• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer

HamariVasna

Hindi Sex Story Antarvasna

  • Antarvasna
  • Girlfriend Boyfriend Sex Story
  • Bhai Bahan Sex Stoy
  • Hindi Sex Story
  • माँ बेटे का सेक्स
  • अपनी कहानी भेजिए
  • ThePornDude
You are here: Home / Baap Beti Ki Chudai / बाप बेटी ने मर्यादा की सीमाएँ लांघी 2

बाप बेटी ने मर्यादा की सीमाएँ लांघी 2

अक्टूबर 10, 2026 by hamari Leave a Comment

Beti Garam Chut Porn

हेल्लो फ्रेंड्स, मैं प्रतीक्षा आप सभी का फिर स्वागत करती हूँ. आपने मेरी कहानी का पिछला भाग बाप बेटी ने मर्यादा की सीमाएँ लांघी 1 पढ़ा होगा. आपने पढ़ा था की मैं समर वेकेशन में अपने घर आई थी, और कॉलेज में चुदवाने की आदत लग गई थी मुझे. पर यहाँ घर में मैं लंड की कमी महसूस कर रही थी फिर मेरी नजर पापा पर पड़ी और मैंने पापा को पटाने का सोचा. और पापा को अपनी जवानी का मजा लेने दिया. अब आगे- Beti Garam Chut Porn

अगले दिन सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली। मैं उठी और हाथ-मुंह धोकर गंदी वाली चादर को लेकर नीचे आ गई। नीचे आई तो देखा कि पापा चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे। मम्मी भी उनके साथ बैठ कर चाय पी रही थी। मेरे हाथ में चादर देख कर पापा थोड़े सकपका गए.

अभी मैं कुछ कहती, तभी मम्मी बोली- प्रतीक्षा बेटी, ये चादर क्यों लेकर आई हो?

मैंने पापा की ओर देखा तो वे अखबार पर आंख गड़ाये हुए थे मगर ध्यान मेरी तरफ ही था। उन्हें देख कर साफ पता चल रहा था कि वे घबराए हुए हैं। उन की हालत देख कर मुझे मन ही मन हंसी आ रही थी, फिर भी मैं संभलती हुई बोली- अरे यह गंदी हो गई थी मम्मी! इतना कह कर मैं जानबूझ कर चुप हो गई। मैं सोच रही थी कि अब मम्मी पूछेंगी जरूर कि कैसे गंदी हो गई।

मम्मी बोलीं- अभी तो कल सुबह ही बिछाई थी इतनी जल्दी कैसे गंदी हो गई?

मैंने जानबूझ कर थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा- अरे… कल सोने जा रही थी तभी गिलास का पानी गिर गया था इसलिए इसे हटा दिया था और दूसरी चादर बिछा कर सो गई थी। दरअसल मैं पापा को ये जताना चाह रही थी कि मैं भी मम्मी से झूठ बोलकर कुछ छुपा रही हूं।

मैंने पापा की ओर देखा तो वे अभी भी पेपर पर नज़र गड़ाये बैठे थे। मेरा जवाब सुन कर वे शायद थोड़े नॉर्मल हो गए। हालांकि वे अभी भी मुझसे नज़र बचा रहे थे। मुझे लगा कि कहीं ऐसा ना हो कि पापा ज्यादा घबरा जाएं और फिर बात आगे ही ना बढ़े और यहीं पर खत्म हो जाए।

इसलिए मैंने पापा की घबराहट दूर करने के लिए खुद ही उनसे बात करने लगी और कहा- “पापा! आज बड़ी देर तक चाय पी रहे हैं पापा… आपको ऑफिस नहीं जाना क्या?” और फिर मैं जाकर उनके बगल बैठ गई और चाय पीने लगी।

पापा थोड़े नॉर्मल होते हुए बोले- अरे अभी 8 बजे हैं.

फिर मैंने और भी थोड़ी इधर-उधर की बातें कर उनकी घबराहट एकदम दूर करने की कोशिश की। उसके बाद पापा तैयार होकर ऑफिस चले गए। मैं भी अपने कमरे में आ गयी. मेरा तो दिन ही नहीं कट रहा था। बस सोच रही थी कि जल्दी से रात हो जाए ताकि पता चले कि आज फिर पापा आते हैं या नहीं।

किसी तरह रात हुई और खाना खाकर पापा-मम्मी भी अपने कमरे में चले गए और मैं भी ऊपर अपने कमरे में आ गई। मैंने कपड़े बदले और छोटी स्कर्ट और टी शर्ट पहन ली।टी शर्ट और स्कर्ट के नीचे मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी क्योंकि कल जो हुआ था वो तो अचानक हुआ था लेकिन आज मैने जानबूझकर इसलिए नहीं पहना कि पापा को लगे कि मैं रोज बिना पैंटी के सोती हूँ।

फिर नाइट बल्ब जलाकर कर लाइट को ऑफ कर दिया। अँधेरा रहेगा तो पापा को नाइट बल्ब ऑन करना पड़ेगा इसलिए मैंने पहले ही नाइट बल्ब ऑन कर दिया था। साथ ही मैने चादर के ऊपर एक तौलिया बिछा कर लेटी थी ताकि अगर आज फिर पापा के लंड से पानी निकले तो बिस्तर पर ना पड़े।

इसे भी पढ़े – दोस्त की मामी के सेक्सी बड़े मम्मे

कुल मिलाकर मैं पापा को यह अहसास दिलाना चाह रही थी कि क्या होने वाला है, ये मैं जान रही हूं। आज क्या होगा, ये सोच कर मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। अपनी चूत सहलाते हुए बेसब्री से पापा का इंतज़ार करने लगी।

रात के करीब पौने एक बजे मुझे सीढ़ियों से हल्की सी आवाज आयी. मैं समझ गयी कि पापा आ रहे हैं। फिर कल रात की तरह मैंने पीठ के बल लेट गयी और अपने हाथ को मोड़कर आँखों को ढक लिया कि चोरी से उनकी हरकतों को देख सकूं।

पापा ने धीरे से कमरे का दरवाजा खोला, फिर 10-15 सेकेण्ड तक दरवाजे पर ही रुके रहे। शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नाइट बल्ब पहले से जल रहा होगा। खैर 10-15 सेकेण्ड रुकने के बाद वे धीरे से दबे पाँव कमरे में आये और बेड के पास आकर खड़े हो गये।

आज पापा ने हाफ पैंट और बनियान पहना हुआ था। पापा बेड के पास बिलकुल मेरे बगल खड़े थे। आंखों को मैंने हाथों से ढक रखा था, इस वजह से मुझे उनका चेहरा तो नहीं दिख रहा था लेकिन पेट से नीचे का पूरा हिस्सा दिख रहा था। मैंने स्कर्ट और टी शर्ट पहनी थी… पापा करीब 15-20 सेकेण्ड तक ऐसे ही खड़े रहे।

फिर धीरे से झुककर उन्होंने मेरी स्कर्ट के निचले हिस्से को पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसकाने लगे। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। फिर पापा ने स्कर्ट को पूरा ऊपर की तरफ खिसका कर मेरे पेट पर कर दिया। अब आज एक बार फिर मेरी नंगी चूत पापा की आँखों के सामने थी।

पापा ने कल की तरह चूत या झांटों को छूने की हिम्मत नहीं दिखाई। उसके बाद पापा सीधे खड़े हो गये और फिर वही हुआ जो मैं सोच रही थी। उन्होंने अपनी हाफ पैंट को पकड़ कर नीचे खिसका दिया। जैसे ही उन्होंने पैंट नीचे खिसकाया उनका लण्ड एक झटके से बाहर आ गया।

उनका लण्ड करीब-करीब खड़ा था। पापा धीरे धीरे अपने लण्ड की चमड़ी को आगे पीछे कर मुठ मारने लगे। तभी अचानक पापा ने लण्ड को हिलाना छोड़ दिया और अपने दोनों हाथ को धीरे से बेड के किनारे रखा और फिर नीचे झुकने लगे। मैं समझ नहीं पायी कि वे क्या करने जा रहे हैं।

तभी मैंने देखा कि पापा अपना मुंह मेरी चूत के पास लाकर नाक से मेरी चूत को सूंघने लगे। मेरी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी। मैं बिना हिले डुले सो रही थी। करीब 15 सेकेण्ड तक मेरी चूत को सूँघने के बाद वे वापस खड़े हो गये।

इस बार जब खड़े हुए तो उनका लण्ड एकदम टाइट खड़ा था। अब पापा थोड़ा आगे खिसकर बेड से एकदम सट कर खड़े हो गये। उनका लण्ड करीब-करीब मेरी चूत के ठीक ऊपर था। अब वे तेजी से अपने लण्ड को हिलाकर मुठ मारने लगे।

करीब 5 मिनट तक बीते होंगे कि उन्होंने अपनी कमर को तेजी से हिलाना शुरू किया और अचानक तेज झटके और धार के साथ रुक-रुक कर उनके लण्ड से पानी निकलने लगा जो मेरी चूत, जाँघ, स्कर्ट और तौलिये पर फैल गया।

झड़ने के बाद भी करीब 4-5 सेकेण्ड तक पापा उसी तरह लण्ड को पकड़े खड़े रहे और फिर अपने पैंट से को ऊपर खिसका कर उसी से लण्ड को साफ कर पूरा पहन लिया। और फिर मेरे ऊपर चूत और जांघ पर फैले लण्ड के पानी को बिना साफ किये कमरे से बाहर निकले और धीरे से दरवाजा बंद कर चले गये।

इसके बाद मैं धीरे से बिस्तर से उठी और दरवाजे को अंदर से लॉक करके लाइट जलाई। मैंने देखा कि पापा के वीर्य की कुछ बूंद नीचे जमीन पर भी गिरी थी। चूंकि मैंने चादर के ऊपर तौलिया डाल लिया था इसलिए चादर बच गई थी। मगर तौलिये और स्कर्ट पर पापा के लंड का पानी पड़ा था।

मैंने बाथरूम में पानी से अपनी चूत और जांघ को साफ किया और फिर फर्श पर पड़े वीर्य को तौलिये से साफ किया और दूसरे कपड़े पहने। फिर मोबाइल में सुबह 8 बजे का अलार्म लगा कर मैं सो गई। मैंने 8 बजे का अलार्म इसलिए लगाया था क्योंकि यही समय था जब पापा और मम्मी चाय पीते हैं।

सुबह 8 बजे अलार्म बजने पर नींद खुल गई। मैं उठी और धीरे से कमरे का दरवाजा खोला और चोरी से नीचे झांक कर देखा तो पापा और मम्मी डाइनिंग टेबल पर चाय पी रहे थे। मेरी योजना थी कि जैसे मैं कल चादर कर नीचे गई थी, उसी तरह आज स्कर्ट और तौलिया लेकर जाऊंगी और मम्मी से धोने को कहूंगी।

मैं वापस कमरे में आई और स्कर्ट और तौलिया लेकर नीचे पहुंची। पापा मेरे हाथ में स्कर्ट और तौलिया देखकर फिर थोड़े परेशान हुए. मगर मैंने बिना उनकी तरफ देखे मम्मी से कहा- मम्मी, ये स्कर्ट और तौलिया मशीन में धोने के लिए डाल देना।

मम्मी बोलीं- ये तो साफ कर के रखी थी गंदी कैसी हो गई?

मैंने कहा- अरे अभी बाथरूम में लेकर गई थी तो नीचे गिर गया था।

पापा फिर समझ रहे थे कि मैं झूठ बोल रही हूं। मैं पापा को यही जताना भी चाह रही थी कि मैं जानबूझ कर झूठ बोल रही हूं। फिर मैं एकदम नॉर्मल होकर पापा से बात करने लगती जैसे कुछ हुआ ही न हो। अब मैं बिना पैंटी के सोती… कभी सिर्फ कुर्ती में तो कभी सिर्फ लांग टी-शर्ट में! और रोज रात में पापा मेरे कमरे में आते और मुझे नंगी देखकर मुठ मारकर चले जाते।

खैर इस बीच पापा का डर काफी कम हो गया था क्योंकि वो अपना वीर्य मेरी चूत और जांघ के साथ ही जो कुछ भी मैं पहनी रहती चाहे स्कर्ट, कुर्ती, टीशर्ट उस पर गिरा कर चले जाते थे. उन्हें डर नहीं लगता था कि मैं जगूंगी और अपने ऊपर लंड का पानी देखूंगी तो क्या सोचूंगी।

हालांकि वे अभी भी मुझे छूने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे. बस आते थे और मुझे नंगी देखकर मुठ मारकर चले जाते थे। और मैं रोज उठकर अपने शरीर पर और जमीन पर फैले वीर्य को साफ करती। सुबह वीर्य वाले कपड़े लेकर पापा को सुनाती हुई मम्मी को धोने के लिए देती और हमेशा कोई न कोई झूठ बोलती। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

ऐसा करीब 5-6 दिन तक चलता रहा। लेकिन मैं अब थोड़ा और बात आगे बढ़ाने के मूड में थी। मगर समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। पापा को कन्फर्म हो गया था कि उनका ये सारा खेल मैं जानती हूँ और मैं भी मजे ले रही हूँ उनकी इस हरकतों का। फिर अगली सुबह जब मैं नीचे गयी तो रोज की तरह मम्मी-पापा बैठकर चाय पी रहे थे।

तभी मम्मी बोलीं- आज दोपहर तक अम्मा (मेरी नानी) आ रही हैं. नवीन (मेरे छोटे वाले मामा) उन्हें लेकर आएंगे। तो पापा ऑफिस रेलवे स्टेशन जाएंगे उन्हें लेने!

मैंने हैरानी से पूछा- अचानक कैसे नानी के आने का प्लान बन गया?

मम्मी बोलीं- अरे कल रात 12 बजे के करीब नवीन का फोन आया था कि अम्मा की तबीयत थोड़ी खराब लग रही है तो आज वे उन्हें लेकर डॉक्टर को दिखाने आएंगे।

मैं रसोई में मम्मी की मदद करने चली गई। नानी और मामा के आने की बात सुनकर मेरा मूड थोड़ा ख़राब हो गया था क्योंकि जब भी मामा और नानी आते थे तो मम्मी और नानी बेडरूम में पापा नीचे लॉबी में दीवान पर और मामा कमरे में ऊपर सोते थे।

मुझे लग रहा था कि जब तक नानी और मामा रहेंगे तब तक रात वाला प्लान नहीं हो पाएगा. क्योंकि अभी तो मम्मी के सो जाने के बाद पापा रात में ऊपर आ जाते थे. मगर अब ऊपर मामा सोएंगे तो पापा डर से नहीं आएंगे क्योंकि मामा अक्सर रात में पानी पीने या बाथरूम जाने के लिए ज़रूर उठते हैं।

करीब 3 बजे पापा, नानी और मां को लेकर घर आ गए। थोड़ी देर चाय वगैरह पीने के बाद फिर पापा, माँ और नानी डॉक्टर के यहाँ चले गए दिखाने। शाम को करीब 6 बजे वे लोग लौटे तो बताया कि डॉक्टर ने दवा दी है और एक हफ्ते बाद फिर बुलाया है. कोई घबराने वाली बात नहीं है।

फिर मामा तुरंत वापस जाने के लिए तैयार हो गए बोले कि 8 बजे वाली ट्रेन पकड़ कर वे वापस चले जाएंगे। नानी को यहीं रुकना था. एक हफ़्ते बाद वे वापस आकर डॉक्टर को दिखा का नानी को वापस ले जायेंगे। मामा के जाने के बाद मम्मी तुरंत खाने की तैयारी में लग गई क्योंकि नानी ज्यादा देर से नहीं खाती थी। रात में हम सभी साथ खाना खा रहे थे.

इसे भी पढ़े – हॉट कुंवारी स्टूडेंट ने पेलवा ही लिया 

तभी पापा ने मम्मी से कहा- ऐसा है, अम्मा जी और तुम यहां नीचे सो जाना. मैं ऊपर वाले कमरे में सो जाऊंगा।

मम्मी बोलीं- ठीक है।

मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, मैं तो समझ रही थी कि पापा ऊपर सोने के लिए प्लान क्यों कर रहे हैं। रात 9.30 बजे तक हम सबने खाना खा लिया। फिर मैं मम्मी के साथ रसोई में काम करने लगी। पापा टीवी देखने लगे और नानी कमरे में चली गई।

करीब 10 बजे पापा ऊपर जाते हुए मम्मी से बोले- मैं सोने जा रहा हूं। और फिर मुझसे बोले- बेटा ऊपर आना तो मेरे लिए पानी लेती आना।

मैंने कहा- ठीक है पापा!

और फिर पापा सोने चले गए। मैं थोड़ी देर रसोई का काम खत्म कर नानी के पास कमरे में आ गई और उनसे बात करने लगी। थोड़ी देर में मम्मी भी कमरे में आ गई। फिर हम तीनों बैठ कर बात करने लगी।

करीब 11 बजे मैं मम्मी से बोलीं- मैं सोने जा रही हूं अब!

मम्मी बोलीं- अपने पापा के लिए पानी लेती जाना!

मैं ‘ठीक है’ बोल कर कमरे से निकल कर रसोई में पानी लेने चली गई। पानी लेकर मैं जैसे ही सीढ़ी के पास आई तो ऊपर मैंने पापा को तेजी से पीछे हटते हुए देखा। हालांकि पापा नहीं जान पाये कि मैंने उन्हें देख लिया है। मुझे लगा कि शायद वे पानी के लिए बुलाने आ रहे होंगे मगर मुझे पानी लेके आती देखकर वापस चले गये होंगे।

मैं ऊपर आयी तो देखा कि लॉबी की लाइट बंद थी और पापा के कमरे का दरवाजा भी बंद था। तब मैं सोचने लगी कि अभी तो पापा यहीं खड़े थे मगर मुझे देखने के बावजूद कमरे में जाकर दरवाजा क्यों बंद कर लिया है। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पापा ने ऐसा क्यों किया है।

मगर दिमाग में ये भी चल रहा था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पापा कुछ प्लान बनाकर बैठे हों। मेरा दिल धड़कने लगा. मैं दरवाजे के पास गई और धीरे से डोर हैंडल घुमा कर दरवाजे को थोड़ा सा खोला तो देखा कि कमरे में नाइट बल्ब जल रहा है और पापा बिस्तर पर सो रहे हैं।

तब मैं दरवाजा पूरा खोल कर अंदर आ गई और धीरे से 2 बार पापा को आवाज दी. मगर वे जगे नहीं। मैं समझ गई कि पापा जगे हैं मगर सोने का नाटक कर रहे हैं। मगर मैं अभी भी समझ नहीं पा रही थी कि वे आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं।

फिर मैं उनके बिस्तर के पास गई, बगल की टेबल पर पानी का गिलास रख दिया और उनकी तरफ देखा तो वे उसी तरह आंख बंद कर पीठ के बल लेटे हुए थे। उन्हें अपने एक हाथ को अपने माथे पर इस तरह रखना था कि उनकी आंख छुप गई थी।

वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे गहरी नींद में हैं। अचानक मेरी निगाह नीचे उनकी कमर की तरफ गईं तो मेरा दिल धक्क से रह गया। दरअसल पापा लुंगी पहन कर सो रहे थे और उनकी लुंगी आगे से खुल कर अगल-बगल हटी थी और उसमें से उनका लंड आधा बाहर निकला हुआ था।

पापा ने अंडरवियर भी नहीं पहना था. अब मैं सारा माजरा समझ गई। पापा वही कर रहे थे जो मैं रात में उनके साथ करती थी। थोड़ी देर तक मैं ऐसी ही खड़ी रही। मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं। एक तरीके से पापा मुझे अपना लंड देखने का खुला निमंत्रण दे रहे थे।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मेरी नज़र उनके लंड पर गई तो देखा कि इस बार वे लुंगी से करीब-करीब पूरा बाहर आ गया था और उसमें हल्का सा तनाव भी था। मैं कमरे के अंदर आ गई और दरवाजा धीरे से बंद कर दिया और फिर धीरे से पापा को आवाज दी- पापा… पापा!

पापा बिना कुछ बोले लेटे रहे. वे यह जताना चाह रहे थे कि वे बेहद गहरी नींद में हैं। मैं बेड के पास गई और थोड़ी देर खड़ी रही। मेरी नज़र कभी पापा के लंड पर तो कभी उनके मुँह की तरफ जा रही थी। मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं और कैसे करूं।

फिर मैंने हाथ बढ़ाकर पापा के घुटनों के पास रखा और धीरे से हिलाए एक बार फिर उन्हें जगाने की कोशिश की और आवाज दी- पापा… पापा! मगर पापा कुछ नहीं बोले और उसी तरह लेटे रहे। जब पापा कुछ नहीं बोले तो मैं बिस्तर के ठीक बगल में उनके लंड के पास जाकर घुटनों के बल बैठ गयी।

अब पापा का लंड ठीक मेरे चेहरे के सामने था। मेरी निगाह पापा के लंड पर थी जिसमें अब तनाव बढ़ रहा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और सांस धौंकनी की तरह चल रही थी। हालांकि इतनी देर में मेरी उत्तेजना और हिम्मत दोनों बढ़ गई थी।

मैंने एक हाथ से पापा के लंड को धीरे से पकड़ा। जैसा ही मैंने लंड को पकड़ा, लंड हल्के से झटके के साथ और टाइट हो गया। थोड़ी देर इसी तरह लंड को पकड़े रहने के बाद मैंने लंड को पूरा मुट्ठी में भर लिया और धीरे-धीरे लंड को हिलाने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब तक पापा का लंड एकदम गर्म और पत्थर की तरह हो चुका था। मेरा मन कर रहा था कि लंड को मुँह में भरकर चूस लूँ। मुझसे अब बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था। मैंने लंड को हिलाना बंद कर दिया और उसकी त्वचा को पूरा नीचे खींच दिया।

नाइट बल्ब की रोशनी में लंड का मोटा सा गुलाबी सुपारा फूल कर चमक रहा था, जिसे देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया। मैं झुकी और जीभ निकल कर लंड के सुपारे को हल्का सा चाट लिया। मैंने जैसे ही शरीर से पापा के लंड को चाटा मेरे शरीर में हल्की सी झुरझुरी दौड़ गई.

वहीं पापा के शरीर में हल्का झटका लगा। ऐसा लग रहा था कि शायद पापा को भी उम्मीद नहीं थी कि मैं उनके लंड को चाटूंगी भी! दो-तीन बार लंड के सुपारे को जीभ से आइसक्रीम की तरह चाटने के बाद मेरी हिम्मत और एक्साइटमेंट दोनों बढ़ गयी थी।

वैसे भी पापा और मैं दोनों एक दूसरे से खेल रहे थे, ये पापा और हम दोनों जान रहे थे। इस वजह से अंदर का डर खत्म हो गया था। करीब 20-25 सेकेण्ड तक पापा के लण्ड को आइसक्रीम की तरह चाटने के बाद थूक से चिकने हो चुके उनके सुपारे को पूरा मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

इसे भी पढ़े – बस में लंड घुसवाया एक औरत ने

शायद पापा के लंड से थोड़ा-थोड़ा पानी निकल रहा था क्योंकि लंड चूसते हुए मुझे हल्का-हल्का नमकीन का स्वाद भी आ रहा था। मेरी तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई थी। मैं अब तेजी से मुंह को आगे पीछे कर लंड चूस रही थी. अभी लंड चूसते हुए 2 मिनट हाय हुए कि पापा हल्का-हल्का अपनी कमर को हिलाने लगे।

मैं समझ गई कि वे झड़ने वाले हैं. इसलिए मैं और तेज-तेज उनके लंड को हाथ से हिलाते हुए चूसने लगी। तभी पापा का शरीर एकदम अकड़ गया और वे तेजी से अपने कमर को हिलाने लगे और मेरे मुंह में झड़ गए। उनके लंड से तेज धार निकली और सीधा मेरे गले में चली गयी, जिसे मैं गटक गई।

उसके बाद पापा ने हल्का-हल्का झटका लेते हुए अपने लंड का पूरा पानी मेरे मुंह में निकाल दिया। लंड के गाढ़े नमकीन पानी से मेरा मुंह पूरा भर गया.  थोड़ा पानी मेरे मुंह से निकल कर बाहर मेरे हाथ और लंड पर भी फ़ैल गया. बाकी जो मुंह में बचा था, वो सारा नमकीन पानी बिना लंड को मुंह से निकले, एक ही झटके में पी गई।

पूरा पानी निकल जाने के बाद भी मेरे लंड को मुंह में लेकर कुछ देर चूसती रही। उसके बाद मैंने लंड को मुंह से निकाला और पापा की लुंगी पर ही अपने हाथ का साफ किया और उनके लंड को भी हल्का सा पौंछ कर साफ कर दिया। फिर मैं धीरे से खड़ी हुई और दरवाजा खोल कर बाहर आ गई और वापस बंद कर अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बंद कर सीधा बिस्तर पर लेट गई।

मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं अभी-अभी अपने पापा का लंड चूस कर आई हूँ। मेरे मुँह में अभी भी लंड के पानी का थोड़ा नमकीन स्वाद था. अभी तक मैंने ये सब पापा बेटी सेक्स मूवी देखी थी और मैं आज खुद ही अपने पापा का लंड चूस के आ रही थी… ऐसा लग रहा था जैसा मेरा कोई सपना देख रही हूं।

वैसे मुझे लग रहा था कि शायद पहली बार मैंने पापा का लंड चूसा था इसलिए एक्साइटमेंट में पापा जल्दी झड़ गए थे। वहीं मेरी चूत पूरी तरह पनिया गई थी. मैं पापा के लंड को चूसने के बारे में मुझे याद कर अपनी चूत को सहलाने लगी.

मेरा मन कर रहा था कि एक बार फिर वापस कमरे में जाऊं और लंड को दोबारा मुंह में लेकर चूसते हुए अपनी चूत सहलाऊं। यहीं सोचते-सोचते मैं उत्तेजित होने लगी और तेजी से हाथ से अपनी चूत रगड़ने लगी. और फिर मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया।

चूत का पानी निकलने के बाद मैं आंख बंद कर लेट गयी और मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला। अगले दिन सुबह जब हम उठे तो मैं रोज की तरह नीचे आयी, मम्मी और पापा चाय पी रहे थे. नानी भी पास ही बैठी थी. पापा अखबार पढ़ रहे थे.

उस में हमारे शहर में चल रहे किसी साधु बाबा के कथा का इश्तिहार था. वो कथा रोज दोपहर 3 बजे से शाम को 6 बजे तक होती थी. नानी ने जब यह सुना तो वो माँ से बोली की वो उस कथा को सुनना चाहती हैं. उस दिन संडे भी था तो पापा को भी छुटी थी.

मम्मी और नानी ने उस में जाने का प्रोग्राम बना लिया। और मुझे भी साथ चलने को कहा. पर उस दिन पापा भी घर पर ही थे तो मुझे यह एक सुनहरी मौका लगा की घर पर पापा से कुछ छेड़छाड़ करुँगी तो मैंने पढाई का बहाना बना कर घर पर ही रहने का बोल दिया।

पापा भी खुश हो गए. पापा ने कहा की वे मम्मी और नानी को कार से छोड़ आएंगे और शाम को ले भी आएंगे। मैं पापा के चेहरे पर आयी हुई ख़ुशी को साफ़ साफ़ अनुभव कर सकती थी. मैं भी समझ रही थी कि पापा क्यों खुश है? हम लोगों ने जल्दी खाना खा लिया और फिर पापा कार में चल पड़े।

मैं भी उनके साथ चल पड़ी ताकि वापसी में कुछ देर और ज्यादा पापा के साथ अकेली रहने का मौका मिल सके. मम्मी और नानी को छोड़ कर हम वापिस आ रहे थे. मैंने पापा को आइसक्रीम खाने का कहा तो पापा ने एक आइसक्रीम की दुकान पर कार रोक ली. आइसक्रीम पार्लर पर पापा ने मुझे पुछा की मुझे क्या खाना है तो मैंने पापा की आँखों में देखते हुए कहा कि “पापा मुझे तो कुल्फी या चॉकोबार ही पसंद है, उसे मैं चूस चूस कर कहती हूँ.”

पापा मेरी आँखों की चमक देख कर ही समझ रहे थे कि में किस चॉकोबार की बात कर रही हूँ तो वो भी शरारत से बोले- “प्रतीक्षा मुझे तो आइसक्रीम ही पसंद है. मैं आइसक्रीम की डिब्बी में अपनी जीभ घुसा कर पूरी आइसक्रीम चाट चाट कर खाना पसंद करता हूँ. मुझे आइसक्रीम मैं पूरी जीभ डाल कर चाटना ही अच्छा लगता है.”

मैं शर्मा गयी. हम दोनों ही बात को समझ रहे थे. पापा ने मेरे लिए चॉकोबार ली और अपने लिए आइसक्रीम ली. फिर हम कार में आ कर बैठ गए और वहां पर पापा ने मुझे चॉकोबार पकड़ाई और आंखे मेरी आंखे में डाल कर मुझे चॉकोबार खिलाने लगे.

और खुद अपनी जीभ आइसक्रीम की डिब्बी में घुसा कर मुस्कुराते हुए अपने मुंह को खोल आइसक्रीम खाते हुए आँखो के इशारे से बताने लगी कि अभी मुझे तुमने अपनी आइसक्रीम इस तरह आइसक्रीम खिलानी है.

पापा: प्रतीक्षा कैसे लगी तुम्हें चॉकोबार?

इसे भी पढ़े – छोटी बहन साथ चुदाई का सपना पूरा हो गया

पापा फिर से प्यार से देखते हुए कहते हैं “मुझे आइसक्रीम बहुत अच्छी लगती है, कितनी मलाईदार होती है?” और ये बात बोलते ही एक चेहरे की मुस्कान आ गयी. मैं पापा को देख कर अपने होठों पर फिराने लगी। मेरे जैसी खूबसूरत लड़की की इस जानलेवा अदा पर कोई मर्द कैसे बच सकता था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

पापा भी मेरी कामुक अदा देख कर कहा चुप रहने वाले थे मेरी आंखो में देखते हुए अपने हाथ को जींस में खड़े अपने लंड को सहलाते बोले वो तुम लड़कियों को मलाईदार क्रीमी आइसक्रीम पसंद ज्यादा होती है अब तुम्हें रोज बढ़िया ब्लैक चोकोबार आइसक्रीम खिलाऊंगा.

मैं पापा की इस हरकत पर समझ रही थी कि पापा मुझे कोन सी चोकोबार आइसक्रीम खिलाने की बात कर रहे हैं ये बात सुनते ही मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। इसी तरह शरारत करते और दो अर्थी बातें करते हुए हमने अपनी अपनी चॉकोबार और आइसक्रीम चाट ली.

मैंने इस तरह से चाट चाट कर और अपने मुंह में पूरा डाल कर चॉकोबार चूसी कि जैसे पापा का लण्ड चूस रही होऊं और पापा ने भी पूरी जीभ से चाट चाट कर आइसक्रीम चाटी जैसे मेरी चूत को चाट रहे हों. पापा का लौड़ा खड़ा हो गया था जिसे वो बार बार दबा कर सेट कर रहे थे मेरी भी चूत पूरी गर्म हो चुकी थी और गीली हो गयी थी.

आइसक्रीम ख़त्म होने पर हम घर वापिस आ गए. घर आ कर हम अंदर आ गए। पापा ने मुझे कहा कि प्रतीक्षा तुम घर का दरवाजा अंदर से बंद कर दो ताकि कोई आ न सके. वैसे तो मम्मी और नानी थे नहीं और उन्हें शाम को हमें ही लेने जाना था तो आना तो किसी ने भी नहीं था. पर पापा पूरी प्राइवेसी चाहते थे ताकि खुल कर मजे कर सकें।

हमारे घर में अंदर से वो पुराने ढंग का कुंडा था जिस में एक लम्बा सा डंडा होता है और वो दूसरी तरफ एक गोल कुण्डी में जाता है और फिर उसे नीचे करके उस में ताला लगा सकते हैं. मैंने वो कुंडा लगाना चाहा पर वो थोड़ा सख्त था.

उस का डंडा दूसरी तरफ के छेद में जा नहीं रहा था. मुझे शरारत सूझी और मैंने पापा को कहा- “पापा! यह इस के छेद में डंडा नहीं घुस रहा है. आप कोशिश करके देखिये तो.” यह कहते हुए मैं झुक कर कुंडा लगाने की कोशिश करती रही.

पापा मेरे पास आ गए. और बोले “प्रतीक्षा! कोई बात नहीं, मुझे टाइट छेद में डंडा घुसाने का काफी अनुभव है. तुम चिंता मत करो. मैं आराम से छेद में डंडा घुसा दूंगा।” यह कहते हुए पापा मेरे पीछे से मेरी पीठ से चिपक गये।

पापा ने अब अपने लंड का थोड़ा सा दबाव मेरी पीठ पर डाला लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा तो उनकी हिम्मत और बढ़ गई और उन्होंने अपने लौड़े का पूरा दबाब मेरी गांड पर डाल दिया. पापा का लण्ड लोहे की तरह सख्त हो चूका था. और पापा ने थोड़ा हिल कर लौड़े को चूतड़ों से अब मेरी गांड की दरार में घुसा दिया और एक धक्का दे कर लौड़े को गांड की दरार में फंसा दिया.

अब घर में हम दोनों बाप बेटी ही तो थे, तो इतनी भी क्या जल्दी थी, कोई आने वाला तो था नहीं, तो मैंने सोचा कि थोड़ा छेड़खानी चलने देती हूँ. तो मैंने थोड़े गुस्से से कहा कि पापा आप क्या कर रहे हैं तो उन्होंने डर कर एक दम से अपनी कमर पीछे कर ली और लौड़ा मेरी गांड में से निकल गया.

तो मैं डर गई कि कहीं वो चले ही ना जाएं, इसके लिए मैंने अपनी गांड को थोड़ा पीछे कर दिया तन की उनको ये एहसास हो सके कि ये मेरा नकली गुस्सा है। पापा समझ गए और उन्होंने अपने लंड का दबाव फिर से और बड़ा दिया मेरी गांड पर, मुझे तो मजा आ रहा था और मैं तो खुद तैयार थी चुदवाने को बस नखरे दिखा रही थी।

फिर जब मैंने कुछ नहीं कहा उन्हें तो पापा मेरे से चिपक गए और अपने हाथ मेरी कमर के चारों ओर डाल कर मुझे पकड़ लिया. और बोले “प्रतीक्षा! लगता है छेद थोड़ा तंग है और डंडा उसके हिसाब से मोटा है. इसी लिए आराम से घुस नहीं रहा. कोई बात नहीं मुझे घुसाना आता है. मुझे लगता है कि डंडे और छेद पर थोड़ा तेल लगाना पड़ेगा। जब चिकनाई हो जाएगी तो आराम से डंडा घुस जायेगा।”

यह कहते हुए पापा ने अपने लौड़े का एक झटका मेरी गांड में लगा दिया। मेरी तो चूत में पापा की बात सुन कर बहुत पानी आ गया. मैं समझ रही थी की पापा क्या दो अर्थी बात बोल रहे हैं. पापा यह कह कर मेरी गर्दन पर चुंबन करने लगे। मुझे परम आनंद आ रहा था।

मैंने उनसे कहा कि आआह्ह्ह… पापा लगता है आपको माँ की बहुत याद आ रही है तो वो बोले कि तुम्हें कैसे पता तो मैंने कहा कि तभी आप मुझे तंग कर रहे हो तो वो बोले कि नहीं मुझे तो मेरी बेटी तुमपे प्यार आ रहा है.

मैं:- हाँ मैं जानती हूँ यह आपका प्यार तभी तक है जब तक माँ नहीं आ जाती. फिर आप माँ के साथ ही चिपके रहेंगे और मेरी ओर तो देखेंगे भी नहीं.

पापा :- अरे प्रतीक्षा ऐसा क्यों बोलती हो. मैं तो तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. यह ठीक है की तेरी माँ के आ जाने के बाद मुझे कुछ समय उसे भी तो देना पड़ेगा, पर तुम्हे थोड़े ही न भूल सकता हूँ. तू तो मुझे बहुत प्यारी है.

इसे भी पढ़े – मायके से ही चुद कर आई थी मेरी बीवी

कहते हुए पापा ने मुझे कन्धों से पकड़ लिया और मेरी गर्दन पर चूमने लगे. मुझे बहुत आनंद आ रहा था.

पापा – हाय.

मैं- पापा क्या हुआ?

(असल में मैंने अपने चूतड़ थोड़ा पीछे को धकेल दिए थे तो पापा का लण्ड मेरी गांड में और अंदर घुस गया तो पापा के मुंह से आनंद से आह निकल गयी थी.)

मैंने बात को घुमाते हुए कहा- “पापा! आप चिकनाई लगा दीजिये ताकि कुण्डी का डंडा घुस जाये और हम अंदर जा सकें।

पापा मुझे छोड़ कर जाना नहीं चाहते थे क्योंकि उनका लौड़ा मेरी गांड में लगा हुआ था. मैं कुण्डी लगाने के बहाने झुकी हुई थी और हम दोनों बाप बेटी को बहुत आनंद आ रहा था.

पापा बोले “बेटी प्रतीक्षा! अभी तेल कहाँ ढूंढेंगे, मैं थोड़ा थूक लगा देता हूँ, उस की चिकनाई से भी डंडा घुस जाता है.”

मैं क्या बोलती बस चुप रही.

फिर पापा बोले- “प्रतीक्षा! पर मैं अकेला ही क्यों थूक से अपना हाथ गन्दा करूँ, ऐसा करो कि तुम छेद में थूक लगा कर चिकना कर दो और मैं डंडे पर थूक लगा देता हम फिर डंडा आराम से छेद में घुस जायेगा।”

अब तक बातचीत काफी कामुक हो गयी थी. मैं भी उसी टोन में बोली- “हाय पापा! आप छेद में चिकना कीजिये मैं तो डंडे पर थूक लगा दूँगी।”

यह कह कर मैंने अपनी ऊँगली पर थोड़ा थूक लिया और कुण्डी के डंडे को एक हाथ से पकड़ कर दुसरे हाथ से इस तरह ऊपर से नीचे तक थूक लगाने लगी जैसे मेरे हाथ में कुण्डी का डंडा नहीं बल्कि पापा का लण्ड हो, पापा भी मेरी हरकत देख कर गर्म हो गए. उन का लौड़ा और भी टाइट हो गया.

उन्होंने अपने हाथ में थोड़ा थूक लिया और उसे कुण्डी के छेद में ऊँगली से अंदर तक इस तरह लगाने लगे जैसे मेरी चूत में लगा रहे हों. हम दोनों बाप बेटी कामुकता की आग में जल रहे थे. घर में हम दोनों की सिवाए कोई नहीं था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

पापा ने कहा- “प्रतीक्षा! अब छेद और डंडा दोनों चिकने हो गए है. देखो अब कैसे डंडा आराम से टाइट छेद में घुसता है.”

यह कह कर उन्होंने छेद पर डंडा रखा और एक ही झटके से उसे पूरा अंदर कर दिया। डंडा घुसते ही मेरी चीख निकल गयी मानो डंडा कुण्डी में नहीं बल्कि पापा का लौड़ा मेरी चूत में घुस गया हो.

मैं बात को सँभालते बोली- “पापा! आप ने तो एक ही झटके में पूरा घुसेड़ दिया। छेद फट जाता तो. थोड़ा आराम से अंदर करना था ना।”

पापा मुस्कुराते हुए बोले, “प्रतीक्षा! कोई बात नहीं। तुम चाहती हो तो धीरे धीरे और आराम से ही अंदर करूँगा। तुम चिंता मत करो.”

यह कह कर पापा ने अपना लौड़ा एक बार फिर से मेरी गांड में धक्का मारा, जैसे मुझे कह रहे हो कि मैं अपनी बेटी को आराम से चोदुँगा। अब कुण्डी लग गयी थी तो हम दोनों बाप बेटी अंदर आ गए. और अपने कपडे बदलने के लिए अपने अपने कमरे में चले गये। मैं अपने कमरे की तरफ जा रही थी तो पापा पीछे से बोले- “प्रतीक्षा! कपडे बदल कर आ जाओ. यहीं बैठते है.”

फिर थोड़ा रुक कर बोले- “गर्मी बहुत है, हो सके तो थोड़े कपडे पहनना। चाहे तो स्कर्ट ही पहन लेना।”

मैं समझ गयी कि पापा के मन मैं भी मौके का लाभ उठाने का मन है. कमरे में जाने के बाद मैंने सोचा कि आज ही मौका है, माँ और नानी घर पर नहीं हैं. तो मैं कोशिश करूँ तो शायद पापा से चुदवा ही लूँ. यह सोच कर मैंने एक पतली सी टी शर्ट पहनी और उसके नीचे ब्रा नहीं पहनी।

मैं चाहती थी कि पापा को आगे बढ़ने का मौका दूँ. फिर मैंने एक छोटी सी स्कर्ट पहनी पर उसके नीचे पैंटी पहन ली. मैंने सोचा कि एकदम से नंगी होना भी ठीक नहीं है. मैं कमरे से बाहर आयी तो पापा सोफे पर बैठे थे.

मैंने पूछा कि “पापा! चाय पीयेंगे?”

पापा को मुझे पास बिठाने का मौका लगा तो बोले “प्रतीक्षा! चाय तो पी लूंगा पर यदि तुम भी पास में बैठ कर साथ चाय पियोगी।”

मैं पापा और अपने लिए दो कप चाय बना कर लायी और सोफे पर पापा के पास बैठ गयी. हम दोनों चाय पीने लगे. पापा ने भी एक बनियान और पजामा पहना था. पापा मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए बोले- “प्रतीक्षा! तुम इस स्कर्ट और टी शर्ट में बहुत सूंदर लग रही हो” यह कहते हुए पापा ने अपना एक हाथ मेरी टांग पर रख दिया और उसे सहलाने लगे.

मैं पापा को आगे बढ़ते देख कर खुश हो गयी और अपनी टाँगे फैला दी ताकि पापा को मेरी जाँघे सहलाने में आसानी हो. पापा मुस्कुरा रहे थे और बात करते हुए लगातार स्कर्ट के ऊपर से मेरी जांघ सहलाते जा रहे थे। उनके सहलाने से स्कर्ट थोड़ा ऊपर आ गयी थी जिसमें घुटनों के ऊपर मेरी जांघ भी थोड़ी दिखाई देने लगी थी।

हालांकि इससे आगे बढ़ने की हिम्मत अभी पापा की नहीं हो रही थी। मेरी चूत भी थोड़ी-थोड़ी गीली होने लगी थी। पापा मेरी जाँघ को धीरे-धीरे सहलाते रहे और धीरे धीरे उनका हाथ ऊपर ही ऊपर जा रहा था. ऐसा लग रहा था कि जल्दी ही उनका हाथ चूत तक पहुँच जायेगा.

और मैं मन ही मन कुढ़ रही थी कि हमेशा तो मैं पैंटी के बिना पापा के पास आती हूँ, और आज जब मौका है की पापा मेरी चुदाई कर दें, तो मैं पैंटी पहन कर आ गयी. खैर अभी कुछ नहीं हो सकता था तो मैं चुप ही रही. पापा समझ गये कि अब मैं भी चुदासी हो रही हूँ और खुलकर मजे लेना चाह रही हूँ।

मेरी चुप्पी से पापा की हिम्मत बढ़ गयी. वे अभी तक स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी जांघ सहला रहे थे पर इसके बाद उन्होंने धीरे से अपना हाथ स्कर्ट के अंदर डाल दिया और सीधा मेरी नंगी जांघों को सहलाने लगे। पापा के मेरी जांघ सहलाने से और लुंगी के नीचे तने लण्ड को देखकर मेरे ऊपर भी मस्ती छाने लगी और मेरी गीली हो चुकी चूत भी कुलबुलाने लगी थी।

मन तो कर रहा था कि टीशर्ट उठाकर चूची नंगी करके चूसने के लिए बोल दूँ, फिर लुंगी के अंदर हाथ डालकर सीधा लण्ड पकड़ लूँ और मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दूँ। मेरी सांस तेजी से चल रही थी जिससे टाइट टीशर्ट में गोल-गोल चूचियां ऊपर नीचे हो रही थीं।

इसे भी पढ़े – बाप ने बेटी को रात भर जबरदस्ती चोदा

उत्तेजना में चूचियों के निप्पल तन गये थे जो टीशर्ट में साफ दिख रहे थे। पापा एकदम ललचायी निगाह से मेरी चूचियों को देखते हुए स्कर्ट के अंदर हाथ डाले हुए मेरी नंगी जाघों को सहलाए जा रहे थे। वे भी समझ चुके थे कि मैंने ब्रा नहीं पहनी है।

हम दोनों क्या बात करें… समझ में नहीं आ रहा था. साथ ही हम दोनों ही समझ रहे थे कि आगे क्या होना है। लेकिन कैसे शुरू करें… यह हम दोनों को ही समझ में नहीं आ रहा था। उत्तेजना के चलते पापा के उनके होंठ सूख गये थे जिसे वह बार-बार जीभ से चाट कर गीला कर रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उन्हें बार-बार होंठ चाटते देख मैंने धीरे से पूछा- “प्यास लग रही है क्या पापा?”

पापा मेरी तरफ देखकर कामुक आवाज में धीरे से बोले- “हाँ बेटा, होंठ सूख रहे हैं कुछ पीने का मन कर रहा है।”

मैं धीरे से बोली- “पानी लाऊँ?”

कामुकता में पापा की आवाज कांपने लगी थी, वह मेरी चूचियों की तरफ देखते हुए बोले- “पानी नहीं… कुछ और पिला दो बेटा!”

मैं भी एकदम मस्त चुदासी हो चुकी थी उत्तेजना के चलते मेरी आवाज भी हल्का से कंपकंपाने लगी थी और मैं धीरे से बोली- “दूध पीएंगे?”

कामुकता और वासना के चलते मेरा चेहरा गर्म हो गया था और ऐसा लग रहा था कि चूत में चींटियाँ रेंग रहीं हों। उधर वासना में पापा की आँखें लाल हो गयी थीं और उत्तेजना के चलते वह भी खुद पर काबू नहीं रख पा रहे थे।

वे इतना आगे झुक चुके थे और उनका चेहरा मेरी चूचियों के इतना पास था कि उनकी गर्म साँसों को मैं चूचियों पर महसूस कर रही थी। वासना के नशे में पापा की आवाज़ भी हल्का सा कंपकंपाने लगी थी।

वे धीमी और कंपकंपाती आवाज में बोले- “पिला दो बेटा!”

मैं:- “पापा फ्रिज का ठंडा दूध पिएंगे या गर्म दूध?”

पापा:- “बेटी हो सके तो ताज़ा दूध पिला दो.”

मैं:- “पापा ताज़ा दूध अभी कहाँ से मिलेगा?”

पापा:- “प्रतीक्षा चाहो तो तुम पीला सकती हो, सब तुम्हारे ऊपर निर्भर है.”

मैं:- “पापा यह भी तो संभव है कि जहाँ से ताज़ा दूध आप पीना चाहते हों, वहां अभी दुध ही न आता हो.”

पापा:- “बेटी फिर भी कोशिश करने में क्या हर्ज है? शायद आ ही जाये.”

और यह कह कर पापा फिर से मेरे मम्मों की ओर देखने लगे.. पापा के सीधा ही यह कहने से मेरी चूत में फिर से पानी आ गया. पर अभी मेरी हिम्मत नहीं हो पायी की मैं अपनी टी शर्ट ऊपर उठा कर अपनी नंगी छाती पापा के मुंह में दे दूँ. मेरे लिए खुद को रोक पाना अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका था।

मेरी चूचियां, पापा के मुंह के ठीक सामने थीं। उत्तेजना वश मेरी चूचियों की निप्पल कड़ी हो गयी थीं जो टीशर्ट के ऊपर से साफ पता चल रही थीं। पापा की निगाह बार-बार उसी पर जा रही थी। टेबल सोफे के इतना पास था कि मेरे और पापा के घुटने आमने-सामने से एक दूसरे से टच कर रहे थे।

मेरी निगाह पापा के पाजामे की तरफ गयी तो वहां पर उनके लण्ड का तनाव साफ दिख रहा था। तनाव देख कर साफ पता लग रहा था कि उनका लौड़ा पूरा खड़ा हो गया है। ध्यान से देखने पर पापा के लौड़े का सुपाड़ा भी दिखाई दे रहा था.

ऐसे माहौल में मेरी चूत भी हल्का-हल्का पनियाने लगी थी। मैं बिना कुछ बोले बस धीरे से हंस दी। पापा समझ गये कि मेरी हंसी में भी हाँ है। मुझे लग रहा था की बस अभी पापा मेरी टी शर्ट ऊपर करके मेरी चूचीयां नंगी कर देंगे और अपने मुंह में डाल कर चूसना शुरू कर देंगे.

पापा को सूझा नहीं कि वो क्या कहें तो बात को घुमाते हुए बोले- “प्रतीक्षा! चाहे तुम जवान हो गयी हो पर मेरे लिए तो तुम सदा ही एक वही छोटी सी बच्ची हो जो स्कूल से आते ही मेरी गोद में चढ़ जाती ही और फिर मेरे लाख कहने पर भी मेरी गोद से उतरती ही नहीं थी, सदा कहती थी कि पापा मुझे आप की गोद में बैठना बहुत अच्छा लगता है, और अभी देखो कितने साल हो गए हैं जब से तुम मेरी गोद में आ कर नहीं बैठी हो.”

मैं समझ रही थी कि पापा के मन में क्या है, मुझे भी पापा को पटाने का यह एक और सुनहरी मौका लगा तो मैंने प्यार से कहा- “पापा मैं तो सदा ही आपकी वही छोटी सी बेटी हूँ. आप ही मुझे अपनी गोद में नहीं बिठाते. मेरा तो कितना मन करता है की मैं आपकी गोद में बैठूं. जैसे पहले बैठती थी.”

इसे भी पढ़े – हवसी पापा ने अपने सामने मुझसे माँ को चुदवाया

यह कह कर मैंने एक तरह से पापा को खुला इशारा कर दिया कि मैं उनकी गोद में बैठने को तैयार हूँ. पापा के लिए भी यह एक मौका था. उन्होंने तुरंत बात को पकड़ लिया और बोले- “प्रतीक्षा! मैं तो सदा तुम्हे गोद में बैठाने को तैयार हूँ. चाहो तो आज ही आ जाओ. पापा की गोद तो तुम्हारे लिए सदा तैयार है.”

यह कह कर पापा ने मुझे खुला आमंत्रण दे दिया और जिसे मैंने तुरंत लपक लिया.

मैंने मुस्कुरा कर कहा- “पापा मुझे कभी मौका ही नहीं मिला आपकी गोद में बैठने का?”

पापा ने जांघ पर हाथ रखे हुए ही मुझसे हंसकर धीरे से बोले- “वैसे सच तो यही है कि तुम्हें गोद में बैठाने का मौका नहीं मिला। मैं भी काफी व्यस्त रहता हूँ न।”

फिर वो मुस्कुराते हुए बोले- “आओ आज अपने पापा की गोद में बैठ जाओ। कुछ दिन बाद जब तुम्हारी शादी हो जाएगी तो शादी के बाद तो अपने पति की ही गोद में बैठोगी मेरी गोद में थोड़े ही आओगी फिर.”

पापा ने बिलकुल साफ़ बता दिया कि वो मुझे एक बाप की तरह नहीं बल्कि एक मर्द की तरह गोद में बिठाना चाहते है. मैं तो तैयार थी ही, दोअर्थी और कामुकता भरी बातचीत से अब हम दोनों पर धीरे-धीरे वासना का बुखार चढ़ने लगा था। मैं थोड़ा डर गयी और बात को पलटते बोली- “पापा वैसे मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी तो मैं आपकी गोद में बैठ जाती थी और आपने भी मुझे गोद में बहुत खिलाया था।”

पापा मुस्कुराते हुए बोले- “मेरा तो अभी ये भी मन में है कि तुम्हें गोद में बैठा लूँ!”

इस बात पर मैंने भी जानबूझकर मजे लेते हुए कहा- “हाँ… मैं तो अभी भी तैयार हूँ. आपका मन हो तो कहिए मैं अभी आपकी गोद में बैठ जाऊँ?”

ठरकी पापा की आँखों में वासना साफ झलक रही थी।

वे मुस्कुराकर बोले- “अरे वाह… आ जाओ बेटा मेरी गोद में!”

मैंने कहा- “तो इसमें कौन सी बड़ी बात है… अभी आपके गोद में बैठ जाती हूँ।”

मैं जान रही थी कि अभी हमारे पास काफी समय है, घर में हम दोनों बाप बेटी ही तो हैं और कोई आने वाला भी नहीं है. और मैं भी अब थोड़ा मजा लेना चाह रही थी। मैं मुस्कराती हुई खड़ी हो गयी। पापा थोड़ा पीछे होकर सोफे पर पीछे टेक लेकर बैठ गये और अपने जांघों को फैलाकर मुझे गोद में बैठने की पूरी जगह दे दी।

मैं पापा की ओर पीठ किये हुए पापा की गोद में बैठने लगी. गोद में बैठते हुए मैंने पूरा टाइम लिया और आराम से झुक कर उनकी गोद में अपनी गांड टिकाई, मैं जानबूझ कर धीरे धीरे बैठ रही थी, ताकि पापा को मेरी गांड ठीक से दिखाई दे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

पर पापा ने तो उस मौके का ज्यादा ही लाभ उठाया. जब में गोद में बैठने लगी तो उन्होंने धीरे से मेरी स्कर्ट का पिछला कपडा ऊपर उठा दिया. इस से मेरे चूतड़ नंगे हो गए. पापा को निराशा तो हुई क्योंकि उनको लग रहा था की मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी और उन्हें मेरी नंगी गांड देखने का सौभाग्य प्राप्त होगा.

पर मैंने कच्छी पहन रखी थी, इस बात से वैसे तो पापा से अधिक मैं खुद निराश थी. काश आज मैंने पैंटी ही न पहनी होती, पर उनकी गोद में बैठते ही मुझे उनके तने हुए लौड़े का एहसास हुआ. पापा की गोद में बैठते ही पाजामे के अंदर पापा के तने हुए लण्ड को मैं साफ महसूस कर रही थी जो ठीक मेरी गांड के नीचे था। पापा के लण्ड को अपनी गांड पर महसूस करते ही मेरी चूत एकदम गीली हो गयी।

मैं जानबूझकर बोली- “पापा अब तो हो गयी गोद में बैठाने की तमन्ना पूरी? अब उठ जाऊं?”

इसे भी पढ़े – भाभी को चोद रहा था मम्मी ने देख लिया 2

पापा ने अपने दोनों हाथों को मेरी कमर के अगल-बगल से लाकर एक हाथ मेरे जांघ पर रख दिया और दूसरे हाथ को मेरे पेट पर रखकर कसकर मुझे पकड़ते हुए बोले- “बस बेटा, थोड़ी देर और बैठी रहो ना ऐसे ही! अच्छा लग रहा है। कितनी देर के बाद तो अपने पापा की गोद में बैठी हो, थोड़ा अपने पापा का दिल तो भर जाने दो.”

मैं भी कहाँ उठना चाहती थी, यह तो मैं झूठमूठ हो बोल रही थी, मन तो कर रहा था की इसी तरह पापा की गोद में बैठी रहूं. पापा अभी तक जहाँ स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी जाँघों को सहला रहे थे अब वह स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरी चिकनी नंगी जांघ को सहलाने लगे थे। साथ ही अपने लण्ड को मेरी गांड पर दबाए हुए थे।

मैं- “अच्छा तो कब तक बैठी रहूंगी इसी तरह? आपको तो मजा आ रहा है।”

पापा- “प्लीज थोड़ी देर बैठी रहो ना… तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा क्या?”

मैं मुस्कुराती हुई बोली- “कुछ खास तो नहीं।”

अब मैं भी आराम से गोद में बैठी हुई मजे लेने लगी और बात करते हुए किसी न किसी बहाने अपनी गांड को पाजामे के ऊपर से ही पापा के लण्ड पर हल्का-हल्का रगड़ रही थी। वहीं बात करते हुए मैंने अपनी जांघों को दोनों ओर थोड़ा फैला दिया और पापा को सहलाने के लिए और जगह दे दी। पापा भी समझ रहे थे कि अब मैं भी मजा लेने के मूड में आ गयी हूँ। दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में पढ़े की कैसे पापा ने मेरे पूरे जिस्म का मजा लिया.

ये Beti Garam Chut Porn की कहानी आपको पसंद आई तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और Whatsapp पर शेयर करे…………….

Related posts:

  1. पापा के साथ घर बसाया 2
  2. पापा के साथ घर बसाया 5
  3. बहु ने चोदु ससुर को रंगे हाथ पकड़ कर चुदवाया
  4. बेटी को चुदाई का मजा दिया पापा ने
  5. बेटी पर चढ़ा पापा से चुदवाने का नशा
  6. बाप बेटी ने मर्यादा की सीमाएँ लांघी 1

Filed Under: Baap Beti Ki Chudai Tagged With: Blowjob, Boobs Suck, Family Sex, Hardcore Sex, Hindi Porn Story, Horny Girl, Kamukata, Mastaram Ki Kahani, Non Veg Story, Sexy Figure

Reader Interactions

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Primary Sidebar

हिंदी सेक्स स्टोरी

कहानियाँ सर्च करे……

नवीनतम प्रकाशित सेक्सी कहानियाँ

  • Meri Bahan Ki Virgin Chut Chodi
  • बाप बेटी ने मर्यादा की सीमाएँ लांघी 2
  • चुदासी बहन ने दोनों भाइयों से चुदवा लिया
  • Disney Land Mela Me Sexy Aunty Ko Choda
  • शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 1

Desi Chudai Kahani

कथा संग्रह

  • Antarvasna
  • Baap Beti Ki Chudai
  • Bhai Bahan Sex Stoy
  • Desi Adult Sex Story
  • Desi Maid Servant Sex
  • Devar Bhabhi Sex Story
  • First Time Sex Story
  • Girlfriend Boyfriend Sex Story
  • Group Mein Chudai Kahani
  • Hindi Sex Story
  • Jija Sali Sex Story
  • Kunwari Ladki Ki Chudai
  • Lesbian Girl Sex Kahani
  • Meri Chut Chudai Story
  • Padosan Ki Chudai
  • Rishto Mein Chudai
  • Teacher Student Sex
  • माँ बेटे का सेक्स

टैग्स

Anal Fuck Story Bathroom Sex Kahani Blowjob Boobs Suck College Girl Chudai Desi Kahani Family Sex Hardcore Sex Hindi Porn Story Horny Girl Kamukata Kunwari Chut Chudai Mastaram Ki Kahani Neighbor Sex Non Veg Story Pahli Chudai Phone Sex Chat Romantic Love Story Sexy Figure Train Mein Chudai

हमारे सहयोगी

क्रेजी सेक्स स्टोरी

Footer

Disclaimer and Terms of Use

Privacy Policy

HamariVasna - Free Hindi Sex Story Daily Updated