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शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 4

अक्टूबर 13, 2026 by hamari Leave a Comment

Hardcore XXX Kahani

हेल्लो मैं आपकी फ्रेंड वैशाली कहानी का अगला भाग लेकर आई हूँ. आपने मेरी कहानी का पिछला भाग शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 3 पढ़ा होगा. अब आगे- उसके इस तरह अंदर आजाने से में एक दम घबरा गयी, और उसकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी….. Hardcore XXX Kahani

फिर मुझे पीछे से उसकी कदमो की आहट नज़दीक आती हुई सुनाई दी, मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा…. में अध नंगी हालत में उसके सामने खड़ी थी…. फिर कुछ देर खोमाशी के बाद उसने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जाकड़ लाया….. उसके दोनो हाथ मेरी स्तनों पर थे…. और उसने मेरी स्तनों को बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया…

सुशांत: आहह साली क्या स्तन है तेरे…. आज तो इनको निचोड़ दूँगा……

में: सुशांत तुम ये ठीक नहीं कर रहे हो….

सुशांत: चुप साली वेश्या अब ज़्यादा नखरे करेगी तो, तेरा और तेरी बेटी का जीना मुश्किल कर दूँगा….. चल मेरे साथ……

ये कहते हुए, उसने मेरा हाथ पकड़ा और खिंचते हुए रूम में ले गया…. रूम के अंदर आते ही उसने मुझे बेड पर धकेल दिया…..में अपने आप को सुशांत के सामने इस हालत में पाकर अपनी नजरे नहीं उठ पा रही थी…वो कमीनी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा रहा था….

में इस कदर घबराई हुई थी, कि मेरे सोचने समझने की शक्ति भी ख़तम हो गयी थी…. में अब बेड पर अधनंगी लेटी हुई थी…… उसने मेरी तरफ देखते हुए, अपने लंड को एक बार अपने अंडरवेयर के ऊपर से मसला, और फिर एक ही झटके में अपने अंडरवेयर को उतार कर फेंक गया…. उसका का लंड मेरी आँखों के सामने झटके खा रहा था….. मैंने एक पल के लिए ही उसके लंड की तरफ देखा और फिर अपने नजरे घुमा ली..

सुशांत: (बेड पर चढ़ते हुए) क्यों साली पसंद आया अपनी बेटे के यार का लंड… देख इसे इसी के ऊपर तेरी बेटी चढ़ कर ठुकती है….

मेरे दिल की धड़कने अब और तेज चलने लगी थी….. में अपने आप को उसके सामने इस क़दर महसूस कर रही थी कि, में कुछ बोल भी नहीं पा रही थी…. वो बेड पर धीरे धीरे मेरे पास आ रहा था….फिर अचानक से उसने मुझे मेरी टाँगों से पकड़ कर अपनी तरफ ज़ोर से खींच दिया….

में बेड पर घिसटते हुए लेट गयी…. “अह्ह्ह्ह सुशांत” मेरा सर बिस्तर से जा टकराया….. पर उस पर तो जैसे कोई शैतान सवार हो गया था…. उसने आव देख ना ताव, और मेरी टाँगों को घुटनो से पकड़ कर फेला दिया… मैंने जो वी शेप पैंटी पहनी थी…

वो मुश्किल से मेरी योनि की फांकों को ढक पा रही थी…. मेरी टाँगों के फेलने के कारण मेरी योनि की फांके पैंटी की साइड से बाहर आ गयी….. मैंने शरम और हया से अपनी आँखें बंद कर ली, में जान चुकी थी, कि रश्मि की वजह से जिस दलदल में फँस चुकी हूँ, उससे निकलने का यही एक रास्ता है….

मैंने एक बार फिर आख़िरी बार सुशांत को समझाने की कोशिश की, “देखो सुशांत ये तुम ठीक नहीं कर रहे हो…… तुम बहुत बड़ा पाप करने जा रहे हो….. अभी भी वक़्त है, में किसी से कुछ नहीं कहूँगी…”

सुशांत: चुप साली वेश्या मुझे ज़्यादा समझाने की कोशिश ना कर….

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ये कहते हुए, उसने एक हाथ से पैंटी को साइड में कर दिया…. उसकी इस हरकत से में एक दम चोंक गयी…… इससे पहले कि में कुछ कर पाती, सुशांत ने अपने लंड का सुपाडा मेरी योनि के छेद पर टिका कर ज़ोर दार धक्का मारा….. मुझे सहवास किए लगभग ६ साल हो चुके थे…… मेरी योनि एक दम सुखी थी….

जिसकी वजह से जब सुशांत के लंड का सुपाडा मेरी योनि की फांकों को फैलाता हुआ अंदर घुसा तो में दर्द से एक दम चिल्ला उठी……. “अहह माआ ओह मर गइई.” एक तो मेरी योनि एक दम सुखी थी, और दूसरा सुशांत का लंड लंबा और मोटा था…..

जब वो मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुसा मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरी योनि के दीवारें छिल गयी हो….. में दर्द से छटपटा रही थी…. पर सुशांत को उससे कोई असर नहीं हो रहा था…. उसने मेरी टाँगों को और ऊपर उठा कर फेला दिया….. और फिर से एक ज़ोर दार झटका मारा..

इस बार धक्का इतना जबरदस्त था कि, मेरा पूरा बदन दर्द से काँप गया….. और मेरी आँखों से आँसू निकलने लगी…. इस बार सुशांत का लंड पूरा का पूरा मेरी योनि में उतर चुका था….. “अहह बहुत दर्द हो रहा है माआअ में मर जाऊंगी” में दर्द से सिसक रही थी.

पर सुशांत किसी बात की परवाह नहीं कर रहा था…. उसका लंबा लंड जड तक मेरी योनि में घुस चुका था….. में हैरान और परेशान ये सब देखते हुए सोच रही थी कि, इस उम्र में इसका लंड इतना बड़ा कैसे हो सकता है…. मैंने दो बेटियों को जनम दिया था….

इसके बावजूद भी मुझे अपनी योनि उसके लंड के चारो और कसी हुई मालूम हो रही थी…. उसने अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा…. जिससे एक बार फिर उसका लंड मेरी योनि की दीवारों से रगड़ खाने लगा…… और में दर्द से तिलमिलाने लगी…

“फिर उसने अपने लंड को बाहर निकल लिया…. और मेरी पैंटी को दोनो साइड से पकड़ कर मेरी टाँगों से खेंचते हुए निकाल कर एक तरफ फेंक दिया….. फिर उसने मेरी टाँगों को पकड़ कर ऊपर उठा दिया…. इतना ऊपर कि मेरे घुटने मेरी स्तनों पर दब गये…..

में: आह सुशांत प्लीज़ ऐसे ना करो….मुझ पर थोड़ा सा रहम खाओ….

पर सुशांत तो जैसे मेरे बात सुन ही नहीं रहा था…. उसकी आँखें मेरी योनि पर गड़ी हुई थी.. और उसकी आँखों में वासना साफ झलक रही थी… उसने मेरी योनि पर झुकते हुए एक ही पल में मेरी योनि पर मूह लगा दिया…. आज तक कभी मेरी योनि को मेरे पति ने भी सक नहीं किया था…..

ऐसा अहसास मुझे पहली बार होने वाला था….. जैसे ही उसका मूह मेरी योनि पर लगा….. में तड़पते हुए एक दम से सिसक उठी….. “अहह सुशांत ये ये क्या कर रहे हो ओह्ह सुशांत में पागल आह आहह ओह” मेरे पूरे बदन में सरसराहट दौड़ गयी…..

ना चाहते हुए भी मेरे मूह से सिसकारियाँ निकलने लगी….. पहली दफ़ा कोई मेरी योनि चाट रहा था… इसके बारे में सिर्फ़ सुना था…. और सच बता रही हूँ… वो पल आज भी मेरे बदन को रोमांच से भर जाता है….. वो अपनी जीभ निकाल कर पागलों की तरह मेरी योनि की फांकों और योनि के छेद पर रगड़ रहा था…..

में मज़े से तिलमिलाए जा रही थी….. मुझे ऐसा लग रहा था कि, अपने होश हवास खो बैठूँगी….. और सच में हो भी ऐसे ही रहा था….. फिर सुशांत ने मेरी योनि की फांकों को अपने हाथों से पूरा फेला दिया, जिससे मेरी योनि का क्लिट जो कि उस समय फूल कर आधे इंच का हो चुका था… उसे अपने मूह में भर कर जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया……

में: अहह ओह प्लीज़ छोड़ दो अहह सीईईईईईईई उंह अहह उंघह ओह्ह्ह्ह सुशांत……

मुझे अब साँस लेने में भी तकलीफ़ होने लगी थी…. मुझे ऐसा लगने लगा था कि, अब में कई सालों बाद झड़ने के करीब पहुँच चुकी हूँ…. पर अचानक सुशांत ने अपना मूह मेरी योनि से हटा लिया, और अपने लंड के सुपाडे को मेरी योनि के छेद पर लगा कर मेरी तरफ देखते हुए कहा…..

सुशांत: क्यों वेश्या मज़ा आ रहा था ना…… अब देख तेरी योनि कैसे फाड़ता हूँ…. आज तेरी योनि में लंड ठोक ठोक कर सूजा दूँगा…..

फिर सुशांत ने अपने लंड के सुपाडे को मेरी योनि के छेद पर दाबना चालू कर दिया. मुझे लगा एक बार फिर से मेरी जान निकल जाएगी….. पर इस बार मुझे दर्द नहीं हुआ… क्योंकि मेरी योनि अब सुशांत के थूक से सनी हुई थी… और मुझे लग रहा था कि आज कई सालो बाद मेरी योनि ने भी पानी निकाला है….. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

सुशांत का लंड फिसलता हुआ मेरी योनि में समाता जा रहा था….. उसका सेब जैसा मोटा सुपाडा जब मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर जा रहा था, तो मेरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ती जा रही थी…… मेरा बदन थरथर काँप रहा था…..

योनि के अंदर लंड के घर्षण के कारण में एक दम मदहोश हो गयी…… और अपने होंठो को दाँतों से काटते हुए, बेड शीट को अपने हाथों में कस के पकड़ लिया… मुझे सुशांत का लंड अपनी बच्चेदानी से टकराता हुआ महसूस हुआ, और में एक दम से सिसक उठी……….

सुशांत मेरे ऊपर झुक गया, और मेरे होंठो की तरफ अपने होंठो को बढ़ाने लगा….. उसके होंठो पर मेरी योनि का पानी अभी भी लगा हुआ था… जिसे देख कर मैंने घिन से दूसरी तरफ मूह घुमा लिया…..मेरी इस हरक़त पर वो गुस्से से बोला.. “क्या वेश्या तेरी ही योनि का पानी है” और ये कहते हुए उसने मेरे बालों को खेंच कर मेरे फेस को सीधा कर दिया……

सर के बाल खिच जाने के कारण में दर्द से कराह उठी….. और उसने मेरे होंठो को अपने होंठो में भर कर चूसना शुरू कर दिया….. सुशांत मेरे होंठो को चूस्ते हुए,अपने दोनो हाथों को मेरी पीठ के पीछे लेगया, और ब्रा के हुक्स खोल कर ब्रा को निकालने लगा….

में पहले से ही उसके सामने अध नंगी लेटी हुई थी. और में नहीं चाहती थी कि, मेरे तन पर बचा ये आख़िरी कपड़ा भी उतर जाए.. इसलिए मैंने अपने दोनो हाथों से ब्रा के कप्स को पकड़ लिया…. पर उसके सामने अब मेरी कहाँ चलने वाली थी….. उसने ब्रा को खेंचते हुए मेरे बदन से अलग कर बेड पर फेंक दिया…..

मैं अपने दोनो हाथों से अपनी स्तनों को ढकने की कोशिश करने लगी….. “चल हाथ हटा साली, अब क्या बचा है जो तू नखरे कर रही है…. लंड तो पहले ही योनि में लिया हुआ है तूने…..” ये कहते हुए उसने मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर स्तनों से हटाते हुए मेरे सर के दोनो तरफ बेड पर टिका दिया……..

और मेरे हाथों को पकड़े हुए, मेरी स्तनों पर झुकते हुए, मेरे एक स्तन को मूह में भर लिया….. उसकी गरम जीभ को अपने स्तनाग्र पर महसूस करते ही, में एक दम से तड़प उठी…… मेरी आँखें मस्ती में बंद हो गयी…… ना तो मुझे अच्छा लग रहा था, और ना ही मुझे रोना आ रहा था… पता नहीं अजीब से स्थिति थी…. वो जितना हो सकता था, मूह कर खोल कर मेरे राइट साइड वाले स्तन को मूह में भर कर चूसने लगा….

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में: अहह सुशांत प्लीज़ ऐसे ना करो……

सुशांत: (अपने मूह को स्तनों से हटाते हुए) क्यों ना करूँ….. (और फिर उसने उस स्तन को मूह में भर लिया.)

में: उंह श्ह्ह्ह्ह्ह सुशांत मुझे कुछ हो रहा है…

इस बार उसने कोई जवाब नहीं दिया, और मेरे स्तनाग्र को चूस्ते हुए, अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला, और फिर धीरे धीरे अपने लंड को मेरी योनि के अंदर बाहर करने लगा…… आज कई बरसो के बाद ठुक रही थी….. इसलिए में अपना आपा खोती जा रही थी….

सुशांत के धक्कों की रफ्तार लगतार बढ़ती जा रही थी…. जब उसके लंड का सुपाडा मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होता, मेरे पूरे बदन में सिहरन दौड़ जाती…. और में मस्ती में तड़प उठती… मेरे दोनो स्तनाग्र एक दम तन कर टाइट हो चुके थे……

मुझे अपने स्तनाग्र में सरसराहट होती साफ महसूस हो रही थी… उसके हर झटके से मेरा पूरा बदन हिल जाता…. में अब उसका बिलकुल भी विरोध नहीं कर रही थी….. उसने मेरे हाथों को छोड़ कर अपना मूह मेरी स्तनों से हटाया, और अपने लंड के झटकों को रोक मेरी तरफ देखने लगा…….

मैंने अपनी आँखें खोल कर उसकी तरफ देखा, तो वो मेरे तरफ देखते हुए मुस्करा रहा था….. फिर सुशांत ने अपने होंठो को मेरे होंठो के तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….. अब में अपने होश हवास पूरी तरह खो चुकी थी….. मैंने अपनी आँखें फिर से बंद कर ली….

और वो भूखे जानवर के तरह मेरे होंठो को सक करने लगा… वो कभी मेरे नीचे वाले होंठ को चूस्ता, तो कभी ऊपर वाले होंठ को कभी वो अपने दाँतों को मेरे होंठों में गड़ा देता…… तो मुझे दर्द का अहसास होता… मेरा पूरा बदन मस्ती के कारण काँप रहा था…..

वो ५ मिनिट तक मेरे होंठो को निचोड़ता रहा…. और जब उसका मन भर गया तो, वो मेरे ऊपर से उठ गया….. उसका तना हुआ लंड मेरी योनि से पच की आवाज़ से बाहर आ गया….. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आँखें खोल कर उसकी तरफ देखा, उसका लंड मेरी योनि से निकल रहे पानी से एक दम भीगा हुआ था…..

मेरे ऊपर से उठते हुए, उसने मुझे मेरे बालों से पकड़ कर खड़ा किया…… और बेड से नीचे उतारते हुए मुझे सोफे पर धकेल दिया…… में सोफे पर घुटनो के बल जा गिरी, फिर उसने मेरे बालों को पकड़ कर सोफे पर डॉगी स्टाइल में कर दिया….

और पीछे से अपने लंड को मेरी योनि के छेद पर रख कर जोरदार धक्का मारा. धक्का इतना जबरदस्त था कि, में आगे की तरफ लूड़क गयी…..उसने मुझे मेरे बलों से खेंचते हुए फिर सीधा किया…..और फिर मेरी नितंब को दोनो हाथों से फेला कर पकड़ लिया…..

सुशांत: अब देख में तेरी योनि का क्या हाल करता हूँ…..

ये कहते हुए, उसने अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाला, और फिर एक ही बार में मेरी योनि की गहराइयों में उतार दिया…. उसके लंड का सुपाडा सीधा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया…. दर्द और मस्ती से भरी लहर मेरे पूरे बदन में दौड़ गयी और में एक दम से सिसक उठी “अहह उंघह ओह” फिर तो जैसे उस पर कोई भूत ही सवार हो गया हो…..

वो अपना लंड पूरा निकाल निकालकर मेरी योनि में ठोक रहा था………. और में उसके हर धक्के के साथ आहह ओह्ह किए जा रही थी….. उसका का लंड किसी एंजिन के पिस्टन के तरह पूरी रफ़्तार से मेरी योनि के अंदर बाहर हो रहा था….

उसके लंड के सुपाडे की रगड़ अपनी योनि की फांकों पर महसूस करके में अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी…. अब मेरी सिसकारियाँ पूरे रूम में गूंजने लगी थी……. “अहह ओह सुशांत धीरे आ सीईइ में गइईए आह आह सुशांत मुझी मुझीई अहह.”

सुशांत: हां ले साली आहह और्र ले, आज तेरी योनि फाड़ कर ही रहूँगा..ले मेरा लंड अपनी योनि में आह…..

मुझे अब बरदाश्त नहीं हो रहा था….. में झड़ने के बेहद करीब थी… मैंने सोफे के साइड को अपने हाथों में कस के दोबच लिया…. शायद सुशांत ये जान चुका था कि, में झड़ने के बेहद करीब हूँ…. इसीलिए उसने और तेज़ी से झटके लगाने शुरू कर दिए…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मेरी योनि में बरसो से जमा लावा एक दम से फॅट पड़ा….. और में चीखते हुए झड़ने लगी….. मेरा पूरा बदन रह रह कर झटके खा रहा था….. तभी सुशांत के धक्को की रफ़्तार और बढ़ गयी….. और वो घुरते हुए अपने वीर्य को मेरी योनि में छोड़ने लगा……

मुझे अपनी योनि उसके वीर्य से भरती हुई साफ महसूस हो रही थी… उसके लंड से गरम पानी निकल कर मेरे पेट की ओर जाता हुआ साफ महसूस हो रहा था….. थोड़ी देर वैसे ही वो मेरी योनि में लंड डाले खड़ा रहा…… और फिर उसने अपने लंड को बाहर निकाल लाया, और फिर मेरी नितंब पर एक जोरदार झापड़ मारते हुए बोला” उठ साली हो गया चल बेड पर चल थोड़ी देर बाद फिर से तेरी योनि की ठुकाइ करता हूँ……”

में तेज़ी से साँसे लेती हुई सोफे से खड़ी हुई, जैसे ही में खड़ी हुई, मुझे अपनी योनि से कुछ चिपचिपा निकल कर अपनी जाँघो पर जाता हुआ महसूस हुआ, जब मैंने नीचे देखा तो उसका वीर्य और मेरी योनि का पानी मेरी जाँघो योनि की फांकों और यहाँ तक मेरी नितंब पर लगा हुआ था…..

अपनी सहवास लाइफ में आज तक में इस तरह गीली नहीं हुई थी……. ये सब मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था…… में सीधा बाथरूम में चली गयी, और अपने आप को साफ किया…. जब में बाथरूम से कपड़े पहन कर बाहर आई, तो सुशांत मुसकुराते हुए मेरी तरफ देख कर बोला “तुझे किसने कहा कपड़े पहनने को.”

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में उसकी ये बात सुन कर थोड़ा सा घबरा गयी…..

में: सुशांत मुझे बहुत देर हो चुकी है, मुझे जाने दो…. और वो क्लिप मुझे दे दो…

सुशांत: जाना ही तो चली जाओ…… पर अभी वो क्लिप में तुम्हें नहीं दे सकता….. मुझे अभी मेरे दोस्त का फोन आया था. मुझे वहाँ जाना है…..

में: देखो सुशांत अब तुम ये ठीक नहीं कर रहे हो….. मुझे क्लिप दे दो….

सुशांत: (उठ कर मेरे पास आते हुए) वो अभी मेरे पास नहीं… वो मेरे रूम में है, ये घर तो किसी दोस्त का है….. अगली बार जब आओगी, तो वो क्लिप्स ला दूँगा…..

ये कहते हुए, उसने मुझे फिर से बाहों में भर लिए, और अपने हाथों को मेरी कमर के पीछे ले जाते हुए, मेरी नितंब को मसलने लगा….. फिर उसने मेरे होंठो को एक बार चूसा और बोला…. “अब चलो, मुझे भी जाना है.”

अब में कर भी क्या सकती थी, में रूम से बाहर आई, और उसके साथ घर से निकल गयी…… जिस शिकारी के चंगुल से में अपनी बेटी को आजाद कराने आयी थी, में आज खुद उसका शिकार हो गयी थी. मैंने अपने घर के लिए ऑटो पकड़ा और घर वापिस आ गयी…. जब घर पहुंची तो विमला घर जाने को तैयार थी……

विमला: आ गयी दीदी में तो जाने ही वाली थी…..

में: अर्रे कुछ देर बैठ ना…..

विमला: नहीं दीदी देर हो जाएगी…… अच्छा दीदी क्या मैं रश्मि को कुछ दिनो के लिए साथ ले जाउ….

में: (थोड़ी देर सोचने के बाद) हां हां क्यों नहीं…..

फिर विमला रश्मि और अपने बच्चो के साथ घर चली गयी……. उनके जाने के बाद में बाथरूम में गयी, और कपड़े उतार कर नहाने की तैयारी करने लगी….. मैंने देखा मेरी जांघे अभी भी उसके वीर्य से चिपचिपा रही थी..

मेरी योनि से अभी भी पानी निकल कर बाहर आ रहा था…. मेरी पैंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी….. में अभी नहाने ही वाली थी कि, फोन की रिंग बजी मैंने अपनी टाँगों को साफ किया, और बाथरूम में रखी मॅक्सी पहन कर रूम में गयी…. और फोन उठाया……

में: हेलो कौन…..

सुशांत: हाँ रानी में हूँ ! घर ठीक से पहुँच तो गयी ना…..

में: (उसकी आवाज़ सुन कर मुझे फिर से गुस्सा आ गया) अब क्यों फोन किया है. तुम हमारा पीछा छोड़ क्यों नहीं देते…..

सुशांत: छोड़ दूँगा साली, अच्छा अभी अभी मैंने रश्मि को तेरी जेठानी के साथ जाते देखा है…….

में: तो तुझे मतलब…..

सुशांत: घर पर अकेली हो.. बोलो तो आ जाउ…..

में: नहीं में तुम्हारी परछाई भी अपने घर पर नहीं पड़ने देना चाहती..

सुशांत: ओह्ह इतना गुस्सा…. मुझे लगता है कि, तेरे बेटी की क्लिप को बाज़ार में बेचना ही अच्छा रहेगा….. और हां सुन साली आज तो तेरी नंगी मूवी भी बन गयी. उसे भी साथ में बेच दूँगा.

में: नहीं सुशांत तुम ऐसा नहीं करोगे….

सुशांत: क्यों क्यूँ नहीं कर सकता….. चल अब अपनी योनि की तेल से मालिश करके तैयार हो जा… में आ रहा हूँ….

ये कहते हुए उसने फोन बंद कर दिया…… में वही बैठी अपनी किस्मत को रोती रही, और उस मनहूस घड़ी को कोसने लगी. जब मैंने उसे रूम रेंट पर दिया था…. मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि, रश्मि के साथ साथ मैंने भी बहुत बड़ी गलती कर दी है…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

में वही बैठी यही सब सोचती रही….. कि बाहर डोर की बेल की आवाज़ से मेरा ध्यान टूटा…. मुझे पता था कि बाहर सुशांत ही होगा…. मैं अपने आप को संभालते हुए, बाहर गयी और गेट खोला……सामने सुशांत खड़ा था….

वो बिना कुछ बोले अंदर आ गया….. में उसके इरादों को अच्छे से जानती थी….. अब मुझे ही कुछ करना था…. में सोच रही थी कि में उसे बातों से मना लूँगी….. मैंने गेट बंद किया और, उसके पीछे अपने रूम में आ गयी. वो बेफिक्र होकर मेरे बेड पर बैठ गया…..

सुशांत: तो बता कैसा लगा मेरा लंड अपनी योनि में लेकर?

में: मुझे तुम्हारी ये फालतू बकवास नहीं सुननी……

सुशांत: ठीक है में भी ज़्यादा बोलने के मूड में नहीं हूँ…..

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ये कहते हुए उसने अपनी पेंट खोल कर नीचे सरका दी, उसका लंड एक दम तना हुआ था, और झटके खा रहा था…उसने मुझे इशारे से पास आने को कहा.जैसे ही में उसके पास गयी, उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपने सामने नीचे ज़मीन पर बैठा दिया, और फिर मेरे खुले हुए बालों को पकड़ कर बोला….”ले चूस इसे.”

मैंने इससे पहले कभी लंड को मूह में नहीं लिया था. इसके बारे में सिर्फ़ सुना था.. और मुझे ये सब करना अच्छा भी नहीं लगता था… “नहीं सुशांत में नहीं ले सकती” सुशांत ने मुझे गुस्से से देखा और घुरते हुए बोला…. “साली जब अपनी योनि चुसवा सकती है, तो मेरा लंड नहीं चूस सकती चल चूस इसे.”

ये कहते हुए उसने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा, और दूसरे हाथ से मेरे बालों को खिंचते हुए, अपने लंड के सुपाडे को मेरे होंठो पर रगड़ने लगा….. में उसके सामने दर्द से छटपटा रही थी…पर उसके ऊपर तो जैसे कोई असर नहीं हो रहा था…..

आखिरकार मुझे अपना मूह खोल कर उसके लंड के सुपाडे को मूह में लेना पड़ा…. “अह्ह्ह्ह हां चूस इसे आह” सुशांत ने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा….. मुझे जितना आता था में उसी तरह से उसके लंड को चूसने लगी…. वो पैर नीचे लटका कर बैठा हुआ था… और फिर वो पीठ के बल बेड पर लेट गया…..

फिर उसने मेरे बालों को पकड़ कर खेंचा, तो उसका लंड मेरे मूह से बाहर आ गया…. दूसरे हाथ से उसने अपने बॉल्स को पकड़ कर बोला “चल इसे भी चाट” में किसी वेश्या के तरह उसकी हर बात मानने को मजबूर थी…. मैंने अपनी जीभ निकाल कर उसके टट्टो को चाटना शुरू कर दिया…..

मुझे ये सब करने में बहुत घिन आ रही थी….. पर मजबूरी ही ऐसी थी…. फिर उसने मुझे और ऊपर उठा कर अपने ऊपर चढ़ा लिया…. में उसकी कमर के दोनो तरफ घुटनो के बल बैठ गयी….. मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि, अब वो क्या करने वाला है…. उसने मेरी नाइटी को दोनो तरफ से पकड़ कर मेरी कमर तक ऊपर उठा दिया. मैंने नाइटी के नीचे कुछ नहीं पहना हुआ था.

उसने मेरी योनि की क्लिट को अपनी उंगलियों में लेकर मसलते हुए कहा….. “वाह तेरी योनि तो अभी तक पनियाई हुई है.” फिर उसने मेरी नितंब को दोनो तरफ से पकड़ कर मुझे थोड़ा ऊपर उठाया, और अपने लंड के सुपाडे को योनि के छेद पर टिकाते हुए, मुझे नीचे की और दबाने लगा…..

उसका लंड मेरी योनि के छेद को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा….. जैसे ही उसके लंड का गरम सुपाडा मेरी योनि के अंदर घुसा मेरे मूह से मस्ती भरी आह निकल गयी…. और में अपने आप ही उसके ऊपर झुकती चली गयी…. भले ही में सब मजबूरी में कर रही थी…. पर कई सालो के बाद ठुकने से मेरे अंदर की आग और भड़क चुकी थी…..

उसने मेरे गले के पीछे हाथ डाल कर अपने ऊपर झुकाते हुए मेरे होंठो को अपने होंठो में भर लिया….. और नीचे से अपनी कमर को पूरी ताक़त के साथ ऊपर की तरफ उछाला….. जिसके कारण सुशांत के लंड का सुपाडा मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुस गया……

मेरे बदन में करेंट सा दौड़ गया….. और मैंने उसके बाजुओं को कस के पकड़ लिया…. उसका पूरा लंड मेरी योनि में समाया हुआ था…… और वो बेदर्दी से मेरे होंठो को चूस रहा था…. उसका एक हाथ मेरे नितंबो पर था, और दूसरे हाथ से मेरे स्तनों को दबा दबा कर खेंच रहा था….

वो मेरे नितंबो को मसलते हुए कभी, अपनी एक उंगली नितंब की दरार में फेर देता, तो मेरा पूरा बदन मस्ती में काँप जाता…. और मेरी कमर झटके खाने लगती…… जिससे लगता कि, में खुद ही उसके लंड पर बैठी हुई अपनी नितंब आगे पीछे कर रही हूँ. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो बार बार मेरी नितंब की दरार में उंगली फेर देता…. और मेरे कमर आगे की तरफ झटका खाती, और उसके लंड का सुपाडा मेरी बच्चेदानी से रगड़ खा जाता… वो करीब ५ मिनिट से मेरे होंठो को चूस रहा था…..और मेरी योनि उसके लंड को कभी अपने अंदर कसती और कभी ढीला छोड़ देती…..

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सुशांत को भी इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि, जब वो मेरी नितंब की दरार में उंगली फेरता है, तो में आगे की तरफ अपनी कमर को धक्का देती हूँ…. मेरी इस बात का उसने फ़ायदा उठाते हुए मेरी नितंब के छेद पर अपनी उंगली लगा कर दबाने लगा…..

मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि में बयान नहीं कर सकती….. कहाँ तो कुछ देर पहले में अपनी मजबूरी पर रो रही थी….. और कहाँ अब योनि की आग के कारण में मदहोश हो गयी थी…. मेरी कमर अपने आप ही आगे की तरफ झटके खाने लगी…..

जिससे मेरी योनि के अंदर सुशांत का लंड अंदर बाहर होकर रगड़ खाने लगा….. वो अभी भी मेरे होंठो को बुरी तरह से चूस रहा था… बीच बीच में वो मेरे होंठो पर अपने दाँत भी गड़ा देता…. मुझे पता नहीं कब मेरे हाथ उसकी बाजुओं से हट कर उसके सर पर चले गये….

और में भी उसके सर को पकड़ कर अपने होंठो को चुसवाने लगी…. सुशांत भी धीरे धीरे अपनी कमर को हिला रहा था….. थोड़ी देर बाद उसने मेरे होंठो को छोड़ा, और मुझे अपने ऊपर सीधा बैठा दिया…… मुझे उसका लंड अपनी नाभि तक अंदर घुसा हुआ महसूस हो रहा था….

उसने मुस्कुराते हुए कहा…….. “देख तेरी योनि कैसे पानी की नदी बहा रही है… साली मेरे टटटे भी गीले कर दिए…..” मैंने अपना चेहरा घुमा कर पीछे की ओर देखा, पर में ठीक से नहीं देख पे….. फिर सुशांत ने मेरा एक हाथ पकड़ कर कमर के पीछे लेजाते हुए अपने टट्टो पर लगा दिया……

जैसे ही मैंने उसके बॉल्स को छुआ में एक दम हैरान रह गयी….. उसके बॉल्स एक दम गीले हो चुके थे….जै से किसी ने पेशाब कर दिया हो….. मैंने अपना हाथ आगे करके अपने सर को झुका लिया….. सुशांत थोड़ा एडजेस्ट होते हुए बैठ गया….. हम दोनो बेड के बिलकुल किनारे पर थे…. उसके पैर बेड के नीचे लटक रहे थे, और में उसके लंड को अपनी योनि में लिए हुए उसकी गोद में बैठी थी….

सुशांत: क्यों सही कह रहा हूँ ना…

में उससे नजरे नहीं मिला पा रही थी…. उसने मेरी नाइटी को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपर उठाना चालू कर दिया…… वो मेरे नाइटी को उतारना चाहता था. पर में फिर से उसके सामने नंगी होने से शरमा रही थी…… इसीलिए मैंने हाथ ऊपर नहीं किए….

पर उसने ज़बरदस्ती करते हुए मेरी नाइटी को मेरे गले से निकाल कर नीचे फेंक दिया…. अब में एक बार फिर से उसके सामने नंगी थी…. उसने मेरे नितंबो को दोनों तरफ से पकड़ कर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया……. “उछल ना साली अब ऐसे लंड योनि में लिए बैठी रहेगी क्या?”

मैंने उसकी बात कोई जवाब नहीं दिया…. वो भी अपनी कमर को नीचे से ऊपर नीचे कर रहा था…….. उसके लंड के घर्षण को अपनी योनि की दीवारों पर महसूस करके में एक दम गरम हो गयी…. में भी उसके साथ ऊपर नीचे होने लगी……. धीरे धीरे हम दोनो की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी……

और जब मेरी नितंब उसकी जाँघो से टकराती तो, ठप ठप की आवाज़ होने लगती……. में काफ़ी देर से अपनी सिसकारियों को दबाए हुए थी…….. पर अब में अपने आप पर काबू नहीं रख पा रही थी….. “अहह सुशांत ओह्ह्ह मुझी माफ़ कर दूओ..ह ह धेरीई मेरी यो..नि अह्ह्ह्ह ओह ओह.”

पूरा रूम ठप ठप और मेरी सिसकारियों की आवाज़ से गूँज रहा था….. सुशांत का लंड अब पूरी रफ्तार से मेरी योनि के अंदर बाहर हो रहा था, और में भी उसके लय में लय मिलाती हुई, अपनी नितंब को उछाल उछाल कर उसके लंड पर अपनी योनि को पटक रही थी…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मेरा बदन एक दम से अकड़ने लगा….. और मेरी योनि फिर से पानी छोड़ने लगी…. में हाए ओह्ह करती हुई झड गयी…. सुशांत भी तेज़ी से शॉट लगाते हुए झड़ने लगा.. ठुकाई का ये दौर करीब ३० मिनट तक चला…… में बुरी तरह से उसकी गोद में हाँफ रही थी……

मुझे कुछ होश ना था…. थोड़ी देर बाद में जब मुझे होश आया तो देखा, कि में सुशांत के ऊपर लेटी हुई थी… उसका आधा खड़ा लंड मेरी नितंब की दरार पर रगड़ खा रहा था….. उसकी आँखें भी बंद थी. में उसके ऊपर से उठ कर बेड से नीचे उतर गयी….. और झुक कर अपनी नाइटी उठाने लगी…

तो मुझे अपनी नितंब पर सुशांत के हाथ महसूस हुए, जब मैंने पलट कर देखा, तो सुशांत बेड के किनारे पर बैठा हुआ, मेरी नितंब को सहला रहा था.. उसकी आँखों में अजीब सी चमक थी…. मैंने अपनी नाइटी उठाई, और पहन ली, सुशांत खड़ा हुआ, और मेरी नाइटी को पकड़ कर कमर तक ऊपर उठा दिया…..

“सुशांत छोड़ो मुझे अब बहुत हो गया” सुशांत ने मेरी और मुस्कुराते हुए देखा, और अपने लंड को मेरी नाइटी से साफ करने लगा. उसके बाद उसने अपनी पेंट पहन ली, और बाथरूम के तरफ जाते हुए बोला….

सुशांत: जान मेरा भी खाना बना लेना……. आज रात यही रुकुंगा और तेरी योनि का भरता बना कर सुबह जाऊंगा…..

में सुशांत से कुछ ना कह पाई….. बाथरूम से वापिस आकर सुशांत बेड पर लेट गया…. उसके बाद में बाथरूम में गयी…. और नहा कर बाहर आई…. मैंने कभी ज़िदगी में नहीं सोचा था कि, मुझे ऐसे दिन देखने पड़ेंगे….. नहाने के बाद जब में अपने रूम में आई, तो देखा सुशांत सो रहा था…

एक बार तो सोचा कि अभी इसको जान से मार दूं तो सारा खेल यही ख़तम हो जाएगा. फिर मन में डर था कि एक चीज़ से बचाने के लिए दूसरी ग़लती नहीं कर सकती में मन मार कर किचन में आ गयी…. रात के ८ बज चुके थे…… मैंने खाना तैयार किया…. और बाहर आकर बरामदे में बैठ गयी… थोड़ी देर बाद सुशांत उठ कर बाहर आ गया….

सुशांत: खाना बना लिया……

में: हां. बन गया है, सुशांत अब तक तुमने जैसे कहा. मैंने वैसे किया अब में तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ…… वो क्लिप मुझे दे दो….

सुशांत: ठीक है दे देता हूँ…… पर एक शर्त है.

में: क्या शर्त है, में तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूँ….

सुशांत: (मुझे क्लिप की डीवीडी देते हुए) ये लो, पर हां आज रात भर मुझे खुश रखना होगा…

मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया, और अपने रूम में जाकर वो डीवीडी छुपा दी, अब मेरे पास वो डीवीडी आ चुकी थी….. एक बार तो सोचा अब इसको धक्के दे कर घर से निकाल दूं…. पर फिर भी मन में डर था, कि कही ये इसकी कोई और चाल तो नहीं…..

मैंने बाहर आकर खाना लगाया, और हम दोनो ने खाना खाया. अब रात बहुत हो चुकी थी….. बाहर सर्दी अब पूरे जोरों पर थी….. जब में काम निपटा कर अपने रूम में दाखिल हुई, तो मेरे कदम वही जम गये… सुशांत मेरे बेड पर नंगा लेटा हुआ था.

उसने कमर से निचले हिस्से पर रज़ाई ओढ़ रखी थी…. और अपने हाथ से अपने लंबे लंड को हिला रहा था…. मैंने डोर बंद किया, और बेड के किनारे पर आकर बैठ गयी….. सुशांत ने एक हाथ बढ़ा कर मेरी शॉल को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा…..

में बिना कुछ बोले बेड पर चढ़ गयी…… सुशांत ने रज़ाई उठा दी, ताकि में रज़ाई के अंदर आ सकूँ…. जैसे ही में रज़ाई के अंदर लेटी, वो मेरे ऊपर आ गया…. और मेरी शाल को मेरे बदन से अलग करके नीचे फेंक दिया….. अब में सिर्फ़ नाइटी में थी….

उसने मेरे ऊपर लेटते हुए मेरे होंठ अपने होंठो में भर लिया…. और मेरे होंठो को चूस्ते हुए नाइटी के आगे के हुक्स को खोलने लगा….. इस बार वो पहले की तरह बेदर्दी नहीं दिखा रहा था…… उसने एक एक करके मेरी नाइटी के सारे हुक्स खोल दिए….

मैंने नीचे कुछ नहीं पहना था…. उसने मेरे स्तनों को पकड़ कर नाइटी से बाहर निकाल लाया…… और मेरे होंठो से अपने होंठ हटा कर मेरे लेफ्ट स्तनाग्र को मूह में भर चूसना शुरू कर दिया….. अपने स्तनाग्र पर उसकी गरम गरम जीभ महसूस करते ही, में सिसक उठी……

इस बार वो बड़े ही प्यार से मेरे स्तनाग्र को चूस रहा था….. और दूसरे हाथ से मेरी नाइटी को नीचे से ऊपर कर रहा था….. थोड़ी देर में ही नाइटी मेरी कमर तक चढ़ चुकी थी….. हम दोनो रज़ाई के अंदर थे. इसीलिए नीचे का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था……

मुझे इसका अहसास तब हुआ जब उसके लंड का दहकाता सुपाडा मेरी योनि के छेद पर आ लगा……. मेरा जिस्म बुरी तरह से कांप गया. मुझे पता नहीं में क्यों इतनी मदहोश हो गयी कि, मैंने गले में बाहें डाल कर अपने से चिपका लिया “ओह्ह्ह सुशांत” मैंने मस्ती भरी आवाज़ में कहा….. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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सुशांत ने मेरी स्तनों को मूह से निकाला और फिर मेरी तरफ देखते हुए, अपने होंठो को मेरे होंठो के तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….. उसका लंड मेरी योनि के छेद पर लगा हुआ झटके खा रहा था…. में इस कदर मदहोश गयी थी, कि मैंने भी अपने होंठो को खोल कर उसके होंठो की तरफ बढ़ा दिया……

सुशांत फिर से मेरे होंठो को चूसने लगा….. इस बार न ज़ाने क्यों में उसका साथ देने लगी थी…… वो मेरे होंठो को चूसते हुए, मेरे स्तनाग्र को अपने हाथों की उंगलियों में लेकर मसल रहा था, और मरोड़ रहा था…. मेरी योनि फिर पनिया गयी…..

और उसने कुछ देर मेरे होंठो को चूसा, फिर मेरे गालों और गर्दन को जीभ चाटने लगा…… में उसकी इन हरकतों से मदहोश होती जा रही थी….. मेरे हाथ उसके कंधो और पीठ को सहला रहे थे…. वो मेरे बदन के हर हिस्से को चूम रहा था चाट रहा था….

फिर वो धीरे धीरे नीचे की और बढ़ने लगा…… मेरे पेट को चूमते हुए, मेरी नाभि के अंदर जीभ डाल कर चाटने लगा….. उसकी इस हरकत से में एक दम से सिसक उठी…..मैंने उसके बालो को पकड़ लिया… और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ चलाने लगी……

जब मेरे पति जिंदा थे, तब उन्होने कभी मेरे साथ ऐसा फोरप्ले नहीं किया था… हम तो सीधा साधा सा सहवास करना जानते थे…… इन सब चीज़ों में कितना मज़ा आता है. ये मुझे आज महसूस हो रहा था……. मेरी सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी…..

शुक्र था कि, घर पर हम दोनो के सिवा कोई नहीं था….. फिर वो और नीचे की ओर बढ़ने लगा…. मेरी जाँघो की जड़ो को जीभ से चाटने लगा….. में एक दम से तिलमिला उठी…. “आह सुशांत सीईइ वाहाा नहीं मुझसे सहा नहीं जाता अह्ह्ह्ह अभिषेक्त्त्तत्त ओह्ह्ह्ह.”

पर सुशांत तो मेरी कोई बात नहीं सुन रहा था… आख़िर कार मेरे सामने वो मंज़र घूम गया, जब उसने सुबह मेरी योनि को चाटा था….. फिर वो मेरी योनि पर आ गया….. और किसी भूखे जानवर की तरह मेरी योनि को फांकों के साथ मूह में भर कर चूसने लगा…..

में: (एक दम मस्त होकर गरम होने लगी) आहह ओह्ह्ह नहीं ओह अह्ह्ह्ह अहह सीईईईई नहीं आईई माआ ओह क्या कर्र रहा है ओह्ह्ह मुंडिया मान जा अहह मेरीए जान काढ़ के रहेँगाआ आह खा गया आह तू मुझीई आ पूराअ काा पूराअ आह ख़ाा जाअ पूराअ अहह उफफफ्फ़ मेरीए जानंनणणन् फंससस्स गाईए……..हाई मेरीए योनीईईइ खा गायाअ..

में पता नहीं क्या अनाप सनाप बके जा रही थी.. मुझे खुद इस बात का होश नहीं था….. मेरी नितंब बेड से २ फुट ऊपर उठ चुकी थी…. और मेरी कमर बुरी तरह झटके खा रही थी….. फिर उसने मेरी योनि से मूह हटा लिया….. मैंने तेज़ी से साँसे लेते हुए उसकी तरफ देखा…

फिर वो नीचे झुक कर मेरे टाँगों को घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठाने लगा….. में मदमस्त और बदहवास सी उसके इशारो पर काम करने लगी थी….. जैसे ही उसने मेरी टाँगों को ऊपर उठा कर फैलाया…… उसने मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर मेरी योनि पर रखते हुए मेरी फांकों को फैलाना शुरू कर दिया….

में समझ गयी कि, वो क्या चाहता है…. मैंने अपनी योनि की फांकों को फेला दिया. फिर उसने मेरी उंगलियों को पकड़ कर योनि की फांकों पर क्लिट के बिलकुल पास दोनो तरफ सेट किया, और फैलाने के लिए हाथों को खींचा…. जैसे ही मैंने फिर से क्लिट के पास के मास को खींचा…. मेरा क्लिट किसी फूले हुए दाने की तरफ बाहर आ गया.

जिसे देख कर उसकी आँखें चमक उठी…… मैंने अपनी आँखें बंद कर ली, मुझे पता था कि, सुशांत का अगला स्टेप क्या होने वाला है, पता नहीं कि में बरदाश्त कर पाउंगी या नहीं…. में अभी यही सोच रही थी कि, उसने अपनी जीभ निकाल कर मेरी क्लिट पर रगड़ना शुरू कर दिया… में बुरी तरह से हिल गयी….. मेरे हाथ वहाँ से निकल गये… “अहह सुशांत.”

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सुशांत: क्या साली क्या कर रही है….. चल फिर से निकाल अपना दाना बाहर…

उसने फिर से मेरी टाँगों को फैला दिया….. और मेरे हाथों को पकड़ कर वही पर रखते हुए बोला “चल अब निकाल बाहर” मैंने फिर से क्लिट वाले पास के मास को खींचा, और योनि का क्लिट फिर से बाहर आ गया…. इस बार उसने अपने हाथों से और मास को खींचा, तो क्लिट पूरी तरह से बाहर आ गया……

इस बार उसने बिना किसी देर किए, पूरा का पूरा क्लिट मूह में भर लिया….. और साथ में मेरी टाँगों को ऊपर की तरफ उठा कर दबोच लिया…. ताकि में हिल ना सकूँ….. कुछ पलों के लिए तो मेरी साँस ही रुक गयी…..

मूह खुला का खुला रह गया…… मुझे ऐसा लग रहा था कि, जैसे अभी मेरे जिस्म से जान निकल जाएगी… फिर थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा जैसे आसमान में उड़ रही हूँ…. मेरे मूह से सिसकारियाँ निकल कर पूरे घर में गूंजने लगी….. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

में: अह्ह्ह्ह सुशांत ओह खा जा मुझे पूरा खा जाआअ मेरी योनि को आह तू मुझीए अह्ह्ह्ह उहह वेश्या कहता है ना अह्ह्ह्ह हां तूने मुझे वेश्या बनाअ दिया है अहह ओह माआ. हाईए ओईई एह मुंडा पागल हो गयाआ हाईईइ….अहह अहह अहह सुशांत मेरीए योनिईईइ जल गयी ओह्ह मेरा काम होने वाला हाई आह आह…….

में उसके सर को पकड़े हुए अपनी नितंब को उछाल रही थी… वो किसी तरह मेरे ऊपर काबू पाए हुए था……… फिर कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा जैसे सच में मेरे जान मेरी योनि से ही निकल जाएगी……. “अहह सुशांत ले गाईए मेन्णन्न् कंजरी बना देताअ मेनू….. आहह मेरीए इज़्ज़त लूट लेती तू कंज़ारा ह ओह मेरीए योनीई…..

में बुरी तरह काँपते हुए, झड़ने लगी…. मेरा बदन थरथरा रहा था…. योनि से पानी निकल कर मेरी नितंब की दरार और छेद पर चला गया था. इस बार में बहुत बुरी तरह से झड़ी थी…..

में: सुशांत छड दे मेनू……मेरीए योनीई वाज गइईई. हाए ओईए…

पर सुशांत तो जैसे बहरा ही हो गया था…..वो अपना मूह मेरी योनि से हटा नहीं रहा था…… में एक बार बुरी तरह से झाड़ चुकी थी, थोड़ी देर बाद उसने अपना मूह मेरी योनि से हटाया, और बेड पर मेरे बगल में लेट गया…. “चल उठ जल्दी कर अभी तू तूने कुछ देखा ही नहीं है….”

ये कहते हुए, उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया…. में उसके ऊपर आ चुकी थी, मेरे दोनों घुटने उसकी कमर के दोनों तरफ थे…… उसने मेरी जाँघो के नीचे हाथ डालते हुए, मेरी नितंब को पकड़ कर ऊपर उठाया, तो में पैरों के बल बैठ गयी…..

फिर वो मेरे नीचे से खिसकता हुआ इतना नीचे हो गया कि, मेरी योनि ठीक उसके मूह के ऊपर आ गयी…. मेरा बदन ये देख कर फिर से कांप गया. अब और कितना तड़पाएगा मुझे….. जैसे ही मेरी योनि उसके मूह के ऊपर आई तो वो बोला “चल अब खोल अपनी योनी…. चल खोल ना ड्रामा क्या कर रही है.”

मैंने काँपते हुए हाथों से अपनी योनि की फांकों को फैला दिया…. में उसके सर के दोनो तरफ पैर करके पंजों के बल बैठी थी….. ऊपर से मेरा पूरा बदन अभी भी झड़ने के कारण कांप रहा था. इसलिए मुझे बॅलेन्स बनाने में दिक्कत होने लगी…. और में आगे की तरफ गिरने वली थी कि, मैंने अपने हाथों से सुशांत के सर को पकड़ लिया…..

इससे पहले कि में कुछ बोल पाती, उसने मेरी योनि को फैलाते हुए, योनि पर मूह लगा दिया…. मेरे बदन में मानो ४२० वॉट का करंट दौड़ गया हो….. उसने मेरी योनि को चाट्ना शुरू कर दिया…. और अपनी ज़ुबान को मेरी योनि के छेद पर रगड़ने लगा….

“अहह मुंडिया क्या कर रहा है, हाईए आज मेरी योनि दी खैर नहीं….. ओह मर गइई…. क्यों मेरी योनि नू ख़ान ळगया है….. हाए ओईई एहह मुंडा किथे मूह मार रहााअ है.. हाई हट जा… बस वी कर हुन्न्ं अह्ह्ह्ह मेरीए गइई.…… लंड पा दे मेरी योनि विच…… आह सुशांत अपना लंड मेरी योनि च पा दे……..”

सुशांत एक दम से रुक गया….और मुझे अपने ऊपर से हटाते हुए नीचे लेटा दिया. फिर मेरी टाँगों को खोल कर बीच में आकर बैठ गया…… “हां बोल क्या कह रही थी तू मेरा लंड चाहिए तुझे तेरी योनि में…. बोल जो कुछ पल पहले में अनाप सनाप बक रही थी…….”

अब में उसके मूह से सुन कर शर्मिंदा हो रही थी… में उसकी तरफ देख भी नहीं पा रही थी…… उसने मेरी योनि के फांकों पर अपने लंड को रगड़ते हुए फिर पूछा “बोल अब क्या कह रही थी…. नहीं तो तब तक ऐसे ही करता रहूँगा…..”

में सच में इस क़दर मस्त हो चुकी थी, कि दिल कर रहा था कि उसका लंड अपनी योनि में लेकर ज़ोर ज़ोर से ठुकवाऊ…… “कुतिया हूँ की सुनना चहन्दा है…… मार मेरी योनि….पा दे अपना लंड मेरी योनि विच…..मेरे घरवाले ने मेरी आज तक इक दिन विच इनवारी नहीं लयी……..तू ता मेनू गस्ति ही बना दित्ता है.”

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मेरी ये बातें सुनकर वो हँसने लगा… और मेरी योनि पर अपने लंड के सुपाडे को दबाने लगा….उसका लंड फिसलता हुआ मेरी योनि के अंदर जाने लगा….जैसे ही उसका आधा लंड मेरी योनि में गया….उसने मेरी कमर को पकड़ कर एक ज़ोर दार धक्का मारा… फॅच की आवाज़ से पूरा लंड मेरी योनि में समा गया…..

मैंने तड़पते हुए, उससे अपने ऊपर खेंच लाया, और उसके होंठो को खुद ही होंठों में भर भर कर चूसने लगी….. वो मेरी इस हरकत से जोश में आ गया… और अपने लंड को पूरा निकाल निकाल कर अंदर डालने लगा…. उसके हर धक्के से मेरा पूरा बदन हिल जाता……

में भी पागलों के तरफ उसके होंठो को चूसते हुए, अपनी नितंब को ऊपर की ओर उछाल उछाल कर उसका लंड अपनी योनि में लेने लगी….. उसने मेरे होंठों से अपने होंठों को अलग किया, और मुझे बाँहों में भरते हुए, ऊपर उठाने लगा….. अब में उसकी गोद में आ चुकी थी…

मेरी टाँगें उसके कमर के इर्द गिर्द घेरे की शकल में आ चुकी थी…… वो अपनी कमर को लगातार हिलाते हुए मुझे ठोक रहा था. और साथ में वो मेरी नाइटी को ऊपर उठाने लगा…. में वासना की आग में इस कदर झुलस रही थी, कि मैंने अपनी नाइटी को खुद ही उतार कर नीचे फेंक दिया….

में: आहह सुशांत लेले जी भर कर मेरी ले आज अह्ह्ह्ह मेरे स्तन चुस्स नाअ…

मेरी बात मानते हुए, उसने मेरा एक स्तनाग्र मूह में भर कर चूसना शुरू कर दिया… अब उसकी कमर हिलनी बंद हो चुकी थी….. पर मेरी नितंब तो मानो मेरे काबू में नहीं थी….. में लगातार अपनी नितंब को आगे पीछे करते हुए, उसके लंड से ठुक रही थी…..

उसका लंड बुरी तरह से मेरी योनि की दीवारों से रगड़ खा रहा था….. मेरे इस तरह करने पर वो और जोश में आ गया……. और फिर मुझे अपने बाहों में उठाते हुए वैसे ही खड़ा होने लगा…… उसका लंड अभी भी मेरी योनि में था…..

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि, मेरे बेटे के उम्र का लड़का मुझे अपनी बाहों में उठाए हुए ठोक रहा था…. “हाईए फाड़ दित्ति मेरी योनी…..गश्ती बना दित्ता तू मेनू फाड़ दे अपनी गस्ति की योनि….अहह एह बेहन दे लौडी नू वी आग लगी हुई है आज मेरी योनि विच ठंड पा दे…….”

वो कुछ मिनिट मुझे ऐसे ही उठा कर ठोकता रहा…फिर उसने मुझे नीचे उतार दिया….. और दीवार की तरफ मुझे घूमाते हुए बोला “चल कोड़ी हो जा” में दीवार से हाथ लगा कर झुक गयी.. उसने पीछे से मेरी नितंब को पकड़ कर फेलाया, और अपना लंड एक ही धक्के में अंदर पेल दिया…. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

में: आह आह एह किथो सीख के आया है सब कुछ किद किद मेरी ले रहा है… हाए ओई मार सुटिया मेनू…..ज़िदा मर्ज़ी ले मेरी योनि….बस इन्हो ठंडी कर दे….नये नये तरीके कितो सीख की आया हाई हाई मररर देता….वज गयी आज मेरी योनि…….ओह्ह्ह्ह मार होर ज़ोर दे अपना लंड मेरी योनी च मार….”

आज भी जब में उन पलों के बारे में सोचती हूँ, तो अपने आप से शरमा जाती हूँ…. मैंने अपने पति के सामने भी कभी ऐसे वर्ड यूज़ नहीं किए थी.. पता नहीं मुझ बावली को क्या हो गया था….. जो मूह में आ रहा था बके जा रही थी.. “हाई सुशांत मेरे स्तन दा कसूर तां दस्स……. पात हुन इन्हा नू. मसल दे इनको…..अह्ह्ह्ह.”

सुशांत कभी मेरी नितंब को दबाने लग जाता तो, कभी मेरे स्तनों को खींच खींच कर दबाता…. में दूसरी बार झड़ने के बहुत करीब थी….. अब खड़े खड़े थक भी गयी थी…. सुशांत ने मेरी योनि से अपना लंड निकाला, और बेड पर लेट गया…. मुझे इशारे से ऊपर आने को कहा……. मेरी योनि में पहले ही आग लगी हुई थी.

मैंने भी बिना किसी शरम के उसके ऊपर आते ही, उसके लंड को पकड़ कर अपनी योनि के छेद पर लगा कर अपनी कमर को पूरी ताक़त से झटका दिया…. लंड फॅच की आवाज़ से अंदर जा घुसा….और फिर मैंने आव देखा ना ताव अपनी नितंब को उछल उछल कर उसके लंड पर पटकने लगी…

“अहह ले मेरी योनि आज सारी रात लेना….. सारी रात मेरी योनी च लंड पा के रखी…… तेरी गश्ती तेनू मना नहीं करेगी….. आहह ले, मेरी योनि वजन वाली है… आह ले गाईए तेरी गस्ति दी योनि, हाए आहह निकल गयी सारी मलाई…. ओह्ह्ह वज गयीए..”

में सुशांत के ऊपर निढाल होकर गिर पड़ी….. मेरी योनि से इतना पानी निकला कि, बेडशीट भी गीली हो गयी……. सुशांत के लंड से भी वीर्य की बौछार होने लगी…. उसने मेरे होंठो को अपने होंठो में भरते हुए, मेरे निचले होंठ पर अपने दाँत गड़ा दिए…..

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मुझे हल्का सा दर्द हुआ, पर वो दर्द उस समय मुझे कुछ भी नहीं लग रहा था…. थोड़ी देर बाद में सुशांत की बगल में लेट गये….. हम दोनो ने अपने ऊपर रज़ाई ओढ़ ली…….. “एक बात बोलू वैशाली” सुशांत के मूह से अपना नाम सुन कर मुझे थोड़ा अजीब सा लगा “ह्म्म बोलो.”

सुशांत: वैशाली तेरी योनि सच में जलती हुई भट्टी है…. मुझे लग रहा था कि, मेरा लंड अंदर ही पिघल जाएगा….. रश्मि की योनि भी तेरी योनि के आगे कुछ नहीं है…. सच में मज़ा आ गया तेरी लेकर…

में: सुशांत तुम अब रश्मि के साथ कुछ नहीं करोगे…… तुमने जैसा कहा मैंने वैसे कर दिया…..

सुशांत: चल ठीक है, वैसे तेरी योनि है कमाल की, साली जैसे आग हो…

सुशांत की ये बात सुन कर मुझे हँसी आ गयी…. और में दूसरी तरफ फेस घुमा कर मुस्कुराने लगी……. “क्या हुआ.”

में: कुछ नहीं….

सुशांत: तो फिर हंस क्यों रही हो?

में: तुम्हें तो औरतों की तारीफ भी नहीं करनी आती…..

सुशांत: तो फिर तुम सिखा दो ना…….

में उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाई…… दोस्तों उस रात सुशांत ने मुझे कई बार ठोका…. हर तरीके से हर नये पोज़ में जिसके बारे में मैंने कभी सुना भी नहीं था……. मुझे तो याद नहीं, कि रात को कितनी देर के लिए उसका लंड मेरी योनि से बाहर रहा होगा….. सुबह मेरी हालत ये थी कि, मेरी योनि पाव रोटी की तरह सूज कर फूल गयी थी……

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