Student Tight Chut XXX
हेलो, मैं हूँ नेहा हैं। मैं 34-28-36 हूँ। अब मैं आपके सामने अपना नया अनुभव बताने जा रही हूँ। हमारा अब एग्जाम का समय था। मैंने तो पूरा साल पढ़ाई नहीं की थी और अब मुझे डर लग रहा था कि पास कैसे होऊँगी। लेकिन मुझे खयाल आया कि मैं अपने टीचर से क्यों न कहकर देखूँ। Student Tight Chut XXX
उनकी ड्यूटी भी हमारी क्लास में थी और उनकी काफी चलती थी। वे पहले भी नकल करवा चुके थे। वे हमें ट्यूशन भी पढ़ाते थे। वैसे तो मैं ज्यादा उनसे ट्यूशन क्लासेस नहीं लगाती थी, लेकिन अब पेपर पास होने की वजह से मैं रेगुलरली जाने लगी थी। मैं रोज यही सोचती कि अपनी सिफारिश डाल दूँ उन पर।
लेकिन मेरा दिल डरता था कि कहीं वे बुरा न मान जाएँ और मेरा रोल नंबर कैंसल करवा दें। एक दिन मेरा सब्र टूट गया। मैंने पूरा मन बना लिया कि आज तो मैं जाकर कहूँगी ही। मैंने उस दिन सेक्सी ड्रेस पहनी। मैंने व्हाइट टॉप और ब्लू जींस पहनकर ट्यूशन गई ताकि सर मेरे शरीर पर रहम खाकर मेरी मदद करें। और जब सब बच्चे ट्यूशन से चले गए तो मैंने उनसे पूछा कि……
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मैं — सर, आपसे एक बात करनी है।
सर — हाँ जी बेटा, बताओ।
मैं — सर, आप बुरा तो नहीं मानोगे ना……
सर — बेटा, बच्चों का बुरा नहीं मानते।
मैं — सर, मैं आपसे यह कहना चाहती हूँ कि आपको पता है कि मैं पढ़ाई में थोड़ी कमजोर हूँ और मैं शायद पास भी न हो पाऊँ…… इसलिए……
सर — हाँ बोलो बेटा क्या।
मैं — सर, आप मेरी कुछ मदद कर दोगे?
सर — बेटा, मैंने नोट्स तो पूरे तैयार करवा दिए हैं ना।
मैं — सर, वो नहीं आप…… मुझे नकल करवा देंगे ना, मुझे डर लगने लगा……
सर — यह तुम क्या कह रही हो……… नहीं, मैं ऐसा नहीं करूँगा।
मैं — सर प्लीज…… यह मेरे फ्यूचर का सवाल है सर। प्लीज।
सर — नहीं, यह गलत है…… नो प्लीज।
मैंने सोचा ऐसे बात नहीं बनेगी तो मैंने कहा —
मैं — सर, आप जो मर्जी मुझसे करवा लीजिए…… मैं सब करने को तैयार हूँ…… प्लीज पर आप मुझे पास करवा दीजिए। प्लीज सर।
मैं जानबूझकर सर के पैरों में गिर गई थी और उनकी पैंट को पकड़े हुए थी ताकि मेरा नरम हाथ उनकी बॉडी को महसूस हो।
मैं — सर प्लीज। आप जो काम कहेंगे मैं करूँगी।
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सर — सोच लो……
मैं — सर, जो मर्जी…… प्लीज।
सर — बुरा तो नहीं मानोगी।
मैं — सर, जो मर्जी काम…… बस मुझे पास करवा दो।
सर — तुम मुझे खुश कर दो।
मैं समझ गई।
मैं — सर, आपका मतलब?
सर — देखो, मैं जबरदस्ती नहीं करता।
मैं — ठीक है सर…… लेकिन मुझे पास जरूर करवा देना।
सर — बिल्कुल मेरी बेटी।
सर की पत्नी घर पर नहीं थी।
सर — बेटी, मेरे पास आओ।
मैं सर के पास चली गई।
सर — बेटा, मुझे खुश करना शुरू करो।
मैं तो पास होने के लिए कुछ भी कर सकती थी। इसलिए मैंने सबसे पहले सर के सामने अपने मम्मों को दबाया। गोल-गोल सर देखते ही रह गए। फिर मैंने अपनी फुद्दी के ऊपर हाथ फेरा और अपनी टाँगों को कभी खोलकर और कभी बंद करके सर को दिखाया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैं अपनी सबसे अच्छी चीज — गांड दिखाने के लिए घूम गई और मैंने थोड़ी झुकी होकर गांड का मुँह सर की तरफ किया और अपनी गांड को मसला। सर से रहा नहीं गया…… वे अपने हाथ फैलाने लगे। मैंने फिर अपने होंठ सर के होंठों पर रख दिए और गपागप चूसने लगी। उम्म्म……
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हमारी जीभ फेविकॉल की तरह एक-दूसरे से जुड़ी रही। सर एक लड़की की जीभ का सारा मीठा रस पीने लगे और मैं भी सर की जीभ अपने अंदर खींचने लगी। सर मेरे मम्मों को गोल-गोल दबाने लगे। मैंने सर को कसके पकड़ा हुआ था और रसपान कर रही थी।
सर ने भी अपना हाथ मेरी गांड के ऊपर फेरना शुरू कर दिया। हमने कुछ देर तक एक-दूसरे का शरीर मसला और चुम्मा-चाटी की। सर मेरी दोनों चूतड़ों को मसल रहे थे और मेरी बंड की मूढ़ी पर उँगली डाल रहे थे। सर मेरी बंड का शीश अपने हाथों से खोलने की कोशिश कर रहे थे। फिर सर ने मेरे कपड़े धीरे-धीरे खोलने शुरू किए।
सर — बेटी, यू आर वंडरफुल…… क्या जवानी है मेरी बेटी…… क्या मम्मे हैं तेरे……
यार, मैं भी हॉर्नी हो गई थी।
मैंने कहा, “सर, मेरा पूरा जिस्म आपका है…… जो मर्जी कीजिए। इक-इक चीज चूसिए।”
सर ने मेरे ऊपर के अंगों को कपड़ों से आजाद कर दिया और मेरे मम्मे देखने लगे।
सर — वाह…… बहुत अच्छे हैं गोल-गोल…… आज तो बहुत चूसूँगा।
मैं — सर जल्दी चूसिए सर, अब रहा नहीं जाता।
सर ने मेरे एक मम्मे को मसला और दूसरे को जीभ का मजा देने लगे। अब तक तो मेरी चूत भी गीली होने लगी थी। मैं भी मजा ले रही थी। सर ने मेरे मम्मों को बच्चों की तरह बहुत देर तक चूसा और उन्हें लाल कर दिया। मेरे निप्पल्स भी लाल कर दिए। फिर उन्होंने अपने कपड़े उतारे और मेरे भी सारे उतार दिए। उनका लंड इतना लंबा भी नहीं था और न ही इतना छोटा। मुझे चुदाई का मन हो रहा था।
मैं — सर प्लीज आ जाइए मेरे पास, मेरी फुद्दी मारिए सर…… प्लीज मेरी चूत मारिए……
सर — क्या फुद्दी है तेरी।
सर ने अपना थूक मेरी फुद्दी पर लगाया और थोड़ा अपने लौड़े पर और मेरी फुद्दी के ऊपर मुँह में रख दिया। आह…… मैंने कहा, “सर जल्दी से इक ही धक्का मारकर अंदर डाल दीजिए। सर, मुझे कोई दर्द नहीं होगी…… मेरी सील पहले ही टूट गई है।”
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सर ने इक ही धक्के में अपना लुल्ला मेरी फुद्दी के अंदर प्रवेश करा दिया। अंदर जाते ही वह घास्सी मारने लगा…… आह…… नेहा तेरी फुद्दी…… हाँ-हाँ…… मुझे भी उनका लौड़ा अपनी फुद्दी के अंदर अच्छा लग रहा था। मैं — सर प्लीज…… और मारिए मेरी सर…… और मारिए मेरी…… अपनी जिंदगी की सारी प्यास बुझाइए…… सर मेरी फुद्दी मारो…… आह…… बहुत मजा आ रहा है सर। सर का लौड़ा मेरी फुद्दी के अंदर रगड़ खा-खाकर मुझे भी मजा दे रहा था और खुद भी बहुत मजा ले रहा था।
मैंने कहा, “सर हर इक पोज बनाइए, यह फुद्दी आपको सारा मजा देगी।”
सर ने मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और अपने पूरे जोर के साथ मेरी फुद्दी को चोदने लगे…… उनका पूरा का पूरा लौड़ा अंदर फुद्दी से मिल रहा था…… मैं आँखें बंद करके मजा से अपनी इज्जत लुटा रही थी। आह…… सर…… आह…… सर…… आप बहुत मजा दे रहे हैं।
सर ने काफी देर तक मेरी इज्जत लूटी। फिर उनका लौड़ा जवाब देने ही वाला था कि उन्होंने वह बाहर निकाला और मेरे पेट के ऊपर अपना माल प्रेशर से निकाल दिया। आह…… नेहा…… आया…… हाँ-हाँ-हाँ…… उनका गरम-गरम माल मेरे पेट पर पड़ा रहा…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सर — नेहा, मेरी एक इच्छा है।
मैं — बोलिए सर। सर — मेरा लंड तुम मुँह में लेकर चूसो। प्लीज…… मेरी पत्नी भी नहीं मानती…… तुम प्लीज अपने मुँह में मेरा लंड लेकर मेरा माल पीयो……
मैं — सर, मैं आपके चुप्पे तो मार दूँगी लेकिन माल नहीं पीयूँगी प्लीज।
सर — प्लीज बेटी…… देखो पास जरूर करवाऊँगा।
मैं — ओके सर।
फिर मैं नीचे झुकी और उनका बैठा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। सर मजा में पागल होने लगे…… सर का लंड पहली बार किसी ने मुँह में लिया था…… सर — नेहा…… जोर-जोर से चूसो………… जोर-जोर से चूसो…… आह…… हाँ…… टोप्पा अंदर तक लेकर जाओ…… हाँ रानी……
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उनका लंड फिर से फौलाद की तरह तन गया और मैं जोर-जोर से चुप्पे देती रही। सर भी अपनी कमर हिलाकर मेरे मुँह में अपना लंड अंदर-बाहर करते रहे। मैं गॉली की तरह लुल्ला चाट रही थी…… थूक लगा-लगाकर उनका लौड़ा गीला कर दिया था…… मैं कभी पूरा लौड़ा अंदर लेकर 1 मिनट रुकती और फिर झटके से बाहर निकालती…… सर को यह बहुत मजा दे रहा था।
फिर सर ने कहा, “बेटा…… माल आने वाला है……” तभी मेरे मुँह में लंड की धार आई। सर — आह…… मेरे बच्चे…… आह…… अंदर ही रखना लुल्ला…… आह…… उन्होंने अपना सारा पानी मेरे मुँह में निकाल दिया। मैंने उल्टी करके माल बाहर फेंक दिया। सर मदहोश होकर बेड पर गिर पड़े।
मेरा अभी तक पानी नहीं निकला था। मैं एकदम उठकर सर के ऊपर जाकर बैठ गई। उनका लौड़ा मेरी फुद्दी को टच करने लगा…… मैं घस्सी लगाने लगी…… उनका लुल्ला फिर से तनने लगा। मैं जोर-जोर से अपनी फुद्दी को उनके लौड़े पर रगड़ने लगी…… उनकी पावर फिर वापस आ गई। अब मैंने उनका लंड अपनी फुद्दी के अंदर डाला और उछलने लगी…… उनको मजा आने लगा……
मैं भी अपनी फेवरेट पोजीशन में थी…… जिसमें मेरा पानी जल्दी निकल जाता है…… मैं कस-कसके ऊपर उछलने लगी…… वह भी मेरी गांड को पकड़कर मुझे लौड़े की हसीन सैर कराने लगे…… आह…… बहुत मजा आ रहा था…… उनका तीसरी बार था इसलिए उनको थोड़ा टाइम लगेगा पर मैं भारी जवानी में अपने सर के लुल्ले के ऊपर नाच रही थी…… मुझे थोड़ी देर बाद कोई भी होश न रहा……
सर — आह…… मेरी फुद्दी फाड़ डालो…… आह…… लुल्ला अंदर तक डालो…… चीर दो…… मेरी फुद्दी…… आह……
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बाद में सर तेजी से ऊपर-नीचे करने लगे…… मेरा शरीर अकड़ गया और मेरी फुद्दी से पानी झरने की तरह बाहर निकला। आह…… सर को भी मेरी फुद्दी का गरम-गरम पानी लौड़े के ऊपर महसूस हुआ…… मैं मजा में मदहोश हो गई थी। मैं बेहोश होकर पड़ी रही…… सर मेरी जवानी लूटते गए…… फिर उन्होंने मेरी भोसड़ी के अंदर ही अपना लुल्ला खाली किया…… वाह…… नेहा…… तेरी फुद्दी तो मैं रोज मारूँगा…… वाह…… मजा आ गया…… फिर थोड़ी देर बाद मैं उठी और फिर से कपड़े डालकर सेट हो गई। सर भी तैयार हो गए। मैंने पूछा —
मैं — सर, मेरा काम हो जाएगा ना……
सर — फर्स्ट डिवीजन बेटा…… फर्स्ट डिवीजन……
मैं — सर, मैं फर्स्ट डिवीजन लेकर आपको पार्टी देने जरूर आऊँगी।
सर — बेटा जरूर आना बेटा…… जरूर आना।
अब मुझे पेपरों का इंतजार है ताकि मैं पास हो जाऊँ।
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