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चुदासी बहु ने चलाया सेक्सी चक्कर

अक्टूबर 27, 2026 by hamari Leave a Comment

Incest Sex Wali Kahani

मैं संध्या, बत्तीस वर्षीय शादीशुदा औरत हूँ। घर में मेरी एक आठ साल की बेटी रूबी, पचपन साल के ससुर, पचास साल की सास और अट्ठाईस साल की तलाक शुदा ननद दीप्ति हैं। मेरा पति दुबई में काम करता है और तीन साल के बाद छुट्टी पर आता है, वह भी सिर्फ एक महीने की। Incest Sex Wali Kahani

मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी है। मेरे बूब्स छत्तीस इंच, हिप्स छत्तीस इंच और कमर तीस इंच हैं। रंग गोरा है। मेरे चूतड़ बड़े ही मस्त हैं और मेरे अंदर सेक्स की भूख ज्यादा ही है। लोग कहते हैं कि मैं अपनी माँ की तरह चुड़क्कड़ हूँ। मेरी माँ आज भी अपनी चूत में लंड लेने से नहीं हिचकिचातीं, जबकि उनकी उम्र बावन साल की हो चुकी है।

जैसा कि आप जानते ही हैं, पति दुबई में होने के कारण मुझे तसल्लीबख्श चुदाई नसीब नहीं हो पाती। मैं लंड को तरसती रहती हूँ। मेरी ननद दीप्ति का तलाक हो गया क्योंकि उसका पति साला नामर्द था। भोसड़ी का मेरी दीप्ति को दोष देता रहता था कि वह बाँझ है, जबकि वह दीप्ति को अच्छी तरह से चोद नहीं सकता था।

खैर, हम दोनों भाभी-ननद लंड की कमी के कारण एक-दूसरे के साथ लेस्बियन संबंध बना चुकी थीं। दीप्ति को मेरी चूत का नशा सा था। वह जब भी मौका मिलता, मेरे कमरे में आकर मेरी चुचियाँ चूसने लगती, कभी चूत में उँगली करती और कभी अपनी मादक चूत को मेरे हवाले कर देती।

दीप्ति का खिला हुआ यौवन, बड़ी-बड़ी अड़तीस इंच की चुचियाँ, गांड भी कम से कम अड़तीस की ही होगी। उसके चूतड़ खूब मस्त थे। मैं अपने हाथ उसके चूतड़ो से दूर नहीं रख पाती। लेस्बियन संबंध तक तो ठीक है, लेकिन जब मेरी ननद जोश में आ जाती तो उसकी कामवासना पर काबू पाना मुश्किल हो जाता और दीप्ति किसी भी कीमत पर लंड पाने के लिए बेताब हो जाती।

एक दिन उसने मुझसे पूछा कि मेरा पति (यानी उसका भाई) कैसी चुदाई करता है और उसका लंड कितना बड़ा है। मैंने उससे बताया कि उसके भैया का लंड नौ इंच का है और गजब का कड़क है। जब वह चोदता है तो चूत को तारे नजर आने लगते हैं।

“साला ऐसे पेलता है कि चूत की भोसड़ी बना देगा, ऐसे चूत चूसता है कि सारा पानी निकाल देता है। वह कहता है कि अगर उससे कामवासना का बुखार चढ़ा हो तो अपनी माँ या बहन को भी चोद डाले। लेकिन मेरी बन्नो, मेरी किस्मत ही ऐसी है कि वह तीन साल में एक महीने के लिए ही मुझे चोद सकता है और मेरी चुदसी चूत को लंड रोज चाहिए। दीप्ति, साली तू ही कोई प्लान बना ताकि हम दोनों ही रोज लंड के मजे ले सकें,” मैं बोली।

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दीप्ति ने कहा, “भाभी, तुझे तो तीन साल में एक महीने तो लंड मिल जाता है, मुझे तो अभी तक चुदाई का असली मजा नहीं आया। मेरे उस नामर्द पति का तो खड़ा ही नहीं हुआ। बहनचोद चूत पर रगड़ता था और झाड़ जाता था और मेरी चूत तड़प-तड़प कर आग में जलती रहती।

भाभी मैं क्या प्लान करूँ? यह तो तुम्हें ही कोई प्रबंध करना पड़ेगा। मेरी चूत को भी शांत करवा दो। अगर तेरा कोई यार है या कोई कजिन है तो उससे ही चुदवा दो मुझे। देखो भाभी, मेरी चूत कैसे दहकती है लंड के बिना।” मैंने कहा, “चलो देखते हैं कि क्या हो सकता है।”

अगले दिन मैं बाजार जा रही थी तो मैंने अपने ससुर से पूछा, “बाबूजी आपको क्या मंगवाना है बाजार से? जो चाहिए, मैं ला दूँगी।”

मेरे ससुर ने मुझे ध्यान से देखा और कहा, “बहू तुम शिलाजीत ले आना और साथ में छुआरे भी लेते आना।”

मैंने पूछा, “ठीक है, लेकिन आपको क्या करनी हैं ये चीजें बाबूजी?”

बाबूजी बोले, “बेटी तेरा पति तो दुबई में बैठा है, लेकिन मुझे तो पति का काम करना पड़ता है ना। तेरी सासू को खुश करने के लिए ये चीजें चाहिए। इनसे मर्दानगी बढ़ती है, ताकत आती है बेटी।” कहते हुए बाबूजी ने मुझे अजीब नजरों से देखा और मुझे लगा कि वे मेरी चुचियों को घूर रहे हैं।

जब मैं बाजार जा रही थी तो मुझे बाबूजी की नजरें मेरे चूतड़ो का पीछा करती हुई महसूस हुईं। मेरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई और मेरी चूत में पानी भर गया। मैं सारी चीजें लेकर आई और बाबूजी की चीजें उनको देने गई। जब बाबूजी ने चीजें पकड़ी तो मेरे हाथों से उनका हाथ अचानक ही छू गया।

मेरा पैर फिसल गया और मेरे ससुर ने मुझे अपनी मजबूत बाँहों में लेकर संभाल लिया। मैं उनकी चौड़ी छाती के साथ सट गई। मेरी चुचियाँ उनकी छाती में धँस गईं और मेरे जिस्म में आग दहकने लगी। उनका हाथ बरबस ही मेरे कुल्हों पर रेंग गया और मैं शर्मा गई।

“माफ करना बाबूजी, मेरा पैर फिसल गया था। आप मुझे न थाम लेते तो मैं तो गिर ही जाती,” मैंने कहा।

वे बोले, “बेटी मैं किस लिए हूँ? अगर किसी चीज की जरूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना। मैं अपने परिवार के लिए सब कुछ करने को तैयार हूँ। मुझसे कभी भी शरमाना नहीं, मेरी बेटी।”

मैंने गौर से देखा कि उनके पजामे में उनका लंड सलामी दे रहा था। मैं मुस्कुराई और अपने आप से बोली, “साली, तू बाहर क्या ढूँढ रही है? महा लंड तो घर में ही विराजमान है। यह साला ससुर मेरे ऊपर ही नजरें लगाकर बैठा है और मुझे भी तो लंड चाहिए। लेकिन अब साला बूढ़ा नहीं जानता कि मैं उसके साथ चुदाई तो करूँगी पर इसकी बेटी को भी इसके लंड से चुदवाऊँगी।”

मैं सारी रात अपनी और दीप्ति की चुदाई का प्लान बनाती रही। जब मैं सारा काम खत्म करके अपने कमरे में दीप्ति के पास जा रही थी तो बाबूजी के कमरे से आवाज आ रही थी, “अह्ह्ह्ह मार डाला मेरे राजा! आज क्या खाकर आए हो? मेरी चूत की धज्जियाँ ही उड़ा डालीं। आज तेरा लंड कुछ ज्यादा ही जोर मार रहा है।

ऐसा लगता है जैसे किसी जवान औरत की कल्पना करके मुझे चोद रहे हो। मेरे स्वामी, मैं आपके हल्लाबी लंड के सामने नहीं टिक सकती। यह मैं नहीं झेल सकती। जब कल मैं अपने मायके चली जाऊँगी तो शुक्र होगा। कम से कम दो महीने तो आराम से काट लूँगी और तुम मूठ मार-मार के करना गुजारा। ओह्ह्ह्ह मैं झड़ी! मेरी चूत का रस निकल गया। निकाल लो अपना लौड़ा मेरी बुर में से। मैं तो थक गई।”

बाबूजी बोले, “साली मेरा तो झाड़ दे। चूस के, मूठ मार के या फिर अपनी गांड में डाल के। मैं इस खंभे जैसे लंड को लेकर कहाँ जाऊँ? बहनचोद मेरा तो पानी निकाल दो।”

सासू माँ बोलीं, “अपना पानी आप ही निकाल लो। मैं तो सोने लगी हूँ।”

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मेरा दिल किया कि मैं दौड़कर बाबूजी का लंड अपनी चूत में लेकर मस्त हो जाऊँ, पर ऐसा कर न सकी। लेकिन ऐसा कुछ न कर सकी और अपने कमरे जाकर सारी रात बाबूजी के लंड के सपने देखते हुए जागकर निकाल दी। सुबह जब मैं उठी तो दीप्ति मेरे साथ लिपटी हुई थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसके हाथ मेरे मम्मों पर थे जिन्हें वह दबा रही थी। मैं उठकर बाथरूम होकर आई तो मेरी ननद अपनी चूत खुजलाकर बोली, “भाभी अगर तुमने किसी लंड का इंतजाम नहीं किया तो मैं मर जाऊँगी। मुझे बचा लो मेरी प्यारी भाभी।”

मैंने मुस्कुराकर पूछा, “किसका लंड चाहिए?”

उसने जवाब दिया, “लंड किसी का भी हो, चलेगा। अब तो चूत इतनी बेसब्री हो चुकी है कि अगर मेरे बाप का भी मिल जाए तो इसकी आग ठंडी करने के लिए ले लूँगी।”

मैंने कहा, “ठीक है। अब मुकर मत जाना क्योंकि तुझे आज बाबूजी का लंड ही मिलने वाला है। तू बस ऐसे ही करना जैसे मैं कहती हूँ।”

वह मान गई। जब वह तैयार होने चली गई तो मैं बाबूजी की चाय लेकर उनके रूम में चली गई। मैंने जानबूझकर साड़ी का पल्लू नीचे गिरा रखा था, जिस कारण मेरे वक्ष आधे से अधिक नंगे हो रहे थे। सासू माँ अपने मायके जाने के लिए तैयार हो रही थीं। मैंने आगे झुककर चाय बाबूजी को दी और अपने कूल्हे इनके हाथ से रगड़ दिए।

 मैंने देखा कि उनका लंड उठक-बैठक करने लगा है। मैंने जानबूझकर उनसे कहा, “बाबूजी, देखो मेरा हाथ दुख रहा है। क्या यह सूज गया है? देखो तो सही।” इतना कहकर अपना हाथ उनके हाथ में दे दिया। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मलने लगे। मैं उनसे सटकर बैठ गई।

मैंने नोट किया कि बाबूजी मेरा हाथ सहलाने लगे और उनका लंड पजामे के अंदर सर उठाने लगा। मैंने उनको पूरी तरह उत्तेजित कर डाला। जब वे मेरे कंधे पर हाथ रखने लगे तो मैं जानबूझकर बोली, “अब मैं चलती हूँ। माजी का नाश्ता बनाना है।” मैंने हाथ छुड़ाया और चली गई, लेकिन बाबूजी का बुरा हाल था। वे अपने लंड को मसल रहे थे।

मैंने दीप्ति को कहा, “तुम माजी के जाने के बाद कमर में दर्द का नाटक करना और बाबूजी को कमर पर आयोडेक्स लगाने के लिए कहना। धीरे-धीरे नीचे तक उनका हाथ ले जाना। लेकिन ये सब उस वक्त करना जब मैं माजी को बस स्टैंड पर छोड़ने जाऊँ और घर में कोई न हो। देखना वे तुझे चोदने को तैयार हो जाएँगे।

मैंने उनकी चाय में शिलाजीत मिला दी थी। आज तेरी चुदाई पक्की हो जाएगी मेरी बन्नो। तुम यह निकर और टी-शर्ट पहन लो और ब्रा और पैंटी मत पहनना। तेरा बाप आज किसी को भी चोदने को तैयार हो जाएगा। तुम उस पर अपनी जवानी का जादू चला दो मेरी रानी। उसके बाद हम दोनों उसके लंड के मजे लेंगे। वह भी चूत का भूखा है मेरी जान।”

वह हैरान होकर मेरी तरफ देखने लगी। मैं फिर बाबूजी के कमरे में गई और उनकी जाँघों पर हाथ रखकर बातें करने लगी और उनके लंड को भी छू लिया। वे बेचैन होने लगे और मैं मुस्कुराकर बाहर आ गई। मैं थोड़ी देर में वापस आ गई और दीप्ति के कमरे में झाँकने लगी।

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दीप्ति ने आवाज लगाई, “पप्पा जरा मेरी कमर पर बाम लगा देना। मुझे बहुत दर्द हो रहा है।”

उसने ये कहते हुए अपनी टी-शर्ट ऊपर उठा डाली और उसका गोरा पेट नंगा हो गया। और जब उसने अपनी निकर्स को नीचे कर दिया तो उसकी जाँघ नजर आने लगी। मेरी आँख ने देखा कि बाबूजी की नजर में वासना की चमक उभर आई। उनकी आँखों में एक लाली नजर आने लगी।

वे अपनी बेटी के नजदीक आ गए और वासनात्मक नजरों से देखते हुए बोले, “बेटी क्या हुआ? दर्द कहाँ हो रहा है?” और उनका हाथ अपनी बेटी की कमर पर चला गया और उसकी कमर को सहलाने लगा। मैंने देखा कि अब बाबूजी नहीं बल्कि उनका लंड बोल रहा था।

उनकी आवाज से साफ जाहिर था कि कामवासना में वे बाप-बेटी के रिश्ते की पवित्रता को भूल गए थे। अब कमरे में सिर्फ चूत और लंड के मिलन का सीन बना हुआ था। बाबूजी के हाथ काँप रहे थे जब वे अपनी बेटी की कमर को सहला रहे थे। दीप्ति ने अपना सिर बाबूजी की छाती पर टिका दिया। दीप्ति की साँसें तेज हो चुकी थीं।

बाबूजी ने आयोडेक्स की शीशी उठाई और कमर पर लगाना शुरू कर दिया। दीप्ति की चुचियाँ अब उनके शरीर से सट गई थीं और बाबूजी और भी उत्तेजित होने लगे। बाबूजी ने अपना एक हाथ उसकी चुची पर रख दिया और धीरे से दबा दिया।

“ओह पापा धीरे से। मुझे बहुत घबराहट हो रही है। हाए मुझे दर्द हो रहा है। बाम मलिए ना पापा,” दीप्ति बोली और अपने बाप के शरीर से चिपक गई।

बाबूजी का लंड अब बेकाबू हो चुका था। दीप्ति ने अपनी निकर्स को और नीचे कर दिया जिसके साथ ही उसकी जाँघें पूरी तरह नंगी हो गईं। अब उसके कूल्हे बस उसकी टी-शर्ट से ही ढके हुए थे। बाबूजी ने काँपते हाथों से दीप्ति की कमर और जाँघों पर बाम लगाना शुरू कर दिया और दीप्ति और जोर से अपने बाप के शरीर से चिपकती चली गई। मैं मंत्रमुग्ध होकर कमरे के अंदर का सीन देख रही थी और मेरे जिस्म में भी कामग्नि जल रही थी।

“पापा मेरे कूल्हे भी दर्द कर रहे हैं। प्लीज वहाँ भी बाम लगा दो।”

बाबूजी ने बाम लगाना शुरू कर दिया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर उठा दिया। वे अपनी बेटी के चूतड़ो पर बाम लगाने लगे। दीप्ति ने अपना हाथ अपने पापा की छाती पर रख दिया और अपने होठ उनके होठों पर रख दिए। उसकी साँसें पापा की साँसों से टकरा रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

बाबूजी ने बेटी को बाँहों में भर लिया और उसके होठों को चूमने लगे। दीप्ति ने नाटक करते हुए अपने आप को छुड़ाने की झूठी सी कोशिश की, लेकिन बाबूजी ने उसे और भी कसकर जकड़ लिया और अपनी बेटी को बेतहाशा चूमने लगे। उनका लंड दीप्ति के पेट को टच कर रहा था।

बाबूजी ने उसकी चुचियाँ कसकर दबानी शुरू कर दीं और दीप्ति ने ड्रामा किया, “पापा यह क्या कर रहे हो? मैं आपकी बेटी हूँ। क्या यह पाप नहीं है? आप मुझे छोड़ दो। हम यह सब नहीं कर सकते। पापा मुझे छोड़ दो प्लीज।” वह भी जानती थी कि अब पापा वापस आने के काबिल नहीं रहे क्योंकि उनका लंड अब फटने के करीब ही था।

पापा ने अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर रखकर कहा, “मेरी बेटी, लंड और चूत का एक ही रिश्ता होता है और वह है चुदाई का रिश्ता। मेरी प्यारी बेटी, तुम भी लंड के बिना तड़प रही हो मुझे पता है और साथ ही तेरी भाभी भी चुदसी है क्योंकि उसका पति भी उसे चोद नहीं सकता।

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आ जाओ मैं तेरी चूत को चोदकर मस्त कर दूँगा। बेटी मेरा लंड कैसे दहक रहा है। तुम इसको हाथ में लेकर सहलाओ जरा। देखो तुम्हारी चुचियाँ कितनी कड़ी हो गई हैं। जल्दी से अपनी टी-शर्ट भी उतार दो। मेरा लंड तुझे चोदने को तड़प रहा है।”

दीप्ति भी मस्ती में भर उठी और अपनी टी-शर्ट उतारकर पूरी तरह नंगी हो गई और पापा के लंड को हाथ में भरके मुठियाने लगी। लंड की आँख से प्री-कम की दो बूँदें टपक पड़ीं और बाबूजी चुदाई की मस्ती में आ गए और जोर-जोर से अपनी बेटी की चुचियों को मुँह में लेकर चूसने लगे।

“बेटी तू कितनी सेक्सी हो गई है। मेरा लंड तेरी चूत का प्यासा है। अब मुझे अपनी चूत का स्वाद दिखाओ मेरी प्यारी बेटी और मेरे लंड को चूसकर इसका स्वाद देखो। जल्दी से। मैं आज सवेरे से ही चोदने के लिए तड़प रहा हूँ। लाओ अपनी टाँगें खोलकर अपनी चूत का दीदार तो करवाओ।”

दीप्ति ने अपनी जाँघें खोल दीं और उसकी चूत मुस्कुरा उठी क्योंकि वह आज पहली बार किसी असली लंड से चुदाई करने वाली थी। पापा ने अपना मुँह उसकी चिकनी चूत में घुसा दिया और अपनी जीभ चूत की फाँकों के अंदर डाल दी।

“अहह पापा यह क्या कर दिया मेरी चूत को? यह तो पानी छोड़ने लगी है। चूस लो मेरी बुर को पापा। यह आज चुदाई के लिए तड़पती है। लाओ मैं आपके लंड को चूस लेती हूँ। मुझे चोद डालो आज। चोद दो अपनी बेटी को मेरे पापा।”

इसके साथ ही दीप्ति ने पापा का लंड अपने मुँह में ले लिया और लगी चूसने उनके लंड को। लंड आग की तरह दहकने लगा। बाबूजी अपने चूतड़ आगे-पीछे करने लगे। दीप्ति बाबूजी के लंड को गले के भीतर तक ले गई और कराहने लगी। उधर बाबूजी की जीभ दीप्ति की चूत में पूरी तरह समा चुकी थी और उसकी चूत का रस बाबूजी के मुँह से बहने लगा, जैसे कि उनके मुँह से लार टपक रही हो। दीप्ति की चूत झाड़ रही थी।

तभी मैंने कमरे में एंट्री कर दी और बोली, “साले बाबूजी इतने कमीने निकले कि अपनी ही बेटी को चोदने के लिए तैयार हो गए। बेटीचोद साले मैं क्या मर गई थी? मुझे कौन चोदेगा बहनचोद? तेरा बेटा तो बहनचोद मुझे छोड़कर चला गया और तू भी साले अपनी बेटी को ही चोद रहा है। मेरा क्या होगा?”

बाबूजी मुझे देखकर घबरा गए और फिर संभालकर बोले, “बेटी तू भी आ जा मेरी बेटी। मेरा लंड मेरी बहू और बेटी के लिए काफी है। मैं तुम दोनों को चोदकर शांत कर दूँगा। आजा मेरी रानी बहू। अगर बेटा चला गया है तो क्या हुआ? बाप तो जिंदा है। मेरे पास आ मैं तेरी चुचियों को भी चूसता हूँ। आ मेरी बेटी तू भी कोई कम सेक्सी नहीं हो। तेरा जिस्म भी चुदाई की आग में जल रहा होगा। ला मेरे पास आ मैं तुझे भी तृप्त कर दूँगा।”

मैंने फटाफट अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और बिस्तर पर आकर बाबूजी के जिस्म को चाटने लगी और दीप्ति की चुचियाँ दबाने लगी। बाबूजी ने अपना हाथ मेरी गांड पर फिराना शुरू कर दिया। मैंने बाबूजी का लंड हाथ में ले लिया और उसे सहलाना शुरू कर दिया। उनका लंड पूरी तरह कड़ा हो चुका था।

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मैंने उसे चाटना शुरू कर दिया। मेरी चूत भी पनिया गई थी। मैंने कहा, “आप पहले दीप्ति को चोदकर शांत कर दो। इसकी चूत अभी कुँवारी है। लेकिन जरा प्यार से चोदना अपनी बिटिया को।” ये कहते हुए मैंने दीप्ति की टाँगें चौड़ी कर दीं और उसकी चूत पर बाबूजी का लंड टिका दिया।

उनके टट्टों पर हाथ फिराया जिस कारण बाबूजी के मुँह से आह निकल गई। मैंने उनका लंड दीप्ति की चूत पर रगड़ा जिसमें से पहले ही पानी निकल रहा था। उसकी खुजली इतनी बढ़ गई कि वह अपने आप पर काबू न रख सकी। “पापा अब और मत तड़पाओ। मेरी चूत में आग लगी हुई है।

आपका लंड रगड़ना मुझे पागल बना रहा है। पापा मेरी चूत के अंदर पेल दो अपना लौड़ा। पापा मेरे साथ सुहागरात मना लो। मुझे मम्मी की तरह चोद डालो मेरे प्यारे पापा। मुझे पेल दो पापा प्लीज। भाभी मेरी चूत में पापा का लंड पेल दो मेरी प्यारी भाभी। उसके बाद तुम मजे ले लेना पापा के लंड के साथ। मैं तेरी विनती करती हूँ। मेरी आग बुझा दो प्लीज।”

बाबूजी का लंड पकड़कर मैंने दीप्ति की चूत के मुख पर टिकाया और कहा, “बाबूजी पेल दो अपना लंड अपनी बेटी की बुर में। देखो कैसे तड़प रही है साली। कैसे दहक रही है इसकी चूत। अब तो इसकी आग आपका लंड ही शांत कर सकता है। उड़ा दो इसकी चूत की धज्जियाँ। पेल दो अपनी बेटी को। डाल दो अपना लंड-रस इसकी प्यासी चूत में।”

बाबूजी ने देर करना मुनासिब नहीं समझा और धक्का मारके लंड पेल दिया। उनका आधा लंड पहले धक्के में चूत में समा गया। दीप्ति चिल्लाई, “पापा बहुत दर्द हो रहा है। लगता है मेरी सील टूट गई है। बाहर निकाल लो अपना लंड। दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा पापा प्लीज।” लेकिन बाबूजी ने धक्के मारना जारी रखा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उनका लंड अपनी बेटी की चूत के अंदर-बाहर हो रहा था। दीप्ति की चूत से लहू बहने लगा। बाबूजी भी पुराने खिलाड़ी थे। “बेटी दर्द थोड़ी देर में खत्म हो जाएगा। संध्या तू दीप्ति की चुचियाँ चूसना शुरू कर दो और इसकी चूत को भी सहलाओ। साली बहुत टाइट है इसकी चूत, लेकिन मैं आज इसे चोदकर ठंडी कर दूँगा। ले बेटी ले लो अपना पापा का लंड अपनी प्यासी बुर में और मिटा दो इसकी प्यास।”

मैंने अपनी जीभ से दीप्ति की चुचियाँ चाटना शुरू कर दिया और अपनी उँगलियों से उसकी चूत के आसपास का इलाका उत्तेजित करना शुरू कर दिया। उसका दर्द कम हो गया और उसे मजा आने लगा। वह चूतड़ उछालकर बाबूजी के धक्कों का जवाब देने लगी।

“पापा मेरा दर्द खत्म हो गया है। आपके लंड से मुझे जन्नत का मजा आ रहा है। आपका लंड मेरी चूत को स्वर्ग दिखा रहा है। पेलो अपना लंड मेरी चूत के अंदर। चोद दो अपनी बेटी को। ले लो मेरी कुँवारी चूत के मजे। जोर से चोदो मुझे।”

मैंने बाबूजी के लंड पर उँगलियाँ फेरीं और उनके चूतड़ पर थपकी दी और कहा, “बाबूजी चोदो अपनी हरामी बेटी को साले। जोर से लगा धक्के बहनचोद। देखता क्या है साले? तुझे आज अपनी जवान और कुँवारी बेटी की चूत का मजा मिल रहा है। साले बन गया है तू बेटीचोद और थोड़ी देर में बहुचोद भी बन जाएगा। साले चोद डाल इसको। चोद डालो अपनी बेटी को। वह कब से प्यासी है लंड की। मिटा तो इसकी प्यास। छोड़ दो अपना पानी इसकी चूत में।”

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बाबूजी भी पागलों की तरह धक्के मारने लगे। कमरे में घचाघच की आवाजें आने लगीं। दीप्ति के मुँह से अहह, ओह की आवाजें आ रही थीं। बाबूजी ने अपनी बेटी के चूतड़ो को कसके पकड़ रखा था और उसे पेल रहे थे।

“अहह बेटी मेरा भी टाइम नजदीक आ रहा है। मैं भी झड़ने वाला हूँ। हाँ मैं सच में बेटीचोद बन गया हूँ और मुझे खुशी है कि तुमने अपनी कुँवारी चूत मेरे लिए संभाल के रखी हुई थी। हाँ बेटी चुदवा ले मुझसे मेरी प्यारी बेटी। कसम तेरी जवानी की आज तक इतना मजा नहीं आया। क्या चूत है तेरी। ले लो मेरा पानी तेरी चूत में जा रहा है। मेरा पानी तेरी कोख में गिर रहा है। तेरा बाप झाड़ रहा है। मैं गयाआआआ।”

यह कहते हुए बाबूजी ने पिचकारी दीप्ति की चूत में छोड़ दी और उनका लंड छपक की आवाज से चूत से बाहर निकल आया। मैंने पहले उनका लंड चूसकर साफ किया और फिर अपनी ननद की चूत को चाटा और हम दोनों ही बाबूजी की बगल में लेट गईं। थोड़ी देर बाद बाबूजी ने मेरी भी चुदाई की और ऐसी चुदाई की कि मैं आज भी अपने आपको जन्नत में महसूस करती हूँ।

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