Didi Bur Chudai Story
दीदी को मैं शादी के करीब पाँच साल बाद मिला क्योंकि पापा का ट्रांसफर हो गया था, तो हम बाहर चले गए थे। हुआ यूँ कि मैं पढ़ने के लिए मौसी के यहाँ आया। ग्रेजुएशन का सेकंड ईयर था। पता चला कि जीजा जी का ट्रांसफर हो गया है, पोस्टिंग लखनऊ हो गई है। मौसी तो बेचैनी से इंतज़ार कर रही थीं। Didi Bur Chudai Story
आखिर दीदी वापस आईं। देखता क्या हूँ कि जिस प्रिया को मैंने चोदा-खाया था, अब वो माशा अल्लाह हो चुकी थी। रंग में निखार आ चुका था और बदन मस्त, गुदगुदा जिस्म, बड़े-बड़े चुचियाँ जो ब्रा में टाइट फिट थीं, मस्त फूली हुई गांड। जब दीदी चली तो पीछे देखता ही रह गया। क्या गांड हिलती थी!
खैर, दीदी के दो बच्चे भी थे — एक भांजा जो 4 साल का था और दूसरा जो 6 महीने का था, जो दूध मुँहा था। दीदी घर आईं, मौसी तो मारे खुशी के फूली न समा रही थीं। खैर, मैं अपने कमरे में गया जो नीचे था। वहाँ जाकर पढ़ने लगा। फिर बाहर चला गया। दीदी मौसी के पास थीं। शाम को जब कॉलेज से लौटा तो देखा दीदी का सारा सामान मेरे ही कमरे में रख दिया। मौसी बोलीं, “प्रिया, जरा इसे दूध पिला।” तभी छोटा भांजा रोने लगा।
मैंने मौसी से पूछा, “मौसी, दीदी का सामान मेरे कमरे में क्यों है?”
मौसी बोलीं, “वो यहीं रहने दे, नीचे बाथरूम है, नहाने-धोने और तैयार होने की आसानी होगी।”
मैंने कहा, “ठीक है मौसी।”
आखिर उनका ही घर था। शाम को मैं ऊपर छत पर लेटकर पढ़ता था और लैपटॉप पर नोट्स तैयार करता था। मैं छत पर गया तो मौसी बोलीं, “रिंकू, चाय तो ले ले।”
मैंने कहा, “आता हूँ मौसी।”
तभी दीदी बोलीं, “रहने दो, मैं दे देती हूँ।”
दीदी अपनी और मेरी दोनों की चाय लेकर आईं। और मेरे को लैपटॉप पर काम करते देखती रहीं। मैंने चाय उठाकर पीना शुरू कर दिया। तभी दीदी मेरे सिर पर हाथ फेरने लगीं। बोलीं, “क्या बात है रिंकू, क्या मुझे नहीं देखोगे और बात भी नहीं करोगे?”
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मैंने कहा, “नहीं, ऐसी बात नहीं है दीदी, बस पढ़ाई कर रहा था।”
दीदी बोलीं, “अब तो तू बड़ा हो गया है, अपनी दीदी को भूला तो नहीं?”
मैंने कहा, “नहीं भाई, ऐसा हो सकता है।”
दीदी कुछ बोलतीं तभी मौसी की आवाज आई, “बाबू रो रहा है, जरा इसे दूध पिला दो प्रिया।”
दीदी को मौसेरा भाई बाबू पकड़ गया और दीदी उसको लेकर मेरे पास आकर बैठ गईं। दीदी ने अपना ब्लाउज अपनी एक चुची से हटाया और मुझे दिखाकर अपने बेटे के मुँह में निप्पल देते हुए बोलीं, “ले बेटा, पी इसका दूध, नहीं तो तेरा मामा सारा पी जाएगा। इसको बहुत पसंद है तेरी माँ का दूध।”
मैं शर्मा गया।
दीदी बोलीं, “अबे शर्मा क्यों रहा है?” मेरा हाथ पकड़कर अपनी चुची पर रखकर बोलीं, “सब तेरा ही तो है रिंकू। तूने ही तो पहली बार अपनी दीदी की चूत फाड़ी थी और तुझे मेरी चुचियाँ कितनी पसंद थीं। रात-दिन चूसने और चोदने की बात करने वाला शर्मा रहा है।”
मैंने कहा, “दीदी, तब की बात और थी। अब आप शादीशुदा हो, दो बच्चे हैं।”
दीदी बोलीं, “हाँ दो बच्चे हैं तो क्या हुआ, हूँ तो मैं अब भी जवान। क्या मेरी चूत में खुजली नहीं होती, क्या मेरी इच्छा नहीं होती चुदने के लिए? तेरे जीजा महीने में चार बार ही चोदते हैं, संडे-संडे। बस मैंने जब सुना तू यहाँ है, तब ही मैंने सोच लिया था कि जिसको मैंने जवानी सौंपी थी, उसको अब अपना सारा बदन दे दूँगी।”
मैंने कहा, “दीदी हटो, मुझे नीचे जाना है।”
मैंने अभी भी चुची से हाथ नहीं हटाया था। दीदी मुस्कुराकर बोलीं, “रोका किसने है? मेरी चुची तूने ही तो पकड़ रखी है।”
मैं हड़बड़ा गया और तुरंत उठकर भागा। अपना लैपटॉप नीचे ले आया और बंद करके रख दिया। और बाहर घूमने चला गया। गर्मियाँ तो थीं ही। मैं रात को 9:30 बजे लौटा तो मौसी बड़बड़ाने लगीं, “इतनी रात तक बाहर क्यों घूमता है, जल्दी घर आया करो।”
तो दीदी मौसी को समझाने लगीं, “इतना मत टोक, अब बड़ा हो गया है, भला-बुरा खुद समझता है।”
मैं खाना खाने के लिए बैठा तो दीदी खाना परोसने लगीं। उसने अपना भी परोसा।
मैंने पूछा, “आपने नहीं खाया?”
दीदी आँख मारते हुए धीमी आवाज में बोलीं, “जिसके प्यार ने खाना न खाया हो, वो कैसे खा सकती है?”
मैं शर्मा गया और खाना खाने लगा। मौसी छत पर जाकर सो गईं। खाना खाकर मैं नीचे आ गया और पढ़ने लगा। दीदी नहाने चली गईं और नहाकर सीधे सिर्फ पेटीकोट चढ़ाकर बाहर आईं। और कमरे में आकर पेटीकोट उतार दिया और मेरी तरफ पीठ कर शीशे में खुद को देखने लगीं। मैं घबरा कर बाहर भागने लगा तो दीदी ने मुझे बाहों में जकड़ लिया और बोलीं,
“डरो नहीं मेरी जान, सब सो चुके हैं, यहाँ कोई नहीं आएगा। देख तुम्हारी जाने-मन, तुम्हारी जानू, प्रिया तुम्हारे पास है, जिसको तुम हर वक्त नंगी करते रहते थे। इन चुचियों को देखो जिनको हमेशा काटते-खाते और चूसते रहते थे। इन चूतड़ों को देखो जिनको हमेशा मसलते थे और तुम्हारे लंड की प्यासी ये बुर जिसको तुम खा जाते थे और बुरी तरह से रौंदते थे। रिंकू, मैं तुम्हारी हूँ, सिर्फ तुम्हारी। चोद डालो मुझे, अपनी प्यारी प्रिया दीदी को चोद डालो।”
मैंने कहा, “नहीं दीदी, हटो, छोड़ दो मुझे, मुझे सोने जाना है।”
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तभी दीदी ने मेरी नेकर में हाथ डाल दिया और मेरे खड़े हो चुके लंड को पकड़कर कसकर दबाकर बोलीं, “देखो तेरा लौड़ा भी मुझे चोदना चाहता है, कैसे फुफकार रहा है, कितना गरम है, मस्त हो चुका है। इसकी गर्मी शांत कर दो, डाल दो इसे मेरी बुर में, मेरी गर्मी में अपनी गर्मी मिला दो। चोद डालो मुझे, चोद दो मुझे, चोद दो अपनी दीदी को।”
दीदी ने मेरी नेकर और अंडरवियर नीचे कर दिया और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं। मेरे से रहा नहीं गया और मैंने उसके मुँह से लंड बाहर किया और उसको पलंग पर लिटा दिया और अपना लौड़ा सीधे उसकी बुर में डालकर धक्के मारने लगा। मैं एकदम बेरहम हो गया। मेरे धक्कों की रफ्तार तेज थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी गरम भी नहीं थी और मेरे से चुदने की तैयारी में नहीं थी, पर मैं चोदता रहा। दीदी दर्द से छटपटा उठी। तो मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चोदता रहा, जब तक मैं थक नहीं गया। मेरा लंड तीन बार झड़ा, दीदी की बुर पाँच बार झड़ चुकी थी।
दीदी पस्त हो चुकी थी, उसकी गर्मी खत्म थी, चेहरे पर दर्द था। मैंने लंड निकाला और उसके मुँह में दिया और बोला, “साफ करो इसे।” फिर पाँच मिनट बाद मैं सोने चला गया। सुबह कब हुई पता नहीं चला। देखा दीदी मेरी तरफ नहीं देख रही है।
मैंने अपना काम करता रहा। दो दिन बीत गए। एक दिन कॉलेज से लौटा तो देखा मेरा लैपटॉप गायब है। पूछा तो पता चला कि दीदी छत पर ले गई हैं। मैं सीधे ऊपर चढ़ा, बिना आवाज के। देखा दीदी मेरे लैपटॉप पर मेरी सेव की हुई बीएफ देख रही थीं।
मैंने कहा, “दीदी, ये क्या कर रही हो?”
दीदी जल्दी से पलटी और बोलीं, “कुछ नहीं पगले, तेरी खुराफात देख रही हूँ। तू ये सब भी देखता है? फोटो भी हैं ढेर सारी। क्या करता है फिर, जब गर्मी चढ़ती है तो?”
मैं शर्मा गया और कुछ नहीं बोला और नीचे चला गया। थोड़ी देर बाद मैं वापस आया। देखा दीदी अभी भी लगी हुई थी। अब जो पिक्चर थी वो लेस्बियन थी जिसमें 6 लड़कियाँ आपस में खेल रही थीं। दीदी बार-बार अपनी बुर खुजा रही थीं।
मैंने कहा, “दीदी बस करो, इतनी पिक्चर मत देखो।”
दीदी बोलीं, “उस दिन जो चोदा है ना तूने, मेरी तो बुर ही फट गई है, दर्द जा ही नहीं रहा। इस पिक्चर को देखकर थोड़ा दिल को सुकून मिला है।”
मैंने कहा, “सॉरी दीदी, मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। सॉरी उस दिन के लिए।”
दीदी बोलीं, “कोई बात नहीं, पर मजा बहुत आया था। ऐसा चोदा तूने मुझे कि मेरी कई सालों की प्यास खुल गई। चल मुझे चोद दो।”
मैंने कहा, “फिर वही दीदी, अब नहीं, बस अब नहीं दीदी, ये गलत है। इसको आगे मत खींचो।”
दीदी बोलीं, “एक गलती हो या दो गलती, अगर गलत हो चुके हैं तो भूल जाओ गलत है, अब सही यही है।”
तभी बाबू रोने लगा। दीदी ने अपनी चुची खोल दी और निप्पल उसके मुँह में लगा दिया और मेरी तरफ देखने लगीं और बोलीं, “देख भांजा तेरी दीदी का वो दूध पी रहा है जो तू पीना चाहता था।”
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मैंने कहा, “ये मेरी गलती थी।”
दीदी बोलीं, “फिर वही।”
तभी लाइट चली गई। मुझे लगा दीदी ने मेरे ऊपर धावा बोल दिया है और वो मेरे होंठों से जुड़ गई थीं। मेरे होंठों को चूसने जा रही थीं। मैं बैठा रहा। दीदी का एक हाथ मेरे हाथ को लेकर चुची पर गया और दबवाने लगीं। और दूसरा हाथ मेरे लंड पर गया और उसको दबाने लगीं। तभी उन्होंने मेरा हाथ छोड़ दिया और मुझे गोद में लिटा कर मेरे मुँह में दूसरी वाली चुची ठूँस दी और बोलीं, “चल चूस जल्दी से दीदी का दूध और मजा ले, मुझे भी लेने दे ना।”
मैं दूध पीने लगा।
थोड़ी देर बाद दीदी पूछीं, “कैसा लगा मेरा दूध?”
मैंने कहा, “दीदी आई लव यू टू, मेरी जान-ए-जान है। मैं तुम्हारे पूरे बदन का रस पी चुका हूँ, ये दूध क्या है? पर मेरी जान बहुत मीठा है, ऐसा लगता है जैसे शहद हो।”
और मैंने चपर-चपर चूसना शुरू कर दिया। बार-बार चुचियों को चाट भी रहा था। दीदी ने बाबू को लिटा दिया। मैंने दूसरी चुची को सहलना शुरू कर दिया। तभी मैंने उनकी टाँगों को फैला दिया और अपना हाथ पेटीकोट में डाल दिया। दीदी रोकती रहीं पर मैंने कहा, “रुक नहीं प्रिया, छोड़ दो मुझे, आज मैं अपनी जान-ए-मन को नहीं छोड़ सकता।”
और मैंने बुर को सहला दिया। दीदी सिसकार उठीं और बुदबुदाईं, “कुछ करो मेरे यार, कुछ करो।” मैंने बुर में अपनी दो उँगलियाँ कर दीं और अंदर-बाहर करके चोदने लगा। दीदी बोलीं, “और कस-कस करो, मेरी बुर झड़ रही है।” मेरे हाथ में पानी ही पानी था। मैंने हाथ बाहर किया और हाथ चाटने लगा। दीदी भी चाटने लगीं। मैं फिर डालने जा रहा था कि लाइट आ गई। दीदी सही ढंग से बैठ गईं और अपनी चुचियाँ ढक लीं। मैं नीचे उतरा।
तब ही मौसी बोलीं, “प्रिया, मैं बुआ के यहाँ जा रही हूँ, कल सुबह आऊँगी।”
और दीदी नीचे आईं। मौसी छोटी दीदी और भाई को लेकर साथ में बड़े भांजे को ले गईं। मैं घर प्रिया दीदी के साथ फिर अकेला था। दीदी पलटीं और मैं झटके से उनको पकड़कर आ गया। दीदी को गोद में उठाकर बोला, “मेरी जान प्रिया, मैं तुझे चोद डालूँगा, तेरी बुर का भोसड़ा बना डालूँगा, तेरी गांड फाड़ डालूँगा।”
दीदी बोलीं, “मेरे राजा, रोका किसने है? चोद डालो मुझे, मेरी गांड फाड़ डालो, चिथड़े कर डालो मेरे बदन के, उफ भी न करूँगी। बस जिंदगी भर चोदते रहना अपनी दीदी को, कभी छोड़ोगे तो नहीं?”
मैंने कहा, “नहीं मेरी जान, इतनी मुश्किल से मक्खन-मलाई वापस मिली है, चाटूँगा, फेंकूँगा नहीं।”
दीदी मुस्कुराईं और हँसते हुए बोलीं, “तो खाओ ना, देर क्यों कर रहा है?”
मैं टूट पड़ा दीदी पर। दीदी की साड़ी उतारकर फेंक दी और बड़ी बेमुरौवती से उनकी चुचियों को मसलने लगा। दीदी “आह्ह्ह्ह… ऊऊऊ… मत करो, लगता है… और कस के दबाओ… ओह्ह्ह… हाई मर गई रे…” करने लगीं। उसका दूध निकलकर ब्लाउज को भिगो चुका था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैं ब्लाउज के ऊपर से ही चूसना शुरू कर दिया। उसका ब्लाउज पूरा भीग रहा था। गीला ब्लाउज उनकी गरम चुचियों को ठंडक दे रहा था। दीदी मस्ती में बोले जा रही थीं, “और कस कर चूसो… खा जाओ मेरी चुचियाँ… बहुत ज्यादा निकलता है आज… खा लो मेरी चुचियाँ… काट डालो अपने दाँतों से…
टुकड़े-टुकड़े कर दो मेरे बदन के… प्यार भर दो अपना सारा… इतने सालों से जो दबा है निगल जाओ मुझे… मेरे जान… चोदो और मेरी बुर फाड़ डालो… आज इसकी सारी खुजली मिटा दो जो पाँच साल से मच रही है… और कसके मेरे…… मैं मरी जा रही हूँ…
और कस कर फाड़ डालो मेरी बुर को… मेरे बदन को अपने प्यार से भिगो डालो मेरे राजा…… आज चूस डालो सारा रस अपनी प्रिया का… फिर से वही रंडी बना डालो जो हर जगह चुदती थी… माँ चोद डालो मेरी… हाई… लगा रहा है… हाई मैं… जालिम कहाँ उँगली कर दी… हाई राजा जी कुछ करो इस जवानी का…”
मैं सब सुन रहा था। मैंने दीदी के ब्लाउज के बटन खोले और ब्लाउज उतारकर फेंक दिया। दीदी की चुचियों पर लगा दूध चाटने लगा। पूरी चुचियाँ चाट रहा था। “ऐसे ना रानी, कैसा लग रहा है……”
प्रिया दीदी बोलीं, “हाई राजा, मेरी बुर में ज्वालामुखी बैठ गया है, इसको बुझा डालो।”
मैंने कहा, “आज ऐसा बुझाऊँगा कि याद रखोगी।” मैंने उसके होंठों पर कब्जा किया और चूसने लगा। कभी-कभी चबा भी देता तो दीदी कसमसा जाती थीं और तड़प उठती थीं। 15 मिनट लगातार चूसा, हटा ही नहीं। दीदी की साँसें उखड़ रही थीं पर साली हटी नहीं और कसकर चिपक गईं।
तभी दीदी ने मेरी नेकर उतार दी अपनी टाँगों से और फिर अंडरवियर और मेरे तने हुए लौड़े को पकड़ सहलाने लगीं। मैं तड़प खा रहा था। मैंने फिर उसके होंठों को जकड़ लिया और अपना लंड उसकी बुर पर रख दिया और लंड से बुर सहलाने लगा। दीदी मचलने लगीं क्योंकि मेरा लंड गरम हो चुका था और बुर की खाल को जला रहा था।
मैंने बुर को रगड़ना शुरू कर दिया। दीदी तड़प उठीं पर मेरे से चिपकी रहीं। मैं उसकी बुर रगड़ता रहा। तभी मैंने उसका मुँह छोड़ चेहरे पर चूमना-चाटना शुरू कर दिया। दीदी मचलती रही, हिल रही थी पर मैं बुर को रगड़ता ही रहा। फिर मैं टाँगों को चाटने लगा।
तभी मैंने उसको पलट दिया और पीठ व चूतड़ चूमने लगा। दीदी बौखला गईं। मैं दीदी की पीठ पर पेट के बल लेटा और लंड दीदी की बुर पर पासा रगड़ने लगा। दीदी नीचे दबी थी। मैंने नीचे हाथ डाल चुची दबाने लगा। दीदी ने मुँह मेरी तरफ किया और होंठ मेरे होंठों से लगा दिए। मेरा लंड दीदी के पानी से भींग चुका था। मैंने रहे हो मेरी आव देखा ना तो और दीदी की गांड में उँगली कर दी।
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दीदी उछल पड़ीं और बोलीं, “हाई राजा, क्या-क्या कर रहे हो? पहले मेरी बुर तो फाड़ो, फिर गांड की माया चोदो।” पर मैं दीदी के होंठ चूमकर बोला, “दीदी पहले उल्टा, फिर सीधा, फिर उल्टा, तभी तुमको मजा आएगा और तुम्हारी प्यास बुझेगी। फिर रात भर सोना नहीं है, आज तो तुमको चुदते रहना है। हर एंगल में चोदूँगा क्योंकि अब तुम्हारा राजा खिलाड़ी है चुदाई का।”
दीदी ने मुझे चूम लिया और बोलीं, “जिस्म, जान, जवानी सब तुम्हारी है राजा जी। जैसे चाहे लूटो, खेलो और रौंदो। मेरा क्या, मैं सब सहूँगी आपके प्यार में।” और दीदी ने मेरे माथे पर चूम लिया।
मैं दीदी की गांड में उँगली करता रहा। गांड ढीली पड़ गई। थोड़ी देर दीदी आह-आह करती रहीं। फिर जब गांड का छेद ढीला हुआ, मैंने दीदी से कहा, “मैं तुम्हारी गांड फाड़ने जा रहा हूँ।”
दीदी बोलीं, “मुझे कसकर पकड़ लो, दर्द हो तो भागूँगी पर रुकना नहीं। मैं चाहे जो कहूँ, आज मेरी गांड का खून खींचकर डाल दो।”
दीदी का आदेश पाकर मैंने दीदी की दोनों चुचियों को कसकर क्रॉस में पकड़ लिया और धक्का मारता रहा। दीदी से कहा, “दीदी मेरा लौड़ा अपनी गांड के छेद पर रखो।” दीदी ने कहा, “जो हुक्म मेरे आका।” और मेरा लौड़े के गीले सुपाड़े को गांड के छेद पर रखकर बोलीं, “हमला।”
और मैंने धक्का मार दिया। मेरा 1 इंच लंड अंदर गया। दीदी तड़पने लगीं, चीखने लगीं पर मैंने कसकर चुचियाँ दबाईं। दूध से मेरे हाथ भर गए। दीदी रोने लगीं और बोलने लगीं, “चोद दो मुझे… हाई रे… दर्द हो रहा है… क्या घुसा दिया साले… मेरी गांड में… निकाल साले कुत्ते कमीने हरामी…… निकाल दो ना प्लीज।”
पर मैं अनसुना कर दूसरा धक्का मारा और लंड 3 इंच तक घुसा। दीदी कसकर मचलने लगीं। गालियाँ देती जा रही थीं, रो रही थीं। मैं उसकी चुचियाँ दबाए जा रहा था। दबाव बढ़ चुका था। मैंने तीसरा धक्का मारा और लौड़ा पूरा 7 इंच अंदर था। दीदी उछाल रही थीं, चिल्ला रही थीं, “साले निकाल अपना लौड़ा… निकाल ले बे… हाई मैं मर गई रे… क्या कर डाला तूने… निकाल साले कुत्ते…… निकाल हरामी।”
पर मैंने छोड़ा नहीं। और फिर जरा रुककर हिला और फिर धीरे-धीरे 4-5 धक्के मारे और फिर पूरी तेजी से धक्के मारने लगा। दीदी गालियाँ देती रहीं, मैं मारता रहा। फिर 10 मिनट में दर्द बंद हो गया। मैं ऊपर से धक्का मारता, दीदी नीचे से जवाबी धक्का देती। फिर तो मजा लेने लगीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं, “हाई मैं मर गई मेरे राजा जी…… ये कहाँ का मजा दे रहे हो… आज मैं खिल गई… मेरे राजा… और कस कर चोदो… फाड़ डालो मेरी गांड… हाई मजा आ रहा है… और तेज…… और तेज मेरे राजा।”
दीदी मुझे चूमने लगीं और उसके चुंबन बढ़ते जा रहे थे। मेरी तेजी भी बढ़ने लगी। मैंने दीदी की चुचियाँ छोड़ी नहीं थीं। दीदी मस्त हो चुकी थीं। एकदम टाइट गांड में मेरा लंड जा रहा था। फच-फच की आवाज आ रही थी। कभी धीमी होती तो कभी तेज होती। दीदी मेरे हाथों पर अपने हाथ रखे थीं।
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तभी मैं दीदी की गांड में गांड डाले खड़ा हो गया और दीदी को वैसी ही चुचियाँ पकड़े ड्रॉइंग रूम में ले गया और दीदी के दोनों पैर टेबल पर कर हवा में उसकी गांड मारने लगा… थोड़ी देर बाद उसके पैर जमीन पर टिका खड़ा करके गांड मारता रहा। थोड़ी देर में मैंने दीदी को कसकर पकड़ लिया और अकड़ते हुए बोला, “दीदी मेरा पानी निकल रहा है, तुम्हारी गांड में फेंक रहा हूँ।”
दीदी बोलीं, “पूछते क्या हो, निकाल डालो सारा पानी, मुझे सब कबूल है… हाई मर गई रे।”
और तभी मेरा पानी छूट गया। 30 मिनट की गांड मराई ने दीदी की गांड में हल्की सूजन आ गई थी। दीदी फिर भी मस्त मेरे को चूमती हुई बोलीं, “हाई राजा जी, आज तो मस्त हो गई तुम्हारी चुदाई से। क्या गांड मारी है! पाँच साल के बाद फिर गांड फटी है। मजा आ गया। आज से हर रात मेरी गांड मारोगे, बोलो हाँ।”
मैंने कहा, “हाँ मेरी दीदी जान।” दीदी मेरे होंठों से होंठ चिपका कर लेट गईं। मैं उसकी गांड सहला रहा था। दीदी मेरा लंड साफ करके धोकर बोलीं, “लो राजा जी, अब चोदो मेरी बुर।”
जब तक दीदी कुछ आगे कहती, मैंने उसकी बुर पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा। दीदी “उईई… म्म्मा… मैं गई… मेरी माँ… मैं मर जाऊँगी…… उईई… और चूसो राजा जी और चूसो।” मैंने दीदी के मुँह की तरफ अपना लंड दे दिया और 69 पोजीशन में हो गया। दीदी ने झट से लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। दीदी लगातार चूस रही थीं। कभी तो पूरा अंदर ले लेतीं, कभी मेरी गोलियाँ चूसतीं। दीदी का पानी लगातार छूट रहा था।
मैंने कहा, “दीदी मेरा पानी छूट रहा है।”
दीदी बोलीं, “छोड़ दो, मैं पी लूँगी।” तभी मैंने अपना पानी छोड़ दिया। दीदी पूरा पी गईं।
मैंने कहा, “दीदी अब भूख लगी है, थोड़ा दूध पिला दो, ताकत आ जाएगी।”
और फिर दीदी ने कहा, “आजा मेरा मुन्ना राजा बेटा, आजा पी ले दीदी का सारा दूध।” और अपना निप्पल दिखाने लगीं और बोलीं, “कसकर चबाकर चूसोगे तो दूध मीठा निकलेगा राजा।”
मैंने कसकर काट लिया।
दीदी चिल्ला पड़ीं, “ऐसे काटेगा क्या?”
मैंने कहा, “मेरी दीदी हो, काटूँ या चबा जाऊँ, मेरी मर्जी।”
फिर दीदी हँस दीं और मैं चबा-चबाकर, काट-काटकर दूध पीने लगा। दीदी कभी खिलखिलाती, कभी तड़पती, कभी मचलती। 15 मिनट में दोनों चुचियों का सारा दूध पी गया। आखिरी घूँट मैंने दीदी के मुँह में डाल दिया। फिर दीदी ने मेरे मुँह में वापस कर दिया।
मैं ताजा दम हो चुका था। मैंने दीदी की बुर को चूमा, फिर चाटा और दीदी को कसकर अपने सीने से जकड़ लिया और दीदी की बुर पर लंड रख दिया। दीदी बोलीं, “रुको।” तभी मैंने धक्का मार दिया और लंड फच से अंदर। दीदी का मुँह खुला रह गया।
मैंने अपना मुँह उसके मुँह पर रख दिया और लपककर धक्के मारने लगा। दीदी भी बेतहाशा धक्के मारती रहीं। उसके मुँह से गू-गू की आवाज निकल रही थी। वो मस्त हो चुकी थीं। कमर हिला कर मटका कर चुदाई में हर धक्के का साथ दे रही थीं। दीदी को मजा आ रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैंने जब उसके मुँह को छोड़ा तो दीदी बोलीं, “मजा आ रहा है मेरे राजा जी… कसकर चोदो साली को… आज मत छोड़ना… इसकी सारी खुजली मिटा दो… मेरी बुर की आग बुझा दो…… हाये…… और चोदिए अपनी रंडी दीदी को………… कसकर चोदिए…… मेरी बुर की आग ठंडी कर दो राजा…… और राजा… और राजा…………
कसकर………… और तेज…… मजा आ रहा है………… तेज…… और…… तेज राजा………… मेरे रिंकू………… मेरी जान… और तेज…… माार्र ग्गााायी…… हाई मेरे यार………… क्या चोदते हो… और तेज… और धक्का…… और तेज करो… पूरा अंदर तक… फाड़ डालो… चोद डालो मेरी…… बहन चोद दो मेरी…… और तेज… चोदते रहो… चोदते रहो…”
45 मिनट की चुदाई हो चुकी थी। मैं दो बार झड़ चुका था, फिर भी लगा था। दीदी 5 बार झड़ चुकी थीं। उसका जोश ठंडा पड़ रहा था। मैंने आ देखा ना ताव, चोदते हुए उसकी गांड में उँगली कर दी। दीदी चिल्लाने लगीं, “ये सही नहीं है, एक की मारो।” मैंने कहा, “मजा लो मेरी जान।” दीदी का शरीर तन गया था। दीदी ऐंठती जा रही थीं।
मैं दीदी को उठा किया और हवा में लेकर चोदने लगा। 5 मिनट के बाद लंड डाले-डाले उसको बेड पर अपने ऊपर लिटा चोदता रहा। दीदी ऊपर से आगे-पीछे होती रही। फिर मेरे लंड पर बैठ गईं और चकचकाने लगीं। थोड़ी देर में मेरे लौड़े पर कूदने लगीं।
तभी मैंने कहा, “दीदी तुम कुतिया बनो, मैं तुमको कुत्ते की तरह चोदूँगा पर लंड बाहर न निकलना।” दीदी को मैंने बाहों में कसा और दीदी पलटकर मेरे साथ डॉगी स्टाइल में आ गईं। मैं पीछे से धक्का मारता रहा। दीदी थक रही थीं। तभी मैंने दीदी की चुचियों पर चिकोटी काट ली और दीदी से कहा, “मेरी जान मजा आ रहा है।”
दीदी बोलीं, “बहुत थक गई हूँ मेरी जान, जरा रहम करो मेरी बुर पर और मेरे शरीर पर।” तभी मैंने कसकर जकड़कर अपना पानी बुर में तीसरी बार छोड़ दिया। और दीदी मुस्कुराकर बोलीं, “मजा आ गया मेरे राजा।” मैंने लंड निकाल दिया और दीदी मेरे सीने पर सिर रखकर लेट गईं। और हमारी साँसों का तूफान शांत हो चुका था।
और दोनों शांत लेटे थे। दीदी मेरे सीने पर हाथ फेर रही थीं और मैं दीदी के स्तनों से खेल रहा था। फिर हम दोनों नहाने गए और दीदी ने मेरे शरीर के हर भाग को रगड़-रगड़कर साफ करके निकाला। और मैंने दीदी को। तभी नहाते हुए मैंने अपना लंड टाइट होते देखा तो मैंने अपना लंड तुरंत दीदी की फूली गांड पर रख दिया।
दीदी बोलीं, “मारो धक्का मेरे राजा, मैं तैयार हूँ गांड मारने को।” और मैंने धक्का मारा। पहली बार में ही पूरा लंड अंदर। दीदी की आँखें निकल आईं थीं पर खुद पर काबू कर मुस्कुराकर बोलीं, “चल चोदो मेरी गांड।” मैं मारता रहा धक्का जब तक मेरा पानी नहीं छूटा।
फिर मैंने लंड बाहर किया। दीदी बोलीं, “चलो अब सो लो, नहीं तो ज्यादा थक जाओगे।”
मैंने कहा, “ठीक है दीदी, चलो सोते हैं।”
मैंने दीदी की बुर पर हाथ रखकर कहा, “दीदी मैं इसमें लंड डालकर सोना चाहता हूँ।”
दीदी बोलीं, “दीदी तेरी, बुर तेरी, जैसा मन चाहे कर। रात में सोते में चोदना है तो वो भी कर लेना।”
फिर दीदी से कहा, “पहले इसे खड़ा करो।”
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काफी देर चूसने और सहलाने के बाद खड़ा हुआ तो दीदी चूसकर बोलीं, “मैं तुम्हारे ऊपर लेट जाती हूँ।” और मेरे लौड़े को एडजस्ट करते हुए अपने बुर में लेकर दर्द से कराहते हुए लेट गईं। तभी मैंने उसको कसकर पकड़ा और धक्का मारा तो बोलीं, “आराम से चोदो अपनी दीदी की। और चोदना है तो चोदो, मैं तैयार हूँ चुदने को।”
मैंने हँसते हुए कहा, “मेरी रंडी दीदी, तुमको मैं जीवन भर चोदूँगा। अभी तो तुमको मेरी और रंडियों के साथ चुदना है। जरा रुको तो सही।”
दीदी मुस्कुराकर बोलीं, “कल बता देना, जिसके संग तुम्हारे साथ चुदना है। मैं हमेशा तैयार हूँ। देखूँ तो कौन-कौन सी कुतियाँ पाल रखी हैं मेरे भाई ने।”
और फिर मैंने उसके होंठों से होंठ लगा दिए और चूसते हुए कब दोनों को नींद आ गई पता ही नहीं चला। सुबह जब मैं उठा तो देखा दीदी सो रही है और मेरा लंड अभी भी बुर में था। यानी हम इतना थक गए थे कि हिले ही नहीं। मैंने दीदी को जगाया और दीदी के होंठों को चूमा। दीदी की प्यारी स्माइल से मैंने दीदी को गुड मॉर्निंग कहा। दीदी ने मेरा लंड मेरी आँखों में देखते हुए हटाया। और नंगे ही गांड मटकाते हुए चली गईं। अब ये बुलबुल मेरी है, मेरे लंड पर बैठने वाली।
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