Aunty Chut Fuck Story
यह कहानी एक सेक्सी 52 वर्षीय मोटी विधवा को चोदने की है। मैंने उसे पहली बार 3 साल पहले चोदा था। उस समय मैं 34 वर्ष का था। मेरी चुदाई का पहला अनुभव हमारे घर की नौकरानी सीमा के साथ हुआ था। उस समय मैं 18 वर्ष का था और वो 22 वर्ष की थी। सीमा कुंवारी थी। Aunty Chut Fuck Story
मैं उसे नियमित रूप से चोदता था और यह सिलसिला 2 साल तक चलता रहा जब तक वो हमारे घर काम करती रही। फिर मैंने हमारी दूसरी नौकरानी पूजा को चोदा। वो शादीशुदा थी लेकिन उसका पति उसे छोड़कर चला गया था। मैंने लड़कियों, भाभियों को चोदा। लेकिन उससे पहले मैंने कभी किसी बूढ़ी औरत को नहीं चोदा था।
वह एक बारिश वाली शाम थी। मैं नीतू मासी के घर गया था जहाँ मेरा एक दोस्त आया था जो उनका रिश्तेदार था। लगभग 7 बजे थे। मैं उनके घर में घुसा, दरवाजा खटखटाया। मासी ने दरवाजा खोला। मैं अंदर घुसा और किसी और को न देखकर अपने दोस्त के बारे में पूछा।
उन्होंने बताया वो तो चला गया। अब तो 7-8 दिन तक वापस नहीं आएगा। मैं जानता था कि उनका बेटा अपनी नौकरी के लिए बाहर गया हुआ था। इसी बीच बारिश पूरी तेजी से तूफान के साथ शुरू हो गई। उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया और कहा इतनी बारिश में तो बाहर नहीं निकल सकोगे, तुम बैठो।
मैंने उन्हें ध्यान से देखा। वो हल्के गुलाबी रंग की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहने थीं। वो बहुत बहुत सेक्सी लग रही थीं। मैंने उनके गोरे चीक, उनके 42 साइज़ के बड़े बूब्स और हिप्स को देखा। उनकी फिगर 34/30/36 थी। उन्होंने मुझ पर मुस्कुराकर देखा। मैं सोफे पर बैठ गया। इसी बीच बिजली चली गई।
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उन्होंने मोमबत्ती जलाई। कमरा अब बहुत रोमांटिक लग रहा था। समय बीत रहा था। हम बातें कर रहे थे। उन्होंने मुझे अपनी विधवा होने के बाद की अकेली ज़िंदगी के बारे में बताया जो 13 साल से चल रही थी। मैंने अनुमान लगाया कि वो चुदाई के लिए भूखी हैं। तूफान और बारिश 2 घंटे तक नहीं रुकी।
रात 9 बजे उन्होंने कहा, “तुम इतनी बारिश में घर नहीं जा सकते। घर में फोन कर दो कि तुम यहीं रह गए हो।”
मैंने वैसा ही किया।
उन्होंने कहा, “मैं खाना बना रही हूँ, तुम हाथ-मुँह धो लो, फिर दोनों साथ ही खा लेते हैं।”
मैं फ्रेश होकर किचन में घुसा जहाँ वो खाना बना रही थीं। वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थीं। उनका पल्लू कमरबंद में खोंसा हुआ था। उनके ब्लाउज में कैद उनकी चूचियाँ साइड से दिख रही थीं और उनकी बड़ी हिप्स बहुत कामोत्तेजक नजारा पेश कर रही थीं।
‘मासी आज तो आप बहुत सुंदर लग रही हैं’ मैंने उनकी तारीफ की और उनके पीछे खड़ा हो गया।
‘अच्छा जी, लाइन मारना शुरू कर दिया, ऐसा क्या सुंदर लग रहा है, ज़रा मैं भी तो सुनूँ’ उन्होंने मुस्कुराते हुए अपना चेहरा आधा मेरी तरफ घुमाया।
उनके मूड को भाँपकर मैंने हिम्मत जुटाई और उन्हें पीछे से जकड़ लिया, उनके गाल पर किस किया और कहा, ‘आपकी तो हर चीज़ सुंदर है, ये गोरे-गोरे फूले हुए कचौड़ी जैसे गाल, देखकर मन करता है कि इन्हें खा ही जाऊँ, और ये इतनी मोटी मोटी……’
मैंने पीछे से उनके बूब्स को कप करके दबाया, ‘इन्हें तो बस……’
वे खुशी से हँसीं और बोलीं, ‘बस बस अभी मुझे खाना बनाने दो, ये तारीफ बाद में करना’ और उन्होंने मेरे गाल पर वापस किस किया।
‘चलो अब डाइनिंग रूम में बैठ जाओ। मैं अभी आती हूँ।’
‘ओके मासी जैसी आप कहें’ और मैं ड्रॉइंग रूम में चला गया।
उन्होंने खाना बनाकर चेहरा आदि धोया और डाइनिंग रूम में आईं और टेबल पर खाना लगाने लगीं। ‘हाँ तो अब बताओ क्या कह रहे थे’ उन्होंने मुझे फ्लर्ट करने का निमंत्रण दिया। मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उनके चूतड़ के बीच में दबा हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैंने पीछे से उनके बूब्स को कप किया, उनके गालों पर फिर किस किया और कहा, ‘आपकी ये इतनी मोटी मोटी…… देखकर तो……’
‘इनका कुछ नाम भी है’ उन्होंने मुस्कुराते हुए बीच में टोका।
‘हाँ ये इतनी मोटी मोटी चूचियाँ देखकर तो मन करता है कि इन्हें चूसता ही रहूँ।’
‘धत्, वो तो छोटे बच्चे चूसते हैं।’
‘नहीं बड़े बच्चे भी चूसते हैं। और आपने हमें इनके दर्शन तो कराए नहीं और न ही इसके।’
मैंने हिम्मत करके साड़ी के ऊपर से उनकी चूत को कप कर लिया।
‘हट बदमाश इन्हें मैं कैसे दिखा सकती हूँ, क्या कभी नहीं देखी क्या।’
‘नहीं कुछ भी नहीं दिखाई दिया, प्लीज एक बार दिखा दो न अपनी ये मोटी मोटी चूचियाँ और ये प्यारी प्यारी सी……’ मैंने उनकी चूत को सहलाया।
‘प्यारी सी क्या’ उन्होंने फुसफुसाकर कहा और मुझे किस किया।
‘अपनी ये प्यारी सी चूत दिखा दो न मासी’ मैंने फुसफुसाते हुए उनकी चूत को कप करते हुए और अपना लंड उनके चूतड़ के बीच धकेला।
‘तुम तो बहुत गंदी बातें करते हो, ऐसी कीमती चीज़ कोई ऐसे ही थोड़ी दिखाई जाती है, इन्हें देखने की मुंहदिखाई देनी पड़ती है’ उन्होंने इठलाते हुए कहा।
‘आप जो कहेंगी मैं दूँगा, बस आप दिखा दीजिए’ मैं अधीर होता जा रहा था।
‘अब खाना बाद में खाएंगे, पहले अंदर चलिए।’
उन्होंने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और कहा, ‘हूँ, लगता है बहुत बेचैन हो रहा है, पर याद रखना देखने की फीस देनी पड़ेगी।’
उस समय मैं ‘हाँ’ कह देता भले ही वे मुकुट के जवाहरात माँग लेतीं। ‘हाँ हाँ, आप जो कहेंगी मैं दूँगा, आप चलिए तो सही।’
वे मुझे ड्रॉइंग रूम ले गईं और हमने एक-दूसरे को जकड़ लिया।
उन्होंने मेरा लंड बाहर निकाला और कहा, ‘ये आज इतना क्यों फुंकार मार रहा है।’
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मैंने उनकी चूत को कप किया और बूब्स दबाते हुए कहा, ‘इसे आपकी चूत की खुशबू मिल गई है इसी लिए बेचैन है, अब आपने मेरी चीज़ तो देख ली, अब इन्हें भी तो खोलकर दिखाइए, मुझे इन्हें चूसना है।’
‘नहीं नहीं मैं ब्लाउज नहीं उतार सकती’ उन्होंने मना किया।
मैंने उनके होंठों को किस किया और साड़ी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाते हुए कहा, ‘तो अपनी चूत ही दिखा दो न मासी, इसके लिए तो सिर्फ साड़ी उठाने से ही काम चल जाएगा’ और मैं उनकी साड़ी ऊपर खींचने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
‘तुम तो बहुत जल्दबाजी कर रहे हो, मुझे बैठने तो दो’ और वे सोफे पर बैठ गईं।
मैं उनके पैरों के बीच फर्श पर बैठ गया और धीरे-धीरे उनकी साड़ी घुटनों तक खींची। मैंने उनके टखनों को किस किया और साड़ी को फिर ऊपर धकेला। जब उनकी जाँघें नंगी हो गईं तो उन्होंने मेरे हाथ रोक दिए और हँसी।
‘मुझे गुदगुदी होती है और शर्म भी आती है।’
ओह्ह्ह…… उन्होंने मुझे ऊपर खींचा, सोफे पर धकेला, मेरी टाँगें फैलाईं और मेरे बड़े लंड को चूसने लगीं। लगभग 5 मिनट चूसने के बाद मैंने उन्हें खींचा और सोफे पर बिठा दिया। उनकी टाँगें फैलाईं। उनकी जाँघें ठोस बनी हुई थीं, क्रीमी व्हाइट स्किन वाली और बहुत रसीला नजारा पेश कर रही थीं।
मैंने अपनी उँगलियाँ उन पर चलाईं और उनकी जाँघों को पागलों की तरह चूमने लगा। वे कामवासना से सिसक उठीं और अपनी जाँघें और चौड़ी कीं। मुझे उनकी चूत की हल्की मस्की और सेक्सी खुशबू आई। मैंने उनकी साड़ी उनकी चौड़ी जाँघों पर चढ़ाई, उन्होंने अपना चूतड़ सोफे की सीट के किनारे तक सरका दिया और लो एंड बिहोल्ड उनकी शानदार चूत नजर आई।
(वे वॉशरूम गई थीं तो पैंटी निकाल चुकी थीं) गोरी-चिट्टी, अंदर से गुलाबी चमकती हुई, मोटी लंबवत लिप्स नमी की परत से ढकी हुई। उन्होंने इसे साफ शेव किया हुआ था (जाहिर तौर पर सुबह) इसलिए पूरी सतह चिकनी थी। मैंने सावधानी से अपनी उँगलियाँ उनकी चूत की लिप्स पर चलाईं और कहा, ‘ओह मासी, मज़ा आ गया देखकर। बहुत सुंदर है आपकी चूत और आज तो इस पिछ पर से घास भी साफ हो गई है (उनके शेव किए झांटों की ओर इशारा करते हुए)’
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‘पसंद आई मेरी चीज़?’
‘हाँ मासी तुमने तो मुझे जन्नत दिखा दी है।’
‘तो अब इसकी मुंहदिखाई दो’ उन्होंने माँगा।
‘हाँ हाँ बताइए हम आपको क्या दे सकते हैं’ मैंने बादशाह अकबर की उदारता से घोषणा की।
उन्होंने मेरा चेहरा अपनी चूत की तरफ दबाया और कहा, ‘इसे किस करो, इसे चूसो और खूब चाटो।’
अब यह अप्रत्याशित माँग थी। मेरे हिचकिचाहट को भाँपकर उन्होंने कहा, ‘तुमने वादा किया था।’ उन्होंने अपनी चूत को पेटीकोट से पोछा अतिरिक्त नमी हटाने के लिए और कहा, ‘लो अब करो, इसमें कोई गंदी बात नहीं है, मुझे भी तुम्हारा चूसा है और तुम्हारा माल भी पीना है, तुम्हें भी चुसवाने में मज़ा आएगा, अब वही मज़ा दे।’
भागने का कोई रास्ता न देखकर मैंने हल्के से उनकी चूत की लिप्स को किस किया। ‘हाँआआन ऐसे हीईईईई……’ वे सिसकीं और मुझे आगे गाइड किया, ‘अब इन्हें धीरे-धीरे चाटो।’ मैंने सावधानी से उनकी मोटी चूत की लिप्स को चाटना शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी जीभ को अजीब स्वाद स्वीकार हो गया और मैं उनके बूब्स भी दबाने लगा।
फिर मैंने उनकी लंबवत लिप्स अलग कीं। अंदर सब गुलाबी था और नमी से चमक रहा था। वे खुशी से कराह रही थीं और मेरा चेहरा सहला रही थीं तथा कह रही थीं, ‘अब जीभ अंदर घुसा के इसे अपनी जीभ से चोदो।’ निर्देशानुसार मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत को ठोंकना शुरू किया।
मेरी नाक उनके क्लिट से रगड़ खा रही थी और उनकी मस्की खुशबू मुझे वासना से पागल बना रही थी। वे भी बड़बड़ा रही थीं, ‘ओह ओह ये क्या कर रहा है, हाँ आआईईएसएसए ही करता रहो, बहुत मज़ा आ रहा है, ऊऊह्ह’ कुछ मिनट बाद उन्होंने कहा, ‘अब इसको भी चाटो और चूसो, यही है असली चीज़’ उन्होंने अपने क्लिट की ओर इशारा करते हुए कहा।
मैं निर्देशानुसार करता रहा। उनकी खुशी हर मिनट बढ़ती जा रही थी। मैं उनके क्लिट को चूसता रहा और अपनी एक उँगली उनकी चूत में डालकर फिंगरिंग करने लगा। ‘ओह्ह्ह तू तो मुझे मार ही डालेगा, हाँ ऐसे ही उँगली से भी चोदता रह’.
कुछ मिनट चूसने, चाटने और फिंगरिंग करने के बाद वे चीखीं, ‘आह्ह्ह…… मज़ा आ गया… एक नहीं दो उँगली…… दो उँगली अंदर घुसाओ, तुम आज तक कहाँ थे, मैं मर जाऊँगी, धीरे-धीरे करो नहीं तो मेरा अभी निकल जाएगा’ ‘हाँ ऐसे ही करता रहो, अब जोर-जोर से उँगलियाँ अंदर घुसा के करो।’
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वासना से पागल होकर वे बड़बड़ाती रहीं और मेरा चेहरा अपनी चूत पर दबाया। उन्होंने अपनी जाँघें मेरे कंधों पर रख दीं और मेरा चेहरा उनके बीच कसकर जकड़ लिया। मैं अब उनकी चूत को चूस और फिंगर भी कर रहा था। उनका चूतड़ सोफे पर उछलने लगा और वे चीखीं ‘ऊऊह्ह्ह ईईईईई मैं गयी’ और उन्होंने इतनी जोर से ऑर्गेज्म किया कि उन्होंने लगभग मेरी गर्दन अपनी जाँघों के बीच तोड़ ही दी और फिर बेहोश हो गईं।
राहत महसूस करते हुए मैंने खुद को आजाद किया, सोफे पर बैठ गया और अपना चेहरा पोंछा। धीरे-धीरे वे होश में आईं, मुझे कमजोर मुस्कान दी, मेरे गाल थपथपाए और बोलीं, ‘इतना मज़ा तो पहले कभी नहीं आया, तुमने तो मुझे अपना गुलाम बना लिया है।’
फिर उन्होंने मुझे किस किया और मेरे होंठों व चेहरे से अपना ही शहद चूसा। फिर उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा जो अब ढीला हो गया था और कहा, ‘अरे ये तो नाराज हो गया है, लाओ इसे तैयार करते हैं’ और वे चूसने लगीं। मैं उनके बूब्स को मसल रहा था और धीरे-धीरे मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वे सोफे पर लेट गईं, अपनी जाँघें खोलीं और मुझे आमंत्रित किया, ‘अब आ जाओ मैदान में।’ खुशी-खुशी मैं उन पर चढ़ गया, अपना लंड उनकी चूत की लिप्स के बीच गीला किया और एक जोरदार धक्के से अंदर ठेल दिया। ‘अरे मार दिया जालिम, धीरे-धीरे घुसाओ’ उन्होंने शिकायत की।
मैंने उनके होंठों को किस किया और कहा, ‘आपकी चूत बड़ी टाइट है, मज़ा आ गया।’
‘हाँ टाइट तो होगी ही, इसकी बहुत दिनों से घुटाई नहीं हुई’ उन्होंने जवाब दिया।
‘घुटाई या चुदाई’ मैंने शरारत से पूछा।
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‘हाँ हाँ वही, अब बातें बंद करो और कस के चुदाई करो, फाड़ दो आज इसे, मुझे बहुत तंग कर रखा है इसने। अभी तुम 7-8 दिन हैं तो इस साली चूत को चोद-चोद के भोसड़ा बना दो, तभी ये कुछ ठंडी होगी’ उन्होंने अपनी वासना की गर्मी में गंदी बातें शुरू कर दीं।
मैंने उन्हें जोर-जोर से ठुकना शुरू किया। मैंने दोनों हाथों से उनके उभरे बूब्स को मसलना शुरू किया। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और फिर अचानक धक्के से पूरा अंदर ठेल दिया। मैंने यह कई बार दोहराया और हर बार लंड के हेड के शुरू में घुसने पर वे दर्द से चीख उठतीं।
मैंने दोनों हाथों से उनकी दोनों टाँगें पकड़ीं और गहरे थ्रस्ट्स से उन्हें चोदा। कभी मैं दोनों को अपने कंधों पर ले लेता और कभी एक को कंधे पर रखकर दूसरी को अपनी जाँघ के नीचे दबाकर। वे चीख रही थीं, “आह… क्या मज़ा रे, कितने दिनों बाद एक चीज घुसी। मैं जानती थी तुम आज अपने दोस्त से मिलने आओगे, इसलिए मैं तुम्हारी चुदाई के लिए तैयार थी। चोदो, चोदो, खूब चोदो। रात भर चुदना।”
इस तरह मैंने उन्हें कई पोजीशन्स में बदला जबकि लगातार चोदता रहा। मैंने उन्हें पलटकर पीछे से डॉगी स्टाइल में चोदा। वे खुशी से लगभग पागल हो गईं और कम आवाज में चीखते हुए क्लाइमेक्स पर पहुँच गईं। उन्होंने अपना चेहरा सोफे के कुशन में दबाया और रोईं, ‘आज अंदर मत निकालना।’
‘मेरा आने वाला है, फिर कहाँ निकालूँ.’
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‘मुझे तुम्हारा ओह ओह…. लंड चूसना है…. हाईईई…. और माल पीना है, मेरे मुँह में दो, मेरे मुँह में ही छूटना।’ मैं कमिंग के करीब था, मैंने कुछ और जोरदार धक्के उनकी चूत में दिए, लंड बाहर निकाला और उनके चेहरे की तरफ बढ़ाया, ‘लो चूसो इसे, पूरा माल पी जाओ, आपकी प्यास बुझ जाएगी।’ उन्होंने मेरा लंड मुँह में ले लिया, दो और पुश उनके मुँह में और मैं बाँध टूटने की तरह फूट पड़ा। उन्होंने खुशी से गुर्राते हुए और शोर मचाते हुए सारा कम चूस लिया, जो उनकी चूत के रस से मिला हुआ था।
कुछ उनके मुँह से बाहर निकल गया, उन्होंने तौलिए से पोंछा और वापस मेरे अब ढीले होते लंड को चूसने लगीं। खाली होकर मैंने उसे बाहर खींचा — ‘अब छोड़ भी दो, क्या खा ही जाओगी इसे।’ उन्होंने खुशी से मुँह पोंछा और मुझे किस किया, ‘आज तो तुमने बहुत बढ़िया मज़ा दिया है, अब तो तुझे इनाम देना पड़ेगा।’ मैंने पूछा क्या इनाम दोगी। उन्होंने कहा, ‘आज से जब तुम चाहो मुझे चुदना।’ उस रात मैंने उन्हें 2 बार और चोदा। उन्होंने मेरा स्पर्म अपनी चूत में भी लिया और शरीर पर भी। मैं उन्हें नियमित रूप से चोदता हूँ।
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