Muslim Bap Beti Chudai
जफ़र और हसीना आज बहुत खुश थे क्योंकि 2 दिन पहले ही उनकी बेटी सफीना की शादी हुई थी, और आज सफीना अपने पति के साथ अपने अम्मी अब्बू के घर आने वाली थी. Muslim Bap Beti Chudai
जफ़र – सब कुछ तैयार कर लिया है ना वो कभी भी आते ही होंगे.
हसीना – अरे हाँ सब कुछ तैयार है…
जफ़र हसीना के करीब आकर उसको पीछे से पकड़ लेता है और अपने कुर्ते को उठा कर पाजामे में से अपना लंड पकड़ कर हसीना की गांड पे लगा के धक्के मारने चालु कर देता है.
जफ़र – और मेरा लौड़ा भी तैयार है.
हसीना – अरे सफीना आती ही होगी तुम जरा अपने हथियार को शांत रखो अभी जरा.
जफ़र – अरे तुझे तो पता ही है मुझसे ये घर और तेरा पेट खाली देखा नहीं जाता.
हसीना – लेकिन अभी वो आते ही होंगे अभी तो जरा अपने लौड़े को शांत करो.
जफ़र – तो कर न शांत सुबह से 2 बार मुठ मार चुका तेरी कच्छी सूंघ सूंघ के..
हसीना – अच्छा आज कौन सी कच्छी पे इतना प्यार आ गया तुम्हें.
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जफ़र – अरे वो तेरी लाल वाली कच्छी जिसपर गुलाब का फूल बना था वो देखते ही खड़ा हो गया था मेरा.
हसीना – या अल्लाह! वो मेरी कच्छी नहीं थी सफीना की थी उसपे फूल बनवाया था उसने पहली रात में पहनने के लिए.
जफ़र – तो यहाँ क्यों छोड़ गयी वो?
हसीना – अरे भूल गयी थी, वही लेने तो आ रही है, इसी चक्कर में उसने अपनी पहली रात नहीं मनाई.
जफ़र – अजीब पागल लड़की है.
हसीना – इसलिए सुबह सुबह धोयी थी लेकिन तुमने गन्दी कर दी.
उसके बाद हसीना जफ़र से अलग होके बाथरूम में जाके वो कच्छी अच्छे से धोके के सूखने के लिए तार पे टांग देती है. तभी सफीना और उसका शौहर भी आ जाते. जिसे देख कर जफ़र गाडी के पास जाता है और दोनों का वेलकम करता है और उनका सामान उठा कर अंदर ले आता है. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सफीना – अब्बू अम्मी कहा है..?
जफ़र – वो छत पे है कपड़े सुखा रही है.
सफीना वहाँ से उठ कर छत पे चली जाती है.
सफीना का पति – और सुनाइए कैसे हैं आप..?
जफ़र – बस बेटा सब ठीक है तुम बताओ तुम्हारे अब्बू अम्मी सब ठीक…
सफीना का पति – हाँ.. हाँ सब ठीक ही है.
छत पर पहुंच कर सफीना हसीना को पीछे से पकड़ कर लेती है और ज़ोर से गले लग जाती है.
सफीना – किसके कपड़े सूखा रही हो?
हसीना – अरे वो बस कच्छी धोयी थी वही सुखा रही थी.
सफीना – मेरे जाते ही मेरे भाई-बहिन की तैयारी भी करने लगे.
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हसीना – चुप साली वो तेरे अब्बू ने मेरी कच्छी समझ के तेरी कच्छी पे अपना प्यार निकाल दिया बस वही धो रही थी.
सफीना – अरे अब तो मौका भी है और तुम दोनों अकेले भी तो आराम से खुल्लम खुल्ला किया करो.
हसीना – तू थोड़ी और देर से आती ना तो पक्का मैं बिस्तर पे तेरे अब्बू की कुतिया बनी होती.
सफीना – वैसे अम्मी मेरी कच्छी अब्बू को गलती से मिली या…?
हसीना – बकवास कम कर और चल नीचे.
बस फिर दोनों हँसते खिलखिलाते हुए नीचे आ जाते है और किचन से चाय बना कर उन दोनों के सामने रख कर वही बैठ कर बाते वाते होने लगती है. कुछ यहाँ की तो कुछ इधर उधर की तो कभी हंसी मज़ाक से जुड़ा… यही करते करते शाम हो गयी. खाना बनाने के बहाने सफीना ने हसीना को किचन में बुलाया।
सफीना – वैसे अम्मी हम यहाँ अपनी पहली रात मनाने आये है आपको कोई दिक्कत तो नहीं है न?
हसीना – अरे मुझे कोई दिक्कत नहीं.. हैं अगर तेरे पति का लौड़ा ज्यादा ही मोटा और लंबा हो तो मुझे जरूर बताइयो.
सफीना – क्यों नहीं थ्रीसम का मजा भी मैं आपको दिलवा दूंगी.
हसीना – या अल्लाह! कितने दिंनो बाद थ्रीसम का मज़ा फिर से लुंगी.
सफीना – फिर से मतलब..?! मेरी अम्मी भी अपनी जवानी में खिलाड़ी रह चुकी है बताओ कुछ थोड़ा टिप्स दो न…
हसीना – ये पहली बार है तेरा..?
सफीना – हाँ अब्बू पे ट्राई कर तो रही थी तूने करने ही नहीं दिया.
हसीना – तेरी गांड फाड़ देता वो और तू थी भी छोटी थी जब..
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दोनों आपस में बाते करते करते डिनर तैयार कर देते है. उसके बाद सफीना नहाने चली जाती और पहली रात मनाने के लिए अपने आप को तैयार करने लगती है. लेकिन तभी उनके गली का ट्रांसफार्मर ख़राब हो गया जिसके कारण उनके मोहल्ले की बत्ती ही गुल हो गयी और पुरे मोहल्ले में अंधेरा छा गया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चारों तरफ अंधेरा होने से सफीना जल्दी जल्दी नहा कर कमरे से बाहर निकल कर जैसे ही किसी को आवाज़ लगाने के लिए मुँह खोलती है. तभी कोई उसके मुँह पे हाँथ रख कर वहाँ से उसको उठा कर वापस कमरे में घुस जाता है. और उसकी (सफीना) की गांड पे अपना लंड रगड़ने लगता है. जिससे सफीना सहम सी जाती जाती है और अपने पति का सोच के शांत सी हो जाती है तभी..
जफ़र – सुबह से मौका ढूंढ रहा हूँ और देखो अल्लाह ने बत्ती गुल करके मौका दे दिया.
(सफीना उसकी आवाज़ सुन कर ये तो पता लगा लेती है की ये उसकी पति नहीं और बल्कि जफ़र उसका अब्बू है. लेकिन सफीना फिर भी कुछ नहीं बोलती और बस अपने अब्बू का साथ में साथ देने लग जाती है.)
जफ़र – बहुत मुठ मार लिया आज तेरी मारूँगा वो भी बहुत दिनों के बाद.
सफीना (मन में) – इसी पल का तो मुझे इंतज़ार था..
जफ़र सफीना के बूब्स पे हाथ रख कर जोर जोर से दबाने लगता है और दूसरे हाथ उसकी टांगों के बीच में ले जाकर उसके पजामी में हाथ डाल कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही चूत में ऊँगली घुसाने लगता है. सफीना भी अब्बू की ऐसी हरकतों से बिलकुल आउट ऑफ़ कण्ट्रोल सी हो जाती है.
और अपने होंठो को दांतो से दबा के बस कामुक सुख का मज़ाक लेने लग जाती है. जफ़र सफीना का सूट उतारकर उसकी पीठ को चूमते हुए मुंह से सफीना की ब्रा का हुक खोल कर उसके गिरते बूब्स को जफ़र अपने हाथ की मदद से पकड़ लेता है. और अपने हाथो से पकड़े पकड़े उनको दबाने लग जाता है.
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सफीना के मुँह से निकलती कामुक सांसे जो ये बता रही थी कि सफीना गरम होने लग गयी है. जफ़र भी ये समझते हुए सफीना की पजामी का नाडा खोल देता है. जिससे सफीना की पजामी झट से गिर जाती है. जफ़र सफीना को कमर से पकड़ उठा कर बिस्तर पे पटक कर उसको उल्टा कर गर्दन को चूमते हुए पीठ के रास्ते कमर से होते हुए उसकी गांड को अपने हांथो में लेकर उसे दबाने लगता है.
लेकिन जैसे ही अपना लंड सफीना की गांड के छेद में डालने जाता है बीच में उसकी फूल वाली कच्छी आ जाती है. जफ़र और सफीना की कामुकता उस कच्छी के रास्ते मे आने से भी नहीं रुकने वाली थी. जफ़र कच्छी को उतार कर अपने मुँह के पास ले आकर उसे सूंघकर मदहोश सा हो जाता है.
जिससे मदहोशी में जफ़र उस कच्छी को सफीना के मुँह में डाल कर उसका मुँह बंद कर देता है. ताकि उसकी आवाज़ ज्यादा बाहर न निकले. फिर अपना लंड हाथ में लिए सफीना की कमर को पकड़ उठा कर उसकी चूत के दरवाजे पे रख कर अचानक से एक झटका लगाता है.
जफ़र को हसीना की फुद्दी कुछ टाइट मालूम पड़ी लेकिन उसने सोचा कि शादी कि वजह से इतने दिनो से चुदाई ना होने की वजह से हसीना की फुद्दी टाइट हो गयी होगी। जफ़र के लंड के जोरदार धक्के से सफीना की चूत की सील एक ही झटके मे टूट कर बिखर गयी।
जिससे सफीना के मुंह से जोरदार चीख की आवाज़ निकली लेकिन मुंह मे पैंटी घुसी होने की वजह से बाहर नही निकल नहीं पायी. उसके बाद तो फिर जफ़र धक्के पे धक्का लगाता गया जैसे मानो कितने सालो से बस इसी पल के लिए वेट कर रहा हो. सफीना दर्द के मारे मारी जा रही थी लेकिन वह कुछ बोल भी नहीं सकती थी।
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अब्बू के लंड को लेने की उसकी तमन्ना जो पूरी हो रही थी। कुछ देर के बाद सफीना भी अब्बू के धक्को का मजा लेने में गुम सी हो गयी. जफ़र पूरी रफ्तार से धक्के लगाए जा रहा था। सफीना को अब पूरा मज़ा आने लगा था और वह भी जफ़र के धक्को का अपने चूतर उठा उठा कर जवाब दे रही थी।
दोनों पसीने से लथ पथ हो गए थे. कुछ देर चोदने के बाद जफ़र ने सफीना को अपने ऊपर ले लिया और खुद बेड के तकिये के सहारे पीछे की तरफ बैठ गया और सफीना को अपनी बाहों मे जकड़ लिया। बेड के एक कोने में जफ़र बैठा था और सफीना उसकी बाहों में लिपटी उसके लौड़े पे कूदती जा रही थी.
सफीना ने जफ़र को बिलकुल अपनी बाहो में जकड लिया था. तो वही जफ़र भी सफीना की कमर पकड़ कर अपने लौड़े पे ऊपर नीचे करवाए जा रहा था. तभी न जाने कहा से अंधेरे को चीरते हुए चारो तरफ उजाला हो जाता है. लेकिन जफ़र और सफीना अपने चुदाई की मदहोशी में मदहोश थे उन्हे इससे कोई लेना देना नहीं था.
ठीक उनके सामने सोफे पे हसीना जो अपनी सफीना के पति के लंड पे बैठ कर लौड़े को सवारी कर रही थी. उन दोनों की नज़र जफ़र और सफीना पे जब पड़ी. तब अपनी चुदाई छोड़ उनकी चुदाई देख कर मजा लेने लगे. लेकिन उजाले की चुभन से जफ़र ने आंखे खोली तो उसकी आंखे उजाले से तो नही. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन अपने सामने के नज़ारे को देखने के बाद उसकी आँखें जरूर फट गयी थी. हसीना को और किसी दूसरे के लौड़े की सवारी करते देख ये समझ नहीं आया की उसके लौड़े की सवारी कौन कर रहा है. तभी सफीना मदहोशी में चूर अपने मुँह से आवाज़ निकालती है…
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सफीना – आहहए अब्बू क्या खूब चोदते हो आप. मुझे पता था इसलिए तो पहले से ही मै आपके लौड़े की दीवानी थी. लेकिन अम्मी साली रांड ने अपने फायदे के लिए मुझे मौका नहीं दिया. पर देखो आज मेरी पहली रात की आपके लौड़े से शुरुवात की है आहहह आहहह अह्ह्ह्ह अब्बू और जोर से आआह्ह्हह्हह्ह अहहहहहहहहहहह..
ये सुन कर अकेले जफ़र की ही नही हसीना और सफीना के पति की भी फट के चार हो गयी. और तभी जफ़र ने सफीना के अंदर जोरदार पिचकारी मारी और सफीना की चूत को अपने माल से भर दिया। सफीना की चूत पिचकारी की धार से आउट ऑफ़ फ्लो होने लगी.
जिसके बाद सफीना भी धीरे धीरे शांत हुई और आंखे खोल कर देखा तो चारों तरफ उजाला था. फिर जफ़र के लौड़े पे से उठी तो देखा जफ़र का फेस शॉक के मारे होश में नहीं था. लेकिन जब पीछे मुड़ कर अपनी अम्मी (हसीना) और अपने पति दोनों की पोजीशन को देखा तो उसका फेस भी जफ़र के फेस जैसा बन गया था. चारो एक दूसरे को देखे जा रहे थे और बस एक दूसरे को देख कर यही सोच रहे थे की पहले शुरुवात किसने भी की लेकिन इस चुप्पी को तोड़ने की शुरुवात कौन करे. क्योंकि होश तो चारो के ही उड़े हुए थे.
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