में बैठकर पहले तो उनकी टी-शर्ट उतारी, फिर ब्रा उतारकर कमर के ऊपर तक उन्हें नंगा कर दिया और ख़ुद भी कमर के ऊपर से नंगा होकर कभी उनके होंठों को चूसने लगता था तो कभी उनकी चूचियों को। साथ ही साथ उनकी मिनी स्कर्ट ऊपर करके सफ़ेद पैंटी को साइड में करके दाहिने हाथ से उनकी चूत के दानों और फाँकों को सहलाते हुए अपनी बीच की उंगली उनकी चूत में डालकर उंगली से चुदाई करने लगा।
इधर वो आहें भरते हुए मेरे लंड को सहलाने लगीं। यह क्रिया हम लोग करीब 10-15 मिनट किए। फिर उन्होंने मेरा बरमूडा खोलकर नंगा कर दिया और मैंने उनकी मिनी स्कर्ट और पैंटी को उतारकर नंगा कर दिया। फिर सोफ़े से उठकर ज़मीन में उनके दोनों टाँगों को फैलाते हुए उनकी चूत के दाने को ख़ूब रगड़-रगड़कर चाट रहा था और बाएँ हाथ से उनकी एक चूची को दबा भी रहा था।
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बीच-बीच में मैं उनकी चूत के फाँकों यानी मुँहड़े को चारों तरफ़ से जीभ भी फिराता जा रहा था। जब मैं अपने होंठों के बीच उनकी चूत के दाने को दबाकर खींचता तो वो उत्तेजित होकर मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ़ दबाते हुए सिसकारियाँ भरने लगीं, “ऊऊफ़्फ़्फ़ बहुत अच्छे अरिजीत राजा, मज़ा आ रहा है। आज तक किसी ने मेरी चूत को इस तरह नहीं चूसी।”
और मेरे सिर को चूत पर दबाव डाले हुए बोलीं, “और चूसो, मैं पागल हो रही हूँ, मार दिया अरिजीत तूने। आज तो तुम तो काफ़ी अच्छे चूत चटाई करते हो ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ हाईईईई।” इधर उनकी सिसकारियाँ लगातार चल रही थीं, उधर मेरी जीभ उनकी बड़े-बड़े चूत के फाँकों को चूस और चाट रही थी।
मैंने करीब 10-15 मिनट तक उनकी चूत चटाई की। इसी दौरान उनकी चूत ने सिकुड़न पैदा करते हुए चूत रस को मेरे मुँह में डाल दिया। उनका वीर्य कसैला और चिपचिपा था। अब मैं उठकर खड़ा हो गया और वो भी सोफ़े से उठकर ज़मीन पर घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को दाहिने हाथ से सहलाते हुए लंड के सुपाड़े के ऊपर की चमड़ी को आगे-पीछे करते हुए सुपाड़े को घूँघट के अंदर-बाहर करते हुए बोलीं, “हाय जानू, तुम्हारा लंड काफ़ी मोटा और लंबा है। मज़ा आएगा इससे चुदवाने में।”
वो मेरे लंड को करीब 5 मिनट तक सहलाती रहीं। फिर उन्होंने लंड के सुपाड़े को नंगा करके अपने मुँह में लेकर धीरे-धीरे चूसने लगीं। ऊऊफ़्फ़्फ़ क्या कमाल की मुंह चुदाई करवा रही थीं, बड़ा मज़ा आ गया। मैं उनके सिर को पकड़कर उनके मुँह में पूरा लंड डलवाना चाहता था पर वो अपने मुँह में पूरा लंड नहीं समा सकीं।
फिर कुछ देर बाद मैंने उनकी दोनों चूचियों के बीच लंड रखा तो उन्होंने अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को एक-दूसरे से दबाकर मेरे लंड को बड़ी-बड़ी चूचियों के अंदर छुपा लिया और मैं अब चूचियों के बीच लौड़े को डालकर चूची चुदाई करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुछ देर बाद मैं सोफ़े पर बैठ गया और वो उठकर मेरे दोनों टाँगों के बीच आकर लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के मुँहाने पर रखकर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। शुरुआत में उन्हें लंड को अपनी चूत में लेते हुए थोड़ी सी तकलीफ़ महसूस हो रही थी। फिर वो मज़े लेते हुए सिसकारियाँ भरते हुए अपनी गांड को ऊपर-नीचे करते हुए लंड को फचाफच चूत में लिए जा रही थीं।
उनकी चूत इतना पानी छोड़ दिया था कि कमरे में चुदाई ही चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थीं। इधर वो गांड उठा-उठाकर मेरे लंड को घपाघप चूत में लिए जा रही थीं, उधर मैं उनकी गांड में दाहिने हाथ की बीच की उंगली तो गांड में डाले हुए था और बाएँ हाथ से उनकी एक चूची को दबा रहा था।
मेरी उंगली उनकी गांड में 2 इंच तक घुसी थी। वो आहें भरते हुए कह रही थीं, “ह्हाईईई ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बहुत म्माजा आ रहा है ऊऊऊफ़्फ़्फ़ क्या लंडडड है तुम्हारा मेरी जानेमन।” फिर वो हाँफते हुए चूत को सिकुड़ाते हुए झड़ने लगी थीं। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को मज़बूती से जकड़े हुए फूल और पिचक रही थीं। कुछ देर तक तो वो मेरे लंड को चूत में समाए हाँफते हुए पड़ी रहीं। जब वो नॉर्मल हुईं तो वो सोफ़े पर बैठ गईं।
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मैं उठकर ज़मीन पर खड़ा हो गया और उन्हें डॉगी स्टाइल में इस तरह खड़ा किया कि उनका दाहिना हाथ की कोहनी सोफ़े पर थी और दाहिने पैर के घुटनों को सोफ़े पर रखा था और बायाँ पैर ज़मीन पर था। इस तरह वो डॉगी मुद्रा में हो गईं और मैं भी उनके पीछे जाकर मेरा बायाँ पैर सोफ़े पर, दाहिना पैर ज़मीन पर रखकर पीछे से उनकी कमर को पकड़कर उनकी चूत में लंड घुसाकर घोड़ी चुदाई या आप कह सकते हैं डॉगी स्टाइल में चोदने लगा।
थोड़ी देर बाद वो फिर से गरम हो गई थीं और मेरे हर धक्के से वो कहराते हुए बोल रही थीं, ऊऊऊऊह्ह्ह्ह क्याआआआ म्माज्ज्जा आआरहा है ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ चोदो मेरी जान ज़ोर से चोदो। आज शादी को इतने साल हो गए, ऐसा मुझे किसी ने नहीं चोड़ा। तुम वाक़ई बड़े चुदक्कड़ हो। तुम्हें देखते ही मेरी नज़रों ने भाँप लिया था।
तुम बड़े ज़ालिम और चुदक्कड़ हो। ओओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जोर-जोर से चोदो मेरे राजा ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़। मैं भी लगातार उसकी चूत को चोदे जा रहा था। वो कुछ ही देर में एक बार और झड़ गई और हाँफ़ने लगी। फिर मैंने उसकी चूत से लंड निकालकर एक बार फिर उसके चूत रस से सना हुआ लंड उसके मुँह में दे दिया। वो फिर लंड को चूस-चूसकर अपना चूत रस पी गई।
कुछ देर बाद मैंने उसे सोफ़े के किनारे बैठा दिया। वो किनारे का सहारा लेकर दोनों पैरों को फैलाकर बैठ गई और मैं भी उसके सामने बैठ गया। मेरा बायाँ पैर और गांड सोफ़े पर थी और दाहिना पैर घुटनों के बल मोड़कर ज़मीन पर रख दिया। फिर सुशीला आंटी को थोड़ा आगे सरकाकर उसके दोनों पैरों को फैलाकर मेरी जाँघों के ऊपर रखकर उसकी चूत में लंड घुसेड़ दिया और चुदाई करने लगा।
इधर मैं गांड उठा-उठाकर उसकी चूत में लंड को अंदर-बाहर कर रहा था, उधर वो भी अपनी कमर हिला-हिलाकर मेरा साथ देते हुए लंड को चूत के अंदर-बाहर ले रही थी। हम दोनों ने दोनों हाथों से सोफ़े का सहारा लेते हुए चुदाई करने लगे। कुछ देर बाद मैंने चुदाई की मुद्रा बदली।
मैं सोफ़े पर शरीर के बाएँ हिस्से के बल लेट गया और उसे अपने आगे लिटाकर उसका दाहिना पैर ऊपर उठाकर उसकी चूत में लंड डालकर चोदने लगा। कुछ ही मिनटों में वो फिर गरम हो गई और ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़ आह्ह्ह्ह उह्ह्हम्म्म्म ओफ्फ्फो आह्ह्ह्ह कहते हुए कहराने लगी.
और साथ ही साथ अपने दाहिने हाथ से चूत के दाने को सहलाते हुए बोली, “और ज़ोर से चोदो मुझे, और ज़ोर से! ऊऊफ़्फ़्फ़ बड़ा ज़ालिम और जानदार लंड है अरिजीत तुम्हारा। तुम्हारे लंड पाकर तुम्हारी बीवी हमेशा ख़ुश रहेगी। ऊऊफ़्फ़्फ़ ओओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह काश मेरी शादी तुमसे हुई होती ओओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!”
मैं बोला, “सुशीला डार्लिंग, डोंट वरी। मैं जब तक यहाँ रहूँगा, मैं हमेशा तुम्हारी चुदाई करता रहूँगा।”
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और मैं कस-कसकर अपने लंड को उसकी चूत में फचा-फच पेलने लगा। पूरा कमरा चुदाई की आवाज़ से गूँज उठा था। कुछ ही देर में हम दोनों झड़ गए। थोड़ी देर तक मैं उसकी चूत में लंड डाले ही उसी मुद्रा में पड़ा रहा। हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे और लंबी-लंबी साँसें ले रहे थे।
थोड़ी देर बाद जब हम दोनों नॉर्मल हुए तो मैंने आधा मुरझाया हुआ लंड उसकी चूत से निकाला। उसकी चूत फड़फड़ाते हुए लंड रस और चूत रस का मिश्रण चूत से बाहर फेंकने लगी। वो मिश्रण बहता हुआ उसकी गांड की दरारों की ओर बहने लगा। ऊऊफ़्फ़्फ़ क्या नज़ारा था! ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर वो उठकर पेशाब करने गई और मैं भी उसके पीछे जाकर पेशाब करने लगा। फिर उसने पहले अपनी चूत और गांड को पानी से साफ़ किया, फिर वो मेरे लंड को पानी से साफ़ करने लगी। थोड़ी देर बाद हम दोनों उसके बेडरूम में जाकर नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सोने की तैयारी करने लगे। वो तो आज मेरे विशाल लंड को पकड़कर निहाल हो गई थी और मैं भी उस जैसी चुदक्कड़ औरत का संग पाकर ख़ुश था।
वो बोली, “अरिजीत राजा, आज तक मैंने अपने पति के अलावा किसी से नहीं चुदवाया था। पता नहीं मुझे तुम पर क्या महसूस हुआ कि मैं तुम्हें आकर्षित करने लगी और तुमसे चुदाई कराने की तमन्ना दिल में दबाए हुए थी, जो आज पूरी हुई है। तुम वाक़ई क़ाबिल चुदक्कड़ हो।”
मैंने कहा, “सुशीला रानी, तुम भी ग़ज़ब का साथ दिया, मेरा मज़ा आ गया।”
थोड़ी देर उसके शरीर की गर्मी पकड़कर मेरा लंड फिर तनतनाने लगा। वो भाँप गई थी कि मैं उसे और चोदना चाहता हूँ, इसलिए बोली, “अरिजीत डार्लिंग, मेरी चूत काफ़ी थक गई है। हम सुबह चुदाई करें तो ठीक रहेगा।”
मैं बोला, “सुशीला डार्लिंग, प्यास मुझे अभी लगी है और तुम मुझे पानी सुबह पिलाओगी तो कैसे चलेगा?”
वो बोली, “रियली डार्लिंग, मेरी चूत में अब तुम्हारे लंड को सहने की ताक़त नहीं है।”
तब मैं बोला, “इसका भी उपाय है। तुम्हारी चूत को भी आराम मिलेगा और साथ ही साथ मेरी प्यास भी बुझ जाएगी।”
वो बोली, “कैसे राजा?”
मैं बोला, “तुम्हारी गांड मारके।”
वो डर गई और बोली, “अरिजीत, मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई। एक बार मेरे पति ने कोशिश की थी लेकिन थोड़ा लंड गांड में घुसाते ही बड़ा दर्द हुआ था और मैं 3-4 दिन तक ठीक से न चल पाई थी, न पख़ाना कर सकी थी।”
मैं बोला, “तुम डरो मत, मैं आहिस्ता-आहिस्ता से करूँगा। तुम्हें बड़ा मज़ा आएगा, फिर तुम हमेशा मुझसे गांड मरवाना चाहोगी।”
वो घबराते हुए बोली, “ठीक है, पर धीरे-धीरे।”
और मैं उठकर ड्रेसिंग टेबल से हेयर ऑयल की शीशी लेकर आया और उसे पेट के बल लिटाकर ख़ूब सारा तेल उसकी गांड के छेद पर लगाकर एक उंगली को धीरे-धीरे गांड में डालकर चौड़ा किया। उसे थोड़ा-बहुत दर्द हुआ लेकिन वो कुछ नहीं बोली।
मैंने पूछा, “रानी, दर्द हो रहा है?”
वो बोली, “नहीं राजा।”
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फिर मैंने उसकी गांड के छेद को फैलाकर और तेल उसकी गांड में डालकर गांड को चिकना करके, अपने लंड को तेल लगाकर ख़ूब चिकना करके उसके दोनों टाँगों के बीच आकर उसे कहा, “रानी, दोनों हाथों से अपनी गांड को पकड़कर फैला दो।”
उसने वैसे ही किया। तब मैंने 5-6 बार अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गांड के छेद पर रगड़कर सुपाड़े को गांड के छेद में रखकर थोड़ा दबाव दिया तो फच से सुपाड़ा अंदर घुस गया। सुपाड़ा घुसते ही उसने गांड को सिकोड़ लिया जिससे सुपाड़ा फटाक से उसकी गांड से बाहर आ गया।
मैंने कहा, “क्या हुआ?”
वो बोली, “थोड़ा सा दर्द हुआ राजा।”
मैंने कहा, “बस इतना सा ही दर्द होगा, ज़रा सहन करो।”
और फिर और सुपाड़े और गांड पर तेल लगाकर सुपाड़े को गांड के छेद पर रखकर हल्का सा दबाव डाला तो फचाक से सुपाड़ा घुस गया। मैंने बिना देर किए और दबाव डाला तो आधा लंड उसकी गांड में घुस गया।
वो बोली, “म्ममार डाल्ल्लााा रे ल्ल्लााग्गाात्ताा है! गांड फट गई और किसी ने गरम-गरम लोहा मेरी गांड में डाल दिया हो। प्लीज़ बाहर निकालो!”
मैंने कहा, “रानी, घबराओ मत। अभी थोड़ी देर में दर्द मिट जाएगा और मज़ा आएगा।”
थोड़ी देर ऐसे ही मैं उसके गांड में लंड डाले पड़ा रहा और फिर जब उसका दर्द कम हुआ तो मैं जोश में आकर एक ज़ोरदार कसकर धक्का मारा तो मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी गांड में घुस गया और मेरा अंडकोष उसकी चूत से जा लगा। अब वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके आँखों से आँसू भी निकल आए थे। वो बोली, “माधरचोद! मैंने पहले ही कहा था गांड मत मार, फट जाएगी… पर तुम भोसड़ी की गांड पड़कर ही दम लिया बहनचोद! पहले तो मेरी चूत को थका दिया और अब गांडू चूतिया माधरचोद भोसड़ी के बहनचोद मेरी गांड ही फाड़ डाली।
मैं भी रंडी बन गई थी जो इस गांडू को गांड मरवाने दी। तुम्हारी ग़लती है है गांडू! मेरी ही ग़लती थी, मेरी ही गांड में खुजली थी जो इस ज़ालिम लंड को लेने के लिए मचल रही थी।” ऐसा कहते हुए वो थोड़ी देर बाद शांत हो गई। उसका दर्द ख़त्म हो रहा था।
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उसकी गालियों के बदले मैंने कोई प्रतिक्रिया न करके ऐसे ही पूरा लंड उसकी गांड में डाले पड़ा रहा। थोड़ी देर बाद मैं धीरे-धीरे गांड से आधा लंड निकालकर फिर गांड में डाल देता। मेरे इस क्रिया पर उसे अब मज़ा आने लगा। वो बोली, “गांडू! अब क्यों धीरे-धीरे डाल रहा है? जब धीरे-धीरे डालने का समय था तब बहनचोद ज़ोर से धक्का मारकर इस बेशर्म रंडी की गांड में डाल दिया। अब इस गांड को जब जानदार लंड की ज़रूरत है तब धीरे-धीरे डाल रहा है। माधरचोद, ज़ोर-ज़ोर से गांड मार!”
मैं अब धना-धन कमर उठा-उठाकर धक्के मारकर उसकी गांड मारने लगा। उसे मज़ा आ रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी गांड में लंड रस डाल दिया और जब लंड को गांड से बाहर निकाला तो पुच की आवाज़ करता हुआ गांड से लंड निकल गया, जैसे किसी बोतल के मुँह में फँसी उंगली बाहर आती है और पुच की आवाज़ होती है। अब उसके गांड से लंड रस और थोड़ा ख़ून का मिश्रण बाहर निकलता हुआ चूत में समाने लगा। फिर हम दोनों ऐसे ही लेट गए। मैं उसे अब 3-4 महीनों तक रोज़ 4-5 चुदाई करता था।
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