Virgin Ass Chudai Stories
आप लोगों ने मेरी कहानी के दो पार्ट पढ़े हैं जिसमें मैंने अपने शौहर के साथ सुहागरात और बाकी भी किए गए सेक्स की दास्तान बताई है। अब इस पार्ट में मैं आपको बताना चाहूंगी कि किस तरह से मेरी छोटी बहन सायरा ने मुझे गांड मरवाना सिखाया। मैं आज यह कबूल करना चाहूंगी कि आज मैं जो सेक्स का भरपूर मज़ा ले रही हूँ उसमें मेरी बहन और मेरी एक सखी का बहुत बड़ा हाथ है। Virgin Ass Chudai Stories
उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। वरना मैं तो बहुत अनाड़ी थी। तो चलिए मैं स्टोरी पर आती हूँ। हमारे दिन हँसी-खुशी से कट रहे थे कि अचानक 2 महीने बाद मेरी सास का इंतकाल हो गया। घर की सारी ज़िम्मेदारी अब अकेले मुझ पर आ गई। मैंने एक दिन साजिद से कहा कि अब हमें माजिद का निकाह कर देना चाहिए।
तब मालूम पड़ा कि माजिद का मेरी बहन सायरा के साथ चक्कर चल रहा था और वो दोनों निकाह करना चाहते थे। दोनों परिवारों की रजामंदी से उन दोनों का निकाह कुछ समय के बाद पढ़वा दिया गया और सायरा अब मेरे घर में आ गई। सायरा के आ जाने से मुझे बहुत आराम हो गया। हम दोनों मिलकर घर का सारा काम कर लेते थे।
सायरा अक्सर घर में स्कर्ट पहनती थी जबकि मैं सलवार कमीज पहनती थी। एक दिन सायरा मेरे कमरे में बैठी थी। हम फर्श पर बैठे थे। मैं उसको अपने नए कंगन दिखा रही थी कि तभी एक कंगन उसके हाथ से छूटकर बिस्तर के नीचे चला गया। वो घुटनों के बल बिस्तर के नीचे घुसी और कंगन निकालने लगी। मैंने सायरा की ओर देखा तो मेरी आँखें फैल गईं। उसके चूतड़ साफ दिखाई दे रहे थे।
मैंने कहा, “सायरा, तूने अंडरवीयर नहीं पहना है।”
वो बोली, “नहीं। ये मना करते हैं।”
मेरे मुँह से निकल गया, “दोनों भाई एक जैसे हैं।”
सायरा बोली, “अच्छा!! तो आपा तुम भी….?”
और मेरे जवाब का इंतज़ार किए बगैर उसने अपना हाथ मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत पर रख दिया और अंदर चड्डी का अहसास न पाकर चौंककर बोली, “अरे वाह! और क्या-क्या एक जैसा है दोनों भाइयों में?” मैंने उसकी बातों का जवाब नहीं दिया और बोली, “जब चड्डी नहीं पहनती हो तो स्कर्ट क्यों पहनती हो? अभी पूरी नंगी दिख रही थी तुम।”
उसने कहा, “इसीलिए तो स्कर्ट पहनती हूँ। उतारने का झंझट ही नहीं। जब इच्छा हुई, ऊपर सरकाया, काम किया और फिर नीचे खिसका दिया।”
मैं उसका इशारा समझ गई। माजिद अक्सर दोपहर को खाना खाने घर आ जाता था। सायरा उसका खाना लेकर कमरे में चली जाती थी। वहाँ खाना खिलाने के साथ-साथ चूत की चुदाई भी होती होगी। अब मुझे भी सेक्सी बातें करने में मज़ा आने लगा था।
मैंने पूछा, “कितनी बार करते हो तुम लोग दिन में?”
सायरा – “हम गिनती नहीं गिनते। जितनी बार मिलते हैं ये मुझे चोदकर ही छोड़ते हैं।”
मैंने पूछा, “मज़ा आता है?”
वो बोली, “बहुत ज़्यादा।”
मैंने पूछा, “कैसा है माजिद का?”
वो बोली, “बहुत मोटा है। जब तक मेरा कचूमर नहीं बना देता वो ढीला नहीं होता।”
मैं बोली, “तुम लंड चूसती हो उसका?”
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उसने कहा, “हाँ, बिल्कुल। लौड़े का रस पिए बगैर तो मुझे चैन भी नहीं आता। पहले मैं उसका लंड मुँह में लेती हूँ और तब तक चूसती हूँ जब तक कि उसका माल नहीं निकल जाता। फिर उसके लौड़े को वापस खड़ा करके अपनी चूत में डलवाती हूँ। इससे वो चुदाई ज़्यादा देर तक करता है।”
मैं बोली, “साजिद भी ऐसा ही है।”
तभी सायरा बोली, “आपा, जीजू तुम्हारी गांड मारते हैं?”
मैंने कहा, “नहीं।”
वो बोली, “आज तक कभी नहीं मरवाई तुमने अपनी गांड?”
मैंने कहा, “एक बार साजिद ने एक उंगली मेरी गांड में डालने की कोशिश की थी। मुझे इतनी ज़ोर से दर्द हुआ कि मैं चिल्ला पड़ी थी। अम्मी तो दरवाजे पर पूछने आ गई थी कि क्या हुआ। साजिद तो बुरी तरह झेंप गए थे। तब से आज तक उसने दोबारा कभी कोशिश नहीं की।”
सायरा बोली, “आपा तुम ज़िंदगी के बहुत बड़े सुख से अपने को महरूम कर रही हो। अरे पहली बार तो जान निकलने जैसा दर्द होता ही है। ऐसा लगता है जैसे कोई गरम लोहे की रॉड अंदर डाल रहा हो। मैं तो कई बार कोशिश करने के बाद भी अंदर नहीं ले पाई थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माजिद अपनी उंगली भी डालने की कोशिश करता था तो बेइंतहा दर्द होता था। मैं अपनी गांड हटा लेती थी। एक बार तो हमारा बहुत झगड़ा भी हो गया था। पर माजिद का मन मानता ही नहीं था। उसे जैसे ही मौका मिलता था वो अपनी उंगली मेरी गांड में घुसेड़ने लगता था।
एक दिन मैंने हिम्मत करके सोचा कि आज तो आर या पार हो जाए। मैंने माजिद से कहा कि तुम उंगली की जगह सीधा लंड डाल दो आज मेरी गांड में। वो खुश हो गया। उसने बहुत सारा तेल अपने लंड और मेरी गांड में लगाया। बहुत कोशिशों के बाद उसके लंड का टोपा मेरी गांड में घुस पाया। मेरी तो ऐसी हालत हो रही थी कि कभी भी मर जाऊँगी।
पर मैं अपने होठों को आपस में दबाकर बर्दाश्त करती रही। दर्द की वजह से मेरी आँखों में आँसू आ गए थे। माजिद ने उस दिन उससे ज़्यादा लंड अंदर नहीं घुसाया और वहीं पर हिल-हिलकर अपना माल छोड़ दिया। जब उसने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरी तत्ती भी छूट गई थी, ऐसा हाल था मेरा।
दो-तीन दिन तक मेरी गांड में बहुत दर्द रहा और वो सूज भी गई थी। पर उसके बाद सब ठीक हो गया। अगले हफ्ते जब उसने मेरी गांड में अपना लंड डाला तो वो पूरा अंदर चला गया और मुझे मज़ा भी बहुत आया। तब से मैं रोज गांड मरवाने लगी हूँ। आपा गांड मरवाने में एक अजीब सा मज़ा आता है जो चूत की ठुकाई में भी नहीं आता है। तुम कोशिश करके तो देखो।”
मैंने कहा, “ना बाबा ना….मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती। मैं ऐसे ही ठीक हूँ।”
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सायरा हँस पड़ी। मगर सायरा की नंगी चूतड़ देखने के बाद मेरा बुरा हाल हो रहा था। मेरी चूत में खुजली मचनी शुरू हो गई थी और मुझे साजिद के लंड की बहुत ज़रूरत महसूस हो रही थी।
मैंने सायरा से कहा, “मेरे निकाह को 1 साल हो गया है पर तुम तो 6 महीने में ही मुझसे आगे निकल गई हो।”
सायरा बोली, “6 महीने नहीं आपा। मेरा भी तजुर्बा 1 साल का ही है।”
मैंने पूछा, “कैसे?”
उसने कहा, “तुम्हारे निकाह के बाद माजिद अक्सर मुझसे मिलने आता रहता था। उसे पता था कि शाम को ४ से ६ बजे तक मैं अकेली होती हूँ। बस हमने इसी का फायदा उठाया और सारे तजुर्बे कर डाले।”
मैंने कहा, “तुझे डर नहीं लगा। अगर प्रेग्नेंट हो जाती तो?”
वो बोली, “ऐसे कैसे हो जाती। वो तो मेरे हाथ में है कि मैं कब प्रेग्नेंट होऊँ।”
मुझे लगा कि जैसे मैं बहुत पुराने ज़माने की हूँ। मेरी सखियाँ भी बिना निकाह के चुदाई का मज़ा लेती फिर रही थीं और मेरी छोटी बहन भी। एक मैं थी कि जिसने निकाह होने तक लौड़े की शक्ल तक नहीं देखी थी। मुझे लगा कि मुझे बदलना चाहिए। वरना मैं ज़माने से बहुत पीछे रह जाऊँगी। पर क्या करूँ? सोचा सायरा से पूछ लूँ। पर सीधे पूछने की हिम्मत नहीं पड़ी।
मैंने बात आगे बढ़ाई, “गांड निकाह से पहले मरवाई थी या बाद में?”
सायरा बोली, “बहुत पहले। चूत में घुसवाने से ज़्यादा सेफ गांड में घुसवाना होता है एक कुँवारी लड़की के लिए।”
मैं बोली, “तुमने ये सब सीखा कैसे?”
वो बोली, “ब्लू फिल्म में सब दिखाते हैं। उसी को प्रैक्टिस करने से सब आ जाता है।”
मैंने पूछा, “तुमने देखी है ब्लू फिल्म?”
वो बोली, “बहुत सी। तुमने नहीं देखी क्या? क्या आपा तुम भी गज़ब हो। देखोगी?”
मैंने कहा, “है क्या तुम्हारे पास?”
उसने कहा, “कई हैं। हम दोनों तो रोज देखते हैं।” कहकर सायरा अपने कमरे में गई और एक मूवी लेकर आ गई। उसने मूवी लगाकर टीवी ऑन कर दी। पहला ही सीन देखकर मेरी चूत एकदम गरम हो गई। एक सुनहरे बालों वाली अंग्रेज लड़की प्लास्टिक का लंड लेकर अपनी चूत पर रगड़ रही थी।
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वो सिसकारी भरती जा रही थी और लंड अपने छेद में घुसेड़-निकाल रही थी। उसकी अदाएँ देखकर मुझ पर नशा छा गया। उसकी चूत एकदम चिकनी थी। चुचियाँ बड़ी-बड़ी (38 से कम नहीं होंगी)। वो एक हाथ से अपनी एक चुची को उठाकर अपने मुँह में डाल रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूत की खुजली मिटा रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
थोड़ी देर में उसने प्लास्टिक का लंड निकालकर रख दिया और अपनी उंगलियाँ अपनी चूत के ऊपर जोर-जोर से घुमाने लगी। उसने अपनी टांगें एकदम फैला रखी थीं जिससे उसकी चूत का नज़ारा एकदम साफ दिखाई दे रहा था। इसके बाद उसने एक-एक करके अपनी चारों उंगलियाँ अंदर डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगी।
उसकी स्पीड देखते ही बनती थी। वो जोर-जोर से चीख रही थी। फिर उसने अपना दूसरा हाथ अपनी चुची से हटाया और नीचे ले गई। उसने अपनी चूतड़ को थोड़ा सा उचकाया और देखते ही देखते दो उंगलियाँ अपनी गांड के अंदर सरका दीं। अब 2 उंगलियाँ उसकी गांड में और 4 उंगलियाँ उसकी चूत में आगे-पीछे हो रही थीं।
मैंने सायरा की ओर मुँह घुमाया तो दंग रह गई। उसकी आँखें बंद थीं और उसने अपनी चूत के अंदर अपनी ३ उंगलियाँ डाली हुई थीं और उन्हें हिला रही थी। अब मैंने उस फिल्म को छोड़कर सायरा की फिल्म देखनी शुरू कर दी। उसने थोड़ी देर में अपनी उंगलियाँ बाहर निकालकर अपनी चूत पर हथेली से थपकियाँ लगानी शुरू कर दीं।
उसकी दो उंगलियाँ गांड में घुसी हुई थीं। मैं हैरान हो गई यह देखकर कि उसकी दोनों उंगलियाँ पूरी अंदर तक उसकी गांड के छेद में समा गई थीं। दूसरे हाथ से उसने थपकियाँ लगाना बंद करके अपनी चूत के ऊपर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसने अपनी चूत की बोटी (क्लिटोरिस) को पकड़ लिया और उसे खींच-खींचकर छोड़ने लगी।
फिर उसने अपनी पहली उंगली और अंगूठे के बीच में उसे पकड़कर उस पर गोल-गोल उंगलियाँ घुमाने लगी। पहले हाथ से अपनी गांड में वो धकाधक उंगली पेल रही थी। मैंने मुँह आगे घुमाकर टीवी की ओर देखा। स्क्रीन पर अब दो लड़कियाँ थीं। दूसरी वाली लड़की पहली वाली की टांगें फैलाकर उसकी चूत को अपनी जीभ से चाट रही थी।
वो अपनी लंबी सी जीभ बाहर निकालती और चूत के एकदम नीचे से शुरू करके जीभ चूत के ऊपर तक ले जाती थी। फिर जीभ मुँह के अंदर करके उसका स्वाद लेती थी। फिर वो दोबारा चाटना शुरू कर देती थी। मुझसे रहा नहीं गया। मैं सायरा की चूत के ऊपर लेट गई और उसे जोर-जोर से चाटने लगी।
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सायरा की चूत भी एकदम चिकनी थी और मेरे चाटने से उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था। वो अपनी गांड से हाथ हटा चुकी थी। मैंने उसकी गांड एकदम करीब से देखी। गांड काफी खुली हुई थी। मैंने अपनी बीच वाली उंगली उसकी गांड के अंदर डाल दी। वो सिसकार उठी। अब उसकी डबल चुदाई हो रही थी। आगे जीभ से और पीछे उंगली से। कुछ ही देर में वो उछलने लगी और जल्दी ही झड़ गई।
अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर उसे नीचे खिसका दिया। सायरा मेरी चूत को चाटने लगी। उसने अपनी जीभ की नोक मेरी बोटी (क्लिटोरिस) के ऊपर रख दी और जीभ को दाएँ-बाएँ फिराने लगी। उसने अपनी २ उंगलियाँ भी मेरी चूत में डाल दीं और उसी से धक्के लगाने लगी। उसकी जीभ की चटाई से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
मेरी चूत बहने लगी और वो मेरी चूत का पानी चाटती रही। उसने एक उंगली मेरी गांड के छेद पर रख दी। मैं टांगें सिकोड़ने लगी। उसने मेरी चूत की चटाई और तेज कर दी। मेरी गांड के ऊपर वो अपनी उंगली गोलाई में घुमा रही थी। अचानक उसने उंगली अंदर घुसा दी। मुझे ज़ोर का दर्द हुआ और मैंने एक झटके से उसे दूर धकेल दिया। उसका दूसरा हाथ भी मेरी चूत से हटा दिया मैंने।
उसने पूछा, “क्या हुआ आपा?”
मैं बोली, “मैंने अभी तुम्हें बताया था कि मुझे गांड में उंगली घुसेड़ना बर्दाश्त नहीं होता फिर भी तुम ऐसी हरकत करने से बाज नहीं आती हो।”
उसने कहा, “तुम फिजूल में डर रही हो। अपने मन से दर्द का खयाल निकालो और एक बार कोशिश तो करो। अच्छा एक बात बताओ – जब जीजू ने पहली बार चूत फाड़ी थी तब दर्द नहीं हुआ था क्या?”
मैं बोली, “हुआ था। लेकिन ये तो बहुत छोटा छेद है और गंदी जगह है। यहाँ से तो टट्टी करते हैं।”
वो बोली, “गांड से तत्ती करते हैं तो क्या चूत से पेशाब नहीं करते। आपा, ये अच्छी जगह और बुरी जगह का वहम है तुम्हारे मन में। अगर टट्टी गंदी चीज़ है तो रोज उसे अपने हाथ से क्यों साफ करती हो? जीजू जिस लौड़े से पेशाब करते हैं उसे अपने मुँह में क्यों लेती हो?”
मेरे पास उसके सवालों का जवाब नहीं था।
उसने कहा, “मैं तुमको वही बता रही हूँ जो मज़ा मैं ले चुकी हूँ। तुम एक बार हिम्मत तो करो। फिर बाद में मेरा एहसान मानोगी गांड मरवाना सिखाने के लिए।”
मैं बोली, “पर मेरी गांड का छेद बहुत छोटा है।”
वो बोली, “यकीन करो आपा सबका छेद इतना ही छोटा होता है। ये तो कोशिश करने से धीरे-धीरे बड़ा होता जाता है। ये देखो मेरी गांड।” कहकर उसने अपनी गांड का छेद अपने दोनों हाथों से फैलाकर मुझे दिखलाया। वाकई बहुत बड़ा हो चुका था उसकी गांड का छेद। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी टीवी पर भी ऐसा ही सीन आ गया। एक काला सा आदमी एक गोरी सी औरत की गांड में अपना लंड पेल रहा था। वो सीधी लेटी हुई थी और उसने अपनी टांगें ऊपर उठा रखी थीं। अपनी उंगलियों से वो अपनी चूत को जोर-जोर से सहला कर चूत की खाज मिटा रही थी। उस आदमी का लंड बहुत मोटा था। फिर भी वो उस लड़की की गांड के अंदर मजे से आ जा रहा था। वो लड़की हर धक्के में सिसकारी लेकर मज़ा ले रही थी।
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सायरा बोली, “इसका छेद देखा। मुझसे भी बड़ा है।”
मैंने कहा, “ये तो रंडियाँ होती हैं। इनका तो काम ही यही होता है।”
सायरा बोली, “तुमको कैसे पता कि ये रंडी है। ये तुम्हारी अड़ियल सोच है। तुम जो सोचो वो सही बाकी सब गलत। और रंडी क्या औरत नहीं होती। उनकी गांड का छेद क्या पैदाइशी बड़ा होता है? शुरू में तो उनकी गांड भी टाइट ही होगी तुम्हारी तरह।
ये तो मरवा कर इतनी बड़ी हुई होगी। और मर्दों को इनकी गांड मारना अच्छा भी लगता होगा तभी तो इनका छेद इतना बड़ा हो चुका है। आपा, हर आदमी को औरत की गांड मारना अच्छा लगता है। तो फिर हम अपने शौहर के लिए रंडी क्यों नहीं बन सकती हैं?”
मैंने कहा, “तो तुम बनो न। मेरे पीछे क्यों पड़ी हो?”
उसने कहा, “मैं तुम्हारे मन से गलतफहमी भरे खयाल निकालने के लिए तुम्हें समझा रही हूँ। तुमने जो मन में गलत सोच लिया तो उस पर तुम गौर करने के लिए भी तैयार नहीं हो। मुझे बताओ कि अगर आज से जीजू तुम्हें खाने के लिए कुछ न दें तो क्या तुम भूखी मर जाओगी?”
मैंने कहा, “मैं क्यों भूखी मरूँगी? मैं अपने खाने का खुद इंतज़ाम कर लूँगी।”
सायरा बोली, “बस यही मैं तुम्हें समझाने की कोशिश कर रही थी। हम अगर अपने आदमियों को चोदने के लिए अपनी चूत और गांड नहीं देंगे तो ये अपना इंतज़ाम खुद कर लेंगे।”
“तुम्हारी नज़रों में खाना और चुदाई करना एक ही चीज़ है क्या?” मैंने दलील दी।
सायरा – “बिल्कुल। जो ज़रूरत है सो है चाहे वो खाने की भूख हो या सेक्स की। आपा, माजिद जब घर आता है तो वो जानता है कि जब वो बिस्तर पर जाएगा तो वहाँ उसकी नंगी बीवी उसका इंतज़ार कर रही होगी जिसे वो जैसे चाहेगा वैसे चोदेगा। इसलिए वो सीधा मेरे पास आता है। और इसलिए वो मेरे बदन से जो करना चाहता है मैं उसे करने देती हूँ। बल्कि उसमें मज़ा भी लेती हूँ।”
मैं बोली, “और औरत की मर्जी की कोई अहमियत नहीं है क्या? आदमी जहाँ चाहे नोचता फिरे, जैसे चाहे चोदता रहे, हम सहते रहें। हमें दर्द नहीं होता क्या?”
सायरा – “ओ मेरी प्यारी बहना, तुम ये क्या ज़िद लेकर बैठी हो। अल्लाह ने आदमी को लंड और औरत को चूत क्यों दिया? आदमी का बदन सख्त और औरत का बदन नाजुक क्यों बनाया? है कोई जवाब? अल्लाह के काम में नुस्खे मत निकालो। उसकी इनायत को मंजूर करोगी तो उससे ज़्यादा से ज़्यादा सुख मिलेगा।
आदमी जब औरत के जिस्म से खेलता है तो उसकी नियत उसे तकलीफ देने की नहीं होती है, वो तो सिर्फ अपने तरीके से सेक्स का मज़ा लेना चाहता है। अगर हम मान लें कि मियाँ-बीवी के बीच होने वाली किसी भी हरकत में कोई बुराई नहीं है तो हमें उसकी हर हरकत में उससे ज़्यादा मज़ा मिलना शुरू हो जाएगा।
एक वक्त था जब मेरी गांड में उंगली रखते ही गांड दर्द से फटने लगती थी, आज हाल ये है कि गांड मरवाए बगैर मुझे नींद नहीं आती। जब माजिद ने पहली बार मेरे मुँह में अपने लंड का माल गिराया था तो मुझे उबकाई आ गई थी। ऐसा लगा था कि अभी उल्टी हो जाएगी और आज ये हाल है कि उसके लंड के रस की एक बूँद भी मैं बर्बाद नहीं होने देती। इसलिए आपा मैं कहती हूँ कि चुदाई की हर अदा का भरपूर मज़ा लो जैसे कि मैं लेती हूँ।”
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मैं बोली, “माजिद तुम्हारे बदन के साथ जो भी करना चाहेगा तुम करने दोगी?”
सायरा बोली, “बिल्कुल। वो मेरे ऊपर तत्ती पेशाब भी करना चाहेगा तो भी मुझे खराब नहीं लगेगा। हम जब बिस्तर पर हों, तो हमारा एक ही मकसद होना चाहिए। जैसे मिले, वैसे मज़ा लो और मज़ा दो।”
मैं बोली, “और अगर मैं उसे मन की न करने दूँ तो?”
वो बोली, “तो वो दूसरा रास्ता ढूंढेगा। जिसे इज्जत की शर्म होगी वो हाथ से काम चलाएगा। जिसे डर नहीं होगा वो दूसरी औरत ढूंढेगा।”
“औरतें तो ऐसा नहीं करती हैं?” मैं बोली।
“करती कैसे नहीं हैं। हम लोगों को जवानी का पूरा मज़ा मिल रहा है इसलिए हम शांत हैं। तुमको पता है कि अपनी अम्मी खुद छुप-छुपकर रफीक चाचा से चुदवाती थीं। मैंने अपनी आँखों से देखा है।”
मेरी आँखें हैरानी से फैल गईं।
सायरा बोली, “रात को जब सारा घर छत पर सोता था तो वो दोनों नीचे आकर चुदाई करते थे। फिर ऊपर आकर सो जाते थे। उन्हें लगता था कि सब सो रहे हैं पर मैंने कई बार देखा है उन दोनों को।”
मैंने महसूस किया कि शायद सायरा ठीक कह रही है। मैं बहुत बार साजिद को चुदाई के समय मायूस कर देती थी। फिर वो अपने हाथ से ही अपना माल गिराकर चुपचाप सो जाता था। वो अभी तक दूसरी औरत के पास इसलिए नहीं गया था क्योंकि वो मुझे प्यार करता था। मैंने तय किया कि अब मैं उसे मायूस नहीं होने दूँगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “सायरा, तुम बहुत धीरे से मेरी गांड के छेद को तैयार करना। मैं कोशिश करती हूँ।”
उसने मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। फिर मेरी टांग हवा में उठा दी। मैंने अपने हाथों से अपनी टांगें पकड़ लीं। वेसलीन निकालकर उसने बहुत सारी वेसलीन मेरी गांड के छेद पर लगा दी और फिर उसके ऊपर से वो मेरी छेद को धीरे-धीरे सहलाने लगी। अभी तक मुझे ठीक लग रहा था।
वो अपनी बीच की उंगली को मेरी गांड पर आहिस्ता-आहिस्ता ऐसे घुमा रही थी कि उसका नाखून मुझे न छूए। उसी हाथ के अंगूठे से उसने मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में मेरी चूत गीली हो गई और उसका अंगूठा मेरी चूत में घुसता चला गया।
अब उसने दूसरे हाथ के अंगूठे से मेरी चूत के ऊपर की बोटी को रगड़ना शुरू कर दिया। जो अंगूठा मेरी चूत के अंदर था वो उसे धीरे से निकालकर अंदर करने लगी। गांड में बहुत सारी वेसलीन लगी होने के कारण उसकी उंगली थोड़ा सा मेरी गांड के अंदर घुस गई। मैं बर्दाश्त कर गई।
सायरा के समझाने के बाद मुझ पर काफी असर हुआ था और मैंने सोच लिया था कि मैं चुची, चूत और गांड के हर दर्द को हिम्मत से सहने की कोशिश करूँगी। सायरा ने मेरी गांड के अंदर अपनी उंगली गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया। वो इस तरह उंगली घुमा रही थी कि मुझे ज़्यादा दर्द का अहसास नहीं हो रहा था।
उंगली के पहले मोड़ तक उसकी उंगली मेरी गांड के अंदर घुसी हुई थी। दूसरे हाथ की उंगली की रगड़ मेरी चूत की बोटी पर उसने इतनी तेज कर दी थी कि गांड के बारे में मुझे सोचने का वक्त ही नहीं मिल रहा था। वो मेरी गांड के अंदर उंगली अंदर-बाहर करने लगी। लगभग 2 इंच तक वो अपनी उंगली अंदर डालती.
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फिर थोड़ी देर उसे गोल-गोल घुमाती और फिर धीरे से बाहर निकाल लेती थी। थोड़ी देर में उसने उंगली अंदर-बाहर करने की स्पीड बढ़ा दी। मैंने आँखें बंद करके चूतड़ सिकोड़ ली। सायरा बोली, “आपा, गांड सिकोड़ो नहीं। एकदम ढीली रखो। पूरी तरह रिलैक्स करो।” मैंने कहा, “ठीक है।” और अपनी गांड को ढीला छोड़ दिया। उसकी उंगली अब आसानी से अंदर-बाहर आ जा रही थी। मैं बहुत खुश थी कि आज मैंने अपने मन का डर निकालकर एक नई चीज़ सीखी। तभी मुझे लगा कि मेरी टट्टी छूटने वाली है।
मैंने कहा, “सायरा, थोड़ी देर और करोगी तो मेरी टट्टी निकल जाएगी।” वो उंगली निकालते हुए बोली, “आज बस इतना ही। दो दिन में देखना मैं तुम्हारी गांड को कितना तैयार कर दूँगी।” उसके बाद उसने दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं और उसकी रगड़ाई बहुत तेज कर दी। थोड़ी देर में ही मेरी चूत झड़ने लगी और मैं ऐसा महसूस करने लगी जैसे मानो जन्नत में पहुँच गई हूँ। तो फ्रेंड्स, ये मेरा अपनी गांड खुलवाने का पहला तजुर्बा था। अगली स्टोरी में मैं आपको बताऊँगी कि कैसे मैंने लंड भी अपनी गांड में लेना सीख लिया।
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