Chuchi Chusai Kahani
दोस्तों, मैं मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ। ये घटना थोड़ी पुरानी है। तब मैं 10वीं क्लास में पढ़ता था। सेक्स के बारे में पूरी तरह अनाड़ी था। हम ग्वालियर में रहते थे। हमारे पड़ोस में पहले तल्ले पर दो डॉक्टर रहते थे- पति-पत्नी दोनों डॉक्टर थे। उनका कोई संतान नहीं थी। घर का काम करने के लिए एक लड़की थी। Chuchi Chusai Kahani
वो लड़की उनके पास ही रहती थी। लेकिन उस लड़की को देखकर कोई भी उसे नौकरानी नहीं कहेगा। क्योंकि वो इतनी सुंदर, सुघड़ थी कि- गोरी, चिकनी सूरत, लुभावना चेहरा- मानो किसी बड़े घर की बेटी बनते-बनते नौकरानी हो गई। सच बोलता हूँ, सेक्स के लिए बहुत अच्छी लगती थी।
उसकी दूध (चूचियाँ), उसकी पिछवाड़ा (गांड) देखने से सेक्स की इच्छा हो जाती और लंड में पानी आ जाता। बहुत गरीब थी, शायद इसी वजह से नौकरानी का काम करती थी। उस समय उसकी उम्र करीब 23-24 की थी और मेरी उम्र भी 18 की। नाम था अल्का।
डॉक्टर अंकल-आंटी अस्पताल चले जाने के बाद वो अकेली ऊपर बरामदे में बैठी-बैठी टाइम पास करती थी। उसका अच्छा व्यवहार होने के कारण मेरी माँ के साथ उसकी अच्छी घुल-मिल गई थी। मुझसे तो वो बहुत बड़ी थी, लेकिन इतनी लगती नहीं थी। उस समय मेरा चेहरा भी एकदम चिकना था, किस करने वाला मासूम चेहरा था।
अल्का भी मुझसे बात करती थी। कभी-कभी हम दोनों खिड़की के पास से बात करते थे। उनकी खिड़की और हमारा छत लगा हुआ था। हमारे छत पर और घर नहीं था, इसलिए खिड़की से बात करने में सुविधा होती थी। मैं तो प्रेम और सेक्स जैसी बात से पूरा अनजान था।
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एक दिन खिड़की के पास बात करते-करते अल्का ने पूछा, “क्या खाया?”
मैंने कहा, “रोटी और दूध खाया।”
उसने कहा, “दूध पिया नहीं?”
मैंने कहा, “नहीं।”
उसने कहा, “मेरा दूध पियोगे?”
मैं समझ नहीं पाया और पूछा, “तुम्हारा दूध? तुम्हारा दूध कहाँ है?”
वो बोली, “है ना।”
मैंने कहा, “दिखाओ पहले।”
अल्का ने खिड़की से मेरा हाथ खींच लिया, अपनी छाती को साड़ी के ऊपर से ही दिखाया और बोली, “हाथ लगाकर देखो, दूध है।”
मैंने डरते-डरते धीरे से हाथ लगाया।
उसने कहा, “दबाओ।”
मैंने दबाया। बहुत कोमल थी, दब गई।
“जोर से दबाओ,” उसने कहा।
मैंने जोर से दबाया। बहुत अच्छा लगा। आज भी याद है- उसने होंठों को दबाया और मेरे हाथ को ऊपर से जोर से पकड़ लिया। न जाने इधर मेरे शरीर में अचानक करंट जैसा लगा। मेरी हाफ पैंट के अंदर मेरा लंड खड़ा हो गया। मुझे कुछ शर्म आने लगी। मैं शरमा के चला आ रहा था।
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उसने फिर कहा, “दूध पियोगे ना?”
मैं हाँ बोलके चला आया। बस उसके बाद मेरा मन मचलने लगा। मुझे अल्का की दूध दबाना बहुत अच्छा लगता था। और दबाने का मन भी कर रहा था। लेकिन चुप रहने के सिवा कुछ कर नहीं पा रहा था। एक दिन वो सुनहरा समय आ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझे आज भी याद है- उस दिन विश्वकर्मा पूजा थी, स्कूल छुट्टी थी। इसलिए मैं घर में ही पढ़ाई कर रहा था। करीब सुबह 10 या 10:30 बजे होंगे। मैं घर से बाहर निकला तो अल्का बाहर ग्रिल के पास खड़ी थी। मुझे देख के वो हँसने लगी। मैं भी हँस दिया।
उसने पूछा, “स्कूल नहीं है क्या?”
मैंने कहा, “नहीं, आज विश्वकर्मा पूजा है, इसलिए छुट्टी है।”
उसे भी सुनहरा मौका मिल गया। टाइम भी ठीक था। डॉक्टर अंकल-आंटी अस्पताल चले गए थे।
अल्का ने कहा, “क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं।”
फिर उसने मुझे बुलाया और बोली, “घर को आओ।”
मैंने थोड़ा इधर-उधर देखा, क्योंकि नीचे ग्राउंड फ्लोर में भी लोग रहते थे और मेरी माँ ने भी उनके घर जाने को मना किया था। मैं धीरे से चुपके-चुपके ऊपर उसके घर को चला गया। जाते ही अल्का ने मुझे अंदर ले गई और दरवाजा बंद कर दिया।
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बस मैं कुछ कहने से पहले ही उसने मुझे जोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे गाल पर जोर से एक चुम्मा दे दिया। उसके बाद वो मुझे चूमती ही चली गई। मैं ऐसा ही उसकी बाहों में जकड़ा रहा। करीब-करीब 5-7 मिनट के बाद मुझे छोड़ा और फ्रिज से कुछ मिठाई लाकर मुझे खाने को दी। मैं खा रहा था कि उसने मुझसे पूछा, “उस दिन मेरा दूध कैसा लगा?”
मैंने कहा, “तुम तो पिलाई नहीं।”
वो बोली, “आज पियोगे?”
मैं कुछ बोला नहीं, चुप रहा। मिठाई खाने के बाद हाथ धोने जा रहा था कि उसने मुझे पास खींच लिया और अपनी दूध दबाने को कहा। मेरा साहस नहीं हुआ, मैं सर नीचे करके खड़ा रहा। मुझे कैसा अजीब सा लग रहा था। वो फिर बोली, “दबाओ ना!”
मुझे शर्म लगी। तभी उसने मुझे जोर से पास खींच लिया और दबाने को कहा। मेरा हाथ पकड़ के अपने आप ही दूध को दबाने लगी। मुझे तो सच में अच्छा लग रहा था। वो मुझे जकड़ के डॉक्टर अंकल की बेड पर ले गई। मुझे जकड़कर बेड पर लेट गई। मेरा हाथ लेकर अपनी छाती के ऊपर रखकर दबाने को कहा।
मेरा थोड़ा साहस हो गया और मैं धीरे से साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगा। वो बोली, “जोर से दबाओ।” मैंने जोर से दबाया। दो-तीन मिनट बाद वो बोली, “रुको,” और वो अपनी साड़ी हटा दी, ब्लाउज खोलने लगी। ब्लाउज खोलते-खोलते बोली, “दूध पियोगे ना?”
इतने में ब्लाउज खुल गया था। वाह! क्या सीन था! उसकी इतनी बड़ी-बड़ी दूध और इतनी सफेद, गोल-गोल थीं कि मैं देखते ही रह गया। वो बोली, “क्या देख रहे हो? लो दूध पियो।” दूध की भुंडी को मेरे मुँह में लगा दिया। मैं चूसने लगा। वो बोली, “इस हाथ से ये दूध को दबाओ।”
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मैंने वैसा ही किया। उसने मुझे सिखा दिया। थोड़ी देर दबाने के बाद अल्का ने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया। उस समय तक मेरा लंड 90 डिग्री खड़ा हो गया था, पूरा टाइट हो गया था। वो उठ गई और मेरी पैंट खोलने लगी। मैंने मना किया तो वो मुझे आँख दिखाने लगी।
लेकिन नंगा नहीं किया। मेरा छोटा सा लंड, मेरी उम्र के हिसाब से ठीक ही था। पैंट खोल के लंड को पकड़कर अंदर-बाहर करने लगी। मुझे बोली, “दूध दबाओ।” मुझमें भी जोश आ गया था। मैं जोर से दबाने लगा। अल्का सिसकियाँ लेने लगी थी- उह्ह… आह्ह… ये माँ… आह्ह… उंह्ह… दहाड़ से मुझे पकड़ के चूमने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरे याद है, मेरा सर से पाँव तक पूरा चूम लिया। लंड को भी चूम लिया। फिर क्या बोलूँ- उसने अपनी साड़ी ऊपर उठा ली, मुझे बोली, “इधर देखो।” मैंने देखा तो काला-काला जंगल जैसा बाल। उसके अंदर लाल-लाल योनि थी। मैं तो देखते ही रह गया। वो बोली, “क्या देख रहे हो? आओ इधर।”
मैं चुम्बक जैसा चला गया। वो अपनी टाँगों को दोनों तरफ फैला दी और मुझे बीच में खींच लिया। मेरा लंड पकड़ के बोली, “करो।” मैंने कहा, “क्या करूँ? मुझे आता नहीं।” फिर उसने अपनी हाथ से लंड पकड़कर स्वर्ग द्वार के गेट में रखा और बोली, “अपनी कमर को अंदर धक्का लगाओ।”
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मैंने वैसा ही किया लेकिन अंदर गया नहीं, मुझे दर्द हुआ। मैंने लंड खींच लिया, लेकिन उसने मेरा लंड फिर पकड़ के ठीक से एकदम सेंटर में रखा और बोली, “अब धीरे से धक्का लगाओ।” मैंने मना किया तो वो मुझे समझाने लगी, “कुछ नहीं होगा। धीरे-धीरे धक्का लगाओ।”
मुझसे नहीं हो रहा था। वो मुझे अपनी कमर हिलाकर सिखाया। फिर वो लंड को एकदम सेंटर में रखा और मैंने धीरे से धक्का लगाया। लंड अंदर तो चला गया। लेकिन मेरी जान निकल गई जैसा लगा। वो भी “ओह माँ…” बोल के मुझे जोर से पकड़ लिया कि मैं चाह के भी खुद को छुड़ा नहीं पाया।
थोड़ी देर ऐसे रहने के बाद वो बोली, “दर्द हो रहा है?”
मैंने कहा, “हाँ।”
“कुछ नहीं होगा, धीरे-धीरे धक्का दो।”
मैं वही किया। लेकिन मैं कुछ करने से पहले ही अल्का ने मेरी कमर को अंदर की तरफ प्रेस करके अपनी कमर हिलाने लगी। मुझे थोड़ा दर्द तो हो रहा था, लेकिन मजा आ रहा था। मेरी कमर तो अपने आप ही ऊपर-नीचे होने लगी। और मुझमें जोश आ गया। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसने तो मानो अपनी म्यूजिक और जोर से सुना रही थी- ओह्ह… आह्ह… उह्ह…
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मैंने स्पीड बढ़ाई तो वो मेरी कमर को ढीला करके दोनों हाथ और पैर को थोड़ा फैला लिया। बोली, “तू और थोड़ा जोर से करो… उइम्मा जोर से… ऐसा और कुछ-कुछ…” बस करीब-करीब आधा घंटा बाद अल्का ने शायद झड़ने लगी। उसने मुझे जोर से पकड़ के अपनी और मेरी कमर दबाने लगी और बड़ी जोर से साँस लेने लगी। थोड़ी देर में मेरा भी शरीर झनझना गया। मैं समझ नहीं पाया कि क्या हो रहा है। मेरा पूरा बदन काँपने लगा। ये मेरा पहला वीर्य निकल रहा था। इसी लिए ऐसा लग रहा था।
मैं खुद को छुड़ाने लगा तो वो मुझे छोड़ती नहीं थी। बस फाइनली मेरे लंड से कुछ पतला जेल जैसा निकल आया। वीर्य निकलने का अनुभव नहीं था। मैंने कहा, “मुझे छोड़ो, मैं मर जाऊँगा।” तब जाकर उसने मुझे छोड़ा। पिछक से वीर्य निकल आया। मुझे आराम लगा। अल्का ने अपने हाथ में वीर्य लिया और देखा, स्मेल भी की। थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे। बस फिर मुझे उठाकर बाथरूम ले गई, मुझे और मेरे लंड को धो दिया। बाहर आके इधर-उधर देखा, फिर मुझे जाने को कहा। जाते-जाते अल्का ने मेरे गाल पर एक चुम्मा दे दिया।
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